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		<title>&#8216;परमाणु हथियार बनाने की स्थिति में नहीं तेहरान&#8217;: ट्रंप का बड़ा दावा- लगभग खत्म हो चुकी है ईरान की मिसाइल ताकत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 04:57:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[International]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि हालिया संघर्ष के बाद ईरान की मिसाइल क्षमता बुरी तरह कमजोर हो गई है और उसके पास पहले की तुलना में केवल 21-22% मिसाइलें बची हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि तेहरान फिलहाल परमाणु हथियार बनाने की स्थिति में नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप [&#8230;]]]></description>
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<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि हालिया संघर्ष के बाद ईरान की मिसाइल क्षमता बुरी तरह कमजोर हो गई है और उसके पास पहले की तुलना में केवल 21-22% मिसाइलें बची हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि तेहरान फिलहाल परमाणु हथियार बनाने की स्थिति में नहीं है।<br><br>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि हालिया संघर्ष के बाद ईरान की मिसाइल क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि अब ईरान के पास पहले की तुलना में केवल एक छोटा हिस्सा ही बचा है। साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान फिलहाल परमाणु हथियार विकसित करने की स्थिति में नहीं है।</p>



<p>एनबीसी न्यूज के कार्यक्रम मीट द प्रेस को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान की सैन्य क्षमता को पूरी तरह तबाह कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि तेहरान के पास अब अपनी पुरानी मिसाइल क्षमता का केवल 21 से 22 प्रतिशत हिस्सा ही बचा है। ट्रंप ने कहा कि उनके पास अब भी काफी मिसाइलें हैं, लेकिन जब हमने हमला शुरू किया था, तब जितनी थीं, उतनी नहीं हैं।<br><br><strong>ट्रंप की बातें खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट से अलग </strong></p>



<p>हालांकि ट्रंप का यह दावा अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट से मेल नहीं खाता। द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सांसदों को पिछले महीने दी गई ब्रीफिंग में बताया गया था कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित अपनी 33 में से 30 मिसाइल साइटों पर फिर से परिचालन नियंत्रण स्थापित कर लिया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ईरान के पास संघर्ष से पहले के मिसाइल भंडार का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा अब भी मौजूद है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>स्थिति जल्द ही सामान्य होने की कही बात&nbsp;</strong></h3>



<p>होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव पर ट्रंप ने भरोसा जताते हुए कहा कि स्थिति जल्द सामान्य हो जाएगी। जब उनसे पूछा गया कि उनकी सरकार ने कितने वाणिज्यिक तेल टैंकरों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराया है, तो उन्होंने कहा कि बहुत सारे। मैं संख्या नहीं बताना चाहता, लेकिन काफी अधिक।</p>



<p>उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय तनाव जल्द खत्म होगा और इसके बाद तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है। ट्रंप के मुताबिक जब स्थिति पूरी तरह सामान्य हो जाएगी, तब तेल की कीमतें पहले से भी कम हो सकती हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>रिपब्लिकन पार्टी में घरेलू राजनीतिक दबाव&nbsp;</strong></h3>



<p>यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका में पेट्रोल और ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी घरेलू राजनीतिक दबाव का सामना कर रहे हैं। आगामी मध्यावधि चुनावों से पहले महंगाई और ऊर्जा कीमतें प्रमुख राजनीतिक मुद्दे बनी हुई हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>ईरान के साथ बातचीत पर क्या बोले ट्रंप?</strong></h3>



<p>इस बीच, शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने ईरान से जुड़े हालात पर भी सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ स्थिति काफी अच्छी लग रही है। हालांकि उन्होंने इस पर कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>अमेरिकी आर्थव्यवस्था और रोजगार के आंकड़ों की सराहन की&nbsp;</strong></h3>



<p>ट्रंप ने इस दौरान अमेरिकी अर्थव्यवस्था और रोजगार के आंकड़ों की भी जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि हाल में जारी रोजगार रिपोर्ट उम्मीद से कहीं बेहतर रही है। राष्ट्रपति ने दावा किया कि पूरे अमेरिका में विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र में निवेश तेजी से बढ़ रहा है और बड़ी संख्या में नई फैक्ट्रियां स्थापित की जा रही हैं।<br><br>उन्होंने अपनी आर्थिक नीतियों को निवेश और विकास का कारण बताते हुए कहा कि मजबूत रोजगार आंकड़े अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि आर्थिक विकास का मतलब हमेशा महंगाई बढ़ना नहीं होता और मजबूत अर्थव्यवस्था को वित्तीय बाजारों के लिए सकारात्मक संकेत माना जाना चाहिए। साथ ही ट्रंप ने संकेत दिया कि वह ब्याज दरों में कटौती देखना चाहेंगे, हालांकि उन्होंने माना कि इस संबंध में अंतिम फैसला अमेरिकी केंद्रीय बैंक के पास है।<br><br>ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब उनकी सरकार का ध्यान आर्थिक प्रदर्शन, ऊर्जा बाजार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नीति और विदेश नीति से जुड़े कई अहम मुद्दों पर केंद्रित है।</p>
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		<title>वादे से पलटे ट्रंप?: अमेरिका को दुनियाभर के संघर्षों में उलझा रहे राष्ट्रपति, एशिया से अफ्रीका तक उतारी सेना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 05:59:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[USA]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2024 में राष्ट्रपति चुनाव की उम्मीदवारी तय होने के बाद से लगातार जनता से वादा किया कि वह अमेरिका को फॉरेवर वॉर्स यानी अनंत युद्ध से बाहर निकालेंगे और सिर्फ देश की सुरक्षा पर ही ध्यान केंद्रित करेंगे। हालांकि, पहले कार्यकाल की तरह ही ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2024 में राष्ट्रपति चुनाव की उम्मीदवारी तय होने के बाद से लगातार जनता से वादा किया कि वह अमेरिका को फॉरेवर वॉर्स यानी अनंत युद्ध से बाहर निकालेंगे और सिर्फ देश की सुरक्षा पर ही ध्यान केंद्रित करेंगे। हालांकि, पहले कार्यकाल की तरह ही ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भी अमेरिका बाद एक युद्ध में फंसता जा रहा है। इनमें ईरान से लेकर सोमालिया तक के संघर्ष शामिल हैं। आइये जानते हैं ट्रंप के कार्यकाल में जारी ऐसे ही कुछ संघर्षों के बारे में…</p>



<p>डोनाल्ड ट्रंप 2024 में चुनाव जीतने से पहले तक लगातार अमेरिकी जनता से नए-नए वादे करते आ रहे थे। फिर चाहे अमेरिका को नई आर्थिक ऊंचाइयों पर ले जाने का वादा हो या फिर अमेरिकी जनता को महंगाई से बचाने का। इन अधिकतर वादों में से कई पर या तो काम जारी है या स्थितियां ट्रंप के अनुकूल नहीं हैं। हालांकि, एक वादा जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति अब तक खुद ही पलटते दिखे हैं, वह वादा है अमेरिका को दुनियाभर में जारी संघर्षों से निकालने का। अगर आंकड़ों पर गौर किया जाए तो सामने आता है कि ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिका संघर्षों से निकलने के बजाय कुछ और नए युद्ध में उलझता ही चला गया। <br><br>ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने से पहले और इस दौरान दुनियाभर के युद्ध से अमेरिका को निकालने पर क्या वादे किए थे? कैसे ट्रंप धीरे-धीरे इन वादों से लगातार पलटे हैं? फिलहाल अमेरिका की सैन्य मौजूदगी को ट्रंप ने किस तरह बढ़ाया है? कैसे ट्रंप ने राष्ट्रपति के तौर पर अपने पहले कार्यकाल में भी कुछ ऐसे ही वादे तोड़े थे? आइये जानते हैं…</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>पहले जानें- अमेरिका को युद्ध से निकालने को लेकर क्या थे ट्रंप के वादे?</strong></h2>



<p>डोनाल्ड ट्रंप ने 2024 में अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवारी पेश करने के साथ चुनाव प्रचार के दौरान खुद को &#8216;शांति के उम्मीदवार&#8217; के रूप में पेश किया था और अमेरिका को विदेशी युद्धों से बाहर निकालने को लेकर कई बड़े और स्पष्ट वादे किए थे।</p>



<p><strong>अनंत संघर्षों का अंत:</strong> ट्रंप ने एक दशक तक लगातार यह वादा किया कि वह पश्चिम एशिया के लंबे संघर्षों और खत्म न होने वाले संघर्षों को रोकेंगे। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के शासन में जॉर्ज बुश की तरफ से शुरू किए गए इराक युद्ध को एक बड़ी गलती करार दिया था। ट्रंप का कहना था कि इसने पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने दूसरे देशों के मामलों में दखल और अराजकता की नीतियों को खत्म करने की बात कही थी।</p>



