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		<title>ईरान के खिलाफ अमेरिका और यूरोपीय संघ आए साथ: तेल और वित्तीय नेटवर्क पर कसा शिकंजा, क्या बढ़ेगा आर्थिक संकट?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Sep 2026 03:47:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Iran]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका ने ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट शुरू किया था, अब यूरोपीय संघ भी इसके साथ खड़ा नजर आ रहा है। ईरान के तेल, वित्तीय नेटवर्क और जहाजरानी पर दबाव बढ़ सकता है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह आर्थिक घेराबंदी ईरान को झुकाएगी या पश्चिम एशिया में [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">अमेरिका ने ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट शुरू किया था, अब यूरोपीय संघ भी इसके साथ खड़ा नजर आ रहा है। ईरान के तेल, वित्तीय नेटवर्क और जहाजरानी पर दबाव बढ़ सकता है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह आर्थिक घेराबंदी ईरान को झुकाएगी या पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ेगा? होर्मुज जलडमरूमध्य पर इसका असर कितना गंभीर हो सकता है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं…</p>



<p class="wp-block-paragraph">अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि यूरोपीय संघ आधिकारिक तौर पर ईरान के खिलाफ अमेरिका के नेतृत्व वाले ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट में शामिल हो गया है। यह अभियान ईरान को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था से अलग करने और उसकी कमाई के उन रास्तों को रोकने पर केंद्रित है, जिनका इस्तेमाल अमेरिका के अनुसार परमाणु कार्यक्रम, हथियारों और आतंकवादी संगठनों के समर्थन के लिए किया जाता है। यूरोपीय संघ ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की तैयारी जताई है, लेकिन साथ ही कूटनीतिक समाधान और तनाव कम करने पर भी जोर दिया है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>यूरोपीय संघ ने ईरान के खिलाफ क्या रुख अपनाया है?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">बेसेंट ने कहा कि यूरोपीय संघ ने ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट में आधिकारिक रूप से शामिल होने की इच्छा जताई है और अमेरिका ने उसके शुरुआती कड़े रुख का स्वागत किया है। ईयू ने कहा कि ईरान को अपने परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर रोक लगानी चाहिए। साथ ही उस पर क्षेत्र और यूरोप में अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियां रोकने, यूक्रेन में रूस के युद्ध को सैन्य समर्थन बंद करने और अपने नागरिकों के खिलाफ हिंसा तथा दमन खत्म करने का दबाव बनाया गया है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>अमेरिका का ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट आखिर क्या है?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">अमेरिका ने पिछले महीने यह अभियान शुरू किया था। इसका मुख्य उद्देश्य ईरान को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क से काटना और उसकी आय के स्रोतों को सीमित करना है। अमेरिका ने ईरान से जुड़े तेल नेटवर्क और प्रतिबंधों से बचने के तरीकों की पहचान करने की बात कही थी। इसके साथ डिजिटल संपत्ति, तकनीक और जहाजरानी से जुड़ी ईरान की गतिविधियों पर भी संभावित प्रतिबंधों के दायरे का विस्तार किया गया है। बेसेंट ने ईरान के सामने वैश्विक अलगाव या वैश्विक अर्थव्यवस्था में लौटने का रास्ता चुनने की बात कही थी।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईयू ने क्या कहा?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">यूरोपीय संघ ने कहा कि कूटनीतिक प्रयास जारी रहना जरूरी है, ताकि शांति समझौता हो सके और पश्चिम एशिया में स्थिरता लौटे। ईयू ने खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की स्वतंत्र आवाजाही और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उसने कहा कि अपनी सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर वह आगे भी कदम उठा सकता है। ईयू ने ईरान पर पहले से लगाए गए व्यापक प्रतिबंधों का भी उल्लेख किया।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>ईरान पर दबाव और बढ़ेगा, लेकिन क्या कूटनीति भी जारी रहेगी?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">ईयू ने कहा कि वह अमेरिका, जी7 और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखेगा। हालांकि, उसके रुख में सैन्य या आर्थिक दबाव के साथ बातचीत का रास्ता खुला रखने की बात भी साफ है। ईयू का कहना है कि ईरान को अपनी अस्थिरता पैदा करने वाली गतिविधियां रोककर सद्भावना के साथ शांति वार्ता में शामिल होना चाहिए। ऐसे में ईरान के खिलाफ पश्चिमी देशों का आर्थिक मोर्चा मजबूत होने के साथ कूटनीतिक प्रयास भी जारी रहने की संभावना है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>ईरान के सामने अमेरिका ने कौन से विकल्प रखे हैं?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">अमेरिका के अनुसार ईरान के सामने दो रास्ते हैं। पहला, वैश्विक अलगाव और बेहद सीमित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ना और दूसरा, सामान्य स्थिति की ओर लौटना तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था में फिर से शामिल होने का अवसर हासिल करना। बेसेंट के मुताबिक अमेरिका का लक्ष्य ईरानी सरकार को बनाए रखने वाले हर आर्थिक सहारे को खत्म करना है। ईयू के जुड़ने से वाशिंगटन के आर्थिक दबाव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूती मिलने का संकेत मिला है।</p>
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		<title>प. एशिया तनाव: ईरान में शादी के जश्न पर बरसीं अमेरिकी मिसाइलें, चार साल के बच्चे समेत पांच की मौत; 50+ घायल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Sep 2026 06:11:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Iran]]></category>
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					<description><![CDATA[ईरान के सिरिक में अमेरिकी हवाई हमले की चपेट में शादी समारोह आ गया, जिसमें चार साल के बच्चे समेत पांच लोगों की मौत और 50 से ज्यादा लोग घायल हुए। आखिर हमला कैसे हुआ? अमेरिकी सेना ने किन ठिकानों को निशाना बनाया? आइए, जानते हैं&#8230; ईरान के सिरिक इलाके में एक शादी समारोह उस समय [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><em>ईरान के सिरिक में अमेरिकी हवाई हमले की चपेट में शादी समारोह आ गया, जिसमें चार साल के बच्चे समेत पांच लोगों की मौत और 50 से ज्यादा लोग घायल हुए। आखिर हमला कैसे हुआ? अमेरिकी सेना ने किन ठिकानों को निशाना बनाया? <strong>आइए, जानते हैं&#8230;</strong></em><br><br>ईरान के सिरिक इलाके में एक शादी समारोह उस समय मातम में बदल गया, जब अमेरिकी हवाई हमले की चपेट में यह कार्यक्रम आ गया। ईरानी अधिकारियों और सरकारी मीडिया के मुताबिक, हमले में कम से कम पांच लोगों की मौत हुई है। मृतकों में चार साल का एक बच्चा भी शामिल है। वहीं, 50 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। यह घटना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास स्थित तटीय क्षेत्र में हुई। ईरानी अधिकारियों ने इसे युद्ध के दौरान नागरिकों के लिए सबसे गंभीर घटनाओं में से एक बताया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>ईरान ने हमले को बताया क्रूरता</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई को इससे पहले हुई घटनाओं से अलग करके नहीं देखा जा सकता। प्रवक्ता ने विशेष रूप से मिनाब में एक स्कूल पर हुए हवाई हमले का उल्लेख किया, जिसमें ईरानी अधिकारियों के अनुसार युद्ध के पहले दिन एक बालिका विद्यालय में 160 लोगों की जान गई थी। मिनाब की घटना को लेकर अमेरिकी रक्षा विभाग की ओर से अभी तक आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। हालांकि, एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि यह हमला पुराने लक्ष्य संबंधी आंकड़ों के इस्तेमाल का नतीजा हो सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>अमेरिका-ईरान के बीच फिर बढ़ा तनाव</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">सिरिक में शादी समारोह पर हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य तनाव तेज हो गया है। बुधवार को दोनों देशों के बीच पिछले कई हफ्तों में सबसे बड़ा सैन्य टकराव देखने को मिला। अमेरिका की ओर से आगे और भी अधिक व्यापक हमले किए जाने की चेतावनी दी गई है। ऐसे में शादी समारोह में हुई नागरिक मौतों ने युद्ध के मानवीय प्रभाव को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>अमेरिकी सेना ने किन ठिकानों को बनाया निशाना?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">अमेरिकी सेना ने मंगलवार को ईरान में चाबहार और केशम द्वीप समेत कई अहम ठिकानों पर मिसाइलों से हमला किया। भारतीय समयानुसार रात करीब साढ़े नौ बजे शुरू हुए हमलों में ईरान के इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के ठिकानों को भी निशाना बनाया गया।&nbsp;अमेरिकी सेना के मुताबिक, इन हमलों में एयर डिफेंस सिस्टम, रडार प्रतिष्ठान, समुद्री संसाधन और संचार से जुड़े ठिकाने शामिल थे। इसके अलावा बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमता से संबंधित सुविधाओं को भी निशाना बनाया गया।</p>
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		<title>प. एशिया में फिर बढ़ा तनाव: अमेरिका ने ईरान के लारक द्वीप पर दागे रॉकेट, मोजतबा ने किया इस्लामी एकता का आह्वान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 31 Aug 2026 04:15:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[International]]></category>
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					<description><![CDATA[ईरान के सर्वोच्च नेता ने इस्लामी देशों से इस्राइल और अमेरिका के खिलाफ एकजुट होने की अपील की। उन्होंने उनसे कहा कि &#8216;अपने असली दुश्मन को पहचानें&#8217;। वहीं, एक निगरानी एजेंसी ने बताया कि शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में एक तेल टैंकर को निशाना बनाया गया। इस्राइल की घरेलू खुफिया एजेंसी शिन बेट ने कहा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><em>ईरान के सर्वोच्च नेता ने इस्लामी देशों से इस्राइल और अमेरिका के खिलाफ एकजुट होने की अपील की। उन्होंने उनसे कहा कि &#8216;अपने असली दुश्मन को पहचानें&#8217;। वहीं, एक निगरानी एजेंसी ने बताया कि शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में एक तेल टैंकर को निशाना बनाया गया। इस्राइल की घरेलू खुफिया एजेंसी शिन बेट ने कहा कि उसने प्रधानमंत्री के सबसे बड़े बेटे को धमकी मिलने के बाद अमेरिका से बाहर निकाल लिया। वहीं, अधिकारियों के अनुसार गाजा में इस्राइली हवाई हमले में कम से कम दो फलस्तीनी मारे गए। इनमें तीन साल का बच्चा भी शामिल है।</em><strong><em> </em>ईरान युद्ध और पूरे पश्चिम एशिया में रविवार को हुए ताजा घटनाक्रम पर एक नजर-</strong><br></p>



