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	<title>Nation &#8211; RNSNS News</title>
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	<title>Nation &#8211; RNSNS News</title>
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		<title>बेल्जियम के पीएम का भारत दौरा: जानिए क्या रहेगा पूरा कार्यक्रम? द्विपक्षीय व्यापार के साथ रक्षा पर भी फोकस</title>
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		<pubDate>Thu, 03 Sep 2026 04:07:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Nation]]></category>
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					<description><![CDATA[बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर अपने पहले भारत दौरे पर नई दिल्ली पहुंच गए हैं। बेल्जियम के पीएम का यह दौरा न सिर्फ दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने पर फोकस है, बल्कि इस दौरे में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी पर भी बात होन है।  बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर अपने पहले भारत दौरे पर नई दिल्ली पहुंच गए हैं। बेल्जियम के पीएम का यह दौरा न सिर्फ दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने पर फोकस है, बल्कि इस दौरे में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी पर भी बात होन है। <br><br>बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर तीन दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर बेल्जियम के पीएम 2 से 4 सितंबर तक तीन दिवसीय दौरे पर भारत आए हैं। इस दौरे का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना और व्यापार, निवेश, रक्षा, प्रौद्योगिकी और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>बेल्जियम के पीएम बार्ट डी वेवर का पहला भारत दौरा</strong><br>भारतीय विदेश मंत्रालय ने बेल्जियम पीएम का स्वागत करते हुए सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा, &#8216;भारत में आपका स्वागत है। आधिकारिक दौरे पर आए बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर का नई दिल्ली में हार्दिक स्वागत है। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने उनका स्वागत किया। यह दौरा भारत-बेल्जियम की घनिष्ठ और बहुआयामी साझेदारी को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है।&#8217; बेल्जियम पीएम बार्ट डी वेवर ने साल 2025 में ही पदभार संभाला है और यह उनका पहला भारत दौरा है। साथ ही दो दशकों में यह बेल्जियम के किसी भी प्रधानमंत्री का पहला भारत दौरा है। </p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>क्या है पूरा कार्यक्रम</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>बेल्जियम पीएम के कार्यक्रम के तहत वे 3 सितंबर को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस वार्ता में भारत-बेल्जियम के द्विपक्षीय संबंधों और पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।</li>



<li>बेल्जियम के पीएम भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को लेकर भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के एक व्यापारिक कार्यक्रम को संबोधित करेंगे।</li>



