2030 तक 80% जिलों में दोगुना होगा लू का प्रकोप; दिल्ली-मुंबई समेत आठ शहरों में होगी भीषण गर्मी

2030 तक 80% जिलों में दोगुना होगा लू का प्रकोप; दिल्ली-मुंबई समेत आठ शहरों में होगी भीषण गर्मी

आईपीई ग्लोबल और ईएसआरआई इंडिया की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि 2030 तक भारत के 69 फीसदी तटीय जिले लंबे समय तक गर्मी से जुड़ी समस्याओं का सामना करेंगे, जो 2040 तक बढ़कर 79 फीसदी हो जाएंगे।

भारत को जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले वर्षों में गर्मी और बारिश की दोहरी मार झेलनी पड़ सकती है। 2030 तक देश में लू (हीटवेव) वाले दिनों की संख्या ढाई गुना बढ़ सकती है, जबकि अत्यधिक बारिश की घटनाओं में 43 फीसदी की वृद्धि होगी। यह चेतावनी आईपीई ग्लोबल और ईएसआरआई इंडिया की ताजा रिपोर्ट वेदरिंग द स्टॉर्म : मैनेजिंग मानसून इन अ वार्मिंग क्लाइमेट में दी गई है।

रिपोर्ट का सबसे गंभीर निष्कर्ष यह है कि देश के 80 फीसदी जिले लू और अत्यधिक बारिश, दोनों चरम मौसमीय घटनाओं से प्रभावित होंगे। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, पटना, हैदराबाद, भुवनेश्वर, सूरत और ठाणे जैसे शहरों में हीटवेव वाले दिनों में दोगुनी बढ़ोतरी की आशंका है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले करीब दो दशकों में भारत में चरम मौसम घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। 1993 से 2024 के बीच गर्म दिनों की संख्या 15 गुना बढ़ी है। पिछले 10 वर्षों में यह बढ़ोतरी 19 गुना तक पहुंच गई है। हीटवेव की लंबी अवधि, उसके बाद अनियमित और अत्यधिक वर्षा, अब सामान्य पैटर्न बन चुका है। जिन जिलों में जून से सितंबर के बीच लू ज्यादा चलती है, वहां लगातार और अप्रत्याशित बारिश की घटनाएं और ज्यादा होंगी।

तटीय जिलों में हीट स्ट्रेस से जीवन होगा कठिन
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि 2030 तक भारत के 69 फीसदी तटीय जिले लंबे समय तक गर्मी से जुड़ी समस्याओं का सामना करेंगे, जो 2040 तक बढ़कर 79 फीसदी हो जाएंगे। मानसून के दौरान बारिश न होने वाले दिनों में भी गर्मी और उमस की स्थिति बनी रहेगी, जिससे जनस्वास्थ्य और आजीविका पर असर पड़ेगा।

शहरों में गर्मी और बारिश का डबल अटैक
प्रमुख शोधकर्ता अबिनाश मोहंती के अनुसार जलवायु परिवर्तन शहरों को ज्यादा संवेदनशील बना रहा है। 72 फीसदी टियर-1 व टियर-2 शहर हीटवेव और भारी बारिश से प्रभावित होंगे। साथ ही शहरों में बाढ़, चक्रवात, ओलावृष्टि और बिजली गिरने की घटनाएं भी बढ़ेंगी। भूमि उपयोग में बदलाव, वनों की कटाई, मैंग्रोव और आर्द्रभूमियों पर अतिक्रमण जैसे कारक इनको और ज्यादा गंभीर बना रहे हैं।

यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल समेत दस राज्यों पर सर्वाधिक असर
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु, ओडिशा,महाराष्ट्र, मेघालय और मणिपुर जैसे राज्य दोनों प्रकार की आपदाओं यानी लू और भारी बारिश से गंभीर रूप से प्रभावित होंगे। 2030 तक इन राज्यों के 80 फीसदी से ज्यादा जिलों पर इसका व्यापक असर पड़ने की आशंका है। अल नीनो और ला नीना जैसी मौसमी घटनाएं पहले से कहीं अधिक जोर पकड़ेंगी। इसके कारण बाढ़, चक्रवात, तूफान, और भीषण गर्मी जैसी चरम जलवायु घटनाओं में अचानक वृद्धि होगी।

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