यूपी: कांग्रेस ने आखिर क्यों बदला प्रदेश अध्यक्ष, सपा-कांग्रेस गठबंधन में बाधक बन रहे थे अजय राय? जानिए कहानी

यूपी: कांग्रेस ने आखिर क्यों बदला प्रदेश अध्यक्ष, सपा-कांग्रेस गठबंधन में बाधक बन रहे थे अजय राय? जानिए कहानी

यूपी कांग्रेस ने अपना प्रदेश अध्यक्ष बदल दिया है। अब अराधना मिश्रा नई प्रदेश अध्यक्ष होंगी। इस बदलाव के अब मायने निकाले जा रहे हैं। अजय राय की विदाई को कांग्रेस और सपा के बीच बन रहे गठबंधन से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश संगठन में बदलाव के जरिये सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की है। आराधना मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष, इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष और राजेंद्र पाल गौतम को प्रदेश प्रभारी बनाए जाने के बाद पार्टी के शीर्ष संगठन में ब्राह्मण, मुस्लिम और दलित प्रतिनिधित्व का समीकरण उभरकर सामने आया है। पार्टी का यह कदम अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच अपनी पैठ बढ़ाने और यूपी में अपनी राजनीतिक दावेदारी मजबूत करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।

राजेंद्र पाल गौतम की जून में प्रदेश प्रभारी के तौर पर नियुक्ति के बाद संगठन में बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ी। अब मोना के जरिये ब्राह्मण और महिला चेहरे को आगे किया गया है, जबकि सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और अल्पसंख्यक वर्ग पर भी फोकस किया गया है। इसके अलावा देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाया गया है। इससे संगठन में पिछड़े और दलित वर्ग को भी प्रतिनिधित्व मिला है।

अब चौधरी वीरेंद्र होंगे विधानमंडल दल के नेता

प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद आराधना मिश्रा को कांग्रेस विधायक दल के नेता पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह फरेंदा से विधायक चौधरी वीरेंद्र सिंह को विधायक दल का नेता बनाया गया है। विधानसभा की मौजूदा सदस्य सूची में कांग्रेस के दो विधायक आराधना मिश्रा और वीरेंद्र चौधरी दर्ज हैं।

अजय राय ने तीन साल में मजबूत की पार्टी की जमीन

अजय राय को 17 अगस्त 2023 को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली थी। पांच बार विधायक और पूर्व मंत्री रहे राय ने विभिन्न मुद्दों पर सड़क पर उतरकर संगठन को सक्रिय रखने की कोशिश की। हालांकि वे विधानसभा चुनाव में अपनी पिंडरा सीट से हार गए। पार्टी सूत्रों के मुताबिक अब उन्हें अपनी विधानसभा में सक्रियता बढ़ाने के लिए प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी से मुक्त किया गया है।

कांग्रेस द्वारा अचानक प्रदेश अध्यक्ष बदले जाने को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग चर्चाएं हैं। हालांकि नए अध्यक्ष की घोषणा शुक्रवार को हुई, लेकिन इसकी कवायद और चर्चा दो दिन पहले से ही शुरू हो गई थी। माना जा रहा है कि बदलाव की तैयारी पहले से चल रही थी। अजय राय गठबंधन के मुद्दे पर लगातार सख्त रुख अपनाते रहे हैं, जिससे कई बार असहजता की स्थिति बनी। हाल में अखिलेश यादव की रायबरेली से पीडीए रथयात्रा के जवाब में राय ने इटावा, कन्नौज और सैफई जाने की बात कही थी। लोकसभा चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर भी वे अड़े रहे। बाद में राहुल गांधी और अखिलेश ने संयुक्त प्रेसवार्ता कर एकजुटता का संदेश दिया था।

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