<p class="wp-block-paragraph">ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने इस्लामी देशों के शासकों से कहा कि वे &#8216;अपने असली दुश्मन को पहचानें, उसकी योजनाओं को समझें और उसका सामना करें&#8217;। सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने यह जानकारी दी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">छह महीने पहले अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर हमला किया था। इस हमले में खामेनेई के पिता और ईरान के कई दूसरे वरिष्ठ नेता मारे गए थे। इसके बाद भी खामेनेई को सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है। उन्होंने यह बात तेहरान में हुए एक सम्मेलन में शामिल धार्मिक नेताओं को लिखे पत्र में कही।</p>



<p class="wp-block-paragraph">युद्ध के बाद इस्लामी देशों के बीच मतभेद सामने आए हैं। ईरान ने पड़ोसी खाड़ी अरब देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। उसने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही भी सीमित कर दी। तेहरान क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी का विरोध करता रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>नेतन्याहू के बेटे को अमेरिका से क्यों निकाला गया?</strong><br>इस्राइल की सुरक्षा एजेंसी शिन बेट ने कहा कि उसने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सबसे बड़े बेटे को अमेरिका से तुरंत बाहर निकाला। उन्हें धमकी मिली थी। शिन बेट ने रविवार को जारी एक छोटे बयान में इसकी पुष्टि की। उसने कहा कि यायर नेतन्याहू को &#8216;गंभीर धमकी&#8217; मिली थी। एजेंसी ने इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी। हालांकि, प्रधानमंत्री ने पिछले हफ्ते एक इस्राइली टेलीविजन चैनल से कहा था कि ईरान ने उनके एक बेटे को मारने की कोशिश की थी। उनके कार्यालय ने रविवार को इस पर कोई टिप्पणी नहीं की।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">यायर नेतन्याहू 2023 में मियामी चले गए थे। गाजा, लेबनान और ईरान में इस्राइल के युद्ध के दौरान वह ज्यादातर समय देश से बाहर रहे। वह अक्सर अपने पिता के अनौपचारिक सलाहकार के रूप में काम करते रहे हैं। सोशल मीडिया पर आलोचकों पर उनकी टिप्पणियों को लेकर कई बार विवाद भी हुआ है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकर को निशाना बनाया गया</strong><br>ब्रिटिश सेना की ओर से संचालित एक निगरानी एजेंसी ने बताया कि शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में ओमान के खासाब के उत्तर में एक अज्ञात वस्तु ने तेल टैंकर जहाज को निशाना बनाया। ब्रिटेन के समुद्री व्यापार संगठन ने कहा कि जहाज अंदर की ओर जा रहा था। किसी के हताहत होने या पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की सूचना नहीं मिली है। संगठन ने कुछ सैन्य अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी। इस हमले की तुरंत किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>वेस्ट बैंक में पत्रकारों पर हमला</strong><br>इस्राइल के कब्जे वाले वेस्ट बैंक के मध्य हिस्से में शनिवार को बस्ती बसाने वालों (शेटलर्स) ने पत्रकारों की एक टीम पर हमला किया। उस समय यह टीम एक फलस्तीनी महिला का इंटरव्यू कर रही थी। महिला ने कहा था कि उसे अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">एनबीसी के अनुसार, संवाददाता मैट ब्रैडली, दो अन्य कर्मचारियों और महिला का चोटों के लिए इलाज किया गया। उनकी चोटों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। एनबीसी ने एक वीडियो भी साझा किया। इसमें नकाब पहने लोग डंडे लेकर समाचार दल की ओर आते और उनके वाहनों पर हमला करते दिख रहे हैं।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस्राइली सेना ने कहा कि उसे फलस्तीनियों के घायल होने की खबरों की जानकारी है। इनमें एक फलस्तीनी महिला भी शामिल है, जिसे ऐसी चोटें आई हैं जो जानलेवा नहीं हैं। सेना ने पत्रकारों की टीम पर हुए हमले पर कोई टिप्पणी नहीं की। इस्राइल के प्रधानमंत्री ने शनिवार को वेस्ट बैंक में बस्ती बसाने वालों की हिंसा की निंदा की। यह उनकी ऐसी दुर्लभ प्रतिक्रिया थी। इन हमलों को लेकर नेतन्याहू की अमेरिका ने भी आलोचना की है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस्राइली बस्ती बसाने वालों ने शनिवार को वेस्ट बैंक के एक फलस्तीनी गांव से एक ब्रिटिश कार्यकर्ता को पकड़ लिया। उसके वकील ने रविवार को यह जानकारी दी। वकील के अनुसार, उसे एक शेड में बंद किया गया। बाद में उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। यह साफ नहीं है कि उसे क्यों पकड़ा गया। बस्ती बसाने वालों ने आरोप लगाया कि फिन जोगिन ने एक बच्चे पर हमला किया। वकील इनबार शेक्ड वार्डी ने इस आरोप से इनकार किया।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>गाजा में इस्राइली हमले में दो फलस्तीनी मारे गए</strong><br>गाजा के पश्चिमी हिस्से में दीर अल-बला में लोगों के एक समूह पर इस्राइली हमला हुआ। इसमें तीन साल के बच्चे और एक व्यक्ति की मौत हो गई। इस्राइली सेना ने उस व्यक्ति को हमास का सदस्य बताया। इस्राइली सेना ने कहा कि वह व्यक्ति &#8216;तुरंत खतरा पैदा कर रहा था&#8217;। हालांकि, उसने इसका कोई सबूत नहीं दिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अल-अक्सा शहीद अस्पताल के अनुसार, एक और फलस्तीनी घायल हुआ। घायलों और मृतकों को इसी अस्पताल में लाया गया था। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस्राइली गोलीबारी में कम से कम 1,318 फलस्तीनी मारे गए हैं। यह आंकड़ा उस नाजुक संघर्षविराम के बाद का है, जिसने इस्राइल और हमास के बीच दो साल से ज्यादा समय से चल रहे युद्ध को रोकने की कोशिश की थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>अमेरिका ने होर्मुज में ईरानी रॉकेट लांचरों पर हमला किया</strong><br>अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के रॉकेट लांचर पर हमला किया है। एक अमेरिकी अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी। यह एक महीने में अमेरिका की पहली सैन्य कार्रवाई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसियों ने जलडमरूमध्य में लारक द्वीप के पास धमाकों की आवाज सुनाई देने की खबर दी। अधिकारी के अनुसार, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के जवान जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगों के साथ रॉकेट दागने की तैयारी करते देखे गए थे। अधिकारी ने संवेदनशील सैन्य गतिविधियों की जानकारी देने के लिए नाम न छापने की शर्त पर यह जानकारी दी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अमेरिकी सेना ने पिछले हफ्ते जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय जहाजों के आने-जाने वाले रास्तों से समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने का काम पूरा किया था। ईरान के सरकारी प्रसारक पर प्रसारित रिवोल्यूशनरी गार्ड के बयान में कहा गया, हमारे कई लड़ाकों और देशवासियों के शहीद होने और घायल होने की जानकारी है। बयान में कहा गया, इस हमले के बाद हमलावर को सजा दी जाएगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>अमेरिकी बलों ने अरब सागर में 83 वाणिज्यिक जहाजों का मार्ग बदला: सेंटकॉम</strong><br>अमेरिकी सेना की मध्य कमान (सेंटकॉम) ने बताया कि ईरान के खिलाफ नाकाबंदी लागू करने के लिए अमेरिकी नौसेना अरब सागर में अभियान चला रही है। 30 अगस्त तक अमेरिकी बलों ने 83 वाणिज्यिक जहाजों का मार्ग बदल दिया। तीन जहाजों को आगे बढ़ने से रोक दिया गया। वहीं, दो जहाजों पर चढ़कर जांच की गई। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सभी जहाज नाकाबंदी के नियमों का पालन करें।</p>