<li>नई दिल्ली के बाद वेवर 4 सितंबर को मुंबई का दौरा करेंगे, जहां वे हीरे, बंदरगाहों और लॉजिस्टिक सहित विभिन्न क्षेत्रों के हितधारकों के साथ बातचीत करेंगे।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>दोनों देशों के बीच लगातार मजबूत हो रहे संबंध</strong><br>भारत और बेल्जियम के विदेश मंत्रियों के बीच 15 जुलाई 2026 को रणनीतिक सहयोग पर बातचीत हुई थी। अब बार्ट डी वेवर के भारत दौरे पर रणनीतिक संवाद और द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर बातचीत होने की उम्मीद है। यूरोप में बेल्जियम, भारत का प्रमुख आर्थिक साझेदार है। अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 के बीच बेल्जियम ने भारत में 4.2 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश रहा है। दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, प्रोद्योगिकी, नवाचार, नवीकरणीय ऊर्जा, कनेक्टिविटी, बंदरगाह और समुद्री सहयोग पर भी संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में बेल्जियम की कंपनियां भारत में काम कर रही हैं। बेल्जियम, संयुक्त राष्ट्र में भी भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करता है।&nbsp;</p>
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		<title>1 सितंबर 2026: रसोई, हवाई सफर और बैंकिंग से जुड़े 10 बड़े नियम बदल रहे, क्या जेब पर पड़ने वाला है चौतरफा भार?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 01 Sep 2026 04:27:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Nation]]></category>
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					<description><![CDATA[1 सितंबर 2026 से लागू होने वाले बदलाव डिजिटल सुविधाओं और कड़े अनुशासन के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। समय रहते नियमों के प्रति सचेत न रहने पर गैस सब्सिडी रुकने, जीएसटी पंजीकरण निलंबित होने और आईटीआर पर भारी जुर्माना लगने जैसे वित्तीय झटके लग सकते हैं। 1 सितंबर 2026 से देश में आम आदमी के [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">1 सितंबर 2026 से लागू होने वाले बदलाव डिजिटल सुविधाओं और कड़े अनुशासन के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। समय रहते नियमों के प्रति सचेत न रहने पर गैस सब्सिडी रुकने, जीएसटी पंजीकरण निलंबित होने और आईटीआर पर भारी जुर्माना लगने जैसे वित्तीय झटके लग सकते हैं। 1 सितंबर 2026 से देश में आम आदमी के जीवन से जुड़े 10 बड़े नियम बदलने जा रहे हैं। रसोई गैस सब्सिडी, घरेलू बजट, डेबिट कार्ड, जीएसटी, डीमैट और लेट आईटीआर फाइलिंग पर होने वाले ये बदलाव आपकी जेब को सीधे प्रभावित करेंगे। आइए जानते हैं कि इस नए महीने की शुरुआत के साथ आपकी जिंदगी पर क्या असर पड़ने वाला है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>1. अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा में क्या बड़ा बदलाव होने जा रहा है?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">भारत से विदेश जाने वालों के लिए इमिग्रेशन काउंटर पर बोर्डिंग पास पर फिजिकल स्टैम्प लगाने की अनिवार्यता खत्म हो रही है। अब यात्री स्मार्टफोन में सुरक्षित ई-बोर्डिंग पास दिखाकर आसानी से इमिग्रेशन करा सकेंगे, जिससे समय बचेगा और हवाई अड्डों पर लंबी कतारों से मुक्ति मिलेगी।</p>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>2. घरेलू पीएनजी कनेक्शन के लिए सरकार क्या नई योजना ला रही है?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">पाइप वाली रसोई गैस (पीएनजी) को बढ़ावा देने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय नई प्रोत्साहन योजना शुरू कर रहा है। इसके तहत सिटी गैस वितरण कंपनियों को नए कनेक्शन जारी करने पर अतिरिक्त गैस कोटा मिलेगा, जिससे नए इलाकों में पीएनजी नेटवर्क का विस्तार तेजी से हो सकेगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>3. एलपीजी ई-केवाईसी न कराने पर क्या नुकसान होगा?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">बायोमेट्रिक ई-केवाईसी कराने की आखिरी तारीख 31 अगस्त थी, जो 1 सितंबर से प्रभावी हो रही है। जिन उपभोक्ताओं ने ई-केवाईसी पूरी नहीं की है, उन्हें रसोई गैस पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी रुकने या सिलेंडर डिलीवरी में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>4. रसोई गैस और हवाई ईंधन की कीमतों पर क्या असर होगा?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी और हवाई ईंधन (एटीएफ) की दरों की समीक्षा करती हैं। 1 सितंबर को घोषित होने वाली नई दरों से जहां घरेलू रसोई का बजट प्रभावित हो सकता है, वहीं एटीएफ की कीमतों में बदलाव से हवाई टिकट के दाम भी बदल सकते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>5. जीएसटी बैंक अकाउंट लिंक न करने पर क्या कार्रवाई होगी?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">टैक्स चोरी रोकने के लिए 1 सितंबर से जीएसटी पोर्टल पर बैंक खाता लिंक करना अनिवार्य है। नए व्यापारियों को पंजीकरण के 30 दिनों के भीतर खाता अपडेट करना होगा, अन्यथा उनका जीएसटी पंजीकरण निलंबित हो जाएगा और वे आउटवर्ड सप्लाई दाखिल नहीं कर पाएंगे।</p>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>6. डीमैट और म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए क्या नया नियम है?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">शेयर बाजार नियामक सेबी के नए निर्देशों के तहत, सभी नए सिंगल-होल्डर डीमैट और म्यूचुअल फंड फोलियो में नॉमिनी जोड़ना या &#8216;ऑप्ट-आउट&#8217; करना अनिवार्य है। निवेश सुरक्षित रखने और भविष्य में क्लेम सेटलमेंट को आसान बनाने के लिए यह प्रक्रिया पूरी करना बेहद जरूरी है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>7. एचडीएफसी बैंक डेबिट कार्ड की सीमा क्यों बदलने जा रही है?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">एचडीएफसी&nbsp;बैंक 1 सितंबर से कार्ड कंट्रोल नियम लागू कर रहा है। यदि ग्राहकों ने कार्ड वेरिएंट की तय सीमा से अधिक एटीएम या ऑनलाइन लिमिट सेट कर रखी है, तो बैंक उसे ऑटोमैटिकली बेस वेरिएंट की सीमा पर रीसेट कर देगा, जिससे बड़ी खरीदारी पर ट्रांजैक्शन फेल हो सकता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>8. एक्सिस बैंक के डेबिट कार्ड का इस्तेमाल क्यों महंगा होगा?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">एक्सिस बैंक डेबिट कार्ड पर नई नीतियां ला रहा है। इसके तहत डायनेमिक करेंसी कन्वर्जन (डीसीसी) लेनदेन पर 3.5% मार्कअप फीस वसूली जाएगी और कुछ कार्ड्स पर एज रिवॉर्ड प्रोग्राम बंद होने से विदेश में या अंतरराष्ट्रीय साइटों पर लेनदेन महंगा हो जाएगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>9. महाराष्ट्र, तमिलनाडु और सिक्किम से जुड़े क्या जरूरी बदलाव लागू हो रहे?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">चारा महंगा होने के कारण डेयरी एसोसिएशनों (विशेषकर मुंबई के तबेला मिल्क एसोसिएशन) ने 1 सितंबर से दूध के दाम बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिसका सीधा असर जनता के दैनिक चाय-नाश्ते और मासिक राशन बजट पर पड़ेगा।<br><br>सिक्किम सरकार 1 सितंबर से पर्यटन से संबंधित कई सेवाओं के लिए डिजिटल-फर्स्ट सिस्टम अपनाएगी। पर्यटन और नागरिक उड्डयन विभाग ने कहा कि होटल और रिसॉर्ट, बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठान, सर्विस अपार्टमेंट, हॉलिडे होम, होमस्टे और रेस्तरां के पंजीकरण के लिए आवेदन सिंगल साइन-ऑन (एसएसओ) पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन जमा और संसाधित किए जाने होंगे। <br><br>तमिलनाडु में शराब की खुदरा बिक्री पर सरकारी एकाधिकार रखने वाली संस्था &#8216;टासमैक&#8217; (TASMAC) ने राज्यभर की दुकानों के लिए बड़ा एलान किया है। आगामी 1 सितंबर से राज्य की सभी खुदरा दुकानों में पुरानी कागजी प्रक्रिया समाप्त कर नई डिजिटल व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। इस प्रणाली के तहत दुकानों के सुपरवाइजरों को अपने स्टॉक की मांग केवल समर्पित हैंडहेल्ड डिवाइस (हाथ में पकड़े जाने वाले उपकरण) के माध्यम से भेजनी होगी। इस तकनीकी बदलाव का सबसे बड़ा फायदा सीधे आम ग्राहकों को मिलेगा, जिन्हें अब अपनी स्थानीय मांग और पसंद के आधार पर पसंदीदा ब्रांड आसानी से मिल सकेंगे।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>10. आईटीआर दाखिल न करने पर 1 सितंबर से कितना जुर्माना लगेगा?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए बिना ऑडिट वाले खातों का आईटीआर भरने की आखिरी तारीख 31 अगस्त थी। 1 सितंबर से लेट रिटर्न दाखिल करने पर करदाताओं को उनकी आय के आधार पर 1,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक का लेट फीस यानी जुर्माना भरना होगा। ये नियम&nbsp;उन करदाताओं पर लागू होंगे&nbsp;जो किसी कारोबार या पेशे से आय हासिल करते हैं और जिनके खातों का ऑडिट जरूरी नहीं है।</p>
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		<title>मोदी कैबिनेट विस्तार की तैयारी: युवाओं-महिलाओं को मिलेगी जगह, 70+ उम्र के मंत्रियों पर क्या होगा फैसला?</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/modi-cabinet-expansion-youth-women-70-plus-ministers-decision/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 27 Aug 2026 04:24:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Nation]]></category>
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					<description><![CDATA[मोदी मंत्रिमंडल में नए और युवा चेहरों को जगह देने की तैयारी चल रही है। साथ ही ज्यादा महिलाओं को भी मौका मिल सकता है। 70 साल से ज्यादा उम्र वाले कुछ मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है, क्या इस बार कैबिनेट का चेहरा पूरी तरह बदलेगा? पढ़िए रिपोर्ट मोदी मंत्रिमंडल विस्तार में युवा व [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">मोदी मंत्रिमंडल में नए और युवा चेहरों को जगह देने की तैयारी चल रही है। साथ ही ज्यादा महिलाओं को भी मौका मिल सकता है। 70 साल से ज्यादा उम्र वाले कुछ मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है, क्या इस बार कैबिनेट का चेहरा पूरी तरह बदलेगा? पढ़िए रिपोर्ट</p>



