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	<title>Assam &#8211; RNSNS News</title>
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	<title>Assam &#8211; RNSNS News</title>
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		<title>Assam Flood: 103 लोगों की मौत, सात लाख से ज्यादा विस्थापित; 433 गांव जलमग्न, बाढ़ के बाद कैसे लौटेगी जिंदगी?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 17 Aug 2026 04:01:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Assam]]></category>
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					<description><![CDATA[असम में इस साल की बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। 19 जुलाई से शुरू हुए बाढ़ के दौर में अब तक 103 लोगों की मौत बताई गई है। 433 गांव जलमग्न हैं और सात लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं। हजारों लोग अब भी राहत शिविरों में रह रहे हैं। घर, [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph"><em>असम में इस साल की बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। 19 जुलाई से शुरू हुए बाढ़ के दौर में अब तक 103 लोगों की मौत बताई गई है। 433 गांव जलमग्न हैं और सात लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं। हजारों लोग अब भी राहत शिविरों में रह रहे हैं। घर, फसल और रोजगार तबाह होने के बाद सबसे बड़ा सवाल है कि प्रभावित परिवार दोबारा अपनी जिंदगी कैसे शुरू करेंगे? आइए, विस्तार से बाढ़ के हालातों को समझने की कोशिश करते हैं&#8230;</em><br><br>असम में बाढ़ हर साल आती है, लेकिन इस बार ऊपरी असम के शिवसागर और चराइदेव में हालात बेहद गंभीर रहे। 19 जुलाई से 27-28 जुलाई के बीच बाढ़ ने विकराल रूप ले लिया। इस दौरान अब तक 103 लोगों की मौत हो चुकी है। 433 गांव जलमग्न हैं और सात लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं। बाढ़ का पानी घटने के बावजूद राज्य के कई इलाकों में तबाही के निशान अब भी साफ दिखाई दे रहे हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>बाढ़ की शुरुआत कैसे हुई और सबसे ज्यादा असर कहां पड़ा?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">19 जुलाई को नगालैंड के मोन जिले की पहाड़ियों में हुई तेज बारिश के बाद नीचे बहने वाली दिखौ नदी में अचानक पानी बढ़ गया। इसके बाद बाढ़ का पानी कई गांवों में घुस गया। शिवसागर और चराइदेव के अलावा गोलाघाट समेत कई इलाकों में लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। अब भी करीब 49 हजार विस्थापित लोग राहत शिविरों और वितरण केंद्रों में रहने को मजबूर हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>घर बचे तो भी लोगों के सामने कौन सी नई मुसीबत है?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित इलाकों में घरों के अंदर कीचड़ और गाद जमा है। नतून बस्ती, हिलनी, सिंगेल बस्ती और गंगेडाढ़ा में लोगों के घरों में सामान तक कीचड़ में दब गया है। कहीं दीवारें गिर गई हैं तो कहीं कपड़े, बर्तन, अनाज और बच्चों की किताबें खराब हो गई हैं। कई मवेशी बह गए और गौशालाएं खाली हो गईं। अब लोगों के सामने घरों के साथ रोजगार और बच्चों की पढ़ाई दोबारा शुरू करने की चुनौती है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>ग्रामीणों ने खुद कैसे संभाला मोर्चा?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">बाढ़ के शुरुआती दौर में जब बचाव दल हर जगह नहीं पहुंच पाए थे, तब स्थानीय मल्लाहों ने बड़ी भूमिका निभाई। गांव के करीब 25 मल्लाहों ने नावों के जरिए तेज बहाव के बीच लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। उनके प्रयास से करीब 1,500 लोगों की जान बचाई गई। पानी कम होने के बाद अब राहत और पुनर्वास का काम चुनौती बना हुआ है। नेपालीखुटी जाने वाले रास्तों में जगह-जगह किताबों के ढेर और बाढ़ से बर्बाद सामान दिखाई दे रहे हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>फसल और बच्चों की पढ़ाई पर कितना असर पड़ा?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">बाढ़ ने सिर्फ घरों को नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि खेती और बच्चों की पढ़ाई पर भी गहरा असर डाला है। 10,884 हेक्टेयर से अधिक फसल क्षेत्र बर्बाद होने की जानकारी दी गई है। बच्चों की किताबें और पढ़ाई का सामान पानी और कीचड़ में खराब हो गया है। ऐसे में प्रभावित परिवारों के सामने घर की मरम्मत, रोजगार की शुरुआत और बच्चों की पढ़ाई फिर से शुरू कराने की एक साथ चुनौती है। राज्य में अब भी करीब 49 हजार लोग 125 राहत शिविरों में रह रहे हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>पुनर्वास के लिए कितनी बड़ी रकम की जरूरत होगी?