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	<title>USA &#8211; RNSNS News</title>
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	<title>USA &#8211; RNSNS News</title>
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		<title>अमेरिका: ग्रैंड कैन्यन में अचानक आई बाढ़, 15 लोग लापता; 62 को सुरक्षित निकाला, वीडियो में दिखी तबाही</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 31 Aug 2026 04:13:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[USA]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका के ग्रैंड कैन्यन नेशनल पार्क में तेज बारिश के बाद आई अचानक बाढ़ ने लोकप्रिय पर्यटन और पैदल यात्रा वाले इलाकों को प्रभावित किया है। ब्राइट एंजेल क्रीक में बढ़े पानी के साथ भारी मलबा बहने से कई पैदल पुल क्षतिग्रस्त हुए और इलाके का प्राकृतिक स्वरूप बदल गया। अधिकारियों के मुताबिक 20 से [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">अमेरिका के ग्रैंड कैन्यन नेशनल पार्क में तेज बारिश के बाद आई अचानक बाढ़ ने लोकप्रिय पर्यटन और पैदल यात्रा वाले इलाकों को प्रभावित किया है। ब्राइट एंजेल क्रीक में बढ़े पानी के साथ भारी मलबा बहने से कई पैदल पुल क्षतिग्रस्त हुए और इलाके का प्राकृतिक स्वरूप बदल गया। अधिकारियों के मुताबिक 20 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी है, जबकि फैंटम रैंच से 62 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।<br><br>अमेरिका के ग्रैंड कैन्यन नेशनल पार्क में अचानक आई बाढ़ के बाद करीब 15 लोगों के लापता होने की खबर है। अचानक आई बाढ़ ने ब्राइट एंजेल कैन्यन और फैंटम रैंच इलाके को प्रभावित किया। नेशनल पार्क सर्विस के अनुसार, बाढ़ अपने साथ बड़े पत्थर, धातु के ढांचे और अन्य मलबा बहाकर कोलोराडो नदी में ले गई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">नेशनल पार्क सर्विस ने बताया कि वह प्रभावित इलाके से लोगों को निकालने और वहां मौजूद लोगों का पता लगाने के लिए एरिजोना के अधिकारियों के साथ काम कर रही है। एजेंसी ने लापता लोगों या इलाके में मौजूद पैदल यात्रियों के बारे में किसी भी जानकारी की अपील की है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>बाढ़ ने बहाए कई पुल, इलाके का बदला नजारा</strong><br>शनिवार दोपहर करीब 2:30 बजे ब्राइट एंजेल क्रीक में अचानक बाढ़ शुरू हुई। यह नाला आगे जाकर कोलोराडो नदी में मिलता है। तेज बहाव ने नाले पर बने पैदल पुलों को बहा दिया और इलाके का स्वरूप काफी बदल गया।&nbsp;इलाके के वीडियो में नाले का तल पहले की तुलना में चौड़ा दिखाई दे रहा है। इसके अलावा वहां नदी के तेज बहाव वाला एक नया हिस्सा भी बनता नजर आ रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यूटा स्टेट यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर कोलोराडो रिवर स्टडीज के निदेशक जैक श्मिट ने कहा, &#8220;यह याद दिलाता है कि ग्रैंड कैन्यन कितना गतिशील और सक्रिय भू-दृश्य है।&#8221;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>एंजेल क्रीक में कैसे आई बाढ़?</strong><br>बाढ़ से बची एरिका वियोला ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि शनिवार दोपहर बारिश शुरू होने के समय वह ब्राइट एंजेल कैंपग्राउंड में थीं। उनके साथ करीब 50 अन्य पैदल यात्रियों ने नाले का जलस्तर बढ़ते देखा। इसके बाद मलबा बहना शुरू हो गया, जिसमें एक इमारत का हिस्सा भी नजर आया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने बताया कि समूह को हेलीकॉप्टर से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। इस वजह से उनका अभियान तय समय से दो दिन पहले ही खत्म हो गया।&nbsp;फ्लैगस्टाफ में राष्ट्रीय मौसम सेवा के मौसम विज्ञानी जस्टिन जॉन्ड्रो के अनुसार, चट्टानी इलाके में करीब 30 मिनट के भीतर आधा इंच से एक इंच तक बारिश हुई। इस इलाके में जमीन काफी ऊंचाई से नीचे की ओर जाती है।&nbsp;जॉन्ड्रो ने कहा, &#8220;इसका ज्यादातर पानी तुरंत बह गया।&#8221;</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने बताया कि बाढ़ ग्रैंड कैन्यन के उत्तरी हिस्से में आई, जहां ब्राइट एंजेल क्रीक नॉर्थ रिम से नीचे उतरकर कोलोराडो नदी में मिलती है। इस दौरान करीब 6,000 फीट यानी 1,828 मीटर की ऊंचाई का अंतर आता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>बाढ़ग्रस्त इलाके से सुरक्षित निकाले गए 62 लोग</strong><br>रविवार सुबह तक फैंटम रैंच से 62 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका था। फैंटम रैंच में ऐतिहासिक कैंटीन और रहने के लिए कमरे हैं। यह कोलोराडो नदी में राफ्टिंग करने वालों के लिए नदी में उतरने और बाहर निकलने की आम जगह भी है।&nbsp;नेशनल पार्क सर्विस ने बताया कि अन्य लोगों को भी वहां से निकालने की तैयारी थी। अभी तक किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">एजेंसी ने चेतावनी दी है कि सोमवार तक और गरज के साथ बारिश होने की संभावना है। इससे &#8220;अचानक बाढ़, मलबे का बहाव, चट्टानें गिरने और पगडंडियों तथा नदी की स्थिति में बदलाव&#8221; का खतरा बढ़ सकता है।&nbsp;रविवार को ब्राइट एंजेल कैंपग्राउंड, फैंटम रैंच और नॉर्थ कैबाब ट्रेल के कुछ हिस्से बंद रहे। पार्क अधिकारियों ने नुकसान का जायजा लेने का काम शुरू कर दिया है। कोलोराडो नदी में राफ्टिंग यात्राएं भी फिलहाल रोक दी गई हैं।</p>
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		<title>ट्रंप का &#8216;टैरिफ वार&#8217; जारी: चीन के खिलाफ नया प्लान, सस्ते सामान पर 7.5% कर संभव; कनाडा के लिए भी बढ़ी मुश्किल</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/trump-tariff-war-china-new-plan-7-5-percent-tariff-cheap-goods-canada-trade-war/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 25 Aug 2026 04:43:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[USA]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के सस्ते सामान पर नया 7.5% टैरिफ लगाने की तैयारी में हैं। वहीं, उन्होंने कनाडा से आने वाली कारों, ऑटो पार्ट्स और स्टील पर 2027 से 50% शुल्क लगाने का एलान किया है। इससे दोनों देशों के साथ अमेरिका का व्यापार तनाव बढ़ सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के सस्ते सामान पर नया 7.5% टैरिफ लगाने की तैयारी में हैं। वहीं, उन्होंने कनाडा से आने वाली कारों, ऑटो पार्ट्स और स्टील पर 2027 से 50% शुल्क लगाने का एलान किया है। इससे दोनों देशों के साथ अमेरिका का व्यापार तनाव बढ़ सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन पर नया टैरिफ लगाने की तैयारी में हैं। मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, यह कदम चीन पर वैश्विक बाजार में कम कीमत वाले सामान की बाढ़ लाने के आरोप के बाद उठाया जा रहा है। प्रस्तावित शुल्क 7.5 फीसदी हो सकता है, हालांकि अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बताया जा रहा है कि अमेरिकी प्रशासन ऐसा स्तर तय करना चाहता है जिससे अमेरिका और चीन के बीच चल रहा एक साल का व्यापारिक समझौता प्रभावित न हो। साथ ही सितंबर के अंत में ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच प्रस्तावित मुलाकात पर भी इसका असर न पड़े।