<p><strong>अमेरिका फर्स्ट नीति और घरेलू फोकस: &nbsp;</strong>ट्रंप की नीति का मुख्य मंत्र यह था कि अमेरिका को विदेशी सैन्य अभियानों और अन्य देशों की राजनीतिक लड़ाइयों में अपना खजाना और सैनिकों का खून नहीं बहाना चाहिए। उनका वादा था कि वह विदेशों की बजाय अमेरिका की घरेलू समस्याओं और प्राथमिकताओं पर संसाधनों को खर्च करेंगे। उन्होंने पश्चिम एशिया में खरबों डॉलर खर्च होने और हजारों जानें जाने पर कई बार दुख जताया।</p>



<p><strong>अहम संघर्षों को तुरंत खत्म करने का दावा:</strong>&nbsp;एक उम्मीदवार के रूप में ट्रंप ने अपनी समझौता कराने की क्षमताओं का हवाला देते हुए दावा किया था कि वह पदभार ग्रहण करने के पहले ही दिन रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कर देंगे। इसके अलावा उन्होंने गाजा युद्ध को भी तेजी से खत्म करने का वादा किया था।</p>



<p><strong>अमेरिकी सेना को बेवजह न उलझाना:&nbsp;</strong>उन्होंने वादा किया था कि वह अपनी सेना को उन विदेशी इलाकों में लड़ने के लिए भेजकर कमजोर नहीं करेंगे, जहां अमेरिका का सीधा कोई मतलब नहीं है। ट्रंप का वादा था कि अमेरिकी सैनिकों को अब सिर्फ अमेरिकी सुरक्षा में ही लगाया जाएगा, न कि दूसरे देश के युद्धों में।</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-4"></h3>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>कैसे ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में लगातार जंगों में उलझा है अमेरिका?</strong></h2>



<p>अपने वादों से उलट डोनाल्ड ट्रंप ने बीते डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में अमेरिका को कई नई जंगों में उलझाया है। हालिया समय में अमेरिका अपने पड़ोस में लातिन अमेरिकी क्षेत्र से लेकर एशिया तक में जारी युद्ध में अमेरिकी सैन्य शक्ति का इस्तेमाल कर रहे हैं और लगातार तैनाती बढ़ाते आए हैं।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>1. एशिया</strong></h3>



<p><strong>ईरान:</strong>&nbsp;ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका ने ईरान पर दो बार हमले किए हैं। जून 2025 में, अमेरिकी सेना ने इस्राइल के साथ मिलकर ईरानी परमाणु ठिकानों पर बमबारी की थी। इसके बाद फरवरी में भी अमेरिकी और इस्राइली सेनाओं ने हमले किए, जिसके जवाब में तेहरान ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी सहयोगियों- यूएई, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, आदि देशों पर जवाबी हमले किए। इन हमलों में ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों के साथ हथियारों को भी निशाना बनाया है। फिलहाल शांति समझौते के लिए बातचीत जारी है, लेकिन दोनों देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में संघर्ष हुआ है।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-5"></h3>



<p><strong>यमन:&nbsp;</strong>मार्च 2025 में अमेरिका ने यमन के हूती विद्रोहियों पर कई हमले किए थे। अमेरिका का कहना था कि उसने यह हमले इस्राइल की मदद करने और लाल सागर में समुद्री वाणिज्यिक मार्ग को बाधित होने से बचाने के लिए किए हैं।&nbsp;</p>



<p><strong>इराक:</strong>&nbsp;मार्च 2025 में ही अमेरिकी सेना ने इराक में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) के एक सरगना को मार गिराया।&nbsp;</p>



<p><strong>सीरिया:</strong>&nbsp;दिसंबर में अमेरिका ने सीरिया में आईएसआईएस के ठिकानों पर हमले किए। वह भी तब जब सीरिया में अमेरिका के समर्थन वाली सरकार पहले ही आईएसआईएस के मुकाबले में जुटी है।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-6"></h3>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>2. लातिन अमेरिका और आसपास के समुद्री क्षेत्र</strong></h3>



<p><strong>कैरेबियाई सागर और पूर्वी प्रशांत:</strong>&nbsp;अमेरिका इस क्षेत्र में नशीले पदार्थों की तस्करी करने वालों और कथित नार्को-आतंकवादियों के खिलाफ सैन्य बल का आक्रामक इस्तेमाल कर रहा है। सितंबर में वेनेजुएला के पास ट्रेन डी अरागुआ ड्रग कार्टेल के 11 सदस्यों के मारे जाने के बाद से इन अमेरिकी हमलों में अब तक लगभग 207 लोग मारे जा चुके हैं।<br><br><strong>वेनेजुएला:&nbsp;</strong>जनवरी में अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला की राजधानी कराकस में एक बड़ा अभियान चलाकर वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया था। ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी सेना ने कई हफ्तों तक वेनेजुएला के आसपास नौसैनिक ब्लॉकेड लगाकर उस पर दबाव बनाया और बाद में मादुरो को गिरफ्तार कर उन्हें अमेरिका पहुंचा दिया। मादुरो को फिलहाल नार्को-आतंकवाद की साजिश के आरोपों में न्यूयॉर्क में हिरासत में रखा गया है।</p>



<p><strong>क्यूबा:&nbsp;</strong>डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा में राजनीतिक बदलाव का दबाव बनाने के लिए हाल के हफ्तों में क्यूबा के करीब अमेरिकी नौसेना का जमावड़ा काफी बढ़ा दिया है। न सिर्फ क्यूबा की तरफ जाने वाले तेल-गैस के टैंकरों को निशाना बनाया जा रहा है, बल्कि उसकी जरूरत के उत्पादों वाली शिपिंग को भी जब्त किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस आर्थिक दबाव के जरिए वह क्यूबा में सत्ता परिवर्तन का माहौल बनाना चाहते हैं, ताकि वहां की वामपंथी सरकार हट जाए।&nbsp;</p>



<p><strong>ग्रीनलैंड:&nbsp;</strong>अमेरिका ने हाल ही में&nbsp;ग्रीनलैंड को खरीदने या इस पर कब्जा करने की मंशा रखी है। वह भी तब जब ग्रीनलैंड पहले से ही अमेरिका के सहयोगी देश डेनमार्क के शासन में है। इसके बावजूद ट्रंप ने इसे भू-राजनीतिक मुद्दा बनाया है और यहां अपनी सेना की एक बड़ी टुकड़ी को तैनात रखा है। चौंकाने वाली बात यह है कि ट्रंप ने लगातार ग्रीनलैंड को कब्जाने की मंशा के सवाल पर सीधे न नहीं कहा है।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-7"></h3>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>3. अफ्रीका</strong></h3>



<p><strong>सोमालिया:&nbsp;</strong>ट्रंप की सत्ता में वापसी के बाद सोमालिया वह पहला देश था जहां अमेरिकी सेना ने हमला किया। इस साल आईएसआईएस और अल-शबाब के खिलाफ कम से कम 63 संयुक्त हवाई हमले किए जा चुके हैं।</p>



<p><strong>नाइजीरिया:&nbsp;</strong>अमेरिका ने नाइजीरियाई अधिकारियों के साथ मिलकर आईएसआईएस के ठिकानों पर कई हवाई और जमीनी हमले किए हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने इन हमलों को नाइजीरिया में ईसाइयों के उत्पीड़न से बचाव के रूप में सही ठहराया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-8"></h3>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>कैसे पहले कार्यकाल में भी अपने वादों से मुकर चुके हैं ट्रंप?</strong></h2>



<p>डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान भी अमेरिका के गैर-हस्तक्षेप की नीति लागू करने के वादों से यू-टर्न लिया था। तब भी उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान पश्चिम एशिया में सैन्य हस्तक्षेप को कम करने का संकेत दिया था। लेकिन राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को कम करने के बजाय और बढ़ा दिया।</p>



<p><strong>1. अफगानिस्तान में हुआ था युद्ध का विस्तार:</strong>&nbsp;ट्रंप ने अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना को वापस बुलाने का वादा किया था। हालांकि, राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने 16 साल पुराने इस युद्ध को खत्म करने के बजाय और बढ़ा दिया और हजारों अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों को वहां भेजने की रणनीति को मंजूरी दे दी। उन्होंने अपने इस यू-टर्न पर खुद स्वीकार किया कि उनका मूल विचार बाहर निकलने का था, लेकिन ओवल ऑफिस की डेस्क के पीछे बैठने पर फैसले बहुत अलग होते हैं। बाद में अपने कार्यकाल के अंत में ट्रंप ने धीरे-धीरे अमेरिकी सेना को अफगानिस्तान से बाहर निकालने की मंजूरी दे दी थी।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-9"></h3>



<p><strong>2. सीरिया पर मिसाइल हमले:</strong>&nbsp;विदेशी में अमेरिकी सेना को उलझाने की आलोचना करने वाले ट्रंप ने सीरिया की बशर अल-असद के नेतृत्व वाली सरकार के एक एयरबेस पर 59 टॉमहॉक मिसाइलों से हमला किया था। यह सीरियाई गृहयुद्ध में अमेरिका का पहला सीधा हमला था, जिसने उसे रूस से सीधी टक्कर में ला दिया था।&nbsp;</p>



