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	<title>India &#8211; RNSNS News</title>
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	<title>India &#8211; RNSNS News</title>
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		<title>जीडीपी में वृद्धि से भारत ने दिखाया दम: अमेरिका में निवेशकों से बोलीं सीतारमण- वैश्विक संकट के बीच मजबूती कायम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Sep 2026 04:03:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8% की वृद्धि दर्ज की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अमेरिका में निवेशकों से भारत की आर्थिक मजबूती और सुधारों पर बात की। आखिर किन कदमों से मिली रफ्तार? वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी मजबूती का [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8% की वृद्धि दर्ज की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अमेरिका में निवेशकों से भारत की आर्थिक मजबूती और सुधारों पर बात की। आखिर किन कदमों से मिली रफ्तार?<br><br>वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी मजबूती का प्रदर्शन किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को अमेरिका में निवेशकों के साथ बैठक में कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था 7.8 फीसदी की दर से बढ़ी है। उन्होंने इसे वैश्विक व्यवधानों के बीच उल्लेखनीय उपलब्धि बताया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सीतारमण न्यूयॉर्क में भारतीय वाणिज्य दूतावास और बैंक ऑफ अमेरिका की ओर से आयोजित उच्चस्तरीय बिजनेस राउंडटेबल में निवेशकों को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि तमाम वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>सुधारों से निवेश का माहौल हुआ बेहतर?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">वित्त मंत्री ने कहा कि भारत ने आर्थिक सुधारों पर लगातार जोर दिया है। दिवाला एवं दिवालियापन संहिता (IBC) जैसे सुधारों के जरिए नियामकीय व्यवस्था में अधिक स्पष्टता लाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि इन सुधारों से अनुपालन आसान हुआ है और कागजी कार्रवाई का बोझ कम करने में मदद मिली है। सरकार ने करीब एक दशक से कारोबार को सुगम बनाने और अनुपालन प्रक्रिया को सरल करने को प्राथमिकता दी है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>किन क्षेत्रों पर सरकार का फोकस?</strong></h3>



<ul class="wp-block-list">
<li>सीतारमण ने निवेशकों के सामने उन क्षेत्रों का भी जिक्र किया, जिन पर सरकार लगातार ध्यान दे रही है। इनमें पूंजीगत परिसंपत्तियों का निर्माण, बुनियादी ढांचे का विकास और उद्योग को लगातार समर्थन देना शामिल है।</li>



<li>उन्होंने विशेष रूप से विमानन क्षेत्र, निवेश के अनुकूल माहौल बनाने, एआई और डेटा सेंटर के विकास, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर को बढ़ावा देने तथा एमएसएमई के लिए ऋण की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर दिया।</li>



<li>इसके साथ ही बैंकों की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों यानी एनपीए को कम करने की दिशा में उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया।</li>



<li>उनके मुताबिक, इन प्रयासों से बैंकिंग और उद्योग के लिए कारोबार, विस्तार और मजबूती का बेहतर माहौल तैयार हुआ है।</li>
</ul>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>राजकोषीय अनुशासन पर भी जोर</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">वित्त मंत्री ने कहा कि कोविड-19 के बाद से वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने लगातार चुनौतियां रही हैं, लेकिन भारत ने पिछले कई वर्षों में राजकोषीय विवेक और वित्तीय अनुशासन के रास्ते को बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें निवेश आकर्षित करने और अपने-अपने क्षेत्रों में निवेश को सुविधाजनक बनाने को लेकर पहले की तुलना में अधिक सक्रिय और प्रतिस्पर्धी हुई हैं। इन प्रयासों को उन्होंने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जोड़कर देखा।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>विनय क्वात्रा ने भी भारत की आर्थिक ताकत को सराहा</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने कार्यक्रम के स्वागत भाषण में भारत की पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़ों को अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत बताया। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों देश भारत की तेज आर्थिक वृद्धि से लाभ उठा सकते हैं। इसके लिए दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत करने की जरूरत है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>नैस्डैक में गूंजी भारत की विकास कहानी</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">इससे पहले विनय क्वात्रा ने न्यूयॉर्क स्थित नैस्डैक में भारत की ओर से ओपनिंग बेल बजाई। उन्होंने कहा कि भारत इस समय महत्वपूर्ण आर्थिक और तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रहा है। इसके पीछे मजबूत उद्यमिता, बढ़ती डिजिटल क्षमताएं और युवा एवं प्रतिभाशाली कार्यबल अहम भूमिका निभा रहे हैं। क्वात्रा ने अप्रैल-जून तिमाही की 7.8 फीसदी जीडीपी वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति बनाए हुए है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने कहा कि भारत और नैस्डैक में सूचीबद्ध तकनीकी कंपनियों के बीच तकनीक, तकनीक से जुड़े निवेश, बुनियादी ढांचे और कुशल पेशेवरों की आवाजाही जैसे क्षेत्रों में साझेदारी दोनों देशों के संबंधों का महत्वपूर्ण आधार बन सकती है। क्वात्रा ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए भारत अमेरिकी कंपनियों, निवेशकों और संस्थानों के साथ और मजबूत साझेदारी की उम्मीद करता है।<br><br></p>
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		<title>एनडीए की नई टीम की आहट: मंत्रालय फेंटे जाएंगे, शिक्षा मंत्रालय हॉट सीट; 70 पार वाले निशाने पर?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Sep 2026 04:02:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[India]]></category>
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					<description><![CDATA[केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें तेज हैं। छह-सात सितंबर की तारीख पर नजर है। कई मंत्रियों के विभाग बदल सकते हैं। 70 पार नेताओं की जिम्मेदारी घट सकती है। सहयोगी दलों को भी जगह मिलने की अटकलें हैं। क्या पीएम नरेंद्र मोदी की टीम में बड़े बदलाव होंगे? पढ़िए रिपोर्ट राजनीति में कई बार [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें तेज हैं। छह-सात सितंबर की तारीख पर नजर है। कई मंत्रियों के विभाग बदल सकते हैं। 70 पार नेताओं की जिम्मेदारी घट सकती है। सहयोगी दलों को भी जगह मिलने की अटकलें हैं। क्या पीएम नरेंद्र मोदी की टीम में बड़े बदलाव होंगे? पढ़िए रिपोर्ट</p>



<p class="wp-block-paragraph">राजनीति में कई बार जो होता है, उससे ज्यादा वह बोलता है जो नहीं होता। बुधवार, दो सितंबर को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक नहीं हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक दिन पहले ही बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन से लौट चुके थे। दिल्ली में थे, जल संसाधन मंत्रालय के कार्यक्रम में भी गए। इसके बावजूद बुधवार खाली गुजर गया। इस सन्नाटे को समझना हो तो पिछले बुधवार पर लौटना होगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">26 अगस्त..! मंत्रिमंडल की बैठक हुई और बाद में कोई फैसला नहीं बताया गया। यानी मेज पर ऐसा कुछ रखा ही नहीं गया था, जिसकी घोषणा होनी हो। लेकिन उसी बैठक में प्रधानमंत्री ने अपने मंत्रियों से जो कहा, वही सबसे बड़ा संकेत है। उन्होंने कहा, अगली मंत्रिमंडल बैठक में नए साथी जुड़ेंगे। यह बात पहली बार अमर उजाला बता रहा है। और यही बात बताती है कि मंत्रिमंडल की अगली बैठक अब उसी दिन होगी, जिस दिन मेज के चारों तरफ कुछ नए चेहरे बैठे होंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>अब सारा हिसाब कैलेंडर का है&#8230;और कैलेंडर बहुत तंग है</strong><br>विदेश मंत्री एस जयशंकर तीन से पांच सितंबर तक यूक्रेन और पोलैंड की यात्रा पर रहेंगे। 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन है, जिसकी मेजबानी भारत कर रहा है और जिसमें दुनियाभर के नेता जुटेंगे। उसके बाद 17 सितंबर से भाजपा का महीने भर चलने वाला सेवा संकल्प अभियान शुरू हो जाएगा। इन तारीखों के बीच छह और सात सितंबर यानी रविवार और सोमवार की िखड़की बचती है। सत्ता के गलियारों में यही अनुमान है कि इसी खिड़की में मोदी की टीम नए कलेवर में सामने आ सकती है।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>फेंटे जाएंगे मंत्रालय :</strong> मंत्रालय बड़े पैमाने पर फेंटे जाएंगे। तीन, चार विभागों वाले मंत्रियों से कुछ जिम्मेदारियां लेकर नए चेहरों को दी जा सकती हैं। एक चौंकाने वाला नाम सामने आ सकता है। युवा पीढ़ी से संवाद की क्षमता भी तौली जा रही है। शिक्षा मंत्रालय में बौद्धिक चेहरा दिख सकता है।</li>



