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	<title>India &#8211; RNSNS News</title>
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	<title>India &#8211; RNSNS News</title>
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		<title>कॉकरोच जनता पार्टी : दिल्ली पहुंचे अभिजीत दिपके, कहा-किताब-तिरंगा साथ लाएं; सुरक्षा सख्त</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 05:00:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[India]]></category>
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					<description><![CDATA[कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली आज पहुंचे हैं।उन्होंने सोशल मीडिया पर लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से पुलिसकर्मियों को फूल देने के लिए भी कहा। इसे करुणा व सम्मान का प्रतीक बताया। अभिजीत दीपके से जुड़े सभी [&#8230;]]]></description>
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<p>कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली आज पहुंचे हैं।उन्होंने सोशल मीडिया पर लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से पुलिसकर्मियों को फूल देने के लिए भी कहा। इसे करुणा व सम्मान का प्रतीक बताया। अभिजीत दीपके से जुड़े सभी अपडेट जानने के लिए इस पेज पर बने रहे…</p>



<h3 class="wp-block-heading">जंतर-मंतर पर जुटने लगे सीजेपी समर्थक, प्रवक्ता सौरव दास भी पहुंचे</h3>



<p>दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के समर्थकों का जुटना शुरू हो गया है। जमीन से सामने आई तस्वीरों में बड़ी संख्या में समर्थक प्रदर्शन स्थल पर दिखाई दिए। इस बीच सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास भी जंतर-मंतर पहुंच गए हैं। पार्टी समर्थक शांतिपूर्ण प्रदर्शन की तैयारी में नजर आए। हाल के दिनों में सीजेपी अभियान को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हुई है। प्रदर्शन स्थल पर पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है।</p>



<p></p>



<h3 class="wp-block-heading">अभिजीत दीपके बोले- 10 बजे शुरू होगा प्रदर्शन</h3>



<p>अभिजीत ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन सुबह 10 बजे से शुरू होगा। उन्होंने समर्थकों से आंदोलन को पूरी तरह शांतिपूर्ण और अनुशासित बनाए रखने की अपील की। हाल के दिनों में सीजेपी अभियान को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हुई है। जंतर-मंतर पर होने वाले इस प्रदर्शन को लेकर बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">Cockroach Janta Party Protest LIVE: दिल्ली पहुंचे अभिजीत दिपके, कहा-किताब-तिरंगा साथ लाएं; सुरक्षा सख्त</h3>



<p>कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच गए हैं। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन में भाग लेने की अपील की। अभिजीत ने कहा कि प्रदर्शन में आने वाले लोग अपने साथ एक किताब और तिरंगा जरूर लेकर आएं। उन्होंने पुलिसकर्मियों को फूल भेंट करने की भी अपील की और इसे सम्मान व संवेदनशीलता का प्रतीक बताया। अभिजीत ने कहा कि यह आंदोलन प्यार, शांति और लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। उनके इस संदेश के बाद प्रदर्शन को लेकर समर्थकों में उत्साह बढ़ गया है।</p>
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		<title>आरबीआई: नहीं बदलेगी आपके लोन की ईएमआई, एमपीसी ने रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रखने का लिया फैसला</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 05:20:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[India]]></category>
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					<description><![CDATA[भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा एमपीसी के फैसलों का एलान कर रहे हैं। महंगाई और पश्चिम एशिया के तनाव के बीच रेपो रेट क्या फैसला लिया गया जानने के लिए पढ़ें। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा तीन दिनों तक चले आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति बैठक यानी एमपीसी के [&#8230;]]]></description>
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<p>भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा एमपीसी के फैसलों का एलान कर रहे हैं। महंगाई और पश्चिम एशिया के तनाव के बीच रेपो रेट क्या फैसला लिया गया जानने के लिए पढ़ें।<br><br>भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा तीन दिनों तक चले आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति बैठक यानी एमपीसी के फैसलों का एलान कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मौद्रिक नीति समिति के सदस्यों ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला किया है। बुधवार से चल रही एमपीसी की तीन दिवसीय गहन चर्चा के बाद यह महत्वपूर्ण घोषणा की गई। पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव और इसके कारण महंगाई और आर्थिक विकास पर मंडराते जोखिमों के बीच पूरे बाजार की नजरें इस बात पर टिकी थीं कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर क्या कदम उठाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>रेपो रेट 5.25% पर बरकरार</strong></h3>



<p>भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के फैसलों का ऐलान करते हुए बताया कि प्रमुख नीतिगत दर (रेपो रेट) को 5.25 प्रतिशत पर ही अपरिवर्तित रखा गया है। एमपीसी ने सर्वसम्मति से ब्याज दरों में यथास्थिति&nbsp; बनाए रखने और &#8216;तटस्थ&#8217;&nbsp;रुख अपनाने का निर्णय लिया है। देश की आर्थिक स्थिति को लेकर आश्वस्त करते हुए गवर्नर मल्होत्रा ने साफ&nbsp;किया कि भारत की घरेलू आर्थिक गतिविधियां काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं, जो मौजूदा माहौल में अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत और सकारात्मक संकेत है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>वैश्विक चुनौतियों और महंगाई पर आरबीआई&nbsp;की पैनी नजर</strong></h3>



<p>अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण पर बात करते हुए गवर्नर ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था फिलहाल अभूतपूर्व चुनौतियों और अनिश्चितताओं से घिरी हुई है। ऊर्जा की ऊंची कीमतों का सीधा असर विकास दर में नरमी और महंगाई में वृद्धि के रूप में देखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर अभी भी लक्ष्य से नीचे है, लेकिन इसमें ऊपर की ओर जाने का रुझान बना हुआ है। इन गंभीर वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद, आरबीआई गवर्नर ने भरोसा जताया कि भारत न्यूनतम नुकसान के साथ इन वैश्विक झटकों का मजबूती से सामना करने में सक्षम है। आगे की नीति के लिए एमपीसी पूरी तरह से आंकड़ों&nbsp;पर निर्भर रहेगी और आपूर्ति पक्ष के दबावों सहित अन्य विकासों पर करीब से नजर रखेगी।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>RBI ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान घटाकर 6.6% किया</strong></h3>



