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		<title>एक्सप्लेनर: न्यूजीलैंड-भारत का मुफ्त व्यापार समझौता आज से प्रभावी, अभी आयात-निर्यात कितना; डील से क्या बदलेगा?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Oct 2026 05:03:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Nation]]></category>
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					<description><![CDATA[भारत और न्यूजीलैंड के बीच फिलहाल कितना व्यापार होता है? मुक्त व्यापार समझौते से दोनों देश क्या हासिल करना चाहते हैं? न्यूजीलैंड इससे किस तरह का फायदा चाहता है? इसके अलावा भारत को एफटीए से क्या फायदा हो सकता है और हमारी मांगें क्या हैं? इसके अलावा बीते वर्षों में भारत ने किन-किन देशों से [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">भारत और न्यूजीलैंड के बीच फिलहाल कितना व्यापार होता है? मुक्त व्यापार समझौते से दोनों देश क्या हासिल करना चाहते हैं? न्यूजीलैंड इससे किस तरह का फायदा चाहता है? इसके अलावा भारत को एफटीए से क्या फायदा हो सकता है और हमारी मांगें क्या हैं? इसके अलावा बीते वर्षों में भारत ने किन-किन देशों से एफटीए किया है? आइये जानते हैं…</p>



<p class="wp-block-paragraph">भारत और न्यूजीलैंड के बीच बीते साल दिसंबर में तय हुआ मुक्त व्यापार समझौता आज (20 अक्तूबर 2026) से प्रभावी हो गया है। दोनों ही देशों के व्यापारिक और कूटनीतिक रिश्तों के लिए यह समझौता नए आयाम तय करने वाला साबित होगा। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच एफटीए पर पहली वार्ता 10 साल से भी पहले शुरू हुई थी। हालांकि, लंबे समय तक अटके रहने के बाद जब दोबारा बातचीत शुरू हुई तो महज छह महीनों में ही समझौते तक पहुंच गई और 19 महीने बाद अब मुक्त व्यापार समझौता दोनों देशों में प्रभावी हो गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">भारत और न्यूजीलैंड के बीच फिलहाल कितना व्यापार होता है? मुक्त व्यापार समझौते से दोनों देश क्या हासिल करना चाहते हैं? न्यूजीलैंड इससे किस तरह का फायदा चाहता है? इसके अलावा भारत को एफटीए से क्या फायदा हो सकता है और हमारी मांगें क्या हैं? इसके अलावा बीते वर्षों में भारत ने किन-किन देशों से एफटीए किया है? आइये जानते हैं…</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>पहले जानें- भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार के मौजूदा आंकड़े क्या?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार काफी स्थिर गति से बढ़ा है। बीते पांच साल के डाटा पर नजर डाली जाए तो सामने आता है कि वित्त वर्ष 2020-21 में दोनों देशों के बीच 86.7 करोड़ डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ था। हालांकि, कोरोना महामारी के प्रभाव के चलते अगले दो वित्त वर्ष 2021-22 में दोनों देशों का व्यापार कम हुआ।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">भारत-न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय व्यापार ने 2022-23 में फिर रफ्तार पकड़ी और यह पहली बार 1 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया। 2023-24 में दोनों देशों के व्यापार का आंकड़ा अपने सबसे उच्च स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, इसके बाद भारत-न्यूजीलैंड के व्यापार में बीते दो वित्त वर्ष (2024-25 और 2025-26) में गिरावट आई है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस दौरान भारत का निर्यात कम हुआ, जबकि न्यूजीलैंड से हमारा आयात बढ़ा है। &nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">मौजूदा समय में भारत न्यूजीलैंड के लिए 9वां सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। न्यूजीलैंड अपने कुल निर्यात का 1.8 फीसदी ही भारत को भेजता है।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>एफटीए से पहले दोनों देशों के बीच क्या थी टैरिफ की स्थिति?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">भारत के उत्पादों पर न्यूजीलैंड का औसत आयात शुल्क केवल 2.3 प्रतिशत है, जबकि न्यूजीलैंड से आने वाले उत्पादों पर भारत का औसत टैरिफ 17.8 प्रतिशत है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>एफटीए पर दोनों देशों के बीच कब चर्चा शुरू हुई?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत औपचारिक रूप से 16 मार्च 2025 को शुरू हुई थी। यह औपचारिक शुरुआत भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले के बीच एक बैठक के दौरान हुई थी।&nbsp;</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>भारत को न्यूजीलैंड से किस तरह के फायदे हासिल होंगे?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">इस व्यापार समझौते (एफटीए) से भारत को जबरदस्त फायदे होंगे। खासकर कुशल कामगारों के क्षेत्र में, सेवा निर्यात और निवेश के सेक्टर में भारत को न्यूजीलैंड से काफी मदद मिलने की संभावना है। यह समझौता न्यूजीलैंड के बाजार में भारतीय वस्तुओं के लिए न्यूनतम या शून्य तक करना सुनिश्चित करता है, जिससे भारतीय निर्यातकों की पहुंच बढ़ेगी।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>1. वस्तुओं के निर्यात में बेहतर बाजार तक पहुंच</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>100% निर्यात पर टैरिफ खत्म&nbsp;</strong><br>न्यूजीलैंड ने भारत के लिए अपनी 100% टैरिफ लाइनों पर टैरिफ को पूरी तरह खत्म कर दिया है। इससे भारत के सभी निर्यातों के लिए शुल्क-मुक्त पहुंच प्रदान की गई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>श्रम-प्रधान क्षेत्रों को लाभ</strong><br>यह बाजार पहुंच भारत के श्रम-प्रधान (लेबर इंटेंसिव( क्षेत्रों की प्रतिस्पर्धा को बढ़ाती है। सीधे तौर पर समझें तो भारत के जो व्यापारी अमेरिका में अपना बाजार खो चुके थे, वह न्यूजीलैंड की तरफ से टैरिफ कम किए जाने के बाद यहां अपने उत्पादों का निर्यात बढ़ा सकते हैं। कपड़ा, परिधान, चमड़ा, जूते-चप्पल, समुद्री उत्पाद, रत्न और आभूषण, हस्तशिल्प, इंजीनियरिंग सामान और ऑटोमोबाइल सेक्टर को इससे जबरदस्त फायदा होने की संभावना है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>2. सेवाओं और कुशल पेशेवरों को मौका</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">भारत ने न्यूजीलैंड से सेवाओं और प्रतिभा की आवाजाही के लिए सबसे बेहतरीन समझौता हासिल किया है। भारत लंबे समय से न्यूजीलैंड से इसकी मांग कर रहा था।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>3. सेवाओं का व्यापक कवरेज&nbsp;</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">भारत को सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), आईटी-सक्षम सेवाओं, पेशेवर सेवाओं, शिक्षा, वित्तीय सेवाओं, पर्यटन, निर्माण और अन्य व्यावसायिक सेवाओं सहित उच्च कीमत वाले क्षेत्रों की एक विस्तृत शृंखला में प्रतिबद्धताएं प्राप्त हुई हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>4. अस्थायी रोजगार वीजा का प्रावधान</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">एफटीए भारतीय पेशेवरों के लिए एक नई अस्थायी रोजगार प्रवेश वीजा (Temporary Employment Entry Visa) का रास्ता भी बनाता है। इस वीजा के जरिए एक समय में 5,000 पेशेवरों का कोटा तय किया गया है। इसके जरिए भारतीयों के न्यूजीलैंड में रुकने की अवधि तीन साल तक हो सकती है। इससे न्यूजीलैंड में उच्च मांग वाले क्षेत्रों जैसे आईटी, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और निर्माण, साथ ही आयुष चिकित्सकों, योग प्रशिक्षकों, भारतीय शेफ और संगीत शिक्षकों की जरूरत पूरी होगी।</p>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>5. स्टूडेंट्स के लिए पढ़ाई और नौकरी का मौका</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">भारत ने न्यूजीलैंड से एफटीए के जरिए छात्रों के लिए भी जरूरी पहुंच हासिल की है। अब न्यूजीलैंड में पढ़ाई के लिए जाने के लिए छात्रों की कोई सीमा नहीं होगी। साथ ही पढ़ाई के दौरान ही उन्हें काम के मौके मुहैया कराने के लिए अलग कार्यक्रम शुरू होंगे।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसके अलावा &nbsp;डॉक्टरेट हासिल करने वालों के लिए चार साल तक और विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) में स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों के लिए तीन साल तक न्यूजीलैंड में रहकर ही काम करने के मौके देने से जुड़ा समझौता हुआ है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><br><strong>6. भारत के किसानों को भी होगा फायदा</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">एफटीए के जरिए भारत के किसानों को न्यूजीलैंड से कृषि संबंधित जानकारी और उत्पादन बढ़ाने के माध्यम मिलेंगे। यह तकनीक के हस्तांतरण के जरिए मुमकिन होगा।