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा है कि बाढ़ से हुई क्षति की भरपाई और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास में एक हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है। इसका मतलब है कि पानी उतरने के बाद भी सरकार के सामने राहत से कहीं बड़ा पुनर्निर्माण अभियान होगा। दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने असम के बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए 10 करोड़ रुपये देने की घोषणा की है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>अब असम के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">बाढ़ का पानी कम होने के बावजूद असम के प्रभावित इलाकों में संकट खत्म नहीं हुआ है। हजारों परिवारों को अभी राहत शिविरों से वापस जाकर अपने घरों को रहने लायक बनाना है। टूटे मकानों की मरम्मत, फसल के नुकसान की भरपाई, मवेशियों की व्यवस्था और बच्चों की पढ़ाई दोबारा शुरू करना जरूरी है। इस बाढ़ ने 103 लोगों की जान लेने के साथ बड़े पैमाने पर विस्थापन और आर्थिक नुकसान किया है। अब सरकार के सामने चुनौती सिर्फ बाढ़ से निपटने की नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों को दोबारा सामान्य जिंदगी में लौटाने की है।</p>
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		<title>असम में बाढ़ से हाहाकार: अब तक 22 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित, सीएम हिमंत ने दिए राहत-बचाव के निर्देश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 29 Jun 2026 04:16:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Assam]]></category>
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					<description><![CDATA[असम के छह जिलों में बाढ़ से 22,000 से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। धेमाजी सबसे ज्यादा प्रभावित है, जबकि रेलवे पुल क्षतिग्रस्त होने से ट्रेन सेवाएं रोक दी गई हैं और राहत-बचाव कार्य जारी है। असम और उसके पड़ोसी राज्य अरुणाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश की वजह से बाढ़ की स्थिति बन [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">असम के छह जिलों में बाढ़ से 22,000 से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। धेमाजी सबसे ज्यादा प्रभावित है, जबकि रेलवे पुल क्षतिग्रस्त होने से ट्रेन सेवाएं रोक दी गई हैं और राहत-बचाव कार्य जारी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">असम और उसके पड़ोसी राज्य अरुणाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश की वजह से बाढ़ की स्थिति बन गई है। अधिकारियों ने रविवार को जानकारी दी कि राज्य के छह जिलों में 22,000 से अधिक लोग इस आपदा की चपेट में हैं। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के आंकड़ों के मुताबिक, धेमाजी, नलबाड़ी, डिब्रूगढ़, चिरांग, लखीमपुर और कोकराझार जिलों में कुल 22,124 लोग प्रभावित हुए हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">धेमाजी जिला बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। यहां 15,483 लोग बढ़ते जलस्तर की वजह से संकट का सामना कर रहे हैं। बाढ़ के पानी ने 96 गांवों को पूरी तरह डुबो दिया है। इस आपदा ने लगभग 1,690 हेक्टेयर फसल क्षेत्र को भी नष्ट कर दिया है। इंसानों के साथ-साथ 48,199 जानवर भी इस बाढ़ की मार झेल रहे हैं। लगातार हो रही बारिश ने ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों के जलस्तर को बढ़ा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, शिवसागर जिले के नांगलामुराघाट में दिसांग नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने रविवार को कहा कि सरकार धेमाजी जिले में राहत और पुनर्वास के लिए संसाधन जुटा रही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में बताया कि वह स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह लोगों के जीवन पर पड़े इस प्रभाव से बहुत दुखी हैं। इस कठिन समय में सरकार लोगों के साथ मजबूती से खड़ी है। मुख्यमंत्री ने जल संसाधन मंत्री सुशांत बोरगोहेन और राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री केशव महंत को धेमाजी में ही रुकने का निर्देश दिया है। ये दोनों मंत्री वहां रहकर राहत प्रक्रिया की पूरी निगरानी करेंगे। सरकार प्रभावित परिवारों की सुरक्षा और उनके लंबे समय के पुनर्वास को प्राथमिकता दे रही है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">धेमाजी जिले में भारी बारिश और मिट्टी के कटाव की वजह से सिमेन नदी पर बना एक रेलवे पुल आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गया है। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) ने बताया कि अर्चिपथार और सिमेन चापरी स्टेशनों के बीच ट्रेनों की आवाजाही अनिश्चित काल के लिए रोक दी गई है। यह पुल साल 1965 में बना था और बाद में इसे ब्रॉड गेज में बदला गया था। भारी बारिश के कारण नदी का किनारा बह जाने से पुल का एक खंभा अस्थिर हो गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">रेलवे ने स्पष्ट किया कि किसी भी ट्रेन को नुकसान नहीं पहुंचा है और न ही कोई व्यक्ति घायल हुआ है। यह एक कम ट्रैफिक वाली लाइन है और नदी का जलस्तर बढ़ने की वजह से ट्रैफिक पहले ही रोक दिया गया था। तिनसुकिया डिवीजन के तहत मुरकोंगसेलेक और सिलापाथर के बीच ट्रेन सेवाएं अगले आदेश तक बंद रहेंगी। इस रूट की ट्रेनें सिलापाथर तक ही चलेंगी और वहीं से वापस लौटेंगी। यात्रियों की मदद के लिए धेमाजी, सिलापाथर और मुरकोंगसेलेक स्टेशनों पर हेल्प डेस्क खोले गए हैं। यात्रियों को लाने-ले जाने के लिए बसों का इंतजाम भी किया गया है। रेलवे अधिकारी राज्य सरकार के साथ मिलकर स्थिति पर नजर रख रहे हैं।<br><br></p>
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		<title>हिमंत बिस्व की कल्याणकारी योजनाओं के आगे विपक्ष पस्त, विकास पर जनता की मुहर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 May 2026 03:54:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Assam]]></category>
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					<description><![CDATA[इस चुनाव में भाजपा ने पूरी तरह फ्रंटफुट पर खेलते हुए आक्रामक रणनीति अपनाई। सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने हर रैली और जनसभा में विपक्ष को सीधे निशाने पर लिया और मुद्दों को रक्षात्मक होने के बजाय आक्रामक तरीके से पेश किया। भाजपा ने पहचान और सुरक्षा को प्रमुख मुद्दा बनाया। विपक्ष को अस्थिर और दिशाहीन [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">इस चुनाव में भाजपा ने पूरी तरह फ्रंटफुट पर खेलते हुए आक्रामक रणनीति अपनाई। सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने हर रैली और जनसभा में विपक्ष को सीधे निशाने पर लिया और मुद्दों को रक्षात्मक होने के बजाय आक्रामक तरीके से पेश किया। भाजपा ने पहचान और सुरक्षा को प्रमुख मुद्दा बनाया। विपक्ष को अस्थिर और दिशाहीन बताया।<br><br>असम विधानसभा चुनाव के रुझानों ने राज्य की राजनीति को लेकर एक स्पष्ट और निर्णायक संदेश दिया है। यह जनादेश सिर्फ सत्ता में वापसी का नहीं, बल्कि विकास और वेलफेयर मॉडल पर जनता की ठोस मुहर है। भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का लगातार तीसरी बार सरकार बनाना इस बात का संकेत है कि मतदाताओं ने स्थिरता और निरंतरता को प्राथमिकता दी है। मामा के नाम से मशहूर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा का विकास मॉडल इस चुनाव में साफ तौर पर जनता के सिर चढ़कर बोलता नजर आया।<br><br>मामा मॉडल, जिसमें कल्याणकारी योजनाओं की सीधी पहुंच और जमीनी विकास का संतुलित मेल है, ने मतदाताओं के बीच गहरी पकड़ बनाई। इस बार चुनाव में पारंपरिक जातीय, क्षेत्रीय और भावनात्मक मुद्दे पीछे छूटते नजर आए, जबकि काम, कल्याण और दिखने वाला विकास केंद्र में रहा। गांव से शहर तक, महिला से युवा मतदाता तक, हर वर्ग ने सीधे लाभ पहुंचाने वाली योजनाओं और बुनियादी ढांचे में आए बदलाव को ध्यान में रखकर मतदान किया। यही वजह है कि पूरे असम ने विकास मॉडल के पक्ष में सामूहिक जनादेश देते हुए यह साफ कर दिया है कि अब राजनीति का केंद्र वादों से ज्यादा उनके जमीनी असर पर टिका है।<br><br><strong>आशीर्वाद यात्रा : जमीनी संपर्क का मास्टरस्ट्रोक</strong><br>चुनाव से पहले मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की आशीर्वाद यात्रा एनडीए के लिए निर्णायक साबित हुई। इस यात्रा में सरमा ने राज्य के लगभग हर क्षेत्र को कवर किया। यह सिर्फ एक राजनीतिक रैली नहीं थी, बल्कि इसने एक फीडबैक मिशन की तरह काम किया। यात्रा के दौरान सरमा ने गांव-गांव जाकर योजनाओं का असर समझा, स्थानीय समस्याएं सुनीं और मौके पर समाधान का भरोसा दिया। इससे सरकार और जनता के बीच दूरी काफी कम हुई। चुनावी नजरिए से देखें तो इस यात्रा ने एनडीए को एक मजबूत ग्राउंड नेटवर्क और माहौल दोनों दिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>वेलफेयर मॉडल बना गेमचेंजर</strong><br>असम में एनडीए की जीत की सबसे मजबूत नींव उसकी वेलफेयर पॉलिसी रही, जिसे सिर्फ घोषणा तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि जमीनी स्तर तक पहुंचाया गया। हिमंत सरकार ने खासतौर