<p class="wp-block-paragraph">मोदी मंत्रिमंडल विस्तार में युवा व महिलाओं को अधिक जगह मिलेगी। मंत्रिमंडल को युवा बनाने के लिए जहां बुजुर्ग मंत्रियों की संख्या घटेगी, वहीं महिला मंत्रियों की संख्या 7 से 12 करने और नए सहयोगियों को प्रतिनिधित्व देने के लिए मंत्रियों की संख्या 75 करने की योजना है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">50 से कम उम्र के मंत्रियों की हिस्सेदारी 24 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत की जा सकती है। प्रधानमंत्री पश्चिम एशिया के दौरे से 2 सितंबर को लौटने के बाद मंत्रिमंडल विस्तार योजना को अंतिम रूप देंगे। सूत्र के मुताबिक, संभावित विस्तार में मुख्य रूप से नए सहयोगियों, युवाओं-महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, चुनावी राज्यों के समीकरण साधने पर मंथन हो रहा है। मुख्य माथापच्ची युवाओं-महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए नए चेहरे की तलाश पर हो रही है। वर्तमान में सात महिला मंत्री हैं। इनकी संख्या बढ़ा कर कम से कम 12 की जाएगी। जेन-जी के शोर के बीच मंत्रिमंडल में 50 से कम उम्र वाले महज 17 मंत्री हैं। इनमें 40 वर्ष से कम आयु के महज दो राज्यमंत्री हैं। इस बार न सिर्फ युवा मंत्रियों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि 40 वर्ष से कम आयु के कम से कम पांच मंत्री होंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>70 से अधिक उम्र वाले एक चौथाई मंत्री हटेंगे</strong><br>मंत्रिमंडल में फिलहाल 12 मंत्री ऐसे हैं जिनकी उम्र 70 साल से अधिक है। इनमें एक चौथाई मंत्री पद से हटाए जाएंगे। इस समय 65% मंत्री 51 से अधिक उम्र के हैं। मंत्रिमंडल विस्तार में इनकी संख्या 50 फीसदी कम करने की योजना है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><br><a href="https://www.amarujala.com/user/himanshu-mishr-delhi" target="_blank" rel="noopener"></a></p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>कांदा एक्सप्रेस: कल से ₹35 / किलो मिलेगा प्याज, ट्रेन आज पहुंचेगी दिल्ली, फिर देश के अन्य हिस्सों में आपूर्ति</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 25 Aug 2026 04:04:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Nation]]></category>
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					<description><![CDATA[प्याज की बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए महाराष्ट्र से 2,200 टन प्याज लेकर &#8216;कांदा एक्सप्रेस&#8217; दिल्ली के लिए रवाना हो गई है। सरकार ने त्योहारों के लिए पर्याप्त भंडार होने का दावा किया है। दूसरी ओर, इस्मा ने देश में चीनी की कमी से इनकार करते हुए आने वाले दिनों में कीमतें [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">प्याज की बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए महाराष्ट्र से 2,200 टन प्याज लेकर &#8216;कांदा एक्सप्रेस&#8217; दिल्ली के लिए रवाना हो गई है। सरकार ने त्योहारों के लिए पर्याप्त भंडार होने का दावा किया है। दूसरी ओर, इस्मा ने देश में चीनी की कमी से इनकार करते हुए आने वाले दिनों में कीमतें घटने की उम्मीद जताई है।<br><br>प्याज की आपूर्ति बढ़ाने और ऊंची कीमतों को थामने के लिए महाराष्ट्र से खास रेलवे रैक कांदा एक्सप्रेस रवाना हो गई है। यह मंगलवार को दिल्ली पहुंचेगी, जहां से देश के बाकी हिस्सों तक बुधवार तक प्याज की आपूर्ति उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद केंद्र सरकार दिल्ली-एनसीआर, चेन्नई, कोलकाता और गुवाहाटी में 35 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से सस्ता प्याज बेचने की शुरुआत करेगी। </p>



<p class="wp-block-paragraph">उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की सचिव निधि खरे ने अमर उजाला को बताया कि कांदा एक्सप्रेस से आपूर्ति के बाद विभाग स्थिति को नियंत्रित कर लेगा और खुदरा बाजार में प्याज की कीमतें नीचे आएंगी। उन्होंने बताया कि यह प्याज पूर्व की भांति नैफेड, एनसीसीएफ, स्टॉल और मोबाइल वाहनों की मदद से बेची जाएगी। एक मानक फुल रैक में 42 से 58 डिब्बे और मिनी रैक में 20 डिब्बे होते हैं। इसमें एक वैगन में करीब चालीस ट्रक में 2,200 टन प्याज आ रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>त्योहारी जरूरतों के लिए पर्याप्त भंडार</strong><br>खरे ने बताया, देश में प्याज की कृत्रिम किल्लत बनाई जा रही है, जिसे लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है। प्याज का मौजूदा भंडार त्योहारी सीजन की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। इसलिए, त्योहारों में उपभोक्ताओं पर प्याज की महंगाई की मार नहीं पड़ेगी। देश को हर दिन औसतन 45 हजार टन प्याज की जरूरत होती है। यानी सालभर में 1.6 से 1.7 करोड़ टन प्याज की खपत होती है।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>सरकार के अग्रिम अनुमानों के मुताबिक, देश में 307.37 लाख टन प्याज का उत्पादन होने का अनुमान है, जो पिछले साल के 307.67 लाख टन के लगभग बराबर है।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>गेहूं व उत्पादों के निर्यात पर रोक हटी</strong><br>केंद्र ने गेहूं और उससे जुड़े विभिन्न उत्पादों के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। अब ड्यूरम किस्म सहित सभी प्रकार के गेहूं का निर्यात किया जा सकेगा। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने अधिसूचना जारी कर यह जानकारी दी।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>डीजीएफटी के मुताबिक, गेहूं की निर्यात नीति को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित श्रेणी से हटाकर मुक्त श्रेणी में कर दिया गया है। इससे पहले फरवरी में सरकार ने गेहूं के सीमित निर्यात की अनुमति दी थी।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>चीनी की कमी नहीं, दाम घटेंगे: इस्मा</strong><br>भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) ने कहा कि देश में चीनी की कमी नहीं है। आने वाले दिनों में इसके दाम घटने की उम्मीद है। संघ के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने सोमवार को कहा कि चीनी की कीमतों में हाल में आई तेजी के पीछे कई कारण हैं। हालांकि, 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति के बाद दाम घटने लगे हैं। मौजूदा विपणन सत्र समाप्त होने पर देश के पास 35 लाख टन चीन का भंडार होगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>चीनी के बाद दाल बिगाड़ेगी रसोई का बजट?: आयात घटा, बुवाई भी रही कम; त्योहार से पहले मंडरा रहा महंगाई का संकट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 21 Aug 2026 04:05:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[देश में दालों के आयात में कमी और खरीफ सीजन में बुवाई का रकबा घटने से आने वाले दिनों में कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। अल-नीनो के कारण पैदावार प्रभावित होने की चिंता भी है। हालांकि सरकार ने करीब 30 लाख टन दालों का बफर स्टॉक तैयार किया है। ऐसे में सवाल है [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><em>देश में दालों के आयात में कमी और खरीफ सीजन में बुवाई का रकबा घटने से आने वाले दिनों में कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। अल-नीनो के कारण पैदावार प्रभावित होने की चिंता भी है। हालांकि सरकार ने करीब 30 लाख टन दालों का बफर स्टॉक तैयार किया है। ऐसे में सवाल है कि क्या यह भंडार त्योहारी सीजन में दालों की महंगाई रोकने के लिए पर्याप्त होगा? आइए, सबकु विस्तार से जानते हैं&#8230;</em><br><br>चीनी की बढ़ती कीमतों की चर्चा खत्म भी नहीं हो पाई थी कि अब दाल के दाम पर बात शुरू हो गई। भारत में दालों की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ रही है। घरेलू उत्पादन में संभावित कमी और आयात घटने से बाजार में आपूर्ति पर दबाव पड़ सकता है। 2026 के पहले छह महीनों में देश में दालों का आयात 31.80 लाख टन रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि के 32.27 लाख टन से 1.46 फीसदी कम है। इसके साथ ही खरीफ सीजन में दालों की बुवाई का रकबा भी पिछले साल से कम है। अगर उत्पादन भी प्रभावित हुआ तो त्योहारी सीजन में दालों की कीमत बढ़ सकती है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>दालों के आयात में कितनी कमी आई है?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">जनवरी से जून 2026 के दौरान तुअर का आयात 5.05 लाख टन रहा। भारत को तुअर की बड़ी आपूर्ति अफ्रीकी देशों से मिली। मोजाम्बिक ने 1.83 लाख टन से अधिक तुअर भेजकर सबसे ज्यादा आपूर्ति की। इसके बाद म्यांमार से 1.23 लाख टन, तंजानिया से 1.01 लाख टन और सूडान से 49,049 टन दाल आई। कुल आयात में मामूली कमी है, लेकिन घरेलू उत्पादन पर मौसम का असर पड़ा तो आयात की कम मात्रा बाजार के लिए चिंता बढ़ा सकती है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>क्या दालों की बुवाई का रकबा भी घटा है?</strong></h2>



<ul class="wp-block-list">
<li>कृषि मंत्रालय के अनुसार 14 अगस्त तक देश में 108.14 लाख हेक्टेयर में दलहन फसलों की बुवाई हुई है। </li>