<p><strong>3. यमन और सोमालिया में रिकॉर्ड हवाई हमले:</strong>&nbsp;ट्रंप के पहले कार्यकाल में यमन में अल-कायदा को निशाना बनाते हुए इतने हवाई हमले किए गए, जितने उससे पिछले चार वर्षों में कुल मिलाकर भी नहीं हुए थे। इसी तरह सोमालिया में आतंकी गुटों के खिलाफ अमेरिकी हवाई हमले दोगुने से भी अधिक हो गए थे।</p>



<p><strong>4. विदेशी सैन्य ठिकानों को बनाए रखना:&nbsp;</strong>चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने विदेशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों की अहमियत और उन पर होने वाले खर्च पर सवाल उठाए थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्होंने दुनिया भर में अमेरिकी सैन्य शक्ति और इन अड्डों को जस का तस बनाए रखा।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-10"></h3>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>ट्रंप के वादों से पलटने पर क्या कहते हैं विशेषज्ञ?</strong></h2>



<p>विशेषज्ञों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप का शांति के उम्मीदवार से एक आक्रामक सैन्य रुख अपनाने वाले राष्ट्रपति के रूप में बदलना उनकी बयानबाजी और वास्तविक नीतियों के बीच भारी विरोधाभास को दर्शाता है। अलग-अलग रक्षा, कूटनीतिक और विदेश नीति विशेषज्ञों ने ट्रंप के अपने वादों से पलटने पर अपने विचार रखे हैं।</p>



<p><strong>ब्रेट मैकगर्क:&nbsp;</strong>पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी और विश्लेषक ब्रेट मैकगर्क ने कुछ समय पहले ही कहा था कि ट्रंप ने चुनाव के दौरान गाजा युद्ध को तेजी से खत्म करने और यूक्रेन युद्ध को सत्ता में आने के पहले ही दिन समाप्त करने का वादा किया था, लेकिन कार्यकाल के छह महीने बीत जाने के बाद दोनों मोर्चों पर शांति पहले से कहीं अधिक दूर दिखाई देती है। उन्होंने ट्रंप की कूटनीतिक और सैन्य नीतियों को असंगत बताया। उन्होंने ध्यान दिलाया कि ट्रंप ने गाजा में मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए बनाए गए यूएस एड (USAID) ढांचे को शुरुआत में ही खत्म कर दिया था, जिससे वहां का मानवीय संकट और गहरा गया। यूक्रेन के मामले में भी मैकगर्क ने कहा कि शुरुआत में ट्रंप की नीतियों के चलते रूस के राष्ट्रपति पुतिन के हौसले बढ़े, जिससे युद्ध के और लंबा खिंचने के हालात बन गए।</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-11"></h3>



<p><strong>मोहम्मद बजी:&nbsp;</strong>न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ने इसी साल प्रकाशित अपने विश्लेषण में ईरान पर बड़े पैमाने पर किए गए हमलों को लेकर ट्रंप की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अमेरिका फर्स्ट राष्ट्रपति, जिन्होंने विदेशी युद्धों का विरोध करके अपना राजनीतिक आधार बनाया था, अब सत्ता परिवर्तन के मकसद से खुद अपनी मर्जी का युद्ध छेड़ चुके हैं। बजी ने ट्रंप की तरफ से ईरान को अमेरिका के लिए अनुमानित खतरा बताने वाले दावों को बुनियादी तौर पर गलत और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया बताया। उन्होंने ट्रंप की बयानबाजी की तुलना सीधे तौर पर जॉर्ज डब्ल्यू बुश से करते हुए कहा कि&#8230;</p>



<p>एंड्रयू लैथम: मैकलेस्टर कॉलेज में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर लैथम ने ट्रंप के बढ़ते वैश्विक सैन्य ऑपरेशनों का विश्लेषण करते हुए बताया कि ट्रंप सैन्य बल के प्रयोग को बुश-युग के नेताओं से बिल्कुल अलग नजरिए से देखते हैं। उनके मुताबिक, ट्रंप मानते हैं कि खतरे व्यक्तिगत हैं, सीमाएं मायने रखती हैं&#8230;और बल तब उपयोगी होता है जब यह नतीजे देता है। हालांकि, लैथम यह भी चेतावनी देते हैं कि अमेरिका फर्स्ट नीति नशीले पदार्थों या आतंकवाद से जुड़े किसी अचानक किए गए हमले को तो घरेलू रक्षा के रूप में सही ठहरा सकती है, लेकिन इसके तहत किसी लंबे युद्ध या बिना दिशा वाले सैन्य अभियान को जायज ठहराना बेहद मुश्किल है।</p>
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		<title>&#8216;अमेरिका के लिए सबक साबित होने चाहिए ईरान के हमले&#8217;, मिसाइलें दागने के बीच IRGC की चेतावनी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 03:51:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Iran]]></category>
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					<description><![CDATA[पश्चिम एशिया में इस समय वार्ता और वार दोनों साथ चल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि उनके दखल के बाद इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच लड़ाई रुक गई है। ट्रंप के मुताबिक, इस्राइल अब बेरूत पर हमला नहीं करेगा और हिजबुल्ला भी गोलाबारी रोकेगा। साथ ही [&#8230;]]]></description>
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<p>पश्चिम एशिया में इस समय वार्ता और वार दोनों साथ चल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि उनके दखल के बाद इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच लड़ाई रुक गई है। ट्रंप के मुताबिक, इस्राइल अब बेरूत पर हमला नहीं करेगा और हिजबुल्ला भी गोलाबारी रोकेगा। साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता भी आखिरी दौर में है। लेकिन जमीन पर हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। ट्रंप के इस दावे के कुछ ही घंटों बाद लेबनान की तरफ से दो रॉकेट दागे गए। इस्राइली वायुसेना ने इन्हें हवा में ही मार गिराया। दूसरी तरफ, ईरान ने भी अभी तक अमेरिकी शांति प्रस्ताव पर दस्तखत नहीं किए हैं। सूत्रों का कहना है कि ईरान सिर्फ वादों पर भरोसा नहीं करेगा। वह प्रतिबंध हटाने और सुरक्षा के मोर्चे पर ठोस जमीनी कदम चाहता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">कुवैत-बहरीन पर हमलों के बाद यूएई ने खाड़ी देशों से किया एकजुट होने का आह्वान</h3>



<p>ईरान द्वारा कुवैत और बहरीन पर किए गए हमलों के बाद यूएई ने खाड़ी देशों से एकजुट रुख अपनाने का आह्वान किया।&nbsp;संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति के सलाहकार अनवर गरगाश ने कहा कि कुवैत और बहरीन के खिलाफ बार-बार होने वाली ईरानी आक्रामकता के लिए खाड़ी देशों को एक दृढ़ और एकजुट रुख अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि&nbsp;किसी भी खाड़ी देश को इन हमलों का अकेले सामना करने के लिए नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि&nbsp;खाड़ी सहयोग परिषद के सदस्य देशों की सुरक्षा आपस में जुड़ी हुई है, उनके हित साझा हैं और उनका भविष्य एक ही है। यह आक्रामकता किसी एक देश को विशेष रूप से निशाना नहीं बनाती, बल्कि हम सभी को निशाना बनाती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ईरानी संसद के डिप्टी स्पीकर बोले- तेहरान बातचीत करेगा, लेकिन अमेरिका पर भरोसा नहीं</h3>



<p>ईरानी संसद के उपसभापति का कहना है कि ईरान बातचीत करेगा लेकिन उसे अमेरिका के वादों पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि&nbsp;ईरान जरूरत पड़ने पर बातचीत करेगा, लेकिन उसे अमेरिका द्वारा किए गए किसी भी वादे पर भरोसा नहीं है।&nbsp;ईरान की अर्ध-सरकारी तसनीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, इस्लामिक सलाहकार सभा के उपाध्यक्ष मोजतबा निकजाद ने कहा, &#8220;यह कहना सही नहीं है कि हम केवल लड़ते हैं और बातचीत नहीं करते।&#8221;</p>



<p>निकजाद ने ईरान में अकाल या युद्ध से संबंधित व्यवधान के बारे में विदेशी मीडिया के दावों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि संघर्ष के चरम पर, 70 लाख लोग विस्थापित हुए, जिनमें से कई देश के उत्तरी भाग में चले गए, लेकिन सरकारी प्रबंधन के कारण किसी को भी बुनियादी सामान, रोटी या आवास प्राप्त करने में कोई समस्या नहीं हुई।</p>



<h3 class="wp-block-heading">&#8216;अमेरिका के लिए सबक साबित होने चाहिए ईरान के हमले&#8217;, मिसाइलें दागने के बीच IRGC की चेतावनी</h3>



<p>ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड का कहना है कि तेहरान के जवाबी हमले अमेरिका के लिए सबक साबित होने चाहिए।&nbsp;आईआरजीसी के जनसंपर्क विभाग ने पश्चिम एशियाई देशों में रात भर हुए हमलों के बारे में एक जारी बयान में ये बात कही।&nbsp;इसमें कहा गया है, &#8220;कल देर रात, अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक ईरानी तेल टैंकर पर मिसाइल से हमला किया, जिससे टैंकर के इंजन कक्ष को नुकसान पहुंचा।&#8221;</p>



