भारत जैसे देश को विशाल आबादी का फायदा उठाने के लिए अगले 10-15 वर्षों में हर साल 80 लाख रोजगार पैदा करने की जरूरत है। मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा, रोजगार जनसांख्यिकीय लाभ उठाने के लिए एक बहुत बड़ा जरिया है। साथ ही, रोजगार की इस तेज रफ्तार को बनाए रखने की भी जरूरत होगी।
सीईए ने इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकनॉमिक रिलेशन्स (आईसीआरआईईआर) एवं प्रोसस की ओर से आयोजित एक वेबिनार में बृहस्पतिवार को कहा, रोजगार सृजन पर जोर देने से न सिर्फ लोगों को आजीविका के साधन उपलब्ध होंगे, बल्कि चुनौतियों के बीच अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत करने में भी मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को खासकर हेल्थकेयर और शिक्षा जैसे क्षेत्र में मानवीय श्रम को बदलने के बजाय इन सेक्टर में कार्यरत पेशेवरों के काम को बेहतर बनाने में अपना सहयोग देना चाहिए। उन्होंने कहा, इन क्षेत्रों में फ्रंटलाइन प्रोफेशनल्स को गुणवत्ता वाली सेवा के विस्तार को एआई के जरिये समर्थन दिया जाना चाहिए, खासतौर पर दूरदराज के इलाकों के लिए।
सीमित जीपीयू क्षमता एआई के घरेलू विकास में बाधक
सीईए ने कहा, भारत के पास वर्तमान में अमेरिका और चीन की तुलना में सीमित कंप्यूटिंग एवं ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (जीपीयू) क्षमता उपलब्ध है, जो कहीं न कहीं देश के बड़े पैमाने पर एआई मॉडल्स को घरेलू स्तर पर विकसित एवं प्रशिक्षित करने की क्षमता को प्रभावित कर रहा है। एआई सब्सक्रिप्शन कीमतों को लेकर ग्लोबल प्लेटफॉर्म्स की ओर से हाल में कीमत कटौती ग्राहकों की संख्या बढ़ाने में मदद करेगी।
नागेश्वरन ने कहा, एआई अडॉप्शन के लिए मासिक योजना को एक सिंगल एवं कम शुल्क वाले सालाना सदस्यता प्लान के साथ पेश किए जाने का उदाहरण दिया। यूजर अडॉप्शन बढ़ने का मतलब होगा कि विदेशी एआई सिस्टम्स की ओर से कैप्चर किए जा रहे भारतीय डाटा का वॉल्यूम भी बढ़ जाएगा।
उत्पादकता बढ़ाने में काफी मददगार होंगे एआई साधन
कार्यक्रम में नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर डेरॉन ऐसमोग्लू भी शामिल हुए। इसमें इस बात पर ध्यान दिया गया कि एआई भारत में किस प्रकार वर्कफोर्स डेवलपमेंट, उत्पादकता और सर्विस डिलीवरी को बेहतर बनाने के लिए अपना समर्थन दे सकता है।
ऐसमोग्लू ने कहा, ऐसे एआई साधन जो टेक्निशियन्स, नर्स और शिक्षकों को मदद कर सकें, वे उत्पादकता को बढ़ाने में मददगार होंगे। लेबर रिप्लेसमेंट को प्राथमिकता देने वाले एआई के साथ मिडल स्किल्ड वर्कफोर्स वाले देशों के लिए आर्थिक दबाव पैदा हो सकता है।



