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		<title>सर्राफा बाजार में क्या चल रहा?: छह सत्रों के बाद सोने में तेजी, भाव ₹3,400 बढ़कर 1.59 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Sep 2026 03:53:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bazar]]></category>
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					<description><![CDATA[दिल्ली में सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल आया। छह सत्रों की गिरावट के बाद सोना 3,400 रुपये बढ़कर 1.59 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत रुझान और भू-राजनीतिक तनाव ने कीमतों को सहारा दिया। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में कमी भी एक प्रमुख कारण रही। देश की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">दिल्ली में सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल आया। छह सत्रों की गिरावट के बाद सोना 3,400 रुपये बढ़कर 1.59 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत रुझान और भू-राजनीतिक तनाव ने कीमतों को सहारा दिया। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में कमी भी एक प्रमुख कारण रही।<br><br>देश की राजधानी दिल्ली में सोने की कीमतों में गुरुवार को जोरदार उछाल देखा गया। छह सत्रों की लगातार गिरावट के बाद सोने ने 3,400 रुपये की तेज वृद्धि दर्ज की। यह 10 ग्राम सोना 1,59,500 रुपये के स्तर पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूत रुझान के कारण यह तेजी आई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">99.9 फीसदी शुद्धता वाले पीले धातु का भाव बुधवार के 1,56,100 रुपये प्रति 10 ग्राम के बंद स्तर से बढ़कर 1,59,500 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) हो गया। यह वृद्धि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूत रुझान के अनुरूप रही। चांदी ने भी इस उछाल में साथ दिया। सफेद धातु 5,000 रुपये बढ़कर 2,40,500 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) पर पहुंच गई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पिछले सत्र में चांदी 2,35,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। वैश्विक बाजारों में हाजिर सोना 55.76 अमेरिकी डॉलर या 1.27 फीसदी बढ़कर 4,443.93 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस हो गया। यह एक महीने के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद वापस आया। चांदी में भी करीब 1 फीसदी की वृद्धि हुई, जो 65.77 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। चांदी भी दो सप्ताह के निचले स्तर से ऊपर उठी।<br><br><strong>कीमतों में उछाल के क्या कारण रहे?</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">लेमन के शोध प्रमुख गौरव गर्ग ने बताया कि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में हाल की ऊंचाइयों से कमी आई। इसके साथ ही, नए भू-राजनीतिक तनावों से सुरक्षित निवेश की मांग को समर्थन मिला। इसी कारण सोने और चांदी की कीमतों में उछाल आया। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के कमोडिटी वरिष्ठ विश्लेषक सौमिल गांधी ने कहा कि यह उछाल अमेरिकी मौद्रिक नीति की उम्मीदों में बदलाव के प्रति सोने की संवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी बताया कि उम्मीद से कमजोर निजी रोजगार डेटा ने फेड के आक्रामक रुख को चुनौती दी। इससे अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड नीचे आ गए।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्या स्थिति रही?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">निवेश मंच मुद्रेक्स के प्रमुख क्वांट विश्लेषक अक्षत सिद्धांत ने कहा कि एक महीने के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद सोना करीब 4,440 अमेरिकी डॉलर पर वापस आ गया। चांदी भी दो सप्ताह के निचले स्तर से ऊपर उठी। कमजोर अमेरिकी डॉलर ने इस सुधार में मदद की। यह उछाल लगातार चार सत्रों की गिरावट के बाद आया है। व्यापारियों ने सितंबर में फेड की दर वृद्धि की संभावनाओं का पुनर्मूल्यांकन किया था। यह पुनर्मूल्यांकन प्रमुख अमेरिकी रोजगार डेटा जारी होने से पहले किया गया था।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>आगे क्या उम्मीद की जा सकती है?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">गांधी ने कहा कि श्रम बाजार के आंकड़ों से पहले कीमती धातुओं के लिए निकट अवधि का परिदृश्य अनिश्चित बना हुआ है। उन्होंने कहा कि कमजोर आंकड़े अमेरिकी डॉलर की गिरावट को बढ़ा सकते हैं। इससे सोने को और अधिक समर्थन मिल सकता है। हालांकि, मजबूत डेटा या फेड के आक्रामक संकेत दर वृद्धि की उम्मीदों को फिर से बढ़ा सकते हैं। ऐसे में कीमती धातुओं पर दबाव पड़ सकता है। बाजार इन आंकड़ों पर बारीकी से नजर रख रहा है।</p>
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		<title>ईरान के खिलाफ अमेरिका और यूरोपीय संघ आए साथ: तेल और वित्तीय नेटवर्क पर कसा शिकंजा, क्या बढ़ेगा आर्थिक संकट?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Sep 2026 03:47:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Iran]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका ने ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट शुरू किया था, अब यूरोपीय संघ भी इसके साथ खड़ा नजर आ रहा है। ईरान के तेल, वित्तीय नेटवर्क और जहाजरानी पर दबाव बढ़ सकता है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह आर्थिक घेराबंदी ईरान को झुकाएगी या पश्चिम एशिया में [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">अमेरिका ने ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट शुरू किया था, अब यूरोपीय संघ भी इसके साथ खड़ा नजर आ रहा है। ईरान के तेल, वित्तीय नेटवर्क और जहाजरानी पर दबाव बढ़ सकता है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह आर्थिक घेराबंदी ईरान को झुकाएगी या पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ेगा? होर्मुज जलडमरूमध्य पर इसका असर कितना गंभीर हो सकता है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं…</p>