<p>मौद्रिक नीति के ऐलान के दौरान आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आर्थिक विकास को लेकर चिंताएं भी जाहिर कीं। उन्होंने साफ कहा कि ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला में आ रही बाधाओं का सीधा असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ने की आशंका है, और उत्पादन लागत बढ़ने का दबाव अब अर्थव्यवस्था में साफ दिखाई देने लगा है। इसके अतिरिक्त, वैश्विक स्तर पर कमजोर मांग और उच्च लॉजिस्टिक लागत के कारण भारत के वस्तु निर्यात के सामने भी बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। इन तमाम विपरीत वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों का आकलन करते हुए, भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने जीडीपी&nbsp;ग्रोथ के अनुमान को पहले के 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है।</p>
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		<title>सुप्रीम कोर्ट: सर्वोच्च न्यायालय को आज मिलेंगे पांच नए जज, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत दिलाएंगे पद की शपथ</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/supreme-court-india-five-new-judges-sworn-in-today-by-chief-justice-surya-kant/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 04:15:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[India]]></category>
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					<description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट में पांच नए जजों की नियुक्ति हुई है, जो मंगलवार यानी आज शपथ लेंगे। इनमें वरिष्ठ वकील वेंकिता सुब्रमणि मोहना भी शामिल हैं, जो सीधे बार से जज बनने वाली दूसरी महिला हैं। इन नियुक्तियों के बाद जजों की संख्या 37 हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किए गए पांच नए जज मंगलवार [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>सुप्रीम कोर्ट में पांच नए जजों की नियुक्ति हुई है, जो मंगलवार यानी आज शपथ लेंगे। इनमें वरिष्ठ वकील वेंकिता सुब्रमणि मोहना भी शामिल हैं, जो सीधे बार से जज बनने वाली दूसरी महिला हैं। इन नियुक्तियों के बाद जजों की संख्या 37 हो जाएगी।<br><br>सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किए गए पांच नए जज मंगलवार को अपने पद की शपथ लेंगे। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत सुप्रीम कोर्ट परिसर में इन नए जजों को शपथ दिलाएंगे। इन नियुक्तियों के बाद सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल संख्या बढ़कर 37 हो जाएगी। अब कोर्ट में स्वीकृत 38 पदों में से केवल एक पद खाली रह जाएगा।<br><br><strong>ये पांच जज लेंगे पद की शपथ</strong><br>केंद्र सरकार ने सोमवार को इन पांच नामों को मंजूरी दी। नए जजों में वरिष्ठ वकील वेंकिता सुब्रमणि मोहना, बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्री चंद्रशेखर, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव सचदेवा और जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण पल्ली शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 27 मई को इन नामों की सिफारिश की थी, जिसे सरकार ने महज चार दिनों में हरी झंडी दे दी।</p>



<p><strong>सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 34 से 38 की गई</strong><br>पिछले महीने सरकार ने एक अध्यादेश के जरिए सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी थी। इसमें मुख्य न्यायाधीश का पद भी शामिल है। संख्या बढ़ने और पहले से खाली पदों को मिलाकर कुल छह पद खाली थे। पांच नई नियुक्तियों के बाद अब केवल एक पद रिक्त है। हालांकि, जून के महीने में दो जज रिटायर होने वाले हैं। जस्टिस पंकज मिथल 16 जून को और जस्टिस जे के माहेश्वरी 28 जून को रिटायर होंगे।</p>



<p><strong>वकील से सीधे जज बनने वाली दूसरी महिला होंगी वीएस मोहना</strong><br>वरिष्ठ वकील वेंकिता सुब्रमणि मोहना की नियुक्ति काफी महत्वपूर्ण है। वे जस्टिस इंदु मल्होत्रा (2018) के बाद देश की दूसरी ऐसी महिला वकील हैं, जिन्हें सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया है। 59 वर्षीय मोहना ने 1988 में कोयंबटूर लॉ कॉलेज से पढ़ाई पूरी की थी। साल 2015 में उन्हें वरिष्ठ वकील का दर्जा मिला था। अब सुप्रीम कोर्ट में दो महिला जज होंगी- जस्टिस मोहना और जस्टिस बी वी नागरत्ना। जस्टिस नागरत्ना साल 2027 में एक महीने से अधिक समय के लिए भारत की मुख्य न्यायाधीश भी बनेंगी।</p>
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		<title>भारत-ओमान व्यापार समझौता आज से लागू: मोदी सरकार का पांचवां बड़ा दांव, बिना टैक्स के बिकेंगे उत्पाद</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/india-oman-trade-deal-takes-effect-modi-governments-fifth-major-fta-duty-free-exports/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 01 Jun 2026 03:43:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[India]]></category>
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					<description><![CDATA[भारत और ओमान के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता (सीईपीए) आज 1 जून से लागू हो गया है, जिससे द्विपक्षीय कारोबार दोगुना होकर 20 अरब डॉलर पार पहुंचने की उम्मीद है। पश्चिम एशिया और होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बीच यह डील भारत की ऊर्जा सुरक्षा और गैस आपूर्ति को मजबूत करेगी, साथ ही 98% से अधिक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><em>भारत और ओमान के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता (सीईपीए) आज 1 जून से लागू हो गया है, जिससे द्विपक्षीय कारोबार दोगुना होकर 20 अरब डॉलर पार पहुंचने की उम्मीद है। पश्चिम एशिया और होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बीच यह डील भारत की ऊर्जा सुरक्षा और गैस आपूर्ति को मजबूत करेगी, साथ ही 98% से अधिक भारतीय उत्पादों को ओमान में शुल्क-मुक्त एंट्री मिलेगी। इस समझौते से भारतीय इंजीनियरिंग, फार्मा, कृषि उत्पादों को बड़ा बाजार मिलने के साथ-साथ आईटी, मेडिकल और अकाउंटिंग जैसे क्षेत्रों के भारतीय पेशेवरों के लिए ओमान में नौकरी के नए दरवाजे खुलेंगे।</em></p>