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>चीन पर पहले से लगे शुल्क के ऊपर लगेगा नया टैरिफ?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">प्रस्तावित नया शुल्क चीन पर पहले से लागू टैरिफ के अतिरिक्त होगा। पिछले महीने अमेरिका ने दुनिया की करीब 60 अर्थव्यवस्थाओं से आने वाले सामान पर 10 से 12.5 फीसदी तक के शुल्क की घोषणा की थी। इन देशों पर जबरन मजदूरी से बने उत्पादों पर रोक को प्रभावी ढंग से लागू नहीं करने का आरोप लगाया गया था। चीन समेत कई देशों ने इस कदम का विरोध किया था।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>चीन के &#8216;ओवरकैपेसिटी&#8217;&nbsp;पर अमेरिका की नजर</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">ट्रंप प्रशासन ने मार्च में चीन समेत कई देशों की अतिरिक्त औद्योगिक क्षमता और जबरन मजदूरी से जुड़े नियमों को लेकर औपचारिक जांच शुरू की थी। चीन की जांच अमेरिकी व्यापार कानून की धारा 301 के तहत की जा रही है। अमेरिका का आरोप है कि चीन की कई इंडस्ट्रीज में जरूरत से ज्यादा उत्पादन क्षमता है, जिससे वैश्विक बाजार में कम कीमत वाले उत्पादों की आपूर्ति बढ़ रही है। ऑटोमोबाइल, सोलर पैनल, सीमेंट और स्टील जैसे क्षेत्रों में चीन की बड़ी उत्पादन क्षमता को लेकर उसके व्यापारिक साझेदार चिंता जता चुके हैं। चीन ने हालांकि ओवरकैपेसिटी के आरोपों को खारिज किया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>चीन का व्यापार सरप्लस रिकॉर्ड स्तर पर</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">चीन में घरेलू मांग धीमी होने के कारण कई कंपनियों ने विदेशी बाजारों का रुख किया है। इससे देश के निर्यात में बढ़ोतरी हुई और पिछले साल चीन का व्यापार अधिशेष करीब 1.2 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि चीन ने कभी बड़े व्यापार अधिशेष को अपना लक्ष्य नहीं बनाया।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>कनाडा पर भी ट्रंप ने बढ़ाया टैरिफ का दबाव</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">इस बीच ट्रंप ने कनाडा के खिलाफ भी टैरिफ बढ़ाने का एलान किया है। उन्होंने कहा कि 1 जनवरी 2027 से कनाडा से आने वाली कारों, ट्रकों, ऑटो पार्ट्स और स्टील पर शुल्क बढ़ाकर 50 फीसदी किया जाएगा। ट्रंप ने कनाडा पर अमेरिकी कृषि उत्पादों पर ऊंचे शुल्क लगाने और अमेरिका के साथ अनुचित व्यापार करने का आरोप लगाया। उन्होंने कंपनियों को अमेरिका में उत्पादन शुरू करने पर टैरिफ से छूट देने की बात भी कही। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि कनाडा के साथ मौजूदा व्यापार संबंध टिकाऊ नहीं हैं और अब वॉशिंगटन उसे पहले जैसी तरजीह नहीं देगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>कनाडा आज लगाएगा जवाबी टैरिफ</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">कनाडा मंगलवार को अमेरिका के खिलाफ जवाबी टैरिफ का एलान करेगा। मामले से जुड़े एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है। इससे दोनों देशों के बीच पहले से चल रहा व्यापार विवाद और गहराने की आशंका है। यह कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच व्यापार वार्ता टूटने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव तेजी से बढ़ा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>कार्नी बोले- अमेरिका की शर्तें स्वीकार नहीं</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">कार्नी ने अमेरिका पर कनाडा को अपने अधीन करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान अमेरिका की व्यापार संबंधी मांगों से कनाडा की यह आशंका मजबूत हुई कि वॉशिंगटन देश के प्रमुख उद्योगों को कमजोर करना चाहता है। उन्होंने ऑटोमोबाइल, स्टील और एल्युमिनियम जैसे क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि कनाडा ऐसी स्थिति को स्वीकार नहीं करेगा, जिसमें उसे अमेरिका की सहायक इकाई की तरह देखा जाए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन पर नया टैरिफ लगाने की तैयारी में हैं। मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, यह कदम चीन पर वैश्विक बाजार में कम कीमत वाले सामान की बाढ़ लाने के आरोप के बाद उठाया जा रहा है। प्रस्तावित शुल्क 7.5 फीसदी हो सकता है, हालांकि अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी प्रशासन ऐसा स्तर तय करना चाहता है जिससे अमेरिका और चीन के बीच चल रहा एक साल का व्यापारिक समझौता प्रभावित न हो। साथ ही सितंबर के अंत में ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच प्रस्तावित मुलाकात पर भी इसका असर न पड़े। चीन पर पहले से लगे शुल्क के ऊपर लगेगा नया टैरिफ? प्रस्तावित नया शुल्क चीन पर पहले से लागू टैरिफ के अतिरिक्त होगा। </p>



<p class="wp-block-paragraph">पिछले महीने अमेरिका ने दुनिया की करीब 60 अर्थव्यवस्थाओं से आने वाले सामान पर 10 से 12.5 फीसदी तक के शुल्क की घोषणा की थी। इन देशों पर जबरन मजदूरी से बने उत्पादों पर रोक को प्रभावी ढंग से लागू नहीं करने का आरोप लगाया गया था। चीन समेत कई देशों ने इस कदम का विरोध किया था। चीन के ‘ओवरकैपेसिटी’ पर अमेरिका की नजर ट्रंप प्रशासन ने मार्च में चीन समेत कई देशों की अतिरिक्त औद्योगिक क्षमता और जबरन मजदूरी से जुड़े नियमों को लेकर औपचारिक जांच शुरू की थी। चीन की जांच अमेरिकी व्यापार कानून की धारा 301 के तहत की जा रही है। अमेरिका का आरोप है कि चीन की कई इंडस्ट्रीज में जरूरत से ज्यादा उत्पादन क्षमता है, जिससे वैश्विक बाजार में कम कीमत वाले उत्पादों की आपूर्ति बढ़ रही है। </p>



<p class="wp-block-paragraph">ऑटोमोबाइल, सोलर पैनल, सीमेंट और स्टील जैसे क्षेत्रों में चीन की बड़ी उत्पादन क्षमता को लेकर उसके व्यापारिक साझेदार चिंता जता चुके हैं। चीन ने हालांकि ओवरकैपेसिटी के आरोपों को खारिज किया है। चीन का व्यापार सरप्लस रिकॉर्ड स्तर पर चीन में घरेलू मांग धीमी होने के कारण कई कंपनियों ने विदेशी बाजारों का रुख किया है। इससे देश के निर्यात में बढ़ोतरी हुई और पिछले साल चीन का व्यापार अधिशेष करीब 1.2 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि चीन ने कभी बड़े व्यापार अधिशेष को अपना लक्ष्य नहीं बनाया। कनाडा पर भी ट्रंप ने बढ़ाया टैरिफ का दबाव इस बीच ट्रंप ने कनाडा के खिलाफ भी टैरिफ बढ़ाने का ऐलान किया है। </p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने कहा कि 1 जनवरी 2027 से कनाडा से आने वाली कारों, ट्रकों, ऑटो पार्ट्स और स्टील पर शुल्क बढ़ाकर 50 फीसदी किया जाएगा। ट्रंप ने कनाडा पर अमेरिकी कृषि उत्पादों पर ऊंचे शुल्क लगाने और अमेरिका के साथ अनुचित व्यापार करने का आरोप लगाया। उन्होंने कंपनियों को अमेरिका में उत्पादन शुरू करने पर टैरिफ से छूट देने की बात भी कही। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि कनाडा के साथ मौजूदा व्यापार संबंध टिकाऊ नहीं हैं और अब वॉशिंगटन उसे पहले जैसी तरजीह नहीं देगा।</p>