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		<title>अमेरिका: ग्रैंड कैन्यन में अचानक आई बाढ़, 15 लोग लापता; 62 को सुरक्षित निकाला, वीडियो में दिखी तबाही</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/america-grand-canyon-flash-flood-15-missing-62-rescued-video-shows-devastation/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 31 Aug 2026 04:13:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[USA]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका के ग्रैंड कैन्यन नेशनल पार्क में तेज बारिश के बाद आई अचानक बाढ़ ने लोकप्रिय पर्यटन और पैदल यात्रा वाले इलाकों को प्रभावित किया है। ब्राइट एंजेल क्रीक में बढ़े पानी के साथ भारी मलबा बहने से कई पैदल पुल क्षतिग्रस्त हुए और इलाके का प्राकृतिक स्वरूप बदल गया। अधिकारियों के मुताबिक 20 से [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">अमेरिका के ग्रैंड कैन्यन नेशनल पार्क में तेज बारिश के बाद आई अचानक बाढ़ ने लोकप्रिय पर्यटन और पैदल यात्रा वाले इलाकों को प्रभावित किया है। ब्राइट एंजेल क्रीक में बढ़े पानी के साथ भारी मलबा बहने से कई पैदल पुल क्षतिग्रस्त हुए और इलाके का प्राकृतिक स्वरूप बदल गया। अधिकारियों के मुताबिक 20 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी है, जबकि फैंटम रैंच से 62 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।<br><br>अमेरिका के ग्रैंड कैन्यन नेशनल पार्क में अचानक आई बाढ़ के बाद करीब 15 लोगों के लापता होने की खबर है। अचानक आई बाढ़ ने ब्राइट एंजेल कैन्यन और फैंटम रैंच इलाके को प्रभावित किया। नेशनल पार्क सर्विस के अनुसार, बाढ़ अपने साथ बड़े पत्थर, धातु के ढांचे और अन्य मलबा बहाकर कोलोराडो नदी में ले गई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">नेशनल पार्क सर्विस ने बताया कि वह प्रभावित इलाके से लोगों को निकालने और वहां मौजूद लोगों का पता लगाने के लिए एरिजोना के अधिकारियों के साथ काम कर रही है। एजेंसी ने लापता लोगों या इलाके में मौजूद पैदल यात्रियों के बारे में किसी भी जानकारी की अपील की है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>बाढ़ ने बहाए कई पुल, इलाके का बदला नजारा</strong><br>शनिवार दोपहर करीब 2:30 बजे ब्राइट एंजेल क्रीक में अचानक बाढ़ शुरू हुई। यह नाला आगे जाकर कोलोराडो नदी में मिलता है। तेज बहाव ने नाले पर बने पैदल पुलों को बहा दिया और इलाके का स्वरूप काफी बदल गया।&nbsp;इलाके के वीडियो में नाले का तल पहले की तुलना में चौड़ा दिखाई दे रहा है। इसके अलावा वहां नदी के तेज बहाव वाला एक नया हिस्सा भी बनता नजर आ रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यूटा स्टेट यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर कोलोराडो रिवर स्टडीज के निदेशक जैक श्मिट ने कहा, &#8220;यह याद दिलाता है कि ग्रैंड कैन्यन कितना गतिशील और सक्रिय भू-दृश्य है।&#8221;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>एंजेल क्रीक में कैसे आई बाढ़?</strong><br>बाढ़ से बची एरिका वियोला ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि शनिवार दोपहर बारिश शुरू होने के समय वह ब्राइट एंजेल कैंपग्राउंड में थीं। उनके साथ करीब 50 अन्य पैदल यात्रियों ने नाले का जलस्तर बढ़ते देखा। इसके बाद मलबा बहना शुरू हो गया, जिसमें एक इमारत का हिस्सा भी नजर आया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने बताया कि समूह को हेलीकॉप्टर से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। इस वजह से उनका अभियान तय समय से दो दिन पहले ही खत्म हो गया।&nbsp;फ्लैगस्टाफ में राष्ट्रीय मौसम सेवा के मौसम विज्ञानी जस्टिन जॉन्ड्रो के अनुसार, चट्टानी इलाके में करीब 30 मिनट के भीतर आधा इंच से एक इंच तक बारिश हुई। इस इलाके में जमीन काफी ऊंचाई से नीचे की ओर जाती है।&nbsp;जॉन्ड्रो ने कहा, &#8220;इसका ज्यादातर पानी तुरंत बह गया।&#8221;</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने बताया कि बाढ़ ग्रैंड कैन्यन के उत्तरी हिस्से में आई, जहां ब्राइट एंजेल क्रीक नॉर्थ रिम से नीचे उतरकर कोलोराडो नदी में मिलती है। इस दौरान करीब 6,000 फीट यानी 1,828 मीटर की ऊंचाई का अंतर आता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>बाढ़ग्रस्त इलाके से सुरक्षित निकाले गए 62 लोग</strong><br>रविवार सुबह तक फैंटम रैंच से 62 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका था। फैंटम रैंच में ऐतिहासिक कैंटीन और रहने के लिए कमरे हैं। यह कोलोराडो नदी में राफ्टिंग करने वालों के लिए नदी में उतरने और बाहर निकलने की आम जगह भी है।&nbsp;नेशनल पार्क सर्विस ने बताया कि अन्य लोगों को भी वहां से निकालने की तैयारी थी। अभी तक किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">एजेंसी ने चेतावनी दी है कि सोमवार तक और गरज के साथ बारिश होने की संभावना है। इससे &#8220;अचानक बाढ़, मलबे का बहाव, चट्टानें गिरने और पगडंडियों तथा नदी की स्थिति में बदलाव&#8221; का खतरा बढ़ सकता है।&nbsp;रविवार को ब्राइट एंजेल कैंपग्राउंड, फैंटम रैंच और नॉर्थ कैबाब ट्रेल के कुछ हिस्से बंद रहे। पार्क अधिकारियों ने नुकसान का जायजा लेने का काम शुरू कर दिया है। कोलोराडो नदी में राफ्टिंग यात्राएं भी फिलहाल रोक दी गई हैं।</p>
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		<title>नेपाल त्रासदी: बाढ़ ने मचाई भीषण तबाही, 150+ लोगों की मौत; 750 से ज्यादा अभी भी लापता, यूपी-बिहार में अलर्ट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 27 Aug 2026 04:21:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Nepal]]></category>
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					<description><![CDATA[नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ ने कई जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। तेज बहाव के कारण पुल, सड़कें और जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग संपर्क से बाहर हैं। नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए भारतीय दूतावास और विभिन्न राज्य सरकारों ने सहायता [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ ने कई जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। तेज बहाव के कारण पुल, सड़कें और जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग संपर्क से बाहर हैं। नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए भारतीय दूतावास और विभिन्न राज्य सरकारों ने सहायता तंत्र सक्रिय किया है।<br><br>नेपाल में तिब्बत से अचानक आई भीषण बाढ़ ने कई कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई। नेपाल पुलिस के अनुसार, बाढ़ में 157 लोगों की मौत हो गई है और 750 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। लापता लोगों में 133 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। बाढ़ से कई महत्वपूर्ण पुल बह गए और करीब एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया था। इसके तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ की सूचना मिली। इससे आशंका है कि भूकंप के झटकों से ग्लेशियर से अचानक पानी निकलने की घटना हुई, जिससे बाढ़ आई।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>नेपाल में बाढ़ से यूपी-बिहार में अलर्ट</strong><br>नेपाल में आई अचानक बाढ़ ने उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर समेत बिहार के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है। बाढ़ का पानी त्रिशूली नदी तक पहुंचने और वहां जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज होने के बाद बिहार और यूपी सरकार ने गंडक और नारायणी नदी से जुड़े जिलों में अलर्ट जारी कर दिया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">विदेश मंत्रालय लगातार नेपाल सरकार के संपर्क में है। बिहार के पश्चिम चंपारण, गोपालगंज और मुजफ्फरपुर समेत गंडक के तटवर्ती इलाकों में प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। लोगों से नदी से दूर रहने, निचले इलाकों को खाली करने के लिए कहा गया है। राज्य के बाढ़ निगरानी तंत्र के मुताबिक पूर्वी चंपारण के डुमरियाघाट में गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया, जबकि रेवा घाट पर नदी चेतावनी स्तर पार कर चुकी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>एनडीआरएफ की 20 टीमें की गईं तैनात</strong><br>नेपाल से आने वाले अतिरिक्त पानी को देखते हुए अगले कुछ घंटों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जल संसाधन विभाग को तटबंधों पर चौबीसों घंटे निगरानी के लिए कहा गया है।&nbsp;स्थिति का आकलन करने के बाद, पश्चिमी चंपारण और मुजफ्फरपुर में तैनाती के लिए एनडीआरएफ की दो टीमें भेजी गई हैं। बिहार में कुल नौ टीमें तैनात हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश में भी राज्य सरकार स्थिति पर कड़ी नजर रख रही है। कुशीनगर जिले में एनडीआरएफ की एक अतिरिक्त टीम तैनात की गई है, जिसके गंडक नदी के करीब होने के कारण प्रभावित होने की संभावना है। बाढ़ की चेतावनी और बचाव कार्यों (FWR) के लिए यूपी में कुल 11 टीमें तैनात हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">हम पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं: श्री श्री रविशंकर</h3>