<p>भारत और ओमान के बीच वृहद आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) एक जून यानी सोमवार से लागू होने जा रहा है। ईरान संकट के बीच इस समझौते से भारत के लिए एक और शुल्क-मुक्त बाजार खुल जाएगा। इससे न सिर्फ भारतीय वस्तुओं और सेवाओं को ओमान के बाजार में अधिक अवसर मिलेंगे, बल्कि दोनों देशों के व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे एवं द्विपक्षीय कारोबार 10.61 अरब डॉलर से बढ़कर दोगुना होने की उम्मीद है।<br><br>यह नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में लागू होने वाला पांचवां मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) है। भारत इससे पहले मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के साथ ऐसे समझौते लागू कर चुका है। ब्रिटेन और न्यूजीलैंड के साथ भी व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। मौजूदा चुनौतियों के बीच ऊर्जा प्रवाह के लिहाज से ओमान के साथ यह समझौता कई मायने में महत्वपूर्ण है, क्योंकि ईरान-अमेरिका जंग के चलते होर्मुज के रास्ते ऊर्जा आपूर्ति बाधित है। दोनों देशों के बीच शांति समझौते को लेकर अनिश्चितता बढ़ती जा रही है। निकट भविष्य में इस मार्ग से आपूर्ति को लेकर संशय बना रहेगा। ऐसे में ओमान के साथ साझेदारी भारत के लिए वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं और खाड़ी देशों से ऊर्जा आपूर्ति प्रवाह को काफी हद तक सुनिश्चित कर सकती है। भारत और ओमान ने वृहद आर्थिक साझेदारी समझौते पर पिछले साल 18 दिसंबर को हस्ताक्षर किए थे।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ओमान व्यापार समझौता : इन क्षेत्रों के लिए खुलेंगे नए अवसर</h3>



<p>इस समझौते से इंजीनियरिंग वस्तुओं, दवाएं, कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, समुद्री उत्पाद, वस्त्र, खनिज, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स मशीनरी, प्लास्टिक रबर, परिवहन ,घड़ियां, रत्न-आभूषण और कागज जैसे क्षेत्रों में निर्यात के नए अवसर पैदा होंगे।</p>



<p><strong>किसानों और खाद्य उद्योग को फायदा</strong><br>भारत से जाने वाली प्राकृतिक शहद, काजू, आलू, बिना हड्डी वाले मांस और बेकरी उत्पादों को ओमान में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा। ओमान कई खाद्य उत्पादों पर भी आयात शुल्क खत्म करेगा, जो अभी 5-100 फीसदी तक है। इनमें चीज, दही, दूध एवं क्रीम, फ्रोजन मछली, मक्खन, मांस, ब्रेड, पेस्ट्री, केक, चॉकलेट, शुगर आदि शामिल हैं।</p>



<p><strong>व्यापार समझौते से भारत को होने वाले पांच प्रमुख फायदे<br>बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा:&nbsp;</strong>भारत को ओमान के 98 फीसदी से ज्यादा उत्पाद श्रेणियों में शुल्क मुक्त पहुंच मिलेगी। यह ओमान के साथ भारत के कुल व्यापार मूल्य का 99 फीसदी हिस्सा कवर करता है। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।<br><br><strong>बढ़ेगा इंजीनियरिंग निर्यात, जांच से राहत:</strong>&nbsp;मशीनरी और मोटर वाहनों पर शुल्क समाप्त होने से भारत से होने वाला इंजीनियरिंग निर्यात 2030 तक 1.6 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। ओमान पहुंचने वाले भारतीय उत्पादों को अनावश्यक जांच से राहत।</p>



<p><strong>&nbsp;गैस आपू्र्ति के लिए मिलेगा दूसरा रास्ता:&nbsp;</strong>ओमान से गुजरात तक 2,000 किमी लंबे समुद्र के नीचे पाइपलाइन बिछाने पर काम चल रहा है। इससे ऊर्जा आपूर्ति के लिए होर्मुज से इतर दूसरा रास्ता मिल जाएगा। &nbsp;<br><br><strong>भारतीय दवाओं और वाहनों को मिलेगा बड़ा बाजार:&nbsp;</strong>ओमान भारतीय दवाइयों शुल्क मुक्त पहुंच देने जा रहा है। इससे भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए नया अवसर खुलेगा। वाहनों पर 5 फीसदी शुल्क खत्म होने से भारत में बने वाहन ओमान में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेंगे।</p>



<p><strong>सेवा क्षेत्र और पेशेवरों के लिए खुलेंगे नए दरवाजे:&nbsp;</strong>ओमान ने पहली बार भारतीय पेशेवरों के लिए विशेष प्रावधान किए हैं। इसके तहत, अकाउंटिंग, इंजीनियरिंग, मेडिकल, आईटी, शिक्षा, निर्माण और कंसल्टिंग जैसे क्षेत्रों के भारतीय पेशेवरों को ओमान में काम करने के ज्यादा अवसर मिलेंगे। भारतीय कंपनियां अधिक कर्मचारियों को ओमान भेज सकेंगी।</p>



<p><strong>ओमान सल्तनत की मूल वस्तुओं पर ही मिलेगी छूट</strong><br>वित्त मंत्रालय ने व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते के तहत ओमान से आयातित वस्तुओं पर सीमा शुल्क रियायत संबंधी अधिसूचना जारी कर दी है। अधिसूचना में कहा गया है कि शुल्क छूट तभी मिलेगी, जब आयातक सीमा शुल्क उपायुक्त या सीमा शुल्क सहायक आयुक्त को संतुष्ट कर दे कि जिन वस्तुओं के संबंध में रियायत मांगी जा रही है, वे ओमान सल्तनत की मूल वस्तुएं हैं।</p>



<p>एक जून से लागू होने वाले इस समझौते के तहत, भारत अपनी कुल टैरिफ लाइनों (12,556) में से 77.79 फीसदी पर शुल्क में छूट दे रहा है, जो मूल्य के हिसाब से ओमान से भारत के कुल आयात का 94.81% है।</p>



<p><strong>भारतीयों को मिलेंगे सस्ते खजूर :</strong>&nbsp;भारतीय ग्राहकों को ओमान से खजूर सस्ते मिलेंगे, क्योंकि भारत हर साल 2,000 टन खजूर को शुल्क-मुक्त प्रवेश देगा। भारत ओमान के दो पारंपरिक उत्पादों गम अरेबिका और फ्रैंकइंसेंस पर भी रियायतें दे रहा है।</p>