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		<title>&#8216;ईरान पर होगी सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई&#8217;: ट्रंप ने दी धमकी, मदद करने वाले देशों को चेताया; क्या बढ़ेगा तनाव?</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/iran-to-face-largest-economic-action-trump-warns-countries-helping-iran-tensions-to-escalate/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 20 Aug 2026 03:37:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[USA]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त आर्थिक कार्रवाई की धमकी दी। उन्होंने कहा कि ईरान को अमेरिका के साथ समझौता करने का सबसे बड़ा मौका दिया गया था। लेकिन उसने इसे गंवा दिया। ट्रंप ने कहा, इस्लामी गणराज्य ईरान को किसी समझौते के लिए मुझसे ज्यादा बड़ा मौका [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त आर्थिक कार्रवाई की धमकी दी। उन्होंने कहा कि ईरान को अमेरिका के साथ समझौता करने का सबसे बड़ा मौका दिया गया था। लेकिन उसने इसे गंवा दिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ट्रंप ने कहा, इस्लामी गणराज्य ईरान को किसी समझौते के लिए मुझसे ज्यादा बड़ा मौका किसी ने नहीं दिया। दुख की बात है कि उन्होंने इस मौके का फायदा नहीं उठाया। इसलिए आज मैं किसी भी देश के खिलाफ अब तक की सबसे कड़ी आर्थिक कार्रवाई की घोषणा कर रहा हूं। उन्होंने दावा किया कि ईरान की नौसेना खत्म हो चुकी है। उसकी वायुसेना नष्ट हो गई है। उसकी सैन्य फैक्ट्रियां मलबे में बदल गई हैं। ईरान की मुद्रा बेकार हो गई है और देश बेहद कमजोर स्थिति में है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ईरान की मदद करने वाले देशों पर भी कार्रवाई?</strong><br>ट्रंप ने कहा कि जो भी देश ईरान को किसी भी तरह की आर्थिक मदद देगा, उसे भी बड़े आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ेगा। इसमें वित्तीय संस्थान, कारोबार, हवाई अड्डे और सरकारी संस्थाएं शामिल हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने तेल की तस्करी, स्वैप लाइन, नकद लेनदेन, एक्सचेंज हाउस, जहाजों के पंजीकरण और ईरान की मदद करने वाली छिपी हुई (शेल) कंपनियों को तुरंत रोकने की बात कही। </p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सहयोगी देशों से अमेरिका के साथ आने की अपील</strong><br>ट्रंप ने इसे ईरान के खिलाफ बड़े आर्थिक हमले का दिन बताया। उन्होंने अमेरिका के सहयोगी देशों से ईरान को अलग-थलग करने और उसके खतरे को खत्म करने में साथ देने की अपील की।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने कहा कि ईरान इस समय बेहद कमजोर स्थिति में है। उन्होंने दावा किया कि ये ऐतिहासिक कदम ईरान को और दुनियाभर में आतंक फैलाने की उसकी क्षमता को बुरी तरह कमजोर कर देंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाया</strong><br>अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के पिछले हफ्ते इसी तरह बयान दिया था। बेसेंट ने कहा था कि अमेरिका ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की कोशिशें बढ़ाएगा। इस रणनीति में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी भी शामिल है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><br><br></p>
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		<title>ट्रंप को मिली ताकत: रूस-ईरान से तेल खरीद पर भारत पर 100% टैरिफ का खतरा, क्या है US के सांसदों की नई रणनीति?</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/trump-100-percent-tariff-threat-india-russia-iran-oil-us-lawmakers-new-strategy/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 03:50:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[USA]]></category>
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					<description><![CDATA[कई देशों पर टैरिफ लगाने को लेकर अपने दूसरे कार्यकाल में लगातार चर्चा में रहे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर सुर्खियों में हैं। दरअसल, सीनेट से पारित एक विधेयक के बाद ट्रंप को नई ताकत मिलने का अनुमान है। अगर अमेरिकी संसद के दूसरे सदन- कांग्रेस से भी इस बिल को मंजूरी मिल जाती है तो [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">कई देशों पर टैरिफ लगाने को लेकर अपने दूसरे कार्यकाल में लगातार चर्चा में रहे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर सुर्खियों में हैं। दरअसल, सीनेट से पारित एक विधेयक के बाद ट्रंप को नई ताकत मिलने का अनुमान है। अगर अमेरिकी संसद के दूसरे सदन- कांग्रेस से भी इस बिल को मंजूरी मिल जाती है तो अमेरिका रूस-ईरान से तेल खरीद पर भारत पर 100% टैरिफ लगा सकता है। खास बात है कि इस विधेयक पर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट खेमा एकमत दिखा। क्या है US के सांसदों की नई रणनीति? जानिए इस खबर में<br><br>अमेरिकी सीनेट ने रूस और ईरान से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 टैरिफ लगाने का अमेरिकी राष्ट्रपति को अधिकार देने वाला बिल शुक्रवार को पास कर दिया। सीनेट ने बिल पर 11 के मुकाबले 86 मतों से मुहर लगाई। अब इसे अमेरिकी हाउस (कांग्रेस) में पेश किया जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद ट्रंप को भारत, चीन जैसे देशों के खिलाफ&nbsp;<strong>100 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार</strong>&nbsp;मिल जाएगा। कानून बनने के बाद इसके तहत रूसी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>क्या है ऐसे विधेयक का मकसद, क्या बदलेंगे भू-राजनीतिक समीकरण?</strong><br>खास बात यह है कि इस बिल को रिपब्लिकन व डेमोक्रेट दोनों पार्टियों का समर्थन मिला। इसका मकसद मॉस्को व तेहरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। साथ ही, यह उन देशों को भी निशाना बनाता है, जो तेल-गैस खरीद के जरिये रूस के युद्ध प्रयासों को आर्थिक मदद जारी रखे हुए हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सीनेट से पारित विधेयक कितना असरदार?</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>रूसी सरकार के शीर्ष अधिकारियों पर अनिवार्य प्रतिबंध लगाए जाएंगे। इनमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी शामिल हैं।</li>