<li><strong>उम्र सबसे बड़ी कसौटी: </strong>कैबिनेट में 70 वर्ष से अधिक के 14 मंत्री हैं और इनमें कटौती तय है। इनमें से कुछ को संगठन जबकि कुछ को राज्यों में भूमिका दिए जाने की उम्मीद है।  </li>



<li><strong>गठबंधन का भी दबाव :</strong> तृणमूल कांग्रेस से टूटकर बना 20 सांसदों का गुट अब एनडीए में है। उन्हें जगह देनी होगी।  शिंदे वाली शिवसेना के सांसद भी जेडी (यू) से ज्यादा हो चुके हैं। एनसीपी भी ज्यादा सीटें मांग रही है। डीएमके को साधने में भी मंत्रिपद काम आएगा।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>यूपी : सांसद रवि किशन पर फोकस</strong><br>अभी फोकस उत्तर प्रदेश पर है और वहां से भी रवि किशन का नाम सबसे चर्चा में है। जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान सबसे अधिक मीम उनपर ही बने। वह ब्राह्मण समुदाय से आते हैं और भाजपा राज्य में इस जाति के वोट किसी भी हाल में साधना चाहती है। जाहिर है, फेरबदल में उन्हें मौका मिल सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><a href="https://www.amarujala.com/user/rajkishor1" target="_blank" rel="noopener"></a></p>
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		<title>गुजरात से बंगाल तक सुरक्षा: तीन रेलवे परियोजनाओं में यात्रियों की सुविधा पर भी जोर; कहां खर्च होंगे 675 करोड़?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Sep 2026 06:08:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[India]]></category>
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					<description><![CDATA[रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा और ट्रेन संचालन बेहतर करने के लिए तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन पर 675 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इनमें उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद मंडल में कवच 4.0, बिहार के समस्तीपुर मंडल में इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और बंगाल में आद्रा-जॉयचंडीपहाड़ बाईपास लाइन शामिल है। बिहार, बंगाल और उत्तर प्रदेश से [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा और ट्रेन संचालन बेहतर करने के लिए तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन पर 675 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इनमें उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद मंडल में कवच 4.0, बिहार के समस्तीपुर मंडल में इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और बंगाल में आद्रा-जॉयचंडीपहाड़ बाईपास लाइन शामिल है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>बिहार, बंगाल और उत्तर प्रदेश से जुड़े कौन से फैसले?</strong><br>रेलवे ने उत्तर रेलवे के मुरादाबाद मंडल में बचे 712 रूट किमी पर कवच 4.0 लगाने के लिए 170 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। कवच स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है। यह खतरे की स्थिति में ट्रेन रोकने, अपने आप ब्रेक लगाने और गति नियंत्रित करने में मदद करता है। इससे टक्कर जैसे हादसों का खतरा कम होगा। समस्तीपुर मंडल के 21 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग के लिए 233 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसके तहत इंटरलॉकिंग सिस्टम को बदला जाएगा। बंगाल में बाईपास लाइन से रेलवे के&nbsp;ट्रैफिक को बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद मिलेगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>भीड़भाड़ कम करने में मदद मिलेगी</strong><br>दक्षिण पूर्व रेलवे के अंतर्गत आद्रा के छोर और जॉयचंदीपहाड़ के बीच 272 करोड़ रुपये की कुल लागत से 11 किलोमीटर लंबी बाईपास लाइन के निर्माण को स्वीकृति दी गई है। &nbsp;इससे प्रतिदिन 6,065 मालगाड़ियों की अनुमानित आवाजाही सुगम होगी और औद्योगिक यातायात भी बढ़ेगा।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>बाईपास लाइन से किन कंपनियों को लाभ?&nbsp;</strong><br>रेलवे लाइन चालू होने के बाद विशेष रूप से स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) की 23.40 मीट्रिक टन प्रति वर्ष लौह अयस्क की मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा ये भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) के लिए प्रतिदिन 45 मालगाड़ियों के अनुमानित माल ढुलाई में भी सहायक होगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ऊर्जा, खनिज और सीमेंट कॉरिडोर को कितनी मदद?</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>यह बाईपास लाइन भारतीय रेलवे के लिए निर्धारित ऊर्जा, खनिज और सीमेंट कॉरिडोर का हिस्सा है।</li>



<li>माल ढुलाई को सुगम बनाने के साथ-साथ औद्योगिक वस्तुओं के परिवहन में भी सुधार होगा।</li>