<p><strong>&nbsp;संकट में मदद :&nbsp;</strong>होर्मुज बंद होने के बाद कतर और यूएई से एलएनजी की आपूर्ति गड़बड़ाने लगी है। ऐेसे में ओमान ने भारत को एलएनजी आपूर्ति बढ़ा दी। इससे भारत के कुल एलएनजी आयात में ओमान की हिस्सेदारी इस साल मई तक बढ़कर 32 फीसदी के स्तर तक पहुंच गई।</p>
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		<title>पेट्रोल पंपों पर मिलेगी सूची: गाड़ियों के हिसाब से चुन सकेंगे इथेनॉल मिक्स पेट्रोल, जानिए सरकार का नया प्लान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 29 May 2026 03:52:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[India]]></category>
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					<description><![CDATA[सरकार पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को अपनी गाड़ी के इंजन के अनुसार ई20 से लेकर E30 तक अलग-अलग मात्रा वाले इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल चुनने का विकल्प देने की योजना बना रही है। हालांकि, उपभोक्ता ज्यादा इथेनॉल से माइलेज कम होने और पुराने इंजनों के रबर-प्लास्टिक पार्ट्स को नुकसान पहुंचने जैसी चिंताओं को लेकर थोड़े असमंजस [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>सरकार पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को अपनी गाड़ी के इंजन के अनुसार ई20 से लेकर E30 तक अलग-अलग मात्रा वाले इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल चुनने का विकल्प देने की योजना बना रही है। हालांकि, उपभोक्ता ज्यादा इथेनॉल से माइलेज कम होने और पुराने इंजनों के रबर-प्लास्टिक पार्ट्स को नुकसान पहुंचने जैसी चिंताओं को लेकर थोड़े असमंजस में हैं।</p>



<p>आने वाले दिनों में जब आप अपनी गाड़ी में तेल भरवाने पेट्रोल पंप पर जाएंगे, तो आपको वहां पेट्रोल के कई विकल्प दिखाई देंगे। सरकार एक ऐसी महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है, जिसके तहत वाहन मालिक अपनी कार या बाइक के इंजन की क्षमता और अनुकूलता के हिसाब से खुद तय कर सकेंगे कि उन्हें कितने फीसदी इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल लेना है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के साथ जियो-बीपी, नायरा एनर्जी और शेल जैसी निजी कंपनियों को भी ई20, ई22, ई25 और ई30 ईंधन बेचने के लिए बुनियादी ढांचा बनाने की सलाह दी है। ई20 पेट्रोल में 80 फीसदी शुद्ध पेट्रोल होता है और 20 फीसदी इथेनॉल मिलाया जाता है।<br><br>यह कदम नए इथेनॉल मिश्रणों के लिए भारतीय मानक ब्यूरो के हालिया मानदंडों के बाद उठाया गया है। यह सरकार के अप्रैल के उस प्रस्ताव के ठीक बाद आया है, जिसमें पूरी तरह से इथेनॉल से चलने वाले वाहनों को अनुमति देने की बात कही गई थी।<br><br><strong>उपभोक्ताओं में नए ईंधन को लेकर दो बड़ी चिंताएं</strong><br>दरअसल, सरकार के इस कदम के पीछे इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर उपभोक्ताओं के मन में दो सबसे बड़ी चिंताएं हैं, जिन्हें लेकर बाजार में लगातार बहस चल रही है।</p>



<p><strong>पहली चिंता:</strong>&nbsp;इथेनॉल में शुद्ध पेट्रोल के मुकाबले ऊर्जा घनत्व कम होता है। इसका मतलब है कि पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा जितनी ज्यादा होगी, गाड़ी का माइलेज उतना ही कम होने की आशंका रहती है। हालांकि, सरकार का दावा है कि ई20 से प्रदर्शन एवं पिकअप बेहतर होता है और माइलेज में कोई भारी गिरावट नहीं आती।</p>



<p><strong>दूसरी चिंता:&nbsp;</strong>इंजन पुराना होने पर ज्यादा इथेनॉल वाला पेट्रोल उसके रबर पार्ट्स, पाइप और प्लास्टिक उपकरणों को नुकसान पहुंचा सकता है, क्योंकि इथेनॉल में नमी सोखने की प्रवृत्ति होती है। इससे इंजन में जंग लगने का खतरा रहता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>पेट्रोल पंपों पर करने होंगे कुछ बदलाव</strong></h3>



<p>देशभर में मौजूद करीब एक लाख पेट्रोल पंपों पर नई व्यवस्था लागू करने के लिए कुछ जमीनी बदलाव करने होंगे। खुदरा काउंटरों पर अलग-अलग मिश्रण वाला पेट्रोल बेचने के लिए अलग डिस्पेंसिंग नोजल, भूमिगत भंडारण टैंक और ब्लेंडिंग कंट्रोल सिस्टम लगाने होंगे। जानकारों के मुताबिक, यह बदलाव ज्यादा खर्चीला या जटिल नहीं होगा। मौजूदा डिस्पेंसिंग सिस्टम (जिसमें अभी प्रीमियम, रेगुलर और डीजल के नोजल होते हैं) का ही विस्तार किया जा सकता है। इसके भंडारण और टैंक का खर्च तेल कंपनियां खुद वहन करेंगी। पेट्रोल पंपों पर लगी मशीनों पर स्पष्ट अक्षरों में लिखना होगा कि वहां मिश्रित पेट्रोल का कौन सा वेरिएंट बिक रहा है, ताकि ग्राहक भ्रमित न हों। वेरिएंट के दाम भी अलग-अलग दिखाने होंगे।</p>



<p><strong>रणनीतिक कदम से होगा फायदा</strong><br>मौजूदा तेल संकट के बीच यह रणनीतिक कदम भारत के लिए फायदेमंद है। नवंबर, 2014 से फरवरी, 2026 के बीच इथेनॉल मिश्रण के कारण भारत ने 1.7 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा बचाई है। देश में कार्बन उत्सर्जन में 8.7 करोड़ टन की कमी आई है, जो 35 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है। मार्च, 2026 तक भारत का इथेनॉल उत्पादन बढ़कर 20 अरब लीटर हो चुका है, जबकि वर्तमान 20 फीसदी मिश्रण के लिए सिर्फ 11 अरब लीटर की जरूरत है। इस अतिरिक्त क्षमता को खपाने के लिए ई22 और ई30 जैसे विकल्प लाना जरूरी है, ताकि किसानों और चीनी मिलों को फायदा हो सके।</p>
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		<title>भारत में बढ़ रही लोगों की उम्र, जम्मू-कश्मीर के पुरुष और केरल की महिलाएं सबसे ज्यादा जी रहीं जिंदगी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 27 May 2026 04:39:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[India]]></category>
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					<description><![CDATA[भारत में लोगों की औसत जीवन प्रत्याशा बढ़कर 70.6 वर्ष हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर के पुरुष सबसे ज्यादा लंबी जिंदगी जी रहे हैं, जबकि महिलाओं में केरल सबसे आगे है। देश में महिलाओं की औसत उम्र पुरुषों से 4.1 वर्ष ज्यादा पाई गई। छत्तीसगढ़ में जीवन प्रत्याशा सबसे कम रही। रिपोर्ट में [&#8230;]]]></description>
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<p>भारत में लोगों की औसत जीवन प्रत्याशा बढ़कर 70.6 वर्ष हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर के पुरुष सबसे ज्यादा लंबी जिंदगी जी रहे हैं, जबकि महिलाओं में केरल सबसे आगे है। देश में महिलाओं की औसत उम्र पुरुषों से 4.1 वर्ष ज्यादा पाई गई। छत्तीसगढ़ में जीवन प्रत्याशा सबसे कम रही। रिपोर्ट में शहरी इलाकों के लोगों की औसत उम्र गांवों से अधिक दर्ज की गई है।</p>



