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	<title>States &#8211; RNSNS News</title>
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	<title>States &#8211; RNSNS News</title>
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		<title>यूपी: बारिश से नदियां उफनाईं, सात की मौत, बेघर हो गए लोग, घर-दुकानें डूबीं; रोजी रोटी का संकट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Sep 2026 03:42:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रदेश में लगातार बारिश से कई नदियां उफान पर हैं और बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। घर और दुकानें डूबने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। दीवार और छत गिरने से सात लोगों की मौत हुई है। कई इलाकों में हजारों लोग प्रभावित हैं, जबकि रोजगार बंद होने से रोजी-रोटी का संकट गहरा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश में लगातार बारिश से कई नदियां उफान पर हैं और बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। घर और दुकानें डूबने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। दीवार और छत गिरने से सात लोगों की मौत हुई है। कई इलाकों में हजारों लोग प्रभावित हैं, जबकि रोजगार बंद होने से रोजी-रोटी का संकट गहरा गया है।<br><br>प्रदेश के कई जिलों में हो रही बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं। जनजीवन अस्त व्यस्त है। घर और दुकान बाड़ से घिरने के कारण लोग परेशान हैं। रोजगार बंद होने से रोजी रोटी का संकट है। घर और दीवार गिरने से सात लोगों की मौत हो गई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चित्रकूट में बृहस्पतिवार को मंदाकिनी की जलधारा घाटों के ऊपर पहुंची तो कभी रामघाट से कामतानाथ जाने वाले मार्ग पर पहुंची। इससे नदी किनारे बसे 250 से अधिक परिवार दहशत में आ गए। उधर, सदर कोतवाली के बराछ गांव में कच्ची दीवार और छत ढहने से कल्लू यादव (35) और उसके दो मासूम बच्चों की दबकर मौत हो गई। पत्नी और बेटी अस्पताल में भर्ती है। वहीं, सीतापुर में दो महिलाएं, बहराइच में एक बालिका और बाराबंकी भी एक व्यक्ति की जान चली गई।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>एनडीआरएफ की टीम ने सभी को सुरक्षित बाहर निकाला</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">कानपुर में पांडु नदी का जलस्तर बढ़ने से 10 इलाकों में बाढ़ जैसे हालात हो गए। गोपालपुरम और जरौली फेज-2 में करीब 25 परिवार जलभराव में फंस गए। सूचना पर एनडीआरएफ की टीम ने सभी को सुरक्षित बाहर निकाला। इनके साथ ही मायापुरम, रविदासपुरम, मदनपुर, मेहरबान सिंह का पुरवा, वरुण विहार कच्ची बस्ती, सुंदरनगर, महावीरनगर और विद्यार्थी कॉलोनी में करीब 34 हजार लोग बाढ़ की चपेट में हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अंबेडकरनगर, बाराबंकी, अयोध्या और बहराइच में सरयू की बाढ़ का दायरा बढ़ता जा रहा है। देवरिया के भागलपुर में सरयू नदी का जलस्तर पांच दिन से लगातार बढ़ रहा है। नदी का बढ़ता पानी रिहायशी इलाकों की ओर पहुंचने लगा है। क्षेत्र के कई तटवर्ती गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। बस्ती में सरयू नदी के जलस्तर ने बाढ़ का स्त्रतरा बढ़ा दिया है। यहां जलस्तर खतरे के निशान से 11 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। </p>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ा</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">वाराणसी में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से महज 61 सेंटीमीटर पीछे है। खतरे का निशान 71.26 मीटर है। जलस्तर बृहस्पतिवार की रात 8 बजे तक 70.65 मीटर पहुंच गया। सभी घाट जलमग्न हैं। वरुणा में भी उफान है। इस कारण लोगों को घर छोड़ कर शिविर में रहना पड़ रहा है।<br><br>सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जिले के फीट हिस्सा बाढ़ का पानी रिसने से कट गया। गंग का पानी तेजी से बंधे के भीतर घुसने लगा। गौपालनगर-टांडी में 200 घरों में बाड़ का पानी घुस गया है। कटान पीड़ित गोपालनगर जूनियर हाईस्कूल के पास शरण लिए हुए हैं।&nbsp;</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>सीएम योगी ने लिया जायजा</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हेलीकॉप्टर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। फतेहगढ़ स्थित पुलिस पीड़ितों को राहत सामग्री वितरित की। 31 बाढ़ पीड़ितों को भूमि का पट्टा व सीएम आवास के लिए प्रत्येक को 1.20 लाख का चेक सौंपे। योगी ने कहा कि आपदा से बचाने के लिए गंगा की सिल्ट निकालकर तटबंध में इस्तेमाल की जाएगी।&nbsp;</p>
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		<title>राजस्थान निकाय चुनाव: 69,811 नामांकन में से 17,137 के खारिज, 10112 ने नाम वापस लिए, 38891 मैदान में</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Sep 2026 03:35:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Rajasthan]]></category>
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					<description><![CDATA[राजस्थान निकाय चुनाव में 69,811 नामांकन में से 17़137  खारिज हुए और 10112   प्रत्याशियों ने नाम वापस लिए। अब 10,245 वार्डों में 38891 प्रत्याशी मैदान में हैं। शेष मैदान में डटे प्रत्याशियों में बड़ी संख्या बागियों की है। राजस्थान के निकाय चुनाव में नामांकन और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनावी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">राजस्थान निकाय चुनाव में 69,811 नामांकन में से 17़137  खारिज हुए और 10112   प्रत्याशियों ने नाम वापस लिए। अब 10,245 वार्डों में 38891 प्रत्याशी मैदान में हैं। शेष मैदान में डटे प्रत्याशियों में बड़ी संख्या बागियों की है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">राजस्थान के निकाय चुनाव में नामांकन और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। प्रदेश के 10,245 वार्डों में अब 38891 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। वहीं 77 प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार निकाय चुनाव के लिए कुल 69,811 नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे। जांच के दौरान 17़137 &nbsp;नामांकन पत्र खारिज हुए, जबकि 10112 &nbsp;प्रत्याशियों ने नाम वापस ले लिए।