<p class="wp-block-paragraph">आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने बाढ़ प्रभावित नेपाल के साथ एकजुटता जताई है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, इस समय नेपाल बड़ी आपदा का सामना कर रहा है। लापता यात्री और क्षति के बीच, हमें उन परिवारों के साथ खड़ा होना है। सब मिलकर प्रार्थना करें कि उन्हें शक्ति मिले।</p>



<figure class="wp-block-embed is-type-rich is-provider-x wp-block-embed-x"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<div class="embed-x"><blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="hi" dir="ltr">इस समय नेपाल बड़ी आपदा का सामना कर रहा है। लापता यात्री और क्षति के बीच, हमें उन परिवारों के साथ खड़ा होना है। सब मिलकर प्रार्थना करें कि उन्हें शक्ति मिले। <a href="https://t.co/bz8jdZJc1D">pic.twitter.com/bz8jdZJc1D</a></p>&mdash; Gurudev Sri Sri Ravi Shankar (@Gurudev) <a href="https://x.com/Gurudev/status/2092705701835501649?ref_src=twsrc%5Etfw">August 26, 2026</a></blockquote><script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></div>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>नेपाल में कैसे बाढ़ ने मचाई तबाही?</strong><br>अधिकारियों के अनुसार, भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ से तिब्बत की सीमा से लगे रसुवा और धादिंग जिले प्रभावित हुए हैं। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, चट्टान खिसकने और नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बहने वाली ल्हेंदे नदी में पानी बढ़ने के कारण रसुवा जिले के सीमावर्ती शहर टिमुरे में भोटे कोशी नदी के रास्ते बाढ़ का पानी त्रिशूली नदी में पहुंचा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसके बाद बाढ़ नदी के रास्ते नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहूं और नवलपरासी पूर्व जैसे अन्य जिलों तक फैल गई। ये इलाके काठमांडू से करीब 70 किलोमीटर से लेकर लगभग 200 किलोमीटर तक की दूरी पर हैं। नेपाल सरकार ने बताया कि करीब 750 लोग लापता हैं। वहीं, चीन के सरकारी समाचार चैनल सीजीटीएन के अनुसार, सीमा के चीनी हिस्से में तीन लोगों की मौत हुई है और 265 लोग लापता हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रभावित इलाकों के वीडियो में कीचड़, चट्टानों और मलबे के साथ तेज बहाव का पानी दिखाई दे रहा है। लोग बाढ़ से बचने के लिए भागते नजर आए। पानी इमारतों और वाहनों की ओर तेजी से बढ़ रहा था। अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित इलाकों से करीब 100 लोगों को बचाया गया है। इनमें से 30 लोगों का काठमांडू के त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में इलाज चल रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>भारत ने पड़ोसी देश की मदद के लिए आगे बढ़ाया हाथ</strong><br>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के पीएम बालेंद्र शाह से बात की और स्थिति से निपटने के लिए हर संभव मानवीय सहायता का आश्वासन दिया। भारत ने पड़ोसी देश के लिए राहत सामग्री की पहली खेप भेज दी है। काठमांडो स्थित भारतीय दूतावास ने बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता और जानकारी के लिए आपातकालीन नंबर जारी किए हैं। दूतावास ने एक्स पर बताया कि लोग +977 985 131 6807 या +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>130 से ज्यादा भारतीय नागरिक लापता</strong><br>नेपाल के मध्य जिलों में अचानक आई बाढ़ से भारी तबाही के बाद 130 से अधिक भारतीय नागरिक लापता हैं। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कई श्रद्धालु भी शामिल हैं। नेपाल में बाढ़ से प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में अन्य भारतीय भी फंसे हुए हैं।&nbsp;पड़ोसी देश के अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ से प्रभावित भारतीयों और उनके परिजनों की मदद के लिए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के अलावा तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, राजस्थान और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों ने हेल्पलाइन शुरू की हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सम्राट टूर्स एंड ट्रैवल एजेंसी के अनुसार, लापता भारतीयों में कम से कम 59 कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालु हैं। नेपाल में भारी बाढ़ के कारण संचार व्यवस्था बाधित होने से प्रभावित भारतीय नागरिकों के बारे में फिलहाल बहुत कम जानकारी मिल सकी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>तमिलनाडु के कितने पर्यटक अभी भी लापता?</strong><br>राज्य के अधिकारियों के अनुसार, तमिलनाडु के 57 पर्यटकों में से 37 का अभी पता नहीं चल पाया है, जबकि 20 अन्य के बारे में जानकारी मिल गई है। बताया जा रहा है कि ये पर्यटक हिमालय में एक मंदिर की ओर जा रहे थे। कोयंबटूर स्थित गैर-लाभकारी संस्था ईशा फाउंडेशन ने दावा किया कि उसके 77 सदस्य, जो एक आव्रजन केंद्र में मौजूद थे, लापता हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">संस्था के संस्थापक सद्गुरु ने कहा, &#8221;आव्रजन कार्यालय में मौजूद लोगों के बारे में किसी के ठिकाने की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है।&#8221; उन्होंने बताया कि 495 लोग सुरक्षित लौट चुके हैं। नेपाल सरकार ने बाद में कहा कि उस विशेष आव्रजन केंद्र का पूरा स्टाफ संपर्क से बाहर है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>पश्चिम बंगाल के कितने पर्यटक लापता?</strong><br>बुधवार को नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद पश्चिम बंगाल के कई लोगों का पता नहीं चल पाया है। इनमें कोलकाता से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया 32 सदस्यीय दल भी शामिल है। एक अधिकारी ने बताया कि दल में 30 पर्यटक और दो टूर मैनेजर हैं। दल 21 अगस्त को कोलकाता से रवाना हुआ था और अगले दिन नेपाल पहुंचा था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अधिकारी के अनुसार, दल बुधवार सुबह तिब्बत में प्रवेश करने के लिए रसुवागढ़ी पहुंचा था। इसके सदस्य सुबह करीब 8:30 बजे आव्रजन कार्यालय में मौजूद थे, तभी नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में अचानक बाढ़ आ गई। अधिकारी ने पीटीआई से कहा, &#8221;बाढ़ आने के बाद से 32 सदस्यों में से किसी से भी संपर्क नहीं हो पाया है।&#8221;</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने बताया कि कोलकाता के अलावा हुगली के चंदननगर और उत्तर 24 परगना के बारासात के निवासी भी नेपाल में फंसे या लापता लोगों में शामिल हो सकते हैं। पश्चिम बंगाल सरकार ने नेपाल में प्रभावित लोगों के परिजनों को जानकारी देने के लिए कोलकाता स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय में हेल्पलाइन शुरू की है। परिजन (033) 24793311 या 9147890181 पर संपर्क कर सकते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>उत्तर प्रदेश के कितने लोगों के नेपाल में फंसे होने की आशंका?</strong><br>उत्तर प्रदेश के कई लोगों के नेपाल में फंसे होने की आशंका है। किसान नेता राकेश टिकैत भी अपने सहयोगियों के साथ सड़क मार्ग से नेपाल गए थे और पोखरा में फंस गए। भारतीय किसान यूनियन के नेता ने वीडियो संदेश में कहा, &#8221;हम कल विमान से काठमांडो पहुंचेंगे और वहां से विमान से दिल्ली जाएंगे। इस स्थिति के कारण हमें अपने वाहन वहीं छोड़ने होंगे क्योंकि सड़क मार्ग से यात्रा करना संभव नहीं होगा।&#8221;</p>



