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		<title>आईआईटियन बाबा की कहानी: भक्ति के पथ से चुना जुर्म का रास्ता, 21 लाख का पैकेज छोड़ राधाकुंड में बिछाया जाल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 06:05:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मूल रूप से ओडिशा के भुवनेश्वर (थाना खंडगिरी क्षेत्र) स्थित आईगिनिया अपार्टमेंट के रहने वाले अभिषेक मिश्रा ने साल 2021 में आईआईटी रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद अभिषेक साल 2023 में मुंबई की संस्थान में 21 लाख रुपये सालाना पैकेज पर नौकरी की। कहते हैं कि धर्म [&#8230;]]]></description>
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<p>मूल रूप से ओडिशा के भुवनेश्वर (थाना खंडगिरी क्षेत्र) स्थित आईगिनिया अपार्टमेंट के रहने वाले अभिषेक मिश्रा ने साल 2021 में आईआईटी रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद अभिषेक साल 2023 में मुंबई की संस्थान में 21 लाख रुपये सालाना पैकेज पर नौकरी की।<br><br>कहते हैं कि धर्म और अध्यात्म की नगरी ब्रज में लोग शांति की तलाश में आते हैं, लेकिन ओडिशा के आईआईटियन अभिषेक मिश्रा उर्फ आदिकर्ता नारायण दास ने भक्ति की आड़ में अपराध का ऐसा रास्ता चुना जिसने सबको चौंका दिया। मुंबई में 21 लाख रुपये का सालाना पैकेज छोड़ राधाकुंड के आश्रम में युवतियों के साथ दुष्कर्म व गंधर्व विवाह कराने का जाल बिछाया। एक पीड़िता की शिकायत के बाद राजफाश हो गया। फिलहाल मामले की जांच जारी है।</p>



<p><strong>मां थी सरकारी स्कूल की प्रिंसिपल</strong><br>मूल रूप से ओडिशा के भुवनेश्वर (थाना खंडगिरी क्षेत्र) स्थित आईगिनिया अपार्टमेंट के रहने वाले अभिषेक मिश्रा ने साल 2021 में आईआईटी रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद अभिषेक साल 2023 में मुंबई की संस्थान में 21 लाख रुपये सालाना पैकेज पर नौकरी करने लगा। अभिषेक की मां एक सरकारी स्कूल में प्रधानाध्यापिका थीं, जो सेवानिवृत्त होने के बाद साल 2022 में भक्ति करने के उद्देश्य से राधाकुंड आ गईं।&nbsp;</p>



<p><strong>मां से हुआ था विवाद</strong><br>बीच बीच में अभिषेक भी मां से मिलने यहां आता रहा। उसका मन यहीं रमने लगा। शुरू में वह केवल अध्यात्म की ओर ही बढ़ा था। करीब एक साल तक नौकरी करने के बाद अभिषेक का मन पूरी तरह बदल गया और वह मोटी तनख्वाह का पैकेज छोड़कर राधाकुंड अपनी मां के पास आ गया। कुछ ही दिनों बाद मुंबई में साथ काम करने वाली युवती भी उसके पास राधाकुंड आ गई। अभिषेक की मां ने युवती के आने का विरोध किया तो विवाद हो गया। पारिवारिक कलह और बेटे की हरकतों से परेशान होकर मां वापस ओडिशा लौट गईं। इसके बाद अभिषेक ने पूरी तरह से भक्ति का चोला ओढ़ लिया।&nbsp;</p>



<p><strong>ऑनलाइन पढ़ता था ज्ञान का पाठ</strong><br>अपना नाम बदलकर आदिकर्ता नारायण दास रखा और राधाकुंड की पावन धरा पर काले कारनामे शुरू कर दिए। उसने खुद को धर्मगुरु के रूप में स्थापित करने के लिए सोशल मीडिया पर जाल बिछाना शुरू किया। वह जूम मीट के जरिए देशभर के बीटेक-एमटेक डिग्री धारक युवक-युवतियों को ऑनलाइन जोड़कर अध्यात्म और ज्ञान का पाठ पढ़ाने लगा। धीरे-धीरे उसने युवाओं को सम्मोहित कर अपने पास राधाकुंड बुलाना शुरू कर दिया।&nbsp;</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter"><img data-recalc-dims="1" decoding="async" src="https://i0.wp.com/staticimg.amarujala.com/assets/images/2026/06/04/iitian-baba_c8b8bcf4444e214af0bba667b0b830f7.jpeg?w=1200&#038;ssl=1" alt="Story of IITian Baba He Gave Up 21 Lakh rupees Package to Lay Trap in Radhakund" title="आईआईटियन बाबा की कहानी: भक्ति के पथ से चुना जुर्म का रास्ता, 21 लाख का पैकेज छोड़ राधाकुंड में बिछाया जाल"/><figcaption class="wp-element-caption">आईआईटियन बाबा अभिषेक मिश्रा &#8211; फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी</figcaption></figure>
</div>


<p></p>



<p><strong>ऐसे सामने आए कारनामे</strong><br>भक्ति के मुखौटे के पीछे आदिकर्ता नारायण दास का यह रैकेट लगातार फैलता गया। 25 मई को छत्तीसगढ़ के बाल्को कोरबा क्षेत्र की निवासी नर्सिंग छात्रा ने बाबा पर दूध में नशीला पदार्थ पिलाकर दुष्कर्म का आरोप लगाया है। इसके बाद बाबा के कारनामों की परतें खुलने लगीं और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। यहां से अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। इधर, तीन अन्य युवतियां व एक युवक ने भी आईआईटियन बाबा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। एसपी ग्रामीण सुरेश चंद्र रावत का कहना कि आईआईटियन बाबा लैपटॉप से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और जांच जारी है।</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="alignleft"><img data-recalc-dims="1" decoding="async" src="https://i0.wp.com/staticimg.amarujala.com/assets/images/2026/06/04/iitian-baba_8d2e6855cfdb2718c9579983de046833.jpeg?w=1200&#038;ssl=1" alt="Story of IITian Baba He Gave Up 21 Lakh rupees Package to Lay Trap in Radhakund" title="आईआईटियन बाबा की कहानी: भक्ति के पथ से चुना जुर्म का रास्ता, 21 लाख का पैकेज छोड़ राधाकुंड में बिछाया जाल"/><figcaption class="wp-element-caption">आईआईटियन बाबा अभिषेक मिश्रा &#8211; फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी</figcaption></figure>
</div>


<p><strong>रसूख के लिए दो लठैतों को रखता था आईआईटियन बाबा</strong><br>अध्यात्म और ज्ञान की आड़ में अनैतिक रैकेट चलाने वाले आईआईटियन बाबा अभिषेक उर्फ आदिकर्ता नारायण दास के काले कारनामों की परतें अब धीरे-धीरे खुलती जा रही हैं। पुलिस की जांच में पता चला है कि खुद को श्रीकृष्ण का अवतार बताने वाला बाबा रसूख और खौफ बनाने के लठैतों को साथ रखता था। पुलिस इन लठैतों के साथ बाबा के करीबियों की भी तलाश में जुटी है।</p>
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		<title>वादे से पलटे ट्रंप?: अमेरिका को दुनियाभर के संघर्षों में उलझा रहे राष्ट्रपति, एशिया से अफ्रीका तक उतारी सेना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 05:59:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[USA]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2024 में राष्ट्रपति चुनाव की उम्मीदवारी तय होने के बाद से लगातार जनता से वादा किया कि वह अमेरिका को फॉरेवर वॉर्स यानी अनंत युद्ध से बाहर निकालेंगे और सिर्फ देश की सुरक्षा पर ही ध्यान केंद्रित करेंगे। हालांकि, पहले कार्यकाल की तरह ही ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2024 में राष्ट्रपति चुनाव की उम्मीदवारी तय होने के बाद से लगातार जनता से वादा किया कि वह अमेरिका को फॉरेवर वॉर्स यानी अनंत युद्ध से बाहर निकालेंगे और सिर्फ देश की सुरक्षा पर ही ध्यान केंद्रित करेंगे। हालांकि, पहले कार्यकाल की तरह ही ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भी अमेरिका बाद एक युद्ध में फंसता जा रहा है। इनमें ईरान से लेकर सोमालिया तक के संघर्ष शामिल हैं। आइये जानते हैं ट्रंप के कार्यकाल में जारी ऐसे ही कुछ संघर्षों के बारे में…</p>



<p>डोनाल्ड ट्रंप 2024 में चुनाव जीतने से पहले तक लगातार अमेरिकी जनता से नए-नए वादे करते आ रहे थे। फिर चाहे अमेरिका को नई आर्थिक ऊंचाइयों पर ले जाने का वादा हो या फिर अमेरिकी जनता को महंगाई से बचाने का। इन अधिकतर वादों में से कई पर या तो काम जारी है या स्थितियां ट्रंप के अनुकूल नहीं हैं। हालांकि, एक वादा जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति अब तक खुद ही पलटते दिखे हैं, वह वादा है अमेरिका को दुनियाभर में जारी संघर्षों से निकालने का। अगर आंकड़ों पर गौर किया जाए तो सामने आता है कि ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिका संघर्षों से निकलने के बजाय कुछ और नए युद्ध में उलझता ही चला गया। <br><br>ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने से पहले और इस दौरान दुनियाभर के युद्ध से अमेरिका को निकालने पर क्या वादे किए थे? कैसे ट्रंप धीरे-धीरे इन वादों से लगातार पलटे हैं? फिलहाल अमेरिका की सैन्य मौजूदगी को ट्रंप ने किस तरह बढ़ाया है? कैसे ट्रंप ने राष्ट्रपति के तौर पर अपने पहले कार्यकाल में भी कुछ ऐसे ही वादे तोड़े थे? आइये जानते हैं…</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>पहले जानें- अमेरिका को युद्ध से निकालने को लेकर क्या थे ट्रंप के वादे?</strong></h2>