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>7. निवेश और विनिर्माण को बढ़ावा</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। यह निवेश &#8216;मेक इन इंडिया&#8217; के तहत विनिर्माण, बुनियादी ढांचे, सेवाओं, नवाचार और रोजगार का समर्थन करेगा। इसके अलावा न्यूजीलैंड ने भारत की फार्मा इंडस्ट्री की पहुंच को बढ़ाने के लिए नियामकों का दायरा बढ़ाएंगे। इससे गैरजरूरी निरीक्षणों में कमी आएगी और भारत के चिकित्सा उत्पाद-उपकरण न्यूजीलैंड पहुंचेंगे।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>इन क्षेत्रों में न्यूजीलैंड को नहीं मिलेगी पहुंच</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">भारत के किसानों और घरेलू उद्योग को सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, डेयरी, कॉफी, दूध, पनीर, प्याज, चीनी, मसाले, खाद्य तेल और रबर जैसे प्रमुख कृषि उत्पादों को बाजार पहुंच से बाहर रखा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि डेयरी क्षेत्र पूरी तरह से एक &#8216;रेड लाइन&#8217; (लक्ष्मण रेखा) है। संवेदनशील और राजनीतिक मुद्दा व्यापार वार्ता के दौरान डेयरी हमेशा से सबसे संवेदनशील और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक रहा है। जहां न्यूजीलैंड दुनिया के सबसे बड़े डेयरी निर्यातकों में से एक है, वहीं भारत में यह क्षेत्र करोड़ों छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका से जुड़ा है। भारत के लिए इन किसानों के हितों की रक्षा करना और बाजार को संरक्षण देना एक ऐसा मुद्दा है जिस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मौजूदा व्यापार के आंकड़े व्यावहारिक रूप से देखें तो दोनों देशों के बीच मौजूदा डेयरी व्यापार बहुत कम है। वित्त वर्ष 2025 (FY2025) के आंकड़ों के अनुसार, न्यूजीलैंड से भारत को होने वाला डेयरी निर्यात महज 10 लाख 70 हजार डॉलर (लगभग 9 से 10 करोड़ रुपये) का रहा।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>न्यूजीलैंड को कैसे मिलेगा भारत से एफटीए का फायदा?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">यह व्यापार समझौता (एफटीए) न्यूजीलैंड को कई महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक लाभ देगा, जिससे उसे भारत के बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार तक पहुंच मिलेगी।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>1. भारतीय बाजार तक व्यापक पहुंच</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">समझौते के जरिए न्यूजीलैंड के निर्यातकों को 1.4 अरब भारतीय उपभोक्ताओं तक पहुंचने का मौका देगा। खासकर भारत की तरफ से टैरिफ कम किए जाने के बाद न्यूजीलैंड के 95 फीसदी मौजूदा निर्यातों पर टैरिफ खत्म हो जाएंगे या उनमें भारी कटौती की जाएगी। नियमों के तहत समझौते पर मुहर लगते ही लगभग 57 फीसदी निर्यात पहले ही दिन से शुल्क-मुक्त हो जाएंगे। वहीं, जब समझौता पूरी तरह लागू होगा, तब न्यूजीलैंड के 82 फीसदी निर्यात पर भारत टैरिफ नहीं लगाएगा।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>2. टैरिफ की बचत&nbsp;</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">इसका असर यह होगा कि भारत को न्यूजीलैंड से मिलने वाले आयातों पर यहां के व्यापारिकों को अतिरिक्त शुल्क नहीं खर्च करना होगा और यह अनुमानित टैरिफ बचत पहले ही दिन करीब 4.30 करोड़ डॉलर होगी। इसके बढ़कर 6.20 करोड़ डॉलर होने की संभावना है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>3. प्रतिस्पर्धी स्थिति</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">इस एफटीए के बाद न्यूजीलैंड के निर्यातकों को ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और चिले जैसे अन्य प्रमुख प्रतिस्पर्धियों के बराबर या बेहतर स्थिति मिलेगी, जिनके पास पहले से ही भारत के साथ एफटीए हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>4. प्रमुख निर्यात क्षेत्रों में लाभ</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>फल</strong><br>समझौते में उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिनमें न्यूजीलैंड निर्यात बढ़ाना चाहता है, जैसे फल, ऊन और शराब का निर्यात। न्यूजीलैंड के प्रमुख कृषि उत्पाद, जैसे- कीवीफ्रूट पर टैरिफ आधा हो जाएगा, उधर सेब पर भी टैरिफ में 50 फीसदी कटौती की जाएगी। इसके अलावा चेरी, एवोकाडो, पर्सिमन्स और ब्लूबेरी के लिए 10 वर्षों में शुल्क-मुक्त पहुंच प्राप्त होगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>डेयरी और खाद्य सामग्री</strong><br>पुनः निर्यात के लिए डेयरी और अन्य खाद्य सामग्री को पहले दिन से शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। उच्च मूल्य वाले डेयरी उत्पादों और थोक शिशु फार्मूला के लिए सात वर्षों में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ऊन और वानिकी&nbsp;</strong><br>भेड़ का मांस, ऊन, कोयला और 95 प्रतिशत से अधिक वानिकी और लकड़ी के निर्यातों पर तत्काल टैरिफ समाप्त कर दिया जाएगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>शराब और शहद</strong><br>वाइन पर टैरिफ को 150 प्रतिशत से घटाकर 10 वर्षों में 25 या 50 प्रतिशत कर दिया जाएगा। मानुका शहद पर टैरिफ 66 प्रतिशत से घटकर पांच वर्षों में 16.5 फीसदी हो जाएगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>5. सेवाओं और कुशल कार्यबल से फायदा</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सेवाओं का व्यापार&nbsp;</strong><br>न्यूजीलैंड को सेवाओं के निर्यात (खासकर फिनटेक, निजी शिक्षा, पेशेवर और पर्यावरणीय सेवाओं) के लिए व्यापक कवरेज और सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र (MFN) का दर्जा हासिल होगा। इससे भविष्य में व्यापार सुरक्षित होगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>कुशल पेशेवरों के लिए वीजा&nbsp;</strong><br>न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए कौशल की कमी वाले क्षेत्रों (जैसे डॉक्टर, नर्स, शिक्षक, आईसीटी और इंजीनियरिंग) में भारतीय पेशेवरों के लिए प्रति वर्ष औसतन 1,667 कुशल 3-वर्षीय कार्य वीजा की सुविधा देने की एक प्रक्रिया स्थापित की गई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>वर्किंग हॉलिडे स्कीम&nbsp;</strong><br>पर्यटन और ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने के लिए हर साल 1,000 स्थानों की पेशकश की गई है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><br><strong>6. निवेश और रणनीतिक लाभ</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>निवेश प्रतिबद्धता: </strong>न्यूजीलैंड अगले पंद्रह वर्षों में भारत में $20 बिलियन के निवेश की सुविधा देने के लिए प्रतिबद्ध है।<br><strong>दीर्घकालिक लक्ष्य: </strong>यह समझौता 10 वर्षों में निर्यात के मूल्य को दोगुना करने के न्यूजीलैंड के लक्ष्य की ओर प्रगति में मदद करेगा।</p>
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		<title>बिगड़ने लगी दिल्ली-एनसीआर की हवा: एक्यूआई 200 के पार, पर्यावरण मंत्री ने जांचे इंतजाम, निर्माण स्थलों पर सख्ती</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Oct 2026 04:59:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi]]></category>
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					<description><![CDATA[सर्दियों की आहट के साथ ही दिल्ली-एनसीआर पर प्रदूषण का खतरा मंडराने लगा है। हालांकि, दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) समग्र रूप से मध्यम श्रेणी में बना हुआ है, पर सोमवार को यह कई इलाकों में 200 के पार पहुंच गया। सर्दियों की आहट के साथ ही दिल्ली-एनसीआर पर प्रदूषण का खतरा मंडराने लगा [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">सर्दियों की आहट के साथ ही दिल्ली-एनसीआर पर प्रदूषण का खतरा मंडराने लगा है। हालांकि, दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) समग्र रूप से मध्यम श्रेणी में बना हुआ है, पर सोमवार को यह कई इलाकों में 200 के पार पहुंच गया।<br><br>सर्दियों की आहट के साथ ही दिल्ली-एनसीआर पर प्रदूषण का खतरा मंडराने लगा है। हालांकि, दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) समग्र रूप से मध्यम श्रेणी में बना हुआ है, पर सोमवार को यह कई इलाकों में 200 के पार पहुंच गया। एनसीआर में फरीदाबाद के बल्लभगढ़ में सबसे ज्यादा एक्यूआई 248 रिकॉर्ड किया गया। वहीं, ग्रेटर नोएडा 205 और गुरुग्राम 214 एक्यूआई के साथ खराब श्रेणी में आ गए हैं। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री ने &nbsp;बैठक कर एंटी-स्मॉग गन की उपलब्धता और जल छिड़काव की समीक्षा की।</p>