<p>देश में बेहतर इलाज, टीकाकरण और स्वास्थ्य सुविधाओं का असर अब लोगों की जिंदगी पर साफ दिखाई देने लगा है। भारत में लोगों की औसत उम्र लगातार बढ़ रही है। हाल ही में जारी जीवन प्रत्याशा रिपोर्ट में सामने आया है कि देश में औसत जीवन प्रत्याशा बढ़कर 70.6 वर्ष हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर के पुरुष सबसे ज्यादा लंबी जिंदगी जी रहे हैं, जबकि महिलाओं में केरल सबसे आगे है। दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ में महिलाओं और पुरुषों दोनों की औसत उम्र सबसे कम दर्ज की गई है।</p>



<p><strong>आखिर जीवन प्रत्याशा रिपोर्ट में क्या सामने आया?<br></strong>जनगणना महारजिस्ट्रार की वर्ष 2020-24 की रिपोर्ट के अनुसार, 2019-23 की तुलना में देश की औसत जीवन प्रत्याशा 0.3 वर्ष बढ़ी है। इसका मतलब है कि अब भारतीय पहले से ज्यादा लंबे समय तक जीवित रह रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि देश में सबसे ज्यादा औसत जीवन प्रत्याशा केरल में 75.6 वर्ष दर्ज की गई है। वहीं छत्तीसगढ़ सबसे नीचे रहा, जहां यह आंकड़ा 64.7 वर्ष रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और जीवन स्तर बेहतर होने से यह बदलाव देखने को मिला है।</p>



<p><strong>किन राज्यों में लोग सबसे ज्यादा लंबी जिंदगी जी रहे हैं?</strong><br>रिपोर्ट के मुताबिक, जन्म के समय पुरुषों की जीवन प्रत्याशा जम्मू-कश्मीर में सबसे अधिक 73.8 वर्ष रही। महिलाओं के मामले में केरल पहले स्थान पर रहा। इसके बाद हिमाचल प्रदेश और दिल्ली का नंबर आता है। वहीं बिहार और उत्तर प्रदेश महिलाओं की कम जीवन प्रत्याशा वाले राज्यों में शामिल हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि राष्ट्रीय स्तर पर महिलाएं पुरुषों से औसतन 4.1 वर्ष ज्यादा जी रही हैं।</p>



<figure class="wp-block-table"><table class="has-fixed-layout"><thead><tr><th class="has-text-align-left" data-align="left"><em><strong>राज्य</strong></em></th><th class="has-text-align-left" data-align="left"><em><strong>खास आंकड़ा</strong></em></th></tr></thead><tbody><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><em><strong>केरल</strong></em></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><em><strong>सबसे ज्यादा औसत जीवन प्रत्याशा 75.6 वर्ष</strong></em></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><em><strong>जम्मू-कश्मीर</strong></em></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><em><strong>पुरुषों की सबसे ज्यादा जीवन प्रत्याशा 73.8 वर्ष</strong></em></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><em><strong>छत्तीसगढ़</strong></em></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><em><strong>सबसे कम जीवन प्रत्याशा 64.7 वर्ष</strong></em></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><em><strong>हिमाचल प्रदेश</strong></em></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><em><strong>महिला-पुरुष जीवन प्रत्याशा में सबसे ज्यादा अंतर</strong></em></td></tr></tbody></table></figure>



<p>रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं की औसत उम्र पुरुषों से ज्यादा पाई गई है। हिमाचल प्रदेश में महिला और पुरुष जीवन प्रत्याशा के बीच सबसे ज्यादा 7.1 वर्ष का अंतर दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं में कुछ बीमारियों का खतरा कम होने और स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता इसका कारण हो सकता है। हालांकि कई राज्यों में महिलाओं की स्वास्थ्य स्थिति अब भी चिंता का विषय बनी हुई है।</p>



<p><strong>शहर और गांव के आंकड़ों में क्या अंतर मिला?</strong><br>रिपोर्ट में शहरी और ग्रामीण इलाकों के बीच भी बड़ा अंतर देखने को मिला। जन्म के समय और 70 वर्ष की आयु पर शहरों में रहने वाले लोगों की जीवन प्रत्याशा गांवों से ज्यादा है। हालांकि कुछ राज्यों में गांवों के आंकड़े बेहतर पाए गए। केरल और उत्तराखंड में जन्म के समय ग्रामीण इलाकों की जीवन प्रत्याशा शहरों से अधिक रही। वहीं 70 वर्ष की उम्र के बाद उत्तराखंड, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, केरल, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और झारखंड के ग्रामीण इलाकों में लोग शहरों की तुलना में ज्यादा लंबी जिंदगी जी रहे हैं।</p>



<p><strong>आगे सरकारों के सामने क्या चुनौती है?</strong><br>विशेषज्ञों का कहना है कि औसत उम्र बढ़ना अच्छी बात है, लेकिन इसके साथ बुजुर्ग आबादी भी तेजी से बढ़ेगी। ऐसे में स्वास्थ्य सुविधाओं, बुजुर्ग देखभाल और सामाजिक सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान देना होगा। रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि जिन राज्यों में स्वास्थ्य और शिक्षा बेहतर हैं, वहां लोग ज्यादा लंबी जिंदगी जी रहे हैं। इसलिए आने वाले समय में सरकारों के सामने चुनौती होगी कि सभी राज्यों में स्वास्थ्य सेवाओं को समान रूप से मजबूत बनाया जाए।</p>
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		<title>कैसे ‘जल संकट’ बिगाड़ रहा GDP का गणित? 2030 तक बूंद-बूंद को तरसेंगे लोग !</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 27 May 2026 04:00:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[India]]></category>
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					<description><![CDATA[भारत में बढ़ता जल संकट अब केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था, कृषि उत्पादन, उद्योगों और आम जनजीवन पर सीधा असर डालने लगा है। देश के कई हिस्सों में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है, नदियां सूख रही हैं और शहरों में पानी की भारी किल्लत देखने को [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>भारत में बढ़ता जल संकट अब केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था, कृषि उत्पादन, उद्योगों और आम जनजीवन पर सीधा असर डालने लगा है। देश के कई हिस्सों में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है, नदियां सूख रही हैं और शहरों में पानी की भारी किल्लत देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों की मानें तो यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वर्ष 2030 तक स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">हर साल गहराता संकट</h3>



