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	<title>States &#8211; RNSNS News</title>
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		<title>दिल्ली की बसों में तैनात होंगी हथियारबंद महिला पुलिसकर्मी, आधी आबादी को अब घर तक मिलेगी सुरक्षा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 04:55:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi]]></category>
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					<description><![CDATA[सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए डीटीसी की बसों के भीतर हथियारबंद महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती होगी। साथ ही, महिलाओं की सुरक्षा अब केवल बस स्टॉप तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन्हें उनके घर की दहलीज तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए एक विशेष डोर-स्टेप सुरक्षा मॉडल तैयार किया है। दिल्ली की सार्वजनिक बसों में अब [&#8230;]]]></description>
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<p>सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए डीटीसी की बसों के भीतर हथियारबंद महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती होगी। साथ ही, महिलाओं की सुरक्षा अब केवल बस स्टॉप तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन्हें उनके घर की दहलीज तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए एक विशेष डोर-स्टेप सुरक्षा मॉडल तैयार किया है।<br><br>दिल्ली की सार्वजनिक बसों में अब महिलाएं पूरी तरह बेखौफ होकर सफर कर सकेंगी। सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए डीटीसी की बसों के भीतर हथियारबंद महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती होगी। साथ ही, महिलाओं की सुरक्षा अब केवल बस स्टॉप तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन्हें उनके घर की दहलीज तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए एक विशेष डोर-स्टेप सुरक्षा मॉडल तैयार किया है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बस से उतरने के बाद उनका आखिरी मंजिल तक का सफर भी सुरक्षित रहे।</p>



<p>उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर दिल्ली परिवहन विभाग के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट कहा कि महिला यात्रियों की सुरक्षा सिर्फ बस या सार्वजनिक परिवहन के अंदर ही नहीं, बल्कि बस स्टॉप, मेट्रो स्टेशन या डिपो से उनके घर तक सुनिश्चित की जानी चाहिए। बसों में महिला कमांडो (हथियारबंद पुलिस) की मौजूदगी इसमें अहम है। इसके लिए परिवहन विभाग जल्द ही दिल्ली पुलिस के साथ तालमेल कर तैनाती की प्रक्रिया शुरू करेगा। वर्तमान में मौजूद सीसीटीवी कैमरों, पैनिक बटन और बस मार्शलों की व्यवस्था को इस नई व्यवस्था के साथ एकीकृत किया जाएगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई हो सके।<br><br><strong>घर की दहलीज तक सुरक्षित पहुंचाने की योजना</strong><br>अक्सर देखा जाता है कि बस से उतरने के बाद घर तक जाने वाले रास्ते में महिलाएं असुरक्षित महसूस करती हैं। इस समस्या को हल करने के लिए लास्ट-माइल कनेक्टिविटी पर जोर दिया है। इसके तहत ऑटो, ई-रिक्शा और कैब एग्रीगेटर्स को एक साझा सुरक्षा नेटवर्क पर लाया जाएगा। विशेष रूप से दूर-दराज के इलाकों, रिमोट एरिया और बाहरी मोहल्लों के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) का जाल बिछाया जाएगा, ताकि महिलाओं को भरोसेमंद स्थानीय परिवहन मिल सके।</p>



<p><strong>सहेली पिंक कार्ड और वुमन-ओनली कारपूलिंग</strong><br>महिलाओं की यात्रा को आसान बनाने के लिए सहेली पिंक स्मार्ट कार्ड की सुविधा अब केवल बसों तक सीमित नहीं रहेगी। इस कार्ड को मेट्रो, ऑटो और अन्य परिवहन माध्यमों में भी इस्तेमाल के योग्य बनाया जाएगा, जिससे महिलाओं को सीमलेस यानी निर्बाध यात्रा का अनुभव मिलेगा। इसके अलावा, एलजी ने निजी टैक्सी एग्रीगेटर्स जैसे ऊबर, ओला और रैपिडो के साथ मिलकर वुमन-ओनली कारपूलिंग शुरू करने का प्रस्ताव दिया है। इसका फायदा ये होगा कि यदि कैब का ड्राइवर पुरुष है, तो भी महिला यात्री को अकेले सफर नहीं करना पड़ेगा, उसके साथ कम से कम एक अन्य महिला यात्री का होना अनिवार्य किया जा सकता है।</p>