<li>रूसी वित्तीय संस्थानों और रूसी ऊर्जा परियोजनाओं पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी।</li>



<li>रूसी कुलीन वर्ग, सरकारी उद्यम और रूस के रक्षा उद्योग का समर्थन करने वाली विदेशी कंपनियां भी दायरे में होंगी।</li>



<li>रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों पर 100 फीसदी तक का शुल्क लगाएगा। इन देशों में चीन और भारत भी शामिल हैं।</li>
</ul>



<ul class="wp-block-list">
<li>शुल्क का स्तर अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर तय करेंगे।</li>



<li>विधेयक में राष्ट्रपति के लिए छूट देने का अधिकार भी शामिल, इसके तहत व्हाइट हाउस के पास प्रतिबंधों या पाबंदियों को माफ करने का अधिकार।</li>



<li>माफी के लिए राष्ट्रपति को कांग्रेस में प्रमाणित करना होगा कि छूट राष्ट्रीय हित में है।</li>



<li>उन देशों को छूट मिलेगी जो रूस के कुल प्राकृतिक गैस निर्यात का 15 फीसदी से कम आयात करते हैं। उन्हें भी छूट मिलेगी जो देश जो रूसी प्राकृतिक गैस के उपयोग को कम करने के लिए काम कर रहे हैं।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>क्यों खास है ग्राहम के नाम से जुड़ा विधेयक, निधन के बाद सफलता!</strong><br>बिल का नाम दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के सम्मान में रखा गया है, जो इस कानून को बनाने वाले मुख्य लोगों में से एक थे। बिल को सबसे पहले एक अप्रैल 2025 को पेश किया गया था। जुलाई के दूसरे सप्ताह में ग्राहम का 71 साल की आयु में निधन हो गया। अब इसे उनके संघर्ष की जीत की तरह भी पेश किया जा रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ट्रंप ने शुरुआत में किया था विरोध, अब क्या करेंगे?</strong><br>सीनेट के रिपब्लिकन नेताओं ने इस बिल को वोटिंग के लिए पेश नहीं किया था क्योंकि ट्रंप ने शुरू में इसका विरोध किया था। ट्रंप ने जनवरी, 2025 में अपना दूसरा कार्यकाल शुरू होने के बाद से ही प्रतिबंधों से जुड़े फैसले कांग्रेस के बजाय व्हाइट हाउस में बैठकर किए थे।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>कांग्रेस से मंजूरी की राह आसान नहीं&#8230;कुछ सांसद विरोध में </strong><br>रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने के लिए बड़े पैमाने पर समर्थन होने के बावजूद, हो सकता है कि इसे हाउस से मंजूरी न मिल पाए। कुछ सांसदों को चिंता है कि ट्रंप को टैरिफ से जुड़े नए अधिकार मिलने से अमेरिकी आयातकों और ग्राहकों के लिए लागत बढ़ सकती है, साथ ही रिपब्लिकन पार्टी को राजनीतिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। न्यूयॉर्क के ग्रेगरी मीक्स और वर्जीनिया के डॉन बेयर ने एक बयान में कहा, मुझे ट्रंप को टैरिफ से जुड़े अधिकार देने को लेकर अब भी बुनियादी चिंताएं हैं। ट्रंप ने इन अधिकारों को विदेश नीति के अपने अमेरिका फर्स्ट नजरिए का अहम हिस्सा बनाया है।</p>
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		<title>&#8216;समझौता या पूरी तरह आत्मसमर्पण&#8217;, ट्रंप ने ईरान को फिर दी चेतावनी; होर्मुज पर क्या दावा किया?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 04:31:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[USA]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर सख्त बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक समझौता या पूरी तरह आत्मसमर्पण नहीं होता, तब तक ईरान तक कुछ भी नहीं पहुंचेगा। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी बड़ा दावा किया और कहा कि उस पर अमेरिकी नौसेना का नियंत्रण है। ट्रंप [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><em>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर सख्त बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक समझौता या पूरी तरह आत्मसमर्पण नहीं होता, तब तक ईरान तक कुछ भी नहीं पहुंचेगा। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी बड़ा दावा किया और कहा कि उस पर अमेरिकी नौसेना का नियंत्रण है। <strong>ट्रंप ने यह चेतावनी किस संदर्भ में दी? इसका क्या मतलब है?</strong></em></p>



<p class="wp-block-paragraph">अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में ईरानी नेतृत्व पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। ट्रंप ने कहा कि ईरान एक तरफ बातचीत के लिए बैठक की मांग करता है, जबकि दूसरी ओर सार्वजनिक रूप से किसी भी तरह की बातचीत से इनकार करता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक कोई समझौता नहीं होता या ईरान पूरी तरह आत्मसमर्पण नहीं करता, तब तक वहां कुछ भी नहीं पहुंच पाएगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ट्रंप ने अपनी पोस्ट में कहा कि ईरान दावा करता है कि वह केवल ओमान के साथ बातचीत कर रहा है, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। उन्होंने कहा कि ईरान लगातार ऐसे बयान दे रहा है, जिनका वास्तविक स्थिति से कोई मेल नहीं है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका लंबे समय से उस समस्या का समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है, जिसे ईरान ने दशकों से पैदा किया है। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका का रुख स्पष्ट है और ईरान को कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>होर्मुज को लेकर ट्रंप ने क्या दावा किया?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">ट्रंप ने अपनी पोस्ट में होर्मुज जलडमरूमध्य का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ईरान यह दावा करता है कि होर्मुज पर उसका मजबूत नियंत्रण है, जबकि वास्तव में वहां अमेरिकी नौसेना का नियंत्रण है। ट्रंप ने इसे अमेरिका की &#8216;स्टील वॉल&#8217; और नाकाबंदी बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका की अनुमति के बिना ईरान तक कुछ भी नहीं पहुंच सकता और जब तक कोई समझौता या पूरी तरह आत्मसमर्पण नहीं होता, तब तक यह स्थिति बनी रहेगी।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>ईरान के साथ बातचीत पर क्या बोले ट्रंप?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरानी नेतृत्व पहले बातचीत की इच्छा जताता है और बैठक की मांग करता है, लेकिन बाद में सार्वजनिक रूप से कहता है कि कोई बातचीत नहीं हो रही। ट्रंप ने इस रवैये को अविश्वसनीय और दोहरा बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका समाधान की दिशा में बात कर रहा है, लेकिन ईरान का व्यवहार भरोसेमंद नहीं है। उनके मुताबिक, यह पूरा मुद्दा वर्षों से चला आ रहा है और इसका स्थायी समाधान जरूरी है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका का क्या रुख?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">ट्रंप ने अपनी पोस्ट के अंत में एक बार फिर दोहराया कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर अमेरिका का रुख बिल्कुल साफ है और इसमें किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और पश्चिम एशिया की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चर्चा जारी है।</p>