<p>गर्मियों के आते ही दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई, जयपुर और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में पानी की मांग और आपूर्ति के बीच भारी अंतर दिखाई देता है। गांवों में महिलाएं कई किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर हैं, जबकि शहरी इलाकों में टैंकरों पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है।</p>



<p>जल विशेषज्ञों के अनुसार, देश में उपलब्ध कुल पानी का बड़ा हिस्सा कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल होता है, लेकिन पारंपरिक सिंचाई पद्धतियों और पानी की बर्बादी के कारण जल संसाधनों पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">GDP पर पड़ रहा सीधा असर</h3>



<p>जल संकट का असर अब देश की आर्थिक विकास दर यानी GDP पर भी दिखाई देने लगा है। कृषि उत्पादन में कमी, उद्योगों में उत्पादन बाधित होना और बिजली उत्पादन पर असर जैसे कारण अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहे हैं।</p>



<p>विशेषज्ञों का कहना है कि पानी की कमी से सबसे अधिक प्रभावित सेक्टर कृषि, टेक्सटाइल, बिजली उत्पादन और मैन्युफैक्चरिंग हैं। कई उद्योगों को उत्पादन घटाना पड़ रहा है, जिससे रोजगार और निवेश दोनों प्रभावित हो रहे हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">भूजल का तेजी से दोहन</h3>



<p>भारत दुनिया में सबसे अधिक भूजल उपयोग करने वाले देशों में शामिल है। लगातार बढ़ती आबादी, शहरीकरण और अनियंत्रित बोरवेल ने भूजल स्तर को खतरनाक स्थिति तक पहुंचा दिया है। कई राज्यों में भूजल स्तर हर साल नीचे जा रहा है, जिससे भविष्य में पेयजल संकट और गंभीर हो सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">2030 तक भयावह तस्वीर</h3>



<p>रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि वर्तमान स्थिति बनी रही तो 2030 तक देश की बड़ी आबादी को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। कई शहरों में पीने के पानी की भारी कमी हो सकती है और खेती पर भी गहरा असर पड़ सकता है।</p>



<p>विशेषज्ञों का मानना है कि जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, जल पुनर्चक्रण और आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाए बिना इस संकट से निपटना मुश्किल होगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading">क्या हैं समाधान?</h3>



<ul class="wp-block-list">
<li>वर्षा जल संचयन को अनिवार्य बनाना</li>



<li>ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा देना</li>



<li>भूजल दोहन पर सख्त निगरानी</li>



<li>नदियों और जलाशयों का संरक्षण</li>



<li>घरों और उद्योगों में पानी के पुनर्चक्रण को बढ़ावा</li>
</ul>



<h3 class="wp-block-heading">सामूहिक प्रयास की जरूरत</h3>



<p>जल संकट केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक आम लोग पानी बचाने की आदत नहीं अपनाएंगे, तब तक हालात सुधरना मुश्किल है। आने वाले वर्षों में पानी ही सबसे बड़ा संसाधन साबित हो सकता है, इसलिए अभी से जागरूक होना जरूरी है।</p>



<p>अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों को पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है।</p>



<p></p>
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		<title>सीबीएसई ने मानी अपनी गलती: वेदांत की गलत कॉपी अपलोड होने पर बोर्ड ने स्वीकार की त्रुटि, परिवार से किया संपर्क</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 26 May 2026 04:56:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[India]]></category>
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					<description><![CDATA[वेदांत की वायरल पोस्ट के बाद सीबीएसई ने कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिका में गड़बड़ी स्वीकार कर ली है। बोर्ड ने माना कि फिजिक्स की गलत आंसर शीट अपलोड हुई थी और अब छात्र के अंक संशोधित कर नया रिजल्ट जारी किया जाएगा। आइए विस्तार से जानते हैं।  केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कक्षा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>वेदांत की वायरल पोस्ट के बाद सीबीएसई ने कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिका में गड़बड़ी स्वीकार कर ली है। बोर्ड ने माना कि फिजिक्स की गलत आंसर शीट अपलोड हुई थी और अब छात्र के अंक संशोधित कर नया रिजल्ट जारी किया जाएगा। आइए विस्तार से जानते हैं। <br><br>केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कक्षा 12 की आंसर सीट के मूल्यांकन में गड़बड़ी स्वीकार की है। सोशल मीडिया पर एक छात्र की वायरल पोस्ट के बाद बोर्ड ने माना कि आंसर सीट के मूल्यांकन और अपलोडिंग में गलती हुई है, जिसके बाद संबंधित छात्रों के अंक संशोधित किए जाएंगे।<br><br>पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब छात्र वेदांत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा किया कि सीबीएसई की नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली के तहत जो फिजिक्स की आंसर सीट उसे दिखाई गई, वह उसकी नहीं थी। छात्र ने आरोप लगाया कि री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के दौरान किसी अन्य छात्र की कॉपी उसके नाम से अपलोड कर दी गई। इस खुलासे ने बोर्ड की मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।<br><br><strong>कैसा आया मामला सामने?</strong></p>



<p>23 मई को वेदांत ने एक्स पर कई पोस्ट साझा करते हुए बताया कि उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी मिलने के बाद वह पूरी तरह टूट गया, क्योंकि फिजिक्स की कॉपी में लिखावट और उत्तर उसके नहीं थे। छात्र ने आशंका जताई कि ऐसी गलती से उसके अंक और कॉलेज एडमिशन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।</p>



<figure class="wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter wp-block-embed-twitter"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<div class="embed-twitter"><blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="en" dir="ltr">Same type of issue happened with my physics the answer sheet is not mine and I am awarded 50% marks for the answers written by some other student where is my real answer sheet which i written where are my real marks because of that I am not getting 75% in PCM aggregate <a href="https://t.co/6BUm6IommR">https://t.co/6BUm6IommR</a></p>&mdash; VEDANT (@VEDANTSHRIV17) <a href="https://twitter.com/VEDANTSHRIV17/status/2058259420321284157?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">May 23, 2026</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></div>
</div></figure>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>वेदांत ने लिखावट से अपनी कॉपी तुरंत पहचान ली थी</strong></h3>