<p class="wp-block-paragraph">केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, मंगलवार से पूरी दिल्ली की हवा खराब श्रेणी में आने की आशंका है। सोमवार शाम 6 बजे पूसा में सबसे ज्यादा एक्यूआई 281 दर्ज की गई। दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की ताजा सूची में भारत के 13 शहर शामिल हैं। दिल्ली इससे बाहर है। बुलंदशहर 198 एक्यूआई के साथ दुनिया में तीसरे और अगरतला 181 एक्यूआई के साथ चौथे स्थान पर रहा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंचने के बाद सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के उपायों की निगरानी तेज कर दी है। पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने सोमवार को लुटियंस दिल्ली के विभिन्न स्थानों का निरीक्षण कर ऊंची इमारतों में लगे एंटी-स्मॉग गन और वॉटर मिस्ट सिस्टम की स्थापना व संचालन की स्थिति जांची। </p>



<p class="wp-block-paragraph">मंत्री ने सरदार पटेल मार्ग से निरीक्षण की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के निर्देशों के अनुसार निर्धारित श्रेणी की व्यावसायिक, संस्थागत और हॉस्पिटैलिटी इमारतों में प्रदूषण नियंत्रण के उपाय करना अनिवार्य है। भूतल के साथ पांच मंजिल या उससे अधिक ऊंची तथा 3000 वर्गमीटर से अधिक निर्मित क्षेत्रफल वाली इमारतों पर विशेष नजर रखी जाएगी। एंटी-स्मॉग गन और वॉटर मिस्ट सिस्टम का उद्देश्य धूल के कणों को हवा में फैलने से रोकना है।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जिन इमारतों में ये उपकरण नहीं लगे हैं या निर्धारित मानकों के अनुरूप काम नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। मंत्री ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण नियमों के पालन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। सरकार की निगरानी इमारतों तक सीमित नहीं रहेगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>एक नवंबर से वाहनों पर प्रतिबंध</strong><br>मंत्री ने बताया कि एक नवंबर से बीएस-6 उत्सर्जन मानक से नीचे के वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर निर्धारित प्रतिबंध लागू होंगे। उन्होंने वाहन मालिकों से नियमों का पालन करने और वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) रखने की अपील की।</p>
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		<title>फ्रांस में बदलाव के कयास: आंदोलन और जनाक्रोश के बाद प्रतिद्वंद्वी को फायदा! क्या मैक्रों को मात देंगी मरीन?</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/france-political-change-protests-public-anger-marine-le-pen-vs-macron/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Oct 2026 04:57:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[France]]></category>
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					<description><![CDATA[फ्रांस में राजनीतिक संकट से मौजूदा राष्ट्रपति मैक्रों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। आंदोलन और जनाक्रोश के बाद प्रतिद्वंद्वी को फायदा मिलना तय माना जा रहा है। इसी बीच बड़ा सवाल ये है कि क्या चुनावी रेस में कथित तौर पर आगे बताई जा रहीं मरीन मैक्रों को मात दे सकेंगी? करीब एक दशक पहले मैक्रों ने [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">फ्रांस में राजनीतिक संकट से मौजूदा राष्ट्रपति मैक्रों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। आंदोलन और जनाक्रोश के बाद प्रतिद्वंद्वी को फायदा मिलना तय माना जा रहा है। इसी बीच बड़ा सवाल ये है कि क्या चुनावी रेस में कथित तौर पर आगे बताई जा रहीं मरीन मैक्रों को मात दे सकेंगी?<br><br>करीब एक दशक पहले मैक्रों ने पुरानी राजनीतिक व्यवस्था बदलने, आर्थिक सुधारों को तेजी से लागू करने और देश में व्यवस्था ठीक करने का वादा किया था। लेकिन कार्यकाल के सिर्फ छह महीने बाकी रहते, प्रदर्शनों ने उन्हें कमजोर राष्ट्रपति साबित कर दिया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">विश्लेषकों का कहना है कि हिंसा दिखाती है कि अब सरकारी तंत्र का असर कितना कम रह गया है। एक ऐसे नेता की लाचारी खुलकर सामने आ गई है, जो न तो जनता के गुस्से को थाम पा रहा है, जिसके पास खर्च करने के लिए पैसा नहीं बचा है, राजनीतिक समर्थन कमजोर हो चुका है और कानून-व्यवस्था पर पकड़ लगातार ढीली होती जा रही है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>प्रतिद्वंद्वी दावेदार को मिल सकता है फायदा</strong><br>माना जा रहा है कि मौजूदा उथल-पुथल का फायदा धुर दक्षिणपंथी नेशनल रैली की नेता मारिन ले पेन को मिल सकता है। वह 2027 के राष्ट्रपति चुनाव की रेस में पहले ही सबसे आगे चल रही हैं। जनता के गुस्से और हिंसा से कानून-व्यवस्था को लेकर पैदा हुए डर का फायदा उन्हें मिलना तय है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>अब सहयोगी भी मैक्रों से खफा</strong><br>राष्ट्रपति मैक्रों के विरोधियों के साथ-साथ पुराने सहयोगी भी अब खुलकर उनकी आलोचना करने लगे हैं। उनका मानना है कि फ्रांस आज जिस चौराहे पर खड़ा है, उसकी वजह 2024 में मैक्रों की तरफ से लिया गया वह फैसला था जब उन्होंने अचानक मध्यावधि चुनाव कराने का ऐलान कर अपनी ही ताकत कमजोर कर ली थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">साल 2018-2019 के येलो वेस्ट आंदोलन के दौरान मैक्रों ने अरबों यूरो की छूट देकर जनता के गुस्से को शांत कर दिया था। लेकिन इस बार फ्रांस की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था और बंटी संसद के कारण उनके हाथ बंधे हैं। मैक्रों के कैंप के पूर्व सांसद लोइक केरव्रान ने कहा, इस कार्यकाल का अंत एक धीमी सजा जैसा है<br><br></p>
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		<title>तेल अवीव से वियना जा रही फ्लाइट को बम की धमकी: बुल्गारिया में की इमरजेंसी लैंडिग, मिग-29 से की सुरक्षा निगरानी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Oct 2026 04:17:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[International]]></category>
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					<description><![CDATA[इस्राइल के तेल अवीव से ऑस्ट्रिया के वियना जा रहे विमान को बम की धमकी मिलने के बाद बुल्गारिया की राजधानी सोफिया में आपात स्थिति में उतारा गया। बुल्गारिया के सरकारी टेलीविजन के अनुसार, विमान में 51 यात्री और चालक दल के छह सदस्य सवार थे। चालक दल के एक सदस्य ने धमकी मिलने की [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">इस्राइल के तेल अवीव से ऑस्ट्रिया के वियना जा रहे विमान को बम की धमकी मिलने के बाद बुल्गारिया की राजधानी सोफिया में आपात स्थिति में उतारा गया। बुल्गारिया के सरकारी टेलीविजन के अनुसार, विमान में 51 यात्री और चालक दल के छह सदस्य सवार थे। चालक दल के एक सदस्य ने धमकी मिलने की जानकारी दी थी।<br><br>इस्राइल के तेल अवीव से ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना जा रहे एक विमान को बम की धमकी मिलने से फ्लाइट में हड़कंप मच गया। धमकी मिलने के बाद फ्लाइट को बुल्गारिया की राजधानी सोफिया की ओर मोड़ दिया गया और आपात स्थिति में उतारा गया। बुल्गारिया के सरकारी टेलीविजन ने यह जानकारी दी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बीएनटी की रिपोर्ट के मुताबिक, परिवहन मंत्रालय के बयान का हवाला देते हुए बताया गया कि रविवार शाम उड़ान भरने वाले विमान में 51 यात्री और चालक दल के छह सदस्य सवार थे। सभी लोग सुरक्षित विमान से उतर गए। विमान के चालक दल के एक सदस्य ने बम की धमकी मिलने की सूचना दी थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>लड़ाकू विमान ने की विमान की निगरानी</strong><br>धमकी की सूचना मिलने के बाद वायुसेना के एक लड़ाकू विमान ने एयरबस ए320 को सोफिया में उतरने तक सुरक्षा निगरानी प्रदान की। बुल्गारिया के रक्षा मंत्रालय ने भी पुष्टि की कि विमान में बम की धमकी मिलने के बाद लड़ाकू विमानों को कार्रवाई के लिए भेजा गया था।&nbsp;घटना की जांच की जा रही है। हालांकि, संबंधित एयरलाइन का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">विमान से सामान्य आपातकालीन संकेत मिलने के बाद बुल्गारियाई वायुसेना के मिग-29 लड़ाकू विमान ने उसे एस्कॉर्ट करते हुए हवाई अड्डे तक पहुंचाया। जानकारी के मुताबिक,&nbsp;विमान की सुरक्षा जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद यात्रियों को वैकल्पिक उड़ानों से उनके गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मामले की जांच शुरू</strong><br>बुल्गारिया के परिवहन मंत्रालय ने बताया कि घटना से निपटने के लिए एक संकट प्रतिक्रिया दल बनाया गया है। मामले की जांच भी शुरू कर दी गई है।&nbsp;फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट फ्लाइटअवेयर के अनुसार, विमान ने रविवार को स्थानीय समयानुसार शाम 6:46 बजे इस्राइल के बेन गुरियन हवाई अड्डे से उड़ान भरी थी। यह रात 9:43 बजे सोफिया के वासिल लेव्स्की हवाई अड्डे पर उतरा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">फ्लाइटरडार24 के आंकड़ों के मुताबिक, विमान रात करीब 9:10 बजे रोमानिया के हवाई क्षेत्र में दाखिल हुआ था। इसके बाद उसने दक्षिण की ओर मुड़कर बुल्गारिया का रुख किया। एडीएस-बी एक्सचेंज के आंकड़ों में भी इसी समय विमान से 7700 स्क्वॉक कोड प्रसारित होने की जानकारी सामने आई। यह कोड सामान्य आपातकालीन स्थिति का संकेत देता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>फ्लाईदुबई विमान घटना के बाद मिली बम की धमकी</strong><br>यह घटना तेल अवीव जाने वाली फ्लाईदुबई की एक अन्य फ्लाइट से जुड़ी घटना के कुछ सप्ताह बाद हुई है। उस मामले में सह-पायलट पर कथित तौर पर कुल्हाड़ी से पायलट पर हमला करने का आरोप लगा था। इसके बाद विमान का रास्ता बदलकर उसे सऊदी अरब में सुरक्षित उतारा गया था।&nbsp;बाद में संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों ने कहा था कि सह-पायलट की कथित योजना तेल अवीव के बेन गुरियन हवाई अड्डे पर विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की थी।</p>
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		<title>धड़ल्ले से बिक रही एंटीबायोटिक: 57% तक बैक्टीरिया पर बेअसर; क्या अब दवाओं से उपचार होगा मुश्किल?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Oct 2026 04:13:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[States]]></category>
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					<description><![CDATA[बुखार, गले में खराश और पेशाब में जलन होने पर एंटीबायोटिक लेने वालों के लिए चिंता बढ़ाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। एक अध्ययन में कुछ बैक्टीरिया पर इन दवाओं का असर 57 फीसदी तक कम मिला। आखिर एंटीबायोटिक के बेअसर होने का खतरा कितना बढ़ गया है? पढ़िए इस रिपोर्ट में।  बुखार, गले में [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><em>बुखार, गले में खराश और पेशाब में जलन होने पर एंटीबायोटिक लेने वालों के लिए चिंता बढ़ाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। एक अध्ययन में कुछ बैक्टीरिया पर इन दवाओं का असर 57 फीसदी तक कम मिला। आखिर एंटीबायोटिक के बेअसर होने का खतरा कितना बढ़ गया है? पढ़िए इस रिपोर्ट में। </em><br></p>