<li>सड़क यातायात से जुड़े विवादों में कमी आएगी।</li>



<li>रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस कॉरिडोर पर माल की अधिक विश्वसनीय और भीड़भाड़ रहित आवाजाही होगी।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>क्या आद्रा-जॉयचंदीपहाड़-सांका बाईपास से सड़क यातायात को भी फायदा?</strong><br>रेलवे के मुताबिक बाईपास लाइन चालू होने से वर्तमान परिचालन संबंधी बाधाओं और सड़क यातायात के दौरान होने वाली देरी को दूर करने में मदद मिलेगी। इस क्षेत्र में वर्तमान नेटवर्क का 71 प्रतिशत उपयोग किया जा रहा है और सड़क यातायात संबंधी समस्याओं के कारण माल ढुलाई की गति प्रभावित हो रही है। इस परियोजना के पूरा होने पर प्रति वर्ष 8.88 मीट्रिक टन माल ढुलाई के लिए यातायात की अतिरिक्त सुविधा मिलने की उम्मीद है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>भावनगर में 125 करोड़ से यार्ड का होगा कायाकल्प&#8230;</strong><br>रेलवे ने गुजरात के भावनगर में पारा यार्ड रीमॉडलिंग परियोजना को मंजूरी दी है। इस पर करीब 125 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इससे भावनगर टर्मिनस का दबाव कम होगा और ट्रेन संचालन बेहतर होगा। यात्रियों के लिए सुविधाएं भी बढ़ेंगी।&nbsp;इस परियोजना से भावनगर टर्मिनस (बीवीसी) पर भीड़ कम करने में सहायता मिलेगी, क्योंकि ट्रेनों के ठहराव और अन्य परिचालन गतिविधियों को भावनगर पारा में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।</p>
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		<title>सुप्रीम कोर्ट: नीट आंदोलनकारियों के खिलाफ एफआईआर रद्द करने के लिए केंद्र की अर्जी, शीर्ष कोर्ट में सुनवाई आज</title>
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		<pubDate>Tue, 01 Sep 2026 04:24:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नीट प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामले में केंद्र सरकार ने दिल्ली में दर्ज 13 एफआईआर रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की है। शीर्ष अदालत मंगलवार को मामले की सुनवाई करेगी। वहीं, 2873 प्रदर्शनकारियों की भूमिका की जांच के लिए नई एफआईआर की मांग भी की गई है। केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">नीट प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामले में केंद्र सरकार ने दिल्ली में दर्ज 13 एफआईआर रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की है। शीर्ष अदालत मंगलवार को मामले की सुनवाई करेगी। वहीं, 2873 प्रदर्शनकारियों की भूमिका की जांच के लिए नई एफआईआर की मांग भी की गई है।<br><br>केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की है। शीर्ष अदालत केंद्र की याचिका पर मंगलवार यानी आज सुनवाई करेगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सोमवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ के उठने से ठीक पहले मौखिक उल्लेख किया और मामले की मंगलवार को सुनवाई की मांग की।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि यह अंतरिम अर्जी प्रदर्शन से संबंधित है। यह एफआईआर रद्द करने के लिए है। उन्होंने कहा, हम संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करने की मांग कर रहे हैं। इस पर सीजेआई ने कहा, आवेदन दाखिल कीजिए। अगर पक्षकार सुलह कर रहे हैं तो हमें कोई आपत्ति नहीं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>सुप्रीम कोर्ट पहले ही जता चुका है मंशा</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">18 अगस्त को छात्र प्रदर्शनों से जुड़े याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत एफआईआर रद्द करने की मंशा व्यक्त की थी। तब अदालत को बताया गया था कि एफआईआर वापस लेने में कानूनी जटिलताएं हैं। इन्हें केवल क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करके बंद किया जा सकता है, जिसे संबंधित मजिस्ट्रेट खारिज करने का अधिकार रखता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>कितनी एफआईआर रद्द करने की मांग?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">दिल्ली पुलिस की ओर से दाखिल आवेदन में नीट प्रदर्शन से जुड़े&nbsp;13 एफआईआर&nbsp;को रद्द करने की मांग की गई है। साथ ही प्रदर्शन स्थल पर मौजूद 2,873 लोगों के खिलाफ उनकी कथित भूमिका की जांच के लिए नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति भी मांगी गई है। सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि सरकार ने दिल्ली से जुड़ी सभी एफआईआर को रद्द कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और भविष्य में छात्रों को निशाना नहीं बनाए जाने या परेशान नहीं करने का आश्वासन दिया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>छात्रों के मुआवजे को लेकर भी क्या उम्मीद?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">सौरव दास ने कहा कि नीट विवाद के बाद जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों के मुआवजे को लेकर भी सकारात्मक प्रगति की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से किए गए वादों को पूरा कराने के लिए संगठन स्थिति पर नजर रख रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सीजेपी छात्रों और युवाओं के साथ खड़ा रहेगा, खासकर उन लोगों के साथ जिन पर आंदोलन के दौरान कार्रवाई हुई है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">18 अगस्त को नीट छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत एफआईआर रद्द करने की मंशा जताई थी। उस समय अदालत को बताया गया था कि एफआईआर वापस लेने में कानूनी अड़चनें हैं और इन्हें क्लोजर रिपोर्ट के जरिए बंद किया जा सकता है, जिसे संबंधित मजिस्ट्रेट स्वीकार या खारिज कर सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>कब शुरू हुआ था नीट आंदोलन?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">कथित नीट अनियमितताओं के खिलाफ सीजेपी के नेतृत्व में आंदोलन 20 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ था। यह आंदोलन 25 जुलाई को उस समय समाप्त किया गया, जब तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया और सरकार ने संगठन की अन्य मांगों को भी स्वीकार किया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। इस दौरान सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था। CJP ने 5 सितंबर को इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक शांतिपूर्ण मार्च का भी आह्वान किया है।<br><br></p>
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		<title>युद्ध बढ़ेगा तो भूख भी: भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को चेताया- संघर्ष रोकें, वरना बढ़ेगा खाद्य संकट</title>
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		<pubDate>Wed, 26 Aug 2026 04:28:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारत का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को संघर्षों से पैदा होने वाले मानवीय संकट को कम करने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी संघर्षों से खाद्य सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा हो रहा है।  भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से संघर्षों के कारण पैदा [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">भारत का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को संघर्षों से पैदा होने वाले मानवीय संकट को कम करने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी संघर्षों से खाद्य सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा हो रहा है। <br><br>भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से संघर्षों के कारण पैदा होने वाले मानवीय संकट को कम करने को अपनी पहली प्राथमिकता बनाने की अपील की है। भारत ने चेताया कि ऊर्जा, उर्वरक, समुद्री परिवहन और कृषि व्यापार में रुकावटें वैश्विक खाद्य सुरक्षा को प्रभावित कर रही हैं, जिसका सबसे ज्यादा असर आयात पर निर्भर विकासशील देशों पर पड़ रहा है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने यूक्रेन, होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर से जुड़ी परिस्थितियों को खाद्य आपूर्ति के लिए गंभीर खतरा बताते हुए सुरक्षित समुद्री कॉरिडोर और जहाजों के सत्यापन की व्यवस्था का प्रस्ताव रखा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>&#8216;संघर्षों का असर अब युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं&#8217;</strong><br>भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने मंगलवार को कहा कि आजकल के संघर्षों का असर केवल लड़ाई वाली जगहों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दूर-दूर तक फैलता है। ऊर्जा बाजार, उर्वरक की आपूर्ति, समुद्री परिवहन, मानवीय सहायता पहुंचाने की व्यवस्था और कृषि व्यापार में रुकावटों ने दिखाया है कि क्षेत्रीय संघर्ष किस तरह दुनिया भर में खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>विकासशील देशों पर सबसे ज्यादा पड़ रहा असर</strong><br>सुरक्षा परिषद में फूड अंडर फायर: ग्लोबल और लोकल फूड संकट को कम करने में सुरक्षा परिषद की भूमिका विषय पर हुई खुली बहस में पी. हरीश ने कहा कि जो विकासशील देश खाद्य आयात पर बहुत अधिक निर्भर हैं, उन्हें इन रुकावटों का सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ता है। परिषद की पहली प्राथमिकता संघर्ष से होने वाले मानवीय संकट को कम करना होना चाहिए। इसके लिए सुरक्षित, तेज और बिना किसी रुकावट के मानवीय सहायता पहुंचाने की सुविधा देनी होगी और संघर्ष-रोधी इंतजामों में मदद करनी होगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>प्रतिबंधों से मानवीय सहायता बाधित न हो</strong><br>पी. हरीश ने कहा कि सुरक्षा परिषद को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके उठाए गए कदम, जैसे प्रतिबंध, अनजाने में मानवीय सहायता या वैध खाद्य और कृषि व्यापार में रुकावट न डालें। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि मजबूत और खाद्य-सुरक्षित समाज का निर्माण मुख्य रूप से राष्ट्रीय सरकारों की जिम्मेदारी है। इसमें संयुक्त राष्ट्र का विकास तंत्र और रोम स्थित एजेंसियां सहायता करती हैं, न कि सुरक्षा परिषद।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>भारत ने अपनी खाद्य सुरक्षा योजनाओं का किया जिक्र</strong><br>हरीश ने खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में भारत की ओर से किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन पहलों के जरिए भारत न केवल अपनी खाद्य सुरक्षा मजबूत कर रहा है, बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा में भी योगदान देने वाला देश बन रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून सब्सिडी वाले अनाज का कानूनी अधिकार देता है। वहीं, PM-KISAN कार्यक्रम के तहत 11 करोड़ से अधिक किसान परिवारों को सीधे लाभ पहुंचाने से छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक मजबूती बढ़ी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मिलेट्स से लेकर जलवायु-अनुकूल खेती तक भारत का जोर</strong><br>हरीश ने कहा कि 2023 में भारत की ओर से ‘इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स’ यानी ‘अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष’ को बढ़ावा दिए जाने से जलवायु-अनुकूल और पोषक तत्वों से भरपूर फसलों की ओर दुनिया का ध्यान गया। उन्होंने इसे विविध और टिकाऊ खाद्य सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने आगे कहा कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और जलवायु-अनुकूल खेती के तरीकों से भारत न केवल खाद्य-सुरक्षित बना हुआ है, बल्कि वैश्विक खाद्य आपूर्ति में भी अहम योगदान दे रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>होर्मुज, काला सागर और लाल सागर का हरीश ने नहीं लिया नाम</strong><br>हरीश ने वाणिज्यिक जहाजरानी और समुद्री व्यापार मार्गों में रुकावटों से खाद्य सुरक्षा पर मंडरा रहे खतरों का व्यापक रूप से जिक्र किया। हालांकि, उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य, काला सागर और लाल सागर में जारी तीन संघर्षों का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>गुटेरेस ने तीनों संघर्षों का किया जिक्र</strong><br>संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने हालांकि वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले इन तीनों संघर्षों का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन में चल रहे युद्ध का असर काला सागर के जरिए होने वाले अनाज और ऊर्जा के निर्यात पर पड़ रहा है, जो यूक्रेन और रूस दोनों से होता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>होर्मुज में उर्वरक और तेल आपूर्ति पर संकट</strong><br>गुटेरेस ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की तेल आपूर्ति के करीब पांचवें हिस्से और उर्वरक व्यापार के लगभग एक-तिहाई हिस्से को संभालता है। वहां लगे प्रतिबंधों और मार्गों के बंद होने से “कीमतें बढ़ गई हैं और उपलब्धता बहुत कम हो गई है। लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों से भोजन और अन्य सामानों की आपूर्ति श्रृंखला के लिए और खतरा पैदा हो रहा है।”</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>होर्मुज से उर्वरक और अनाज के लिए सुरक्षित कॉरिडोर का प्रस्ताव</strong><br>गुटेरेस ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने एक सुरक्षित कॉरिडोर के जरिए होर्मुज से उर्वरक और अनाज की आवाजाही सुनिश्चित करने के व्यावहारिक तरीके सुझाए हैं। उन्होंने कहा कि भरोसा बढ़ाने की इस समयबद्ध कोशिश में शुरुआत में उर्वरक और उससे जुड़े कच्चे माल पर ध्यान दिया जाएगा, लेकिन बाद में इसे दूसरे उत्पादों तक भी बढ़ाया जा सकेगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>जहाजों के रजिस्ट्रेशन और वेरिफिकेशन के लिए बना ढांचा</strong><br>मार्च में दिए गए मूल प्रस्तावों को आगे बढ़ाते हुए गुटेरेस ने सोमवार को घोषणा की कि ऑफिस फॉर प्रोजेक्ट सर्विसेज (UNOPS) की अगुवाई वाली एक टास्क फोर्स ने उर्वरक और उससे जुड़े उत्पादों को ले जाने वाले जहाजों के रजिस्ट्रेशन और वेरिफिकेशन के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार किया है। इसका उद्देश्य इन जहाजों की आवाजाही को आसान बनाना है। उन्होंने कहा कि अब संबंधित पक्षों के सहयोग और राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है। मैं सभी संबंधित पक्षों से गंभीरता और रचनात्मक तरीके से जुड़ने का आग्रह करता हूं।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>समुद्री व्यापार में रुकावट से करोड़ों लोगों पर खतरा</strong><br>वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के कार्यवाहक निदेशक कार्ल स्काऊ ने चेतावनी दी कि समुद्री व्यापार में गंभीर रुकावटों से अब करोड़ों और लोगों के खाद्य असुरक्षा की चपेट में आने का खतरा पैदा हो गया है।&nbsp;</p>