<p>आईआरजीसी ने कहा कि इस आक्रामकता और होर्मुज जलडमरूमध्य को नियंत्रित करने वाले नियमों के उल्लंघन के जवाब में अमेरिकी-यहूदी दुश्मन से जुड़े पनाया नामक एक जहाज को आईआरजीसी नौसेना द्वारा दागी गई मिसाइलों से निशाना बनाया गया।&nbsp;इसमें कहा गया है कि अमेरिकी सेना ने इसके बाद केश्म द्वीप पर स्थित आईआरजीसी के एक संचार टावर को निशाना बनाया।</p>



<p>बयान में आगे कहा गया है, &#8220;इसके जवाब में आईआरजीसी एयरोस्पेस फोर्स ने क्षेत्र के एक देश में स्थित उनके हवाई अड्डे और हेलीकॉप्टर अड्डे के साथ-साथ अमेरिकी पांचवें बेड़े के मुख्यालय पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।&#8221; आईआरजीसी ने कहा कि&nbsp;हमने पहले ही चेतावनी दी थी कि किसी भी प्रकार की आक्रामकता का जवाब अलग और अधिक गंभीर तरीके से दिया जाएगा। हमने उसी के अनुसार कार्रवाई की है। ये प्रतिक्रियाएं सबक के रूप में काम करेंगी। हम दोहराते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को भंग करने की कोशिश करने वाली अमेरिकी सेना को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।</p>



<h3 class="wp-block-heading">इस्राइल ने दक्षिण लेबनान के ब्लाट पर किए हमले, दूर तक सुनाई दी धमाकों की आवाज</h3>



<p>अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार इस्राइल ने दक्षिणी लेबनान के मरजयून जिले के ब्लाट कस्बे को निशाना बनाया है। इस्राइली सेना की ओर से यहां भीषण हमले जारी हैं। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि&nbsp;इससे पहले पास के दिब्बीन कस्बे में एक जोरदार धमाके की आवाज सुनी गई थी।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ईरान ने कुवैत-बहरीन पर दागी मिसाइलें, अमेरिका ने पलटवार में केश्म द्वीप को बनाया निशाना</h3>



<p>अमेरिका ने दावा किया है कि उसकी सेना ने क्षेत्र के पड़ोसी देशों को निशाना बनाने वाले ईरानी मिसाइलों और ड्रोन हमलों की एक श्रृंखला को नाकाम कर दिया है। इसके साथ ही अमेरिका ने ईरान के केश्म द्वीप पर जवाबी कार्रवाई भी की है।&nbsp;अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक आधिकारिक बयान में बताया कि तेहरान ने क्षेत्र में हवाई हमलों की एक लहर शुरू की थी। सैन्य कमांड ने नोट किया कि ईरान ने क्षेत्रीय पड़ोसियों की ओर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, सभी अपने लक्ष्यों को भेदने में विफल रहीं।</p>



<p>सेंटकॉम ने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ की गई रक्षात्मक कार्रवाइयों का विवरण देते हुए खुलासा किया कि कुवैत पर दागी गई दो ईरानी मिसाइलें या तो लक्ष्य तक नहीं पहुंचीं या रास्ते में ही नष्ट हो गईं। वहीं, बहरीन पर लॉन्च की गई तीन मिसाइलों को अमेरिकी और बहरीन की वायु रक्षा बलों ने तुरंत रोक लिया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">यूएई के परमाणु संयंत्र पर ड्रोन हमले के बाद आईएईए बोला- देंगे तकनीकी सहायता</h3>



<p>अल जजीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने पुष्टि की है कि वैश्विक परमाणु निगरानी संस्था संयुक्त अरब अमीरात को व्यापक समर्थन दे रही है। यह समर्थन पिछले महीने ड्रोन हमले में निशाना बनाए गए परमाणु ऊर्जा संयंत्र के आधिकारिक दौरे के बाद दिया गया है।</p>



<p>ग्रॉसी ने कहा कि अधिकारियों ने बरकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र में हुई घटना पर असाधारण रूप से तीव्र परिचालन प्रतिक्रिया का प्रदर्शन किया और संयंत्र में बाहरी बिजली की आपूर्ति बाधित होने के तुरंत बाद रिएक्टर को बंद करने की प्रक्रिया को तेजी से अंजाम दिया।&nbsp; आईएईए प्रमुख ने आगे संकेत दिया कि सुविधा में मरम्मत के काम का पूर्ण समाधान सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी आकलन और परिचालन गतिविधियों की एक श्रृंखला आयोजित की जानी है।</p>



<p>ग्रॉसी ने बिजली संयंत्र में आगामी रखरखाव कार्य की सटीक प्रकृति या समयसीमा के संबंध में कोई और विशिष्ट विवरण नहीं दिया।&nbsp;यह महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप 17 मई को ड्रोन हमले के कारण संयुक्त अरब अमीरात की एकमात्र परमाणु ऊर्जा सुविधा में लगी आग के बाद हुआ है, जिसकी पुष्टि बाद में राज्य के अधिकारियों द्वारा की गई थी।</p>



<h3 class="wp-block-heading">आज क्या-क्या हुआ?</h3>



<ul class="wp-block-list">
<li>अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संसद को बताया कि ईरान को दी जाने वाली कोई भी प्रतिबंध राहत  परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी होगी, न कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने से।</li>



<li>अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी का कहना है कि ईरान में चल रही कई परमाणु गतिविधियां अब रुक गई हैं।</li>



<li>अमेरिकी सेना का कहना है कि उसने बोत्सवाना के झंडे वाले एक तेल टैंकर को अपंग कर दिया है, क्योंकि उसने ईरान के खर्ग द्वीप की ओर बढ़ने की कोशिश की थी।</li>



<li>संयुक्त राष्ट्र की व्यापार और विकास संस्था का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से तेल आयात की लागत $20 अरब बढ़ सकती है, जिसका सबसे बुरा असर गरीब देशों पर पड़ेगा।</li>



<li>इस्राइली सेना ने दक्षिणी लेबनान में घातक हमले जारी रखे हैं, जिसमें लेबनानी शहर अल-मरवानिया में हुआ एक हमला भी शामिल है, जिसमें चार वयस्कों और दो बच्चों की मौत हो गई।</li>



<li>दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्ला के एक ड्रोन हमले में चार इस्राइली सैनिक घायल हो गए हैं।</li>
</ul>



<p></p>



<h3 class="wp-block-heading">होर्मुज खोल दिया होता तो नहीं होती नाकेबंदी: रूबियो</h3>



<p>अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि नाकेबंदी का एकमात्र कारण यह है कि ईरान व्यापारिक जहाजों पर गोलीबारी कर रहा है। इसके पीछे सोच यह है कि अगर किसी और के जहाज बाहर नहीं निकल पाएंगे, तो ईरान के जहाज भी बाहर नहीं निकल पाएंगे। अगर ईरान ने वह करने पर सहमति जताई होती जो उसने युद्धविराम लागू होने के समय करने को कहा था, यानी होर्मुज को खोलना, तो यह नाकेबंदी नहीं होती। वे जो कर रहे हैं वह गैर-कानूनी और अवैध है। हर कोई इसके खिलाफ है।&nbsp;</p>



<p></p>



<h3 class="wp-block-heading">अमेरिका ने ईरानी क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों पर लगाया प्रतिबंध</h3>



<p>अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान के सबसे बड़े डिजिटल एसेट क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। इस कार्रवाई के तहत &#8216;नोबिटेक्स&#8217; , &#8216;वॉलेक्स&#8217;, &#8216;बिटपिन&#8217; और &#8216;रैमजीनेक्स&#8217;जैसे बड़े एक्सचेंजों पर रोक लगाई गई है। इसके साथ ही नोबिटेक्स को कंट्रोल करने वाले सैयद मोहम्मद अली आगामीर और सैयद मोहम्मद आगामीर और एक्सचेंज के सीईओ आमिर हुसैन राड पर भी पाबंदी लगाई गई है। हालांकि, नोबिटेक्स एक्सचेंज ने सरकार से किसी भी सीधे संबंध होने से इनकार किया है।</p>



<p></p>



<h3 class="wp-block-heading">युद्ध के बीच घिरे ट्रंप: मीडिया और प्रशासन का दबाव बढ़ा</h3>



<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों मीडिया और अपने ही प्रशासन के भारी दबाव में हैं। युद्ध की शुरुआत में उन्होंने दावा किया था कि यह संघर्ष कुछ ही दिनों में खत्म हो जाएगा, जो बाद में हफ्तों और अब एक लंबे खिंचते गतिरोध में बदल चुका है। जल्द ही सब कुछ ठीक होने के उनके बार-बार किए जा रहे दावों पर अब खुद अमेरिकी सरकार के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं, जिससे ट्रंप की कूटनीतिक साख दांव पर है।</p>