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">नामांकन प्रक्रिया के आंकड़ों ने जहां कई वार्डों में चुनावी मुकाबले का गणित बदला है, वहीं टिकट वितरण के बाद सामने आई बगावत ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों की चिंता बढ़ा दी है। अब दोनों दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने नाराज नेताओं और बागी प्रत्याशियों को साधने की है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>नामांकन खारिज होने से दोनों दलों को झटका</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">करीब 20 जिलों से मिले आंकड़ों के अनुसार बीजेपी और कांग्रेस के कम से कम 99 प्रत्याशियों के नामांकन खारिज हुए हैं। इनमें कांग्रेस के 57 और बीजेपी के 42 प्रत्याशी शामिल हैं। पूरे चुनाव में खारिज नामांकन की संख्या करीब 200 तक बताई गई है। कांग्रेस को अजमेर और पाली में नामांकन खारिज होने से बड़ा झटका लगा है। वहीं बीजेपी को भी दौसा और करौली समेत कई जिलों में नुकसान हुआ है। कई मामलों में नामांकन तकनीकी खामियों और पात्रता से जुड़ी वजहों से खारिज हुए। इससे दोनों दलों में प्रत्याशियों के नाम तय करने और नामांकन पत्रों की पहले से जांच को लेकर सवाल भी उठे हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>टिकट नहीं मिला तो मैदान में उतरे बागी</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">दोनों पार्टियों के लिए परेशानी सिर्फ पर्चे खारिज होने तक सीमित नहीं है। टिकट वितरण के बाद कई जगह पार्टी के ही नेता और कार्यकर्ता निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतर गए। कांग्रेस ने बागियों को मनाने के लिए वरिष्ठ नेताओं को जिलों में सक्रिय किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और वरिष्ठ नेता टीकाराम जूली समेत कई नेता असंतुष्ट दावेदारों से बातचीत कर रहे हैं। जिला और विधानसभा स्तर के प्रभारियों को भी अधिकृत प्रत्याशियों के साथ समन्वय करने और बागियों को नाम वापस लेने के लिए मनाने की जिम्मेदारी दी गई है। कांग्रेस को डर है कि बागी प्रत्याशी मैदान में रहे तो उसका परंपरागत वोट बंट सकता है और इसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>BJP में भी टिकट बंटवारे को लेकर नाराजगी</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">बीजेपी में भी टिकट वितरण को लेकर कई जगह नाराजगी सामने आई है। स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के एक वर्ग ने प्रत्याशियों के चयन पर सवाल उठाए हैं। पार्टी संगठन अब नाराज नेताओं को मनाने और अधिकृत उम्मीदवारों के पक्ष में माहौल बनाने में जुटा है। बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष के राजस्थान दौरे की संभावना के बीच पार्टी के अंदरूनी हालात को लेकर भी चर्चा तेज है। वरिष्ठ नेता स्थानीय इकाइयों के साथ बातचीत कर रहे हैं ताकि चुनाव प्रचार शुरू होने से पहले असंतोष को कम किया जा सके।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>77 प्रत्याशी बिना चुनाव जीते</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">निकाय चुनाव में कुछ वार्डों में मुकाबला मतदान से पहले ही खत्म हो गया है। आयोग के अनुसार 77 प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। इन वार्डों में अब मतदान नहीं होगा। पहले सामने आई जानकारी के अनुसार इनमें बीजेपी और कांग्रेस दोनों के प्रत्याशी शामिल हैं। नाम वापसी के बाद अब निर्विरोध जीत वाले वार्डों की स्थिति भी स्पष्ट हो गई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>कई वार्डों में त्रिकोणीय और बहुकोणीय मुकाबला</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">38891 प्रत्याशियों के मैदान में रहने से बड़ी संख्या में वार्डों में मुकाबला सिर्फ बीजेपी और कांग्रेस के बीच नहीं रहेगा। टिकट नहीं मिलने के बाद मैदान में उतरे निर्दलीय और अन्य दलों के उम्मीदवार कई जगह त्रिकोणीय या बहुकोणीय मुकाबले की स्थिति बना सकते हैं। निकाय चुनाव में जीत का अंतर अक्सर कम रहता है। ऐसे में बागी उम्मीदवारों को मिलने वाले वोट सीधे तौर पर बीजेपी या कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी के समीकरण को प्रभावित कर सकते हैं।</p>
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		<title>पक्का मोर्चा: किसान आंदोलन पूरे देश में फैलाने की तैयारी, पंजाबी गायक आए साथ; महिलाएं भी कदमताल के लिए तैयार</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/farmer-protest-set-to-spread-across-india-punjabi-singers-join-women-ready-to-march/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Sep 2026 03:31:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[States]]></category>
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					<description><![CDATA[बृहस्पतिवार को प्रदेश के विभिन्न गांवों से किसान और महिलाएं ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ मोर्चा स्थल पर पहुंचीं। उन्होंने पानी संकट, कृषि मांगों, गन्ना मूल्य और लैंड पूलिंग नीति को लेकर सरकारों पर हमला बोला। संयुक्त किसान मोर्चा का चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर सात दिवसीय पक्का मोर्चा जारी है। बृहस्पतिवार को प्रदेश के विभिन्न गांवों से किसान [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">बृहस्पतिवार को प्रदेश के विभिन्न गांवों से किसान और महिलाएं ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ मोर्चा स्थल पर पहुंचीं। उन्होंने पानी संकट, कृषि मांगों, गन्ना मूल्य और लैंड पूलिंग नीति को लेकर सरकारों पर हमला बोला।<br><br>संयुक्त किसान मोर्चा का चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर सात दिवसीय पक्का मोर्चा जारी है। बृहस्पतिवार को प्रदेश के विभिन्न गांवों से किसान और महिलाएं ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ मोर्चा स्थल पर पहुंचीं। उन्होंने पानी संकट, कृषि मांगों, गन्ना मूल्य और लैंड पूलिंग नीति को लेकर सरकारों पर हमला बोला।