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		<title>अयोध्या में मछली भोज पर बवाल, पहले कब सियासी हथियार बना मांसाहार, देश में नॉन-वेजिटेरियन कितने?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 25 Aug 2026 04:40:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
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					<description><![CDATA[अयोध्या में कथित मछली भोज ने एक बार फिर राजनीति में खान-पान और धार्मिक भावनाओं को लेकर बहस छेड़ दी है। इससे पहले भी नेताओं के मांसाहारी भोजन से जुड़े मामले राजनीतिक विवाद का कारण बन चुके हैं। इस पूरे विवाद में एक ओर धार्मिक भावनाओं का सवाल उठ रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे समुदाय [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><em>अयोध्या में कथित मछली भोज ने एक बार फिर राजनीति में खान-पान और धार्मिक भावनाओं को लेकर बहस छेड़ दी है। इससे पहले भी नेताओं के मांसाहारी भोजन से जुड़े मामले राजनीतिक विवाद का कारण बन चुके हैं। <strong>इस पूरे विवाद में एक ओर धार्मिक भावनाओं का सवाल उठ रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे समुदाय की परंपरा और खान-पान की पसंद से जोड़कर देखा जा रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं।</strong></em><br><br>अयोध्या में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के स्वागत कार्यक्रम में कथित मछली भोज को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सावन और एकादशी के दिन हुए इस आयोजन पर संत समाज ने आपत्ति जताई है, जबकि अजय राय ने इसे निषाद समाज की परंपरा से जोड़कर सफाई दी है। ये पहला मौका नहीं है जब सियासी मछली पकाई जा रही है। पहले भी खान-पान को राजनीतिक बहस का मुद्दा बनाया जा चुका है।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><em>ऐसे में समझते हैं कि अयोध्या में क्या हुआ? इससे पहले ऐसे विवाद कब-कब हुए? पहले कौन से नेता इस तरह के विवाद के चलते चर्चा में आ चुके हैं? भारत में मांसाहार को लेकर आंकड़े क्या कहते हैं?</em></p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>अयोध्या में मछली भोज पर विवाद</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">अयोध्या में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के स्वागत को लेकर आयोजित एक कार्यक्रम के बाद मछली भोज को लेकर विवाद खड़ा हो गया। कार्यक्रम अयोध्या के तारुन क्षेत्र स्थित एक लॉन में आयोजित किया गया था। इसी कार्यक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें मछली परोसे जाने की तैयारी दिखाई देने का दावा किया गया। कार्यक्रम में दो कुंतल से अधिक मछली होने की बात भी कही जा रही है। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।<br><br>विवाद इसलिए बढ़ा क्योंकि यह आयोजन सावन और एकादशी के दिन होने की बात कही गई। इसके बाद कुछ संतों ने इसे धार्मिक भावनाओं और सनातन परंपराओं से जोड़ते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा और सार्वजनिक माफी की मांग की।<br><br>हनुमानगढ़ी के पुजारी रमेश दास ने कहा कि कांग्रेस नेता एक तरफ अयोध्या आकर भगवान श्रीराम और संतों का आशीर्वाद लेने की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ उसी दौरान ऐसा आयोजन किया जाता है, जिससे सनातन समाज की भावनाएं आहत होती हैं। उन्होंने कांग्रेस से स्पष्टीकरण और अजय राय से माफी की मांग की।<br><br>इस बीच&nbsp;उत्तर प्रदेश के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर सावन के महीने में मछली की दावत होती है, तो यह हद से ज्यादा है। अगर मछली में प्याज और लहसुन डाला गया है तो वह नॉन-वेज है, लेकिन बिना प्याज-लहसुन के बनाई गई मछली को वेज माना जा सकता है। कांग्रेस से पूछा जाना चाहिए कि मछली को प्याज-लहसुन डालकर बनाया गया था या उसके बिना।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>अजय राय ने क्या सफाई दी?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">विवाद के बीच अजय राय ने कहा कि उन्होंने अयोध्या में हनुमानगढ़ी और राम मंदिर में दर्शन-पूजन किया था। इसके बाद वह निषाद समाज की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। उनका कहना है कि मछली पकड़ना, बेचना और खाना निषाद समाज की पारंपरिक आजीविका का हिस्सा रहा है। राय ने कहा कि निषाद समाज का जीवन नदियों से जुड़ा रहा है और कांग्रेस के शासन में इस समुदाय को सम्मान मिला। उनके मुताबिक, नदियों और तालाबों की जमीन पट्टे पर देने जैसी व्यवस्थाएं भी की जाती थीं।<br><br>अजय राय ने अपने ऊपर लगे आरोपों को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनकी मछली खाते हुए एक भी तस्वीर सामने आ जाए तो वह कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर भाजपा ऐसी तस्वीर नहीं दिखा पाती है तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस्तीफा देना चाहिए।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस नेताओं पर कथित दोहरे आचरण का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लोग विरासत और धार्मिक आस्था के नाम पर दिखावा करते हैं। योगी आदित्यनाथ ने अजय राय का नाम लेते हुए कहा कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अयोध्या में हनुमानगढ़ी में दर्शन करने के बाद मछली की दावत में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि मंदिर में राम-राम बोलना और बजरंग बली के सामने दंडवत होने के बाद इस तरह का आचरण शर्मनाक है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>पहले कब इस तरह के मामले पर विवाद हुआ?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp;मछली और नॉनवेज को लेकर राजनीतिक विवाद पहले भी कई बार सामने आ चुके हैं। सितंबर 2023 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लालू प्रसाद यादव के साथ चंपारण मटन पकाने का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया था। वीडियो में लालू यादव राहुल गांधी को मटन बनाने की विधि बताते नजर आए थे। खाना बनाने के साथ दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मुद्दों पर भी बातचीत हुई थी।<br><br>वीडियो सामने आने के बाद भाजपा ने राहुल गांधी पर निशाना साधा। भाजपा ने उनके जनेऊधारी ब्राह्मण और शिव भक्त होने का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि सावन के दौरान मटन से जुड़ा वीडियो क्यों साझा किया गया। भाजपा ने इसे हिंदू भावनाओं से जोड़कर हमला किया था।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>तेजस्वी यादव और मुकेश सहनी के वीडियो पर मचा था बवाल</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">2024 में बिहार चुनाव की तैयारियों के बीच तेजस्वी यादव और विकासशील इंसान पार्टी यानी वीआईपी के प्रमुख मुकेश सहनी का मछली खाते हुए वीडियो भी सामने आया था। तेजस्वी यादव ने 9 अप्रैल को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर यह वीडियो पोस्ट किया था।<br><br>वीडियो में दोनों नेता हेलिकॉप्टर के अंदर लंच करते नजर आए। मुकेश सहनी ने बताया कि वह चेचरा मछली और रोटी खा रहे थे। साथ में मिर्च और प्याज भी था। तेजस्वी यादव ने कहा था कि दोनों ने दिनभर चुनाव प्रचार किया था और लंच के लिए सिर्फ 10 से 15 मिनट मिले थे। उन्होंने बताया कि खाना मुकेश सहनी लेकर आए थे। इस वीडियो को लेकर भाजपा ने तेजस्वी यादव और मुकेश सहनी पर निशाना साधा।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>पीएम मोदी ने की थी टिप्पणी</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">उस समय राहुल गांधी और लालू प्रसाद यादव का मटन पकाने वाला वीडियो और तेजस्वी यादव का मछली खाते हुए वीडियो चर्चा में था। चुनावी रैली के दौरान पीएम मोदी ने बिना नाम लिए कहा था कि कुछ विपक्षी नेता सावन के दौरान मटन पकाने का वीडियो बनाकर और उसे सोशल मीडिया पर जारी करके देश के लोगों की भावनाओं को आहत करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे वीडियो के जरिए लोगों को चिढ़ाया जा रहा है और वोट बैंक की राजनीति की जा रही है।<br><br>पीएम मोदी ने यह भी कहा था कि देश में हर व्यक्ति को अपनी पसंद का खाना खाने की आजादी है और कानून किसी को शाकाहारी या मांसाहारी भोजन खाने से नहीं रोकता। उन्होंने कहा कि उनका सवाल खाने को लेकर नहीं, बल्कि धार्मिक अवसरों के दौरान ऐसे वीडियो सार्वजनिक करने की मंशा को लेकर है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>पश्चिम बंगाल चुनाव में भी मछली बनी मुद्दा</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान भाजपा सांसद रवि किशन का मछली को लेकर दिया गया बयान भी चर्चा में रहा था। वह कहते सुने गए कि बिहार, उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों से बड़ी मात्रा में मछली लाकर बंगाल के कुएं, पोखर और तालाबों में डाली जाएगी। उन्होंने चार मई के बाद चार गुना ज्यादा मछली खाने की बात भी कही थी।<br><br>रवि किशन ने टीएमसी पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया था। इस बयान पर विपक्ष ने भाजपा पर निशाना साधा। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा था कि चुनाव जीतने के लिए भाजपाई किसी भी हद तक जा सकते हैं। वहीं टीएमसी ने इसे बंगाली संस्कृति और खान-पान की आदतों का उपहास उड़ाने वाला बयान बताया था।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>भारत में कितने लोग मांसाहारी हैं?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण यानी NFHS-5 के 2019-21 के आंकड़ों के मुताबिक, 15 से 49 वर्ष की उम्र के 83.4 फीसदी पुरुष और 70.6 फीसदी महिलाएं मांसाहारी थीं। इसमें रोजाना, सप्ताह में या कभी-कभार मांसाहार करने वाले लोग शामिल हैं।<br><br>NFHS-4 यानी 2015-16 में 78.4 फीसदी पुरुष और 70 फीसदी महिलाएं मछली, चिकन या मांस खाने की बात कहती थीं। यानी पुरुषों में मांसाहार करने वालों की हिस्सेदारी करीब पांच प्रतिशत अंक बढ़ी, जबकि महिलाओं में बढ़ोतरी बहुत मामूली रही।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>सप्ताह में कम से कम एक बार मांसाहार करने वालों की संख्या</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">NFHS-5 के मुताबिक, 57.3 फीसदी पुरुष और 45.1 फीसदी महिलाएं कम से कम सप्ताह में एक बार मछली, चिकन या मांस खाती थीं। NFHS-4 में यह आंकड़ा पुरुषों के लिए 48.9 फीसदी और महिलाओं के लिए 42.8 फीसदी था। यानी कम से कम सप्ताह में एक बार मांसाहार करने वाले पुरुषों की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>कहां मांसाहारी सबसे ज्यादा?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">15 से 49 वर्ष के पुरुषों में सप्ताह में कम से कम एक बार मछली, चिकन या मांस खाने वालों की हिस्सेदारी लक्षद्वीप में सबसे ज्यादा 98.4 फीसदी थी। इसके बाद अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 96.1 फीसदी, गोवा में 93.8 फीसदी, केरल में 90.1 फीसदी और पुडुचेरी में 89.9 फीसदी पुरुष सप्ताह में कम से कम एक बार मछली, चिकन या मांस खाते थे। वहीं, यह हिस्सेदारी राजस्थान में सबसे कम 14.1 फीसदी थी। इसके बाद हरियाणा में 14.9 फीसदी, पंजाब में 18.9 फीसदी, गुजरात में 20.6 फीसदी और हिमाचल प्रदेश में 22.6 फीसदी थी।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>किन राज्यों में सबसे ज्यादा मांसाहारी?</strong></h3>