<p class="wp-block-paragraph">बुखार, गले में खराश या पेशाब में जलन होने पर लोग जल्द ठीक होने के लिए एंटीबायोटिक लेते हैं। लेकिन इन दवाओं के लगातार और गलत इस्तेमाल से बैक्टीरिया पर इनका असर कम होने का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ऑनलाइन दवा और जांच के आंकड़ों पर आधारित एक अध्ययन में करीब 2.57 करोड़ दवाओं के पर्चों का विश्लेषण किया गया। इनमें लगभग 27.8 लाख पर्चों में एंटीबायोटिक दर्ज थी। यानी हर 10 में से करीब एक पर्चे में एंटीबायोटिक थी। अध्ययन में सामने आया कि धड़ल्ले से एंटीबायोटिक के यूज से अब इसका असर बैक्टीरिया पर करीब 57 फीसदी तक कम हो गया है। खासतौर पर पेशाब के संक्रमण से जुड़े ई. कोलाई बैक्टीरिया में सिप्रोफ्लॉक्सासिन में 57 फीसदी और सेफ्ट्रियाक्सोन के खिलाफ 53.6 फीसदी प्रतिरोध मिला। इसका मतलब है कि जांच में इतने फीसदी बैक्टीरिया इन दवाओं के प्रति प्रतिरोधी पाए गए।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>1.55 लाख से अधिक &nbsp;जांच नमूनों का विश्लेषण</strong><br>इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली के शोधकर्ताओं ने ऑनलाइन दवा सप्लाई करने वाली कंपनी टाटा 1एमजी के 2023 से 2025 के बीच के ऑनलाइन दवा और जांच से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन किया। दवाओं के करीब 2.57 करोड़ पर्चों में से लगभग 27.8 लाख में एंटीबायोटिक दर्ज थी। इसके अलावा, सूक्ष्मजीवों की जांच से जुड़े 1.55 लाख से अधिक नमूनों का विश्लेषण किया गया। इनमें करीब 94 फीसदी नमूने पेशाब से जुड़े थे।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><a href="https://www.amarujala.com/user/himanshu-mishra-election" target="_blank" rel="noopener"></a></p>
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		<item>
		<title>गन्ने वाले इथेनॉल पेट्रोल में मिलाने पर रोक: मक्का, टूटे चावल पर भी निर्णय; केंद्र सरकार के नए फैसले में क्या?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Oct 2026 04:13:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[India]]></category>
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					<description><![CDATA[चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए गन्ने से बने इथेनॉल को पेट्रोल में मिलाने पर रोक लगा दी गई है। केंद्र सरकार ने मिश्रण पर रोक के साथ साफ किया है कि अब मक्का, टूटे चावल व अन्य पदार्थों से बने इथेनॉल का मिश्रण किया जाएगा। जानिए इस फैसले से क्या बदलेगा? सरकार ने घरेलू [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए गन्ने से बने इथेनॉल को पेट्रोल में मिलाने पर रोक लगा दी गई है। केंद्र सरकार ने मिश्रण पर रोक के साथ साफ किया है कि अब मक्का, टूटे चावल व अन्य पदार्थों से बने इथेनॉल का मिश्रण किया जाएगा। जानिए इस फैसले से क्या बदलेगा?<br><br>सरकार ने घरेलू स्तर पर चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए गन्ने के उत्पादों से बने इथेनॉल के पेट्रोल में मिश्रण पर फिलहाल रोक लगाने का फैसला किया है। इसके तहत, सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम विपणन कंपनियों ने पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के लिए 2026-27 आपूर्ति वर्ष की ताजा खरीद निविदा में गन्ने के रस, चीनी की चाशनी और बी-हेवी शीरे से बने इथेनॉल को शामिल नहीं किया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>कितना इथेनॉल खरीदने की तैयारी, क्या पेट्रोल में भी मिश्रण?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने 16 अक्तूबर को पेट्रोलियम विपणन कंपनियों की ओर से जारी निविदा में नवंबर से शुरू होने वाले आपूर्ति वर्ष के लिए करीब 1,100 करोड़ लीटर इथेनॉल की खरीद के लिए बोलियां मांगी हैं। इसका उद्देश्य पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने की जरूरत को पूरा करना है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>मक्के से बने इथेनॉल पर क्या फैसला हुआ?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">निविदा के अनुसार, मक्का, टूटे चावल, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा खरीदे गए अधिशेष चावल और सी-हेवी शीरे से बने इथेनॉल की आपूर्ति के लिए बोलियां लगाई जा सकती हैं। निविदा में मक्के से बने इथेनॉल पर प्रोत्साहन राशि भी घटाकर 68.86 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, जो पहले 71.86 रुपये प्रति लीटर थी।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>कच्चे माल की खरीद की रणनीति में क्या बदलाव?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">गन्ने उत्पादों से बने इथेनॉल की खरीद पर पाबंदी से पेट्रोल मिश्रण कार्यक्रम के लिए कच्चे माल की खरीद की रणनीति में बदलाव होगा। इस कार्यक्रम में कच्चे तेल के आयात को कम करने व वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कटौती के लिए अनाज व गन्ने दोनों से बने इथेनॉल का इस्तेमाल किया जाता रहा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>क्या गन्ने का उत्पादन हो सकता है प्रभावित?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">सरकार की तरफ से यह कदम घरेलू स्तर पर चीनी की उपलब्धता को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच उठाया गया है। महाराष्ट्र और कर्नाटक सहित प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में कम बारिश के कारण उत्पादन घटने और कीमतें बढ़ने का जोखिम पैदा हुआ है।</p>
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		<title>चोरबागान भगदड़ में 19 की मौत, दुर्गा पूजा में भीड़ संभालने के लिए नौ आईपीएस तैनात</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/chorbagan-stampede-19-dead-durga-puja-crowd-control-nine-ips-officers-deployed/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Oct 2026 04:12:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Kolkata]]></category>
		<category><![CDATA[Nation]]></category>
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					<description><![CDATA[कोलकाता के दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ में 19 लोगों ने जान गंवाई है। 25 लोग घायल भी हुए हैं। सीएम शुभेंदु अधिकारी ने भगदड़ की जांच के निर्देश दिए हैं। राष्ट्रपति, पीएम मोदी, विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हताहतों के परिजनों के प्रति संवेदनाएं जताई हैं। भगदड़ में छाती पर दबाव से [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">कोलकाता के दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ में 19 लोगों ने जान गंवाई है। 25 लोग घायल भी हुए हैं। सीएम शुभेंदु अधिकारी ने भगदड़ की जांच के निर्देश दिए हैं। राष्ट्रपति, पीएम मोदी, विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हताहतों के परिजनों के प्रति संवेदनाएं जताई हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">भगदड़ में छाती पर दबाव से दम घुटने की आशंका से हुई ज्यादातर मौतें</h3>



<p class="wp-block-paragraph">भगदड़ के दौरान मारे गए 19 लोगों में से ज्यादातर की मौत छाती पर अत्यधिक दबाव पड़ने से दम घुटने के कारण होने की आशंका है। स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर यह जानकारी दी। रिपोर्ट में कुछ मृतकों के फेफड़े, पेट, लिवर और अग्न्याशय जैसे अंगों के साथ सिर में गंभीर चोटों के संकेत भी मिले हैं। अधिकारी के मुताबिक, सात लोगों की मौत दम घुटने और कई अंगों में चोट लगने के कारण होने की आशंका है। कम से कम छह मामलों में पसलियां टूटकर फेफड़ों में धंस गई थीं। अधिकारी ने बताया कि भीड़ में अत्यधिक दबाव के कारण छाती फैल नहीं पाती और सांस लेने में परेशानी होती है। गंभीर स्थिति में इससे मौत भी हो सकती है। कुल 19 मृतकों में से 18 का पोस्टमार्टम कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में, जबकि एक का नील रतन सरकार मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में किया गया। शुरुआती रिपोर्टों में अंदरूनी अंगों के फटने और रक्तस्राव का भी उल्लेख है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा</h3>



<p class="wp-block-paragraph">दुर्गा पूजा के दूसरे दिन कोलकाता में यातायात और भीड़ प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने साल्ट लेक स्थित राज्य पुलिस के यातायात नियंत्रण कक्ष और लालबाजार स्थित कोलकाता पुलिस मुख्यालय के नियंत्रण कक्ष का दौरा किया। यह समीक्षा कोलकाता के एक प्रमुख दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ से 19 लोगों की मौत और 25 लोगों के घायल होने के एक दिन बाद की गई। मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ यातायात व्यवस्था, निगरानी तंत्र और सुरक्षा तैयारियों का जायजा लिया। लालबाजार में उन्होंने सीसीटीवी के जरिए प्रमुख पूजा पंडालों के आसपास भीड़ और यातायात की स्थिति देखी। अधिकारी ने कहा कि हर नागरिक की सुरक्षा और भलाई प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि पुलिस लगातार स्थिति पर नजर रख रही है और जरूरत के अनुसार व्यवस्था में बदलाव कर रही है। मुख्यमंत्री ने पूजा समितियों और श्रद्धालुओं से पुलिस व प्रशासन का सहयोग करने की अपील की।</p>