<p>डोनाल्ड ट्रंप ने 2024 में अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवारी पेश करने के साथ चुनाव प्रचार के दौरान खुद को &#8216;शांति के उम्मीदवार&#8217; के रूप में पेश किया था और अमेरिका को विदेशी युद्धों से बाहर निकालने को लेकर कई बड़े और स्पष्ट वादे किए थे।</p>



<p><strong>अनंत संघर्षों का अंत:</strong> ट्रंप ने एक दशक तक लगातार यह वादा किया कि वह पश्चिम एशिया के लंबे संघर्षों और खत्म न होने वाले संघर्षों को रोकेंगे। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के शासन में जॉर्ज बुश की तरफ से शुरू किए गए इराक युद्ध को एक बड़ी गलती करार दिया था। ट्रंप का कहना था कि इसने पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने दूसरे देशों के मामलों में दखल और अराजकता की नीतियों को खत्म करने की बात कही थी।</p>



<p><strong>अमेरिका फर्स्ट नीति और घरेलू फोकस: &nbsp;</strong>ट्रंप की नीति का मुख्य मंत्र यह था कि अमेरिका को विदेशी सैन्य अभियानों और अन्य देशों की राजनीतिक लड़ाइयों में अपना खजाना और सैनिकों का खून नहीं बहाना चाहिए। उनका वादा था कि वह विदेशों की बजाय अमेरिका की घरेलू समस्याओं और प्राथमिकताओं पर संसाधनों को खर्च करेंगे। उन्होंने पश्चिम एशिया में खरबों डॉलर खर्च होने और हजारों जानें जाने पर कई बार दुख जताया।</p>



<p><strong>अहम संघर्षों को तुरंत खत्म करने का दावा:</strong>&nbsp;एक उम्मीदवार के रूप में ट्रंप ने अपनी समझौता कराने की क्षमताओं का हवाला देते हुए दावा किया था कि वह पदभार ग्रहण करने के पहले ही दिन रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कर देंगे। इसके अलावा उन्होंने गाजा युद्ध को भी तेजी से खत्म करने का वादा किया था।</p>



<p><strong>अमेरिकी सेना को बेवजह न उलझाना:&nbsp;</strong>उन्होंने वादा किया था कि वह अपनी सेना को उन विदेशी इलाकों में लड़ने के लिए भेजकर कमजोर नहीं करेंगे, जहां अमेरिका का सीधा कोई मतलब नहीं है। ट्रंप का वादा था कि अमेरिकी सैनिकों को अब सिर्फ अमेरिकी सुरक्षा में ही लगाया जाएगा, न कि दूसरे देश के युद्धों में।</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-4"></h3>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>कैसे ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में लगातार जंगों में उलझा है अमेरिका?</strong></h2>



<p>अपने वादों से उलट डोनाल्ड ट्रंप ने बीते डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में अमेरिका को कई नई जंगों में उलझाया है। हालिया समय में अमेरिका अपने पड़ोस में लातिन अमेरिकी क्षेत्र से लेकर एशिया तक में जारी युद्ध में अमेरिकी सैन्य शक्ति का इस्तेमाल कर रहे हैं और लगातार तैनाती बढ़ाते आए हैं।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>1. एशिया</strong></h3>



<p><strong>ईरान:</strong>&nbsp;ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका ने ईरान पर दो बार हमले किए हैं। जून 2025 में, अमेरिकी सेना ने इस्राइल के साथ मिलकर ईरानी परमाणु ठिकानों पर बमबारी की थी। इसके बाद फरवरी में भी अमेरिकी और इस्राइली सेनाओं ने हमले किए, जिसके जवाब में तेहरान ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी सहयोगियों- यूएई, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, आदि देशों पर जवाबी हमले किए। इन हमलों में ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों के साथ हथियारों को भी निशाना बनाया है। फिलहाल शांति समझौते के लिए बातचीत जारी है, लेकिन दोनों देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में संघर्ष हुआ है।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-5"></h3>



<p><strong>यमन:&nbsp;</strong>मार्च 2025 में अमेरिका ने यमन के हूती विद्रोहियों पर कई हमले किए थे। अमेरिका का कहना था कि उसने यह हमले इस्राइल की मदद करने और लाल सागर में समुद्री वाणिज्यिक मार्ग को बाधित होने से बचाने के लिए किए हैं।&nbsp;</p>



<p><strong>इराक:</strong>&nbsp;मार्च 2025 में ही अमेरिकी सेना ने इराक में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) के एक सरगना को मार गिराया।&nbsp;</p>



<p><strong>सीरिया:</strong>&nbsp;दिसंबर में अमेरिका ने सीरिया में आईएसआईएस के ठिकानों पर हमले किए। वह भी तब जब सीरिया में अमेरिका के समर्थन वाली सरकार पहले ही आईएसआईएस के मुकाबले में जुटी है।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-6"></h3>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>2. लातिन अमेरिका और आसपास के समुद्री क्षेत्र</strong></h3>



<p><strong>कैरेबियाई सागर और पूर्वी प्रशांत:</strong>&nbsp;अमेरिका इस क्षेत्र में नशीले पदार्थों की तस्करी करने वालों और कथित नार्को-आतंकवादियों के खिलाफ सैन्य बल का आक्रामक इस्तेमाल कर रहा है। सितंबर में वेनेजुएला के पास ट्रेन डी अरागुआ ड्रग कार्टेल के 11 सदस्यों के मारे जाने के बाद से इन अमेरिकी हमलों में अब तक लगभग 207 लोग मारे जा चुके हैं।<br><br><strong>वेनेजुएला:&nbsp;</strong>जनवरी में अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला की राजधानी कराकस में एक बड़ा अभियान चलाकर वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया था। ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी सेना ने कई हफ्तों तक वेनेजुएला के आसपास नौसैनिक ब्लॉकेड लगाकर उस पर दबाव बनाया और बाद में मादुरो को गिरफ्तार कर उन्हें अमेरिका पहुंचा दिया। मादुरो को फिलहाल नार्को-आतंकवाद की साजिश के आरोपों में न्यूयॉर्क में हिरासत में रखा गया है।</p>



<p><strong>क्यूबा:&nbsp;</strong>डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा में राजनीतिक बदलाव का दबाव बनाने के लिए हाल के हफ्तों में क्यूबा के करीब अमेरिकी नौसेना का जमावड़ा काफी बढ़ा दिया है। न सिर्फ क्यूबा की तरफ जाने वाले तेल-गैस के टैंकरों को निशाना बनाया जा रहा है, बल्कि उसकी जरूरत के उत्पादों वाली शिपिंग को भी जब्त किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस आर्थिक दबाव के जरिए वह क्यूबा में सत्ता परिवर्तन का माहौल बनाना चाहते हैं, ताकि वहां की वामपंथी सरकार हट जाए।&nbsp;</p>



<p><strong>ग्रीनलैंड:&nbsp;</strong>अमेरिका ने हाल ही में&nbsp;ग्रीनलैंड को खरीदने या इस पर कब्जा करने की मंशा रखी है। वह भी तब जब ग्रीनलैंड पहले से ही अमेरिका के सहयोगी देश डेनमार्क के शासन में है। इसके बावजूद ट्रंप ने इसे भू-राजनीतिक मुद्दा बनाया है और यहां अपनी सेना की एक बड़ी टुकड़ी को तैनात रखा है। चौंकाने वाली बात यह है कि ट्रंप ने लगातार ग्रीनलैंड को कब्जाने की मंशा के सवाल पर सीधे न नहीं कहा है।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-7"></h3>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>3. अफ्रीका</strong></h3>



<p><strong>सोमालिया:&nbsp;</strong>ट्रंप की सत्ता में वापसी के बाद सोमालिया वह पहला देश था जहां अमेरिकी सेना ने हमला किया। इस साल आईएसआईएस और अल-शबाब के खिलाफ कम से कम 63 संयुक्त हवाई हमले किए जा चुके हैं।</p>



<p><strong>नाइजीरिया:&nbsp;</strong>अमेरिका ने नाइजीरियाई अधिकारियों के साथ मिलकर आईएसआईएस के ठिकानों पर कई हवाई और जमीनी हमले किए हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने इन हमलों को नाइजीरिया में ईसाइयों के उत्पीड़न से बचाव के रूप में सही ठहराया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-8"></h3>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>कैसे पहले कार्यकाल में भी अपने वादों से मुकर चुके हैं ट्रंप?</strong></h2>