<ul class="wp-block-list">
<li>सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, नागालैंड में करीब 99.8 फीसदी आबादी मांसाहारी भोजन करती है। यहां पोर्क, स्मोक्ड मीट और मछली से बने व्यंजन लोकप्रिय हैं।</li>



<li>केरल में करीब 99.1 फीसदी आबादी के मांसाहारी भोजन करने की बात दी गई है। यहां मालाबार फिश करी, बिरयानी और समुद्री भोजन लोकप्रिय हैं।</li>



<li>आंध्र प्रदेश में करीब 98.25 फीसदी आबादी मांसाहारी भोजन करती है। यहां चिकन करी और समुद्री भोजन आम हैं।</li>



<li>तमिलनाडु में करीब 97.65 फीसदी आबादी के मांसाहारी भोजन करने का आंकड़ा दिया गया है। यहां मटन मसाला, पंडी करी और मांस से बने दूसरे व्यंजन लोकप्रिय हैं।</li>
</ul>
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		<title>उधार से सतर्क: बाय नाउ, पे लेटर की आसान किस्तें फंसा न दें कर्ज के जाल में, उपभोक्ता क्या करें, क्या न करें?</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/buy-now-pay-later-debt-trap-consumer-tips-dos-and-donts-india/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Aug 2026 05:15:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[Important News]]></category>
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					<description><![CDATA[डिजिटल दौर में खरीदारी जितनी आसान हुई है, उधारी का जाल उतना ही अदृश्य और घातक बन चुका है। अधिकांश वयस्क अब &#8216;बाय नाउ, पे लेटर&#8217; (BNPL) का इस्तेमाल कर रहे हैं। निम्न और मध्यम आय वर्ग के लोग इसके चंगुल में हैं। लोग गैजेट्स या कपड़ों के लिए नहीं, बल्कि रोजमर्रा के दूध, राशन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">डिजिटल दौर में खरीदारी जितनी आसान हुई है, उधारी का जाल उतना ही अदृश्य और घातक बन चुका है। अधिकांश वयस्क अब &#8216;बाय नाउ, पे लेटर&#8217; (BNPL) का इस्तेमाल कर रहे हैं। निम्न और मध्यम आय वर्ग के लोग इसके चंगुल में हैं। लोग गैजेट्स या कपड़ों के लिए नहीं, बल्कि रोजमर्रा के दूध, राशन और ग्रॉसरी जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी किस्तों का सहारा ले रहे हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>BNPL&nbsp; कैसे काम करता है?</strong><br>पारंपरिक किस्त प्रणाली का यह डिजिटल रूप ई-कॉमर्स चेकआउट पर एक क्लिक में उपलब्ध होता है:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>बिना किसी लंबी क्रेडिट जांच के खरीदारी के वक्त ही पूरी राशि को 3 से 4 छोटी किस्तों में बांट दिया जाता है।</li>