<p>वेदांत ने दावा किया था कि उसके परिवार और शिक्षकों ने भी फिजिक्स की कॉपी देखने के बाद तुरंत अंतर पहचान लिया। उसके मुताबिक, उसकी इंग्लिश और कंप्यूटर साइंस की उत्तर पुस्तिकाएं आपस में मेल खाती हैं, लेकिन फिजिक्स की कॉपी बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है। उसने सोशल मीडिया पर लिखा कि फिजिक्स की जो आंसर शीट भेजी गई है, वह उसकी नहीं है। उसने कहा कि लिखावट, अक्षरों की बनावट, शब्दों के बीच दूरी, वाक्य लिखने का तरीका और उत्तरों की शैली पूरी तरह अलग है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>वेदांत ने क्या मांग की थी?</strong></h3>



<p>वेदांत ने इस पूरे मामले को सीबीएसई की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली से जोड़ते हुए कहा था कि अगर उत्तर पुस्तिकाएं ही गलत तरीके से टैग हो रही हैं, तो छात्र इस प्रक्रिया पर भरोसा कैसे करें। उसने बोर्ड से मूल फिजिकल आंसर शीट की जांच कराने, स्कैनिंग और टैगिंग प्रक्रिया का ऑडिट करने व मामले की जांच कराने की मांग की थी।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>वेदांत और उसके परिवार को ऑनलाइन ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा</strong></h3>



<p>इस मामले का एक संवेदनशील पहलू यह भी रहा कि अपनी समस्या सामने रखने के बाद वेदांत और उसके परिवार को सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। कुछ यूजर्स ने छात्र के दावों को झूठा बताया, जबकि कई अकाउंट्स ने बिना किसी आधार के उसे पाकिस्तानी कहकर निशाना बनाया।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>आंसर सीट की गड़बड़ी से सीबीएसई पर उठे गंभीर सवाल&nbsp;</strong></h3>



<p>सोशल मीडिया पर मामला तेजी से वायरल होने के बाद CBSE ने जांच शुरू की। बोर्ड ने माना कि फिजिक्स की उत्तर पुस्तिका में गड़बड़ी हुई थी। इसके साथ ही केमिस्ट्री विषय से जुड़ी एक अन्य शिकायत को भी सही पाया गया, जिससे बोर्ड की डिजिटल मूल्यांकन और सत्यापन प्रणाली पर सवाल और गहरे हो गए हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>वेदांत को सीबीएसई ने भेजा मेल</strong></h3>



<p>CBSE के संयुक्त सचिव (कोऑर्डिनेशन) ने वेदांत को ईमेल भेजकर उसकी सही फिजिक्स उत्तर पुस्तिका साझा की। बोर्ड ने अपने संदेश में लिखा, “कृपया फिजिक्स की आपकी सही उत्तर पुस्तिका संलग्न है। नए अंकों के आधार पर आपका परिणाम जल्द अपडेट किया जाएगा। इस ईमेल ने छात्र द्वारा उठाए गए सवालों को सही साबित कर दिया। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि फिजिक्स के अंकों में संशोधन किया जाएगा और अपडेटेड रिजल्ट जल्द जारी होगा।</p>
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		<title>Fuel Prices India: महंगा तेल और सरकारी सख्ती से बदल रही तस्वीर, देश में घट सकती है पेट्रोल-डीजल की मांग</title>
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		<pubDate>Mon, 25 May 2026 04:07:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[महंगे कच्चे तेल, कमजोर रुपये और सरकारी ईंधन बचत अभियान के कारण भारत में पेट्रोल-डीजल की मांग घटने की आशंका जताई गई है। ऊर्जा विश्लेषण कंपनी केप्लर ने 2026 के लिए ईंधन मांग वृद्धि के अनुमान में 39 फीसदी कटौती की है। ईरान युद्ध के कारण डिलीवरी लागत भी 19 फीसदी बढ़ गई है। आइए, विस्तार [&#8230;]]]></description>
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<p><em>महंगे कच्चे तेल, कमजोर रुपये और सरकारी ईंधन बचत अभियान के कारण भारत में पेट्रोल-डीजल की मांग घटने की आशंका जताई गई है। ऊर्जा विश्लेषण कंपनी केप्लर ने 2026 के लिए ईंधन मांग वृद्धि के अनुमान में 39 फीसदी कटौती की है। ईरान युद्ध के कारण डिलीवरी लागत भी 19 फीसदी बढ़ गई है।<strong> आइए, विस्तार से मामले को जानते हैं&#8230;</strong></em><br><br>महंगे कच्चे तेल, कमजोर रुपये और सरकारी ईंधन बचत अभियान के कारण भारत में पेट्रोल-डीजल की मांग घटने की आशंका जताई गई है। ऊर्जा विश्लेषण कंपनी केप्लर ने 2026 के लिए ईंधन मांग वृद्धि के अनुमान में 39 फीसदी कटौती की है। ईरान युद्ध के कारण डिलीवरी लागत भी 19 फीसदी बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर आम लोगों के खर्च और बाजार की कीमतों पर पड़ सकता है। <br><br><strong>आखिर क्यों घट सकती है पेट्रोल-डीजल की मांग?</strong><br>ऊर्जा विश्लेषण कंपनी केप्लर ने भारत की 2026 के लिए रिफाइंड उत्पादों की मांग वृद्धि के अनुमान में बड़ी कटौती की है। कंपनी ने मांग वृद्धि का अनुमान 39 फीसदी घटाकर करीब 78 हजार बैरल प्रतिदिन कर दिया है। पहले यह अनुमान 1.28 लाख बैरल प्रतिदिन था। रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोल की मांग वृद्धि का अनुमान भी 63 हजार बैरल प्रतिदिन से घटाकर 38 हजार बैरल प्रतिदिन कर दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार महंगे होते ईंधन और आर्थिक दबाव के कारण लोग गैर-जरूरी यात्राएं कम कर सकते हैं।</p>