<li>पिछले साल इसी समय यह आंकड़ा 108.49 लाख हेक्टेयर था। यानी इस साल रकबा करीब 35 हजार हेक्टेयर कम है। </li>



<li>अरहर की बुवाई 40.31 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल के 42.01 लाख हेक्टेयर से 1.69 लाख हेक्टेयर कम है। </li>



<li>मूंग का रकबा भी 32.05 लाख हेक्टेयर है, जो पिछले साल से 1.37 लाख हेक्टेयर कम है। </li>



<li>अन्य दालों का रकबा 3.14 लाख हेक्टेयर रहा, जो 27 हजार हेक्टेयर कम है।</li>
</ul>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>अल-नीनो से पैदावार पर क्यों बढ़ी चिंता?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">दालों की बुवाई का रकबा भले ही करीब 108 लाख हेक्टेयर है, लेकिन अब चिंता फसल की पैदावार को लेकर है। दालों की फसल को बीच के चरण में अच्छी बारिश की जरूरत होती है। अगस्त के अंत से सितंबर के बीच अल-नीनो के मजबूत होने के संकेत बताए गए हैं। इससे बारिश का पैटर्न प्रभावित हो सकता है और प्रति हेक्टेयर पैदावार पर असर पड़ सकता है। निजी मौसम एजेंसी ने 70 फीसदी सूखे की आशंका जताई है। अगर मौसम खराब रहा तो कम रकबा और कम उत्पादकता दोनों मिलकर दालों की उपलब्धता घटा सकते हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>सरकार के पास महंगाई रोकने के लिए क्या तैयारी है?</strong></h2>



<ul class="wp-block-list">
<li>सरकार का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि उसके पास पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद है। </li>



<li>सरकार ने करीब 30 लाख टन दालों का भंडार तैयार किया है। </li>



<li>इसमें अरहर, उड़द, मूंग, चना और मसूर शामिल हैं। सरकार बाजार की कीमतों पर लगातार नजर रख रही है। </li>



<li>अगर किसी दाल की कीमत में असामान्य तेजी आती है तो बफर स्टॉक से योजनाबद्ध तरीके से दाल बाजार में उतारी जाएगी। </li>



<li>इससे त्योहारी सीजन में अचानक आपूर्ति की कमी को रोकने की कोशिश होगी।</li>
</ul>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>क्या त्योहारी सीजन में दालों की कीमत पर नजर रखना जरूरी है?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">देश में हर साल कुल दलहन उत्पादन करीब 256.83 लाख टन होता है। इसमें चना दाल की हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी है। अरहर की हिस्सेदारी 15 से 20 फीसदी, जबकि उड़द और मूंग की हिस्सेदारी करीब 8 से 10 फीसदी है। इस साल आयात में कमी, कुछ प्रमुख दालों के घटते रकबे और मौसम की चिंता एक साथ सामने आई है। हालांकि सरकारी बफर स्टॉक कीमतों को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि फसल आने तक उत्पादन कितना रहता है और त्योहारी मांग बढ़ने पर बाजार में दालों की उपलब्धता कैसी रहती है।</p>
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		<title>चीनी के दामों में लगी आग, 65 रुपये किलो तक पहुंची कीमतें; जानिए क्यों बढ़े हैं दाम? सरकार ने बदला नियम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 20 Aug 2026 03:42:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[Nation]]></category>
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					<description><![CDATA[भारत सरकार ने 10 मीट्रिक टन से अधिक मासिक चीनी इस्तेमाल करने वाले डीलरों के लिए स्टॉक सीमा तय की है। सरकारी अधिसूचना के अनुसार ऐसे डीलर 15 दिनों से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। यह आदेश 1 सितंबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगा। अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">भारत सरकार ने 10 मीट्रिक टन से अधिक मासिक चीनी इस्तेमाल करने वाले डीलरों के लिए स्टॉक सीमा तय की है। सरकारी अधिसूचना के अनुसार ऐसे डीलर 15 दिनों से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। यह आदेश 1 सितंबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगा। अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के कारण चीनी की मांग बढ़ती है। इस दौरान बिस्कुट और कन्फेक्शनरी कंपनियां पहले से स्टॉक बढ़ाती हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>चीनी स्टॉक पर किस कारण लिया गया फैसला?&nbsp;</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">सरकार के मुताबिक&nbsp;रिकॉर्ड चीनी कीमतों पर लगाम लगाने के लिए नया आदेश जारी किया गयाहै। इस आदेश के तहत, 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का उपयोग करने वाले डीलर 15 दिन से ज्यादा स्टॉक नहीं रख पाएंगे। यह सरकारी आदेश बुधवार को सामने आया।&nbsp;नियम 1 सितंबर से लागू होगा और 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>कीमतों में उछाल से चिंता,&nbsp;जुलाई में चीनी को लेकर क्या फैसला हुआ?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">दरअसल,&nbsp;पिछले महीने, भारत ने डीलरों को 30 दिन से अधिक स्टॉक न रखने का आदेश दिया था। इसके बावजूद, भारतीय चीनी की कीमतें पिछले महीने 10 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। अगले तीन महीनों तक कीमतें ऊंची रहने की उम्मीद है। इससे पहले मंगलवार को आई रॉयटर्स की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक&nbsp;भारत चीनी आपूर्ति बढ़ाने के उपायों&nbsp;पर विचार कर रहा है। खबर के मुताबिक सरकार सीमित शुल्क-मुक्त आयात और थोक व्यापारियों के लिए सख्त स्टॉक सीमा जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>चीनी की मांग और आपूर्ति की स्थिति कैसी?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">गौरतलब है कि भारत में अगस्त से नवंबर तक चीनी की मांग बढ़ जाती है। इस दौरान गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहार मनाए जाते हैं। बिस्किट और कन्फेक्शनरी निर्माता जैसे थोक उपभोक्ता त्योहारों से पहले स्टॉक बनाते हैं। अनियमित बारिश और शुष्क मौसम ने गन्ने की फसल को प्रभावित किया है। चीनी भारत में राजनीतिक रूप से संवेदनशील है, क्योंकि यह कई गरीब परिवारों के लिए कैलोरी का एक सस्ता स्रोत है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>भारत से चीनी निर्यात पर प्रतिबंध क्यों?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">इससे पहले मई में चीनी निर्यात पर रोक लगाई गई थी। सरकार ने कहा था कि&nbsp;निर्यात पर यह रोक 30 सितंबर या अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी। सरकार ने यह कदम देश में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और इसकी कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उठाया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले विदेश व्यापार महानिदेशालय की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। इसके अनुसार, यह प्रतिबंध कच्ची, सफेद और परिष्कृत चीनी पर लागू होता है। सरकार ने नीति में बदलाव करते हुए चीनी को निषिद्ध श्रेणी में रख दिया है।</p>
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		<title>मोदी कैबिनेट में इसी महीने बड़ा फेरबदल?: दो दर्जन मंत्रियों के विभाग बदलने की तैयारी, DMK भी हो सकता है शामिल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:14:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Nation]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी महीने अपनी सरकार में बड़ा फेरबदल कर सकते हैं। करीब दो दर्जन से ज्यादा मंत्रियों के विभाग बदले जाने के संकेत हैं। कुछ मंत्रियों का बोझ घट सकता है तो कुछ को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। सहयोगी दल भी मंत्रालयों में हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। आइए, विस्तार [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी महीने अपनी सरकार में बड़ा फेरबदल कर सकते हैं। करीब दो दर्जन से ज्यादा मंत्रियों के विभाग बदले जाने के संकेत हैं। कुछ मंत्रियों का बोझ घट सकता है तो कुछ को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। सहयोगी दल भी मंत्रालयों में हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। आइए, विस्तार से जानते हैं कि इस फेरबदल में किन चेहरों की किस्मत बदलेगी? सरकार की नई प्राथमिकताएं क्या होंगी?</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी महीने अपनी सरकार की टीम में बड़ा फेरबदल कर सकते हैं। संगठन में बदलाव के बाद अब सरकार में भी जिम्मेदारियों का बंटवारा नए सिरे से होने के संकेत हैं। करीब दो दर्जन से अधिक मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं। कुछ मंत्रियों का कामकाज कम किया जा सकता है, जबकि कुछ को नई और बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। कुछ चेहरों की सरकार से संगठन में वापसी भी संभव है। इन बदलावों से सरकार की आने वाले समय की प्राथमिकताओं का संकेत मिल सकता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>किन मंत्रियों के विभाग बदलने की चर्चा है?</strong></h2>



