सीजेपी के अभिजीत दिपके ने आज दिल्ली में ‘लहरा दो तिरंगा’ मुहिम के तहत युवाओं से बड़ी संख्या में घरों से निकलने और तिरंगा लहराने की अपील की है। दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से लोगों को दूर रहने की अपील की है। कनॉट प्लेस में निषेधाज्ञा लागू है। मुंबई पुलिस ने आजाद मैदान में सशर्त अनुमति दी है।
प्रदर्शन से पहले बढ़ाई गई सुरक्षा
नई दिल्ली में शुक्रवार को ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन से पहले कनॉट प्लेस और उसके आसपास सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। सीजेपी कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने सेंट्रल पार्क में इस प्रदर्शन का आह्वान किया है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, शुक्रवार, 16 अक्तूबर को दोपहर 3 बजे से कनॉट प्लेस के आसपास की कुछ सड़कों पर यातायात प्रभावित हो सकता है। पुलिस ने वाहन चालकों को यात्रा की पहले से योजना बनाने, अतिरिक्त समय लेकर चलने और सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।
दिपके की अपील पर अन्य शहरों में जमा होंगे समर्थक?
अभिजीत दिपके महाराष्ट्र से आते हैं। उनकी अपील पर मुंबई दिल्ली के अलावा अन्य शहरों में भी कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थक जमा हो सकते हैं। अपील शाम पांच बजे की है, ऐसे में देखना दिलचस्प रहेगा कि उनकी अपील पर कितना समर्थन जमा होता है।दिपके के आंदोलन को लेकर दिल्ली पुलिस मुस्तैद
अभिजीत दिपके के तिरंगा मार्च और चुनाव आयुक्त के खिलाफ आंदोलन को लेकर दिल्ली पुलिस मुस्तैद है। कड़े सुरक्षा बंदोबस्त के बीच कनॉट प्लेस से इतर भी कई संवेदनशील जगहों पर सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है।
कनॉट प्लेस के पास जुटेंगे सीजेपी समर्थक, दिल्ली से मुंबई तक हलचल
मुंबई पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को आज आजाद मैदान में ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली की अनुमति दी। पुलिस उपायुक्त मनीष कलवानिया ने गुरुवार को बताया कि आयोजकों ने विरोध प्रदर्शन आजाद मैदान में ही करने की घोषणा की है। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि आजाद मैदान एक विरोध स्थल है, इसलिए अनुमति मिली। CJP ने प्रेस विज्ञप्ति में इसे अपने नेताओं आशुतोष रांका और सौरभ दास के समर्थन में बताया। दास और रांका को बुधवार को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। उन्होंने जंतर मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाए थे। यह गिरफ्तारी गृह मंत्रालय द्वारा जंतर मंतर का विरोध स्थल दर्जा वापस लेने के एक दिन बाद हुई।
सीजेपी का आंदोलन कब शुरू हुआ,किन मुद्दों पर सरकार का घेराव?
देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन विगत 2 अक्तूबर को मुंबई में शुरू हुआ था। सोशल मीडिया पर सीजेपी जैसी मुहिम खड़ी करने वाले अभिजीत दिपके ने मतदाता सूचियों में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए और उनके इस्तीफे की मांग करते हुए एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया। यह अभियान 10 अक्तूबर को दिल्ली पहुंचा, जब जंतर मंतर पर इकट्ठा होने के आह्वान पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की। दिपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका को मुंबई से दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरते ही हिरासत में ले लिया गया था। इशके बाद सरकार ने कहा कि अब जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन करने की निर्धारित जगहों की सूची से हटा दिया गया है। इस फैसले का मुखर विरोध कर रही CJP ने कहा, जंतर मंतर सत्ता के गलियारों के करीब होने के कारण विरोध का प्रमुख स्थल बना हुआ है। वे इस कार्रवाई के खिलाफ हैं।
सीईसी और सरकार पर अभिजीत दिपके क्या आरोप लगा रहे हैं?
दिपके ने आरोप लगाया है कि सरकार ज्ञानेश कुमार का बचाव कर रही है। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने मतदाता सूचियों के एक दोषपूर्ण SIR और 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने की अध्यक्षता की थी। यह कुल मतदाताओं का लगभग 14 फीसदी है। दीपके ने कहा, ‘2024 में जीत का अंतर सिर्फ दो फीसदी था। 13 करोड़ से अधिक मतदाता हटा दिए गए – लगभग 14 फीसदी।’ उन्होंने सवाल किया, “जहां दो फीसदी चुनाव का फैसला कर रहा है, वहां आप 13 करोड़ वोट हटा रहे हैं। अगर यह सेटिंग नहीं है तो क्या है?” दिपके ने X पर आरोप लगाया कि उनका पीछा किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘जिस जगह मैं रुका हूं, उसे चारों तरफ से अंडरकवर पुलिसकर्मियों ने घेर लिया है। ये लोग मुझ पर लगातार नजर रख रहे हैं। सफेद स्कॉर्पियो भी हर जगह मेरा पीछा कर रही है।’