<p>डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान भी अमेरिका के गैर-हस्तक्षेप की नीति लागू करने के वादों से यू-टर्न लिया था। तब भी उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान पश्चिम एशिया में सैन्य हस्तक्षेप को कम करने का संकेत दिया था। लेकिन राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को कम करने के बजाय और बढ़ा दिया।</p>



<p><strong>1. अफगानिस्तान में हुआ था युद्ध का विस्तार:</strong>&nbsp;ट्रंप ने अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना को वापस बुलाने का वादा किया था। हालांकि, राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने 16 साल पुराने इस युद्ध को खत्म करने के बजाय और बढ़ा दिया और हजारों अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों को वहां भेजने की रणनीति को मंजूरी दे दी। उन्होंने अपने इस यू-टर्न पर खुद स्वीकार किया कि उनका मूल विचार बाहर निकलने का था, लेकिन ओवल ऑफिस की डेस्क के पीछे बैठने पर फैसले बहुत अलग होते हैं। बाद में अपने कार्यकाल के अंत में ट्रंप ने धीरे-धीरे अमेरिकी सेना को अफगानिस्तान से बाहर निकालने की मंजूरी दे दी थी।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-9"></h3>



<p><strong>2. सीरिया पर मिसाइल हमले:</strong>&nbsp;विदेशी में अमेरिकी सेना को उलझाने की आलोचना करने वाले ट्रंप ने सीरिया की बशर अल-असद के नेतृत्व वाली सरकार के एक एयरबेस पर 59 टॉमहॉक मिसाइलों से हमला किया था। यह सीरियाई गृहयुद्ध में अमेरिका का पहला सीधा हमला था, जिसने उसे रूस से सीधी टक्कर में ला दिया था।&nbsp;</p>



<p><strong>3. यमन और सोमालिया में रिकॉर्ड हवाई हमले:</strong>&nbsp;ट्रंप के पहले कार्यकाल में यमन में अल-कायदा को निशाना बनाते हुए इतने हवाई हमले किए गए, जितने उससे पिछले चार वर्षों में कुल मिलाकर भी नहीं हुए थे। इसी तरह सोमालिया में आतंकी गुटों के खिलाफ अमेरिकी हवाई हमले दोगुने से भी अधिक हो गए थे।</p>



<p><strong>4. विदेशी सैन्य ठिकानों को बनाए रखना:&nbsp;</strong>चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने विदेशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों की अहमियत और उन पर होने वाले खर्च पर सवाल उठाए थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्होंने दुनिया भर में अमेरिकी सैन्य शक्ति और इन अड्डों को जस का तस बनाए रखा।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-10"></h3>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>ट्रंप के वादों से पलटने पर क्या कहते हैं विशेषज्ञ?</strong></h2>



<p>विशेषज्ञों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप का शांति के उम्मीदवार से एक आक्रामक सैन्य रुख अपनाने वाले राष्ट्रपति के रूप में बदलना उनकी बयानबाजी और वास्तविक नीतियों के बीच भारी विरोधाभास को दर्शाता है। अलग-अलग रक्षा, कूटनीतिक और विदेश नीति विशेषज्ञों ने ट्रंप के अपने वादों से पलटने पर अपने विचार रखे हैं।</p>



<p><strong>ब्रेट मैकगर्क:&nbsp;</strong>पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी और विश्लेषक ब्रेट मैकगर्क ने कुछ समय पहले ही कहा था कि ट्रंप ने चुनाव के दौरान गाजा युद्ध को तेजी से खत्म करने और यूक्रेन युद्ध को सत्ता में आने के पहले ही दिन समाप्त करने का वादा किया था, लेकिन कार्यकाल के छह महीने बीत जाने के बाद दोनों मोर्चों पर शांति पहले से कहीं अधिक दूर दिखाई देती है। उन्होंने ट्रंप की कूटनीतिक और सैन्य नीतियों को असंगत बताया। उन्होंने ध्यान दिलाया कि ट्रंप ने गाजा में मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए बनाए गए यूएस एड (USAID) ढांचे को शुरुआत में ही खत्म कर दिया था, जिससे वहां का मानवीय संकट और गहरा गया। यूक्रेन के मामले में भी मैकगर्क ने कहा कि शुरुआत में ट्रंप की नीतियों के चलते रूस के राष्ट्रपति पुतिन के हौसले बढ़े, जिससे युद्ध के और लंबा खिंचने के हालात बन गए।</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-11"></h3>



<p><strong>मोहम्मद बजी:&nbsp;</strong>न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ने इसी साल प्रकाशित अपने विश्लेषण में ईरान पर बड़े पैमाने पर किए गए हमलों को लेकर ट्रंप की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अमेरिका फर्स्ट राष्ट्रपति, जिन्होंने विदेशी युद्धों का विरोध करके अपना राजनीतिक आधार बनाया था, अब सत्ता परिवर्तन के मकसद से खुद अपनी मर्जी का युद्ध छेड़ चुके हैं। बजी ने ट्रंप की तरफ से ईरान को अमेरिका के लिए अनुमानित खतरा बताने वाले दावों को बुनियादी तौर पर गलत और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया बताया। उन्होंने ट्रंप की बयानबाजी की तुलना सीधे तौर पर जॉर्ज डब्ल्यू बुश से करते हुए कहा कि&#8230;</p>



<p>एंड्रयू लैथम: मैकलेस्टर कॉलेज में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर लैथम ने ट्रंप के बढ़ते वैश्विक सैन्य ऑपरेशनों का विश्लेषण करते हुए बताया कि ट्रंप सैन्य बल के प्रयोग को बुश-युग के नेताओं से बिल्कुल अलग नजरिए से देखते हैं। उनके मुताबिक, ट्रंप मानते हैं कि खतरे व्यक्तिगत हैं, सीमाएं मायने रखती हैं&#8230;और बल तब उपयोगी होता है जब यह नतीजे देता है। हालांकि, लैथम यह भी चेतावनी देते हैं कि अमेरिका फर्स्ट नीति नशीले पदार्थों या आतंकवाद से जुड़े किसी अचानक किए गए हमले को तो घरेलू रक्षा के रूप में सही ठहरा सकती है, लेकिन इसके तहत किसी लंबे युद्ध या बिना दिशा वाले सैन्य अभियान को जायज ठहराना बेहद मुश्किल है।</p>
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		<title>सेंसेक्स 200 अंक उछला, निफ्टी 23,400 के पार; RBI के फैसले पर टिकी शेयर बाजार की नजर</title>
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		<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 05:57:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Share Market]]></category>
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					<description><![CDATA[शेयर बाजार एमपीसी बैठक के एलानों से पहले शानदार शुरुआत हुई है। सेंसेक्स 200 से अधिक अंकों की तेजी के साथ खुला, जबकि निफ्टी 23,400 के पार निकल गया। इन्फोसिस और अदाणी पोर्ट्स में 2% का उछाल है। आरबीआई पॉलिसी से पहले बाजार का पूरा हाल यहां पढ़ें। भारतीय शेयर बाजार ने 5 जून 2026 [&#8230;]]]></description>
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<p>शेयर बाजार एमपीसी बैठक के एलानों से पहले शानदार शुरुआत हुई है। सेंसेक्स 200 से अधिक अंकों की तेजी के साथ खुला, जबकि निफ्टी 23,400 के पार निकल गया। इन्फोसिस और अदाणी पोर्ट्स में 2% का उछाल है। आरबीआई पॉलिसी से पहले बाजार का पूरा हाल यहां पढ़ें।<br><br>भारतीय शेयर बाजार ने 5 जून 2026 की सुबह हरे निशान और सकारात्मक रुझान के साथ कारोबार की शुरुआत की है। प्रमुख कंपनियों के शेयरों में खरीदारी लौटने से बाजार के दोनों मुख्य सूचकांक मजबूत बढ़त दिखा रहे हैं। हालांकि, शुक्रवार को आने वाले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नीतिगत फैसलों से पहले निवेशकों ने सतर्कता भी बनाए रखी है। </p>



<h3 class="wp-block-heading">शेयर बाजार : <strong>सेंसेक्स और निफ्टी में अच्छी बढ़त</strong></h3>



<p>सुबह 09:32 बजे के आंकड़ों के अनुसार, बीएसई सेंसेक्स 197.90 अंक यानी 0.26 प्रतिशत की मजबूत छलांग के साथ 74,557.91 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी पीछे नहीं है और यह 51.41 अंक या 0.22 प्रतिशत की तेजी के साथ 23,467.95 के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर गया है। </p>



<p><strong>इन्फोसिस और अदाणी पोर्ट्स ने दिखाया दम</strong><br>शुरुआती कारोबार में बाजार को ऊपर खींचने में कुछ प्रमुख लार्ज-कैप शेयरों का बड़ा योगदान रहा है। आईटी और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के शेयरों में निवेशकों की भारी दिलचस्पी देखी गई। विशेष रूप से दिग्गज आईटी कंपनी इन्फोसिस और अदाणी पोर्ट्स के शेयरों में 2-2 प्रतिशत की शानदार तेजी दर्ज की गई है, जिसने सूचकांकों को मजबूत समर्थन दिया है।</p>