<p class="wp-block-paragraph">राहत आयुक्त कार्यालय ने नेपाल में बाढ़ से प्रभावित उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए परामर्श जारी किया है। इसमें कहा गया है कि अगर राज्य का कोई व्यक्ति नेपाल में फंसा है या उसे किसी तरह की सहायता की जरूरत है तो उसके परिजन तुरंत राज्य की हेल्पलाइन 1070 पर संपर्क करें।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>महाराष्ट्र और केरल समेत और किन राज्यों के लोग फंसे?</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>अधिकारियों के अनुसार, महाराष्ट्र के सात पर्यटक नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बीच फंसे हुए हैं। बुधवार रात मिली ताजा जानकारी के मुताबिक, इनमें से चार सुरक्षित हैं। अधिकारियों ने बताया कि बाकी तीन लोगों से संपर्क करने की कोशिश की जा रही है।</li>



<li>केरल के अधिकारियों ने बताया कि नेपाल की यात्रा पर गया 36 लोगों का एक दल सुरक्षित है और भीषण बाढ़ से प्रभावित इलाकों से दूर है। केरल ने नेपाल में बाढ़ से प्रभावित राज्य के लोगों को आपात सहायता देने के लिए राज्य सरकार की एजेंसी नॉर्का-रूट्स के जरिए हेल्पडेस्क शुरू किया है। नॉर्का-रूट्स राज्य सरकार के प्रवासी केरल मामलों के विभाग की फील्ड एजेंसी है।</li>



<li>सिक्किम सरकार ने उन लोगों की मदद के लिए हेल्पलाइन शुरू की है, जिनके परिवार के सदस्य या रिश्तेदार नेपाल में फंसे हो सकते हैं या बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने भी बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता और जानकारी के लिए आपातकालीन नंबर जारी किए हैं। लोग +977 985 131 6807 या +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं।</li>



<li>ओडिशा सरकार ने नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ के कारण फंसे या परेशानी में हो सकने वाले राज्य के लोगों की मदद के लिए नई दिल्ली में नियंत्रण कक्ष बनाया है और हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। सरकार के बयान के अनुसार, हेल्पलाइन नंबर +91-7428135044, +91-8527580245 और 011-23012807 हैं।</li>



<li>वही, उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने उन लोगों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं, जिनके परिवार के सदस्य नेपाल में फंसे या बाढ़ से प्रभावित हो सकते हैं। अधिकारियों के अनुसार, एसईओसी के नंबर 0135-2710334, 2710335, 2664314, 2664315, 2664316 और 8218867005 के अलावा टोल फ्री नंबर 1070 पर भी संपर्क किया जा सकता है।</li>



<li>छत्तीसगढ़ सरकार ने नेपाल में अचानक आई बाढ़ के कारण फंसे हो सकने वाले राज्य के नागरिकों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। अधिकारियों के अनुसार, छत्तीसगढ़ के लोग सहायता और जानकारी के लिए आपदा प्रबंधन हेल्पलाइन 1070 या +91-771-2223471 पर संपर्क कर सकते हैं।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>राहत और बचाव कार्य में जुटी नेपाली सेना</strong><br>नेपाल सेना ने अचानक आई बाढ़ के बाद खोज और बचाव अभियान के लिए 12 हेलीकॉप्टर लगाए। सेना के अनुसार, रसुवा जिले के स्याफ्रुबेसी से छह, मेलुंग से दो और धुंचे से चार लोगों को बचाया गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">नेपाल सेना ने त्रिशूली स्थित मिलिट्री ट्रेनिंग सेंटर नंबर एक में एक उपचार केंद्र भी बनाया है। यहां सेना के चिकित्सा कर्मी प्रभावित लोगों को आपात चिकित्सा सुविधा दे रहे हैं। सेना ने आपात चिकित्सा बचाव दल से लैस एमआई-17 हेलीकॉप्टर को त्रिशूली के जिला अस्पताल की ओर भी भेजा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>तिब्बत में भी चल रहा राहत और बचाव कार्य</strong><br>चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बुधवार को भीषण अचानक आई बाढ़ के बाद लापता लोगों की तलाश और बचाव के लिए हर संभव प्रयास करने का आदेश दिया। पीपुल्स आर्म्ड पुलिस की शिगात्से टुकड़ी के कुल 145 अधिकारी और जवान प्रभावित सीमा बंदरगाह पर भेजे गए हैं। वे आपात स्थिति से निपटने के अभियान में मदद कर रहे हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">शी ने खतरे वाले इलाकों से लोगों को निकालने और घायलों को समय पर चिकित्सा सुविधा देने का निर्देश दिया, ताकि जनहानि को कम किया जा सके। उन्होंने निगरानी और शुरुआती चेतावनी व्यवस्था मजबूत करने, वैज्ञानिक तरीके से बचाव अभियान चलाने और दूसरी आपदाओं से बचाव पर भी जोर दिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, स्थानीय प्रशासन ने आपदा प्रभावित क्षेत्र में कर्मियों को भेजा है। वहां संचार व्यवस्था बाधित हो गई है।</p>
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		<title>ट्रंप का &#8216;टैरिफ वार&#8217; जारी: चीन के खिलाफ नया प्लान, सस्ते सामान पर 7.5% कर संभव; कनाडा के लिए भी बढ़ी मुश्किल</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/trump-tariff-war-china-new-plan-7-5-percent-tariff-cheap-goods-canada-trade-war/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 25 Aug 2026 04:43:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[USA]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के सस्ते सामान पर नया 7.5% टैरिफ लगाने की तैयारी में हैं। वहीं, उन्होंने कनाडा से आने वाली कारों, ऑटो पार्ट्स और स्टील पर 2027 से 50% शुल्क लगाने का एलान किया है। इससे दोनों देशों के साथ अमेरिका का व्यापार तनाव बढ़ सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के सस्ते सामान पर नया 7.5% टैरिफ लगाने की तैयारी में हैं। वहीं, उन्होंने कनाडा से आने वाली कारों, ऑटो पार्ट्स और स्टील पर 2027 से 50% शुल्क लगाने का एलान किया है। इससे दोनों देशों के साथ अमेरिका का व्यापार तनाव बढ़ सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन पर नया टैरिफ लगाने की तैयारी में हैं। मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, यह कदम चीन पर वैश्विक बाजार में कम कीमत वाले सामान की बाढ़ लाने के आरोप के बाद उठाया जा रहा है। प्रस्तावित शुल्क 7.5 फीसदी हो सकता है, हालांकि अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बताया जा रहा है कि अमेरिकी प्रशासन ऐसा स्तर तय करना चाहता है जिससे अमेरिका और चीन के बीच चल रहा एक साल का व्यापारिक समझौता प्रभावित न हो। साथ ही सितंबर के अंत में ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच प्रस्तावित मुलाकात पर भी इसका असर न पड़े।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>चीन पर पहले से लगे शुल्क के ऊपर लगेगा नया टैरिफ?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">प्रस्तावित नया शुल्क चीन पर पहले से लागू टैरिफ के अतिरिक्त होगा। पिछले महीने अमेरिका ने दुनिया की करीब 60 अर्थव्यवस्थाओं से आने वाले सामान पर 10 से 12.5 फीसदी तक के शुल्क की घोषणा की थी। इन देशों पर जबरन मजदूरी से बने उत्पादों पर रोक को प्रभावी ढंग से लागू नहीं करने का आरोप लगाया गया था। चीन समेत कई देशों ने इस कदम का विरोध किया था।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>चीन के &#8216;ओवरकैपेसिटी&#8217;&nbsp;पर अमेरिका की नजर</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">ट्रंप प्रशासन ने मार्च में चीन समेत कई देशों की अतिरिक्त औद्योगिक क्षमता और जबरन मजदूरी से जुड़े नियमों को लेकर औपचारिक जांच शुरू की थी। चीन की जांच अमेरिकी व्यापार कानून की धारा 301 के तहत की जा रही है। अमेरिका का आरोप है कि चीन की कई इंडस्ट्रीज में जरूरत से ज्यादा उत्पादन क्षमता है, जिससे वैश्विक बाजार में कम कीमत वाले उत्पादों की आपूर्ति बढ़ रही है। ऑटोमोबाइल, सोलर पैनल, सीमेंट और स्टील जैसे क्षेत्रों में चीन की बड़ी उत्पादन क्षमता को लेकर उसके व्यापारिक साझेदार चिंता जता चुके हैं। चीन ने हालांकि ओवरकैपेसिटी के आरोपों को खारिज किया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>चीन का व्यापार सरप्लस रिकॉर्ड स्तर पर</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">चीन में घरेलू मांग धीमी होने के कारण कई कंपनियों ने विदेशी बाजारों का रुख किया है। इससे देश के निर्यात में बढ़ोतरी हुई और पिछले साल चीन का व्यापार अधिशेष करीब 1.2 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि चीन ने कभी बड़े व्यापार अधिशेष को अपना लक्ष्य नहीं बनाया।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>कनाडा पर भी ट्रंप ने बढ़ाया टैरिफ का दबाव</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">इस बीच ट्रंप ने कनाडा के खिलाफ भी टैरिफ बढ़ाने का एलान किया है। उन्होंने कहा कि 1 जनवरी 2027 से कनाडा से आने वाली कारों, ट्रकों, ऑटो पार्ट्स और स्टील पर शुल्क बढ़ाकर 50 फीसदी किया जाएगा। ट्रंप ने कनाडा पर अमेरिकी कृषि उत्पादों पर ऊंचे शुल्क लगाने और अमेरिका के साथ अनुचित व्यापार करने का आरोप लगाया। उन्होंने कंपनियों को अमेरिका में उत्पादन शुरू करने पर टैरिफ से छूट देने की बात भी कही। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि कनाडा के साथ मौजूदा व्यापार संबंध टिकाऊ नहीं हैं और अब वॉशिंगटन उसे पहले जैसी तरजीह नहीं देगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>कनाडा आज लगाएगा जवाबी टैरिफ</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">कनाडा मंगलवार को अमेरिका के खिलाफ जवाबी टैरिफ का एलान करेगा। मामले से जुड़े एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है। इससे दोनों देशों के बीच पहले से चल रहा व्यापार विवाद और गहराने की आशंका है। यह कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच व्यापार वार्ता टूटने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव तेजी से बढ़ा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>कार्नी बोले- अमेरिका की शर्तें स्वीकार नहीं</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">कार्नी ने अमेरिका पर कनाडा को अपने अधीन करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान अमेरिका की व्यापार संबंधी मांगों से कनाडा की यह आशंका मजबूत हुई कि वॉशिंगटन देश के प्रमुख उद्योगों को कमजोर करना चाहता है। उन्होंने ऑटोमोबाइल, स्टील और एल्युमिनियम जैसे क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि कनाडा ऐसी स्थिति को स्वीकार नहीं करेगा, जिसमें उसे अमेरिका की सहायक इकाई की तरह देखा जाए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन पर नया टैरिफ लगाने की तैयारी में हैं। मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, यह कदम चीन पर वैश्विक बाजार में कम कीमत वाले सामान की बाढ़ लाने के आरोप के बाद उठाया जा रहा है। प्रस्तावित शुल्क 7.5 फीसदी हो सकता है, हालांकि अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी प्रशासन ऐसा स्तर तय करना चाहता है जिससे अमेरिका और चीन के बीच चल रहा एक साल का व्यापारिक समझौता प्रभावित न हो। साथ ही सितंबर के अंत में ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच प्रस्तावित मुलाकात पर भी इसका असर न पड़े। चीन पर पहले से लगे शुल्क के ऊपर लगेगा नया टैरिफ? प्रस्तावित नया शुल्क चीन पर पहले से लागू टैरिफ के अतिरिक्त होगा। </p>