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		<title>अमेरिका ने फिर फोड़ा टैरिफ बम: भारत समेत 17 देशों पर लगाया 10 फीसदी शुल्क, क्या पाकिस्तान का नाम भी है शामिल?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 Jul 2026 04:05:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[USA]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका ने जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर सख्ती करते हुए भारत सहित 17 देशों से आने वाले सामान पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा की है। यह फैसला अमेरिकी व्यापार कानून के तहत की गई समीक्षा के बाद लिया गया। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इसका उद्देश्य मानवाधिकारों की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">अमेरिका ने जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर सख्ती करते हुए भारत सहित 17 देशों से आने वाले सामान पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा की है। यह फैसला अमेरिकी व्यापार कानून के तहत की गई समीक्षा के बाद लिया गया। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इसका उद्देश्य मानवाधिकारों की रक्षा और वैश्विक व्यापार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना है।<br><br>अमेरिका ने जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर कार्रवाई करते हुए भारत सहित 17 देशों से आयातित वस्तुओं पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जैमीसन ग्रीर ने शुक्रवार को 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत 60 देशों पर नए शुल्क की घोषणा की। यह फैसला सभी देशों पर लगाए गए अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क की अवधि समाप्त होने से एक दिन पहले लिया गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यूएसटीआर के बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर जैमीसन ग्रीर ने उन 60 अर्थव्यवस्थाओं पर अंतिम कार्रवाई की है, जिन्होंने जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर प्रभावी रोक लगाने और उसे लागू करने में विफलता दिखाई है। ग्रीर ने कहा, &#8220;यह कदम मानवाधिकारों के उल्लंघन और व्यापार में पैदा हुई विकृतियों को दूर करने की दिशा में है, ताकि दुनिया भर के श्रमिकों के हितों की रक्षा की जा सके।&#8221;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सूची में शामिल कौन-कौन से देश?</strong><br>10 प्रतिशत शुल्क भारत, कनाडा, ब्रिटेन, बांग्लादेश और पाकिस्तान समेत 17 देशों पर लागू होगा। इससे पहले प्रस्तावित सूची में भारत को 12.5 प्रतिशत शुल्क वाले देशों की श्रेणी में रखा गया था। इस संबंध में जारी संघीय नोट में कहा गया कि जून में प्रस्तावित शुल्क की घोषणा के बाद भारत ने जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर रोक लगाने का फैसला किया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">14 जून को भारत ने अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर जबरन श्रम से तैयार वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। ट्रंप प्रशासन ने ये दोनों जांच उस समय शुरू की थीं, जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में पिछले वर्ष लगाए गए &#8220;पारस्परिक शुल्क (रिसिप्रोकल टैरिफ)&#8221; को आपातकालीन शक्तियों के तहत अवैध करार दिया था। इसके बाद प्रशासन ने सभी देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाया था, जिसकी अवधि शुक्रवार को समाप्त हो रही है।<br></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>भारत ने जताई आपत्ति</strong><br>भारत ने यूएसटीआर की दोनों जांचों पर आपत्ति जताई है और कहा है कि इन मुद्दों पर दोनों देशों के बीच चल रही द्विपक्षीय व्यापार समझौता वार्ता के दौरान चर्चा की जा सकती है। अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और भारतीय निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है। वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 141 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 87.3 अरब अमेरिकी डॉलर का था।</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>ट्रंप के नए टैरिफ से बढ़ा अमेरिका-कनाडा तनाव, 30 दिन बाद लागू होंगे 50% आयात शुल्क</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Jul 2026 04:20:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[USA]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के सामानों पर 50 फीसदी सीमा शुल्क लगा दिया है। ट्रंप ने कनाडा पर अमेरिकी कारों, शराब और डेयरी उत्पादों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया। इस फैसले से दोनों देशों के बीच आर्थिक तनाव बढ़ने की आशंका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कनाडा के ज्यादातर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के सामानों पर 50 फीसदी सीमा शुल्क लगा दिया है। ट्रंप ने कनाडा पर अमेरिकी कारों, शराब और डेयरी उत्पादों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया। इस फैसले से दोनों देशों के बीच आर्थिक तनाव बढ़ने की आशंका है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कनाडा के ज्यादातर सामानों पर 50 फीसदी सीमा शुल्क (टैरिफ) लगा दिया है। ट्रंप का कहना है कि कनाडा अमेरिकी कारों, शराब और डेयरी उत्पादों के साथ गलत तरीके से भेदभाव करता है। इस फैसले से दोनों देशों के बीच आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। इससे महंगाई बढ़ सकती है और दोनों देशों के आपसी रिश्ते भी खराब हो सकते हैं। अमेरिकी प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि चीन के अलावा कनाडा ही ऐसा देश था जिसने ट्रंप के पिछले शुल्कों का जवाब दिया था। इसलिए उसे जिम्मेदार ठहराना जरूरी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>कानून और प्रभावित होने वाले सामान</strong><br>अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ट्रंप ने 1930 के व्यापार अधिनियम की धारा 338 के तहत तीन घोषणाओं पर हस्ताक्षर किए हैं। पिछले साल कुछ डेमोक्रेटिक सांसदों ने इस धारा को खत्म करने की मांग की थी