तीन साल पहले दिल्ली का जंतर-मंतर देश की कुश्ती के पीछे के खेल का अखाड़ा बना हुआ था। ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप में पदक जीत चुके पहलवान भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ सड़क पर उतरे थे। महिला पहलवानों ने उन पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।
करीब 36 दिन तक चले इस धरने ने देश की राजनीति और खेल जगत को हिला दिया था। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और अदालत के हस्तक्षेप के बाद दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। तीन साल बाद अब अदालत ने बृजभूषण को बरी कर दिया। इस दौरान सिर्फ मामला ही नहीं बदला बल्कि इससे जुड़े किरदार और पूरा माहौल भी बदल गया।
अप्रैल 2023 में पहलवानों ने जंतर-मंतर पर धरना शुरू किया था। विनेश फोगाट के साथ पहलवान साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया इसके मुख्य चेहरा थे। उनकी मांग बृजभूषण की गिरफ्तारी और कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष पद से हटाने की थी।
शुरुआत में यह आंदोलन खेल संघ में महिलाओं की सुरक्षा और कथित यौन उत्पीड़न के खिलाफ था लेकिन धीरे-धीरे यह राजनीतिक मुद्दा भी बन गया। विपक्षी दलों ने पहलवानों के समर्थन में सरकार पर निशाना साधा।
28 मई को नए संसद भवन के उद्घाटन के दौरान प्रदर्शन कर रहे पहलवानों को हिरासत में लिए जाने के बाद आंदोलन का सबसे बड़ा टकराव सामने आया। इसके बाद धरना खत्म हो गया लेकिन कानूनी लड़ाई जारी रही।
पुलिस ने बृजभूषण के खिलाफ दर्ज कीं थीं दो एफआईआर
पहलवानों की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। अदालत के हस्तक्षेप के बाद दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज कीं। इनमें एक नाबालिग पहलवान की शिकायत भी शामिल थी जिस पर पॉक्सो कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई।
जून 2023 में दिल्ली पुलिस ने छह महिला पहलवानों की शिकायतों के मामले में बृजभूषण के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। वहीं नाबालिग पहलवान के मामले में बाद में पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की, क्योंकि शिकायतकर्ता ने अपना बयान बदल दिया था।
पूनिया ने भी अपना पद्मश्री लौटाया
इस बीच कुश्ती महासंघ की सत्ता भी बदली। दिसंबर 2023 में बृजभूषण के करीबी संजय सिंह अध्यक्ष चुने गए। इसके बाद पहलवान साक्षी मलिक ने कुश्ती से संन्यास लेने का एलान कर दिया। बजरंग पूनिया ने भी अपना पद्मश्री लौटा दिया।
खेल मंत्रालय ने बाद में नवनिर्वाचित महासंघ को निलंबित कर दिया। यानी जिस व्यवस्था के खिलाफ पहलवानों ने आंदोलन शुरू किया था, उसमें बदलाव की कोशिश तो हुई लेकिन विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।
2024 में बृजभूषण की राजनीतिक स्थिति में भी बदलाव आया। भाजपा ने कैसरगंज से उनका टिकट काटकर उनके बेटे करण भूषण सिंह को उम्मीदवार बनाया। करण भूषण चुनाव जीतकर सांसद बने। दूसरी ओर आंदोलन का सबसे चर्चित चेहरा विनेश फोगाट राजनीति में आ गईं।
पेरिस ओलंपिक में 100 ग्राम अधिक वजन के कारण फाइनल से बाहर होने के बाद उन्होंने कुश्ती से संन्यास का एलान किया और कांग्रेस में शामिल हो गईं। इसके बाद हरियाणा विधानसभा चुनाव में जुलाना सीट से जीतकर विधायक बन गईं। बजरंग पूनिया भी कांग्रेस में शामिल हुए।
उधर दिल्ली की अदालत में मामले की सुनवाई चलती रही। मई 2024 में बृजभूषण के खिलाफ आरोप तय किए गए। इसके बाद शिकायतकर्ताओं और गवाहों के बयान दर्ज हुए।
बचाव पक्ष ने बयानों में विरोधाभास और घटनाओं को लेकर अलग-अलग विवरणों को अपने पक्ष में रखा। करीब तीन साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद बृजभूषण और मामले में आरोपी विनोद तोमर आरोपमुक्त हैं।
तीन साल पहले जिस आंदोलन की तस्वीर में जंतर-मंतर पर बैठे पहलवान और सामने बृजभूषण दिखाई देते थे, आज वही तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। बृजभूषण सांसद नहीं हैं, उनका बेटा संसद में है। साक्षी मलिक कुश्ती से दूर हैं। फैसला आने के बाद उन्होंने कोई बयान भी नहीं दिया। बजरंग और विनेश राजनीति में हैं।
विनेश विधायक बन चुकी हैं और जिस मामले ने देशभर में महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा और खेल संघों की कार्यप्रणाली पर बहस छेड़ दी थी, उसमें अदालत का फैसला बृजभूषण के पक्ष में आया है। हालांकि, विनेश समेत शिकायतकर्ताओं की ओर से फैसले को आगे चुनौती देने की बात कही गई है…यानी तीन साल बाद कहानी का माहौल बदल गया है लेकिन कानूनी लड़ाई अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
तीन साल में क्या-क्या हुआ
- 3 अगस्त 2026 : अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी कर दिया।
- 23 अप्रैल 2023 : महिला पहलवानों ने जंतर-मंतर पर बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी की मांग को लेकर धरना शुरू किया।
- 25 अप्रैल 2023 : सुप्रीम कोर्ट ने सात पहलवानों की याचिका पर संज्ञान लेकर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया।
- 28 अप्रैल 2023 : कनॉट प्लेस थाने में बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज हुईं।
- 4 मई 2023 : सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर दर्ज होने के बाद शिकायतकर्ता पहलवानों को सुरक्षा देने का निर्देश दिया।
- 15 जून 2023 : दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण और विनोद तोमर के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। नाबालिग पहलवान के मामले में क्लोजर रिपोर्ट भी पेश की।
- 4 जुलाई 2023 : सत्र न्यायालय ने नाबालिग पहलवान और उसके पिता से क्लोजर रिपोर्ट पर जवाब मांगा।
- 7 जुलाई 2023 : दिल्ली हाई कोर्ट ने कोर्ट मॉनिटरिंग वाली याचिका वापस लेने की अनुमति दी। इसी दिन ट्रायल कोर्ट ने आरोपपत्र पर संज्ञान लेकर दोनों आरोपियों को पेश होने का निर्देश दिया।
- 18 जुलाई 2023 : बृजभूषण और विनोद तोमर अदालत में पेश हुए, उन्हें अंतरिम जमानत मिली।
- 20 जुलाई 2023 : दोनों को नियमित जमानत मिल गई।
- 21 मई 2024 : अदालत ने बृजभूषण और विनोद तोमर के खिलाफ आरोप तय किए। एक शिकायत में साक्ष्य नहीं मिलने पर बृजभूषण को राहत मिली।
- 1 जून 2024 : मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई।
- 26 मई 2025 : नाबालिग पहलवान के मामले में क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर सुनवाई समाप्त की गई।
2 जुलाई 2026 : अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा।