पर गरीब, महिला और ग्रामीण वर्ग को सीधे लक्षित किया। ओरुनोदोई योजना इस मॉडल का केंद्र रही, जिसके तहत लाखों महिलाओं के बैंक खातों में हर महीने सीधे पैसे भेजे गए। इससे न सिर्फ आर्थिक राहत मिली, बल्कि महिलाओं का सरकार पर भरोसा भी बढ़ा। स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता, छात्र-छात्राओं के लिए मुफ्त शिक्षा और स्कॉलरशिप, चाय बागान मजदूरों के लिए विशेष पैकेज और स्वास्थ्य योजनाओं के जरिये मुफ्त इलाज जैसी पहल ने अलग-अलग वर्गों को जोड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह सीधा लाभ पहुंचाने के साथ भावनात्मक जुड़ाव का मेल था, जिसने वोटों को एनडीए की ओर मोड़ा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>आक्रामक चुनाव अभियान : रक्षात्मक नहीं, सीधा हमला</strong><br>इस चुनाव में भाजपा ने पूरी तरह फ्रंटफुट पर खेलते हुए आक्रामक रणनीति अपनाई। सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने हर रैली और जनसभा में विपक्ष को सीधे निशाने पर लिया और मुद्दों को रक्षात्मक होने के बजाय आक्रामक तरीके से पेश किया। भाजपा ने पहचान और सुरक्षा को प्रमुख मुद्दा बनाया।&nbsp;विपक्ष को अस्थिर और दिशाहीन बताया। हिंदू वोटों का व्यापक ध्रुवीकरण हुआ। इस रणनीति ने चुनाव को पूरी तरह एनडीए बनाम विपक्ष के सीधे मुकाबले में बदल दिया, जिसमें एनडीए भारी पड़ा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>विकास का असर : दिखने वाला बदलाव</strong><br>असम में विकास सिर्फ वादों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोगों को जमीनी स्तर पर दिखा। नई सड़कें, पुल से कनेक्टिविटी बेहतर हुई। औद्योगिक निवेश से रोजगार के अवसर बढ़े। लॉजिस्टिक्स हब के रूप में असम की पहचान बनी। साथ ही, कानून-व्यवस्था में सुधार जैसे बदलावों ने खासकर युवा और शहरी मतदाताओं को प्रभावित किया। राजनीतिक तौर पर यह एक बड़ा बदलाव था, जहां मतदाता अब विकास का अनुभव करने के बाद वोट दे रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>परिसीमन : बदला चुनावी गणित</strong><br>2026 का विधानसभा चुनाव परिसीमन के बाद पहला चुनाव है। इसका असर सीधे नतीजों में दिखा। नई सीमाओं ने कई सीटों का सामाजिक समीकरण बदल दिया। कुछ क्षेत्रों में नए मतदाता जुड़े, जबकि पुराने वोट बैंक कमजोर हुए।&nbsp;&nbsp;ऊपरी असम में कांग्रेस का पारंपरिक आधार प्रभावित हुआ, जिसका सीधा फायदा एनडीए को मिला। विशेषज्ञ मानते हैं कि परिसीमन ने एनडीए को संरचनात्मक लाभ पहुंचाया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>विपक्ष की कमजोरी</strong><br>रणनीति बनाने से लेकर जमीनी क्रियान्वयन तक कांग्रेस और उसके सहयोगी दल चुनाव में कई स्तरों पर कमजोर नजर आए। कोई स्पष्ट विजन या नैरेटिव नहीं होना, जमीनी संगठन कमजोर होना, पारंपरिक वोट बैंक में गिरावट, गठबंधन के बावजूद तालमेल की कमी विपक्ष पर भारी पड़ी। विपक्ष मुद्दे उठाने में तो सफल रहा, लेकिन उन्हें वोट में बदलने में पूरी तरह असफल रहा।</p>
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		<title>पेट्रोल-डीजल की अफवाहों पर पैनिक खरीदारी, गुवाहाटी समेत कई पंपों पर कतारें; सरकार का दावा- कोई कमी नहीं</title>
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		<pubDate>Thu, 26 Mar 2026 04:18:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Assam]]></category>
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					<description><![CDATA[असम में ईंधन की अफवाहों के बावजूद सरकार ने भरोसा दिलाया है कि पूरे राज्य में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। प्रशासन और तेल कंपनियों ने आम जनता से शांति बनाए रखने और जरूरत के अनुसार ही ईंधन खरीदने की अपील की है। असम के कई हिस्सों में खासकर गुवाहाटी में बुधवार [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">असम में ईंधन की अफवाहों के बावजूद सरकार ने भरोसा दिलाया है कि पूरे राज्य में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। प्रशासन और तेल कंपनियों ने आम जनता से शांति बनाए रखने और जरूरत के अनुसार ही ईंधन खरीदने की अपील की है।