<p><strong>सिस्टम में बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी</strong><br>एलजी ने कहा, सुरक्षा के इस पूरे ढांचे को और अधिक संवेदनशील बनाने के लिए परिवहन बेड़े में महिलाओं की भर्ती बढ़ाई जाएगी। वर्तमान में दिल्ली के परिवहन तंत्र में 1,002 महिला कंडक्टर और 77 महिला ड्राइवर काम कर रही हैं, जिनकी संख्या में भविष्य में बड़ा इजाफा देखने को मिलेगा।</p>
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		<title>आईआईटियन बाबा की कहानी: भक्ति के पथ से चुना जुर्म का रास्ता, 21 लाख का पैकेज छोड़ राधाकुंड में बिछाया जाल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 06:05:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[States]]></category>
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					<description><![CDATA[मूल रूप से ओडिशा के भुवनेश्वर (थाना खंडगिरी क्षेत्र) स्थित आईगिनिया अपार्टमेंट के रहने वाले अभिषेक मिश्रा ने साल 2021 में आईआईटी रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद अभिषेक साल 2023 में मुंबई की संस्थान में 21 लाख रुपये सालाना पैकेज पर नौकरी की। कहते हैं कि धर्म [&#8230;]]]></description>
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<p>मूल रूप से ओडिशा के भुवनेश्वर (थाना खंडगिरी क्षेत्र) स्थित आईगिनिया अपार्टमेंट के रहने वाले अभिषेक मिश्रा ने साल 2021 में आईआईटी रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद अभिषेक साल 2023 में मुंबई की संस्थान में 21 लाख रुपये सालाना पैकेज पर नौकरी की।<br><br>कहते हैं कि धर्म और अध्यात्म की नगरी ब्रज में लोग शांति की तलाश में आते हैं, लेकिन ओडिशा के आईआईटियन अभिषेक मिश्रा उर्फ आदिकर्ता नारायण दास ने भक्ति की आड़ में अपराध का ऐसा रास्ता चुना जिसने सबको चौंका दिया। मुंबई में 21 लाख रुपये का सालाना पैकेज छोड़ राधाकुंड के आश्रम में युवतियों के साथ दुष्कर्म व गंधर्व विवाह कराने का जाल बिछाया। एक पीड़िता की शिकायत के बाद राजफाश हो गया। फिलहाल मामले की जांच जारी है।</p>



<p><strong>मां थी सरकारी स्कूल की प्रिंसिपल</strong><br>मूल रूप से ओडिशा के भुवनेश्वर (थाना खंडगिरी क्षेत्र) स्थित आईगिनिया अपार्टमेंट के रहने वाले अभिषेक मिश्रा ने साल 2021 में आईआईटी रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद अभिषेक साल 2023 में मुंबई की संस्थान में 21 लाख रुपये सालाना पैकेज पर नौकरी करने लगा। अभिषेक की मां एक सरकारी स्कूल में प्रधानाध्यापिका थीं, जो सेवानिवृत्त होने के बाद साल 2022 में भक्ति करने के उद्देश्य से राधाकुंड आ गईं।&nbsp;</p>



<p><strong>मां से हुआ था विवाद</strong><br>बीच बीच में अभिषेक भी मां से मिलने यहां आता रहा। उसका मन यहीं रमने लगा। शुरू में वह केवल अध्यात्म की ओर ही बढ़ा था। करीब एक साल तक नौकरी करने के बाद अभिषेक का मन पूरी तरह बदल गया और वह मोटी तनख्वाह का पैकेज छोड़कर राधाकुंड अपनी मां के पास आ गया। कुछ ही दिनों बाद मुंबई में साथ काम करने वाली युवती भी उसके पास राधाकुंड आ गई। अभिषेक की मां ने युवती के आने का विरोध किया तो विवाद हो गया। पारिवारिक कलह और बेटे की हरकतों से परेशान होकर मां वापस ओडिशा लौट गईं। इसके बाद अभिषेक ने पूरी तरह से भक्ति का चोला ओढ़ लिया।&nbsp;</p>