<li>रिटेलर्स इसे इसलिए बढ़ावा देते हैं, क्योंकि इससे बिक्री और औसत ऑर्डर वैल्यू में बढ़ोतरी होती है।</li>



<li>पहली नजर में इसे जीरो इंटरेस्ट या बिना किसी ब्याज के मिलने वाली सुविधा के रूप में पेश किया जाता है।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>यह कैसे बनता है कर्ज का जाल&nbsp;</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>ऋण का ढेर:</strong>
<ul class="wp-block-list">
<li>60 फीसदी उपभोक्ता एक ही समय में कई बीएनपीएल लोन चला रहे हैं। एक-तिहाई लोग अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स से उधार लेते हैं।</li>
</ul>
</li>
</ul>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>छोटी किस्तों का भ्रम:</strong>
<ul class="wp-block-list">
<li>300 से 500 रुपये की कई किस्तें मिलकर महीने के बजट को पूरी तरह असंतुलित कर देती हैं।</li>
</ul>
</li>



<li><strong>जीरो इंटरेस्ट का सच:</strong>
<ul class="wp-block-list">
<li>4 किस्तों वाले प्लान में देरी होते ही भारी लेट फीस और बैंक ओवरड्राफ्ट चार्ज लग जाते हैं। लंबी अवधि वाले लोन में 30% से अधिक का सालाना ब्याज वसूला जाता है।</li>
</ul>
</li>
</ul>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>डिफॉल्ट की ऊंची दर:</strong>
<ul class="wp-block-list">
<li>47% बीएनपीएल यूजर्स समय पर भुगतान में चूके। 68% मानते हैं कि इसने उन्हें गैर-जरूरी खर्च पर मजबूर किया।</li>
</ul>
</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>उपभोक्ता क्या करें?</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>हर BNPL ऑफर को एक वास्तविक लोन समझें, जो भविष्य की कमाई पर गिरवी है।</li>



<li>सभी किस्तों, देय तारीखों और मासिक देनदारी का अलग से हिसाब रखें।</li>



<li>खाते में जरूरी राशि रखें ताकि बैंक पेनल्टी से बचा जा सके।</li>



<li>कई एप्स से एक साथ छोटी-छोटी उधारी लेने से पूरी तरह बचें।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>क्या न करें?</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>यह मानकर खरीदारी न करें कि सैलरी आते ही किस्तें निपट जाएंगी।</li>



<li>राशन, ग्रॉसरी या खाने-पीने की चीजों के लिए किस्तों का सहारा लेने से बचें; यह गंभीर वित्तीय संकट का पहला संकेत है।</li>



<li>जब तक मर्चेंट से रिफंड कन्फर्म न हो, किस्त का भुगतान न छोड़ें।</li>



<li>शर्तें पढ़े बिना बाय नाउ पे लेटर विकल्प को पूरी तरह मुफ्त न समझें।</li>
</ul>
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		<title>पीएफ खाते में कितने पैसे हो गए हैं जमा और कितना मिला ब्याज? हर एक चीज ऐसे चेक करें अपने मोबाइल से</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/pf-account-balance-interest-check-on-mobile-epfo-passbook-umang-app/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Aug 2026 05:08:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[India]]></category>
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					<description><![CDATA[अगर आप भी वर्षों से नौकरी कर रहे हैं और आपको नहीं पता कि आपके पीएफ खाते में कितने पीएफ के पैस जमा हैं? तो आप ये चेक कर सकते हैं। नौकरी करने वाले लोगों को वैसे तो अपनी सैलरी से ही खास मतलब होता है कि सैलरी कितनी मिल रही है, सैलरी कब बढ़ेगी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">अगर आप भी वर्षों से नौकरी कर रहे हैं और आपको नहीं पता कि आपके पीएफ खाते में कितने पीएफ के पैस जमा हैं? तो आप ये चेक कर सकते हैं। नौकरी करने वाले लोगों को वैसे तो अपनी सैलरी से ही खास मतलब होता है कि सैलरी कितनी मिल रही है, सैलरी कब बढ़ेगी आदि? ये सही भी है, लेकिन इसी बीच लोग वर्षों से नौकरी कर रहे हैं होते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पर एक चीज भूल जाते हैं और वो है अपने पीएफ खाते के बैलेंस को चेक करना कि उसमें कितना पैसा जमा है, कितना ब्याज मिला है या नहीं मिला है आदि। ऐसे में आप अपने मोबाइल फोन से ही ये काम मिनटों में कर सकते हैं। <strong>चलिए जानते हैं आप कैसे चेक करें&#8230;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>कैसे चेक करें?</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>आप अपने पीएफ खाते के बैलेंस, ब्याज जैसी चीजों को मोबाइल से चेक कर सकते हैं</li>



<li>इसके लिए आपको पीएफ की पाबुक लॉगिन करनी होती है, जो बेहद आसान है</li>



<li>इससे आप अपने पीएफ के बैलेंस, ब्याज जैसी चीजों की जानकारी ले सकते हैं</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>कैसे चैके करें?<br><br>पहला स्टेप</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>पीएफ की पासबुक लॉगिन करने के लिए आपको सबसे पहले इस आधिकारिक वेबसाइट https://passbook.epfindia.gov.in/MemberPassBook/login पर जाना है</li>



<li>फिर यहां पर आपको पहले यूएएन नंबर दर्ज करना है</li>



<li>इसके बाद आपको पासवर्ड भरना है</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>दूसरा स्टेप</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>अब आपको स्क्रीन पर दिए हुए कैप्चा कोड को भी दर्ज करना है</li>



<li>इसके बाद आपको Sign In वाले बटन पर क्लिक करना है</li>



<li>अब आपकी पासबुक लॉगिन हो जाएगी</li>



<li>यहां पर आपको Passbook वाले सेक्शन में जाना है</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>तीसरा स्टेप</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>जहां पर आप अपने पीएफ का बैलेंस चेक कर सकते हैं</li>



<li>आपको ब्याज कितना मिला और आपकी कंपनी आपके पीएफ खाते में पैसे जमा कर रही है या नहीं</li>



<li>जैसी सभी जरूरी चीजें आप यहां चेक कर सकते हैं</li>
</ul>
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		<title>अचानक क्यों महंगी हो रही चीनी? 65 रुपये किलो तक पहुंचा भाव; आपकी जेब पर क्या होगा असर?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 04:04:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[India]]></category>
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					<description><![CDATA[चीनी की बढ़ती कीमतों ने त्योहारों से पहले आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बाजार में भाव 60-65 रुपये किलो तक पहुंचने के बीच सरकार ने कीमतों पर काबू पाने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी शुल्क-मुक्त आयात करने का फैसला किया है। सवाल सिर्फ चीनी के महंगे होने का नहीं, बल्कि यह है [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><em>चीनी की बढ़ती कीमतों ने त्योहारों से पहले आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बाजार में भाव 60-65 रुपये किलो तक पहुंचने के बीच सरकार ने कीमतों पर काबू पाने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी शुल्क-मुक्त आयात करने का फैसला किया है। <strong>सवाल सिर्फ चीनी के महंगे होने का नहीं, बल्कि यह है कि आने वाले दिनों में इसकी कीमतें कहां तक जाएंगी और क्या सरकार का आयात वाला कदम त्योहारों से पहले राहत दिला पाएगा?</strong></em></p>