<br><br>असम के कई हिस्सों में खासकर गुवाहाटी में बुधवार को पेट्रोल और डीजल के लिए पैनिक खरीदारी की खबरें सामने आईं। सोशल मीडिया पर ईंधन की कमी की अफवाहों के चलते लोग अपने वाहनों के टैंक भरने के लिए पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों में खड़े दिखे। गुवाहाटी में कुछ पेट्रोल पंपों ने &#8216;नो फ्यूल&#8217; के बोर्ड लगाए या स्टॉक खत्म होने के कारण पूरी तरह बंद कर दिए। इसी तरह की घटनाएं गोलाघाट, नागांव और दारांग जिलों से भी मिलीं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>प्रशासन और पेट्रोल डीलरों का बयान</strong><br>कम रूप (मेट्रोपॉलिटन) जिला आयुक्त स्वप्नील पॉल ने भी स्पष्ट किया कि ईंधन की कोई कमी नहीं है। एक पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के सूत्र ने कहा कि कुछ एजेंसियां प्रति व्यक्ति बिक्री को सीमित कर रही हैं ताकि सभी पंपों में स्टॉक पर्याप्त रहे। उन्होंने बताया पैनिक खरीदारी के कारण कुछ पंपों में स्टॉक जल्दी खत्म हो गया। साथ ही, क्रेडिट-लिंक्ड स्टॉक उठाने में बदलाव के कारण कुछ पंपों पर स्टॉक कम दिखाई दिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सरकार का रुख</strong><br>मुख्य सचिव रवि कोटा ने कहा कि राज्य में पेट्रोल या डीजल की कोई कमी नहीं है। उन्होंने शरारती तत्वों को अफवाह फैलाने का दोषी ठहराया। उन्होंने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा &#8220;हमने आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल सहित सभी आपूर्तिकर्ताओं से जांच की है। राज्य में पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है।&#8221; उन्होंने बताया कि गुवाहाटी में मौजूद 35 पेट्रोल पंपों की जांच की गई और सभी ने पर्याप्त स्टॉक होने की पुष्टि की।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि असम के सभी तेल विपणन कंपनियों और रिटेल आउटलेट्स में राज्य की सामान्य आवश्यकताओं के अनुसार स्टॉक पर्याप्त है। आईओसीएल ने रिटेलरों के भुगतान नियमों में भी ढील दी है, जिससे अब उन्हें खरीदारी के तीन दिन के भीतर भुगतान करने की सुविधा मिली है, पहले यह उसी दिन करना आवश्यक था। मुख्य सचिव ने लोगों से आग्रह किया कि वे अपनी सामान्य आवश्यकताओं के अनुसार ही ईंधन खरीदें और अफवाहों पर ध्यान न दें।</p>
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		<title>असम: भाजपा को बड़ा झटका मंत्री नंदिता गरलोसा ने छोड़ी पार्टी; कांग्रेस के टिकट पर हाफलोंग से लड़ेंगी चुनाव</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 23 Mar 2026 04:41:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Assam]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
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					<description><![CDATA[चुनावी मौसम में असम की राजनीति ने अचानक नया मोड़ ले लिया है। मंत्री नंदिता गरलोसा का दल बदलना न सिर्फ हाफलोंग सीट बल्कि पूरे राज्य के समीकरण बदल सकता है। क्या यह फैसला कांग्रेस को बढ़त दिलाएगा या भाजपा को नुकसान पहुंचाएगा? असम की राजनीति में चुनाव से पहले बड़ा फेरबदल देखने को मिला [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">चुनावी मौसम में असम की राजनीति ने अचानक नया मोड़ ले लिया है। मंत्री नंदिता गरलोसा का दल बदलना न सिर्फ हाफलोंग सीट बल्कि पूरे राज्य के समीकरण बदल सकता है। क्या यह फैसला कांग्रेस को बढ़त दिलाएगा या भाजपा को नुकसान पहुंचाएगा?</p>



<p class="wp-block-paragraph">असम की राजनीति में चुनाव से पहले बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। राज्य सरकार की मंत्री नंदिता गरलोसा ने भारतीय जनता पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। पार्टी के बयान के अनुसार, गरलोसा आगामी विधानसभा चुनाव में दीमा हसाओ जिले की हाफलोंग सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरेंगी। इसी बीच मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने हाफलोंग स्थित गरलोसा के घर का दौरा भी किया। हालांकि इस मुलाकात को लेकर दोनों पक्षों ने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया।<br><br><strong>टिकट कटने के बाद बदला राजनीतिक रुख</strong><br>भाजपा ने इस बार हाफलोंग सीट से नंदिता गरलोसा की जगह नए चेहरे रूपाली लांगथासा को मौका दिया है। टिकट न मिलने के बाद गरलोसा ने पार्टी से दूरी बना ली और कांग्रेस में शामिल हो गईं। कांग्रेस ने पहले इस सीट से अपने प्रदेश महासचिव निर्मल लंगथासा को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उन्होंने जनहित में अपना टिकट गरलोसा को देने पर सहमति जताई।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>कांग्रेस का दावा- जनता की आवाज हैं गरलोसा</strong><br>कांग्रेस ने अपने बयान में कहा कि नंदिता गरलोसा पिछले पांच वर्षों से दीमा हसाओ की मजबूत आवाज रही हैं और उन्होंने हमेशा अपने सिद्धांतों के लिए काम किया है।