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	<title>Saudi Arabia &#8211; RNSNS News</title>
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		<title>26 साल की सबसे बड़ी कटौती, सऊदी अरब ने सस्ता किया कच्चा तेल; भारत को कितना होगा फायदा?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Jul 2026 04:39:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Saudi Arabia]]></category>
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					<description><![CDATA[सऊदी अरब ने अगस्त के लिए कच्चे तेल की कीमत में 26 साल की सबसे बड़ी कटौती कर दी है। इससे वैश्विक तेल बाजार में हलचल तेज हो गई है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह राहत की खबर मानी जा रही है। लेकिन आखिर सऊदी अरब ने इतना बड़ा फैसला क्यों [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">सऊदी अरब ने अगस्त के लिए कच्चे तेल की कीमत में 26 साल की सबसे बड़ी कटौती कर दी है। इससे वैश्विक तेल बाजार में हलचल तेज हो गई है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह राहत की खबर मानी जा रही है। लेकिन आखिर सऊदी अरब ने इतना बड़ा फैसला क्यों लिया? क्या इससे पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा और महंगाई पर कितना असर पड़ेगा? आइए, विस्तार से जानते हैं…</p>



<p class="wp-block-paragraph">दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक देशों में शामिल सऊदी अरब ने कच्चे तेल की कीमत में 26 वर्षों की सबसे बड़ी कटौती कर वैश्विक ऊर्जा बाजार को चौंका दिया है। अगस्त के लिए अरब लाइट क्रूड की कीमत में 11 डॉलर प्रति बैरल की कमी की गई है। इससे पहले जुलाई के लिए भी 6 डॉलर प्रति बैरल की कटौती की गई थी। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से सामान्य होने के बाद तेल की आपूर्ति बढ़ गई है और बाजार में प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है। इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा भारत जैसे देशों को मिल सकता है, जो अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सऊदी अरब ने एशियाई ग्राहकों के लिए अरब लाइट क्रूड की कीमत ओमान-दुबई बेंचमार्क से 1.50 डॉलर प्रति बैरल कम तय की है। वहीं ओपेक+ और उसके सहयोगी देशों, जिनमें रूस भी शामिल है, ने अगस्त से प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल अतिरिक्त उत्पादन बढ़ाने पर सहमति जताई है। इससे पहले जून और जुलाई में भी उत्पादन बढ़ाया गया था। बढ़ती आपूर्ति के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत घटकर लगभग 71.7 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। बाजार का मानना है कि अधिक आपूर्ति के चलते तेल की कीमतों पर दबाव बना रहेगा।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>सऊदी अरब ने इतनी बड़ी कटौती क्यों की?</strong></h2>



<ul class="wp-block-list">
<li>वैश्विक तेल बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।</li>



<li>फारस की खाड़ी के प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने उत्पादन बढ़ा दिया है।</li>



<li>होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की आवाजाही फिर सामान्य हो गई है।</li>



<li>सऊदी अरब का कच्चे तेल का निर्यात युद्ध-पूर्व स्तर के करीब पहुंच गया है।</li>



<li>संयुक्त अरब अमीरात ने भी तेल की आपूर्ति पूरी तरह बहाल कर दी है।</li>



<li>ओपेक+ देशों ने अगस्त से उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है।</li>



<li>अधिक आपूर्ति के कारण बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ा है।</li>



<li>एशियाई ग्राहकों को आकर्षित करने और बाजार हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए कीमतें घटाई गई हैं।</li>



<li>उद्देश्य दूसरे तेल उत्पादक देशों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बने रहना है।</li>
</ul>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>भारत को इससे क्या फायदा हो सकता है?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में कच्चा तेल सस्ता होने से भारतीय रिफाइनरियों की लागत घट सकती है। इससे पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस पर पड़ने वाला वित्तीय दबाव कम होगा। तेल विपणन कंपनियों को पिछले कुछ समय से बाजार मूल्य से कम कीमत पर ईंधन बेचने और एलपीजी पर नुकसान उठाना पड़ रहा था। अब सस्ता कच्चा तेल इन कंपनियों के नुकसान को कुछ हद तक कम कर सकता है। साथ ही सरकार पर एलपीजी सब्सिडी का बोझ भी घटने की संभावना है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>महंगाई और अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतें कम होने से परिवहन, बिजली उत्पादन और उद्योगों की लागत भी घट सकती है। इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ सकता है, क्योंकि ईंधन सस्ता होने से कई वस्तुओं की ढुलाई लागत कम होती है। इससे कंपनियों पर लागत का दबाव घटेगा और उपभोक्ताओं के लिए वस्तुओं की कीमतें स्थिर रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बदलाव सरकार, तेल कंपनियों और टैक्स नीति पर भी निर्भर करेगा।</p>
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		<title>ईरान का सऊदी अरब पर ताबड़तोड़ हमला: प्रिंस सुल्तान एयर बेस को बनाया निशाना, अमेरिका के पांच विमान क्षतिग्रस्त</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 14 Mar 2026 06:13:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Iran]]></category>
		<category><![CDATA[Saudi Arabia]]></category>
		<category><![CDATA[Israel-Iran War]]></category>
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					<description><![CDATA[पश्चिम एशिया में भड़की जंग अब और खतरनाक मोड़ लेती दिख रही है। दो हफ्तों से जारी इस संघर्ष के बीच ईरान ने अब सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर जोरदार वार कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने प्रिंस सुल्तान एयर बेस को निशाना बनाते हुए मिसाइल हमला किया, जिससे अमेरिकी वायुसेना [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">पश्चिम एशिया में भड़की जंग अब और खतरनाक मोड़ लेती दिख रही है। दो हफ्तों से जारी इस संघर्ष के बीच ईरान ने अब सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर जोरदार वार कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने प्रिंस सुल्तान एयर बेस को निशाना बनाते हुए मिसाइल हमला किया, जिससे अमेरिकी वायुसेना के पांच एयर-टैंकर विमान जमीन पर ही क्षतिग्रस्त हो गए।<br><br>पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष दिन-प्रतिदिन और भयावह होता जा रहा है। अमेरिका और इस्राइल के भीषण हमलों से दहक रहे मोर्चे पर ईरान भी जोरदार पलटवार कर रहा है। मिसाइलों और ड्रोन की गरज के बीच यह संघर्ष अब 15वें दिन में प्रवेश कर चुका है और पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है। इसी उग्र हालात के बीच सऊदी अरब से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि ईरान ने सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी एयरबेस पर ताबड़तोड़ हमला किया, जिसमें अमेरिकी वायुसेना के कई विमान क्षतिग्रस्त हो गए। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर मिसाइल हमला किया। इस हमले में अमेरिका के 5 एयर-टैंकर विमान जमीन पर खड़े-खड़े ही क्षतिग्रस्त हो गए।</p>



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