<p class="wp-block-paragraph">देश में चीनी की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। कुछ बाजारों में इसके दाम 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की खबरें हैं। इस बीच केंद्र सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी बिना आयात शुल्क के मंगाने की अनुमति दी है। दस साल बाद ऐसा होगा जब भारत को चीनी का आयात करना पड़ रहा है।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><em>ऐसे में सवाल उठता है कि चीनी के दाम अचानक क्यों बढ़ रहे हैं? क्या देश में चीनी की कमी है या आपूर्ति को लेकर समस्या है? क्या मौसम भी इसकी वजह है? एथेनॉल उत्पादन से चीनी का क्या संबंध है? सरकार का क्या कहना है?&nbsp;भारत ने चीनी का निर्यात क्यों घटाया? भारत में चीनी सबसे ज्यादा कहां होती है? सरकार ने चीनी को नियंत्रित करने के लिए क्या-क्या नीतियां बनाई? सरकार को 10 लाख टन चीनी आयात करने की जरूरत क्यों पड़ी? और त्योहारों से पहले आम आदमी की जेब पर कितना असर पड़ सकता है? आइये जानते हैं&#8230;</em></p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>चीनी के दाम क्यों बढ़ रहे हैं?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">चीनी की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह घरेलू बाजार में इसकी उपलब्धता को लेकर बढ़ता दबाव है। देश में चीनी उत्पादन पिछले कुछ वर्षों में लगातार एक जैसा नहीं रहा है। कभी उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा तो कभी इसमें गिरावट देखने को मिली। 15 अप्रैल 2026 तक देश में 273.90 लाख मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन हो चुका था। इस दौरान देशभर में 541 चीनी मिलें चल रही थीं और उन्होंने 2,865.21 लाख मीट्रिक टन गन्ने की पेराई की। गन्ने से चीनी निकलने की औसत दर 9.56 प्रतिशत रही।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>क्या मौसम भी है वजह?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">चीनी की कीमतों पर मौसम का असर भी पड़ रहा है। इस साल भारत में मानसून के 11 साल के सबसे निचले स्तर पर रहने का अनुमान जताया गया है। कमजोर बारिश ने गन्ने की बुवाई और फसल को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसके साथ ही अल नीनो का खतरा भी बना हुआ है।<br>विशेषज्ञ राहिल शेख, प्रबंध निदेशक, एमईआईआर कमोडिटीज इंडिया के मुताबिक भारत में चीनी की आपूर्ति पहले से दबाव में है और अब अल नीनो एक बड़ा जोखिम बनकर उभर रहा है। अगर अनुमान के मुताबिक बारिश कमजोर रहती है तो गन्ने की बुवाई प्रभावित होगी और भारत कम से कम अगले तीन साल तक चीनी के निर्यात बाजार से बाहर रह सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>त्योहारों का मौसम क्यों बढ़ा रहा है चिंता?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">चीनी की मांग पूरे साल रहती है, लेकिन त्योहारों के दौरान इसमें खास बढ़ोतरी होती है। रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली के समय मिठाई की बिक्री काफी बढ़ जाती है। इसके अलावा बिस्किट, टॉफी, शीतल पेय और कई खाद्य उत्पादों में भी चीनी का इस्तेमाल होता है। ऐसे समय में अगर बाजार में पहले से ही आपूर्ति का दबाव हो और मांग अचानक बढ़ जाए तो कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>देश में चीनी सबसे ज्यादा कहां बनती है?</strong></h3>



<ul class="wp-block-list">
<li>भारत के चीनी उत्पादन में तीन राज्यों की सबसे बड़ी भूमिका है महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक। ये तीनों राज्य मिलकर देश के कुल चीनी उत्पादन में करीब 87.48 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं। 2025-26 के दौरान महाराष्ट्र में 89.80 लाख मीट्रिक टन, उत्तर प्रदेश में 65.60 लाख मीट्रिक टन और कर्नाटक में 41.70 लाख मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन हुआ।</li>



<li>इसलिए इन राज्यों में गन्ने की पैदावार, बारिश और चीनी मिलों का उत्पादन पूरे देश के बाजार को प्रभावित कर सकता है। अगर इन प्रमुख राज्यों में फसल प्रभावित होती है तो इसका असर देशभर में चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर पड़ सकता है।</li>
</ul>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>क्या एथेनॉल से भी चीनी के उत्पादन का संबंध है?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">चीनी की मौजूदा कहानी में एथेनॉल एक महत्वपूर्ण कड़ी है। केंद्र सरकार पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने को लगातार बढ़ावा दे रही है। इसके पीछे पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना, वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना और किसानों की आय बढ़ाना जैसे उद्देश्य हैं। एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2025-26 में देश में एथेनॉल की संचयी आपूर्ति 800 करोड़ लीटर का आंकड़ा पार कर गई है। अखिल भारतीय आसवक संघ के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में कुल मासिक एथेनॉल आपूर्ति में करीब 76 प्रतिशत हिस्सा अनाज आधारित कच्चे माल का था। वहीं, गन्ने पर आधारित कच्चे माल से जुलाई में 22 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति हुई, जबकि जून में यह 28 करोड़ लीटर थी। जुलाई में कुल एथेनॉल आपूर्ति में गन्ने पर आधारित कच्चे माल की हिस्सेदारी करीब 24 प्रतिशत रही, जबकि जून में यह करीब 27 प्रतिशत थी।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>विशेषज्ञों की चेतावनी क्या है?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">विशेषज्ञों की चिंता मुख्य रूप से दो चीजों को लेकर है, मौसम और घरेलू आपूर्ति। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में चीनी की आपूर्ति पहले से दबाव में है। अगर बारिश कमजोर रहती है तो गन्ने की अगली फसल प्रभावित हो सकती है। इसका असर आने वाले चीनी मौसम में उत्पादन पर पड़ सकता है। इसके अलावा एथेनॉल नीति को लेकर भी संतुलन जरूरी है। सरकार के लिए एथेनॉल उत्पादन बढ़ाना ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, लेकिन खाद्य जरूरतों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>सरकार का क्या कहना है?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">दावा किया जा रहा था कि पेट्रोल में मिश्रण के लिए चीनी को इथेनॉल उत्पादन की ओर डाइवर्ट किए जाने से घरेलू बाजार में इसकी कीमतें बढ़ रही हैं। हालांकि, खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कीमतों में बढ़ोतरी का संबंध इथेनॉल से नहीं, बल्कि कम घरेलू उत्पादन, आगामी त्योहारी सीजन की मांग और जमाखोरी से है।&nbsp;साथ ही गन्ने की फसल को रेड रॉट और टॉप बोरर बीमारी से नुकसान हुआ।&nbsp;इस सीजन में चीनी का उत्पादन करीब 306 लाख मीट्रिक टन (LMT) रहने का अनुमान है, जबकि गन्ना उत्पादक राज्यों का शुरुआती अनुमान करीब 343 एलएमटी था।<br><br>सरकार ने आंकड़ों के साथ स्पष्ट किया है कि इथेनॉल कार्यक्रम पर महंगाई का दोष मढ़ना पूरी तरह गलत है। आंकड़ों के मुताबिक, इथेनॉल उत्पादन के लिए डाइवर्ट की जाने वाली चीनी की हिस्सेदारी 2022-23 सीजन के 12 प्रतिशत से घटकर 2025-26 सीजन में महज 9 प्रतिशत रह गई है। इसके अलावा, वर्तमान में भारत के कुल इथेनॉल उत्पादन का लगभग तीन-चौथाई (75%) हिस्सा गन्ने के बजाय अनाजों, विशेष रूप से मक्के से प्राप्त हो रहा है।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>भारत ने चीनी का निर्यात क्यों घटाया?</strong></h3>



<ul class="wp-block-list">
<li>भारत पहले दुनिया के बड़े चीनी निर्यातकों में शामिल था। 2020-21 में देश ने करीब 70 लाख मीट्रिक टन चीनी का निर्यात किया था। 2021-22 में यह बढ़कर रिकॉर्ड 110 लाख मीट्रिक टन हो गया। लेकिन इसके बाद सरकार की प्राथमिकता बदली। घरेलू बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रहे और कीमतों पर दबाव न बढ़े, इसके लिए निर्यात पर नियंत्रण बढ़ाया गया।</li>