पार्टी ने आरोप लगाया कि हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली सरकार जनजातीय जमीनों को कॉरपोरेट्स को सौंपने में ज्यादा रुचि रखती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">गौरतलब है कि रविवार (22 मार्च) को&nbsp;कांग्रेस ने उम्मीदवारों की अपनी पांचवीं सूची जारी की थी। पांचवीं सूची में पार्टी की ओर से सात उम्मीदवारों के नामों का एलान किया गया है। इससे पहले&nbsp;तीन मार्च को 42 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची और शनिवार (21 मार्च) को 23 उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की थी। पार्टी ने असम में अपने गठबंधन सहयोगियों के लिए 15 सीट छोड़ी हैं। पहली दो सूचियों में शामिल उम्मीदवारों में कांग्रेस की असम इकाई के प्रमुख गौरव गोगोई का जोरहाट से, विधानसभा में विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया का नाजिरा से और प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के पूर्व अध्यक्ष रिपुन बोरा का बरचल्ला से नाम शामिल है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>असम विधानसभा चुनाव 2026</strong></h2>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>विधानसभा की कुल सीटें: 126, बहुमत के लिए: 64</strong></li>



<li><strong>अधिसूचना- 16 मार्च</strong></li>



<li><strong>नामांकन की आखिरी तारीख- 23 मार्च (आज)</strong></li>



<li><strong>नामांकन पत्रों की जांच- 24 मार्च</strong></li>



<li><strong>नाम वापसी की आखिरी तारीख- 26 मार्च</strong></li>



<li><strong>मतदान- 9 अप्रैल, नतीजे-  4 मई</strong></li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph">कांग्रेस 2016 से इस पूर्वोत्तर राज्य में सत्ता से बाहर है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश करेगी। निवर्तमान विधानसभा में सत्तारूढ़ भाजपा के 64 विधायक हैं, जबकि उसके सहयोगी असम गण परिषद (अगप) के नौ विधायक, यूपीपीएल के सात और बीपीएफ के तीन विधायक हैं। पक्ष में कांग्रेस के 26 विधायक, एआईयूडीएफ के 15 विधायक और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के एक विधायक हैं। एक निर्दलीय विधायक भी हैं।</p>
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		<title>असम दौरे पर जाएंगे पीएम मोदी और अमित शाह, 10 हजार करोड़ की विकास योजनाओं की सौगात</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Mar 2026 03:50:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Assam]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 और 14 मार्च को असम के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे करीब 10 हजार करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। प्रधानमंत्री गुवाहाटी, कोकराझार और सिलचर में जनसभाओं को संबोधित करेंगे। वहीं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 15 मार्च को गुवाहाटी पहुंचेंगे और कई कार्यक्रमों में [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 और 14 मार्च को असम के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे करीब 10 हजार करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। प्रधानमंत्री गुवाहाटी, कोकराझार और सिलचर में जनसभाओं को संबोधित करेंगे। वहीं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 15 मार्च को गुवाहाटी पहुंचेंगे और कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।<br><br>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 और 14 मार्च को असम के दो दिवसीय दौरे पर जा रहे हैं। इस दौरान वे राज्य को करीब 10 हजार करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के मुताबिक प्रधानमंत्री गुवाहाटी, कोकराझार और सिलचर में कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे और बड़ी जनसभाओं को भी संबोधित करेंगे। इस दौरे को राज्य के विकास और राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रधानमंत्री के इस दौरे में कई महत्वपूर्ण योजनाओं की शुरुआत और शिलान्यास शामिल है। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से राज्य में बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इस दौरान चाय बागान के मजदूरों को भूमि अधिकार प्रमाणपत्र देने का कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। बताया जा रहा है कि कई परिवार पिछले लगभग 200 वर्षों से जमीन के औपचारिक स्वामित्व का इंतजार कर रहे थे।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>क्या होंगे प्रधानमंत्री मोदी के प्रमुख कार्यक्रम?</strong><br>प्रधानमंत्री 13 मार्च को गुवाहाटी में आयोजित कार्यक्रम में पीएम किसान योजना की अगली किस्त जारी करेंगे। इस योजना के तहत देशभर के करोड़ों किसानों को आर्थिक सहायता दी जाती है। इसके अलावा प्रधानमंत्री राज्य के अलग-अलग हिस्सों में जनसभाओं को संबोधित कर विकास योजनाओं के बारे में जानकारी देंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>कौन-कौन सी बड़ी परियोजनाओं की होगी शुरुआत?