<p><strong>रेंज-बाउंड रहेगा बाजार, निवेशकों की सतर्क चाल</strong><br>बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि भारतीय शेयर बाजार निकट भविष्य में एक सीमित दायरे में ही कारोबार करेगा। इसका प्रमुख कारण यह है कि निवेशक इस समय घरेलू और वैश्विक दोनों तरह के कारकों को ध्यान में रखते हुए बेहद सावधानी के साथ अपनी रणनीति बना रहे हैं।</p>



<p><strong>आगे का आउटलुक: शुक्रवार सुबह 10 बजे का इंतजार</strong><br>बाजार सहभागियों की निगाहें अब पूरी तरह से भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के नतीजों पर केंद्रित हो गई हैं, जिनकी घोषणा शुक्रवार सुबह 10 बजे की जानी है। यह नीतिगत फैसला बाजार की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। निवेशकों को उम्मीद है कि इस बैठक से भविष्य में ब्याज दरों की दिशा, महंगाई के दृष्टिकोण, देश की आर्थिक विकास की संभावनाओं और मुद्रा स्थिरता से जुड़े अहम संकेत मिलेंगे।</p>



<p></p>
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		<title>शिवकुमार को झटका: मंत्री बनते ही रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा, बोले-पार्टी में रहूंगा; विभाग बंटवारे से थे नाराज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 05:56:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Karnataka]]></category>
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					<description><![CDATA[कर्नाटक सरकार में विभागों के बंटवारे के बाद मंत्री रामलिंगा रेड्डी की नाराजगी सामने आई है। उन्हें जल संसाधन विभाग दिए जाने से वे संतुष्ट नहीं बताए जा रहे हैं। रेड्डी बंगलूरू विकास विभाग चाहते थे और इसी को लेकर उन्होंने बैठक में नाराजगी जताई। आज सुबह उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><em>कर्नाटक सरकार में विभागों के बंटवारे के बाद मंत्री रामलिंगा रेड्डी की नाराजगी सामने आई है। उन्हें जल संसाधन विभाग दिए जाने से वे संतुष्ट नहीं बताए जा रहे हैं। रेड्डी बंगलूरू विकास विभाग चाहते थे और इसी को लेकर उन्होंने बैठक में नाराजगी जताई। आज सुबह उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है।</em></p>



<p>कर्नाटक सरकार में विभागों के बंटवारे के बाद मंत्री रामलिंगा रेड्डी की नाराजगी सामने आई है। उन्हें जल संसाधन विभाग (वाटर रिसोर्सेज) दिए जाने से वे संतुष्ट नहीं हैं और इस मुद्दे पर उन्होंने अपनी असहमति भी जताई है। इसी नाराजगी के बीच अब उन्होंने इस्तीफा भी दे दिया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>इस्तीफे के बाद क्या बोले रामलिंगा रेड्डी</strong></h3>



<p>इस्तीफे के बाद रेड्डी ने साफ किया कि उन्होंने केवल मंत्री पद छोड़ा है, कांग्रेस पार्टी नहीं। उन्होंने आगे कहा, &#8216;मैं अपनी अंतरात्मा के खिलाफ काम नहीं कर सकता, इसलिए मंत्री पद से इस्तीफा दे रहा हूं।&#8217; उन्होंने कहा कि वे विधायक बने रहेंगे और कांग्रेस से इस्तीफा नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि वह पिछले 53 वर्षों से कांग्रेस से जुड़े हुए हैं और पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा बरकरार है। उन्होंने कभी किसी से मंत्री पद की मांग नहीं की। उन्होंने याद दिलाया कि वह पूर्व मुख्यमंत्री एम. वीरप्पा मोइली और एस.एम. कृष्णा की सरकारों में भी मंत्री रह चुके हैं और पार्टी ने उन्हें हमेशा जिम्मेदारियां दी हैं। रेड्डी ने कहा कि उन्होंने लंबे समय तक संगठन और सरकार दोनों में काम किया है।</p>



<p><strong>क्या है पूरा मामला?</strong><br>दरअसल, मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने गुरुवार रात अपने 13 मंत्रियों के बीच विभागों का आवंटन किया। इस दौरान रामलिंगा रेड्डी को जल संसाधन विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि रेड्डी बंगलूरू विकास विभाग मिलने की उम्मीद कर रहे थे और इसी विभाग पर उनका दावा था।</p>



<p>सूत्रों के अनुसार, विभागों के आवंटन को लेकर गुरुवार को हुई बैठक के दौरान रेड्डी अपनी नाराजगी जताते हुए बीच में ही बाहर चले गए थे। बैठक में उन्होंने मुख्यमंत्री को वर्ष 2023 में किए गए उस वादे की भी याद दिलाई, जिसमें कथित तौर पर कहा गया था कि भविष्य में कैबिनेट फेरबदल होने पर उन्हें बंगलूरू विकास विभाग दिया जाएगा।&nbsp;</p>



<p><strong>मामले में क्या बोले प्रियांक खरगे?</strong><br>इस्तीफे के बाद कांग्रेस में हलचल तेज हो गई है। इस बीच मंत्री प्रियंक खरगे ने कहा कि रामलिंगा रेड्डी पार्टी और राज्य दोनों के लिए महत्वपूर्ण नेता हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता इस मामले का समाधान निकाल लेंगे। प्रियंक खरगे ने कहा कि कांग्रेस में बातचीत के जरिए मुद्दों को सुलझाने की परंपरा रही है। रेड्डी के इस्तीफे को लेकर फिलहाल पार्टी नेतृत्व लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>किसे कौन से विभाग मिला?</strong></h2>



<figure class="wp-block-table"><table class="has-fixed-layout"><thead><tr><th class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>मंत्री</em></strong></th><th class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>विभाग</em></strong></th></tr></thead><tbody><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>डी.के. शिवकुमार</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>वित्त, मंत्रिमंडल मामले,<br>कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग (डीपीएआर),<br>खुफिया विभाग और अन्य अविभाजित विभाग</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>यतींद्र सिद्धारमैया</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>शहरी विकास विभाग</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>जी. परमेश्वर</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>राजस्व और खेल विभाग</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>के.एच. मुनियप्पा</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>के.जे. जॉर्ज</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>ऊर्जा और पर्यटन department</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>एम.बी. पाटिल</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>बड़े एवं मध्यम उद्योग तथा आधारभूत संरचना विभाग</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>रामलिंगा रेड्डी<br>(इस्तीफा दिया)</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>जल संसाधन (प्रमुख एवं मध्यम सिंचाई) विभाग</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>सतीश जारकीहोली</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी)</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>कृष्णा बायर गौड़ा</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>ग्रेटर बंगलूरू विकास विभाग</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>प्रियांक खरगे</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>गृह विभाग (खुफिया शाखा को छोड़कर),<br>सूचना प्रौद्योगिकी एवं जैव प्रौद्योगिकी (आईटी-बीटी) तथा ई-गवर्नेंस</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>यू.टी. खादर</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>बैराथी सुरेश</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>परिवहन विभाग</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>शरण प्रकाश पाटिल</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>चिकित्सा शिक्षा और कौशल विकास विभाग</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>ईश्वर खंड्रे</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज (आरडीपीआर) विभाग</em></strong></td></tr></tbody></table></figure>



<p><br><strong>बंगलूरू डेवलपमेंट विभाग पर अड़े थे&nbsp;रेड्डी</strong><br>मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आठ बार विधायक रह चुके रेड्डी ने बंगलूरू डेवलपमेंट के अलावा कोई और मंत्रालय लेने से इनकार कर दिया था। हालांकि, उन्हें इसके बजाय सिंचाई विभाग दिया गया था। वहीं,&nbsp;बंगलूरू डेवलपमेंट विभाग को कर्नाटक सरकार में सबसे अहम विभागों में से एक माना जाता है, ये विभाग कृष्णा बायरे गौडा को सौंपा गया है।</p>
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		<title>दिल्ली अग्निकांड: एक माह में 80 से ज्यादा विदेशी नागरिक होटल फ्लोरिश में ठहरे, जानें क्यों इनका बना ठिकाना?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 05:23:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi]]></category>
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					<description><![CDATA[दिल्ली अग्निकांड : एफआरआरओ की मदद से हुई विदेशियों की पहचानमालवीय नगर के होटल फ्लोरिश स्टे में बुधवार को आग लगी। इसमें 21 लोगों की मौत हुई, जिनमें 12 विदेशी नागरिक थे। यह होटल विदेशी मरीजों का ठिकाना बन गया था। दक्षिणी दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल फ्लोरिश स्टे में हुए भीषण अग्निकांड ने [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>दिल्ली अग्निकांड : एफआरआरओ की मदद से हुई विदेशियों की पहचानमालवीय नगर के होटल फ्लोरिश स्टे में बुधवार को आग लगी। इसमें 21 लोगों की मौत हुई, जिनमें 12 विदेशी नागरिक थे। यह होटल विदेशी मरीजों का ठिकाना बन गया था। दक्षिणी दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल फ्लोरिश स्टे में हुए भीषण अग्निकांड ने राजधानी में मेडिकल टूरिज्म और विदेशी मरीजों के ठहराव से जुड़े एक ऐसे नेटवर्क की परतें खोल दी हैं, जिस पर अब तक किसी की नजर नहीं गई थी। जांच में सामने आया है कि यह होटल एक सामान्य गेस्ट हाउस नहीं था, बल्कि इलाज के लिए दिल्ली आने वाले विदेशी मरीजों और उनके तीमारदारों का प्रमुख ठिकाना था। पुलिस के अनुसार, पिछले एक महीने के दौरान करीब 80 विदेशी नागरिक इस होटल में ठहरे थे और हादसे के समय भी यहां बड़ी संख्या में विदेशी मेहमान मौजूद थे।</p>