<p>इस बढ़ते दबाव के बीच ट्रंप लगातार हर दिन बेहद सख्त रुख अपना रहे हैं। उनका कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता बिल्कुल करीब है, लेकिन साथ ही उन्होंने ईरान को सीधी सैन्य धमकी भी दी है। ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर दोनों पक्षों के बीच जल्द ही कोई अंतिम सहमति नहीं बनती है, तो अमेरिका अपनी पूरी सैन्य ताकत के साथ ईरान पर सीधा और विनाशकारी हमला करेगा।</p>
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		<title>भारत समेत 60 देशों पर नया टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा अमेरिका, लगाए बेतुके आरोप</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 03:46:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[USA]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका एक बार फिर भारत के खिलाफ टैरिफ बम फोड़ने की तैयारी कर रहा है। दरअसल अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने एक ऐसा प्रस्ताव दिया है, जिसमें भारत समेत 60 देशों पर टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। आइए जानते हैं कि क्या है ये पूरा मामला&#8230; अमेरिका एक तरफ भारत के साथ संबंध बेहतर [&#8230;]]]></description>
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<p>अमेरिका एक बार फिर भारत के खिलाफ टैरिफ बम फोड़ने की तैयारी कर रहा है। दरअसल अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने एक ऐसा प्रस्ताव दिया है, जिसमें भारत समेत 60 देशों पर टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। आइए जानते हैं कि क्या है ये पूरा मामला&#8230;<br><br>अमेरिका एक तरफ भारत के साथ संबंध बेहतर करने की दुहाई दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप प्रशासन भारत के खिलाफ कार्रवाई से बाज नहीं आ रहा है। दरअसल अमेरिकी सरकार एक बार फिर भारत पर नया टैरिफ लगाने की तैयारी कर रही है। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि यूएसटीआर ने भारत समेत 60 देशों पर ये नया टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दिया है। टैरिफ लगाने की वजह ये बताई गई है कि भारत समेत 60 देश जबरन श्रम से उत्पादित वस्तुओं के निर्यात पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने में विफल रहे हैं। <br><br><strong>अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने दिया प्रस्ताव</strong><br>अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि अमेरिकी व्यापार कानून 1974 की धारा 301 के तहत पाया गया है कि 60 देशों की नीतियां और कार्यशैली अमेरिकी व्यापार पर गैरजरूरी दबाव बढ़ाती हैं और अमेरिकी व्यापार को बाधित करती हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय, अमेरिका की एक कार्यकारी संघीय एजेंसी है, जो अमेरिका की विदेश व्यापार नीति बनाने के लिए जिम्मेदार है।</p>



<p>अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के अनुसार, भारत समेत 54 देश उन सामानों के निर्यात पर जरूरी प्रतिबंध लगाने में विफल रहे हैं, जिन्हें जबरन श्रम द्वारा बनाया जाता है। भारत के अलावा इन देशों में ऑस्ट्रेलिया, बहरीन, बांग्लादेश, चीन, जापान, सऊदी अरब, सिंगापुर, ब्रिटेन और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश भी शामिल हैं। </p>



<p><strong>जैमिसन ग्रीर ने जारी किया बयान</strong><br>अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने अपने बयान में कहा, &#8216;हमारे सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों द्वारा जबरन श्रम से निर्मित वस्तुओं के निर्यात को रोकने में विफलता अस्वीकार्य है। इससे एक ऐसी स्थिति उत्पन्न होती हैइससे अमेरिकी कामगारों को असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।&#8217;&nbsp;</p>



<p>अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने इन देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया है और इस पर जनता से प्रतिक्रिया मांगी गई है। यूएसटीआर ने कहा कि इन देशों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। यूएसटीआर ने कहा कि जबरन श्रम आयात प्रतिबंधों की कमी वैश्विक स्तर पर जबरन श्रम को समाप्त करने के प्रयासों को कमजोर करती है।&nbsp;</p>



<p><strong>भारत-अमेरिका के बीच जारी है व्यापार वार्ता</strong><br>गौरतलब है कि अतिरिक्त टैरिफ लगाने का यह प्रस्ताव ऐसे समय दिया गया है, जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है। भारत और अमेरिका के बीच हाल के समय में कई दौर की बातचीत हो चुकी है, जिनमें बाजार पहुंच, शुल्क, डिजिटल व्यापार और कृषि जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।&nbsp;</p>
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		<title>होर्मुज में बढ़ा तनाव: ईरान ने चार जहाजों पर दागीं मिसाइलें, बुशहर में अमेरिकी विमान गिराने का भी किया दावा</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/hormuz-tensions-rise-iran-fires-missiles-at-four-ships-claims-us-aircraft-shot-down-in-bushehr/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 29 May 2026 03:57:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Iran]]></category>
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					<description><![CDATA[होर्मुज जलडमरूमध्य में बिना अनुमति के घुस रहे चार जहाजों पर ईरान ने चेतावनी मिसाइलें दागी हैं। वहीं, बुशहर में एक अमेरिकी विमान को मार गिराने का दावा भी किया है। पिछले चार दिनों में दोनों देशों के बीच लगातार सैन्य हमले हुए हैं। इसी बीच अमेरिका ने ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं, [&#8230;]]]></description>
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<p><em>होर्मुज जलडमरूमध्य में बिना अनुमति के घुस रहे चार जहाजों पर ईरान ने चेतावनी मिसाइलें दागी हैं। वहीं, बुशहर में एक अमेरिकी विमान को मार गिराने का दावा भी किया है। पिछले चार दिनों में दोनों देशों के बीच लगातार सैन्य हमले हुए हैं। इसी बीच अमेरिका ने ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच प्रस्तावित 60 दिनों के युद्धविराम समझौते की अंतिम मंजूरी अधर में लटक गई है।</em></p>



<p>पश्चिम एशिया में स्थिति एक बार फिर बेहद संवेदनशील हो गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी सुरक्षा बलों ने समन्वय की कमी का हवाला देते हुए चार अज्ञात जहाजों पर चेतावनी मिसाइलें दागी हैं। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब हालिया सैन्य हमलों के कारण अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है।<br><br><strong>समन्वय न होने पर दागी गईं मिसाइलें</strong><br>ईरानी राज्य प्रसारक आईआरआईबी की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना स्थानीय समयानुसार रात करीब 12:35 बजे हुई। चार अज्ञात जहाजों ने ईरानी सुरक्षा बलों को सूचित किए बिना फारस की खाड़ी में प्रवेश करने का प्रयास किया। जब इन जहाजों ने चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया, तो ईरानी बलों ने उन पर चेतावनी शॉट दागे, जिसके बाद जहाजों को वापस लौटने पर मजबूर होना पड़ा। ईरान समर्थक मीडिया का दावा है कि इन जहाजों ने तय समुद्री प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया था। फिलहाल इन जहाजों की पहचान और उनकी मंजिल का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स में इनके संबंध अमेरिका से होने का दावा किया गया है।</p>



<p><strong>बुशहर में विमान मार गिराने का दावा, यूएस ने किया खारिज&nbsp;</strong><br>इस घटना के तुरंत बाद, शुक्रवार तड़के ईरानी सरकारी टेलीविजन ने दावा किया कि ईरान की वायु रक्षा प्रणाली ने तटीय बुशहर प्रांत के जाम क्षेत्र में एक अमेरिकी विमान को मार गिराया है। तस्नीम समाचार एजेंसी ने जाम काउंटी के गवर्नर मसूद तंगेस्तानी के हवाले से इस बात की पुष्टि की। हालांकि, समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरानी दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। पिछले चार दिनों में दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव काफी तेज हुआ है।</p>



<p><strong>25 मई:</strong>&nbsp;अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी मिसाइल ठिकानों और नावों पर हमले किए, जिसमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के चार सैनिक मारे गए।</p>



<p><strong>27 मई:&nbsp;</strong>अमेरिकी बलों ने चार ईरानी लड़ाकू ड्रोन मार गिराए और बंदर अब्बास में एक ग्राउंड-कंट्रोल स्टेशन को नष्ट कर दिया।</p>



<p><strong>28 मई :</strong>&nbsp;ईरान ने कुवैत में एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर बैलिस्टिक मिसाइल दागी, जिसे हवा में ही सफलतापूर्वक रोक दिया गया।</p>



<p><strong>नए अमेरिकी प्रतिबंध और युद्धविराम पर सस्पेंस</strong><br>इस सैन्य तनाव के बीच, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान के सैन्य अभियानों को मिलने वाले फंड को रोकने के लिए उसके तेल शिपिंग नेटवर्क पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। इसके तहत आठ तेल टैंकरों को ब्लैकलिस्ट किया गया है, जिनमें मार्शल द्वीप समूह का फ्लोरा, कोमोरोस का हौंकायो और पनामा का इल्ल गैप शामिल हैं। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि इसका उद्देश्य ईरान को सेना के पुनर्गठन के लिए तेल राजस्व जुटाने से रोकना है।</p>



