नजफगढ़ में जहर खाने वाली मां-बेटियों को एक घंटे तक एंबुलेंस नहीं मिली। निजी वाहन से हैलट पहुंचने में हुई ढाई घंटे की देरी जानलेवा साबित हुई। परिजनों ने डीसीपी से शिकायत की। चौकी इंचार्ज ने निजी खर्च और वाहन से बच्चियों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे।
इसे स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही कहें या फिर बदइंतजामी। ग्रामीण क्षेत्र में 10 मिनट में पहुंचने का दंभ भरने वाली सरकारी एंबुलेंस का दावा महाराजपुर में एक बार फिर झूठा साबित हुआ। नजफगढ़ गांव में जहरीला पदार्थ खाने से अचेत हुईं चांदनी और उसकी बेटी पायल और ब्यूटी को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों के बार-बार फोन करने पर भी एंबुलेंस नहीं पहुंची।
उन्हें निजी वाहन से स्वास्थ्य केंद्र से हैलट तक पहुंचाने में करीब ढाई घंटे का समय बर्बाद हो गया। तब तक तीनों की सांसे थम गईं। चांदनी के भाइयों का आरोप था कि अगर समय से अस्पताल पहुंच जाते, तो शायद तीनों जिंदा होते। इससे पहले भी 23 अप्रैल को छतमरा चौराहे पर गश खाकर गिरे मजदूर को 45 मिनट तक एंबुलेंस नहीं मिली थी। इससे उसकी जान चली गई थी।
हालत बिगड़ने पर कई बार फोन किया गया
नजफगढ़ निवासी चांदनी और उसकी बेटियों पायल और ब्यूटी की मौत हो गई। पड़ोस में रहने वाले भाई धर्मेंद्र, जितेंद्र और प्रताप का कहना था कि उन लोगों को करीब 7.30 बजे जानकारी हुई, तो एंबुलेंस बुलाने के लिए 108 डायल किया। आरोप है कि शुरू में फोन उठने पर लोकेशन आदि पूछा गया, लेकिन गाड़ी नहीं आई। इसके बाद बहन की हालत बिगड़ने पर कई बार फोन किया गया।

नाजुक हालत देखते हुए हैलट रेफर कर दिया
लेकिन एक घंटे बाद तक गाड़ी नहीं आ सकी। इस पर उन लोगों ने गांव के एक युवक की कार से आठ किमी दूर सरसौल स्थित सीएचसी पहुंचाया। वहां डॉक्टर ने नाजुक हालत देखते हुए हैलट रेफर कर दिया। भाइयों का आरोप है कि बहन और भांजियों को जल्दी अस्पताल पहुंचाने के लिए डॉक्टर से मिनन्त की। आरोप है कि इस पर डॉक्टर ने सीएचसी में खड़ी एंबुलेंस के चालक को फोन किया, लेकिन कोई नही आया।
समय से अगर अस्पताल पहुंच जाते, तो जान बचाई जा सकती थी
इस तरह वह लोग निजी वाहन से करीब 9.45 बजे तीनों को हैलट लेकर पहुंचे वहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। भाइयों का आरोप है कि हैलट में डॉक्टरों का कहना था कि वह लोग समय से अगर अस्पताल पहुंच जाते तो जान बचाई जा सकती थी। आरोप है कि घर से लेकर हैलट तक के बीच पहुंचने में करीब इलाज मिलने में ढाई घंटे का समय लग गया। अगर एंबुलेंस समय से आ जाती, तो तीनों की जान बचाई जा सकती थी।
थाना प्रभारी महाराजपुर से जांच के निर्देश दिए
तीनों भाइयों ने एंबुलेंस के न आने का आरोप मॉर्चुरी पहुंचे डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता से भी लगाया। इस पर उन्होंने थाना प्रभारी महाराजपुर से जांच के निर्देश दिए। इसी तरह महाराजपुर में लू के थपेड़ों के चलते बाइक से गश खाकर गिरे नरवल के मंधना निवासी मजदूर सुनील को 45 मिनट तक एंबुलेंस के न पहुंचने पर उसकी मौत हो गई थी।
चौकी इंचार्ज ने अपनी कार से पोस्टमॉर्टम भेजे शव
परिवार की आर्थिक स्थिति सही न होने की वजह से पोस्टमॉर्टम भेजे जाने वाले वाहन का परिजन इंतजाम न कर सके। इसके बाद सुनहला चौकी इंचार्ज प्रवीण कुमार ने अपनी निजी कार से दोनों बच्चियों के शव पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवाए।