क्योंकि उन्हें डर था कि ट्रंप इसका इस्तेमाल अर्थव्यवस्था को अस्थिर करने के लिए कर सकते हैं। इस 50 फीसदी शुल्क से ऊर्जा उत्पाद, पोटाश, मछली और जरूरी खनिजों को बाहर रखा गया है। लेकिन इसमें वे सामान शामिल होंगे जिन्हें पहले कनाडा-अमेरिका-मैक्सिको समझौते (USMCA) के तहत सुरक्षा मिली हुई थी। अमेरिका ने इस समझौते को आगे नहीं बढ़ाया है, जिससे बातचीत का एक नया दौर शुरू हुआ जो 2036 तक चल सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>30 दिनों में लागू होगा नियम</strong><br>व्हाइट हाउस के अनुसार, यह शुल्क 30 दिनों में लागू हो जाएगा। इसमें वाइन, हॉकी स्टिक से लेकर सीमेंट तक के उत्पाद शामिल होंगे। अधिकारी ने यह भी बताया कि ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कनाडा पर और शुल्क लगाने की संभावना तलाशने को कहा है, क्योंकि कनाडा के जंगलों की आग से अमेरिका की हवा खराब होती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ट्रंप और कनाडाई पीएम के बीच तनाव</strong><br>रविवार को वर्ल्ड कप फाइनल के दौरान ट्रंप ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ मैच देखा था। हालांकि, अधिकारियों ने साफ किया कि यह व्यापार पर चर्चा के लिए कोई आधिकारिक बैठक नहीं थी। कार्नी ने हमेशा ट्रंप को चुनौती दी है और वे दूसरे देशों के साथ कनाडा के व्यापार को बढ़ाना चाहते हैं। दोनों नेताओं के बीच रिश्ते काफी सामान्य रहे हैं। कार्नी ने पिछले साल कनाडा के हितों की रक्षा करने के वादे के साथ सत्ता संभाली थी। जनवरी में दावोस में कार्नी ने कहा था कि ताकतवर देश छोटे देशों को दबाने के लिए अर्थव्यवस्था का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस पर ट्रंप ने कहा था कि कनाडा अमेरिका की वजह से जिंदा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>विवाद के मुख्य कारण</strong><br>ट्रंप का आरोप है कि कनाडा अमेरिकी कारों, शराब और पनीर के साथ भेदभाव करता है। दरअसल, कनाडा ने यह कदम तब उठाया था जब ट्रंप ने फेंटानिल तस्करी रोकने के बहाने कनाडा पर शुल्क लगाए थे। कनाडा ने अप्रैल 2025 से उन अमेरिकी वाहनों पर 25 फीसदी शुल्क लगाया जो समझौते के दायरे में नहीं आते। शराब के मामले में, पिछले साल कनाडा के दो प्रांतों को छोड़कर बाकी सभी ने अमेरिकी शराब की खरीद बंद कर दी थी। यह ट्रंप के शुल्कों और कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने के उनके मजाक का जवाब था। इसके अलावा, ट्रंप लंबे समय से कनाडाई पनीर नीति का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि कनाडा यूरोप के मुकाबले अमेरिकी डेयरी उत्पादों के साथ भेदभाव करता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ट्रंप के कड़े फैसले पर कनाडाई पीएम मार्क कार्नी ने क्या कहा?</strong><br>वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 50 फीसदी सीमा शुल्क लगाने के फैसले पर कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि अमेरिका का यह कदम दोनों देशों के बीच हुए कनाडा-अमेरिका-मैक्सिको समझौते (CUSMA) का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने पहले कनाडाई ऑटो क्षेत्र पर शुल्क लगाकर समझौते को तोड़ा था। कनाडा ने अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए केवल उन कदमों का मुकाबला किया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मार्क कार्नी बोले-&nbsp;मिलकर काम करने को तैयार है</strong><br>कनाडाई प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की संप्रभुता और अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए पूरा कनाडा एकजुट है। सरकार अपने श्रमिकों, किसानों, व्यवसायों और परिवारों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी। उन्होंने बताया कि कनाडा ने इस विवाद को सुलझाने और समझौते को आधुनिक बनाने के लिए पिछले 18 महीनों में कई विस्तृत प्रस्ताव दिए हैं। कनाडा आने वाले हफ्तों में इस चर्चा को और तेज करने के लिए तैयार है। कार्नी ने जोर देकर कहा कि कनाडा मुक्त और निष्पक्ष व्यापार में विश्वास रखता है। उनकी नई सरकार ने 20 से अधिक नए आर्थिक और सुरक्षा समझौते किए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इस व्यापार विवाद से परिवारों का खर्च बढ़ा है, खासकर अमेरिका में। उसके साथ ही उन्होंने कहा, कनाडा आपसी फायदे के लिए अमेरिका के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।</p>
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		<title>ट्रंप प्रशासन ने बदले वीजा नियम: भारतीय छात्रों पर पड़ेगा क्या असर? चीनी नागरिकों को भी दिया बड़ा झटका</title>
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		<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 04:05:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[USA]]></category>
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					<description><![CDATA[ट्रंप प्रशासन ने विदेशी छात्रों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों में शामिल लोगों और विदेशी पत्रकारों के लिए अमेरिकी वीजा नियमों को और सख्त करने का फैसला किया है। नए प्रावधानों के तहत इन श्रेणियों के वीजा अब निर्धारित अवधि के लिए ही मान्य होंगे और जरूरत पड़ने पर अवधि बढ़ाने के लिए अलग से अनुमति लेनी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">ट्रंप प्रशासन ने विदेशी छात्रों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों में शामिल लोगों और विदेशी पत्रकारों के लिए अमेरिकी वीजा नियमों को और सख्त करने का फैसला किया है। नए प्रावधानों के तहत इन श्रेणियों के वीजा अब निर्धारित अवधि के लिए ही मान्य होंगे और जरूरत पड़ने पर अवधि बढ़ाने के लिए अलग से अनुमति लेनी होगी। छात्रों के लिए संस्थान बदलने और पढ़ाई पूरी होने के बाद अमेरिका में रुकने के नियम भी कड़े किए गए हैं।<br><br>ट्रंप प्रशासन ने विदेशी छात्रों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों के तहत आने वाले लोगों और विदेशी पत्रकारों के लिए वीजा नियमों को और सख्त करने का फैसला किया है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) की ओर से जारी अंतिम नियम के तहत अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए एफ वीजा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों के तहत अमेरिका में काम करने की अनुमति देने वाले जे वीजा और मीडिया कर्मियों के लिए आई वीजा की अब एक तय अवधि होगी। अभी तक ये वीजा संबंधित कार्यक्रम या अमेरिका में रोजगार की अवधि तक वैध रहते थे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यह नियम संघीय रजिस्टर में प्रकाशित होने के 60 दिन बाद लागू होगा। हालांकि, इसे लागू होने से पहले अमेरिकी कांग्रेस की समीक्षा प्रक्रिया से गुजरना होगा। जनवरी 2025 में पदभार संभालने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अवैध और कानूनी दोनों तरह के आव्रजन पर सख्ती बढ़ाई है। उनके प्रशासन ने विदेशी छात्रों के वीजा और ग्रीन कार्ड रद्द किए हैं। साथ ही वैचारिक विचारों के आधार पर विश्वविद्यालयों के कुछ छात्रों पर कार्रवाई की है। इसके अलावा, लाखों प्रवासियों का कानूनी दर्जा भी समाप्त किया गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>भारतीय छात्रों पर पड़ेगा क्या असर?