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	<title>Nepal &#8211; RNSNS News</title>
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		<title>साल में 30 बार ही नेपाल में भारतीय वाहनों को एंट्री, निजी गाड़ियों के लिए व्यवस्था लागू, मालवाहक को छूट</title>
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		<pubDate>Sat, 09 May 2026 03:48:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Nepal]]></category>
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					<description><![CDATA[नेपाल में नई सरकार के गठन के साथ ही बॉर्डर पर सख्ती शुरू हो गई है। अब साल में 30 बार ही भारतीय वाहनों का प्रवेश होगा। 31वीं बार से भंसार के साथ जुर्माना भी लगेगा। क्यूआर कोड की व्यवस्था से आसानी से पहचान होगी। संदिग्ध गतिविधियों पर नियंत्रण के हवाले से सख्ती बढ़ी है। [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">नेपाल में नई सरकार के गठन के साथ ही बॉर्डर पर सख्ती शुरू हो गई है। अब साल में 30 बार ही भारतीय वाहनों का प्रवेश होगा। 31वीं बार से भंसार के साथ जुर्माना भी लगेगा। क्यूआर कोड की व्यवस्था से आसानी से पहचान होगी। संदिग्ध गतिविधियों पर नियंत्रण के हवाले से सख्ती बढ़ी है।<br><br>नेपाल में नई सरकार के गठन के साथ बॉर्डर पर सख्ती बढ़ती जा रही है। अब साल में सिर्फ 30 बार ही पर्यटक और निजी वाहनों को भंसार (सीमा शुल्क) अदा कर नेपाल में दाखिल होने की अनुमति होगी। इसके बाद भंसार के साथ ही जुर्माना भी भरना पड़ेगा। <br><br>नेपाल में एंट्री के लिए भंसार की क्यूआर कोड की सुविधा शुरू किए जाने के बाद नई व्यवस्था लागू कर दी गई है। क्यूआर कोड के जरिये नेपाल में प्रवेश करने वाले वाहनों का ब्योरा ऑनलाइन उपलब्ध होगा, इससे 30 बार के बाद जाने वाली गाड़ियों की पहचान आसानी से हो जाएगी।<br><br>नेपाल में बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली सरकारी के सत्ता में आने के बाद भारत-नेपाल सीमा पर विशेष निगरानी और नियम-कायदे के पालन पर जोर बढ़ गया है। पहले 100 रुपये से अधिक के भारतीय मूल्य के सामान ले जाने पर भंसार लागू किया गया। फिर बिना एमआरपी वाले सामान ले जाने पर प्रतिबंध लगाया गया।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-1"></h3>



<p class="wp-block-paragraph">अब नेपाल में प्रवेश करने वाले वाहनों की डिजिटल निगरानी बढ़ा दी गई है। इसमें क्यूआर कोड के जरिये भंसार की व्यवस्था से सुविधा दी गई है लेकिन एक साल में भारतीय वाहनों के 30 बार से ज्यादा भंसार की अनुमति पर रोक लगा दी गई है। 30 बार के बाद एंट्री पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। फिलहाल, माल वाहकों को इस नियम से छूट दी गई है।</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-2"></h3>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>नेपाल में 30 दिन ही रुक सकेंगे</strong><br>अब भंसार कराने के बाद भारतीय वाहन साल भर में टुकड़े-टुकड़े में या एक साथ 30 दिन ही नेपाल में रुक या रह सकते हैं। 30 दिन से अधिक समय होने पर बाइक पर दो हजार और चार पहिया वाहनों पर प्रतिदिन 2500 नेपाली रुपये जुर्माना देना होगा। रोजमर्रा की जरूरतों और रिश्तेदारी की वजह से दोनों देशों के तमाम लोगों की नियमित आवाजाही होती है।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-3"></h3>



<p class="wp-block-paragraph">सिद्धार्थनगर जिले में बढ़नी, खुनुवां और ककरहवा बॉर्डर और महराजगंज के सोनौली से गुजरने में भारतीय वाहनों को भंसार कराना पड़ता है। एक वर्ष में 30 बार ही भंसार की व्यवस्था ने सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है।</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-4"></h3>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>संदिग्ध गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए क्यूआर कोड से भंसार देने की सुविधा</strong><br>संदिग्ध गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए सख्ती बढ़ाने की बात कही जा रही है। नई व्यवस्था में क्यूआर कोड से भंसार अदा करना होगा। इससे नेपाल में प्रवेश करने वाले वाहनों का ब्योरा ऑनलाइन उपलब्ध होगा, इससे 30 बार के बाद जाने वाली गाड़ियों की पहचान आसानी से हो जाएगी।</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-5"></h3>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>जब्त की जा सकती है गाड़ी</strong><br>नेपाल सरकार ने महाशुल्क-2071 के तहत स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति के नेपाल की सड़कों पर वाहन चलाना गैर कानूनी है। पकड़े जाने पर जुर्माने के साथ वाहनों को जब्त भी किया जा सकता है। वर्तमान में दोपहिया वाहनों के लिए 100, तीन पहिया वाहनों के लिए 400 और कार-जीप या वैन जैसे चार पहिया वाहनों के लिए 600 नेपाली रुपये प्रतिदिन का शुल्क तय किया गया है।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-6"></h3>