<p>बुधवार सुबह हुए अग्निकांड में 21 लोगों की मौत हुई, जिनमें 12 विदेशी नागरिक शामिल हैं। मृतकों में नेपाल, बांग्लादेश, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान, कांगो, नाइजीरिया, लाइबेरिया और मोजांबिक के नागरिक शामिल हैं। 21 अन्य विदेशी नागरिक विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। घायलों में केन्या और कैमरून के नागरिक भी हैं। होटल में ठहरने वाले अधिकांश विदेशी नागरिक मेडिकल वीजा पर भारत आए थे। इनमें कई मरीज थे, बड़ी संख्या उनके तीमारदार भी थे। </p>



<h3 class="wp-block-heading">दिल्ली अग्निकांड : <strong>एफआरआरओ की मदद से हुई विदेशियों की पहचान</strong></h3>



<p>हादसे के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती मृतकों और घायलों की पहचान की थी। आग में होटल के रजिस्टर, दस्तावेज और कंप्यूटर पूरी तरह जल गए थे। ऐसे में दिल्ली पुलिस ने फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (एफआरआरओ) की मदद ली।</p>



<p><strong>आग के बीच इंसानियत की मिसाल, दो लाख के गद्दे सड़क पर बिछाए</strong><br>मालवीय नगर स्थित फ्लरिश स्टे होटल में बुधवार को आग लगने के बाद जब चारों ओर धुआं और लपटें फैल गईं, तब सामने दुकान चलाने वाले एक गद्दा कारोबारी रियाजुद्दीन ने पल भर में फैसला लेते हुए करीब दो लाख रुपये के अपने गद्दे बिछा दिए, जिससे कई लोगों की जान बच सकी। उन्होंने कहा कि जान से बढ़कर कुछ नहीं होता। पैसा फिर आ जाएगा, लेकिन अगर किसी की जान चली जाती तो उसकी भरपाई नहीं हो सकती थी।</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter"><img data-recalc-dims="1" decoding="async" src="https://i0.wp.com/staticimg.amarujala.com/assets/images/2026/06/05/thall-aganakada_9fcca9083c80fe2eb5c7e9fbcd1d7689.jpeg?w=1200&#038;ssl=1" alt="Delhi fire Over 80 foreign nationals stayed at Hotel Flourish Stay in a month" title="दिल्ली अग्निकांड: एक माह में 80 से ज्यादा विदेशी नागरिक होटल फ्लोरिश में ठहरे, जानें क्यों इनका बना ठिकाना?"/></figure>
</div>


<p></p>



<p>होटल में आग लगने की सूचना मिलते ही रियाजुद्दीन मंसूरी अपने कर्मचारियों के साथ मौके पर पहुंचे और उन्होंने होटल के बाहर जमीन पर दर्जनों रजाइयां और गद्दे बिछाकर अस्थायी सुरक्षा कवच तैयार किया। इससे इमारत में फंसे लोगों को कूदकर सुरक्षित बाहर निकलने में मदद मिली।</p>



<p>रियाजुद्दीन के अनुसार, सुबह अचानक शोर सुनाई देने पर बाहर निकलकर देखा तो होटल की ऊपरी मंजिलों से धुआं निकल रहा था। लोग खिड़कियों पर आकर मदद की गुहार लगा रहे थे। उन्होंने बताया कि उस समय उनके मन में सिर्फ एक ही बात थी किसी भी तरह लोगों को बचाया जाए।</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="alignleft"><img data-recalc-dims="1" decoding="async" src="https://i0.wp.com/staticimg.amarujala.com/assets/images/2026/06/05/thall-aganakada_192ff67b2e1619f176c2305353431ea4.jpeg?w=1200&#038;ssl=1" alt="Delhi fire Over 80 foreign nationals stayed at Hotel Flourish Stay in a month" title="दिल्ली अग्निकांड: एक माह में 80 से ज्यादा विदेशी नागरिक होटल फ्लोरिश में ठहरे, जानें क्यों इनका बना ठिकाना?"/></figure>
</div>


<p>रियाजुद्दीन के अनुसार, मैंने जब लोगों को इमारत से कूदते देखा, तो मैंने अपनी दुकान से गद्दे सड़क पर बिछाकर करीब 20 लोगों की जान बचाई। उनके अनुसार, करीब आठ लोगों ने सीधे गद्दों पर छलांग लगाई और गंभीर चोट से बच गए।</p>



<p>आग लगने के तुरंत बाद हमने सबसे पहले गद्दे और रजाइयां बिछाईं। बचाव कार्य के दौरान मुझे और मेरे बेटे अरमान को भी चोटें आईं। मैंने जब लोगों को इमारत से कूदते देखा, तो मैंने अपनी दुकान से गद्दे सड़क पर बिछाकर करीब 20 लोगों की जान बचाई।<strong> -रियाजुद्दीन मंसूरी</strong><br><br><br><br></p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>आरबीआई: नहीं बदलेगी आपके लोन की ईएमआई, एमपीसी ने रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रखने का लिया फैसला</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 05:20:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[India]]></category>
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					<description><![CDATA[भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा एमपीसी के फैसलों का एलान कर रहे हैं। महंगाई और पश्चिम एशिया के तनाव के बीच रेपो रेट क्या फैसला लिया गया जानने के लिए पढ़ें। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा तीन दिनों तक चले आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति बैठक यानी एमपीसी के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा एमपीसी के फैसलों का एलान कर रहे हैं। महंगाई और पश्चिम एशिया के तनाव के बीच रेपो रेट क्या फैसला लिया गया जानने के लिए पढ़ें।<br><br>भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा तीन दिनों तक चले आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति बैठक यानी एमपीसी के फैसलों का एलान कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मौद्रिक नीति समिति के सदस्यों ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला किया है। बुधवार से चल रही एमपीसी की तीन दिवसीय गहन चर्चा के बाद यह महत्वपूर्ण घोषणा की गई। पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव और इसके कारण महंगाई और आर्थिक विकास पर मंडराते जोखिमों के बीच पूरे बाजार की नजरें इस बात पर टिकी थीं कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर क्या कदम उठाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>रेपो रेट 5.25% पर बरकरार</strong></h3>



<p>भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के फैसलों का ऐलान करते हुए बताया कि प्रमुख नीतिगत दर (रेपो रेट) को 5.25 प्रतिशत पर ही अपरिवर्तित रखा गया है। एमपीसी ने सर्वसम्मति से ब्याज दरों में यथास्थिति&nbsp; बनाए रखने और &#8216;तटस्थ&#8217;&nbsp;रुख अपनाने का निर्णय लिया है। देश की आर्थिक स्थिति को लेकर आश्वस्त करते हुए गवर्नर मल्होत्रा ने साफ&nbsp;किया कि भारत की घरेलू आर्थिक गतिविधियां काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं, जो मौजूदा माहौल में अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत और सकारात्मक संकेत है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>वैश्विक चुनौतियों और महंगाई पर आरबीआई&nbsp;की पैनी नजर</strong></h3>



<p>अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण पर बात करते हुए गवर्नर ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था फिलहाल अभूतपूर्व चुनौतियों और अनिश्चितताओं से घिरी हुई है। ऊर्जा की ऊंची कीमतों का सीधा असर विकास दर में नरमी और महंगाई में वृद्धि के रूप में देखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर अभी भी लक्ष्य से नीचे है, लेकिन इसमें ऊपर की ओर जाने का रुझान बना हुआ है। इन गंभीर वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद, आरबीआई गवर्नर ने भरोसा जताया कि भारत न्यूनतम नुकसान के साथ इन वैश्विक झटकों का मजबूती से सामना करने में सक्षम है। आगे की नीति के लिए एमपीसी पूरी तरह से आंकड़ों&nbsp;पर निर्भर रहेगी और आपूर्ति पक्ष के दबावों सहित अन्य विकासों पर करीब से नजर रखेगी।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>RBI ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान घटाकर 6.6% किया</strong></h3>