<li>2022-23 में चीनी निर्यात घटकर 63.08 लाख मीट्रिक टन रह गया और 2023-24 में यह करीब एक लाख मीट्रिक टन तक सीमित हो गया। इसलिए भारत के चीनी निर्यात में आई भारी गिरावट को केवल उत्पादन या मौसम से जोड़ना सही नहीं होगा। सरकार की बदली हुई प्राथमिकताएं भी इसकी बड़ी वजह हैं।</li>



<li>एक तरफ सरकार घरेलू उपभोक्ताओं के लिए चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। ऐसे में विदेश भेजने के बजाय घरेलू बाजार के लिए चीनी बचाए रखना सरकार की प्राथमिकता बन गया है।</li>
</ul>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>चीनी पर सरकार का इतना नियंत्रण क्यों है?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">भारत में चीनी और गन्ने को आवश्यक वस्तुओं में रखा गया है, इसलिए सरकार इनके उत्पादन, कीमत, बिक्री, भंडारण और आयात-निर्यात को नियंत्रित कर सकती है।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>1955:</strong> आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत चीनी और गन्ने को आवश्यक वस्तुओं में शामिल किया गया।</li>



<li><strong>1966:</strong> गन्ना नियंत्रण आदेश के तहत केंद्र सरकार को किसानों के लिए उचित और लाभकारी मूल्य तय करने का अधिकार मिला।</li>



<li><strong>2009:</strong> गन्ने के पुराने न्यूनतम वैधानिक मूल्य की जगह उचित और लाभकारी मूल्य की व्यवस्था लागू हुई।</li>



<li><strong>2018:</strong> चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत तय की गई। शुरुआत में यह 29 रुपये प्रति किलो थी, जिसे 2019 में बढ़ाकर 31 रुपये कर दिया गया।</li>



<li><strong>2025:</strong> नया चीनी नियंत्रण आदेश लागू हुआ, जिसके तहत सरकार को चीनी के उत्पादन, बिक्री, भंडारण, आयात-निर्यात और आवाजाही को नियंत्रित करने के व्यापक अधिकार मिले।</li>
</ul>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए क्या किया?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने चीनी कारोबारियों के लिए भंडारण सीमा भी लागू की है। इसका मकसद जमाखोरी और सट्टेबाजी वाले कारोबार को रोकना है, जिससे बाजार में कृत्रिम कमी का माहौल बन सकता है।<br><br>बड़े खरीदारों और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए भी भंडारण सीमा तय की गई है। जो इकाइयां हर महीने 10 मीट्रिक टन से ज्यादा चीनी इस्तेमाल करती हैं, उन्हें तय अवधि में 15 दिन से ज्यादा का भंडार रखने की अनुमति नहीं होगी।&nbsp;1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक देशभर में चीनी डीलरों पर 400 टन की स्टॉक सीमा लागू की गई है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>फिर 10 लाख टन चीनी आयात क्यों करनी पड़ी?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">निर्यात पर नियंत्रण और भंडारण सीमा जैसे कदम उठाने के बावजूद कीमतों में तेजी बनी रही। इसके बाद सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी को बिना आयात शुल्क के भारत लाने की अनुमति दी। भारत में सामान्य तौर पर चीनी के आयात पर 100 प्रतिशत शुल्क लगता है। लेकिन इस बार तय मात्रा में कच्ची चीनी बिना शुल्क के मंगाई जा सकेगी। यह आयात 31 अक्तूबर 2026 तक किया जा सकेगा। इस कदम का मकसद घरेलू बाजार में चीनी की अतिरिक्त उपलब्धता बढ़ाना है, ताकि मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर कम हो और कीमतों पर दबाव घटे।</p>
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		<title>जेन-जी का गुस्सा: कहीं बस चलवाई तो कहीं फीस कम कराई, जलभराव ने जब रोकी राह तो नगर निगम में पाठशाला लगाई</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 03:54:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[India]]></category>
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					<description><![CDATA[जेन-जी का गुस्सा अब पेपर लीक होने तक सीमित नहीं है। अव्यवस्थाओं के खिलाफ भी उनका आक्रोश चरम पर है। जेन-जी का गुस्सा अब पेपर लीक होने तक सीमित नहीं है। अव्यवस्थाओं के खिलाफ भी उनका आक्रोश चरम पर है। यमुनानगर में बसों की कमी से परेशान होकर जब चार दिन में दो बार जाम [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">जेन-जी का गुस्सा अब पेपर लीक होने तक सीमित नहीं है। अव्यवस्थाओं के खिलाफ भी उनका आक्रोश चरम पर है। जेन-जी का गुस्सा अब पेपर लीक होने तक सीमित नहीं है। अव्यवस्थाओं के खिलाफ भी उनका आक्रोश चरम पर है। यमुनानगर में बसों की कमी से परेशान होकर जब चार दिन में दो बार जाम लगाया तो बस मिल गई। रुड़की में जलभराव से परेशान छात्रों ने नगर निगम को आड़े हाथों लिया तो हिमाचल प्रदेश के विश्वविद्यालय में छात्र आंदोलन के बाद 10 फीसदी फीस कम करनी पड़ी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>यमुनानगर: दो दिन लगाया जाम तो  गांव तक बस चलाने की मांग मानी </strong><br>बसों की कमी और अनियमित संचालन से परेशान छात्राओं ने शुक्रवार को सुबह 9 बजे गुलाब नगर-साढौरा मार्ग पर पाबनी अड्डे के पास सड़क पर बैठ गईं। मानव शृंखला बनाकर रास्ता रोक दिया। जाम की सूचना मिलते ही रोडवेज विभाग सक्रिय हुआ। अपना एक प्रतिनिधि मौके पर भेजा। शनिवार से ही एक अतिरिक्त बस चलाने का आश्वासन मिलने के बाद यातायात बहाल हो गया। चार दिन पहले भी जाम लगाकर प्रदर्शन किया गया था। छात्राओं का कहना था कि पाबनी-साढौरा रूट पर करीब 15 से 20 गांव आते हैं। लेकिन पर्याप्त बसें न होने के कारण विद्यार्थियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। बस चलने से सुधार होगा। </p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>रुड़की: जलभराव ने रोका स्कूल का रास्ता, नगर निगम में लगाई पाठशाला</strong><br>कृष्णानगर की सड़कों पर जलभराव जब पढ़ाई में रुकावट बना तो बच्चों ने ऐसा कदम उठाया जिसने पूरे शहर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। शुक्रवार को स्काइवार्ड स्कूल के छात्र-छात्राएं, शिक्षक और अभिभावक तीन बसों में सवार होकर सीधे नगर निगम पहुंच गए। यहां नगर आयुक्त के कक्ष को स्कूल में बदल दिया गया। ब्लैकबोर्ड लगाया गया। बच्चे कतार में बैठे और शिक्षकों ने पढ़ाना शुरू कर दिया। नगर निगम में पहली बार ऐसा दृश्य देखने को मिला। बढ़ते दबाव के बीच निगम अधिकारियों ने क्षेत्र में टैंकर भेजकर पानी निकालने की कार्रवाई शुरू कराई। स्कूल प्रबंधन ने साफ कहा कि उन्हें स्थायी समाधान चाहिए। </p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>शिमला: आंदोलन के आगे एचपीयू प्रशासन झुका,10 फीसदी घटाई फीस</strong><br>हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में फीस वृद्धि के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों को बड़ी राहत मिली है। विवि प्रशासन ने फीस में दस फीसदी तक की कटौती करने का फैसला लिया है। नई दरों को लेकर शुक्रवार को अधिसूचना भी जारी कर दी है। विश्वविद्यालय ने सामान्य फीस में 10 फीसदी कटौती के साथ तीन शुल्कों में भी संशोधन किया है। स्नातक पुनर्मूल्यांकन शुल्क 1,000 से घटाकर 500 रुपये कर दिया है। स्नातकोत्तर पुनर्मूल्यांकन शुल्क 1,200 से घटाकर 600 रुपये और सुधार शुल्क 1,200 से घटाकर 800 रुपये कर दिया है। छात्रावास शुल्क में की गई 25 फीसदी बढ़ोतरी पूरी तरह वापस होगी।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><br><br></p>
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