<p><strong>ऑनलाइन पढ़ता था ज्ञान का पाठ</strong><br>अपना नाम बदलकर आदिकर्ता नारायण दास रखा और राधाकुंड की पावन धरा पर काले कारनामे शुरू कर दिए। उसने खुद को धर्मगुरु के रूप में स्थापित करने के लिए सोशल मीडिया पर जाल बिछाना शुरू किया। वह जूम मीट के जरिए देशभर के बीटेक-एमटेक डिग्री धारक युवक-युवतियों को ऑनलाइन जोड़कर अध्यात्म और ज्ञान का पाठ पढ़ाने लगा। धीरे-धीरे उसने युवाओं को सम्मोहित कर अपने पास राधाकुंड बुलाना शुरू कर दिया।&nbsp;</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter"><img data-recalc-dims="1" decoding="async" src="https://i0.wp.com/staticimg.amarujala.com/assets/images/2026/06/04/iitian-baba_c8b8bcf4444e214af0bba667b0b830f7.jpeg?w=1200&#038;ssl=1" alt="Story of IITian Baba He Gave Up 21 Lakh rupees Package to Lay Trap in Radhakund" title="आईआईटियन बाबा की कहानी: भक्ति के पथ से चुना जुर्म का रास्ता, 21 लाख का पैकेज छोड़ राधाकुंड में बिछाया जाल"/><figcaption class="wp-element-caption">आईआईटियन बाबा अभिषेक मिश्रा &#8211; फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी</figcaption></figure>
</div>


<p></p>



<p><strong>ऐसे सामने आए कारनामे</strong><br>भक्ति के मुखौटे के पीछे आदिकर्ता नारायण दास का यह रैकेट लगातार फैलता गया। 25 मई को छत्तीसगढ़ के बाल्को कोरबा क्षेत्र की निवासी नर्सिंग छात्रा ने बाबा पर दूध में नशीला पदार्थ पिलाकर दुष्कर्म का आरोप लगाया है। इसके बाद बाबा के कारनामों की परतें खुलने लगीं और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। यहां से अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। इधर, तीन अन्य युवतियां व एक युवक ने भी आईआईटियन बाबा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। एसपी ग्रामीण सुरेश चंद्र रावत का कहना कि आईआईटियन बाबा लैपटॉप से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और जांच जारी है।</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="alignleft"><img data-recalc-dims="1" decoding="async" src="https://i0.wp.com/staticimg.amarujala.com/assets/images/2026/06/04/iitian-baba_8d2e6855cfdb2718c9579983de046833.jpeg?w=1200&#038;ssl=1" alt="Story of IITian Baba He Gave Up 21 Lakh rupees Package to Lay Trap in Radhakund" title="आईआईटियन बाबा की कहानी: भक्ति के पथ से चुना जुर्म का रास्ता, 21 लाख का पैकेज छोड़ राधाकुंड में बिछाया जाल"/><figcaption class="wp-element-caption">आईआईटियन बाबा अभिषेक मिश्रा &#8211; फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी</figcaption></figure>
</div>


<p><strong>रसूख के लिए दो लठैतों को रखता था आईआईटियन बाबा</strong><br>अध्यात्म और ज्ञान की आड़ में अनैतिक रैकेट चलाने वाले आईआईटियन बाबा अभिषेक उर्फ आदिकर्ता नारायण दास के काले कारनामों की परतें अब धीरे-धीरे खुलती जा रही हैं। पुलिस की जांच में पता चला है कि खुद को श्रीकृष्ण का अवतार बताने वाला बाबा रसूख और खौफ बनाने के लठैतों को साथ रखता था। पुलिस इन लठैतों के साथ बाबा के करीबियों की भी तलाश में जुटी है।</p>
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		<title>शिवकुमार को झटका: मंत्री बनते ही रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा, बोले-पार्टी में रहूंगा; विभाग बंटवारे से थे नाराज</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/shivakumar-faces-setback-ramalinga-reddy-resigns-after-becoming-minister-upset-over-portfolio-allocation/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 05:56:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Karnataka]]></category>
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					<description><![CDATA[कर्नाटक सरकार में विभागों के बंटवारे के बाद मंत्री रामलिंगा रेड्डी की नाराजगी सामने आई है। उन्हें जल संसाधन विभाग दिए जाने से वे संतुष्ट नहीं बताए जा रहे हैं। रेड्डी बंगलूरू विकास विभाग चाहते थे और इसी को लेकर उन्होंने बैठक में नाराजगी जताई। आज सुबह उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><em>कर्नाटक सरकार में विभागों के बंटवारे के बाद मंत्री रामलिंगा रेड्डी की नाराजगी सामने आई है। उन्हें जल संसाधन विभाग दिए जाने से वे संतुष्ट नहीं बताए जा रहे हैं। रेड्डी बंगलूरू विकास विभाग चाहते थे और इसी को लेकर उन्होंने बैठक में नाराजगी जताई। आज सुबह उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है।</em></p>