</strong><br>नए नियमों के तहत छात्र (जिनमें भारतीय भी शामिल हैं) और एक्सचेंज वीजा की अवधि अधिकतम चार वर्ष होगी। वहीं, विदेशी पत्रकारों के लिए आई वीजा, जो अभी कई वर्षों तक वैध रह सकता है, अब अधिकतम 240 दिनों के लिए दिया जाएगा। चीनी नागरिकों के मामले में इसकी अधिकतम अवधि 90 दिन होगी। हालांकि, वीजा धारकों को अवधि बढ़ाने के लिए आवेदन करने की अनुमति होगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अगस्त में चीन के विदेश मंत्रालय ने चीनी पत्रकारों के लिए प्रस्तावित नए नियमों का विरोध करते हुए उन्हें भेदभावपूर्ण बताया था। गुरुवार को इस संबंध में चीनी दूतावास की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>छात्रों पर लगे क्या नए प्रतिबंध?</strong><br>नए नियमों के अनुसार, स्नातकोत्तर (ग्रेजुएट) छात्रों को बिना अनुमति अपने शैक्षणिक उद्देश्य बदलने या किसी अन्य संस्थान में स्थानांतरण की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा, पढ़ाई या प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अमेरिका छोड़ने के लिए मिलने वाली अवधि 60 दिन से घटाकर 30 दिन कर दी जाएगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग के पूर्व अधिकारी डग रैंड ने कहा, &#8220;ज्यादातर अमेरिकी समझते हैं कि अंतरराष्ट्रीय छात्रों का स्वागत करना और अनावश्यक लालफीताशाही को खत्म करना कितना महत्वपूर्ण है। यह नियम ठीक इसका उल्टा करेगा।&#8221; कैटो इंस्टीट्यूट में आव्रजन अध्ययन के निदेशक डेविड जे. बियर ने कहा कि नए नियमों में पढ़ाई और संस्थान बदलने पर लगाए गए प्रतिबंधों का कोई कानूनी आधार नहीं है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>डीएचएस ने बताया क्यों बदले नियम?</strong><br>डीएचएस ने कहा कि हाल के वर्षों में इन वीजा की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। विभाग के अनुसार, वर्ष 2024 में 18 लाख से अधिक छात्र वीजा प्रवेश दर्ज किए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 11 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है। वित्त वर्ष 2024, जो 1 अक्टूबर 2023 से शुरू हुआ था, के दौरान अमेरिका ने पांच लाख से अधिक सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों में शामिल लोगों और 37,300 मीडिया कर्मियों को वीजा जारी किए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">डीएचएस ने कहा कि ऐसे आगंतुकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि के कारण अमेरिका में उनके प्रवास की निगरानी और उन पर प्रभावी नजर रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है। विभाग ने यह भी कहा कि उसके पास ऐसे कई उदाहरण हैं, जिनमें छात्र और एक्सचेंज विजिटर अपने वीजा पर कई दशकों तक अमेरिका में बने रहे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">नए नियमों के तहत अगर कोई वीजा धारक निर्धारित अवधि से अधिक समय तक अमेरिका में रहना चाहता है, तो उसे डीएचएस से वीजा अवधि बढ़ाने की अनुमति लेनी होगी या फिर अमेरिका से बाहर जाकर दोबारा प्रवेश के लिए नया अनुमोदन प्राप्त करना होगा।<br><br></p>
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		<title>&#8216;ईरान बातचीत करे नहीं तो कुछ नहीं छोड़ेंगे&#8217;, ट्रंप की धमकी- जल्द पावर प्लांट और पुलों पर करेंगे हमले</title>
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		<pubDate>Wed, 15 Jul 2026 04:04:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को धमकी दी है और कहा है कि अगर ईरान की सरकार बातचीत की मेज पर नहीं आई तो अमेरिका अगले हफ्ते से ईरान के नागरिक ढांचे को निशाना बनाना शुरू कर देगा और पावर प्लांट और पुलों को तबाह कर दिया जाएगा।  अमेरिका के राष्ट्रपति [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को धमकी दी है और कहा है कि अगर ईरान की सरकार बातचीत की मेज पर नहीं आई तो अमेरिका अगले हफ्ते से ईरान के नागरिक ढांचे को निशाना बनाना शुरू कर देगा और पावर प्लांट और पुलों को तबाह कर दिया जाएगा। <br><br>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को चेतावनी दी कि अगर ईरान बातचीत की मेज पर वापस नहीं लौटा तो अमेरिका अगले हफ्ते से ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों को निशाना बनाएगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर तेहरान, वॉशिंगटन के साथ समझौता करने में विफल रहता है तो उसके पास कुछ नहीं बचेगा। फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने दावा किया कि अगर वार्ता दोबारा शुरू नहीं होती है तो अमेरिका आने वाले दिनों में ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को और तेज करेगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ईरान के पावर प्लांट और पुलों को तबाह करने की धमकी</strong><br>ट्रंप ने कहा, &#8216;हम कल रात उन्हें बहुत जोरदार तरीके से निशाना बनाएंगे। उसके अगले दिन भी कड़ा हमला करेंगे और फिर अगले हफ्ते उनके लिए हालात और खराब हो जाएंगे। अगले हफ्ते बिजली संयंत्रों की बारी आएगी। अगर वे बातचीत की मेज पर आकर बातचीत नहीं करते तो अगले हफ्ते पुलों की बारी आएगी। हम उनके सभी बिजली संयंत्रों और पुलों को तबाह कर देंगे।&#8217;</p>



<p class="wp-block-paragraph">ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है और दोनों देश एक दूसरे के ठिकानों पर हमले कर रहे हैं। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधियों के बीच संपर्क बना हुआ है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन का कहना है कि जब तक ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य पर समुद्री यातायात पर प्रतिबंध जारी रखेगा, तब तक बातचीत आगे नहीं बढ़ सकती।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ईरान के खिलाफ कब तक जारी रहेगा सैन्य अभियान?</strong><br>ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान कब तक जारी रहेगा? इस सवाल पर ट्रंप ने कहा कि हमले तब तक जारी रहेंगे, जब तक वह उन्हें रोकने का फैसला नहीं करते। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान में जमीनी सेना भेजने की संभावना से भी पूरी तरह इनकार नहीं किया। हालांकि, उन्होंने संकेत दिया कि वह अन्य विकल्पों को प्राथमिकता देना चाहते हैं। ट्रंप ने कहा, &#8216;कभी-कभी जमीनी अभियान की जरूरत पड़ती है, लेकिन हमारे पास ऐसे लोग हैं जो हमारी ओर से जमीनी अभियान चलाएंगे।&#8217;</p>