<p class="wp-block-paragraph">अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि यूरोपीय संघ आधिकारिक तौर पर ईरान के खिलाफ अमेरिका के नेतृत्व वाले ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट में शामिल हो गया है। यह अभियान ईरान को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था से अलग करने और उसकी कमाई के उन रास्तों को रोकने पर केंद्रित है, जिनका इस्तेमाल अमेरिका के अनुसार परमाणु कार्यक्रम, हथियारों और आतंकवादी संगठनों के समर्थन के लिए किया जाता है। यूरोपीय संघ ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की तैयारी जताई है, लेकिन साथ ही कूटनीतिक समाधान और तनाव कम करने पर भी जोर दिया है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>यूरोपीय संघ ने ईरान के खिलाफ क्या रुख अपनाया है?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">बेसेंट ने कहा कि यूरोपीय संघ ने ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट में आधिकारिक रूप से शामिल होने की इच्छा जताई है और अमेरिका ने उसके शुरुआती कड़े रुख का स्वागत किया है। ईयू ने कहा कि ईरान को अपने परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर रोक लगानी चाहिए। साथ ही उस पर क्षेत्र और यूरोप में अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियां रोकने, यूक्रेन में रूस के युद्ध को सैन्य समर्थन बंद करने और अपने नागरिकों के खिलाफ हिंसा तथा दमन खत्म करने का दबाव बनाया गया है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>अमेरिका का ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट आखिर क्या है?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">अमेरिका ने पिछले महीने यह अभियान शुरू किया था। इसका मुख्य उद्देश्य ईरान को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क से काटना और उसकी आय के स्रोतों को सीमित करना है। अमेरिका ने ईरान से जुड़े तेल नेटवर्क और प्रतिबंधों से बचने के तरीकों की पहचान करने की बात कही थी। इसके साथ डिजिटल संपत्ति, तकनीक और जहाजरानी से जुड़ी ईरान की गतिविधियों पर भी संभावित प्रतिबंधों के दायरे का विस्तार किया गया है। बेसेंट ने ईरान के सामने वैश्विक अलगाव या वैश्विक अर्थव्यवस्था में लौटने का रास्ता चुनने की बात कही थी।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईयू ने क्या कहा?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">यूरोपीय संघ ने कहा कि कूटनीतिक प्रयास जारी रहना जरूरी है, ताकि शांति समझौता हो सके और पश्चिम एशिया में स्थिरता लौटे। ईयू ने खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की स्वतंत्र आवाजाही और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उसने कहा कि अपनी सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर वह आगे भी कदम उठा सकता है। ईयू ने ईरान पर पहले से लगाए गए व्यापक प्रतिबंधों का भी उल्लेख किया।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>ईरान पर दबाव और बढ़ेगा, लेकिन क्या कूटनीति भी जारी रहेगी?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">ईयू ने कहा कि वह अमेरिका, जी7 और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखेगा। हालांकि, उसके रुख में सैन्य या आर्थिक दबाव के साथ बातचीत का रास्ता खुला रखने की बात भी साफ है। ईयू का कहना है कि ईरान को अपनी अस्थिरता पैदा करने वाली गतिविधियां रोककर सद्भावना के साथ शांति वार्ता में शामिल होना चाहिए। ऐसे में ईरान के खिलाफ पश्चिमी देशों का आर्थिक मोर्चा मजबूत होने के साथ कूटनीतिक प्रयास भी जारी रहने की संभावना है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>ईरान के सामने अमेरिका ने कौन से विकल्प रखे हैं?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">अमेरिका के अनुसार ईरान के सामने दो रास्ते हैं। पहला, वैश्विक अलगाव और बेहद सीमित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ना और दूसरा, सामान्य स्थिति की ओर लौटना तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था में फिर से शामिल होने का अवसर हासिल करना। बेसेंट के मुताबिक अमेरिका का लक्ष्य ईरानी सरकार को बनाए रखने वाले हर आर्थिक सहारे को खत्म करना है। ईयू के जुड़ने से वाशिंगटन के आर्थिक दबाव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूती मिलने का संकेत मिला है।</p>
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		<title>भारत ने अंतरिक्ष भेजा ईओएस-05 उपग्रह: श्रीहरिकोटा से सफल प्रक्षेपण, ऐतिहासिक उपलब्धि पर इसरो प्रमुख क्या बोले?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Sep 2026 03:45:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Technology]]></category>
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					<description><![CDATA[इसरो ने आज अंतरिक्ष में ईओएस-05 उपग्रह भेजा है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपण किया गया है। इसरो प्रमुख वी नारायणन ने मिशन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उपग्रह से मिले आंकड़ों के मुताबिक प्रक्षेपण के बाद अनुमानित मानकों से भी बेहतर प्रदर्शन देखा गया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आज [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">इसरो ने आज अंतरिक्ष में ईओएस-05 उपग्रह भेजा है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपण किया गया है। इसरो प्रमुख वी नारायणन ने मिशन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उपग्रह से मिले आंकड़ों के मुताबिक प्रक्षेपण के बाद अनुमानित मानकों से भी बेहतर प्रदर्शन देखा गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आज ईओएस-05 उपग्रह का आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपण किया। इसरो प्रमुख वी नारायणन समेत कई पूर्व इसरो अध्यक्षों की मौजूदगी में हुआ प्रक्षेपण कई मायनों में ऐतिहासिक है। इसरो के मुताबिक&nbsp;जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट के माध्यम से किया गया प्रक्षेपण जीएसएलवी की 19वीं उड़ान है। चार सितंबर को मध्यरात्रि के करीब तीन घंटे बाद 02:55 बजे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित&nbsp;उपग्रह&nbsp;भारत का पहला अत्याधुनिक भू-तुल्यकालिक इमेजिंग सैटेलाइट (imaging satellite from Geosynchronous orbit) है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>आसान नहीं रहा अंतरिक्ष तक का सफर</strong></h3>



<ul class="wp-block-list">
<li>2021 में असफल रहा था जीएसएलवी-एफ-10/ईओएस-03 मिशन, ईओएस-05 को इसी का रिप्लेसमेंट माना जा रहा है।</li>



<li>करीब पांच साल पहले हुए प्रयास के वक्त उड़ान के 307 सेकंड बाद ही विमान में लगे कंप्यूटर ने मिशन को रद्द कर दिया था।</li>



<li>इसरो के मुताबिक 2021 में क्रायोजेनिक अपर स्टेज में खराबी के कारण मिशन विफल हुआ था।</li>