<p class="wp-block-paragraph">पिछले महीने अमेरिका ने दुनिया की करीब 60 अर्थव्यवस्थाओं से आने वाले सामान पर 10 से 12.5 फीसदी तक के शुल्क की घोषणा की थी। इन देशों पर जबरन मजदूरी से बने उत्पादों पर रोक को प्रभावी ढंग से लागू नहीं करने का आरोप लगाया गया था। चीन समेत कई देशों ने इस कदम का विरोध किया था। चीन के ‘ओवरकैपेसिटी’ पर अमेरिका की नजर ट्रंप प्रशासन ने मार्च में चीन समेत कई देशों की अतिरिक्त औद्योगिक क्षमता और जबरन मजदूरी से जुड़े नियमों को लेकर औपचारिक जांच शुरू की थी। चीन की जांच अमेरिकी व्यापार कानून की धारा 301 के तहत की जा रही है। अमेरिका का आरोप है कि चीन की कई इंडस्ट्रीज में जरूरत से ज्यादा उत्पादन क्षमता है, जिससे वैश्विक बाजार में कम कीमत वाले उत्पादों की आपूर्ति बढ़ रही है। </p>



<p class="wp-block-paragraph">ऑटोमोबाइल, सोलर पैनल, सीमेंट और स्टील जैसे क्षेत्रों में चीन की बड़ी उत्पादन क्षमता को लेकर उसके व्यापारिक साझेदार चिंता जता चुके हैं। चीन ने हालांकि ओवरकैपेसिटी के आरोपों को खारिज किया है। चीन का व्यापार सरप्लस रिकॉर्ड स्तर पर चीन में घरेलू मांग धीमी होने के कारण कई कंपनियों ने विदेशी बाजारों का रुख किया है। इससे देश के निर्यात में बढ़ोतरी हुई और पिछले साल चीन का व्यापार अधिशेष करीब 1.2 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि चीन ने कभी बड़े व्यापार अधिशेष को अपना लक्ष्य नहीं बनाया। कनाडा पर भी ट्रंप ने बढ़ाया टैरिफ का दबाव इस बीच ट्रंप ने कनाडा के खिलाफ भी टैरिफ बढ़ाने का ऐलान किया है। </p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने कहा कि 1 जनवरी 2027 से कनाडा से आने वाली कारों, ट्रकों, ऑटो पार्ट्स और स्टील पर शुल्क बढ़ाकर 50 फीसदी किया जाएगा। ट्रंप ने कनाडा पर अमेरिकी कृषि उत्पादों पर ऊंचे शुल्क लगाने और अमेरिका के साथ अनुचित व्यापार करने का आरोप लगाया। उन्होंने कंपनियों को अमेरिका में उत्पादन शुरू करने पर टैरिफ से छूट देने की बात भी कही। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि कनाडा के साथ मौजूदा व्यापार संबंध टिकाऊ नहीं हैं और अब वॉशिंगटन उसे पहले जैसी तरजीह नहीं देगा।</p>
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		<title>अमेरिका में RSS पर बैन लगाने की मांग: भागवत के US दौरे पर USCIRF सख्त; बोला- संघ नेताओं को न मिले सम्मान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 20 Aug 2026 03:52:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[International]]></category>
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					<description><![CDATA[यूएससीआईआरएफ के अधिकारियों ने आरएसएस के नेताओं को अमेरिकी सरकार की ओर से हाई-लेवल बैठकों और राजनयिक सम्मान से दूर रखने की अपील की है। साथ ही, धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले आरएसएस सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। अमेरिका की धार्मिक स्वतंत्रता पर काम करने वाली सलाहकार संस्था [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">यूएससीआईआरएफ के अधिकारियों ने आरएसएस के नेताओं को अमेरिकी सरकार की ओर से हाई-लेवल बैठकों और राजनयिक सम्मान से दूर रखने की अपील की है। साथ ही, धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले आरएसएस सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।<br><br>अमेरिका की धार्मिक स्वतंत्रता पर काम करने वाली सलाहकार संस्था यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम (यूएससीआईआरएफ) के अधिकारियों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने अमेरिकी सरकार से अपील की है कि वह आरएसएस नेताओं को राजनयिक सम्मान न दे और न ही उनके साथ किसी तरह की हाई-लेवल मीटिंग करे। यह बयान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित अमेरिका दौरे से पहले आया है। वहीं, भारत पहले ही यूएससीआईआरएफ की रिपोर्टों को पक्षपातपूर्ण और वैचारिक पूर्वाग्रह पर आधारित बताते हुए खारिज कर चुका है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>आरएसएस नेताओं से दूरी बनाने की अपील</strong><br>यूएससीआईआरएफ के चेयरमैन आसिफ महमूद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सदस्य हैं। उन्होंने आरएसएस को एक &#8216;अंब्रेला ऑर्गनाइजेशन&#8217; यानी ऐसा मुख्य संगठन बताया, जिसके सहयोगी संगठनों पर धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले करने के आरोप लगते रहे हैं। महमूद की ये टिप्पणियां आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे से कुछ हफ्ते पहले सामने आई हैं। भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में &#8216;अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग&#8217;  की ओर से आयोजित &#8216;यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन&#8217; (एकता का उत्सव) में शामिल होने वाले हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>आरएसएस सदस्यों पर प्रतिबंध की मांग</strong><br>यूएससीआईआरएफ कमिश्नर जीन मिल्स ने कहा कि आरएसएस नेताओं को, भले ही वे भारत सरकार से जुड़े हों, हाई-लेवल मीटिंग या राजनयिक सम्मान नहीं दिया जाना चाहिए। इसके बजाय, अमेरिकी सरकार (USG) को उन आरएसएस सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर ध्यान देना चाहिए, जो फ्रीडम ऑफ रिलिजन ऑर बिलीफ यानी धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए गए हैं। &nbsp;यूएससीआईआरएफ ने आसिफ महमूद और जीन मिल्स की इन टिप्पणियों को अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट किया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>महमूद ने आरएसएस को लेकर क्या कहा?</strong><br>महमूद ने कहा, &#8216;भारत के प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सदस्य हैं। यह भारत का एक मुख्य संगठन है, जिसके सहयोगी समूहों ने ईसाइयों और मुसलमानों सहित धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले किए हैं। अब आरएसएस नेता मोहन भागवत अमेरिका का दौरा करने वाले हैं।&#8217;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स ने भी उठाए सवाल</strong><br>एडवोकेसी ग्रुप &#8216;हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स&#8217; ने कहा कि मोहन भागवत के दौरे को मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ आरएसएस नेटवर्क से जुड़े हिंसा के आरोपों से अलग करके नहीं देखा जा सकता। इस एडवोकेसी ग्रुप ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि &#8216;एकता&#8217; का उत्सव धार्मिक श्रेष्ठता की राजनीति को छिपा नहीं सकता।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मार्च की रिपोर्ट में भी भारत पर निशाना</strong><br>मार्च में यूएससीआईआरएफ की सालाना रिपोर्ट में धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघन को लेकर भारत की आलोचना की गई थी। रिपोर्ट में आरएसएस और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) सहित कुछ व्यक्तियों और संस्थाओं पर &#8216;टारगेटेड प्रतिबंध&#8217; लगाने का समर्थन किया गया था। यूएससीआईआरएफ ने इन्हें धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार ठहराया था।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>भारत ने यूएससीआईआरएफ की रिपोर्ट खारिज की</strong><br>भारत ने यूएससीआईआरएफ की रिपोर्ट को खारिज कर दिया था। भारत का कहना है कि यह संस्था लगातार देश की &#8220;गलत और चुनिंदा&#8221; तस्वीर पेश करती है और उसकी रिपोर्ट &#8216;संदिग्ध स्रोतों और वैचारिक नैरेटिव&#8217; पर आधारित होती हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 16 मार्च को एक बयान में कहा था कि यूएससीआईआरएफ को भारत की &#8216;चुनिंदा आलोचना&#8217; करने के बजाय अमेरिका में हिंदू मंदिरों में तोड़-फोड़ और हमलों की चिंताजनक घटनाओं पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने अमेरिका द्वारा भारत को चुनिंदा रूप से निशाना बनाए जाने तथा अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों के प्रति बढ़ती असहिष्णुता और डराने-धमकाने की घटनाओं का भी जिक्र किया था। भारत ने इन मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत बताई थी।</p>
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		<title>&#8216;ईरान पर होगी सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई&#8217;: ट्रंप ने दी धमकी, मदद करने वाले देशों को चेताया; क्या बढ़ेगा तनाव?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 20 Aug 2026 03:37:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[USA]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त आर्थिक कार्रवाई की धमकी दी। उन्होंने कहा कि ईरान को अमेरिका के साथ समझौता करने का सबसे बड़ा मौका दिया गया था। लेकिन उसने इसे गंवा दिया। ट्रंप ने कहा, इस्लामी गणराज्य ईरान को किसी समझौते के लिए मुझसे ज्यादा बड़ा मौका [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त आर्थिक कार्रवाई की धमकी दी। उन्होंने कहा कि ईरान को अमेरिका के साथ समझौता करने का सबसे बड़ा मौका दिया गया था। लेकिन उसने इसे गंवा दिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ट्रंप ने कहा, इस्लामी गणराज्य ईरान को किसी समझौते के लिए मुझसे ज्यादा बड़ा मौका किसी ने नहीं दिया। दुख की बात है कि उन्होंने इस मौके का फायदा नहीं उठाया। इसलिए आज मैं किसी भी देश के खिलाफ अब तक की सबसे कड़ी आर्थिक कार्रवाई की घोषणा कर रहा हूं। उन्होंने दावा किया कि ईरान की नौसेना खत्म हो चुकी है। उसकी वायुसेना नष्ट हो गई है। उसकी सैन्य फैक्ट्रियां मलबे में बदल गई हैं। ईरान की मुद्रा बेकार हो गई है और देश बेहद कमजोर स्थिति में है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ईरान की मदद करने वाले देशों पर भी कार्रवाई?</strong><br>ट्रंप ने कहा कि जो भी देश ईरान को किसी भी तरह की आर्थिक मदद देगा, उसे भी बड़े आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ेगा। इसमें वित्तीय संस्थान, कारोबार, हवाई अड्डे और सरकारी संस्थाएं शामिल हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने तेल की तस्करी, स्वैप लाइन, नकद लेनदेन, एक्सचेंज हाउस, जहाजों के पंजीकरण और ईरान की मदद करने वाली छिपी हुई (शेल) कंपनियों को तुरंत रोकने की बात कही। </p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सहयोगी देशों से अमेरिका के साथ आने की अपील</strong><br>ट्रंप ने इसे ईरान के खिलाफ बड़े आर्थिक हमले का दिन बताया। उन्होंने अमेरिका के सहयोगी देशों से ईरान को अलग-थलग करने और उसके खतरे को खत्म करने में साथ देने की अपील की।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने कहा कि ईरान इस समय बेहद कमजोर स्थिति में है। उन्होंने दावा किया कि ये ऐतिहासिक कदम ईरान को और दुनियाभर में आतंक फैलाने की उसकी क्षमता को बुरी तरह कमजोर कर देंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाया</strong><br>अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के पिछले हफ्ते इसी तरह बयान दिया था। बेसेंट ने कहा था कि अमेरिका ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की कोशिशें बढ़ाएगा। इस रणनीति में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी भी शामिल है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><br><br></p>