<p>मौद्रिक नीति के ऐलान के दौरान आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आर्थिक विकास को लेकर चिंताएं भी जाहिर कीं। उन्होंने साफ कहा कि ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला में आ रही बाधाओं का सीधा असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ने की आशंका है, और उत्पादन लागत बढ़ने का दबाव अब अर्थव्यवस्था में साफ दिखाई देने लगा है। इसके अतिरिक्त, वैश्विक स्तर पर कमजोर मांग और उच्च लॉजिस्टिक लागत के कारण भारत के वस्तु निर्यात के सामने भी बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। इन तमाम विपरीत वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों का आकलन करते हुए, भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने जीडीपी&nbsp;ग्रोथ के अनुमान को पहले के 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है।</p>
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		<title>रक्षा क्षमता में होगा इजाफा: रूस से भारत पहुंची एस-400 मिसाइल की चौथी खेप, चीन-पाक सीमा पर बढ़ेगा सुरक्षा</title>
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		<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 03:54:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Nation]]></category>
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					<description><![CDATA[रूस से भारत को एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की चौथी खेप मिल गई है। इसके आने से चीन और पाकिस्तान सीमा पर भारत की हवाई सुरक्षा और मजबूत होगी। जानिए S-400 की खासियत… रूस से लंबी दूरी की एस-400 वायु रक्षा प्रणाली की चौथी स्क्वॉड्रन भारत को मिल गई है। इस घातक मिसाइल डिफेंस सिस्टम [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>रूस से भारत को एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की चौथी खेप मिल गई है। इसके आने से चीन और पाकिस्तान सीमा पर भारत की हवाई सुरक्षा और मजबूत होगी। जानिए S-400 की खासियत…</p>



<p>रूस से लंबी दूरी की एस-400 वायु रक्षा प्रणाली की चौथी स्क्वॉड्रन भारत को मिल गई है। इस घातक मिसाइल डिफेंस सिस्टम को जल्द ही किसी संवेदनशील क्षेत्र में तैनात किया जाएगा। इससे भारत की हवाई हमलों को नाकाम करने की क्षमता बढ़ गई है।</p>



<p>भारत ने साल 2018 में रूस से करीब 40,000 करोड़ रुपये में पांच एस-400 स्क्वॉड्रन खरीदने का समझौता किया था। इनमें से तीन स्क्वाड्रन करीब दो साल पहले ही भारत आ चुकी थीं और उन्हें रणनीतिक रूप से तैनात किया जा चुका है। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण बाकी दो स्क्वॉड्रनों की आपूर्ति में देरी हुई। पांचवीं स्क्वॉड्रन के अगले कुछ महीनों में भारत पहुंचने की उम्मीद है। चौथी स्क्वॉड्रन के आने से पूर्वी लद्दाख से लेकर पाकिस्तान से सटी सीमा तक हवाई सुरक्षा पुख्ता हो जाएगी।</p>



<p><strong>पांच और स्क्वॉड्रन की तैयारी&#8230;</strong><br>सरकार ने रूस से एस-400 की पांच और स्क्वॉड्रन खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। वायुसेना इन प्रणालियों को व्यापक सुदर्शन चक्र एयर डिफेंस नेटवर्क के तहत एकीकृत कर रही है। इस नेटवर्क में एस-400 के अलावा मध्यम दूरी की बराक-8 और अन्य प्रणालियां एक साझा कमांड-एंड-कंट्रोल ढांचे के तहत जोड़ी जा रही हैं।</p>



<p><strong>इसलिए खास</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>एस-400 एक अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणाली है, जिसे दुश्मन के हवाई हमलों से सुरक्षा के लिए तैनात किया जाता है।</li>



<li>यह लड़ाकू विमान, बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और ड्रोन को हवा में ही नष्ट करने की क्षमता रखता है।</li>



<li>इसकी मारक क्षमता 40 किलोमीटर से लेकर 400 किलोमीटर तक है।</li>



<li>सिस्टम 100 फीट से लेकर करीब 40 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ रहे टारगेट को निशाना बना सकता है।</li>



<li>एस-400 में चार अलग-अलग रेंज की मिसाइलें होती हैं, जो अलग दूरी के लक्ष्यों को नष्ट कर सकती हैं।</li>



<li>एक एस-400 रेजीमेंट में 8 लॉन्चर होते हैं और एक समय में 32 मिसाइलें दागी जा सकती हैं।</li>



<li>यह सिस्टम संभावित न्यूक्लियर मिसाइल खतरे को भी हवा में ही खत्म करने में सक्षम माना जाता है।</li>



<li>दुश्मन के विमानों और मिसाइलों को लंबी दूरी से ट्रैक और लॉक करने की क्षमता रखता है।</li>



<li>इसे आसानी से डिटेक्ट या निशाना बनाना मुश्किल होता है क्योंकि इसकी तैनाती मोबाइल प्लेटफॉर्म पर होती है।</li>



<li>माइनस 50 से माइनस 70 डिग्री सेल्सियस तक के बेहद ठंडे मौसम में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकता है।</li>



<li>नाटो देशों में इस सिस्टम को SA-21 ग्रोवलर के नाम से जाना जाता है।</li>



<li>यह किसी भी क्षेत्र की हवाई सुरक्षा को मजबूत करने वाला भारतीय वायुसेना का सबसे शक्तिशाली रक्षा सिस्टम माना जाता है।</li>
</ul>



<p><strong>ऑपरेशन सिंदूर में दिखा दम</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>एस-400 डिफेंस सिस्टम ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुश्मन वायुसेना की क्षमता को पंगु कर दिया था।</li>



<li>इस प्रणाली ने 300 किमी से ज्यादा दूर उड़ रहे पाकिस्तान के महत्वपूर्ण निगरानी विमान को मार गिराया था।</li>



<li>यह हमला सैन्य हलकों में जो सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल का रिकॉर्ड किल माना गया है।</li>
</ul>



<p><strong>भारत और रूस के बीच क्या समझौता हुआ था?</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>भारत ने रूस के साथ अक्तूबर 2018 में पांच अरब अमेरिकी डॉलर का समझौता किया था।</li>



<li>समझौते के तहत मिसाइल प्रणाली की पांच यूनिट खरीदने की बात हुई थी। इनमें से तीन यूनिट पहले ही मिल चुकी हैं। </li>



<li>सूत्रों के अनुसार, पांचवीं यूनिट नवंबर तक मिलने की उम्मीद है, जो नई तय समयसीमा के अनुसार दी जाएगी।</li>



<li>एस-400 मिसाइल प्रणाली ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अहम भूमिका निभाई थी। </li>



<li>पिछले महीने भारत ने रूस से पांच और एस-400 प्रणाली खरीदने की मंजूरी दी, जिससे इनकी कुल संख्या 10 हो जाएगी।</li>
</ul>
]]></content:encoded>
					
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		<title>&#8216;अमेरिका के लिए सबक साबित होने चाहिए ईरान के हमले&#8217;, मिसाइलें दागने के बीच IRGC की चेतावनी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 03:51:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Iran]]></category>
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					<description><![CDATA[पश्चिम एशिया में इस समय वार्ता और वार दोनों साथ चल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि उनके दखल के बाद इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच लड़ाई रुक गई है। ट्रंप के मुताबिक, इस्राइल अब बेरूत पर हमला नहीं करेगा और हिजबुल्ला भी गोलाबारी रोकेगा। साथ ही [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>पश्चिम एशिया में इस समय वार्ता और वार दोनों साथ चल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि उनके दखल के बाद इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच लड़ाई रुक गई है। ट्रंप के मुताबिक, इस्राइल अब बेरूत पर हमला नहीं करेगा और हिजबुल्ला भी गोलाबारी रोकेगा। साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता भी आखिरी दौर में है। लेकिन जमीन पर हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। ट्रंप के इस दावे के कुछ ही घंटों बाद लेबनान की तरफ से दो रॉकेट दागे गए। इस्राइली वायुसेना ने इन्हें हवा में ही मार गिराया। दूसरी तरफ, ईरान ने भी अभी तक अमेरिकी शांति प्रस्ताव पर दस्तखत नहीं किए हैं। सूत्रों का कहना है कि ईरान सिर्फ वादों पर भरोसा नहीं करेगा। वह प्रतिबंध हटाने और सुरक्षा के मोर्चे पर ठोस जमीनी कदम चाहता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">कुवैत-बहरीन पर हमलों के बाद यूएई ने खाड़ी देशों से किया एकजुट होने का आह्वान</h3>



<p>ईरान द्वारा कुवैत और बहरीन पर किए गए हमलों के बाद यूएई ने खाड़ी देशों से एकजुट रुख अपनाने का आह्वान किया।&nbsp;संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति के सलाहकार अनवर गरगाश ने कहा कि कुवैत और बहरीन के खिलाफ बार-बार होने वाली ईरानी आक्रामकता के लिए खाड़ी देशों को एक दृढ़ और एकजुट रुख अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि&nbsp;किसी भी खाड़ी देश को इन हमलों का अकेले सामना करने के लिए नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि&nbsp;खाड़ी सहयोग परिषद के सदस्य देशों की सुरक्षा आपस में जुड़ी हुई है, उनके हित साझा हैं और उनका भविष्य एक ही है। यह आक्रामकता किसी एक देश को विशेष रूप से निशाना नहीं बनाती, बल्कि हम सभी को निशाना बनाती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ईरानी संसद के डिप्टी स्पीकर बोले- तेहरान बातचीत करेगा, लेकिन अमेरिका पर भरोसा नहीं</h3>