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मोर्चे में पंजाबी गायक भी समर्थन देने आए। बृहस्पतिवार को किसानों ने बैठक कर मोर्चे को आगे बढ़ाने की रणनीति तय की और नारेबाजी भी की। मोर्चे की अध्यक्षता कर रहे मनजीत सिंह धनेर और बलबीर सिंह राजेवाल ने पंजाब में गहराते जल संकट को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि भूजल और नदियों के प्रदूषण से खेती, पशुधन व आम लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। किसान नेता हरिंदर सिंह लख्खोवाल ने कहा, यदि सरकारें बातचीत के लिए आगे नहीं बढ़ीं, तो किसान देशभर में आंदोलन करेंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>राजेवाल कहेंगे एक साल यहीं रुको तो डेरा डाल देंगे</strong><br>रात के करीब तीन बज रहे हैं। हल्की बारिश के बाद मोहाली-चंडीगढ़ सीमा पर ठंडी हवा चल रही है। सड़क किनारे कतार में खड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में अधिकांश किसान नींद ले रहे हैं जबकि कुछ जागकर साथियों और सामान की पहरेदारी कर रहे हैं। कहीं धीमी आवाज में आगे की रणनीति पर चर्चा चल रही है तो कुछ लोग सुबह शुरू होने वाले लंगर की तैयारी में जुटे हैं। पक्के मोर्चे के बीच आधी रात के बाद का यह दृश्य बता रहा है कि किसान केवल सात दिन के प्रदर्शन के लिए नहीं, जरूरत पड़ी तो लंबी लड़ाई के लिए भी तैयारी करके आए हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">माछीवाड़ा से आए किसान हरवंत सिंह ने अमर उजाला से कहा कि हम राजेवाल की सुनेंगे। वह कहेंगे कि सात सितंबर को वापस घर चलो तो चले जाएंगे। अगर कहेंगे कि छह महीने या एक साल यहीं रुकना है तो हम यहीं डेरा डाल देंगे। हरवंत सिंह जथेदार राजा बलवीर सिंह के नेतृत्व में 32 ट्रॉलियों के साथ मोर्चे में पहुंचे हैं। उनका कहना है कि जब तक किसान नेतृत्व वापस जाने का फैसला नहीं करता, वे धरनास्थल से नहीं हटेंगे।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">एक सितंबर से शुरू हुए मोर्चे में पंजाब के अलग-अलग हिस्सों से किसानों के पहुंचने का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है। पहले दिन करीब एक हजार ट्रैक्टर-ट्रॉलियां पहुंचने का दावा किया गया था। दूसरे दिन यह संख्या बढ़कर तीन हजार से अधिक होने की बात किसान संगठनों ने कही। आंदोलन में करीब 32 किसान जत्थेबंदियां शामिल हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>आगामी रणनीति व मांगें&nbsp;</strong><br>किसान नेताओं ने शुक्रवार को मोर्चे की अहम बैठक बुलाई है जिसमें अगले संघर्ष का एलान किया जाएगा। उन्होंने पंजाब सरकार से विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की। किसानों ने पानी के पुराने समझौते और लैंड पूलिंग नीति रद्द करने की भी मांग की है। बासमती, मूंग, मक्का, आलू, मटर और गोभी जैसी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी देने की भी मांग की गई है।</p>
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		<title>उत्तराखंड मौसम: प्रदेश में 150 से अधिक सड़कें बंद, मौसम विभाग की चेतावनी, नौ जिलों में बारिश का यलो अलर्ट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Sep 2026 04:09:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uttrakhand]]></category>
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					<description><![CDATA[लगातार बारिश ने उत्तराखंड में जनजीवन की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है और कई इलाकों में आवाजाही प्रभावित हुई है। नैनीताल में भारी बारिश के बाद जहां 150 से ज्यादा सड़कें बंद हैं, वहीं नौ जिलों में आज मौसम विभाग ने यलो अलर्ट जारी किया है। उत्तराखंड में दूसरे दिन भी 150 से अधिक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">लगातार बारिश ने उत्तराखंड में जनजीवन की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है और कई इलाकों में आवाजाही प्रभावित हुई है। नैनीताल में भारी बारिश के बाद जहां 150 से ज्यादा सड़कें बंद हैं, वहीं नौ जिलों में आज मौसम विभाग ने यलो अलर्ट जारी किया है।<br><br>उत्तराखंड में दूसरे दिन भी 150 से अधिक सड़क बंद रहीं। मंगलवार को राज्य में 172 सड़क बंद थीं, इस स्थिति में थोड़ा ही सुधार हो पाया। बुधवार को भी 152 सड़क बंद रहीं। इनमें अल्मोड़ा में आठ, बागेश्वर में 15, चमोली में 21 मार्ग बंद हैं। देहरादून में 11, नैनीताल में 47, पौड़ी में आठ, पिथौरागढ़ में 15, रुद्रप्रयाग में 10, टिहरी में 11 और उत्तरकाशी में छह मार्ग बंद हैं। मार्गाें के बंद होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>नैनीताल में जमकर हुई बारिश</strong><br>24 घंटे में सबसे अधिक बारिश नैनीताल, भीमताल और हल्द्वानी में हुई है। नैनीताल में 217 और भीमताल में 161 एमएम बारिश हुई। हल्द्वानी में भी जमकर बारिश हुई। यहां पर 122.2 एमएम और मुक्तेश्वर में 107.7 एमएम बारिश हुई। बेतालघाट में 80. 5 एमएम बारिश रिपोर्ट की गई है। चंपावत में 74 एमएम, लोहाघाट 41,5, रुद्रप्रयाग 41.2 रानीखेत में 41.1 एमएम बारिश रिपोर्ट की गई है। बारिश होने से रुद्रप्रयाग में अलकनंदा और मंदाकिनी और हरिद्वार में गंगा नदी का जल स्तर खतरे के स्तर के करीब पहुंच गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सतर्क रहने की सलाह</strong><br>प्रदेश के नौ जिलों में आज हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी, चमोली, नैनीताल, चम्पावत, उधमसिंह नगर, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। राज्य के सभी जनपदों में गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने और वर्षा के तीव्र से अति तीव्र दौर की भी चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के सभी जनपदों में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा या गर्जन के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">विशेष रूप से देहरादून, टिहरी और उत्तरकाशी जैसे पर्वतीय जिलों में भारी वर्षा की आशंका है। चमोली, नैनीताल, चम्पावत और उधमसिंह नगर में भी कहीं-कहीं भारी वर्षा होने का अनुमान है। पिथौरागढ़ और बागेश्वर में भी इसी तरह की स्थिति रहने की संभावना है। इन क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।<br><br><br></p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>यूपी: एनएचएआई टोल प्लाजा पर ईडी का छापा, फर्जीवाड़े पर 14 ठिकानों पर जांच, 1.03 करोड़ बरामद</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/up-ed-raids-nhai-toll-plaza-fraud-14-locations-rs-1-03-crore-recovered/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Sep 2026 04:05:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