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		<title>रूस-यूक्रेन जंग में लक्ष्मी मित्तल की फैक्ट्री बनी निशाना: प्लांट पर मिसाइलों की बौछार; दो की मौत, उत्पादन ठप</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/russia-ukraine-war-lakshmi-mittal-factory-targeted-missile-attack-two-dead-production-halted/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 17 Aug 2026 04:07:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[International]]></category>
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					<description><![CDATA[रूस-यूक्रेन युद्ध अब सिर्फ दोनों देशों के मोर्चे तक सीमित नहीं रह गया है। यूक्रेन के बड़े ड्रोन हमलों के जवाब में रूस ने क्रिवी रिह स्थित भारतीय मूल के अरबपति लक्ष्मी मित्तल की आर्सेलरमित्तल स्टील फैक्ट्री समेत कई ठिकानों पर हमला किया। यूरोप में जारी जंग के बीच रूस ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">रूस-यूक्रेन युद्ध अब सिर्फ दोनों देशों के मोर्चे तक सीमित नहीं रह गया है। यूक्रेन के बड़े ड्रोन हमलों के जवाब में रूस ने क्रिवी रिह स्थित भारतीय मूल के अरबपति लक्ष्मी मित्तल की आर्सेलरमित्तल स्टील फैक्ट्री समेत कई ठिकानों पर हमला किया।<br><br>यूरोप में जारी जंग के बीच रूस ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के गृहनगर क्रिवी रिह में भारतीय मूल के अरबपति लक्ष्मी मित्तल की आर्सेलरमित्तल माइनिंग एंड मेटलर्जिकल कॉम्प्लेक्स पर मिसाइल हमला किया। यूक्रेन की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड स्टील यूनिट पर हुए इस हमले में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि 14 कर्मचारी घायल हुए हैं। मुख्य ऊर्जा और ब्लास्ट-फर्नेस ऑपरेशंस को नुकसान पहुंचने के बाद फैक्ट्री में उत्पादन आंशिक रूप से रोकना पड़ा। यह हमला यूक्रेन की ओर से रूस पर किए गए बड़े पैमाने के ड्रोन हमलों के जवाब में हुआ।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>यूक्रेन ने रूस पर सैकड़ों ड्रोन से किया हमला</strong><br>इससे पहले यूक्रेन ने रूस पर सैकड़ों ड्रोन से हमला किया था। इसे कीव की ओर से युद्ध के सबसे बड़े हवाई हमलों में से एक बताया जा रहा है। इन हमलों में कम से कम छह लोगों की मौत हुई। मॉस्को क्षेत्र के गवर्नर आंद्रे वोरोब्योव ने इसे &#8220;हाल के समय के सबसे बड़े ड्रोन हमलों में से एक&#8221; बताया। रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उसने रातभर देश के अलग-अलग हिस्सों में 822 यूक्रेनी ड्रोन को रोका।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मॉस्को में ड्रोन हमले से 83 वर्षीय व्यक्ति की मौत</strong><br>वोरोब्योव ने बताया कि मॉस्को क्षेत्र में एक निजी घर पर यूक्रेनी ड्रोन के हमले में 83 वर्षीय एक व्यक्ति की मौत हो गई। उन्होंने यह भी बताया कि एक अन्य यूक्रेनी हमले के कारण पोडोल्स्क शहर में &#8216;वाइल्डबेरीज&#8217; के गोदाम में आग लग गई। वाइल्डबेरीज रूस की सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेल कंपनी है और इसका संबंध देश की सबसे अमीर महिला अरबपति तात्याना किम से है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मॉस्को की ओर बढ़ रहे करीब 600 ड्रोन</strong><br>मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन ने कहा कि रूसी राजधानी की ओर बढ़ते हुए करीब 600 ड्रोन का पता लगाया गया। इनमें से लगभग एक-तिहाई ड्रोन को मॉस्को क्षेत्र के ऊपर ही नष्ट कर दिया गया। हमलों के चलते राजधानी और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को भी हाई अलर्ट पर रखा गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>रोस्तोव में भी ड्रोन हमले, पांच लोगों की मौत</strong><br>स्थानीय गवर्नर यूरी स्ल्यूसर ने बताया कि एक अन्य ड्रोन हमले में रूस के दक्षिण-पश्चिमी रोस्तोव क्षेत्र के तीन शहरों को निशाना बनाया गया। इस हमले में पांच लोगों की मौत हो गई। 150 से अधिक ड्रोन से किए गए इस हमले में कई घरों और एक रेलवे स्टेशन को नुकसान पहुंचा, जबकि जंगल में भी आग लग गई।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>युद्ध में खुल रहा नया मोर्चा</strong><br>यूक्रेन ने इस साल रूस के खिलाफ अपने हमले तेज कर दिए हैं। लंबी दूरी की मिसाइलों और ड्रोन के झुंड के जरिए रूसी सैन्य उद्योगों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जा रहा है। यूक्रेन ने लॉजिस्टिक्स कंपनी &#8216;वाइल्डबेरीज&#8217; के डिपो पर भी लगातार हमले किए हैं। इन हमलों में अरबों डॉलर का सामान जलकर खाक हो चुका है। ऐसे हमलों ने मॉस्को द्वारा यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू किए जाने के करीब साढ़े चार साल बाद युद्ध की आंच रूसी जनता के और करीब ला दी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मोर्चे पर लड़ाई धीमी, दूर तक पहुंच रहे हमले</strong><br>मोर्चे पर जमीनी लड़ाई लगभग ठप है और शांति वार्ता भी रुकी हुई है। ऐसे में दोनों युद्धरत देश एक-दूसरे के इलाकों में दूर तक मार करने वाले हमले तेज कर रहे हैं। इसका असर आम नागरिकों पर भी पड़ रहा है। इन हमलों के चलते 2022 में युद्ध के शुरुआती महीनों के बाद से अब तक सबसे ज्यादा नागरिकों की मौतें हुई हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>रूस का पलटवार, मित्तल की स्टील फैक्ट्री बनी निशाना</strong><br>रविवार को यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के गृहनगर क्रिवी रिह में आर्सेलरमित्तल के स्टील प्लांट पर रूसी ड्रोन और मिसाइलों की बौछार हुई। हमले में दो लोगों की मौत हो गई। यूक्रेन की सबसे बड़ी स्टील उत्पादक कंपनियों में शामिल आर्सेलरमित्तल क्रिवी रिह ने पुष्टि की कि मिसाइल हमले में उसकी एक साइट को निशाना बनाया गया। कंपनी ने बताया कि हमले के बाद उसके कामकाज को आंशिक रूप से रोकना पड़ा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>यूक्रेन के कई इलाकों में भी मौतें</strong><br>रूस के हमलों का असर यूक्रेन के कई अन्य इलाकों में भी देखने को मिला। दक्षिण-पूर्वी जापोरिज्जिया क्षेत्र में दो लोगों की मौत हुई, जबकि सुमी के सीमावर्ती इलाके में एक व्यक्ति और पूर्वी डोनेट्स्क में एक अन्य व्यक्ति की जान चली गई। रूसी हमलों के कारण कीव में कई जगह आग लग गई और छह लोग घायल हो गए। शहर के सबसे बड़े बुक मार्केट में से एक में भी आग लग गई। इसके कारण पोचाइना मेट्रो स्टेशन के पास बने कई कियोस्क जलकर खाक हो गए।</p>
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		<title>क्या पश्चिम एशिया में फिर बिगड़ेंगे हालात? लाल सागर में हूती लड़ाकों ने सऊदी जहाजों को बनाया निशाना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 13 Aug 2026 05:03:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[International]]></category>
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					<description><![CDATA[पश्चिम एशिया लंबे समय से अस्थिर चल रहा है और जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति हुई है तो युद्ध का एक नया मोर्चा खुलता दिख रहा है। दरअसल यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी के कई ठिकानों पर हमले किए हैं।  यमन के हूती विद्रोहियों ने बुधवार को सऊदी जहाजों को निशाना बनाया। [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">पश्चिम एशिया लंबे समय से अस्थिर चल रहा है और जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति हुई है तो युद्ध का एक नया मोर्चा खुलता दिख रहा है। दरअसल यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी के कई ठिकानों पर हमले किए हैं। <br><br>यमन के हूती विद्रोहियों ने बुधवार को सऊदी जहाजों को निशाना बनाया। जिससे पश्चिम एशिया के हालात फिर से बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया है। हूती विद्रोहियों ने बुधवार को लाल सागर में एक सैन्य परिवहन पोत पर हमला किया और सऊदी समर्थित ठिकानों पर भी हमले किए।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>हूती विद्रोहियों ने सऊदी ठिकानों पर किए हमले</strong><br>हूती विद्रोहियों के सैन्य प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि &#8216;विद्रोही समूह ने मोचा और मारिब क्षेत्रों में सऊदी अरब के सैन्य ठिकानों पर हमले किए। इस दौरान हथियार डिपो और कमान केंद्रों को बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया गया। हमले सटीक थे और इनमें सऊदी नागरिकों समेत दर्जनों लोग हताहत हुए।&#8217;</p>