<p>यह पूरी कार्रवाई उस समय हुई है जब दोनों पक्ष 60 दिनों के युद्धविराम विस्तार और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के एक समझौते पर सहमत हो चुके थे। हालांकि, इस समझौते को अभी तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सर्वोच्च नेता मोजताबा खामेनेई की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है।</p>
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		<title>संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में इस्राइल और रूस पर यौन हिंसा के आरोप, पहली बार ब्लैकलिस्ट में नाम</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/un-report-israel-russia-sexual-violence-blacklist-first-time/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 29 May 2026 03:46:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[International]]></category>
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					<description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने दुनिया की राजनीति में नया भूचाल ला दिया है। पहली बार इस्राइली और रूसी बलों पर संघर्ष क्षेत्रों में यौन हिंसा के आरोप लगाते हुए उन्हें ब्लैकलिस्ट किया गया है। इस फैसले से भड़के इस्राइल ने संयुक्त राष्ट्र को भ्रष्ट और राजनीतिक संगठन बताते हुए महासचिव गुटेरेस से संबंध तोड़ [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने दुनिया की राजनीति में नया भूचाल ला दिया है। पहली बार इस्राइली और रूसी बलों पर संघर्ष क्षेत्रों में यौन हिंसा के आरोप लगाते हुए उन्हें ब्लैकलिस्ट किया गया है। इस फैसले से भड़के इस्राइल ने संयुक्त राष्ट्र को भ्रष्ट और राजनीतिक संगठन बताते हुए महासचिव गुटेरेस से संबंध तोड़ दिए।</p>



<p>संयुक्त राष्ट्र (UN) की ओर से जारी होने वाली वार्षिक रिपोर्ट में इस बार इस्राइल और रूस की सेनाओं को पहली बार संघर्ष क्षेत्रों में यौन हिंसा के आरोपों के चलते ब्लैकलिस्ट में शामिल किया गया है। यह रिपोर्ट शुक्रवार को औपचारिक रूप से जारी होने से पहले गुरुवार देर रात सामने आई। करीब 35 पन्नों की इस रिपोर्ट में दुनिया के 12 देशों के 77 सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों का उल्लेख किया गया है, जिन पर युद्ध और संघर्ष के दौरान यौन हिंसा में शामिल होने या जिम्मेदार होने का आरोप है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में ऐसे मामलों में पिछले साल की तुलना में तेज वृद्धि दर्ज की गई।</p>



<p><strong>गाजा और वेस्ट बैंक में गंभीर आरोप</strong><br>रिपोर्ट में कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र ने इस्राइल और कब्जे वाले फलस्तीनी क्षेत्रों में हिरासत में रखे गए लोगों के खिलाफ यौन हिंसा के पैटर्न&nbsp;दर्ज किए हैं। संयुक्त राष्ट्र ने गाजा और वेस्ट बैंक से जुड़े कई मामलों की पुष्टि भी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, 14 पुरुषों, 7 महिलाओं, 9 लड़कों और 1 लड़की के साथ यौन हिंसा की घटनाएं दर्ज हुईं। इनमें बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, जननांगों पर हमला, जबरन नग्न करना, बिना सुरक्षा कारणों के तलाशी और दुष्कर्म&nbsp;की धमकियां जैसे आरोप शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र ने दावा किया कि कुछ मामलों में इस्राइल डिफेंस फोर्स, जेल सेवा, विशेष बलों और पुलिस इकाइयों के सदस्यों पर सीधे आरोप लगे हैं।</p>



<p><strong>UN पर भड़का इस्राइल; गुटेरेस से तोड़े संबंध</strong><br>इस्राइल के विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र पर गंभीर आरोप लगाते हुए उसे राजनीतिक और भ्रष्ट संगठन करार दिया। साथ ही कहा कि संयुक्त राष्ट्र लंबे समय से इस्राइल को निशाना बना रहा है। इस्राइल के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबा बयान जारी कर कहा कि संयुक्त राष्ट्र की यह कार्रवाई पूरी तरह पक्षपातपूर्ण है। मंत्रालय ने आरोप लगाया कि यह फैसला हमास द्वारा किए गए वास्तविक यौन अपराधों और इस्राइल के खिलाफ लगाए गए आरोपों के बीच झूठी समानता पैदा करने की कोशिश है।</p>



<p><strong>गुटेरेस पर लगाए गंभीर आरोप</strong><br>इस्राइल ने इस मुद्दे पर सीधे संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को भी निशाने पर लिया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि गुटेरेस अपने कार्यकाल के अंतिम महीनों में बेबुनियाद आरोप गढ़ने का काम कर रहे हैं। मंत्रालय के अनुसार, यही गुटेरेस हैं जिन्होंने 7 अक्तूबर 2023 को हुए हमास हमले को संदर्भित करने की कोशिश की थी और संयुक्त राष्ट्र कर्मचारियों की कथित संलिप्तता को छिपाया था। अब वे बिना किसी तथ्य के इस्राइल पर आरोप लगा रहे हैं। इस्राइल ने दावा किया कि उसने सभी आरोपों का पूरी तरह और स्पष्ट रूप से&nbsp;खंडन किया है।</p>



<p><strong>UN महासचिव कार्यालय से संबंध खत्म</strong><br>इस विवाद के बीच इस्राइल ने बड़ा कदम उठाते हुए घोषणा की कि नए महासचिव की नियुक्ति तक वह संयुक्त राष्ट्र महासचिव कार्यालय के साथ सभी आधिकारिक संबंध समाप्त कर रहा है। इसे संयुक्त राष्ट्र और इस्राइल के रिश्तों में बड़ा तनाव माना जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र में इस्राइल के राजदूत डैनी डैनन ने भी इस फैसले पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि इस्राइल को ब्लैकलिस्ट में डालना और हम पर युद्ध के हथियार के रूप में यौन हिंसा इस्तेमाल करने का आरोप लगाना बेहद शर्मनाक फैसला है। उन्होंने आगे कहा अब हमारा इस महासचिव से कोई संबंध नहीं बचा है।</p>



<p><strong>रूस भी पहली बार ब्लैकलिस्ट में शामिल</strong><br>रूस की सेना और सुरक्षा बलों को भी पहली बार इस सूची में शामिल किया गया है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि यूक्रेन युद्ध के दौरान युद्धबंदियों और नागरिक बंदियों के साथ यौन हिंसा की गई। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, रूस और उसके कब्जे वाले यूक्रेनी क्षेत्रों में 310 मामलों की पुष्टि हुई है। इनमें ज्यादातर पीड़ित पुरुष बताए गए हैं। हालांकि रूस ने भी इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह राजनीतिक एजेंडा&nbsp;का हिस्सा है। संयुक्त राष्ट्र में रूस के राजदूत वासिली नेबेंजिया ने कहा कि रूस भी यूक्रेन द्वारा रूसी युद्धबंदियों के साथ किए गए व्यवहार पर रिपोर्ट तैयार कर रहा है।</p>



<p><strong>हमास पर भी बरकरार रहे आरोप</strong><br>रिपोर्ट में हमास का नाम भी शामिल है। 7 अक्तूबर 2023 को इस्राइल पर हुए हमले के बाद हमास पहले से ही संयुक्त राष्ट्र की ब्लैकलिस्ट में मौजूद है। हालांकि संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि इस्राइल द्वारा जांच के लिए पर्याप्त पहुंच नहीं दिए जाने के कारण कई मामलों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी।</p>



<p><strong>बढ़ती चिंता के बीच UN की चेतावनी</strong><br>संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पिछले वर्ष ही इस्राइल और रूस को चेतावनी दी थी कि यदि आरोपों की पुष्टि हुई तो उन्हें ब्लैकलिस्ट में डाला जा सकता है। अब इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।</p>
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		<title>भरोसे के लायक नहीं अमेरिका, हमलों पर भड़का ईरान; इंटरनेट बहाली के बीच फिर बढ़ा तनाव</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 27 May 2026 03:51:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Iran]]></category>
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					<description><![CDATA[दक्षिणी ईरान में अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम तोड़ने और बदनीयती दिखाने का आरोप लगाया है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इसी बीच लंबे समय बाद इंटरनेट सेवाएं धीरे-धीरे बहाल की जा रही हैं। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>दक्षिणी ईरान में अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम तोड़ने और बदनीयती दिखाने का आरोप लगाया है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इसी बीच लंबे समय बाद इंटरनेट सेवाएं धीरे-धीरे बहाल की जा रही हैं।</p>



<p>ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। दक्षिणी ईरान में अमेरिकी हमलों के बाद तेहरान ने अमेरिका पर युद्धविराम तोड़ने और बदनीयती दिखाने का आरोप लगाया है। ईरान ने साफ कहा है कि वह किसी भी हमले का जवाब दिए बिना नहीं छोड़ेगा। दूसरी तरफ लंबे समय से बंद इंटरनेट सेवाओं को भी अब धीरे-धीरे बहाल किया जा रहा है। इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य, तेल सप्लाई और युद्धविराम वार्ता को लेकर पूरी दुनिया की नजरें खाड़ी क्षेत्र पर टिक गई हैं।<br><br><strong>अमेरिका और ईरान के बीच आखिर क्या हुआ?</strong><br>अमेरिकी सेना ने सोमवार को दक्षिणी ईरान में कुछ ठिकानों पर हमला किया। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई रक्षात्मक थी और इसमें मिसाइल लॉन्च साइट्स तथा बारूदी सुरंग बिछाने वाली नौकाओं को निशाना बनाया गया। अमेरिका ने दावा किया कि उसने संयम के साथ कार्रवाई की। लेकिन ईरान ने इसे सीधा युद्धविराम का उल्लंघन बताया। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका भरोसे के लायक नहीं है और अब हर परिणाम की जिम्मेदारी वॉशिंगटन की होगी। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने यह भी दावा किया कि उसने अपने हवाई क्षेत्र में घुसे एक ड्रोन को मार गिराया और दूसरे ड्रोन तथा लड़ाकू विमान को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।</p>