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					<description><![CDATA[नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के अलग-अलग टोल प्लाजा पर कथित टोल कलेक्शन फर्जीवाड़े की जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के लखनऊ जोनल कार्यालय ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई की। ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 की धारा 17 के तहत उत्तर प्रदेश समेत सात राज्यों और क्षेत्रों में [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के अलग-अलग टोल प्लाजा पर कथित टोल कलेक्शन फर्जीवाड़े की जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के लखनऊ जोनल कार्यालय ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई की। ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 की धारा 17 के तहत उत्तर प्रदेश समेत सात राज्यों और क्षेत्रों में 14 ठिकानों पर एक साथ सर्च ऑपरेशन शुरू किया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ईडी के अनुसार, ये तलाशी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू, मध्य प्रदेश, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और कोलकाता में स्थित परिसरों में की जा रही है। कार्रवाई का उद्देश्य टोल कलेक्शन में कथित अनियमितताओं से जुड़े डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य जुटाना, लाभार्थियों की पहचान करना और अपराध से अर्जित रकम का पता लगाना है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>बिना अनुमति सॉफ्टवेयर से टोल रसीदों में फर्जीवाड़े का आरोप</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">केस दर्ज होने के बाद जांच 19 मई 2025 से शुरू हुई थी। इसमें कथित तौर पर ऐसे अनधिकृत सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन के इस्तेमाल का पता चला, जिनके माध्यम से बिना अनुमति टोल रसीदें तैयार की जाती थीं। टोल से प्राप्त रकम को आधिकारिक अकाउंटिंग सिस्टम से बाहर भेजे जाने का आरोप है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ईडी के मुताबिक, फोरेंसिक जांच और NHAI से प्राप्त रिकॉर्ड में इस तरह के सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल की पुष्टि हुई है। इसके बाद एजेंसी ने मामले से जुड़े संभावित ठिकानों की पहचान कर एक साथ तलाशी की कार्रवाई शुरू की।<br><br><strong>1.03 करोड़ रुपये नकद और डिजिटल डिवाइस बरामद</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">ईडी की कार्रवाई के दौरान अब तक सभी तलाशी वाले ठिकानों से 1.03 करोड़ रुपये नकद, संदिग्ध दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस बरामद किए गए हैं। एजेंसी इन बरामद सामग्रियों की जांच कर रही है। इससे कथित टोल फर्जीवाड़े में शामिल लोगों और पूरे नेटवर्क से जुड़ी जानकारी सामने आने की उम्मीद है।</p>
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		<title>सर्जरी का इंतजार, मौत और आरोप: &#8216;2015 से टलता गया तन्वी का ऑपरेशन&#8217;, रिकॉर्ड से पोस्टमार्टम तक एम्स करेगा जांच</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Sep 2026 04:00:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi]]></category>
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					<description><![CDATA[जटिल जन्मजात हृदय रोग से जूझ रही 15 वर्षीय तन्वी की एम्स में एक सितंबर को मौत हो गई। परिवार ने आरोप लगाया है कि समय पर ऑपरेशन न होने के कारण उसकी हालत बिगड़ती गई। पिता मुकेश परियानी का दावा है कि 2015, 2016 या 2017 में सर्जरी से बेटी की जान बच सकती [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">जटिल जन्मजात हृदय रोग से जूझ रही 15 वर्षीय तन्वी की एम्स में एक सितंबर को मौत हो गई। परिवार ने आरोप लगाया है कि समय पर ऑपरेशन न होने के कारण उसकी हालत बिगड़ती गई। पिता मुकेश परियानी का दावा है कि 2015, 2016 या 2017 में सर्जरी से बेटी की जान बच सकती थी।<br><br>जटिल जन्मजात हृदय रोग से जूझ रही 15 वर्षीय तन्वी को सर्जरी के लिए वर्षों इंतजार करना पड़ा। एम्स, नई दिल्ली में इलाज करा रही तन्वी की एक सितंबर को मौत के बाद परिवार ने आरोप लगाया है कि समय पर ऑपरेशन नहीं होने से उसकी हालत बिगड़ती गई। पिता मुकेश परियानी का दावा है कि 2015, 2016 या 2017 में सर्जरी हो जाती तो बेटी की जान बचाई जा सकती थी। मामले में एम्स प्रशासन ने जांच समिति गठित कर दी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">परिवार के अनुसार, तन्वी का इलाज एम्स में वर्ष 2012 में शुरू हुआ था। 10 अक्तूबर 2012 को कार्डियोलॉजी ओपीडी में जांच के बाद उसे वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (वीएसडी) विद पल्मोनरी एट्रेशिया जैसी जटिल जन्मजात हृदय बीमारी का पता चला। इसके बाद कई जांच और विशेषज्ञों से परामर्श हुए। पिता के मुताबिक, करीब एक साल बाद उन्हें डॉ. सचिन तलवार के पास भेजा गया और ऑपरेशन की उम्मीद बंधी। परिवार ने 4 अप्रैल 2014 को पैसे और खून समेत जरूरी औपचारिकताएं भी पूरी कर दी थीं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सितंबर 2015 की सर्जरी भी टली</strong><br>मुकेश परियानी का आरोप है कि सितंबर 2015 में सर्जरी की तारीख तय की गई थी, लेकिन बाद में दीपावली के बाद ऑपरेशन करने की बात कहकर इसे टाल दिया गया। इसके बाद परिवार कई बार अस्पताल पहुंचा, लेकिन सर्जरी नहीं हो सकी। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में भी शिकायत की। परिवार का दावा है कि शिकायत के बाद अस्पताल बुलाकर शिकायत वापस लेने की शर्त पर ऑपरेशन की बात कही गई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">परिवार के अनुसार, 2018, 2023 और 2025 में भी तन्वी की जांच और चिकित्सकीय परामर्श होते रहे, लेकिन सुधारात्मक सर्जरी नहीं हुई। जुलाई 2025 में संबंधित चिकित्सक के अवकाश पर होने के कारण दवा से बीमारी नियंत्रित रखने और नियमित फॉलो-अप की सलाह दी गई। फरवरी 2026 में परिवार ने फिर शिकायत दर्ज कराई।</p>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>2017 में सर्जरी संभव नहीं पाई गई: एम्स</strong><br>एम्स के अनुसार, 2013 में तन्वी की सीटी एंजियोग्राफी, कन्वेंशनल एंजियोग्राफी और कार्डियक कैथेटेराइजेशन सहित महत्वपूर्ण जांच की गई थीं। 2017 में व्यापक चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद विशेषज्ञों ने पाया कि हृदय की संरचना और बीमारी की जटिलता को देखते हुए सुधारात्मक सर्जरी संभव नहीं थी। परिवार को मेडिकल मैनेजमेंट, नियमित फॉलो-अप और बीमारी के पूर्वानुमान की जानकारी दी गई थी। सीटीवीएस विभाग के प्रमुख और एक अन्य वरिष्ठ सर्जन ने भी मेडिकल मैनेजमेंट की सलाह दी थी।</p>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>अगस्त में भर्ती, एक सितंबर को मौत</strong><br>एम्स के मुताबिक, हालत बिगड़ने पर तन्वी को 24 अगस्त 2026 को भर्ती किया गया। व्यापक मूल्यांकन के दौरान हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट की संभावना पर भी विचार किया गया। 1 सितंबर की सुबह करीब 2:50 बजे उसे अचानक अत्यधिक कमजोरी हुई और ऑक्सीजन सैचुरेशन करीब 48 प्रतिशत तक गिर गया। करीब 3:30 बजे ऑक्सीजन सपोर्ट शुरू किया गया। इसके बाद हाइपोक्सिक स्पेल के कारण कार्डियक अरेस्ट हुआ। डॉक्टरों के लगातार पुनर्जीवन प्रयासों के बावजूद सुबह 5:06 बजे उसकी मौत की पुष्टि की गई।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>रिकॉर्ड से पोस्टमॉर्टम तक, हर पहलू खंगालेगी समिति</strong><br>एम्स के निदेशक द्वारा गठित समिति तन्वी के क्लिनिकल रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट, उपचार, विशेषज्ञों की राय और मौत की परिस्थितियों की समीक्षा करेगी। संस्थान के अनुसार पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया जारी है। समिति की रिपोर्ट और ऑटोप्सी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। एम्स ने परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए रोगी सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई है।</p>
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		<title>बिहार का मौसम: आज कई जिलों में अलर्ट, पटना में सुबह से हो रही बारिश; गंगा कहां खतरे के निशान के ऊपर बह रही?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Sep 2026 06:28:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bihar]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना समेत कई जिलों में पिछले 24 घंटे से रुक रुक कर बारिश हो रही है। कई जगहों पर जलजमाव हो गया है। गंगा भी उफान पर है। इस सप्ताह बारिश की स्थिति ऐसी ही रहेगी। मौसम विज्ञान केंद्र ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। आइए जानते हैं मौसम का हाल&#8230; बिहार [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">पटना समेत कई जिलों में पिछले 24 घंटे से रुक रुक कर बारिश हो रही है। कई जगहों पर जलजमाव हो गया है। गंगा भी उफान पर है। इस सप्ताह बारिश की स्थिति ऐसी ही रहेगी। मौसम विज्ञान केंद्र ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। आइए जानते हैं मौसम का हाल&#8230;<br><br>बिहार में मानसून पूरी तरह से सक्रिय है। बुधवार को राज्य के कई हिस्सों में बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है। पटना में मंगलवार दोपहर से ही रुक रुक कर बारिश हो रही है। बुधवार सुबह भी झमाझम बारिश हुई। आसमान में बादल छाए हैं। कई इलाकों में बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने दो, तीन और चार सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इस दौरान कई इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज हवा चल सकती है। वहीं पांच और छह सितंबर को वज्रपात और गरज-चमक को लेकर अलर्ट जारी किया गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>उत्तर बिहार में ज्यादा सक्रिय रहेगा मौसम</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, उत्तर बिहार के कई जिलों में बारिश की गतिविधियां अधिक रहने की संभावना है। पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज में बारिश हो सकती है। इसके अलावा सहरसा, पूर्णिया, कटिहार और मधेपुरा में भी कई स्थानों पर बारिश की संभावना जताई गई है। इन इलाकों में मौसम के अधिक सक्रिय रहने का अनुमान है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>पटना समेत दक्षिण बिहार में भी बारिश के आसार</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">मौसम विभाग के अनुसार, राजधानी पटना समेत वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय और खगड़िया में भी बारिश हो सकती है। दक्षिण बिहार के गया, जहानाबाद, नालंदा, नवादा, शेखपुरा, लखीसराय, जमुई, बांका, भागलपुर और मुंगेर में भी मौसम बदलने की संभावना है। हालांकि, दक्षिण बिहार के कई जिलों में बारिश कुछ स्थानों तक सीमित रह सकती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>पांच और छह सितंबर को वज्रपात का खतरा</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">मौसम विभाग के अनुसार, दो से चार सितंबर तक भारी बारिश का दौर रह सकता है। इसके बाद पांच और छह सितंबर को गरज-चमक और वज्रपात की स्थिति बन सकती है। फिलहाल सात और आठ सितंबर के लिए कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की गई है। मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी है। बिजली चमकने के समय खुले मैदान, पेड़ और बिजली के खंभों के पास जाने से बचने को कहा गया है। मौसम विभाग ने कहा कि बिहार में बारिश के इस दौर के पीछे गंगीय पश्चिम बंगाल और आसपास के क्षेत्र में बने निम्न दबाव क्षेत्र का प्रभाव बताया जा रहा है। इसके चलते राज्य में मानसूनी गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>पटना में कहां-कहां खतरे के निशान के ऊपर बह रही गंगा?