<p class="wp-block-paragraph">हूती लड़ाकों ने कहा है कि वे आगे भी सऊदी अरब की सैन्य टुकड़ियों को निशाना बनाना जारी रखेंगे। सऊदी अरब तनाव बढ़ाकर हमारे देश पर कब्जा करना चाहता है। इससे पहले भी हूति विद्रोहियों ने बाब अल मंदेब जलडमरूमध्य में एक वाणिज्यिक पोत पर मिसाइल हमला किया था। जिसमें कम से कम छह लोग मारे गए थे। यमन सरकार ने इस हमले के पीछे हूती विद्रोहियों को जिम्मेदार ठहराया था। </p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>यमन की सरकार ने हूतियों से हथियार डालने की अपील की</strong><br>इस बीच यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के अध्यक्ष रशाद अल अलीमी ने कहा है कि सरकार हूती विद्रोहियों की कार्रवाई का जवाब देगी। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि वे समूह से लड़ाई खत्म करने, हथियार डालने और देश की राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल होने का आह्वान भी करते हैं।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>यमन में युद्ध फिर भड़कने के कगार पर</strong><br>यमन का युद्ध फिर भड़कने के कगार पर है। हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का एलान कर दिया है। वहीं सऊदी अरब ने भी बीते दिनों यमन में हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर हमले किए थे।&nbsp;हूती विद्रोही ईरान समर्थित हैं और उनका सऊदी के साथ विवाद है। ताजा विवाद बीती 13 जुलाई को तब भड़का, जब कुछ हूती नेता ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा में शामिल होकर ईरान से यमन लौट रहे थे। लेकिन यमन की सऊदी समर्थित सरकार ने उन्हें राजधानी सना के एयरपोर्ट पर उतरने की इजाजत नहीं दी, जिससे दोनों पक्षों में फिर से तनातनी बढ़ गई है।&nbsp;</p>



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