</strong><br>प्रधानमंत्री 14 मार्च को सिलचर में सिलचर-शिलांग-गुवाहाटी एक्सप्रेसवे परियोजना की आधारशिला रखेंगे। यह परियोजना करीब 22 हजार करोड़ रुपये की बताई जा रही है। इसके अलावा 150 मेगावाट की कॉपिली हाइड्रो पावर परियोजना को भी राष्ट्र को समर्पित किया जाएगा। इससे क्षेत्र में बिजली उत्पादन बढ़ेगा और विकास को गति मिलेगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>चाय बागान मजदूरों को क्या मिलेगा लाभ?</strong><br>प्रधानमंत्री के दौरे का एक अहम हिस्सा चाय बागान मजदूरों को भूमि अधिकार प्रमाणपत्र यानी पट्टा देना होगा। इससे उन परिवारों को जमीन का कानूनी अधिकार मिलेगा जो लंबे समय से इन बागानों में काम कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि यह कदम सामाजिक और आर्थिक रूप से बड़ा बदलाव लाएगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>अमित शाह का असम दौरा क्यों अहम माना जा रहा है?</strong><br>प्रधानमंत्री के दौरे के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 15 मार्च को गुवाहाटी पहुंचेंगे। वे प्रागज्योतिषपुर मेडिकल कॉलेज का उद्घाटन करेंगे और खानापारा में आयोजित युवा संकल्प समावेश में हिस्सा लेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन दौरों को 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की रणनीतिक तैयारियों के तौर पर भी देखा जा रहा है।</p>
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		<title>Train Accident: सैरांग-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस की टक्कर से आठ हाथियों की मौत, पांच डिब्बे पटरी से उतरे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 20 Dec 2025 03:51:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Assam]]></category>
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					<description><![CDATA[असम में शनिवार तड़के एक हादसे में ट्रेन की चपेट में आने से आठ हाथियों की मौत हो गई। इसके चलते ट्रेन के पांच डिब्बे भी पटरी से उतर गए। हालांकि किसी यात्री के चोटिल होने की खबर नहीं है।  असम के होजाई जिले में हुए एक ट्रेन हादसे में पांच डिब्बे पटरी से उतर [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">असम में शनिवार तड़के एक हादसे में ट्रेन की चपेट में आने से आठ हाथियों की मौत हो गई। इसके चलते ट्रेन के पांच डिब्बे भी पटरी से उतर गए। हालांकि किसी यात्री के चोटिल होने की खबर नहीं है। <br><br>असम के होजाई जिले में हुए एक ट्रेन हादसे में पांच डिब्बे पटरी से उतर गए। गनीमत रही कि इस हादसे में किसी यात्री को चोट नहीं आई। हालांकि ट्रेन की टक्कर लगने से आठ हाथियों की मौत हो गई। एक वन अधिकारी ने बताया कि शनिवार तड़के असम के होजाई जिले में सैरांग-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस की चपेट में आने से हाथियों के एक झुंड के आठ हाथियों की मौत हो गई और एक घायल हो गया। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) के एक प्रवक्ता ने बताया कि इस घटना में पांच कोच और ट्रेन का इंजन पटरी से उतर गया, हालांकि किसी यात्री के घायल होने की खबर नहीं है।<br><br><strong>शनिवार तड़के हुआ हादसा</strong><br>रेलवे प्रवक्ता ने बताया कि नई दिल्ली जाने वाली ट्रेन के साथ यह हादसा तड़के करीब 2.17 बजे हुआ। नगांव के डिविजनल वन अधिकारी सुहास कदम ने बताया कि यह घटना होजाई जिले के चांगजुराई इलाके में हुई। कदम और अन्य वन अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं। उन्होंने बताया कि प्रभावित जमुनामुख-कांपुर सेक्शन से गुजरने वाली ट्रेनों को दूसरी लाइन से डायवर्ट किया गया है। फिलहाल लाइन पर मरम्मत का काम चल रहा है। सैरांग-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस मिजोरम के सैरांग (आइजोल के पास) को आनंद विहार टर्मिनल (दिल्ली) से जोड़ती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>असम से लेकर सिक्किम तक, पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश और बाढ़ का कहर, कम से कम 30 की मौत</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/from-assam-to-sikkim-rain-and-flood-devastation-in-northeast-states-at-least-30-dead/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 02 Jun 2025 06:14:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Assam]]></category>