<li>मई 2025 में पीएसएलवी-सी61 रॉकेट के माध्यम से भेजा गया ईओएस-09 उपग्रह का प्रक्षेपण भी विफल रहा था। </li>



<li>इसरो के मुताबिक मई 2025 का प्रयास मोटर केस के चैंबर प्रेशर में गिरावट के कारण नाकाम रहा था।</li>



<li>इसी वर्ष 16 उपग्रहों के साथ प्रक्षेपित पीएसएलवी-सी62 रॉकेट भी मिशन पूरा करने में असफल रहा था।</li>



<li>इसरो के मुताबिक प्रक्षेपण के तीसरे चरण में &#8220;विसंगति&#8221; आने के बाद पीएसएलवी-सी62 रॉकेट उपग्रहों को निर्धारित कक्षा में स्थापित करने में विफल रहा।</li>



<li>लगभग 8 महीने के अंतराल के बाद शुक्रवार तड़के 2.55 बजे हुआ जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट और ईओएस-05 उपग्रह का प्रक्षेपण सफल रहा।<br></li>
</ul>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>उपलब्धि पर मिली बधाई, मंत्री बोले-&nbsp;वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति बन रहा भारत</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">सफल प्रक्षेपण पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बधाई दी। उन्होंने कहा,&nbsp;अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत ने एक और बड़ी छलांग लगाई है। GSLV-F17-EOS-05 के सफल प्रक्षेपण पर ISRO टीम को हार्दिक बधाई। EOS-05 एक अत्याधुनिक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है। ये भूतुल्यकालिक कक्षा में स्थापित किया जाने वाला भारत का पहला इमेजिंग उपग्रह है। इससे बेहतर दृश्य, बहु-स्पेक्ट्रल और हाइपरस्पेक्ट्रल बैंड में उन्नत इमेजिंग की सुविधा मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत की अंतरिक्ष क्षमताएं नई ऊंचाइयों को छू रही हैं, जिससे वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में हमारी स्थिति मजबूत हो रही है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>भारत को अंतरिक्ष में ऐतिहासिक सफलता</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">इसरो के मुताबिक ईओएस-05 मिशन का मकसद उप-भू-तुल्यकालिक स्थानांतरण कक्षा में स्थापित उपग्रह के माध्यम से पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए अहम जानकारी मुहैया कराना है। मध्य रात्रि के करीब 3 घंटे बाद किए गए प्रक्षेपण को देखने के लिए खगोल विज्ञान में रूचि रखने वाले दर्शक बड़ी संख्या में इसरो के सेंटर पर मौजूद रहे।&nbsp;प्रक्षेपण के करीब 22 मिनट बाद मिशन डायरेक्टर ने प्रक्षेपण सफल होने की घोषणा की।&nbsp;इसके बाद इसरो प्रमुख वी नारायणन ने इससे जुड़ी कुछ प्रमुख बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि&nbsp;एक बार जब पृथ्वी अवलोकन उपग्रह 05 कक्षा में परिचालन में आ जाएगा, तो यह भारत का भू-कक्षा से पहला समर्पित इमेजिंग उपग्रह बन जाएगा, जो हमारे देश के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक डेटा प्रदान करेगा।</p>