<p><strong>क्या बातचीत और युद्धविराम अब खतरे में है?</strong><br>ईरान और अमेरिका के बीच कतर में बातचीत चल रही थी, जिसका मकसद युद्धविराम को आगे बढ़ाना और हालात को सामान्य करना था। लेकिन ताजा हमलों के बाद स्थिति फिर तनावपूर्ण हो गई है। ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालीबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची कतर से लौट चुके हैं। हालांकि आगे की रणनीति पर अभी कुछ साफ नहीं कहा गया है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि युद्धविराम और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर खोलने पर बातचीत में अभी कुछ दिन लग सकते हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी साफ दिखाई दे रही है।</p>



<p><strong>इंटरनेट बंद होने से ईरान को कितना नुकसान हुआ?</strong><br>ईरान ने कई महीनों तक इंटरनेट सेवाएं बंद रखीं। सरकार का कहना था कि यह कदम युद्ध और सुरक्षा कारणों से उठाया गया। अब धीरे-धीरे इंटरनेट बहाल किया जा रहा है। कुछ इलाकों में ब्रॉडबैंड सेवा शुरू हो गई है, लेकिन मोबाइल इंटरनेट अभी पूरी तरह चालू नहीं हुआ है। इंटरनेट बंद होने से विदेशों में रह रहे ईरानी अपने परिवारों से संपर्क नहीं कर पा रहे थे। ऑनलाइन कारोबार भी बुरी तरह प्रभावित हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनेट बंद रहने से ईरान की अर्थव्यवस्था को हर दिन 3 से 4 करोड़ डॉलर तक का नुकसान हुआ। पहले भी सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान इंटरनेट बंद किया गया था।</p>



<p><strong>जासूसी के आरोप में फांसी और होर्मुज पर बढ़ी चिंता?</strong><br>ईरान ने इस्राइल के लिए जासूसी करने के आरोप में एक व्यक्ति को फांसी दे दी। ईरानी एजेंसी मिजान ऑनलाइन के मुताबिक, गुलामरेजा खानी शकराब पर मोसाद के लिए काम करने और लोगों की भर्ती करने का आरोप था। वहीं दूसरी तरफ होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दुनिया की चिंता बढ़ गई है। युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने इस समुद्री रास्ते को काफी हद तक बंद कर दिया था। इसी रास्ते से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस सप्लाई होता है। ईरान अब सीमित जहाजों को गुजरने दे रहा है और शुल्क भी वसूल रहा है। रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि पिछले 24 घंटे में 25 जहाजों को गुजरने दिया गया।</p>



<p><strong>दुनिया पर कितना बड़ा असर पड़ सकता है?</strong><br>होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। तेल, गैस और खाद की सप्लाई पहले ही प्रभावित हो चुकी है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो आने वाले वर्षों में खाद्य संकट गहरा सकता है। खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही कम होने से वैश्विक बाजारों में भी चिंता बढ़ गई है। ओमान की खाड़ी में मंगलवार को एक टैंकर में धमाके की खबर भी सामने आई, हालांकि इसमें कोई घायल नहीं हुआ। ऐसे में ईरान, अमेरिका और इस्राइल के बीच बढ़ता तनाव पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है।</p>
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		<title>Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति ने फिर की भारत की तारीफ, ट्रंप बोले- मैं हूं पीएम मोदी का बहुत बड़ा प्रशंसक</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 26 May 2026 05:02:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[USA]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राजदूत सर्जियो गोर को फोन किया था। इस दौरान उन्होंने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की। ट्रंप ने कहा था कि उन्हें भारत से प्यार है और पीएम मोदी उनके करीबी मित्र हैं। अब उन्होंने एक बार फिर से अपने [&#8230;]]]></description>
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<p>नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राजदूत सर्जियो गोर को फोन किया था। इस दौरान उन्होंने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की। ट्रंप ने कहा था कि उन्हें भारत से प्यार है और पीएम मोदी उनके करीबी मित्र हैं। अब उन्होंने एक बार फिर से अपने बयान को दोहराया है।<br><br>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत में अमेरिकी दूत सर्जियो गोर द्वारा साझा की गई एक सोशल मीडिया पोस्ट को फिर से पोस्ट किया है। इस पोस्ट में सर्जियो गोर ने भारत के लिए ट्रंप के प्रेम और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मजबूत संबंधों का जिक्र किया।<br><br>एक्स पर एक पोस्ट में सर्जियो गोर ने लिखा, &#8220;राष्ट्रपति ट्रंप ने आज रात मुझे फोन किया। उनका एक स्पष्ट संदेश था: मैं भारत से प्यार करता हूं। हम भारत के इतने करीब कभी नहीं रहे। मैं प्रधानमंत्री मोदी का एक बहुत बड़ा प्रशंसक हूं।&#8221;<br><br><strong>सर्जियो गोर के पोस्ट को किया साझा</strong><br>इसके जवाब में ट्रंप ने सोमवार शाम को अपने आधिकारिक &#8216;ट्रुथ सोशल&#8217; अकाउंट पर इस संदेश को फिर से पोस्ट किया। उन्होंने नई दिल्ली के भारत मंडपम में अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ समारोह से एक वीडियो क्लिप भी साझा की।</p>



<p>ट्रंप ने रविवार रात को कहा था कि भारत मुझ पर 100 प्रतिशत भरोसा कर सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना बेहतरीन दोस्त बताया था। यह घटनाक्रम भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते कूटनीतिक संबंधों के बीच सामने आया है, जिसमें दोनों देशों के नेता एक-दूसरे के प्रति प्रशंसा व्यक्त कर रहे हैं। ट्रंप की यह पोस्ट भारत के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को उजागर करने के उनके प्रयास को दर्शाती है।</p>



<p><strong>पीएम मोदी और भारत की खुलकर की तारीफ</strong><br>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर को अचानक फोन किया। तब गोर अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित समारोह में थे। इस दौरान ट्रंप ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ की।&nbsp;</p>
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		<item>
		<title>US-Iran Tensions: दक्षिणी ईरान में अमेरिका का हवाई हमला, माइन बिछा रही नौकाएं और मिसाइल लॉन्च साइट बने निशाना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 26 May 2026 04:47:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Iran]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका ने दक्षिणी ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास मिसाइल लॉन्च साइटों और माइन बिछा रही ईरानी नौकाओं पर सेल्फ डिफेंस हमला किया है। अमेरिकी सेना ने कहा कि यह कार्रवाई सैनिकों की सुरक्षा के लिए की गई। इसी बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के संवर्धित यूरेनियम को नष्ट करने की बात कही है। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>अमेरिका ने दक्षिणी ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास मिसाइल लॉन्च साइटों और माइन बिछा रही ईरानी नौकाओं पर सेल्फ डिफेंस हमला किया है। अमेरिकी सेना ने कहा कि यह कार्रवाई सैनिकों की सुरक्षा के लिए की गई। इसी बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के संवर्धित यूरेनियम को नष्ट करने की बात कही है। वहीं, दोनों देशों के बीच युद्धविराम और परमाणु समझौते को लेकर बातचीत भी जारी है। आइे, विस्तार से मामले को जानते हैं…</p>



<p>अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। दक्षिणी ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिका ने सेल्फ डिफेंस स्ट्राइक करते हुए ईरानी मिसाइल लॉन्च साइटों और माइन बिछाने की कोशिश कर रही नौकाओं को निशाना बनाया। अमेरिकी सेना ने कहा कि यह कार्रवाई अपने सैनिकों और युद्धपोतों की सुरक्षा के लिए की गई। खास बात यह है कि यह हमला ऐसे समय हुआ है जब दोनों देशों के बीच युद्धविराम और परमाणु समझौते को लेकर बातचीत जारी है। इस घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में फिर से तनाव बढ़ा दिया है।<br><br><strong>आखिर अमेरिका ने ईरान पर हमला क्यों किया?</strong><br>अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम के अनुसार ईरानी बलों की गतिविधियां अमेरिकी सैनिकों और जहाजों के लिए खतरा बन रही थीं। इसी वजह से अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में सीमित लेकिन सटीक कार्रवाई की। सेंटकॉम के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने कहा कि अमेरिकी सेना ने आत्मरक्षा में यह हमला किया और साथ ही संयम भी बरता।</p>



<p>अमेरिका का दावा है कि ईरानी नौकाएं होर्मुज जलडमरूमध्य के पास समुद्र में माइन बिछाने की कोशिश कर रही थीं। इसके अलावा कुछ मिसाइल लॉन्च साइटों को भी सक्रिय किया जा रहा था। अमेरिकी सेना ने इन्हें संभावित खतरा मानते हुए निशाना बनाया। हालांकि हमले में कितना नुकसान हुआ, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।</p>