<h3 class="wp-block-heading">दुर्गा पूजा में भीड़ संभालने के लिए नौ आईपीएस अधिकारी तैनात</h3>



<p class="wp-block-paragraph">पश्चिम बंगाल सरकार ने कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ से 19 लोगों की मौत के एक दिन बाद भीड़ प्रबंधन की जिम्मेदारी नौ अनुभवी आईपीएस अधिकारियों को सौंपी है। अधिकारियों को त्योहार के दौरान भारी भीड़ को नियंत्रित करने और ऐसी घटना दोबारा होने से रोकने के लिए तैनात किया गया है। कोलकाता पुलिस ने प्रमुख पूजा पंडालों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए 11 बिंदुओं वाली एडवाइजरी जारी की है। इसमें बारिश के दौरान पंडालों के प्रवेश द्वार बंद करने और अंदर मौजूद लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिसकर्मियों को ड्यूटी स्थल नहीं छोड़ने, पर्याप्त रोशनी सुनिश्चित करने और भीड़ के अनुसार लोगों की आवाजाही नियंत्रित करने को कहा गया है। वीआईपी वाहनों को पंडालों तक जाने की अनुमति नहीं होगी। पुलिसकर्मियों को पूजा समितियों के स्वयंसेवकों के साथ समन्वय करने और रस्सियां, बैरिकेड व लाउडस्पीकर तैयार रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">आरोपियों को 28 अक्तूबर तक पुलिस हिरासत</h3>



<p class="wp-block-paragraph">भगदड़ के मामले में गिरफ्तार आरोपियों को अदालत ने 28 अक्तूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। आरोपियों के वकील एमडी यासिम रहमान ने बताया कि पुलिस ने हिरासत एक नवंबर तक देने की मांग की थी, लेकिन न्यायाधीश ने 28 अक्तूबर तक की अनुमति दी। वकील ने अदालत में दलील दी कि आरोपी बाहरी थे और दुर्गा पूजा देखने आए थे। उनके मुताबिक, भारी भीड़ और लोगों को परेशान देखकर आरोपियों ने बचाव कार्य में मदद करने की कोशिश की थी। हालांकि, यह आरोपियों के वकील का पक्ष है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">भगदड़ के बाद दुर्गा पूजा पंडालों की सुरक्षा जांच शुरू</h3>



<p class="wp-block-paragraph">भगदड़ के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है। शनिवार शाम उत्तर कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ में 19 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 25 लोग घायल हुए थे। इस घटना के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के प्रमुख दुर्गा पूजा पंडालों में सुरक्षा इंतजामों की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की। समिति ने रविवार को कोलकाता के प्रमुख सामुदायिक पूजा पंडालों का दौरा शुरू किया। इसमें आपदा प्रबंधन सचिव राजेश कुमार सिंह और अग्निशमन सेवा के महानिदेशक अनुज शर्मा शामिल हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सीएम शुभेंदु ने जारी किए पुलिस को सुरक्षा संबंधी निर्देश</h3>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा, &#8221;बीएनएस के प्रावधानों के तहत छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है और वे पुलिस हिरासत में हैं। मृतकों के शव उनके परिजनों को सौंपे जा रहे हैं। भगदड़ में घायल हुए 25 लोगों में से दो फिलहाल आईसीयू में भर्ती हैं।&#8221; मुख्यमंत्री ने कहा, &#8221;26 अक्तूबर को विजय सम्मिलनी कार्यक्रम के दौरान हम हादसे में जान गंवाने वाले 19 लोगों को श्रद्धांजलि देंगे। इसी कार्यक्रम में घायलों के 25 परिजनों को भी 25-25 लाख रुपये के चेक सौंपे जाएंगे।&#8221; सीएम अधिकारी ने कहा, &#8221;मैंने पुलिस को निर्देश दिया है कि आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी व्यवस्था की जाए और स्थिति से निपटने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएं।&#8221;</p>



<h3 class="wp-block-heading">सीएम शुभेंदु बोले- मामला दर्ज हो चुका है, परिवारों को आठ से नौ शव सौंपे जा चुके हैं</h3>



<p class="wp-block-paragraph">पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा, “शुरुआती कदम उठाए जा रहे हैं। पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया है और आगे कार्रवाई की जाएगी।&nbsp;हालांकि, हमारी पहली प्राथमिकता पोस्टमार्टम कराने और मृतकों के शव उनके परिजनों को सौंपने की थी। अब तक आठ से नौ शव परिवारों को सौंपे जा चुके हैं।”</p>



<figure class="wp-block-embed is-type-rich is-provider-x wp-block-embed-x"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<div class="embed-x"><blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="en" dir="ltr">Kolkata, West Bengal: CM Suvendu Adhikari says, &quot;The initial steps are being taken. The police have registered a suo motu case, and action will be taken. However, our first priority was to conduct the post-mortems and hand over the bodies of the deceased to their family members.… <a href="https://t.co/ksyQdpIt9J">pic.twitter.com/ksyQdpIt9J</a></p>&mdash; IANS (@ians_india) <a href="https://x.com/ians_india/status/2111724918870073808?ref_src=twsrc%5Etfw">October 18, 2026</a></blockquote><script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></div>
</div></figure>



<h3 class="wp-block-heading">टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने पुलिस-प्रशासन पर उठाए सवाल</h3>