<figure class="wp-block-embed is-type-rich is-provider-x wp-block-embed-x"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<div class="embed-x"><blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="en" dir="ltr"><a href="https://x.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#WATCH</a> | Sriharikota, Andhra Pradesh: ISRO&#39;s GSLV-F17/EOS-05 mission has been successfully accomplished. The satellite has been successfully placed into the intended orbit (Sub-Geosynchronous Transfer Orbit).<br><br>(Source: ISRO) <a href="https://t.co/U9uS5i8ppM">pic.twitter.com/U9uS5i8ppM</a></p>&mdash; ANI (@ANI) <a href="https://x.com/ANI/status/2095630148246901063?ref_src=twsrc%5Etfw">September 3, 2026</a></blockquote><script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></div>
</div></figure>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>सफलता के पीछे इसरो के वैज्ञानिकों का टीम वर्क</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">इसरो चीफ नारायणन ने बताया कि आज का लॉन्च, श्रीहरिकोटा से इसरो का 107वां प्रक्षेपण है। उन्होंने कहा कि जीएसएलवी-एफ17 में लगातार सुधार और उन्नयन के बाद लॉन्च व्हीकल मौजूदा स्वरूप में काम कर रहा है। इसरो प्रमुख ने कहा कि औद्योगिक जगत के समर्थन के अलावा इस मिशन की सफलता के पीछे इसरो के वैज्ञानिकों का टीम वर्क है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों के परिवार में शामिल लोगों की भी अहम भूमिका रही है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>मिशन की सफलता पर इसरो प्रमुख का एक और&nbsp;बयान?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">प्रक्षेपण के बाद आंध्र प्रदेश में ही मीडिया से बात करते हुए इसरो प्रमुख नारायणन ने कहा,&nbsp;उन्होंने कहा कि यह मिशन हमारे देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि पहली बार भारत / इसरो एक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह को भूतुल्यकालिक कक्षा में स्थापित करने जा रहा है। ये भारत और उसके आसपास के क्षेत्रों की निरंतर निगरानी के लिए अत्यंत आवश्यक है&#8230; प्रधानमंत्री के निर्देशानुसार इसरो छह और प्रक्षेपणों का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि गगनयान मिशन पर भी सक्रिय रूप से काम हो रहा है। अंतरिक्ष के क्षेत्र में स्टार्टअप को लेकर इसरो प्रमुख ने कहा कि देश में माहौल सकारात्मक है।</p>
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		<title>यूपी: बारिश से नदियां उफनाईं, सात की मौत, बेघर हो गए लोग, घर-दुकानें डूबीं; रोजी रोटी का संकट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Sep 2026 03:42:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रदेश में लगातार बारिश से कई नदियां उफान पर हैं और बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। घर और दुकानें डूबने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। दीवार और छत गिरने से सात लोगों की मौत हुई है। कई इलाकों में हजारों लोग प्रभावित हैं, जबकि रोजगार बंद होने से रोजी-रोटी का संकट गहरा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश में लगातार बारिश से कई नदियां उफान पर हैं और बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। घर और दुकानें डूबने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। दीवार और छत गिरने से सात लोगों की मौत हुई है। कई इलाकों में हजारों लोग प्रभावित हैं, जबकि रोजगार बंद होने से रोजी-रोटी का संकट गहरा गया है।<br><br>प्रदेश के कई जिलों में हो रही बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं। जनजीवन अस्त व्यस्त है। घर और दुकान बाड़ से घिरने के कारण लोग परेशान हैं। रोजगार बंद होने से रोजी रोटी का संकट है। घर और दीवार गिरने से सात लोगों की मौत हो गई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चित्रकूट में बृहस्पतिवार को मंदाकिनी की जलधारा घाटों के ऊपर पहुंची तो कभी रामघाट से कामतानाथ जाने वाले मार्ग पर पहुंची। इससे नदी किनारे बसे 250 से अधिक परिवार दहशत में आ गए। उधर, सदर कोतवाली के बराछ गांव में कच्ची दीवार और छत ढहने से कल्लू यादव (35) और उसके दो मासूम बच्चों की दबकर मौत हो गई। पत्नी और बेटी अस्पताल में भर्ती है। वहीं, सीतापुर में दो महिलाएं, बहराइच में एक बालिका और बाराबंकी भी एक व्यक्ति की जान चली गई।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>एनडीआरएफ की टीम ने सभी को सुरक्षित बाहर निकाला</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">कानपुर में पांडु नदी का जलस्तर बढ़ने से 10 इलाकों में बाढ़ जैसे हालात हो गए। गोपालपुरम और जरौली फेज-2 में करीब 25 परिवार जलभराव में फंस गए। सूचना पर एनडीआरएफ की टीम ने सभी को सुरक्षित बाहर निकाला। इनके साथ ही मायापुरम, रविदासपुरम, मदनपुर, मेहरबान सिंह का पुरवा, वरुण विहार कच्ची बस्ती, सुंदरनगर, महावीरनगर और विद्यार्थी कॉलोनी में करीब 34 हजार लोग बाढ़ की चपेट में हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अंबेडकरनगर, बाराबंकी, अयोध्या और बहराइच में सरयू की बाढ़ का दायरा बढ़ता जा रहा है। देवरिया के भागलपुर में सरयू नदी का जलस्तर पांच दिन से लगातार बढ़ रहा है। नदी का बढ़ता पानी रिहायशी इलाकों की ओर पहुंचने लगा है। क्षेत्र के कई तटवर्ती गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। बस्ती में सरयू नदी के जलस्तर ने बाढ़ का स्त्रतरा बढ़ा दिया है। यहां जलस्तर खतरे के निशान से 11 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। </p>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ा</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">वाराणसी में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से महज 61 सेंटीमीटर पीछे है। खतरे का निशान 71.26 मीटर है। जलस्तर बृहस्पतिवार की रात 8 बजे तक 70.65 मीटर पहुंच गया। सभी घाट जलमग्न हैं। वरुणा में भी उफान है। इस कारण लोगों को घर छोड़ कर शिविर में रहना पड़ रहा है।<br><br>सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जिले के फीट हिस्सा बाढ़ का पानी रिसने से कट गया। गंग का पानी तेजी से बंधे के भीतर घुसने लगा। गौपालनगर-टांडी में 200 घरों में बाड़ का पानी घुस गया है। कटान पीड़ित गोपालनगर जूनियर हाईस्कूल के पास शरण लिए हुए हैं।&nbsp;</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>सीएम योगी ने लिया जायजा</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हेलीकॉप्टर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। फतेहगढ़ स्थित पुलिस पीड़ितों को राहत सामग्री वितरित की। 31 बाढ़ पीड़ितों को भूमि का पट्टा व सीएम आवास के लिए प्रत्येक को 1.20 लाख का चेक सौंपे। योगी ने कहा कि आपदा से बचाने के लिए गंगा की सिल्ट निकालकर तटबंध में इस्तेमाल की जाएगी।&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>राजस्थान निकाय चुनाव: 69,811 नामांकन में से 17,137 के खारिज, 10112 ने नाम वापस लिए, 38891 मैदान में</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Sep 2026 03:35:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Rajasthan]]></category>
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					<description><![CDATA[राजस्थान निकाय चुनाव में 69,811 नामांकन में से 17़137  खारिज हुए और 10112   प्रत्याशियों ने नाम वापस लिए। अब 10,245 वार्डों में 38891 प्रत्याशी मैदान में हैं। शेष मैदान में डटे प्रत्याशियों में बड़ी संख्या बागियों की है। राजस्थान के निकाय चुनाव में नामांकन और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनावी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">राजस्थान निकाय चुनाव में 69,811 नामांकन में से 17़137  खारिज हुए और 10112   प्रत्याशियों ने नाम वापस लिए। अब 10,245 वार्डों में 38891 प्रत्याशी मैदान में हैं। शेष मैदान में डटे प्रत्याशियों में बड़ी संख्या बागियों की है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">राजस्थान के निकाय चुनाव में नामांकन और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। प्रदेश के 10,245 वार्डों में अब 38891 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। वहीं 77 प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार निकाय चुनाव के लिए कुल 69,811 नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे। जांच के दौरान 17़137 &nbsp;नामांकन पत्र खारिज हुए, जबकि 10112 &nbsp;प्रत्याशियों ने नाम वापस ले लिए।