<ul class="wp-block-list">
<li>पीयूष गोयल को भाजपा ने कोषाध्यक्ष बनाया है। इसके बावजूद संकेत हैं कि वह मंत्री बने रहेंगे। वाणिज्य मंत्री के तौर पर व्यापार समझौतों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। अमेरिका के साथ बातचीत में उतार-चढ़ाव के बीच सरकार फिलहाल उनकी जिम्मेदारी बदलने के पक्ष में नहीं दिख रही है।</li>



<li>दूसरी ओर धर्मेंद्र प्रधान ने नीट विवाद के बाद शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया है, लेकिन उनके किसी दूसरे मंत्रालय में लौटने की चर्चा है। संसद भवन में उन्हें किरेन रिजिजू के पास कमरा मिला है, जिसे किसी मंत्री को आवंटित किया जाता है।</li>
</ul>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>हरदीप पुरी और महिलाओं को लेकर क्या बदलाव हो सकता है?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी का राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है। उनके दोबारा राज्यसभा भेजे जाने को लेकर स्थिति साफ नहीं है। अगर उनका दोबारा नामांकन नहीं होता है तो उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में केंद्र की कैबिनेट में एक भी सिख मंत्री नहीं रहेगा। वहीं मंत्रिमंडल में महिलाओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की तैयारी के संकेत हैं। राजस्थान से डॉ. अलका गुर्जर का नाम चर्चा में है। दक्षिण भारत को संगठन में अपेक्षाकृत कम प्रतिनिधित्व मिलने के बाद सरकार में इसकी भरपाई की जा सकती है। अभी दक्षिण भारत से करीब दस मंत्री हैं, जिनमें तीन कैबिनेट और सात राज्य मंत्री हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>क्या सहयोगी दलों को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी?</strong></h2>



<ul class="wp-block-list">
<li>सहयोगी दलों की मांग भी फेरबदल में बड़ी भूमिका निभा सकती है।</li>



<li>लोजपा-रामविलास के अध्यक्ष चिराग पासवान मौजूदा खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय से बड़ा मंत्रालय चाहते हैं। </li>



<li>महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे भी एक और कैबिनेट पद की मांग कर रहे हैं। उनके पास 13 लोकसभा सांसद हैं।</li>



<li>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच इस मुद्दे पर बातचीत हो चुकी है।</li>



<li>साथ ही शिवसेना और एनसीपी के दोनों धड़ों से जुड़े मामलों को जल्द निपटाने की ताकीद भी की गई है।</li>



<li>तमिलनाडु से द्रमुक को भी केंद्र में जगह मिलने की संभावना जताई जा रही है।</li>



<li>प्रधानमंत्री मोदी खुद द्रमुक को साथ लाने की कोशिशों की कमान संभाल रहे हैं।</li>
</ul>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>उत्तर प्रदेश और हिमाचल से कौन पहुंच सकता है दिल्ली?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक में से किसी एक को केंद्र में लाने की चर्चा है। अमरपाल मौर्य को ओबीसी मोर्चा की जिम्मेदारी मिलने के बाद केशव प्रसाद मौर्य का नाम खास तौर पर चर्चा में है। हालांकि ब्रजेश पाठक भी विकल्प माने जा रहे हैं। दोनों में से किसी एक को दिल्ली लाने से उत्तर प्रदेश में सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने में मदद मिल सकती है। वहीं हिमाचल प्रदेश से जेपी नड्डा और अनुराग ठाकुर दोनों बड़े चेहरे हैं। चुनावी जरूरत और सामाजिक समीकरण को देखते हुए अनुराग ठाकुर को लेकर भी फैसला अहम हो सकता है।</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>JSSC-CGL रद्द होते ही मचा बवाल, नौकरी पा चुके अभ्यर्थी धरने पर, बोले- हमारा क्या दोष?</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/jssc-cgl-cancelled-job-holders-protest-jharkhand-ask-what-is-our-fault/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Aug 2026 04:42:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Nation]]></category>
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					<description><![CDATA[झारखंड सरकार द्वारा सोमवार को JSSC-CGL परीक्षा रद्द किए जाने के बाद परीक्षा पास कर नियुक्त हुए अभ्यर्थियों ने विरोध शुरू कर दिया है। नियुक्त अभ्यर्थी रांची के प्रोजेक्ट भवन में धरने पर बैठकर अपनी नियुक्ति को लेकर स्थिति स्पष्ट करने और न्याय की मांग कर रहे हैं।  झारखंड सरकार की ओर से सोमवार को [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">झारखंड सरकार द्वारा सोमवार को JSSC-CGL परीक्षा रद्द किए जाने के बाद परीक्षा पास कर नियुक्त हुए अभ्यर्थियों ने विरोध शुरू कर दिया है। नियुक्त अभ्यर्थी रांची के प्रोजेक्ट भवन में धरने पर बैठकर अपनी नियुक्ति को लेकर स्थिति स्पष्ट करने और न्याय की मांग कर रहे हैं। <br><br>झारखंड सरकार की ओर से सोमवार को JSSC-CGL परीक्षा रद्द किए जाने के बाद विवाद और गहरा गया है। परीक्षा के जरिए नियुक्त होकर अपने-अपने पदों पर सेवा दे रहे अभ्यर्थियों ने सरकार के फैसले के खिलाफ रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन में धरना शुरू कर दिया है। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी अपनी नियुक्ति को लेकर स्थिति स्पष्ट करने और न्याय की मांग कर रहे हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>परीक्षा रद्द होने से नियुक्त अभ्यर्थियों में नाराजगी</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">झारखंड सरकार के सोमवार को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा (JSSC-CGL) रद्द करने के फैसले के बाद परीक्षा पास कर नौकरी पाने वाले अभ्यर्थियों के एक वर्ग में नाराजगी सामने आई है। उनका कहना है कि उन्होंने चयन प्रक्रिया के तहत परीक्षा पास की और नियुक्ति के बाद अपने पदों पर काम कर रहे हैं। ऐसे में पूरी परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले से उनके भविष्य पर सवाल खड़ा हो गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी आंदोलन कर रहे थे। प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच और JSSC-CGL परीक्षा रद्द करना शामिल था।<br><br><strong>&#8216;हमने निष्पक्ष प्रक्रिया से परीक्षा पास की, फिर हमारा क्या दोष?&#8217;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रोजेक्ट भवन में प्रदर्शन कर रहे एक अभ्यर्थी ने ANI से कहा, &#8220;हमने निष्पक्ष प्रक्रिया के जरिए परीक्षा पास की और नियुक्त हुए हैं, फिर हमारे साथ ऐसा कदम क्यों उठाया जा रहा है? हम तो कथित अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहे थे। अगर जांच में कोई गलती सामने आती है, तो उसमें शामिल संबंधित लोगों पर कार्रवाई की जाए।&#8221;<br><br>एक अन्य प्रदर्शनकारी ने सरकार के फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा, &#8220;सरकार के इस फैसले के बाद मैं फिर सड़क पर आ गया हूं। मैं अपने माता-पिता से कहना चाहता हूं कि धैर्य रखें। हम दोबारा जीतेंगे। सरकार से भी अपील है कि अपने इस फैसले को वापस ले।&#8221;<br>प्रदर्शनकारी ने आगे कहा कि सरकार का यह फैसला उसके अनुसार अदालत के आदेश की भी अवहेलना करता है। उसने कहा कि आज न्याय की हार हुई है और वह अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>हेमंत सोरेन ने JSSC-CGL रद्द करने का किया ऐलान</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार शाम JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की घोषणा की। इसके साथ ही सरकार ने 2014 से आउटसोर्स एजेंसी TDPL (TSR Data Processing Pvt Ltd) के जरिए आयोजित की गई सभी नौकरी परीक्षाओं को भी रद्द करने का फैसला लिया है। सरकार का यह निर्णय भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे लंबे छात्र आंदोलन के बीच आया है। जहां आंदोलन कर रहे अभ्यर्थी इसे अपनी मांगों की दिशा में बड़ी सफलता मान रहे हैं, वहीं पहले से नियुक्त JSSC-CGL अभ्यर्थी परीक्षा रद्द किए जाने के खिलाफ अब धरने पर बैठ गए हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>नियुक्त अभ्यर्थियों के भविष्य पर सवाल</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">JSSC-CGL के जरिए नियुक्त होकर विभिन्न पदों पर काम कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा रद्द किए जाने के बाद उनकी नियुक्ति और भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। उनका कहना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो जांच कर दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, लेकिन पूरी परीक्षा रद्द करने से उन अभ्यर्थियों को भी नुकसान होगा जिन्होंने अपनी मेहनत और चयन प्रक्रिया के जरिए नौकरी हासिल की है।</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>जम्मू-कश्मीर से तमिलनाडु तक बारिश से चिंता, असम-ओडिशा में बाढ़ से हाहाकार; IMD के अनुमान में क्या?</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/jammu-kashmir-to-tamil-nadu-rain-alert-assam-odisha-flood-imd-forecast/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 17 Aug 2026 04:13:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Weather]]></category>
		<category><![CDATA[Nation]]></category>
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					<description><![CDATA[देश के कई हिस्सों में बारिश ने चिंता बढ़ा दी है। जम्मू-कश्मीर के डोडा में बाढ़ जैसे हालात हैं, ओडिशा के मयूरभंज में नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है और सिक्किम में भूस्खलन प्रभावित परिवारों को हटाया गया है। तमिलनाडु में भारी बारिश और तेज हवाओं का अनुमान है, जबकि दिल्ली में 22 अगस्त तक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">देश के कई हिस्सों में बारिश ने चिंता बढ़ा दी है। जम्मू-कश्मीर के डोडा में बाढ़ जैसे हालात हैं, ओडिशा के मयूरभंज में नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है और सिक्किम में भूस्खलन प्रभावित परिवारों को हटाया गया है। तमिलनाडु में भारी बारिश और तेज हवाओं का अनुमान है, जबकि दिल्ली में 22 अगस्त तक बादल और हल्की बारिश के आसार हैं। क्या आने वाले दिनों में मौसम और बिगड़ेगा? देश के बाकी हिस्सों में मौसम का क्या हाल है। आइए, सबकछ विस्तार से जानते हैं…</p>