</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">बाढ़ नियंत्रण एवं जल संसाधन विभाग की ओर से 2 सितंबर 2026 को सुबह छह बजे जारी जलस्तर रिपोर्ट के अनुसार गंगा का पानी कई स्थानों पर बढ़ रहा है, जबकि कुछ जगहों पर घटने की स्थिति बनी हुई है। पटना के दीघा घाट में गंगा का जलस्तर 50.44 मीटर, गांधी घाट में 49.40 मीटर और हाथीदह में 42.24 मीटर दर्ज किया गया है। बक्सर में 59.98 मीटर, मनेर में 52.15 मीटर, मुंगेर में 38.50 मीटर और प्रयागराज में 82.03 मीटर जलस्तर दर्ज किया गया। वहीं पुनपुन नदी के श्रीपालपुर में 52.14 मीटर और अरवल में 66.48 मीटर पानी दर्ज हुआ। पटना के मनेर, गांधी घाट और हाथीदह में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के ऊपर है। बाढ़ नियंत्रण विभाग ने पटना शहरी सुरक्षा दीवार समेत विभिन्न तटबंधों और सुरक्षा संरचनाओं की स्थिति पर भी नजर बनाए रखने की जानकारी दी है। पटना शहरी सुरक्षा दीवार के अलग-अलग हिस्सों, दानापुर वितरणी तटबंध, दवा नाला दायां तटबंध और उसरी नाला के दाएं-बाएं तटबंधों की निगरानी की जा रही है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सितंबर में भी बदलता रहेगा मौसम, पूरे महीने कैसा रहेगा हाल?</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">मौसम विज्ञान केंद्र ने सितंबर 2026 के लिए भी मासिक पूर्वानुमान जारी किया है। सितंबर की शुरुआत में बिहार में बारिश और गरज-चमक वाले दौर बने रहने की संभावना है। पटना समेत कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक बादल छाए रहने और बारिश होने के आसार हैं। हालांकि, पूरे सितंबर में बारिश का दौर एक जैसा रहने की संभावना नहीं है। मौसम गतिविधियों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में किसानों और आम लोगों को स्थानीय मौसम पूर्वानुमान और मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।</p>
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		<title>असली नोटों के बीच छिपाए थे करोड़ों: पहली और आखिरी गड्डी के बीच में जाली नोट, सामान्य स्याही और पेपर का उपयोग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Sep 2026 06:26:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Saharanpur]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की करेंसी चेस्ट में मिले जाली नोटों के खेल में नया खुलासा हुआ है। असली नोटों के बीच गड्डी में जाली नोट छिपाए गए थे। सामान्य स्याही और पेपर का इस्तेमाल हुआ था। 10 गड्डियों को मिलाकर पांच लाख रुपये का एक बंडल तैयार किया जाता था। पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की करेंसी चेस्ट में मिले जाली नोटों के खेल में नया खुलासा हुआ है। असली नोटों के बीच गड्डी में जाली नोट छिपाए गए थे। सामान्य स्याही और पेपर का इस्तेमाल हुआ था। 10 गड्डियों को मिलाकर पांच लाख रुपये का एक बंडल तैयार किया जाता था।<br><br>पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की करेंसी चेस्ट में हुए 17 करोड़ रुपये के गबन मामले की जांच तेज हो गई है।मंगलवार को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की टीम जांच के लिए पहुंची। शुरुआती जांच में पांच लाख के नोटों का ऐसा बंडल मिला है, जिसमें 10 गड्डियों में से आठ गड्डियां जाली नोटों की थीं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पहली और आखिरी गड्डी असली और बीच में नकली नोटों की गड्डियां रखी गईं थीं। जांच टीम को ऐसे कई और बंडल मिलने की बात सामने आ रही है। वहीं, आरोपी अधिकारियों के बैंक खाते सीज कर दिए गए हैं। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस दबिश दे रही है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">महानगर के घंटाघर स्थित पीएनबी की करेंसी चेस्ट में टीम नोटों की जांच कर रही है। दोपहर के समय आरबीआई की टीम पहुंची, जिसने कई घंटे तक जांच-पड़ताल की। बताया जा रहा कि 500 रुपये के 100 नोटों की एक गड्डी में 50 हजार रुपये होते हैं। ऐसी 10 गड्डियों को मिलाकर पांच लाख रुपये का एक बंडल तैयार किया जाता है।<br><br>इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर जाली नोटों की अदला-बदली का खेल किए जाने की आशंका है। जांच के दौरान शुरुआती रैक में रखे बंडल सामान्य मिले। इसके बाद जैसे-जैसे टीम आगे की रैक तक पहुंची, नकली नोटों वाली गड्डियां मिलने लगीं। पांच-पांच लाख के बंडलों को इस तरह व्यवस्थित किया गया था कि सामान्य जांच में नकली नोट तुरंत पकड़ में न आएं। यह भी सामने आया कि कई गड्डियां ऐसी भी मिलीं, जिसमें ऊपर और नीचे की तरफ असली नोट थे और बीच में जाली नोट लगाए गए थे।</p>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सामान्य स्याही और पेपर का हुआ इस्तेमाल</strong><br>करेंसी चेस्ट में मिले जाली नोटों की जांच कर रही टीम यह भी देख रही है कि चेस्ट में रखे गए जाली नोटों की गुणवत्ता किस स्तर की है। टीम को जांच में पता चला है कि जाली नोटों को बनाने में सामान्य स्याही और पेपर का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि यह जानकारी भी जुटाई जा रही है कि इन जाली नोटों को कहां छापा गया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>हर करेंसी चेस्ट की जांच के दिए गए निर्देश</strong><br>करेंसी चेस्ट में जाली नोट मिलने के बाद मुख्यालय भी अलर्ट हो गया है। इतनी बड़ी संख्या में जाली नोट मिलने के बाद मुख्यालय की तरफ से सभी करेंसी चेस्ट में जांच करने के निर्देश दिए हैं। जिले में पंजाब नेशनल बैंक की दो करेंसी चेस्ट हैं। एक महानगर और दूसरे गंगोह में। फिलहाल महानगर स्थित करेंसी चेस्ट से लेन-देन रोक दिया गया है। सभी कैश की निकासी और जमा गंगोह स्थित करेंसी चेस्ट की जा रही