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">नामांकन प्रक्रिया के आंकड़ों ने जहां कई वार्डों में चुनावी मुकाबले का गणित बदला है, वहीं टिकट वितरण के बाद सामने आई बगावत ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों की चिंता बढ़ा दी है। अब दोनों दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने नाराज नेताओं और बागी प्रत्याशियों को साधने की है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>नामांकन खारिज होने से दोनों दलों को झटका</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">करीब 20 जिलों से मिले आंकड़ों के अनुसार बीजेपी और कांग्रेस के कम से कम 99 प्रत्याशियों के नामांकन खारिज हुए हैं। इनमें कांग्रेस के 57 और बीजेपी के 42 प्रत्याशी शामिल हैं। पूरे चुनाव में खारिज नामांकन की संख्या करीब 200 तक बताई गई है। कांग्रेस को अजमेर और पाली में नामांकन खारिज होने से बड़ा झटका लगा है। वहीं बीजेपी को भी दौसा और करौली समेत कई जिलों में नुकसान हुआ है। कई मामलों में नामांकन तकनीकी खामियों और पात्रता से जुड़ी वजहों से खारिज हुए। इससे दोनों दलों में प्रत्याशियों के नाम तय करने और नामांकन पत्रों की पहले से जांच को लेकर सवाल भी उठे हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>टिकट नहीं मिला तो मैदान में उतरे बागी</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">दोनों पार्टियों के लिए परेशानी सिर्फ पर्चे खारिज होने तक सीमित नहीं है। टिकट वितरण के बाद कई जगह पार्टी के ही नेता और कार्यकर्ता निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतर गए। कांग्रेस ने बागियों को मनाने के लिए वरिष्ठ नेताओं को जिलों में सक्रिय किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और वरिष्ठ नेता टीकाराम जूली समेत कई नेता असंतुष्ट दावेदारों से बातचीत कर रहे हैं। जिला और विधानसभा स्तर के प्रभारियों को भी अधिकृत प्रत्याशियों के साथ समन्वय करने और बागियों को नाम वापस लेने के लिए मनाने की जिम्मेदारी दी गई है। कांग्रेस को डर है कि बागी प्रत्याशी मैदान में रहे तो उसका परंपरागत वोट बंट सकता है और इसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>BJP में भी टिकट बंटवारे को लेकर नाराजगी</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">बीजेपी में भी टिकट वितरण को लेकर कई जगह नाराजगी सामने आई है। स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के एक वर्ग ने प्रत्याशियों के चयन पर सवाल उठाए हैं। पार्टी संगठन अब नाराज नेताओं को मनाने और अधिकृत उम्मीदवारों के पक्ष में माहौल बनाने में जुटा है। बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष के राजस्थान दौरे की संभावना के बीच पार्टी के अंदरूनी हालात को लेकर भी चर्चा तेज है। वरिष्ठ नेता स्थानीय इकाइयों के साथ बातचीत कर रहे हैं ताकि चुनाव प्रचार शुरू होने से पहले असंतोष को कम किया जा सके।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>77 प्रत्याशी बिना चुनाव जीते</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">निकाय चुनाव में कुछ वार्डों में मुकाबला मतदान से पहले ही खत्म हो गया है। आयोग के अनुसार 77 प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। इन वार्डों में अब मतदान नहीं होगा। पहले सामने आई जानकारी के अनुसार इनमें बीजेपी और कांग्रेस दोनों के प्रत्याशी शामिल हैं। नाम वापसी के बाद अब निर्विरोध जीत वाले वार्डों की स्थिति भी स्पष्ट हो गई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>कई वार्डों में त्रिकोणीय और बहुकोणीय मुकाबला</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">38891 प्रत्याशियों के मैदान में रहने से बड़ी संख्या में वार्डों में मुकाबला सिर्फ बीजेपी और कांग्रेस के बीच नहीं रहेगा। टिकट नहीं मिलने के बाद मैदान में उतरे निर्दलीय और अन्य दलों के उम्मीदवार कई जगह त्रिकोणीय या बहुकोणीय मुकाबले की स्थिति बना सकते हैं। निकाय चुनाव में जीत का अंतर अक्सर कम रहता है। ऐसे में बागी उम्मीदवारों को मिलने वाले वोट सीधे तौर पर बीजेपी या कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी के समीकरण को प्रभावित कर सकते हैं।</p>
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		<title>पक्का मोर्चा: किसान आंदोलन पूरे देश में फैलाने की तैयारी, पंजाबी गायक आए साथ; महिलाएं भी कदमताल के लिए तैयार</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/farmer-protest-set-to-spread-across-india-punjabi-singers-join-women-ready-to-march/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Sep 2026 03:31:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[States]]></category>
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					<description><![CDATA[बृहस्पतिवार को प्रदेश के विभिन्न गांवों से किसान और महिलाएं ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ मोर्चा स्थल पर पहुंचीं। उन्होंने पानी संकट, कृषि मांगों, गन्ना मूल्य और लैंड पूलिंग नीति को लेकर सरकारों पर हमला बोला। संयुक्त किसान मोर्चा का चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर सात दिवसीय पक्का मोर्चा जारी है। बृहस्पतिवार को प्रदेश के विभिन्न गांवों से किसान [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">बृहस्पतिवार को प्रदेश के विभिन्न गांवों से किसान और महिलाएं ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ मोर्चा स्थल पर पहुंचीं। उन्होंने पानी संकट, कृषि मांगों, गन्ना मूल्य और लैंड पूलिंग नीति को लेकर सरकारों पर हमला बोला।<br><br>संयुक्त किसान मोर्चा का चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर सात दिवसीय पक्का मोर्चा जारी है। बृहस्पतिवार को प्रदेश के विभिन्न गांवों से किसान और महिलाएं ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ मोर्चा स्थल पर पहुंचीं। उन्होंने पानी संकट, कृषि मांगों, गन्ना मूल्य और लैंड पूलिंग नीति को लेकर सरकारों पर हमला बोला।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मोर्चे में पंजाबी गायक भी समर्थन देने आए। बृहस्पतिवार को किसानों ने बैठक कर मोर्चे को आगे बढ़ाने की रणनीति तय की और नारेबाजी भी की। मोर्चे की अध्यक्षता कर रहे मनजीत सिंह धनेर और बलबीर सिंह राजेवाल ने पंजाब में गहराते जल संकट को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि भूजल और नदियों के प्रदूषण से खेती, पशुधन व आम लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। किसान नेता हरिंदर सिंह लख्खोवाल ने कहा, यदि सरकारें बातचीत के लिए आगे नहीं बढ़ीं, तो किसान देशभर में आंदोलन करेंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>राजेवाल कहेंगे एक साल यहीं रुको तो डेरा डाल देंगे</strong><br>रात के करीब तीन बज रहे हैं। हल्की बारिश के बाद मोहाली-चंडीगढ़ सीमा पर ठंडी हवा चल रही है। सड़क किनारे कतार में खड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में अधिकांश किसान नींद ले रहे हैं जबकि कुछ जागकर साथियों और सामान की पहरेदारी कर रहे हैं। कहीं धीमी आवाज में आगे की रणनीति पर चर्चा चल रही है तो कुछ लोग सुबह शुरू होने वाले लंगर की तैयारी में जुटे हैं। पक्के मोर्चे के बीच आधी रात के बाद का यह दृश्य बता रहा है कि किसान केवल सात दिन के प्रदर्शन के लिए नहीं, जरूरत पड़ी तो लंबी लड़ाई के लिए भी तैयारी करके आए हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">माछीवाड़ा से आए किसान हरवंत सिंह ने अमर उजाला से कहा कि हम राजेवाल की सुनेंगे। वह कहेंगे कि सात सितंबर को वापस घर चलो तो चले जाएंगे। अगर कहेंगे कि छह महीने या एक साल यहीं रुकना है तो हम यहीं डेरा डाल देंगे। हरवंत सिंह जथेदार राजा बलवीर सिंह के नेतृत्व में 32 ट्रॉलियों के साथ मोर्चे में पहुंचे हैं। उनका कहना है कि जब तक किसान नेतृत्व वापस जाने का फैसला नहीं करता, वे धरनास्थल से नहीं हटेंगे।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">एक सितंबर से शुरू हुए मोर्चे में पंजाब के अलग-अलग हिस्सों से किसानों के पहुंचने का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है। पहले दिन करीब एक हजार ट्रैक्टर-ट्रॉलियां पहुंचने का दावा किया गया था। दूसरे दिन यह संख्या बढ़कर तीन हजार से अधिक होने की बात किसान संगठनों ने कही। आंदोलन में करीब 32 किसान जत्थेबंदियां शामिल हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>आगामी रणनीति व मांगें&nbsp;</strong><br>किसान नेताओं ने शुक्रवार को मोर्चे की अहम बैठक बुलाई है जिसमें अगले संघर्ष का एलान किया जाएगा। उन्होंने पंजाब सरकार से विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की। किसानों ने पानी के पुराने समझौते और लैंड पूलिंग नीति रद्द करने की भी मांग की है। बासमती, मूंग, मक्का, आलू, मटर और गोभी जैसी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी देने की भी मांग की गई है।</p>
]]></content:encoded>
					