<p class="wp-block-paragraph">देश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी है और इसके कारण कहीं बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं तो कहीं भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। जम्मू-कश्मीर के डोडा में भारी बारिश के बाद नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। ओडिशा के मयूरभंज में भी लगातार बारिश और बढ़ते नदी जलस्तर ने निचले इलाकों के लिए खतरा बढ़ा दिया है। सिक्किम में हालिया भूस्खलन के बाद प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर भेजने का निर्देश दिया गया है। दक्षिण में तमिलनाडु के कई जिलों में भारी बारिश, आंधी और तेज हवाओं का अनुमान है। वहीं दिल्ली में भी अगले छह दिनों तक मौसम बदला रहने की संभावना है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>डोडा में बारिश के बाद कैसे बने बाढ़ जैसे हालात?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के भलेसा गंडोह इलाके में ताजा भारी बारिश के बाद बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। बारिश के कारण बाजारों, सड़कों, नालों और नदियों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ा है। चिनाब नदी भी ऊंचे जलस्तर पर बह रही है। ऐसे हालात में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। तेज बहाव वाले पानी में वाहन चलाना या नालों और नदियों के करीब जाना जोखिम भरा हो सकता है। लगातार बारिश के बीच स्थानीय स्तर पर जलस्तर पर नजर रखना जरूरी हो गया है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>ओडिशा में बाढ़ का खतरा क्यों बढ़ रहा है?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">ओडिशा के मयूरभंज जिले में लगातार भारी बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ का खतरा गंभीर बना हुआ है। निचले इलाकों में पानी बढ़ने से लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। इसी बीच बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने नए कम दबाव के क्षेत्र से आने वाले दिनों में बारिश और तेज होने की आशंका जताई गई है। इसका असर पहले से बारिश झेल रहे इलाकों पर पड़ सकता है। ऐसे में मयूरभंज के संवेदनशील और निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए सतर्कता जरूरी हो गई है।<br></p>



<figure class="wp-block-embed is-type-rich is-provider-x wp-block-embed-x"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<div class="embed-x"><blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="en" dir="ltr"><a href="https://x.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#WATCH</a> | Odisha Higher Education Minister Suryabanshi Suraj says, &quot;Flood-like conditions have arisen in the rivers for the fourth time. We are following the same Standard Operating Procedures (SOPs) as before and are providing dry rations and free community kitchen facilities.… <a href="https://t.co/ackgMhpFJc">https://t.co/ackgMhpFJc</a> <a href="https://t.co/4kUeQS7b3y">pic.twitter.com/4kUeQS7b3y</a></p>&mdash; ANI (@ANI) <a href="https://x.com/ANI/status/2089165977602998768?ref_src=twsrc%5Etfw">August 17, 2026</a></blockquote><script async src="https://platform.x.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></div>
</div></figure>



<p class="wp-block-paragraph">ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-53 का करीब 100 मीटर हिस्सा रविवार को धंस गया। यह खंड पारादीप पोर्ट को जाजपुर के खनिज समृद्ध क्षेत्रों से जोड़ता है। अधिकारियों ने बताया कि लगातार बारिश के कारण यह घटना हुई। घटना मार्शघाई पुलिस थाना क्षेत्र के नीलाचल बाजार के पास हुई। इससे स्थानीय लोगों में चिंता फैल गई। निर्माणाधीन खंड पर खड़े तीन ट्रक धंसने के बाद एक खाई में गिर गए। पुलिस ने बताया कि ट्रकों में ड्राइवर या हेल्पर नहीं थे, इसलिए कोई हताहत नहीं हुआ। एनएचएआई भुवनेश्वर क्षेत्रीय कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सड़क धंसने का कारण लंबे समय तक जलभराव बताया। उन्होंने कहा कि ट्रक वहां पार्क करने के लिए अधिकृत नहीं थे। यह प्रभावित खंड NH-53 की पुनर्निर्माण और चौड़ीकरण परियोजना का हिस्सा है।</p>