<p class="wp-block-paragraph">दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ की घटना पर टीएमसी (ममता गुट) के सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा, &#8221;मैंने बचपन से लेकर अब तक ऐसी घटना कभी नहीं देखी। यह कुप्रबंधन का नतीजा है। यहां पूरी तरह से कुप्रबंधन हुआ है। आपने देखा कि परिसर के अंदर रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। पंडाल की संरचना इस तरह बनाई गई थी कि बाहर ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने की जगह ही नहीं थी। वहां एक ऊंचा गलियारा भी बनाया गया था। मुझे समझ नहीं आता कि पुलिस ने इसकी अनुमति क्यों दी। पूरी व्यवस्था भीड़ प्रबंधन की जरूरतों के अनुरूप नहीं थी। पुलिस क्या कर रही थी? वहां एक भी पुलिस अधिकारी मौजूद नहीं था।&#8221;</p>
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		<title>बिहार एसटीईटी 2026 का एडमिट कार्ड जारी: 25 अक्तूबर से शुरू होगा इम्तिहान, परीक्षा केंद्र जाने से पहले जान लें</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Oct 2026 03:52:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bihar]]></category>
		<category><![CDATA[Education]]></category>
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					<description><![CDATA[बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने बिहार एसटीईटी 2026 का प्रवेश पत्र जारी कर दिया है। अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट से अपना प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकते हैं। परीक्षा 25 अक्तूबर से 20 नवंबर 2026 तक कंप्यूटर आधारित माध्यम से आयोजित होगी। परीक्षा केंद्र, तारीख, पाली और रिपोर्टिंग समय की जानकारी प्रवेश पत्र पर मिलेगी। परीक्षा में [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने बिहार एसटीईटी 2026 का प्रवेश पत्र जारी कर दिया है। अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट से अपना प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकते हैं। परीक्षा 25 अक्तूबर से 20 नवंबर 2026 तक कंप्यूटर आधारित माध्यम से आयोजित होगी। परीक्षा केंद्र, तारीख, पाली और रिपोर्टिंग समय की जानकारी प्रवेश पत्र पर मिलेगी। परीक्षा में शामिल होने से पहले सभी विवरण जांचना जरूरी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी बिहार एसटीईटी 2026 का प्रवेश पत्र जारी कर दिया है। परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थी आधिकारिक प्रवेश पत्र पोर्टल पर जाकर अपना हॉल टिकट डाउनलोड कर सकते हैं। यह परीक्षा माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर शिक्षक बनने की पात्रता से जुड़ी है। प्रवेश पत्र डाक से नहीं भेजा जाएगा, इसलिए उम्मीदवारों को इसे ऑनलाइन प्राप्त करना होगा। डाउनलोड करने के लिए आवेदन क्रमांक या पंजीकरण संख्या और पासवर्ड अथवा जन्मतिथि की जरूरत पड़ सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>बिहार एसटीईटी की परीक्षा कब होगी?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">बिहार एसटीईटी 2026 की परीक्षा 25 अक्तूबर से 20 नवंबर 2026 तक कंप्यूटर आधारित परीक्षा के रूप में आयोजित किए जाने की जानकारी दी गई है। परीक्षा दो पालियों में हो सकती है। अभ्यर्थियों को अपनी परीक्षा की सही तारीख, पाली और केंद्र का पता प्रवेश पत्र पर देखकर ही तय करना चाहिए। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार, पहली पाली के लिए रिपोर्टिंग सुबह 8:30 बजे, प्रवेश द्वार बंद होने का समय सुबह 9:30 बजे और परीक्षा शुरू होने का समय सुबह 10 बजे बताया गया है। दूसरी पाली के लिए रिपोर्टिंग दोपहर 1:30 बजे और परीक्षा शुरू होने का समय दोपहर 3 बजे दिया गया है। अंतिम पुष्टि प्रवेश पत्र से करें।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>प्रवेश पत्र डाउनलोड कैसे करें?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">प्रवेश पत्र डाउनलोड करने के लिए सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। वहां बिहार एसटीईटी 2026 प्रवेश पत्र से संबंधित लिंक खोलें। इसके बाद आवेदन क्रमांक या पंजीकरण संख्या और मांगा गया पासवर्ड अथवा जन्मतिथि दर्ज करके प्रवेश करें। स्क्रीन पर प्रवेश पत्र दिखाई देने के बाद उसे डाउनलोड कर लें और साफ प्रिंट निकालें। प्रिंट लेने से पहले नाम, फोटो, हस्ताक्षर, विषय, परीक्षा की तारीख, पाली और केंद्र का पता ध्यान से जांचें। परीक्षा के दिन प्रवेश पत्र की मुद्रित प्रति साथ ले जाना जरूरी होगा। भविष्य में जरूरत पड़ने पर उपयोग के लिए प्रवेश पत्र की अतिरिक्त प्रति भी सुरक्षित रख सकते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>परीक्षा केंद्र पर कौन-से दस्तावेज ले जाएं?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र के साथ मान्य मूल फोटो पहचान पत्र ले जाना चाहिए। पहचान के लिए मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड, पासपोर्ट, वाहन चलाने का लाइसेंस या सरकार द्वारा जारी अन्य मान्य पहचान पत्र उपयोगी हो सकता है। प्रवेश पत्र पर छपे निर्देशों के अनुसार अतिरिक्त फोटो की जरूरत हो तो उन्हें भी साथ रखें। उम्मीदवारों को रिपोर्टिंग समय से पहले केंद्र पहुंचना चाहिए, ताकि पहचान सत्यापन और प्रवेश की प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके। मोबाइल फोन, स्मार्ट घड़ी, कैलकुलेटर, ब्लूटूथ उपकरण और अध्ययन सामग्री जैसी प्रतिबंधित वस्तुएं परीक्षा कक्ष में न ले जाएं। केंद्र पर लागू नियमों का पालन करना जरूरी है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>प्रवेश पत्र में गलती हो तो क्या करें?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">यदि बिहार एसटीईटी 2026 के प्रवेश पत्र में नाम, जन्मतिथि, फोटो, हस्ताक्षर, विषय या पंजीकरण संख्या से जुड़ी कोई गलती दिखाई देती है, तो उम्मीदवार इसे नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में आधिकारिक वेबसाइट पर दिए गए सहायता केंद्र या संपर्क माध्यम से परीक्षा प्राधिकरण से संपर्क करें। अपनी आवेदन संबंधी जानकारी और पंजीकरण विवरण तैयार रखें, ताकि समस्या का समाधान करने में आसानी हो। परीक्षा की तारीख और केंद्र के बारे में किसी भ्रम की स्थिति में प्रवेश पत्र और आधिकारिक सूचना को प्राथमिकता दें। परीक्षा में शामिल होने से पहले सभी विवरणों की जांच कर लें। परीक्षा कार्यक्रम या निर्देशों में बदलाव होने पर आधिकारिक वेबसाइट पर जारी सूचना ही मान्य होगी।</p>
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		<title>क्या होता है आईपीओ, कंपनियां क्यों लाती हैं; आम लोग कैसे कर सकते हैं इसमें निवेश?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 17 Oct 2026 04:21:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[India]]></category>
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					<description><![CDATA[जियो प्लेटफॉर्म्स के मेगा आईपीओ को लेकर शेयर बाजार में चर्चा तेज है। ऐसे में समझिए आईपीओ क्या होता है, कंपनियां इसके जरिए पैसा क्यों जुटाती हैं और आम निवेशक इसमें कैसे निवेश कर सकते हैं। साथ ही जानिए आईपीओ से जुड़ी जरूरी शब्दावली, शेयरों की कीमत तय होने से लेकर आवंटन और लिस्टिंग तक [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">जियो प्लेटफॉर्म्स के मेगा आईपीओ को लेकर शेयर बाजार में चर्चा तेज है। ऐसे में समझिए आईपीओ क्या होता है, कंपनियां इसके जरिए पैसा क्यों जुटाती हैं और आम निवेशक इसमें कैसे निवेश कर सकते हैं। साथ ही जानिए आईपीओ से जुड़ी जरूरी शब्दावली, शेयरों की कीमत तय होने से लेकर आवंटन और लिस्टिंग तक की प्रक्रिया और निवेश से जुड़े जोखिम।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जियो के मेगा आईपीओ की इन दिनों शेयर बाजार में खूब चर्चा हो रही है। रिलायंस इंडस्ट्रीज की जियो प्लेटफॉर्म्स के इस आईपीओ के जरिए 30,213 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><em>ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर आईपीओ क्या होता है? कंपनियां इसे क्यों लाती हैं? इससे जुड़ी कौन-कौन सी शब्दावली होती है? कंपनियों को किन प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है? आम लोग इसमें कैसे निवेश कर सकते हैं?</em></p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>आईपीओ से क्या समझते हैं?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">आईपीओ का पूरा नाम इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग है। जब कोई कंपनी पहली बार अपने शेयर आम निवेशकों को खरीदने के लिए पेश करती है, तो इसे आईपीओ कहा जाता है। इसके जरिए निवेशकों को कंपनी में हिस्सेदारी खरीदने का मौका मिलता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आईपीओ पूरा होने और शेयर स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध होने के बाद निवेशक इन शेयरों की बाजार में खरीद-बिक्री कर सकते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>कंपनियां आईपीओ क्यों लाती हैं?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">कंपनियां अपनी अलग-अलग वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए आईपीओ लाती हैं। इसके प्रमुख कारण हैं:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>कारोबार का विस्तार:</strong> नए बाजारों में पहुंचने और कारोबार बढ़ाने के लिए।</li>



<li><strong>नई परियोजनाएं: </strong>नए प्लांट, सुविधाएं और दूसरी परियोजनाएं शुरू करने के लिए।</li>



<li><strong>कर्ज चुकाना:</strong> कंपनी पर मौजूद कर्ज का बोझ कम करने के लिए।</li>



<li><strong>नई तकनीक और शोध:</strong> तकनीक विकसित करने और शोध पर खर्च करने के लिए।</li>



<li><strong>पुराने निवेशकों को मौका:</strong> मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेच सकते हैं।</li>



<li><strong>बाजार में पहचान:</strong> शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने से कंपनी की पहचान बढ़ सकती है।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph">आईपीओ के बाद कंपनी को अपने वित्तीय प्रदर्शन और जरूरी कारोबारी जानकारियां नियमानुसार सार्वजनिक करनी होती हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>आईपीओ में नए शेयर जारी होते हैं या पुराने शेयर बिकते हैं?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">आईपीओ में यह समझना जरूरी है कि शेयर कंपनी जारी कर रही है या मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं। इससे पता चलता है कि शेयरों की बिक्री से मिलने वाली रकम किसे मिलेगी।<br><br><strong>1. फ्रेश इश्यू</strong><br>इसमें कंपनी नए शेयर जारी करती है। इनकी बिक्री से मिलने वाली रकम कंपनी को मिलती है, जिसका इस्तेमाल कारोबार बढ़ाने, कर्ज चुकाने या नई परियोजनाओं के लिए किया जा सकता है।<br><br><strong>2. ऑफर फॉर सेल</strong><br>इसमें कंपनी के मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेचते हैं। इससे मिलने वाली रकम आम तौर पर शेयर बेचने वाले निवेशकों को मिलती है, कंपनी को नहीं।<br><br>किसी आईपीओ में फ्रेश इश्यू, ऑफर फॉर सेल या दोनों शामिल हो सकते हैं। इसलिए आवेदन से पहले यह देखना जरूरी है कि आईपीओ से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल कैसे होगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>आईपीओ कितने प्रकार के होते हैं?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">शेयरों की कीमत तय करने के तरीके के आधार पर आईपीओ मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं।<br><br><strong>1. फिक्स्ड प्राइस इश्यू</strong><br>इसमें कंपनी आईपीओ खुलने से पहले ही शेयर की कीमत तय कर देती है। निवेशक उसी कीमत पर शेयर खरीदने के लिए आवेदन करते हैं।<br><br><strong>2. बुक बिल्डिंग इश्यू</strong><br>इसमें कंपनी शेयर की एक निश्चित कीमत के बजाय प्राइस बैंड जारी करती है। निवेशक तय दायरे में बोली लगाते हैं और इन बोलियों के आधार पर शेयर की अंतिम कीमत तय होती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>क्या होता है प्राइस बैंड?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">बुक बिल्डिंग आईपीओ में शेयर की न्यूनतम और अधिकतम कीमत के बीच एक दायरा तय किया जाता है। इसे प्राइस बैंड कहते हैं।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>फ्लोर प्राइस: </strong>प्राइस बैंड की सबसे कम कीमत।</li>



<li><strong>कैप प्राइस:</strong> प्राइस बैंड की सबसे ज्यादा कीमत।</li>



<li><strong>इश्यू प्राइस:</strong> वह अंतिम कीमत जिस पर आईपीओ के शेयर आवंटित किए जाते हैं।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph">उदाहरण के लिए, अगर किसी आईपीओ का प्राइस बैंड 100 से 120 रुपये है, तो निवेशक निर्धारित नियमों के अनुसार, इस दायरे में बोली लगा सकते हैं। अंतिम कीमत बोलियों और मांग के आधार पर तय होती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>आईपीओ से जुड़ी जरूरी शब्दावली क्या-क्या है?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">आईपीओ की प्रक्रिया और कंपनी के दस्तावेजों को समझने के लिए कुछ शब्दों का अर्थ जानना जरूरी है।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>इश्यूअर (Issuer):</strong> आईपीओ के जरिए शेयर जारी करने वाली कंपनी।</li>



<li><strong>अंडरराइटर (Underwriter):</strong> आईपीओ की प्रक्रिया में कंपनी की मदद करने वाली वित्तीय संस्था या मध्यस्थ।</li>