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		<item>
		<title>उत्तराखंड मौसम: प्रदेश में 150 से अधिक सड़कें बंद, मौसम विभाग की चेतावनी, नौ जिलों में बारिश का यलो अलर्ट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Sep 2026 04:09:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uttrakhand]]></category>
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					<description><![CDATA[लगातार बारिश ने उत्तराखंड में जनजीवन की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है और कई इलाकों में आवाजाही प्रभावित हुई है। नैनीताल में भारी बारिश के बाद जहां 150 से ज्यादा सड़कें बंद हैं, वहीं नौ जिलों में आज मौसम विभाग ने यलो अलर्ट जारी किया है। उत्तराखंड में दूसरे दिन भी 150 से अधिक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">लगातार बारिश ने उत्तराखंड में जनजीवन की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है और कई इलाकों में आवाजाही प्रभावित हुई है। नैनीताल में भारी बारिश के बाद जहां 150 से ज्यादा सड़कें बंद हैं, वहीं नौ जिलों में आज मौसम विभाग ने यलो अलर्ट जारी किया है।<br><br>उत्तराखंड में दूसरे दिन भी 150 से अधिक सड़क बंद रहीं। मंगलवार को राज्य में 172 सड़क बंद थीं, इस स्थिति में थोड़ा ही सुधार हो पाया। बुधवार को भी 152 सड़क बंद रहीं। इनमें अल्मोड़ा में आठ, बागेश्वर में 15, चमोली में 21 मार्ग बंद हैं। देहरादून में 11, नैनीताल में 47, पौड़ी में आठ, पिथौरागढ़ में 15, रुद्रप्रयाग में 10, टिहरी में 11 और उत्तरकाशी में छह मार्ग बंद हैं। मार्गाें के बंद होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>नैनीताल में जमकर हुई बारिश</strong><br>24 घंटे में सबसे अधिक बारिश नैनीताल, भीमताल और हल्द्वानी में हुई है। नैनीताल में 217 और भीमताल में 161 एमएम बारिश हुई। हल्द्वानी में भी जमकर बारिश हुई। यहां पर 122.2 एमएम और मुक्तेश्वर में 107.7 एमएम बारिश हुई। बेतालघाट में 80. 5 एमएम बारिश रिपोर्ट की गई है। चंपावत में 74 एमएम, लोहाघाट 41,5, रुद्रप्रयाग 41.2 रानीखेत में 41.1 एमएम बारिश रिपोर्ट की गई है। बारिश होने से रुद्रप्रयाग में अलकनंदा और मंदाकिनी और हरिद्वार में गंगा नदी का जल स्तर खतरे के स्तर के करीब पहुंच गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सतर्क रहने की सलाह</strong><br>प्रदेश के नौ जिलों में आज हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी, चमोली, नैनीताल, चम्पावत, उधमसिंह नगर, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। राज्य के सभी जनपदों में गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने और वर्षा के तीव्र से अति तीव्र दौर की भी चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के सभी जनपदों में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा या गर्जन के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">विशेष रूप से देहरादून, टिहरी और उत्तरकाशी जैसे पर्वतीय जिलों में भारी वर्षा की आशंका है। चमोली, नैनीताल, चम्पावत और उधमसिंह नगर में भी कहीं-कहीं भारी वर्षा होने का अनुमान है। पिथौरागढ़ और बागेश्वर में भी इसी तरह की स्थिति रहने की संभावना है। इन क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।<br><br><br></p>
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		<title>बेल्जियम के पीएम का भारत दौरा: जानिए क्या रहेगा पूरा कार्यक्रम? द्विपक्षीय व्यापार के साथ रक्षा पर भी फोकस</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/belgium-pm-bart-de-wever-india-visit-schedule-bilateral-trade-defence-focus/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Sep 2026 04:07:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Nation]]></category>
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					<description><![CDATA[बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर अपने पहले भारत दौरे पर नई दिल्ली पहुंच गए हैं। बेल्जियम के पीएम का यह दौरा न सिर्फ दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने पर फोकस है, बल्कि इस दौरे में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी पर भी बात होन है।  बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर अपने पहले भारत दौरे पर नई दिल्ली पहुंच गए हैं। बेल्जियम के पीएम का यह दौरा न सिर्फ दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने पर फोकस है, बल्कि इस दौरे में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी पर भी बात होन है। <br><br>बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर तीन दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर बेल्जियम के पीएम 2 से 4 सितंबर तक तीन दिवसीय दौरे पर भारत आए हैं। इस दौरे का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना और व्यापार, निवेश, रक्षा, प्रौद्योगिकी और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>बेल्जियम के पीएम बार्ट डी वेवर का पहला भारत दौरा</strong><br>भारतीय विदेश मंत्रालय ने बेल्जियम पीएम का स्वागत करते हुए सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा, &#8216;भारत में आपका स्वागत है। आधिकारिक दौरे पर आए बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर का नई दिल्ली में हार्दिक स्वागत है। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने उनका स्वागत किया। यह दौरा भारत-बेल्जियम की घनिष्ठ और बहुआयामी साझेदारी को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है।&#8217; बेल्जियम पीएम बार्ट डी वेवर ने साल 2025 में ही पदभार संभाला है और यह उनका पहला भारत दौरा है। साथ ही दो दशकों में यह बेल्जियम के किसी भी प्रधानमंत्री का पहला भारत दौरा है। </p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>क्या है पूरा कार्यक्रम</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>बेल्जियम पीएम के कार्यक्रम के तहत वे 3 सितंबर को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस वार्ता में भारत-बेल्जियम के द्विपक्षीय संबंधों और पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।</li>



