गुरुवार को हुई बसपा की रैली में एक फिर मायावती ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। इस रैली के बाद राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा है कि ज्यादा नुकसान किस पार्टी का होगा।
बसपा प्रमुख मायावती की एकला चलो की रणनीति से किसे फायदा या नुकसान होगा? राजनीतिक हलकों में यह सवाल गर्म है। विश्लेषक मानते हैं कि यह नफा-नुकसान टिकट पाने वाले चेहरों पर भी निर्भर करेगा। मायावती की सोशल इंजीनियरिंग से दोनों खेमों को नुकसान होने से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है।
लखनऊ विवि में राजनीति शास्त्र विभाग के प्रो. संजय गुप्ता कहते हैं कि मायावती का आधार वोट अभी भी उनके साथ खड़ा है। सीटों के लिहाज से बसपा की ताकत कम या ज्यादा होना उसके लिए मायने नहीं रखता। मायावती ने अगले विधानसभा चुनाव में जहां सामान्य जाति का प्रत्याशी उतारा, वहां एनडीए गठबंधन को नुकसान हो सकता है। इसी तरह से जहां मुस्लिम या पिछड़ा वर्ग का प्रत्याशी उतारा, वहां इंडिया गठबंधन को झटका लग सकता है।
राजनीति के जानकारों का मानना है कि यूपी में बसपा ने इंडिया गठबंधन को अपना मुख्य राजनीतिक दुश्मन माना है। पिछले लोकसभा चुनाव में अल्पसंख्यकों के साथ-साथ पिछड़ों और दलितों का एक बड़ा हिस्सा इंडिया गठबंधन के साथ गया था। नतीजतन, उसे सबसे ज्यादा सीटें मिलीं। इसलिए मायावती का सपा और कांग्रेस पर निशाना साधना स्वाभाविक भी है। बसपा नेतृत्व को लगता है कि इंडिया गठबंधन पर निशाना साधकर ही वो न सिर्फ अपने आधार वोट को खिसकने से रोक सकता है, बल्कि मुस्लिमों को अपने साथ ला सकता है। इसलिए आने वाले समय में भी बसपा का सपा व कांग्रेस पर हमला जारी रहे तो इसमें कोई हैरानी की बात नहीं।
बसपा की रैली देख विरोधी दलों और संगठनों के उड़े होश : मायावती

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि पार्टी के संस्थापक कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस पर राजधानी में आयोजित रैली को देखकर विरोधी दलों और संगठनों के होश उड़ गए हैं। रैली में अपने खून-पसीने की कमाई के पैसे खर्च कर आए लोगों में खासकर युवाओं व महिलाओं की रिकार्ड भीड़ और यूपी में पांचवीं बार बसपा की सरकार बनाने की जिद ने उनकी नींद उड़ा दी है।
बसपा सुप्रीमो ने शुक्रवार को जारी अपने बयान में कहा कि ऐसे विरोधी दलों व संगठनों के नेताओं की बेतुकी बातों एवं बयानबाजी को महत्व नहीं दिया जाना चाहिए। इनके बारे में कुछ न कहा जाए, तो बेहतर होगा। वैसे भी बहुजन समाज के लोग अपने वोटों के बलबूते पर शोषित से शासक वर्ग बनकर बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर का सपना पूरा करने के लिए कितने तत्पर व संघर्षशील हैं, इसकी स्पष्ट झलक उन्होंने रैली में पूरे देश को दिखा दी है। अब उन्हें विरोधियों के साम, दाम, दंड, भेद आदि हथकंडों से सजग व सावधान रहते हुए आगे अपने मिशन 2027 में तन, मन, धन से लग जाना है। वहीं दूसरी ओर उन्होंने रैली में लोगों को सुरक्षित लाने व वापस ले जाने में जुटे सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों, नेताओं व वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया।