<p><strong>क्या युद्धविराम के बीच पहले भी हुई है ऐसी कार्रवाई?</strong><br>अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम के दौरान भी पहले कई बार तनावपूर्ण घटनाएं हो चुकी हैं। मई की शुरुआत में भी अमेरिकी सेना ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमला किया था। उस समय अमेरिका ने आरोप लगाया था कि ईरान ने उसके युद्धपोतों पर मिसाइल, ड्रोन और छोटी नौकाओं से हमला करने की कोशिश की थी।</p>



<p>होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। यहां किसी भी सैन्य गतिविधि का असर वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ता है। यही वजह है कि अमेरिका इस क्षेत्र में लगातार सैन्य निगरानी बनाए हुए है।</p>



<p><strong>ट्रंप ने यूरेनियम को लेकर क्या बड़ा बयान दिया?</strong><br>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के संवर्धित यूरेनियम को लेकर भी बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि ईरान का न्यूक्लियर डस्ट यानी संवर्धित यूरेनियम या तो अमेरिका को सौंपा जाएगा ताकि उसे नष्ट किया जा सके, या फिर ईरान के साथ मिलकर उसी जगह पर खत्म किया जाएगा।</p>



<p>ट्रंप ने संकेत दिए कि दोनों देशों के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि बातचीत “अच्छे तरीके से” चल रही है। वहीं ईरान ने भी माना है कि कई मुद्दों पर सहमति बनी है, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों के बार-बार बदलते रुख से बातचीत जटिल हो रही है।</p>



<p><strong>अब्राहम समझौते को लेकर ट्रंप की नई शर्त क्या है?</strong><br>डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान समझौते को अब्राहम समझौतों से भी जोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब, पाकिस्तान, तुर्किये, मिस्र और जॉर्डन जैसे देशों को भी इस्राइल के साथ संबंध सामान्य करने वाले अब्राहम समझौतों में शामिल होना चाहिए।</p>



<p>हालांकि पाकिस्तान ने साफ कर दिया है कि इस्राइल को लेकर उसका रुख नहीं बदला है। सऊदी अरब ने भी कहा है कि फलस्तीनी राष्ट्र के स्पष्ट रास्ते के बिना इस्राइल के साथ पूर्ण संबंध संभव नहीं हैं। ट्रंप के इस प्रस्ताव ने कूटनीतिक बातचीत को और जटिल बना दिया है।</p>



<p><strong>ईरान ने अमेरिकी बातचीत पर क्या कहा?</strong><br>ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि कई मुद्दों पर बातचीत में प्रगति हुई है, लेकिन अभी किसी अंतिम समझौते का दावा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों के बदलते बयान बातचीत को मुश्किल बना रहे हैं।</p>



<p>ईरान का कहना है कि वह शांति समझौते को लेकर गंभीर है, लेकिन उसे अमेरिका की नीतियों पर भरोसा चाहिए। दूसरी ओर अमेरिका लगातार सैन्य दबाव बनाए हुए है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि दोनों देश बातचीत के रास्ते आगे बढ़ते हैं या तनाव और बढ़ता है।</p>
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		<item>
		<title>ट्रंप से बदला लेने की फिराक में ईरान: इवांका की हत्या की साजिश रचने का दावा, IRGC से जुड़ा आरोपी गिरफ्तार</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/iran-plot-to-kill-ivanka-trump-iran-linked-suspect-arrested/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 23 May 2026 03:36:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[USA]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका में इवांका ट्रंप की हत्या की कथित साजिश को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। गिरफ्तार इराकी नागरिक मोहम्मद अल-सादी पर आरोप है कि वह आईआरजीसी से जुड़ा था और कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेना चाहता था। जांच एजेंसियों के अनुसार उसके पास इवांका ट्रंप के फ्लोरिडा स्थित घर का नक्शा भी मिला। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>अमेरिका में इवांका ट्रंप की हत्या की कथित साजिश को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। गिरफ्तार इराकी नागरिक मोहम्मद अल-सादी पर आरोप है कि वह आईआरजीसी से जुड़ा था और कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेना चाहता था। जांच एजेंसियों के अनुसार उसके पास इवांका ट्रंप के फ्लोरिडा स्थित घर का नक्शा भी मिला। पढ़ें पूरी रिपोर्ट…</p>



<p>अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के परिवार को निशाना बनाने की कथित साजिश ने अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। दावा किया गया है कि ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप की हत्या की योजना बनाई गई थी। इस मामले में गिरफ्तार इराकी नागरिक मोहम्मद बाकेर साद दाऊद अल-सादी पर आरोप है कि वह ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी से जुड़ा हुआ था और ट्रंप परिवार से बदला लेना चाहता था।</p>



<p>अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अल-सादी के पास इवांका ट्रंप के फ्लोरिडा स्थित घर का नक्शा भी मिला था। बताया जा रहा है कि यह कथित साजिश ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की अमेरिकी ड्रोन हमले में हुई मौत का बदला लेने के लिए रची गई थी।</p>



<p><strong>आखिर इवांका ट्रंप को निशाना बनाने का आरोप क्यों लगा?<br></strong>रिपोर्ट के मुताबिक मोहम्मद अल-सादी ट्रंप परिवार के खिलाफ बदले की भावना रखता था। दावा किया गया है कि कासिम सुलेमानी की मौत के बाद वह लोगों से कहता था कि “ट्रंप ने हमारा घर जलाया है, इसलिए हमें इवांका को मारना होगा।” सूत्रों के अनुसार उसके पास फ्लोरिडा में इवांका ट्रंप और उनके पति जैरेड कुशनर के घर से जुड़ी जानकारी और नक्शा भी मौजूद था। सोशल मीडिया पर उसने फ्लोरिडा के उस इलाके का नक्शा साझा किया था, जहां इवांका का घर स्थित है। साथ ही उसने अरबी भाषा में धमकी भरा संदेश भी लिखा था, जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां भी उन्हें नहीं बचा पाएंगी। इस घटना के बाद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है।</p>



<p><strong>गिरफ्तार आरोपी पर कौन-कौन से आरोप लगे हैं?</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>32 वर्षीय मोहम्मद अल-सादी को 15 मई को तुर्किये में गिरफ्तार किया गया।</li>



<li>गिरफ्तारी के बाद उसे अमेरिका लाया गया।</li>



<li>अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार उस पर यूरोप और अमेरिका में 18 हमलों की कोशिशों का आरोप।</li>



<li>जांच एजेंसियों का दावा है कि वह अमेरिका और यहूदी समुदाय से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने में शामिल था।</li>



<li>एम्स्टर्डम में बैंक ऑफ न्यूयॉर्क मेलॉन पर फायरबॉम्ब हमले में नाम जुड़ा।</li>



<li>लंदन में दो यहूदी नागरिकों पर चाकू से हमले का आरोप।</li>



<li>टोरंटो स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर गोलीबारी में कथित भूमिका।</li>



<li>बेल्जियम के लीज शहर में यहूदी उपासना स्थल पर बम धमाके से नाम जुड़ा।</li>



<li>रॉटरडैम में धार्मिक स्थल में आगजनी के आरोप भी लगे।</li>



<li>कई अन्य अंतरराष्ट्रीय आतंकी गतिविधियों और हमलों की साजिश में शामिल होने की जांच जारी है।</li>
</ul>



<p><strong>आरोपी के ईरान और आतंकी संगठनों से कैसे संबंध बताए गए?</strong><br>रिपोर्टों के मुताबिक अल-सादी को आईआरजीसी और काताइब हिजबुल्लाह जैसे संगठनों से जुड़ा बताया गया है। दावा किया गया कि वह बचपन में तेहरान भेजा गया था, जहां उसने आईआरजीसी से प्रशिक्षण लिया। बाद में उसने धार्मिक यात्राओं से जुड़ी ट्रैवल एजेंसी शुरू की, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर दुनिया भर में आतंकी नेटवर्क से संपर्क बनाने के लिए किया गया। जांच एजेंसियों के मुताबिक वह कासिम सुलेमानी को पिता समान मानता था और उनकी मौत के बाद बदले की भावना से काम कर रहा था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सुलेमानी के बाद आईआरजीसी के कमांडर इस्माइल कानी के साथ भी उसके करीबी संबंध थे।</p>



<p><strong>सोशल मीडिया और यात्रा नेटवर्क ने कैसे बढ़ाई चिंता?</strong><br>सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि अल-सादी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय था। उसकी तस्वीरें पेरिस के एफिल टॉवर, कुआलालंपुर के पेट्रोनास टावर्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय जगहों पर दिखाई दीं। अदालत के दस्तावेजों के अनुसार उसने अपने सोशल मीडिया खातों पर सैन्य ठिकानों, नक्शों और कासिम सुलेमानी के साथ बैठकों से जुड़ी तस्वीरें भी साझा की थीं। उसके पास इराक का विशेष सेवा पासपोर्ट भी था, जिससे वह आसानी से कई देशों की यात्रा कर सकता था। अमेरिकी एजेंसियां अब यह जांच कर रही हैं कि उसके अंतरराष्ट्रीय संपर्क कितने बड़े थे और क्या वह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा था।</p>
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