<p><strong>किन कारणों से ईंधन खपत पर असर पड़ रहा है?</strong><br>रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्क फ्रॉम होम बढ़ने, गैर-जरूरी यात्राओं में कमी और सरकार के ईंधन बचत अभियान का सीधा असर डीजल और पेट्रोल की मांग पर पड़ेगा। डीजल की सालाना मांग में करीब 20 हजार बैरल प्रतिदिन की गिरावट आने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा विमान ईंधन यानी एटीएफ की मांग में भी करीब 50 फीसदी तक गिरावट का अनुमान लगाया गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय हालात और महंगे तेल की वजह से लोग यात्रा खर्च कम करने की कोशिश कर रहे हैं।</p>



<p><strong>क्या कीमतें अभी भी लागत से कम हैं?</strong><br>विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लगातार महंगा बना हुआ है। सरकार ने हाल के दिनों में तीन बार पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाई हैं, लेकिन इसके बावजूद मौजूदा कीमतें तेल कंपनियों की अनुमानित लागत से कम बताई जा रही हैं। देश में पेट्रोल की औसत कीमत करीब 103 रुपये प्रति लीटर है, जबकि लागत संतुलन के लिए इसे करीब 125 रुपये प्रति लीटर होना चाहिए। इसी तरह डीजल की मौजूदा औसत कीमत करीब 94 रुपये प्रति लीटर है, जबकि संतुलन स्तर 115 से 120 रुपये प्रति लीटर बताया जा रहा है।</p>



<p><strong>ईरान युद्ध का डिलीवरी लागत पर कितना असर पड़ा?</strong><br>ईरान युद्ध का असर अब एशिया-प्रशांत क्षेत्र की डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स लागत पर भी दिखाई देने लगा है। एक सर्वे के मुताबिक मार्च से मई के बीच भारत समेत एशिया क्षेत्र में डिलीवरी लागत में 19 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ईंधन महंगा होने, ड्राइवरों के वेतन बढ़ने और शहरी भीड़भाड़ को इसकी बड़ी वजह बताया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।</p>



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		<title>Unmute Bharat: &#8216;विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाना है तो सोने का मोह छोड़ें&#8217;, वर्तमान संकट पर गौरव वल्लभ की दो टूक</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 25 May 2026 03:54:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पांच ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था में कितने जीरो पूछकर मशहूर हुए प्रो. गौरव वल्लभ ने वर्तमान संकट पर दो टूक कहा है। उन्होंने साफ कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाना है तो सोने का मोह छोड़ें और पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाएं। पांच ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था में कितने जीरो होते हैं? यह सवाल पूछकर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरने [&#8230;]]]></description>
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<p><a href="https://www.amarujala.com/user/rajkishor1" target="_blank" rel="noopener"></a></p>



<p>पांच ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था में कितने जीरो पूछकर मशहूर हुए प्रो. गौरव वल्लभ ने वर्तमान संकट पर दो टूक कहा है। उन्होंने साफ कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाना है तो सोने का मोह छोड़ें और पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाएं।</p>



<p>पांच ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था में कितने जीरो होते हैं? यह सवाल पूछकर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरने वाले अर्थशास्त्री प्रोफेसर गौरव वल्लभ के सामने जब अनम्यूट भारत में यही चुटीला सवाल दागा गया कि भारत की 5 ट्रिलियन इकोनॉमी के लक्ष्य वाले ये जीरो असल में कितने सही हैं? तो उन्होंने अर्थव्यवस्था की एक बेहद यथार्थवादी और गंभीर तस्वीर पेश कर दी।<br><br>एक्सएलआरआई में प्रोफेसर, आईआईएम के डायरेक्टर रह चुके और कांग्रेस के पूर्व नेता प्रोफेसर वल्लभ ने भारत पर बढ़ते आयात के दबाव और विदेशी मुद्रा संकट को लेकर गहरी चिंता जताई है। वर्तमान में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य प्रोफेसर वल्लभ ने अमर उजाला के पॉडकास्ट में दो टूक कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और घटते विदेशी मुद्रा भंडार से निपटने के लिए देशवासियों को अपनी उपभोग की आदतों में बड़ा बदलाव करना होगा। उन्होंने अपील की कि यदि लोग एक वर्ष तक सोने की खरीद टाल दें और निजी वाहनों के बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें, तो देश अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा बचा सकता है। प्रोफेसर वल्लभ ने साफ कहा कि अगर देश को वास्तव में मजबूत अर्थव्यवस्था बनना है, तो सिर्फ ट्रिलियन के जीरो गिनने से काम नहीं चलेगा, बल्कि आयात पर निर्भरता कम करनी होगी।<br><br><strong>कच्चे तेल और सोने के आयात ने बढ़ाया दबाव</strong><br>प्रोफेसर वल्लभ ने कहा कि भारत हर वर्ष लगभग 110 बिलियन डॉलर का कच्चा तेल और करीब 70 बिलियन डॉलर का सोना आयात करता है। पश्चिम एशिया में तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से उछलकर 105 डॉलर तक पहुंच चुकी हैं। इसका सीधा असर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ा है और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी इसी भारी आर्थिक दबाव का परिणाम है।</p>



<p><strong>सप्ताह में एक दिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट की नसीहत</strong><br>विदेशी मुद्रा बचाने के व्यावहारिक उपाय बताते हुए प्रोफेसर वल्लभ ने लोगों से ईंधन की खपत कम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सप्ताह में कम से कम एक दिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करने की आदत डालें।</p>



<p><strong>&#8216;जेन जी को परिवारवाद नहीं, अवसर चाहिए&#8217;</strong><br>देश की युवा आबादी का उल्लेख करते हुए पूर्व कांग्रेसी नेता ने कहा कि भारत की करीब 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है और यह पीढ़ी पुरानी राजनीति से बहुत आगे निकल चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जेन जी को सरनेम की राजनीति या परिवारवाद से कोई लेना-देना नहीं है। आज का युवा रोजगार मांगने से ज्यादा उद्यमिता और यूनिकॉर्न बनाने का सपना देख रहा है। उन्हें बेहतर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, तेज भुगतान प्रणाली और बेहतर जीवनशैली चाहिए।</p>



<p><strong>मोहब्बत की दुकान और भाषा की मर्यादा पर तंज</strong><br>राहुल गांधी की &#8216;मोहब्बत की दुकान&#8217; वाली राजनीति पर करारा तंज कसते हुए कहा कि जो लोग ऐसी बातें करते हैं, वे ही देश के प्रधानमंत्री के लिए &#8216;तू-तड़ाके&#8217; और &#8216;तू चोर है&#8217; जैसी अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हैं।</p>
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