<li><strong>डीआरएचपी (DRHP):</strong> ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस। इसमें कंपनी के कारोबार, वित्तीय स्थिति, योजनाओं और जोखिमों की जानकारी होती है।</li>



<li><strong>आरएचपी (RHP): </strong>रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस। इसमें आईपीओ से जुड़ी अद्यतन जानकारी दी जाती है।</li>



<li><strong>सब्सक्रिप्शन: </strong>आईपीओ में शेयरों के लिए निवेशकों की ओर से किए गए आवेदन।</li>



<li><strong>अलॉटमेंट: </strong>निवेशकों को शेयर आवंटित करने की प्रक्रिया।</li>



<li><strong>लिस्टिंग:</strong> स्टॉक एक्सचेंज पर कंपनी के शेयर सूचीबद्ध होने की प्रक्रिया।</li>



<li><strong>लिस्टिंग गेन: </strong>शेयर की लिस्टिंग कीमत इश्यू प्राइस से अधिक होने पर मिलने वाला अंतर। इसकी कोई गारंटी नहीं होती।</li>
</ul>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>क्या होता है लॉट साइज?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">आईपीओ में निवेशक आम तौर पर शेयरों की एक निर्धारित संख्या के लिए आवेदन करते हैं। इस संख्या को लॉट साइज कहते हैं। आवेदन के लिए जरूरी रकम शेयर की कीमत और एक लॉट में शामिल शेयरों की संख्या पर निर्भर करती है।<br><br>उदाहरण के लिए, अगर एक लॉट में 100 शेयर हैं और इश्यू प्राइस 110 रुपये प्रति शेयर है, तो एक लॉट के लिए 11,000 रुपये की जरूरत होगी। यह केवल समझाने के लिए दिया गया उदाहरण है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>ओवरसब्सक्रिप्शन और अंडरसब्सक्रिप्शन क्या हैं?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">आईपीओ में उपलब्ध शेयरों के मुकाबले निवेशकों की मांग को इन शब्दों से समझा जाता है।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>ओवरसब्सक्रिप्शन: </strong>उपलब्ध शेयरों से ज्यादा शेयरों के लिए आवेदन आना।</li>



<li><strong>अंडरसब्सक्रिप्शन: </strong>उपलब्ध शेयरों की तुलना में कम आवेदन आना।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph">ओवरसब्सक्रिप्शन होने पर हर आवेदक को शेयर मिलना जरूरी नहीं है। आवंटन संबंधित नियमों और निवेशक की श्रेणी के अनुसार किया जाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>कौन होते हैं एंकर निवेशक?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">एंकर निवेशक बड़े संस्थागत निवेशक होते हैं, जिन्हें बुक बिल्डिंग आईपीओ में निर्धारित प्रक्रिया के तहत आम निवेशकों के लिए इश्यू खुलने से पहले शेयरों के लिए बोली लगाने का अवसर दिया जाता है। उनकी भागीदारी से आईपीओ में बड़े निवेशकों की शुरुआती रुचि का संकेत मिल सकता है। हालांकि, इससे यह तय नहीं होता कि दूसरे निवेशकों को भी फायदा होगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>क्या होता है ग्रीन शू ऑप्शन?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">ग्रीन शू ऑप्शन ऐसा प्रावधान है, जिसके तहत तय शर्तों के अनुसार आईपीओ में मूल योजना से अधिक शेयर आवंटित किए जा सकते हैं। इसे ओवर-अलॉटमेंट ऑप्शन भी कहा जाता है। यह सुविधा हर आईपीओ में होना जरूरी नहीं है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>क्या होता है फ्लिपिंग?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">कुछ निवेशक आईपीओ में मिले शेयरों को लंबे समय तक रखने के बजाय लिस्टिंग के शुरुआती दिनों में ही बेच देते हैं। कम समय में शेयर बेचकर मुनाफा कमाने की कोशिश वाली इस रणनीति को फ्लिपिंग कहते हैं। हालांकि, शेयर की कीमत बढ़ने की गारंटी नहीं होती और कीमत गिरने पर नुकसान भी हो सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>आईपीओ में आवेदन करने के लिए क्या जरूरी है?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">आईपीओ में आवेदन करने के लिए निवेशक को कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होती हैं।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>पैन कार्ड:</strong> वैध पैन कार्ड होना चाहिए।</li>



<li><strong>डीमैट खाता: </strong>शेयरों को इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखने के लिए डीमैट खाते की जरूरत होती है।</li>



<li><strong>आवेदन का माध्यम: </strong>आईपीओ के नियमों के अनुसार आवेदन और भुगतान की प्रक्रिया पूरी करनी होती है।</li>



<li><strong>ट्रेडिंग खाता:</strong> आवेदन के लिए हर स्थिति में ट्रेडिंग खाते की जरूरत नहीं होती, लेकिन लिस्टिंग के बाद शेयर बेचने के लिए इसकी जरूरत पड़ सकती है।</li>
</ul>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>आम आदमी आईपीओ में आवेदन कैसे कर सकता है?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">आम निवेशक ब्रोकर के एप या वेबसाइट, बैंक की नेट बैंकिंग सुविधा या एएसबीए (एप्लिकेशन सपोर्टेड बाय ब्लॉक्ड अमाउंट) के जरिए आईपीओ में आवेदन कर सकते हैं।<br><br><strong>1. आईपीओ चुनें: </strong>ब्रोकर के ऐप या वेबसाइट पर उपलब्ध आईपीओ की सूची देखें। बैंक की नेट बैंकिंग में भी आवेदन का विकल्प देख सकते हैं।<br><br><strong>2. कंपनी की जानकारी पढ़ें:</strong> कंपनी के कारोबार, वित्तीय स्थिति और संभावित जोखिमों को समझें।<br><br><strong>3. आवेदन भरें:</strong> शेयरों की संख्या, बोली की कीमत और जरूरी विवरण दर्ज करें।<br><br><strong>4. रकम ब्लॉक करें:</strong> यूपीआई या एएसबीए के जरिए आवेदन की रकम ब्लॉक करें। एएसबीए के तहत रकम बैंक खाते में ब्लॉक रहती है और शेयर आवंटित होने पर ही जरूरी रकम काटी जाती है।<br><br><strong>5. अलॉटमेंट का इंतजार करें:</strong> आईपीओ बंद होने के बाद नियमों के अनुसार शेयर आवंटन की प्रक्रिया पूरी होती है। हर आवेदक को शेयर मिलना जरूरी नहीं है।<br><br><strong>6. शेयरों की लिस्टिंग देखें: </strong>शेयर आवंटित होने पर वे डीमैट खाते में जमा होते हैं। लिस्टिंग के बाद निवेशक उन्हें अपने पास रख सकते हैं या स्टॉक एक्सचेंज पर बेच सकते हैं।<br><br>अगर शेयर आवंटित नहीं होते, तो ब्लॉक की गई रकम जारी कर दी जाती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>आईपीओ लाने के लिए किसी कंपनी को किन चरणों से गुजरना पड़ता है?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">आईपीओ लाने के लिए कंपनी को कई वित्तीय, कानूनी और नियामकीय प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। इसके लिए कंपनी वित्तीय संस्थाओं, मर्चेंट बैंकरों, ऑडिटरों और कानूनी सलाहकारों की मदद लेती है।<br><br><strong>1. सलाहकारों की नियुक्ति:</strong> कंपनी आईपीओ की तैयारी, दस्तावेज तैयार करने और नियामकीय प्रक्रियाओं में मदद के लिए विशेषज्ञों की नियुक्ति करती है।<br><br><strong>2. डीआरएचपी तैयार करना: </strong>कंपनी अपने कारोबार, वित्तीय स्थिति, प्रबंधन, भविष्य की योजनाओं और संभावित जोखिमों की जानकारी के साथ ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस तैयार करती है।<br><br><strong>3. सेबी की समीक्षा: </strong>कंपनी डीआरएचपी को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की नियामकीय प्रक्रिया के तहत जमा करती है। सेबी दस्तावेजों की समीक्षा कर सकता है और जरूरत पड़ने पर कंपनी से स्पष्टीकरण या बदलाव मांग सकता है। इसका उद्देश्य निवेशकों के सामने कंपनी और आईपीओ से जुड़ी जरूरी जानकारी उपलब्ध कराना है।<br><br><strong>4. रोड शो:</strong> कंपनी के अधिकारी संभावित निवेशकों के सामने कारोबार, वित्तीय प्रदर्शन और भविष्य की योजनाएं रखते हैं। इन प्रस्तुतियों और बैठकों को रोडशो कहा जाता है।<br><br><strong>5. कीमत और तारीख तय करना: </strong>कंपनी आईपीओ के प्रकार के अनुसार शेयरों की कीमत या प्राइस बैंड तय करती है। इसके बाद आईपीओ खुलने और बंद होने की तारीखों की घोषणा की जाती है।<br><br><strong>6. आवेदन और शेयर आवंटन:</strong> आईपीओ खुलने पर निवेशक निर्धारित समय में आवेदन करते हैं। आईपीओ बंद होने के बाद नियमों के अनुसार शेयरों का आवंटन किया जाता है।<br><br><strong>7. स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टिंग: </strong>प्रक्रिया पूरी होने के बाद कंपनी के शेयर स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध होते हैं। इसके बाद निवेशक बाजार में इन शेयरों की खरीद-बिक्री कर सकते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>इश्यू प्राइस और लिस्टिंग प्राइस में क्या अंतर है?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>इश्यू प्राइस: </strong>वह कीमत जिस पर आईपीओ के तहत निवेशकों को शेयर पेश किए जाते हैं और आवंटन की अंतिम कीमत तय होती है।<br><br><strong>लिस्टिंग प्राइस:</strong> वह कीमत जिस पर कंपनी के शेयर स्टॉक एक्सचेंज पर कारोबार शुरू करते हैं।<br><br>लिस्टिंग प्राइस बाजार में खरीद और बिक्री के ऑर्डर के आधार पर तय होती है। यह इश्यू प्राइस से अधिक, बराबर या कम हो सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>लिस्टिंग के दिन कारोबार कैसे शुरू होता है?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">आईपीओ की लिस्टिंग के दिन शेयरों की शुरुआती कीमत तय करने के लिए प्री-ओपन प्रक्रिया होती है।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>सुबह 9 से 9:45 बजे:</strong> निवेशक खरीदने और बेचने के ऑर्डर देते हैं।</li>