है। पीएनबी के अलावा जिले में अन्य बैंकों की भी करेंसी चेस्ट हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>18 दिन चली गुपचुप जांच के बाद दर्ज कराई गई पुलिस में रिपोर्ट</strong><br>पीएनबी की करेंसी चेस्ट में जाली नोट मिलने की जांच गुपचुप तरीके से 18 दिनों तक चलती रही। जब अधिकारियों को नोटों में जाली नोट होने और बड़े गबन की आशंका पुष्ट हो गई तब पुलिस में तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसके बाद से आरोपियों का अता पता नहीं चल रहा है। पुलिस जांच कर रही है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>क्या होती है करेंसी चेस्ट</strong><br>आरबीआई द्वारा छापी गई नई मुद्रा को बैंक और आमलोगों तक पहुंचाने के लिए देशभर में कई बैंकों की शाखाओं का इस्तेमाल करेंसी चेस्ट के तौर पर किया जाता है। करेंसी चेस्ट एक तरह से स्टोर हाउस होता है। यहीं पर आरबीआई से रुपये आते हैं और इन्हीं शाखाओं के जरिये आरबीआई को रुपये भेजे जाते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी गई है। जिससे रोजाना रिपोर्ट ली जाएगी। इसके अलावा बैंक अ धिकारियों से भी दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं। आरोपियों के बैंक खाते सीज कर दिए गए हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है<strong>। &#8211; अभिनंदन सिंह, एसएसपी</strong><br><br></p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>दिल्ली में स्वाइन फ्लू का हमला तेज: एक दिन में 48 नए केस, इतने तक पहुंचा मरीजों का आंकड़ा; सतर्क रहने की सलाह</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/delhi-swine-flu-cases-rise-48-new-cases-in-one-day-advisory-issued/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 01 Sep 2026 04:35:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi]]></category>
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					<description><![CDATA[राजधानी दिल्ली में स्वाइन फ्लू (एच1एन1) के मामलों में वृद्धि का सिलसिला जारी है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, 30 अगस्त को 48 नए मामलों की पुष्टि हुई है।  दिल्ली में स्वाइन फ्लू (एच1एन1) के मामलों में बढ़ोतरी जारी है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 30 अगस्त को 48 नए मामले सामने [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">राजधानी दिल्ली में स्वाइन फ्लू (एच1एन1) के मामलों में वृद्धि का सिलसिला जारी है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, 30 अगस्त को 48 नए मामलों की पुष्टि हुई है। <br><br>दिल्ली में स्वाइन फ्लू (एच1एन1) के मामलों में बढ़ोतरी जारी है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 30 अगस्त को 48 नए मामले सामने आए। इसके साथ ही इस वर्ष अब तक कुल 3,629 मामले दर्ज हो चुके हैं। इनमें दिल्ली के 3,054 और बाहर के 575 मामले शामिल हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<p class="wp-block-paragraph">फ्लूएंजा ए और बी के कुल मामलों की संख्या भी 5,029 पहुंच गई है। विशेषज्ञों ने लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की सलाह दी है। सामान्य खांसी-जुकाम और हल्के बुखार में अनावश्यक अस्पताल जाने से बचें। तेज बुखार, अधिक ठंड लगना या सांस लेने में तकलीफ होने पर तुरंत अस्पताल जाएं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मच्छरों का डंक तेज, डेंगू-मलेरिया के मामलों में उछाल</strong><br>दिल्ली में बारिश के बीच मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। अगस्त माह में मच्छर जनित बीमारियों ने इस साल अब तक की सबसे तेज रफ्तार पकड़ी है। खास बात यह है कि डेंगू और मलेरिया में अगस्त का आंकड़ा इस साल किसी भी पिछले महीने से अधिक है। डेंगू के 311 मामलों में से 90 अगस्त में मिले हैं। वहीं, मलेरिया के 119 मामलों में 53 और चिकनगुनिया के 22 में आठ मामले इसी महीने सामने आए हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">एमसीडी के अनुसार, डेंगू के मामले जुलाई में 40 थे, जो अगस्त में बढ़कर 90 हो गए। यानी एक महीने में मामले दोगुने से भी ज्यादा हो गए। अप्रैल में 52 मामले सामने आए थे, लेकिन उसके बाद मई में 35, जून में 39 और जुलाई में 40 मामले दर्ज हुए। अगस्त में अचानक बढ़ोतरी ने एमसीडी की मच्छर नियंत्रण व्यवस्था की चुनौती बढ़ा दी है। क्षेत्रवार आंकड़ों में पश्चिमी क्षेत्र 47 मामलों के साथ सबसे आगे है। मध्य क्षेत्र में 39, उत्तरी शाहदरा में 32, सिविल लाइंस में 28, दक्षिणी क्षेत्र में 21 और सिटी एसपी में 19 मामले मिले हैं। नजफगढ़ में 18, रोहिणी में 17 और नरेला में 16 मामले दर्ज किए गए हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मलेरिया के मामले भी अगस्त में तेजी से बढ़े। जनवरी से जुलाई के बीच कुल 66 मामले सामने आए थे, जबकि अकेले अगस्त में 53 मामले दर्ज हो चुके हैं। इस साल अब तक के 119 मामलों में करीब आधे मामले अगस्त के हैं। पश्चिमी क्षेत्र में 22 मामले सबसे अधिक हैं। इसके बाद दक्षिणी क्षेत्र में 17 और मध्य क्षेत्र में 16 मामले मिले हैं। चिकनगुनिया के मामले संख्या में कम हैं, लेकिन अगस्त में इसकी रफ्तार भी बढ़ी है। जनवरी में एक, फरवरी में एक, मार्च में तीन, अप्रैल में दो, मई में चार, जून में तीन और जुलाई में तीन मामले सामने आए थे। अगस्त में आठ मामले मिल चुके हैं।</p>