<p>ईरानी संसद के उपसभापति का कहना है कि ईरान बातचीत करेगा लेकिन उसे अमेरिका के वादों पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि&nbsp;ईरान जरूरत पड़ने पर बातचीत करेगा, लेकिन उसे अमेरिका द्वारा किए गए किसी भी वादे पर भरोसा नहीं है।&nbsp;ईरान की अर्ध-सरकारी तसनीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, इस्लामिक सलाहकार सभा के उपाध्यक्ष मोजतबा निकजाद ने कहा, &#8220;यह कहना सही नहीं है कि हम केवल लड़ते हैं और बातचीत नहीं करते।&#8221;</p>



<p>निकजाद ने ईरान में अकाल या युद्ध से संबंधित व्यवधान के बारे में विदेशी मीडिया के दावों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि संघर्ष के चरम पर, 70 लाख लोग विस्थापित हुए, जिनमें से कई देश के उत्तरी भाग में चले गए, लेकिन सरकारी प्रबंधन के कारण किसी को भी बुनियादी सामान, रोटी या आवास प्राप्त करने में कोई समस्या नहीं हुई।</p>



<h3 class="wp-block-heading">&#8216;अमेरिका के लिए सबक साबित होने चाहिए ईरान के हमले&#8217;, मिसाइलें दागने के बीच IRGC की चेतावनी</h3>



<p>ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड का कहना है कि तेहरान के जवाबी हमले अमेरिका के लिए सबक साबित होने चाहिए।&nbsp;आईआरजीसी के जनसंपर्क विभाग ने पश्चिम एशियाई देशों में रात भर हुए हमलों के बारे में एक जारी बयान में ये बात कही।&nbsp;इसमें कहा गया है, &#8220;कल देर रात, अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक ईरानी तेल टैंकर पर मिसाइल से हमला किया, जिससे टैंकर के इंजन कक्ष को नुकसान पहुंचा।&#8221;</p>



<p>आईआरजीसी ने कहा कि इस आक्रामकता और होर्मुज जलडमरूमध्य को नियंत्रित करने वाले नियमों के उल्लंघन के जवाब में अमेरिकी-यहूदी दुश्मन से जुड़े पनाया नामक एक जहाज को आईआरजीसी नौसेना द्वारा दागी गई मिसाइलों से निशाना बनाया गया।&nbsp;इसमें कहा गया है कि अमेरिकी सेना ने इसके बाद केश्म द्वीप पर स्थित आईआरजीसी के एक संचार टावर को निशाना बनाया।</p>



<p>बयान में आगे कहा गया है, &#8220;इसके जवाब में आईआरजीसी एयरोस्पेस फोर्स ने क्षेत्र के एक देश में स्थित उनके हवाई अड्डे और हेलीकॉप्टर अड्डे के साथ-साथ अमेरिकी पांचवें बेड़े के मुख्यालय पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।&#8221; आईआरजीसी ने कहा कि&nbsp;हमने पहले ही चेतावनी दी थी कि किसी भी प्रकार की आक्रामकता का जवाब अलग और अधिक गंभीर तरीके से दिया जाएगा। हमने उसी के अनुसार कार्रवाई की है। ये प्रतिक्रियाएं सबक के रूप में काम करेंगी। हम दोहराते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को भंग करने की कोशिश करने वाली अमेरिकी सेना को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।</p>



<h3 class="wp-block-heading">इस्राइल ने दक्षिण लेबनान के ब्लाट पर किए हमले, दूर तक सुनाई दी धमाकों की आवाज</h3>



<p>अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार इस्राइल ने दक्षिणी लेबनान के मरजयून जिले के ब्लाट कस्बे को निशाना बनाया है। इस्राइली सेना की ओर से यहां भीषण हमले जारी हैं। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि&nbsp;इससे पहले पास के दिब्बीन कस्बे में एक जोरदार धमाके की आवाज सुनी गई थी।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ईरान ने कुवैत-बहरीन पर दागी मिसाइलें, अमेरिका ने पलटवार में केश्म द्वीप को बनाया निशाना</h3>



<p>अमेरिका ने दावा किया है कि उसकी सेना ने क्षेत्र के पड़ोसी देशों को निशाना बनाने वाले ईरानी मिसाइलों और ड्रोन हमलों की एक श्रृंखला को नाकाम कर दिया है। इसके साथ ही अमेरिका ने ईरान के केश्म द्वीप पर जवाबी कार्रवाई भी की है।&nbsp;अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक आधिकारिक बयान में बताया कि तेहरान ने क्षेत्र में हवाई हमलों की एक लहर शुरू की थी। सैन्य कमांड ने नोट किया कि ईरान ने क्षेत्रीय पड़ोसियों की ओर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, सभी अपने लक्ष्यों को भेदने में विफल रहीं।</p>



<p>सेंटकॉम ने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ की गई रक्षात्मक कार्रवाइयों का विवरण देते हुए खुलासा किया कि कुवैत पर दागी गई दो ईरानी मिसाइलें या तो लक्ष्य तक नहीं पहुंचीं या रास्ते में ही नष्ट हो गईं। वहीं, बहरीन पर लॉन्च की गई तीन मिसाइलों को अमेरिकी और बहरीन की वायु रक्षा बलों ने तुरंत रोक लिया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">यूएई के परमाणु संयंत्र पर ड्रोन हमले के बाद आईएईए बोला- देंगे तकनीकी सहायता</h3>



<p>अल जजीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने पुष्टि की है कि वैश्विक परमाणु निगरानी संस्था संयुक्त अरब अमीरात को व्यापक समर्थन दे रही है। यह समर्थन पिछले महीने ड्रोन हमले में निशाना बनाए गए परमाणु ऊर्जा संयंत्र के आधिकारिक दौरे के बाद दिया गया है।</p>



<p>ग्रॉसी ने कहा कि अधिकारियों ने बरकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र में हुई घटना पर असाधारण रूप से तीव्र परिचालन प्रतिक्रिया का प्रदर्शन किया और संयंत्र में बाहरी बिजली की आपूर्ति बाधित होने के तुरंत बाद रिएक्टर को बंद करने की प्रक्रिया को तेजी से अंजाम दिया।&nbsp; आईएईए प्रमुख ने आगे संकेत दिया कि सुविधा में मरम्मत के काम का पूर्ण समाधान सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी आकलन और परिचालन गतिविधियों की एक श्रृंखला आयोजित की जानी है।</p>



<p>ग्रॉसी ने बिजली संयंत्र में आगामी रखरखाव कार्य की सटीक प्रकृति या समयसीमा के संबंध में कोई और विशिष्ट विवरण नहीं दिया।&nbsp;यह महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप 17 मई को ड्रोन हमले के कारण संयुक्त अरब अमीरात की एकमात्र परमाणु ऊर्जा सुविधा में लगी आग के बाद हुआ है, जिसकी पुष्टि बाद में राज्य के अधिकारियों द्वारा की गई थी।</p>



<h3 class="wp-block-heading">आज क्या-क्या हुआ?</h3>



<ul class="wp-block-list">
<li>अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संसद को बताया कि ईरान को दी जाने वाली कोई भी प्रतिबंध राहत  परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी होगी, न कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने से।</li>



<li>अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी का कहना है कि ईरान में चल रही कई परमाणु गतिविधियां अब रुक गई हैं।</li>



<li>अमेरिकी सेना का कहना है कि उसने बोत्सवाना के झंडे वाले एक तेल टैंकर को अपंग कर दिया है, क्योंकि उसने ईरान के खर्ग द्वीप की ओर बढ़ने की कोशिश की थी।</li>



<li>संयुक्त राष्ट्र की व्यापार और विकास संस्था का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से तेल आयात की लागत $20 अरब बढ़ सकती है, जिसका सबसे बुरा असर गरीब देशों पर पड़ेगा।</li>



<li>इस्राइली सेना ने दक्षिणी लेबनान में घातक हमले जारी रखे हैं, जिसमें लेबनानी शहर अल-मरवानिया में हुआ एक हमला भी शामिल है, जिसमें चार वयस्कों और दो बच्चों की मौत हो गई।</li>



<li>दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्ला के एक ड्रोन हमले में चार इस्राइली सैनिक घायल हो गए हैं।</li>
</ul>



<p></p>



<h3 class="wp-block-heading">होर्मुज खोल दिया होता तो नहीं होती नाकेबंदी: रूबियो</h3>



<p>अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि नाकेबंदी का एकमात्र कारण यह है कि ईरान व्यापारिक जहाजों पर गोलीबारी कर रहा है। इसके पीछे सोच यह है कि अगर किसी और के जहाज बाहर नहीं निकल पाएंगे, तो ईरान के जहाज भी बाहर नहीं निकल पाएंगे। अगर ईरान ने वह करने पर सहमति जताई होती जो उसने युद्धविराम लागू होने के समय करने को कहा था, यानी होर्मुज को खोलना, तो यह नाकेबंदी नहीं होती। वे जो कर रहे हैं वह गैर-कानूनी और अवैध है। हर कोई इसके खिलाफ है।&nbsp;</p>



<p></p>



<h3 class="wp-block-heading">अमेरिका ने ईरानी क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों पर लगाया प्रतिबंध</h3>