<li>बेल्जियम के पीएम भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को लेकर भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के एक व्यापारिक कार्यक्रम को संबोधित करेंगे।</li>



<li>नई दिल्ली के बाद वेवर 4 सितंबर को मुंबई का दौरा करेंगे, जहां वे हीरे, बंदरगाहों और लॉजिस्टिक सहित विभिन्न क्षेत्रों के हितधारकों के साथ बातचीत करेंगे।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>दोनों देशों के बीच लगातार मजबूत हो रहे संबंध</strong><br>भारत और बेल्जियम के विदेश मंत्रियों के बीच 15 जुलाई 2026 को रणनीतिक सहयोग पर बातचीत हुई थी। अब बार्ट डी वेवर के भारत दौरे पर रणनीतिक संवाद और द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर बातचीत होने की उम्मीद है। यूरोप में बेल्जियम, भारत का प्रमुख आर्थिक साझेदार है। अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 के बीच बेल्जियम ने भारत में 4.2 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश रहा है। दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, प्रोद्योगिकी, नवाचार, नवीकरणीय ऊर्जा, कनेक्टिविटी, बंदरगाह और समुद्री सहयोग पर भी संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में बेल्जियम की कंपनियां भारत में काम कर रही हैं। बेल्जियम, संयुक्त राष्ट्र में भी भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करता है।&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
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		<item>
		<title>यूपी: एनएचएआई टोल प्लाजा पर ईडी का छापा, फर्जीवाड़े पर 14 ठिकानों पर जांच, 1.03 करोड़ बरामद</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/up-ed-raids-nhai-toll-plaza-fraud-14-locations-rs-1-03-crore-recovered/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Sep 2026 04:05:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
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					<description><![CDATA[नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के अलग-अलग टोल प्लाजा पर कथित टोल कलेक्शन फर्जीवाड़े की जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के लखनऊ जोनल कार्यालय ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई की। ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 की धारा 17 के तहत उत्तर प्रदेश समेत सात राज्यों और क्षेत्रों में [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के अलग-अलग टोल प्लाजा पर कथित टोल कलेक्शन फर्जीवाड़े की जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के लखनऊ जोनल कार्यालय ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई की। ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 की धारा 17 के तहत उत्तर प्रदेश समेत सात राज्यों और क्षेत्रों में 14 ठिकानों पर एक साथ सर्च ऑपरेशन शुरू किया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ईडी के अनुसार, ये तलाशी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू, मध्य प्रदेश, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और कोलकाता में स्थित परिसरों में की जा रही है। कार्रवाई का उद्देश्य टोल कलेक्शन में कथित अनियमितताओं से जुड़े डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य जुटाना, लाभार्थियों की पहचान करना और अपराध से अर्जित रकम का पता लगाना है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>बिना अनुमति सॉफ्टवेयर से टोल रसीदों में फर्जीवाड़े का आरोप</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">केस दर्ज होने के बाद जांच 19 मई 2025 से शुरू हुई थी। इसमें कथित तौर पर ऐसे अनधिकृत सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन के इस्तेमाल का पता चला, जिनके माध्यम से बिना अनुमति टोल रसीदें तैयार की जाती थीं। टोल से प्राप्त रकम को आधिकारिक अकाउंटिंग सिस्टम से बाहर भेजे जाने का आरोप है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ईडी के मुताबिक, फोरेंसिक जांच और NHAI से प्राप्त रिकॉर्ड में इस तरह के सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल की पुष्टि हुई है। इसके बाद एजेंसी ने मामले से जुड़े संभावित ठिकानों की पहचान कर एक साथ तलाशी की कार्रवाई शुरू की।<br><br><strong>1.03 करोड़ रुपये नकद और डिजिटल डिवाइस बरामद</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">ईडी की कार्रवाई के दौरान अब तक सभी तलाशी वाले ठिकानों से 1.03 करोड़ रुपये नकद, संदिग्ध दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस बरामद किए गए हैं। एजेंसी इन बरामद सामग्रियों की जांच कर रही है। इससे कथित टोल फर्जीवाड़े में शामिल लोगों और पूरे नेटवर्क से जुड़ी जानकारी सामने आने की उम्मीद है।</p>
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		<title>जीडीपी में वृद्धि से भारत ने दिखाया दम: अमेरिका में निवेशकों से बोलीं सीतारमण- वैश्विक संकट के बीच मजबूती कायम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Sep 2026 04:03:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8% की वृद्धि दर्ज की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अमेरिका में निवेशकों से भारत की आर्थिक मजबूती और सुधारों पर बात की। आखिर किन कदमों से मिली रफ्तार? वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी मजबूती का [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8% की वृद्धि दर्ज की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अमेरिका में निवेशकों से भारत की आर्थिक मजबूती और सुधारों पर बात की। आखिर किन कदमों से मिली रफ्तार?<br><br>वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी मजबूती का प्रदर्शन किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को अमेरिका में निवेशकों के साथ बैठक में कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था 7.8 फीसदी की दर से बढ़ी है। उन्होंने इसे वैश्विक व्यवधानों के बीच उल्लेखनीय उपलब्धि बताया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सीतारमण न्यूयॉर्क में भारतीय वाणिज्य दूतावास और बैंक ऑफ अमेरिका की ओर से आयोजित उच्चस्तरीय बिजनेस राउंडटेबल में निवेशकों को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि तमाम वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>सुधारों से निवेश का माहौल हुआ बेहतर?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">वित्त मंत्री ने कहा कि भारत ने आर्थिक सुधारों पर लगातार जोर दिया है। दिवाला एवं दिवालियापन संहिता (IBC) जैसे सुधारों के जरिए नियामकीय व्यवस्था में अधिक स्पष्टता लाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि इन सुधारों से अनुपालन आसान हुआ है और कागजी कार्रवाई का बोझ कम करने में मदद मिली है। सरकार ने करीब एक दशक से कारोबार को सुगम बनाने और अनुपालन प्रक्रिया को सरल करने को प्राथमिकता दी है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>किन क्षेत्रों पर सरकार का फोकस?</strong></h3>