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					<description><![CDATA[असम और इससे सटे उत्तर पूर्वी राज्यों में बीते कुछ दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण कई इलाके़ बाढ़ की चपेट में आ गए है. भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में बीते 48 घंटों में कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई है, वहीं कई इलाक़ों में पानी भरने की ख़बरें मिल [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>असम और इससे सटे उत्तर पूर्वी राज्यों में बीते कुछ दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण कई इलाके़ बाढ़ की चपेट में आ गए है.</strong> भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में बीते 48 घंटों में कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई है, वहीं कई इलाक़ों में पानी भरने की ख़बरें मिल रही हैं.</p>



<p class="wp-block-paragraph">असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से 31 मई की शाम को जारी की गई एक रिपोर्ट में बाढ़ से असम के 12 जिलों में 175 गांव डूबने की जानकारी दी गई है. प्राधिकरण के एक अधिकारी ने बताया कि कई और इलाके़ बाढ़ की चपेट में आए हैं, जिसकी रिपोर्ट रविवार शाम तक विभाग को मिल पाएगी.</p>



<p class="wp-block-paragraph">बाढ़ और भूस्खलन की अलग-अलग हुई घटना में अब तक असम में आठ लोगों की मौत हो चुकी है. जबकि 60 हज़ार से अधिक की आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है. असम के अलग-अलग इलाक़ों में सैकड़ों की संख्या में लोग अपना घर-बार छोड़कर राहत शिविरों में रहने आए हैं.</p>



<p class="wp-block-paragraph">बाढ़ से सबसे ज़्यादा नुक़सान लखीमपुर ज़िले में हुआ है. जिला प्रशासन ने लखीमपुर में दस से अधिक राहत शिविर खोले हैं. राहत शिविरों में पीड़ितों के लिए प्रशासन ने दाल, चावल, सरसों का तेल, नमक, चिवड़ा और गुड़ उपलब्ध करवाया है. आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया है कि शनिवार को बाढ़ के पानी में डूबने से लखीमपुर में एक और गोलाघाट में दो लोगों की मौत हो गई है. इससे एक दिन पहले गुवाहाटी को बोंडा में भूस्खलन के कारण पांच लोगों की मौत हुई थी.</p>



<p class="wp-block-paragraph">असम के मुख्यमंत्री <a href="https://x.com/himantabiswa/status/1929087623383101620">हिमंत बिस्वा सरमा</a> के मुताबिक़ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने फ़ोन पर असम में बाढ़ की स्थिति की जानकारी ली है और बाढ़ से निपटने के लिए हरसंभव सहायता की पेशकश की है. हिमंत बिस्वा शर्मा ने रविवार <a href="https://x.com/himantabiswa/status/1929087623383101620">एक्स पर पोस्ट</a> किया, &#8220;माननीय गृह मंत्री अमित शाह ने असम में बाढ़ के बारे में जानकारी लेने के लिए कुछ देर पहले मुझे फ़ोन किया और मौजूदा स्थिति से निपटने के लिए हर संभव सहायता की पेशकश की.&#8221;</p>



<p class="wp-block-paragraph">गृह मंत्री&nbsp;<a href="https://x.com/AmitShah/status/1929125425642619070">अमित शाह</a>&nbsp;ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर बताया है कि उन्होंने असम, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्रियों और मणिपुर के गवर्नर से बात की है और ताज़ा स्थिति की जानकारी ली है, साथ ही स्थिति से निपटने के लिए सभी तरह की मदद का वादा भी किया है.</p>



<p class="wp-block-paragraph">रविवार शाम हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने सोशल मीडिया पर असम में&nbsp;<a href="https://x.com/himantabiswa/status/1929139032933458301">बाढ़ का अलर्ट</a>&nbsp;जारी किया है. उन्होंने लिखा है कि सिलचर, करीमगंज और कई और जगहों पर भारी बारिश हो रही है.</p>



<p class="wp-block-paragraph">वहीं किबितू, हाउलियांग और कलाकतांग समेत अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाक़ों में भी भारी बारिश हो रही है जिस कारण निचली नदियों में पानी का स्तर बढ़ सकता है.</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने लिखा, &#8220;नदी के किनारे निचली जगहों पर रहने वाले लोग सतर्क रहें और स्थानीय दिशानिर्देशों का पालन करें.&#8221; </p>



<p class="wp-block-paragraph">असम के अलावा पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में बीते कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण बाढ़ और भूस्खलन की कई घटनाएं सामने आई हैं. असम के अलावा सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में मिज़ोरम, मणिपुर, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम शामिल हैं, जहां बाढ़ के कारण सड़कें बह गईं, घर तबाह हो गए और हज़ारों लोग बेघर हो गए हैं.</p>
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