<figure class="wp-block-image"><img data-recalc-dims="1" decoding="async" src="https://i0.wp.com/spiderimg.amarujala.com/assets/images/2026/08/01/odasha-ma-bugdhha-ka-kahara-jara_1ff7644394f52d9e924383f02d763502.gif?w=1200&#038;ssl=1" alt="" title="जम्मू-कश्मीर से तमिलनाडु तक बारिश से चिंता, असम-ओडिशा में बाढ़ से हाहाकार; IMD के अनुमान में क्या? 3"></figure>



<h3 class="wp-block-heading"><em><strong>मुख्यमंत्री माझी आज करेंगे प्रभावित जिलों का दौरा</strong></em></h3>



<ul class="wp-block-list">
<li>मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी सोमवार को बाढ़ प्रभावित भद्रक और जाजपुर जिलों का दौरा करेंगे।</li>



<li>बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण राज्य में भारी बारिश का दौर जारी है।</li>



<li>भारी बारिश के बीच अब तक 2.37 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।</li>



<li>प्रभावित लोगों के लिए 293 राहत शिविर बनाए गए हैं।</li>



<li>मुख्यमंत्री ने कहा है कि सरकार हालात पर लगातार नजर रख रही है और प्रभावित लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।</li>



<li>बालासोर, भद्रक और जाजपुर में बचाव कार्यों की निगरानी के लिए तीन वरिष्ठ अधिकारियों को तैनात किया गया है।</li>



<li>मुख्य सचिव अनु गर्ग ने राज्य में सभी सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं।</li>



<li>मौसम विभाग ने 16 से 18 अगस्त तक तीन दिनों के लिए बहुत भारी बारिश का अनुमान जताया है।</li>



<li>बालासोर, भद्रक, जाजपुर, मयूरभंज और क्योंझर जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है।</li>



<li>मौसम विभाग ने 16 से 18 अगस्त तक मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी है।<br> </li>
</ul>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>सिक्किम में भूस्खलन के बाद प्रशासन ने क्या किया?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">सिक्किम के ग्यालशिंग जिले में हालिया भूस्खलन के बाद प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर भेजने का निर्देश दिया है। यह कार्रवाई युक्सोम उपखंड के 11-रिंबी तिम्ब्रोंग जीपीयू क्षेत्र में की गई है। पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश होने पर भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में प्रभावित परिवारों को संवेदनशील स्थानों से हटाना सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम है। बारिश के दौरान पहाड़ी सड़कों और ढलानों पर भी खतरा बढ़ सकता है, इसलिए स्थानीय प्रशासन की चेतावनी को गंभीरता से लेना जरूरी है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>तमिलनाडु में किन इलाकों में भारी बारिश का अनुमान है?</strong></h2>



<p class="has-text-align-center wp-block-paragraph">तमिलनाडु में आने वाले दिनों में बारिश का असर बढ़ने की संभावना है। चेंगलपट्टू, कांचीपुरम, विल्लुपुरम और तिरुवन्नामलाई जिलों में कुछ स्थानों पर भारी बारिश का अनुमान है। बारिश के साथ गरज और तेज हवाएं भी चल सकती हैं। तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल के बाकी हिस्सों में भी कुछ जगहों पर गरज के साथ हल्की बारिश हो सकती है। पश्चिमी घाट से लगे इलाकों के अलावा चेन्नई, तिरुवल्लुर और कुड्डालोर समेत 16 जिलों में मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है। इससे कुछ इलाकों में उमस से राहत मिल सकती है, लेकिन जलभराव की परेशानी भी पैदा हो सकती है।<br><br><img decoding="async" alt="" src="https://www.amarujala.com/india-news/%E0%A4%A4%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A1%E0%A5%81%20%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B6" title="जम्मू-कश्मीर से तमिलनाडु तक बारिश से चिंता, असम-ओडिशा में बाढ़ से हाहाकार; IMD के अनुमान में क्या? 4"><img data-recalc-dims="1" decoding="async" alt="" src="https://i0.wp.com/spiderimg.amarujala.com/assets/images/2024/11/27/tamil-nadu-rain_c63ef958a9fefc3a65487156fbdb79c7.jpeg?w=1200&#038;ssl=1" title="जम्मू-कश्मीर से तमिलनाडु तक बारिश से चिंता, असम-ओडिशा में बाढ़ से हाहाकार; IMD के अनुमान में क्या? 5"></p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>मंगलवार और बुधवार को कहां तेज बारिश हो सकती है?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">मंगलवार को चेंगलपट्टू और विल्लुपुरम में कुछ स्थानों पर आंधी-तूफान के साथ भारी बारिश होने की संभावना है। पुडुचेरी के अलावा चेन्नई, तिरुवल्लुर, रानीपेट, वेल्लोर, तिरुवन्नामलाई, कल्लाकुरिची और कुड्डालोर में भी कुछ जगहों पर मध्यम बारिश, आंधी और तेज हवाएं चल सकती हैं। इसके बाद बुधवार, 19 अगस्त को नीलगिरी, चेन्नई, चेंगलपट्टू, तिरुवल्लुर और विल्लुपुरम में कुछ स्थानों पर जोरदार बारिश का अनुमान है। इस दौरान तेज हवाओं की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>दिल्ली में 22 अगस्त तक कैसा रहेगा मौसम?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">दिल्ली-एनसीआर में भी अगले छह दिनों तक मौसम का मिजाज बदला हुआ रहने की संभावना है। 17 से 22 अगस्त के बीच आसमान में आमतौर पर बादल छाए रह सकते हैं और अलग-अलग दिनों में हल्की बारिश हो सकती है। 17 अगस्त को सुबह से दोपहर के बीच बहुत हल्की बारिश के साथ शाम और रात में बूंदाबांदी के आसार हैं। 18 अगस्त को भी कई बार बहुत हल्की से हल्की बारिश हो सकती है। 19 और 20 अगस्त को बारिश की गतिविधियां बढ़ने का अनुमान है। इन दिनों कुछ स्थानों पर मध्यम बारिश भी हो सकती है। 21 और 22 अगस्त को फिर हल्की बारिश का दौर रहने की संभावना है। इस दौरान अधिकतम तापमान 32 से 35 और न्यूनतम 22 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>तेज बारिश और आंधी के दौरान लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">भारी बारिश और आंधी-तूफान वाले इलाकों में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। पानी भरी या फिसलन वाली सड़कों पर वाहन चलाते समय गति कम रखनी चाहिए। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को जलभराव की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए। बिजली कड़कने के दौरान पेड़, बिजली के खंभे या कमजोर ढांचे के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए। तेज हवाओं के दौरान खुले स्थानों पर जाने से भी बचना बेहतर है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की आशंका वाले स्थानों पर प्रशासन की अनुमति के बिना जाने से बचना चाहिए।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>क्या बारिश राहत के साथ नई परेशानी भी ला सकती है?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">बारिश से गर्मी और उमस से राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन कम समय में तेज बारिश कई जगहों पर परेशानी भी बढ़ा सकती है। शहरों के निचले इलाकों में पानी भरने से यातायात प्रभावित हो सकता है। तमिलनाडु में तेज हवाओं के साथ बारिश होने पर स्थानीय स्तर पर आवागमन प्रभावित होने की आशंका है। ओडिशा और जम्मू-कश्मीर में पहले से बढ़े नदी और नालों के जलस्तर के कारण अतिरिक्त बारिश बाढ़ का खतरा बढ़ा सकती है। सिक्किम जैसे पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश भूस्खलन का खतरा बढ़ा सकती है। इसलिए बारिश को केवल राहत के रूप में देखना सही नहीं होगा।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>आने वाले दिनों में किन इलाकों पर नजर रहेगी?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">आने वाले दिनों में जम्मू-कश्मीर, सिक्किम, ओडिशा, तमिलनाडु और दिल्ली के मौसम पर खास नजर रहेगी। डोडा में जलस्तर बढ़ने से बाढ़ जैसे हालात हैं। मयूरभंज में लगातार बारिश के बीच नया कम दबाव का क्षेत्र चिंता बढ़ा रहा है। सिक्किम में भूस्खलन प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर भेजा गया है। तमिलनाडु में कई जिलों के लिए भारी बारिश और तेज हवाओं का अनुमान है। दिल्ली में 22 अगस्त तक बादल और बारिश का दौर बना रह सकता है। यानी आने वाले दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का असर अलग-अलग रूप में दिखाई दे सकता है।</p>
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		<title>Students Protest: Gen-Z के बाद Gen Alpha दिखाने लगे अपनी ताकत, सड़कों पर उतरने लगे स्कूली छात्र!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:22:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जंतर-मंतर (Jantar Mantar Protest) पर हुए जेन-जी (Gen-Z) के विरोध प्रदर्शन ने देश की जेन-अल्फा (Gen Alpha) को शायद एक रास्ता दिखा दिया है। जिस जेन-अल्फा ने देश में कभी कोई प्रदर्शन या आंदोलन नहीं देखा था। उसे शायद अपनी समस्याओं के समाधान का रास्ता दिख गया है। या यूं कहें कि जेन-जी के बाद [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">जंतर-मंतर (Jantar Mantar Protest) पर हुए जेन-जी (Gen-Z) के विरोध प्रदर्शन ने देश की जेन-अल्फा (Gen Alpha) को शायद एक रास्ता दिखा दिया है। जिस जेन-अल्फा ने देश में कभी कोई प्रदर्शन या आंदोलन नहीं देखा था। उसे शायद अपनी समस्याओं के समाधान का रास्ता दिख गया है। या यूं कहें कि जेन-जी के बाद अब जेन-अल्फा अपनी ताकत दिखाने पर आमादा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">देश में हाल के दिनों में छात्र आंदोलनों की चर्चा के बीच अब स्कूली छात्रों के विरोध-प्रदर्शन ने भी ध्यान खींचा है। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं स्कूल की बुनियादी सुविधाओं को लेकर प्रदर्शन करने सड़क पर उतर गए। सोशल मीडिया पर इस प्रदर्शन को ‘Gen Alpha Protest’ के नाम से चर्चा मिली।</p>