<ul class="wp-block-list">
<li>सीतारमण ने निवेशकों के सामने उन क्षेत्रों का भी जिक्र किया, जिन पर सरकार लगातार ध्यान दे रही है। इनमें पूंजीगत परिसंपत्तियों का निर्माण, बुनियादी ढांचे का विकास और उद्योग को लगातार समर्थन देना शामिल है।</li>



<li>उन्होंने विशेष रूप से विमानन क्षेत्र, निवेश के अनुकूल माहौल बनाने, एआई और डेटा सेंटर के विकास, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर को बढ़ावा देने तथा एमएसएमई के लिए ऋण की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर दिया।</li>



<li>इसके साथ ही बैंकों की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों यानी एनपीए को कम करने की दिशा में उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया।</li>



<li>उनके मुताबिक, इन प्रयासों से बैंकिंग और उद्योग के लिए कारोबार, विस्तार और मजबूती का बेहतर माहौल तैयार हुआ है।</li>
</ul>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>राजकोषीय अनुशासन पर भी जोर</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">वित्त मंत्री ने कहा कि कोविड-19 के बाद से वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने लगातार चुनौतियां रही हैं, लेकिन भारत ने पिछले कई वर्षों में राजकोषीय विवेक और वित्तीय अनुशासन के रास्ते को बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें निवेश आकर्षित करने और अपने-अपने क्षेत्रों में निवेश को सुविधाजनक बनाने को लेकर पहले की तुलना में अधिक सक्रिय और प्रतिस्पर्धी हुई हैं। इन प्रयासों को उन्होंने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जोड़कर देखा।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>विनय क्वात्रा ने भी भारत की आर्थिक ताकत को सराहा</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने कार्यक्रम के स्वागत भाषण में भारत की पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़ों को अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत बताया। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों देश भारत की तेज आर्थिक वृद्धि से लाभ उठा सकते हैं। इसके लिए दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत करने की जरूरत है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>नैस्डैक में गूंजी भारत की विकास कहानी</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">इससे पहले विनय क्वात्रा ने न्यूयॉर्क स्थित नैस्डैक में भारत की ओर से ओपनिंग बेल बजाई। उन्होंने कहा कि भारत इस समय महत्वपूर्ण आर्थिक और तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रहा है। इसके पीछे मजबूत उद्यमिता, बढ़ती डिजिटल क्षमताएं और युवा एवं प्रतिभाशाली कार्यबल अहम भूमिका निभा रहे हैं। क्वात्रा ने अप्रैल-जून तिमाही की 7.8 फीसदी जीडीपी वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति बनाए हुए है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने कहा कि भारत और नैस्डैक में सूचीबद्ध तकनीकी कंपनियों के बीच तकनीक, तकनीक से जुड़े निवेश, बुनियादी ढांचे और कुशल पेशेवरों की आवाजाही जैसे क्षेत्रों में साझेदारी दोनों देशों के संबंधों का महत्वपूर्ण आधार बन सकती है। क्वात्रा ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए भारत अमेरिकी कंपनियों, निवेशकों और संस्थानों के साथ और मजबूत साझेदारी की उम्मीद करता है।<br><br></p>
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