<p class="wp-block-paragraph">पिछले कुछ दिनों में भारतीय गाड़ियों को बिना इजाजत नेपाल में घुसने के मामले बढ़ गए थे। इससे टैक्स की चोरी, सुरक्षा संबंधी खतरों के साथ ही तमाम गैरकानूनी गतिविधियां बढ़ने लगी थीं। इसलिए सरकार ने भंसार के नियमों को सख्ती से लागू किया है और कुछ प्रतिबंध भी लगाए हैं।<strong>&#8211; मयंक कुमार कर्ण, भंसार अधीक्षक कृष्णानगर</strong></p>
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		<title>नेपाल चुनाव में बड़ा उलटफेर: नई पार्टी RSP का जबरदस्त प्रदर्शन, दो पूर्व पीएम हारे; प्रचंड ही बचा पाए अपनी सीट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 09 Mar 2026 03:48:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नेपाल के आम चुनाव में नई पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए बड़ा उलटफेर भी किया। पीएम उम्मीदवार बालेंद्र शाह के नेतृत्व में आरएसपी 156 में से 120 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत की ओर तेजी से बढ़ रही है। हालांकि गौर करने वाली बात यह है कि इस चुनाव में तीन [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">नेपाल के आम चुनाव में नई पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए बड़ा उलटफेर भी किया। पीएम उम्मीदवार बालेंद्र शाह के नेतृत्व में आरएसपी 156 में से 120 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत की ओर तेजी से बढ़ रही है। हालांकि गौर करने वाली बात यह है कि इस चुनाव में तीन पूर्व प्रधानमंत्री उतरे थे, लेकिन केवल प्रंचड ही अपना सीट बचा सके।</p>



<p class="wp-block-paragraph">नेपाल में पांच मार्च को हुए आम चुनाव के नतीजों ने देश की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया है। इस चुनाव में पुरानी राजनीतिक पार्टियों को बड़ा झटका लगा है, जबकि नई पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है। घोषित नतीजों के अनुसार, आरएसपी ने अब तक घोषित 156 सीटों में से 120 सीटें जीत ली हैं और वह दो-तिहाई बहुमत की ओर बढ़ रही है। इस जीत को नेपाल की राजनीति में नई पीढ़ी के उभार के रूप में देखा जा रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">खास बात यह रही कि इस चुनाव में नेपाल के तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों ने हिस्सा लिया था, लेकिन उनमें से केवल पुष्प कमल दहल प्रचंड ही अपनी सीट जीतने में सफल रहे। उन्होंने रुकुम ईस्ट सीट से चुनाव जीता। प्रचंड हर चुनाव में अलग सीट से चुनाव लड़ने के लिए भी जाने जाते हैं। पहले वे रोल्पा, काठमांडू, सिराहा, चितवन और गोरखा जैसी सीटों से चुनाव लड़ चुके हैं। इस बार उन्होंने माओवादी प्रभाव वाले क्षेत्र रुकुम ईस्ट को चुना था।<br><br><strong>केपी ओली को मिली बड़ी हार</strong><br>इस चुनाव का सबसे बड़ा उलटफेर तब हुआ जब आरएसपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बालेंद्र शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी&nbsp;शर्मा ओली को भारी मतों से हरा दिया। कोशी प्रांत के झापा-5 सीट से हुए इस मुकाबले में 35 वर्षीय बालेन शाह को 68,348 वोट मिले, जबकि 74 वर्षीय ओली को केवल 18,734 वोट ही मिले। यह सीट लंबे समय से ओली का मजबूत गढ़ मानी जाती थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>माधव नेपाल भी हार गए</strong><br>इसके साथ ही&nbsp;एक अन्य पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल&nbsp;को भी हार का सामना करना पड़ा। उन्हें रौतहट-1 सीट पर आरएसपी&nbsp;के उम्मीदवार राजेश कुमार चौधरी ने हराया। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टाराई ने गोरखा-2 सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया था, लेकिन बाद में उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>अब समझिए&nbsp;क्यों कराए गए नेपाल में चुनाव?</strong><br>गौरतलब है कि नेपाल में यह चुनाव इसलिए कराए गए क्योंकि पिछले साल सितंबर में के. पी. शर्मा ओली ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसका कारण था कि&nbsp;उस समय युवाओं और जेन-जी&nbsp;समूहों ने भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध जैसे मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ दो दिन तक बड़े प्रदर्शन किए थे।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong><br>युवाओं के मुद्दों ने बदली राजनीति</strong><br>दूसरी तरफ इस चुनाव में ध्यान देने वाली बात यह रही कि चुनाव के दौरान युवाओं ने भ्रष्टाचार खत्म करने, अच्छी शासन व्यवस्था लाने, भाई-भतीजावाद खत्म करने और नई पीढ़ी को नेतृत्व देने जैसे मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया। विश्लेषकों का कहना है कि पुरानी पार्टियां इन मुद्दों पर जनता को भरोसा दिलाने में असफल रहीं। इसी कारण मतदाताओं ने नई पार्टी और नए नेताओं को मौका देने का फैसला किया। ऐसे में नेपाल की राजनीति में इस चुनाव को बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जहां दशकों से सत्ता में रहे कई दिग्गज नेताओं को जनता ने नकार दिया है।</p>
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