<h2 class="wp-block-heading">फतेहपुर में सड़क पर उतरे स्कूली छात्र</h2>



<p class="wp-block-paragraph">मामला उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के किशनपुर स्थित सर्वोदय इंटर कॉलेज का है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 जुलाई 2026 को बड़ी संख्या में छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार कर स्कूल परिसर में प्रदर्शन किया। छात्रों ने साफ पेयजल, बिजली, पंखे, शौचालय, फर्नीचर और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">छात्र हाथों में पोस्टर और डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीरें लेकर अपनी मांगों के समर्थन में जुटे। प्रदर्शन कई घंटे चला, जिसके बाद शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और छात्रों से बातचीत की।</p>



<h2 class="wp-block-heading">छात्रों की क्या थीं मांगें?</h2>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने स्कूल में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। इनमें प्रमुख रूप से:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>हर कक्षा में पर्याप्त पंखे और बिजली की व्यवस्था</li>



<li>साफ पेयजल की सुविधा</li>



<li>साफ-सुथरे शौचालय</li>



<li>पर्याप्त डेस्क और बेंच</li>



<li>स्कूल परिसर और खेल मैदान की बेहतर सफाई</li>



<li>मिड-डे मील की व्यवस्था में सुधार</li>



<li>स्कूल की आधारभूत सुविधाओं को दुरुस्त करना</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph">रिपोर्ट्स के अनुसार, अधिकारियों ने छात्रों की अधिकांश मांगों को लिखित रूप से पूरा करने का आश्वासन दिया। स्कूल में पंखे लगाने, बिजली की खराब वायरिंग ठीक करने और पेयजल के लिए RO की व्यवस्था करने समेत कई कदम उठाने की बात कही गई।</p>



<h2 class="wp-block-heading">Gen-Z के बाद Gen Alpha की चर्चा क्यों?</h2>



<p class="wp-block-paragraph">इस प्रदर्शन को ‘Gen Alpha Protest’ इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में कम उम्र के स्कूली छात्र शामिल थे। Gen Alpha शब्द आमतौर पर 2010 के दशक के बाद जन्म लेने वाली पीढ़ी के लिए इस्तेमाल किया जाता है, हालांकि इसकी सटीक जन्म-वर्ष सीमा अलग-अलग स्रोतों में अलग बताई जाती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">फतेहपुर का यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ जब देश में Gen-Z से जुड़े छात्र आंदोलनों की चर्चा चल रही थी। ऐसे में सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे अगली पीढ़ी के छात्रों की आवाज के तौर पर देखा।</p>



<h2 class="wp-block-heading">सोशल मीडिया पर वायरल हुआ प्रदर्शन</h2>



<p class="wp-block-paragraph">छात्रों के प्रदर्शन के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए। पोस्टर लेकर प्रदर्शन करते स्कूली छात्रों की तस्वीरों ने लोगों का ध्यान खींचा। कई यूजर्स ने इसे इस बात का संकेत बताया कि अब कम उम्र के छात्र भी अपने शिक्षा अधिकारों और स्कूल की सुविधाओं को लेकर खुलकर सवाल उठा रहे हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">प्रशासन ने दिया लिखित आश्वासन</h2>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदर्शन के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने छात्रों और स्कूल प्रशासन से बातचीत की। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रशासन ने बिजली, पंखे, पेयजल, शौचालय, फर्नीचर और अन्य सुविधाओं को बेहतर करने का आश्वासन दिया। इसके बाद छात्रों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यह घटना इस लिहाज से भी अहम है कि छात्रों ने किसी राजनीतिक मुद्दे के बजाय सीधे अपने स्कूल की बुनियादी सुविधाओं को लेकर आवाज उठाई। फतेहपुर के बाद देश के दूसरे हिस्सों में भी स्कूली छात्रों के स्थानीय समस्याओं को लेकर प्रदर्शन की खबरें सामने आई हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल</h2>



<p class="wp-block-paragraph">फतेहपुर का मामला केवल एक स्कूल की सुविधाओं तक सीमित नहीं माना जा सकता। जब छात्रों को पीने के पानी, पंखे, शौचालय, फर्नीचर और शिक्षकों जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए प्रदर्शन करना पड़े, तो यह स्कूलों की आधारभूत व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">Gen-Z के बाद Gen Alpha के नाम से चर्चा में आया यह प्रदर्शन बताता है कि नई पीढ़ी अपने अधिकारों और जरूरतों को लेकर पहले की तुलना में अधिक मुखर दिखाई दे रही है। हालांकि किसी भी छात्र आंदोलन का आकलन उसके वास्तविक मुद्दों और प्रशासन द्वारा किए गए सुधारों के आधार पर किया जाना चाहिए, केवल ‘Gen Alpha’ जैसे लेबल के आधार पर नहीं।</p>
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