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		<title>400 फीट गहरे बोरवेल में गिरा नौ साल का भानू: पांच घंटे बाद सुरक्षित निकाला गया, खुशी से झूम उठे परिजन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 01 Sep 2026 04:22:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राजस्थान के अलवर जिले के बुटोली गांव में पतंग के पीछे भागते समय 9 वर्षीय भानू पुराने और करीब 400 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया। बच्चा करीब 40-50 फीट की गहराई में फंस गया था। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के साथ एसडीआरएफ व एनडीआरएफ की टीमों ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। राजस्थान [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">राजस्थान के अलवर जिले के बुटोली गांव में पतंग के पीछे भागते समय 9 वर्षीय भानू पुराने और करीब 400 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया। बच्चा करीब 40-50 फीट की गहराई में फंस गया था। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के साथ एसडीआरएफ व एनडीआरएफ की टीमों ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।<br><br>राजस्थान के अलवर जिले के बुटोली गांव में सोमवार रात एक बड़ा हादसा उस समय टल गया, जब करीब 400 फीट गहरे पुराने बोरवेल में गिरे 9 वर्षीय बच्चे को लगभग पांच घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। भानू नाम का यह बच्चा पतंग के पीछे भागते समय पुराने और लंबे समय से बंद पड़े बोरवेल में गिर गया था। बच्चा करीब 40 से 50 फीट की गहराई में फंस गया था। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पुलिस, प्रशासन, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और ग्रामीणों की सांसें अटकी रहीं। रात करीब 11 बजे भानू को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसके बाद मौके पर खुशी की लहर दौड़ गई और लोगों ने राहत की सांस ली।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>पतंग के पीछे दौड़ रहा था भानू, अचानक बोरवेल में गिरा</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">भानू शिशराम का बेटा है। ग्रामीणों के अनुसार, पतंग उड़ाने के दौरान उसकी पतंग कट गई थी। वह कटी हुई पतंग लेने के लिए खेत की तरफ दौड़ रहा था। इसी दौरान उसका पैर पुराने बोरवेल को ढकने के लिए रखे गए पत्थर पर पड़ गया। पत्थर अचानक खिसक गया और भानू बोरवेल में जा गिरा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बताया गया कि बोरवेल करीब 400 फीट गहरा था, लेकिन भानू लगभग 40 से 50 फीट की गहराई पर जाकर फंस गया। यह बोरवेल लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हो रहा था और उसे केवल एक पत्थर से ढका गया था। खेत में लंबे समय से लोगों की आवाजाही कम होने के कारण ग्रामीणों को इस खतरनाक खुले बोरवेल की जानकारी नहीं थी।<br><br><strong>शाम 6:30 बजे मिली सूचना, तुरंत शुरू हुआ रेस्क्यू</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रियंका रघुवंशी ने बताया कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को घटना की सूचना शाम करीब 6:30 बजे मिली। जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और बच्चे को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। मौके पर एसडीएम मनीषा रेशम, तहसीलदार मनीष कुमार शर्मा, डीएसपी नरेंद्र कुमार और थाना प्रभारी राजेश कुमार समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>एसडीआरएफ और एनडीआरएफ ने संभाली कमान</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">रेस्क्यू ऑपरेशन में राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमों ने मोर्चा संभाला। बोरवेल के आसपास खुदाई कर बच्चे तक पहुंचने के लिए तीन जेसीबी मशीनें लगाई गईं। रेस्क्यू टीम ने बोरवेल के अंदर फंसे भानू तक ऑक्सीजन पहुंचाई। उसे पानी भी उपलब्ध कराया गया। टीम के सदस्य लगातार उसकी स्थिति पर नजर बनाए हुए थे और उसे सुरक्षित बाहर निकालने के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे। करीब पांच घंटे तक चले गहन रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद रात लगभग 11 बजे टीम को सफलता मिली। जैसे ही भानू को सुरक्षित बाहर निकाला गया, मौके पर मौजूद लोगों ने खुशी से तालियां बजाईं और जयकारे लगाए।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>परिवार की आंखों में आए खुशी के आंसू</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">भानू के सुरक्षित बाहर आने के बाद उसके परिवार की कई घंटों की चिंता खुशी में बदल गई। परिवार के सदस्यों की आंखों से राहत और खुशी के आंसू छलक पड़े। वहीं, कई घंटे से मौके पर खड़े ग्रामीणों ने भी राहत की सांस ली।<br>एएसपी प्रियंका रघुवंशी ने बताया कि बोरवेल से बाहर निकलने के बाद भानू स्वस्थ नजर आ रहा था और वह बातचीत भी कर पा रहा था। हालांकि एहतियात के तौर पर उसे नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सोशल मीडिया से जानकारी मिलते ही पहुंचे एनडीआरएफ विशेषज्ञ</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन में अलवर जिले के नौगांव निवासी और एनडीआरएफ के राष्ट्रीय स्तर के तकनीकी विशेषज्ञ सचिन चौधरी की भी अहम भूमिका रही। सचिन उस समय नौगांव में छुट्टी पर थे। सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें घटना की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने तुरंत बुटोली जाने का फैसला किया।<br><br>सचिन करीब रात 9:30 बजे घटनास्थल पर पहुंचे। वहां पहुंचने के बाद उन्होंने रेस्क्यू टीमों के साथ समन्वय किया और ऑपरेशन के तकनीकी पहलुओं में मदद की। उन्होंने रेस्क्यू कर्मियों से सहयोग लिया और भानू को बाहर निकालने की प्रक्रिया में तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई। सचिन चौधरी के मुताबिक, उनके घटनास्थल पर पहुंचने के करीब 10 मिनट के भीतर बच्चे को बोरवेल से बाहर निकाल लिया गया। भानू को सुरक्षित बाहर निकलते देखना उनके लिए भी बेहद भावुक और संतोषजनक पल रहा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>डर और तनाव के बाद जश्न में बदला माहौल</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">भानू के सुरक्षित बाहर निकलते ही बुटोली गांव में कई घंटों से बना डर और तनाव खुशी के माहौल में बदल गया। ग्रामीणों ने पुलिस और प्रशासन के साथ-साथ एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों के प्रयासों की सराहना की।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बुटोली में समय पर मिली सूचना, प्रशासन की त्वरित कार्रवाई, रेस्क्यू टीमों की लगातार मेहनत और तकनीकी विशेषज्ञता के बेहतर समन्वय ने एक बच्चे की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई।<br><br></p>
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