<p>अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान के सबसे बड़े डिजिटल एसेट क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। इस कार्रवाई के तहत &#8216;नोबिटेक्स&#8217; , &#8216;वॉलेक्स&#8217;, &#8216;बिटपिन&#8217; और &#8216;रैमजीनेक्स&#8217;जैसे बड़े एक्सचेंजों पर रोक लगाई गई है। इसके साथ ही नोबिटेक्स को कंट्रोल करने वाले सैयद मोहम्मद अली आगामीर और सैयद मोहम्मद आगामीर और एक्सचेंज के सीईओ आमिर हुसैन राड पर भी पाबंदी लगाई गई है। हालांकि, नोबिटेक्स एक्सचेंज ने सरकार से किसी भी सीधे संबंध होने से इनकार किया है।</p>



<p></p>



<h3 class="wp-block-heading">युद्ध के बीच घिरे ट्रंप: मीडिया और प्रशासन का दबाव बढ़ा</h3>



<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों मीडिया और अपने ही प्रशासन के भारी दबाव में हैं। युद्ध की शुरुआत में उन्होंने दावा किया था कि यह संघर्ष कुछ ही दिनों में खत्म हो जाएगा, जो बाद में हफ्तों और अब एक लंबे खिंचते गतिरोध में बदल चुका है। जल्द ही सब कुछ ठीक होने के उनके बार-बार किए जा रहे दावों पर अब खुद अमेरिकी सरकार के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं, जिससे ट्रंप की कूटनीतिक साख दांव पर है।</p>



<p>इस बढ़ते दबाव के बीच ट्रंप लगातार हर दिन बेहद सख्त रुख अपना रहे हैं। उनका कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता बिल्कुल करीब है, लेकिन साथ ही उन्होंने ईरान को सीधी सैन्य धमकी भी दी है। ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर दोनों पक्षों के बीच जल्द ही कोई अंतिम सहमति नहीं बनती है, तो अमेरिका अपनी पूरी सैन्य ताकत के साथ ईरान पर सीधा और विनाशकारी हमला करेगा।</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>भारत समेत 60 देशों पर नया टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा अमेरिका, लगाए बेतुके आरोप</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 03:46:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[USA]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका एक बार फिर भारत के खिलाफ टैरिफ बम फोड़ने की तैयारी कर रहा है। दरअसल अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने एक ऐसा प्रस्ताव दिया है, जिसमें भारत समेत 60 देशों पर टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। आइए जानते हैं कि क्या है ये पूरा मामला&#8230; अमेरिका एक तरफ भारत के साथ संबंध बेहतर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>अमेरिका एक बार फिर भारत के खिलाफ टैरिफ बम फोड़ने की तैयारी कर रहा है। दरअसल अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने एक ऐसा प्रस्ताव दिया है, जिसमें भारत समेत 60 देशों पर टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। आइए जानते हैं कि क्या है ये पूरा मामला&#8230;<br><br>अमेरिका एक तरफ भारत के साथ संबंध बेहतर करने की दुहाई दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप प्रशासन भारत के खिलाफ कार्रवाई से बाज नहीं आ रहा है। दरअसल अमेरिकी सरकार एक बार फिर भारत पर नया टैरिफ लगाने की तैयारी कर रही है। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि यूएसटीआर ने भारत समेत 60 देशों पर ये नया टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दिया है। टैरिफ लगाने की वजह ये बताई गई है कि भारत समेत 60 देश जबरन श्रम से उत्पादित वस्तुओं के निर्यात पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने में विफल रहे हैं। <br><br><strong>अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने दिया प्रस्ताव</strong><br>अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि अमेरिकी व्यापार कानून 1974 की धारा 301 के तहत पाया गया है कि 60 देशों की नीतियां और कार्यशैली अमेरिकी व्यापार पर गैरजरूरी दबाव बढ़ाती हैं और अमेरिकी व्यापार को बाधित करती हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय, अमेरिका की एक कार्यकारी संघीय एजेंसी है, जो अमेरिका की विदेश व्यापार नीति बनाने के लिए जिम्मेदार है।</p>



<p>अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के अनुसार, भारत समेत 54 देश उन सामानों के निर्यात पर जरूरी प्रतिबंध लगाने में विफल रहे हैं, जिन्हें जबरन श्रम द्वारा बनाया जाता है। भारत के अलावा इन देशों में ऑस्ट्रेलिया, बहरीन, बांग्लादेश, चीन, जापान, सऊदी अरब, सिंगापुर, ब्रिटेन और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश भी शामिल हैं। </p>



<p><strong>जैमिसन ग्रीर ने जारी किया बयान</strong><br>अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने अपने बयान में कहा, &#8216;हमारे सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों द्वारा जबरन श्रम से निर्मित वस्तुओं के निर्यात को रोकने में विफलता अस्वीकार्य है। इससे एक ऐसी स्थिति उत्पन्न होती हैइससे अमेरिकी कामगारों को असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।&#8217;&nbsp;</p>



<p>अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने इन देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया है और इस पर जनता से प्रतिक्रिया मांगी गई है। यूएसटीआर ने कहा कि इन देशों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। यूएसटीआर ने कहा कि जबरन श्रम आयात प्रतिबंधों की कमी वैश्विक स्तर पर जबरन श्रम को समाप्त करने के प्रयासों को कमजोर करती है।&nbsp;</p>



<p><strong>भारत-अमेरिका के बीच जारी है व्यापार वार्ता</strong><br>गौरतलब है कि अतिरिक्त टैरिफ लगाने का यह प्रस्ताव ऐसे समय दिया गया है, जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है। भारत और अमेरिका के बीच हाल के समय में कई दौर की बातचीत हो चुकी है, जिनमें बाजार पहुंच, शुल्क, डिजिटल व्यापार और कृषि जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>मुजफ्फरपुर के निजी अस्पताल में भीषण आग, 20 हताहत; ICU में अफरातफरी, चार मौतों की पुष्टि</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/muzaffarpur-private-hospital-fire-20-casualties-icu-chaos-four-deaths-confirmed/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 03:44:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bihar]]></category>
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					<description><![CDATA[बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित प्रसाद अस्पताल के आईसीयू में कथित शॉर्ट सर्किट के बाद भीषण आग लग गई। राहत एवं बचाव कार्य जारी है। कई मरीजों के हताहत होने की आशंका जताई जा रही है। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में प्रसाद अस्पताल के आईसीयू में गुरुवार तड़के करीब दो बजे आग लग गई। सुबह 6:30 तक तीन [&#8230;]]]></description>
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<p>बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित प्रसाद अस्पताल के आईसीयू में कथित शॉर्ट सर्किट के बाद भीषण आग लग गई। राहत एवं बचाव कार्य जारी है। कई मरीजों के हताहत होने की आशंका जताई जा रही है।<br><br>बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में प्रसाद अस्पताल के आईसीयू में गुरुवार तड़के करीब दो बजे आग लग गई। सुबह 6:30 तक तीन शवों के निकाले जाने की पुष्टि हुई है, जबकि एक और की मौत वहीं पर हो गई। करीब 20 लोगों के हताहत होने की जानकारी आई, लेकिन मौतों की संख्या पर औपचारिक पुष्टि नहीं हो रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग अस्पताल की ऊपरी मंजिल स्थित आईसीयू में लगी, जिसके बाद पूरे परिसर में धुआं फैल गया और मरीजों व उनके परिजनों के बीच भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने का अभियान शुरू किया गया।</p>



<p><strong>10 से 15 लोग बेसुध स्थिति में निकाले गए</strong><br>ब्रहपुरा थाना क्षेत्र में इस घटना से अफरातफरी मच गई। मौके पर कई घंटे बाद भी लोग मौतों की वास्तविक संख्या नहीं बता पा रहे थे, क्योंकि बेसुध अवस्था में निकाले गए लोगों को आसपास के दूसरे अस्पतालों में ले जाने की बात कही जा रही थी। बचाव कार्य में अस्पताल के कर्मी शुरू में लगे थे, लेकिन फिर अफरातफरी की स्थिति हो गई। ब्रह्मपुरा थाने के पुलिसकर्मियों ने बताया कि आग की सूचना शोरगुल से ही मिली थी। इसके बाद जिसे-जैसे मौका मिला, भागते हुए बचाव कार्य में लग गए हैं। दमकलकर्मियों ने शॉर्ट सर्किट से आग और 10 से 15 बेसुध लोगों को निकाले जाने की बात कही। मौतों का आंकड़ा बढ़ सकता है।</p>



<p><strong>आसपास के अस्पतालों में जिला प्रशासन देखेगा</strong></p>



<p>मौके पर आए डीएम सुब्रत कुमार ने कहा कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही पर परिजनों ने शिकायतें की हैं। फिलहाल आसपास के अस्पतालों में भी टीम देख रही है कि यहां से मरीज अगर ले जाए गए हैं तो उनकी स्थिति कैसी है? उन्होंने कहा कि राहत एवं बचाव कार्य में दमकलकर्मियों ने संतोषजनक काम किया है, अब देखना है कि बचाए गए बेसुध लोगों की स्थिति कैसी है?</p>
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