<li><strong>सुबह 9:45 से 9:55 बजे: </strong>ऑर्डर का मिलान कर शुरुआती कीमत तय की जाती है।</li>



<li><strong>सुबह 9:55 से 10 बजे:</strong> नियमित कारोबार शुरू होने से पहले की प्रक्रिया होती है।</li>



<li><strong>सुबह 10 बजे:</strong> शेयरों की खरीद-बिक्री शुरू होती है।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>प्रोस्टेट कैंसर सर्वे: 69% पुरुष नहीं जानते क्यों होती है ये बीमारी, कौन सा टेस्ट कराना है ये भी नहीं पता</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/prostate-cancer-survey-69-percent-men-unaware-causes-tests-screening/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 17 Oct 2026 04:19:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Health]]></category>
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					<description><![CDATA[एक हालिया सर्वे में सामने आया है कि 45 साल से अधिक उम्र के कई भारतीय पुरुष प्रोस्टेट कैंसर की जांच, जोखिम और इलाज से अनजान हैं। डॉक्टरों से चर्चा करने में झिझक भी बड़ी बाधा है। इस कैंसर से सालाना लाखों लोगों की मौत हो रही है। कैंसर वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">एक हालिया सर्वे में सामने आया है कि 45 साल से अधिक उम्र के कई भारतीय पुरुष प्रोस्टेट कैंसर की जांच, जोखिम और इलाज से अनजान हैं। डॉक्टरों से चर्चा करने में झिझक भी बड़ी बाधा है। इस कैंसर से सालाना लाखों लोगों की मौत हो रही है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कैंसर वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है। हर साल कैंसर से लाखों लोगों की मौत हो जाती है। महिलाओं में ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर जबकि पुरुषों में फेफड़े-मुंह और प्रोस्टेट कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा देखा जाता रहा है। प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाले प्रमुख कैंसर में से एक है, लेकिन भारत में इसे लेकर जागरूकता की कमी चिंता बढ़ा रही है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, समय रहते प्रोस्टेट कैंसर की जांच हो जाए तो बीमारी के बढ़ने और इसके गंभीर रूप लेने के खतरे को काफी कम किया जा सकता है। हालांकि भारत को लेकर हैरानी की बात यह है कि यहां 45 साल से अधिक उम्र के 10 में से करीब 6 पुरुषों को यह भी नहीं पता कि उन्होंने कभी प्रोस्टेट कैंसर की जांच कराई है या नहीं?</p>



<p class="wp-block-paragraph">एक सर्वे में सामने आया है कि करीब 69 फीसदी पुरुष इस बीमारी का एक भी जोखिम कारक नहीं जानते हैं। वहीं, ज्यादातर पुरुषों को शुरुआती जांच में इस्तेमाल होने वाले पीएसए ब्लड टेस्ट के बारे में भी जानकारी नहीं थी। समस्या सिर्फ जानकारी की कमी तक सीमित नहीं है। कई पुरुष डॉक्टर से प्रोस्टेट की सेहत पर बात करने में भी झिझकते हैं और पेशाब से जुड़ी समस्याओं को बढ़ती उम्र का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।<br><br><strong>सर्वे में चौंकाने वाले खुलासे</strong><br><br>हील फाउंडेशन की ओर से किए गए एक हालिया सर्वे में पता चला है कि भारत में 45 साल और इससे अधिक उम्र के 84 फीसदी पुरुष ऐसे हैं, जिन्होंने या तो कभी प्रोस्टेट कैंसर की जांच नहीं कराई या उन्हें अपनी जांच की स्थिति के बारे में जानकारी ही नहीं है। कई पुरुषों ने सर्वे में बताया कि वे मानते हैं कि उन्हें इस जांच की जरूरत ही नहीं है।<br><br>दिल्ली-एनसीआर, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और महाराष्ट्र के कुल 1,036 पुरुषों को इस सर्वे में शामिल किया गया था। इसमें प्रोस्टेट कैंसर के जोखिम, इसकी जांच और इलाज के विकल्पों को लेकर जागरूकता की कमी सामने आई। सर्वे में यह भी पता चला कि कई पुरुष डॉक्टरों से प्रोस्टेट की सेहत के बारे में बात करने से हिचकिचाते हैं।<br>&nbsp;</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>सर्वे के मुताबिक, 68.9 फीसदी पुरुष प्रोस्टेट कैंसर का एक भी जोखिम कारक नहीं बता सके। </li>



<li>केवल 13.2 फीसदी पुरुषों को पता था कि परिवार में पहले किसी को यह कैंसर होना भी बीमारी का खतरा बढ़ा सकता है। </li>



<li>करीब 75 फीसदी पुरुषों का मानना था कि प्रोस्टेट कैंसर की निगरानी या इससे जुड़ी जांच 50 साल या उससे अधिक उम्र में ही शुरू होनी चाहिए।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><br>ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. देवव्रत आर्य कहते हैं, ये आंकड़े प्रोस्टेट कैंसर को लेकर जागरूकता की बड़ी कमी दिखाते हैं। आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि पुरुषों को नियमित स्वास्थ्य संबंधी सलाह में प्रोस्टेट की सेहत के बारे में भी जानकारी दी जानी चाहिए।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>नियमित हेल्थ चेकअप के बावजूद जांच को लेकर जानकारी की कमी</strong><br><br>सर्वे में एक और अहम बात सामने आई। करीब दो-तिहाई पुरुषों ने बताया कि वे हर साल सामान्य हेल्थ चेकअप तो कराते हैं। इसके बावजूद प्रोस्टेट कैंसर की जांच को लेकर जानकारी की कमी बनी हुई है।<br>&nbsp;</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>करीब 60.8 फीसदी पुरुषों को पता नहीं था कि उन्होंने प्रोस्टेट कैंसर की जांच कराई है या नहीं।</li>



<li>वहीं, केवल छह में से लगभग एक पुरुष ने बताया कि उसने कभी यह जांच कराई थी।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><br>पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर की शुरुआती जांच में इस्तेमाल होने वाले पीएसए (पीएसए) ब्लड टेस्ट के बारे में भी जानकारी कम थी। केवल 31 फीसदी पुरुषों ने इस जांच का नाम सुना था।<br>&nbsp;</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>पीएसए यानी प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन एक ऐसा प्रोटीन है, जिसका स्तर खून की जांच से मापा जाता है। इसका स्तर बढ़ा हुआ मिलने पर प्रोस्टेट में कैंसर के अलावा दूसरी समस्याओं की आशंका भी हो सकती है। </li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph">फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ. नितेश रोहतगी कहते हैं, ये सर्वे एक चिंताजनक स्थिति को दिखाता है। पुरुष सामान्य हेल्थ चेकअप तो करा रहे हैं, लेकिन प्रोस्टेट की सेहत पर नियमित रूप से चर्चा नहीं हो रही है।<br>&nbsp;</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>84 फीसदी पुरुषों का जांच नहीं कराना, अपनी स्थिति को लेकर अनिश्चित होना या जांच को गैर-जरूरी समझना बताता है कि अभी जागरूकता बढ़ाने के लिए काफी काम करने की जरूरत है।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><br>सर्वे में यह भी सामने आया कि बुजुर्ग मरीजों और उनका&nbsp;देखभाल करने वाले परिवार के लोगों को प्रोस्टेट कैंसर के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं होती। कई बार इसके लक्षणों को बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इससे बीमारी का पता चलने में देरी हो सकती है।<br><br><strong>डॉक्टर से प्रोस्टेट की सेहत पर बात करने में झिझक</strong><br><br>सर्वे में पुरुषों के बीच एक और बड़ी समस्या सामने आई। करीब 59.5 फीसदी पुरुषों ने कहा कि वे डॉक्टर से प्रोस्टेट कैंसर की जांच या इलाज के बारे में बात करने में असहज महसूस करते हैं। वहीं, केवल 18 फीसदी पुरुषों ने बताया कि वे खुद आगे बढ़कर डॉक्टर से इस विषय पर बातचीत शुरू करेंगे।<br><br>इसके उलट, 84 फीसदी पुरुषों ने कहा कि वे स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए इंटरनेट पर खोज करते हैं। करीब 48 फीसदी पुरुषों ने बताया कि प्रोस्टेट कैंसर के बारे में डॉक्टर से पहली बार बातचीत करने का फैसला लेने में परिवार या दोस्तों की भूमिका रही।<br><br>इससे पता चलता है कि ऑनलाइन जानकारी और परिवार की सलाह का असर तो है, लेकिन डॉक्टर से सीधे बात करने को लेकर अब भी झिझक बनी हुई है।<br><br><br><br>&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8211;<br><strong>नोट:&nbsp;</strong>यह लेख मेडिकल रिपोर्टस&nbsp;के आधार पर तैयार किया गया है।</p>
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