दस केंद्रीय श्रमिक संगठनों (सीटीयू) और किसानों की ओर से श्रम कानूनों और केंद्र की नीतियों के विरोध में बुधवार को बुलाए गए भारत बंद का बंगाल, केरल, पुडुचेरी और ओडिशा समेत कई राज्यों में मिला-जुला असर दिखा, जबकि उत्तर भारत के राज्यों में जनजीवन सामान्य रहा।
उदारीकरण, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के विरोध दिल्ली में दिल्ली में अखिल भारतीय केंद्रीय ट्रेड यूनियन परिषद (एआईसीसीटीयू ) के सदस्यों ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया।। झारखंड में ट्रेड यूनियनों ने दावा किया कि चार नई श्रम संहिताओं सहित केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में बुलाई गई राष्ट्रव्यापी हड़ताल से कोयला, बैंकिंग और अन्य क्षेत्र प्रभावित हुए। माकपा शासित केरल में मंगलवार मध्य रात्रि से हड़ताल शुरू होने के बाद से ही राज्य में अधिकतर जगह पूर्ण बंद का माहौल रहा।
नए लेबर कोड के विरोध में ट्रेड यूनियन के कर्मचारियों ने राष्ट्रीय राजधानी के जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया। अधिकांश इलाकों से खबर आई कि भारत बंद का असर नहीं दिखा, राजधानी में बाजार गुलजार रहे। दरअसल, केंद्र सरकार की नीतियों खासकर नए लेबर कोड और निजीकरण के विरोध में बुधवार को देशभर में भारत बंद का आह्वान किया गया। इस हड़ताल को 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का समर्थन प्राप्त था, लेकिन दिल्ली के बड़े बाजार आम दिनों की तरह खुले रहे।
दफ्तरों और संस्थानों में कामकाज भी आम दिनों की तरह सामान्य रहा और मेट्रो एवं बस सेवाएं भी बिना किसी रुकावट के चलती रहीं। इस दौरान जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन हुआ। केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में अखिल भारतीय केंद्रीय ट्रेड यूनियन परिषद के सदस्य जंतर-मंतर पर जुटे और विरोध प्रदर्शन किया। दिल्ली पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे।
संयुक्त किसान मोर्चा जैसे किसान संगठनों का भी समर्थन
इस आंदोलन में स्वरोजगार समूह जैसे सेल्फ एम्प्लॉइड वूमेन्स एसोसिएशन (एसईडब्ल्यूए) और ग्रामीण समुदायों ने भी भाग लेने का निर्णय लिया है। आंदोलन को संयुक्त किसान मोर्चा जैसे किसान संगठनों का भी समर्थन मिला है, जो पहले कृषि कानूनों के विरोध में अग्रणी भूमिका में रह चुका है। इसके अलावा एनएसडीसी लिमिटेड, स्टील प्लांट्स जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी भी समर्थन में हैं।
देशभर के किसी भी वाणिज्यिक बाजार पर भारत बंद का असर नहीं पड़ा। सभी बाजार खुले रहे और व्यापार सामान्य रूप से चलता रहा। व्यापारियों ने इस बंद को समर्थन नहीं दिया और राष्ट्रहित में काम जारी रखा।
-प्रवीन खंडेलवाल, सांसद, चांदनी चौक, दिल्ली
अस्पतालों में बेज लगाकर किया काम
अपनी मांगों को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाने के लिए अस्पतालों में कर्मचारियों ने बेज लगाकर कार्य किया। भोजन अवकाश में जीबी पंत अस्पताल, लोकनायक अस्पताल, अरुण आसफ अली अस्पताल, लाल बहादुर शास्त्री, केंद्र के सफदरजंग अस्पताल, कलावती शरण अस्पतालों में आम सभा की गई। सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ काली पट्टी बांध कर विरोध दर्ज किया गया।