<p class="wp-block-paragraph">ट्रंप ने तेहरान पर समझौते का दबाव बढ़ाते हुए कहा कि यदि ईरान ने समझौता नहीं किया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा, &#8216;बेहतर होगा कि आप समझौता कर लें। नहीं तो आपके पास कोई नहीं बचेगा।&#8217;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>अमेरिका का दावा- होर्मुज में नौसैनिक नाकेबंदी फिर शुरू की</strong><br>ट्रंप ने ये भी कहा कि अमेरिका नागरिकों के हताहत होने की आशंका को कम करने के लिए ज्यादा सावधानी बरत रहा है। उन्होंने कहा, &#8216;हम नागरिक आबादी को लेकर बेहद सावधानी बरत रहे हैं। लेकिन मैंने कहा है कि बेहतर होगा आप (ईरान) समझौता कर लें। नहीं तो आपके पास कुछ भी नहीं बचेगा।&#8217; इससे पहले दिन में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया था कि उसने ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों से आने-जाने वाले जहाजों को निशाना बनाते हुए अपनी नौसैनिक नाकेबंदी फिर से शुरू कर दी है। </p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>होर्मुज पर बदली अमेरिका की रणनीति: पहले मना करता रहा और अब खुद वसूलेगा टोल; किसे बताया होर्मुज का गार्जियन?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Jul 2026 04:49:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[USA]]></category>
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					<description><![CDATA[हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्ताव पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि हॉर्मुज का वास्तविक संरक्षक ईरान है और 20 प्रतिशत शुल्क बहुत अधिक है। इस बीच अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी दोबारा लागू करने का [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्ताव पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि हॉर्मुज का वास्तविक संरक्षक ईरान है और 20 प्रतिशत शुल्क बहुत अधिक है। इस बीच अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी दोबारा लागू करने का एलान किया है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।<br><br>ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी मालवाहक जहाजों पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की योजना का तीखा जवाब दिया है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा हमेशा ईरान ने की है और आगे भी करता रहेगा। उन्होंने ट्रंप की इस बात से सहमति जताई कि जो देश सुरक्षित समुद्री मार्ग उपलब्ध कराता है, उसे उसके बदले उचित भुगतान मिलना चाहिए। हालांकि उन्होंने 20 प्रतिशत शुल्क को अत्यधिक बताते हुए कहा कि &#8217;20 प्रतिशत निश्चित रूप से बहुत ज्यादा है। हम न्यायसंगत शुल्क लेंगे।&#8217;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ट्रंप ने आखिर क्या कहा?</strong><br>अराघची की यह प्रतिक्रिया ट्रंप के उस पोस्ट के बाद आई, जिसे उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म &#8216;ट्रुथ सोशल&#8217; पर साझा किया। ट्रंप ने लिखा कि अब अमेरिका को &#8216;हॉर्मुज जलडमरूमध्य का संरक्षक&#8217; कहा जाएगा। दुनिया के इस बेहद संवेदनशील समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने में होने वाले सभी खर्चों की भरपाई के लिए यहां से गुजरने वाले प्रत्येक मालवाहक जहाज के माल पर 20 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि इस व्यवस्था को तत्काल लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>अमेरिका ने ब्लॉकेड को लेकर क्या एलान किया?</strong><br>ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य सभी देशों के लिए खुला रहेगा, लेकिन अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी समुद्री नाकेबंदी (ब्लॉकेड) दोबारा लागू कर रहा है। अमेरिकी सेना ने घोषणा की कि 14 जुलाई को भारतीय समयानुसार रात से ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले समुद्री यातायात पर फिर से नाकेबंदी लागू की जाएगी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि अमेरिकी नौसैनिक बल ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों की ओर जाने या वहां से आने वाले जहाजों की निगरानी करेंगे। साथ ही समुद्री जहाजों को सलाह दी गई कि वे ओमान की खाड़ी और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास यात्रा के दौरान अमेरिकी नौसेना के निर्देशों का पालन करें।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>पहले भी लागू हो चुकी थी नाकेबंदी?</strong><br>इससे पहले अमेरिका ने 13 अप्रैल से 18 जून तक ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी लागू की थी। बाद में वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक अंतरिम समझौता होने के बाद इसे हटा लिया गया था। लेकिन अब दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के चलते इसे फिर से लागू करने का फैसला किया गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>हॉर्मुज पर दोनों देशों का दावा क्यों है?</strong><br>अराघची और ट्रंप के बीच यह बयानबाजी ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिका और ईरान लगातार दूसरे दिन भी एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं। दोनों ही देश हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने नियंत्रण का दावा कर रहे हैं। ईरान का कहना है कि पिछले महीने हुए अंतरिम शांति समझौते के तहत उसे जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के यातायात को नियंत्रित करने और जरूरत पड़ने पर शुल्क लेने का अधिकार है। वहीं अमेरिका का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सभी देशों को निर्बाध आवाजाही का अधिकार प्राप्त है और किसी भी देश को वहां शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>इतना अहम क्यों है हॉर्मुज जलडमरूमध्य?</strong><br>दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल हॉर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक स्तर पर लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति होती है। इसी वजह से यहां होने वाली हर सैन्य गतिविधि का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ता है। ईरान ने 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद इस क्षेत्र में नाकेबंदी शुरू की थी। उन हमलों में तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई थी, जिसके बाद पूरे पश्चिम एशिया में संघर्ष और तेज हो गया।</p>
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