<p>कर्नाटक सरकार में विभागों के बंटवारे के बाद मंत्री रामलिंगा रेड्डी की नाराजगी सामने आई है। उन्हें जल संसाधन विभाग (वाटर रिसोर्सेज) दिए जाने से वे संतुष्ट नहीं हैं और इस मुद्दे पर उन्होंने अपनी असहमति भी जताई है। इसी नाराजगी के बीच अब उन्होंने इस्तीफा भी दे दिया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>इस्तीफे के बाद क्या बोले रामलिंगा रेड्डी</strong></h3>



<p>इस्तीफे के बाद रेड्डी ने साफ किया कि उन्होंने केवल मंत्री पद छोड़ा है, कांग्रेस पार्टी नहीं। उन्होंने आगे कहा, &#8216;मैं अपनी अंतरात्मा के खिलाफ काम नहीं कर सकता, इसलिए मंत्री पद से इस्तीफा दे रहा हूं।&#8217; उन्होंने कहा कि वे विधायक बने रहेंगे और कांग्रेस से इस्तीफा नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि वह पिछले 53 वर्षों से कांग्रेस से जुड़े हुए हैं और पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा बरकरार है। उन्होंने कभी किसी से मंत्री पद की मांग नहीं की। उन्होंने याद दिलाया कि वह पूर्व मुख्यमंत्री एम. वीरप्पा मोइली और एस.एम. कृष्णा की सरकारों में भी मंत्री रह चुके हैं और पार्टी ने उन्हें हमेशा जिम्मेदारियां दी हैं। रेड्डी ने कहा कि उन्होंने लंबे समय तक संगठन और सरकार दोनों में काम किया है।</p>



<p><strong>क्या है पूरा मामला?</strong><br>दरअसल, मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने गुरुवार रात अपने 13 मंत्रियों के बीच विभागों का आवंटन किया। इस दौरान रामलिंगा रेड्डी को जल संसाधन विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि रेड्डी बंगलूरू विकास विभाग मिलने की उम्मीद कर रहे थे और इसी विभाग पर उनका दावा था।</p>



<p>सूत्रों के अनुसार, विभागों के आवंटन को लेकर गुरुवार को हुई बैठक के दौरान रेड्डी अपनी नाराजगी जताते हुए बीच में ही बाहर चले गए थे। बैठक में उन्होंने मुख्यमंत्री को वर्ष 2023 में किए गए उस वादे की भी याद दिलाई, जिसमें कथित तौर पर कहा गया था कि भविष्य में कैबिनेट फेरबदल होने पर उन्हें बंगलूरू विकास विभाग दिया जाएगा।&nbsp;</p>



<p><strong>मामले में क्या बोले प्रियांक खरगे?</strong><br>इस्तीफे के बाद कांग्रेस में हलचल तेज हो गई है। इस बीच मंत्री प्रियंक खरगे ने कहा कि रामलिंगा रेड्डी पार्टी और राज्य दोनों के लिए महत्वपूर्ण नेता हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता इस मामले का समाधान निकाल लेंगे। प्रियंक खरगे ने कहा कि कांग्रेस में बातचीत के जरिए मुद्दों को सुलझाने की परंपरा रही है। रेड्डी के इस्तीफे को लेकर फिलहाल पार्टी नेतृत्व लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>किसे कौन से विभाग मिला?</strong></h2>



<figure class="wp-block-table"><table class="has-fixed-layout"><thead><tr><th class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>मंत्री</em></strong></th><th class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>विभाग</em></strong></th></tr></thead><tbody><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>डी.के. शिवकुमार</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>वित्त, मंत्रिमंडल मामले,<br>कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग (डीपीएआर),<br>खुफिया विभाग और अन्य अविभाजित विभाग</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>यतींद्र सिद्धारमैया</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>शहरी विकास विभाग</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>जी. परमेश्वर</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>राजस्व और खेल विभाग</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>के.एच. मुनियप्पा</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>के.जे. जॉर्ज</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>ऊर्जा और पर्यटन department</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>एम.बी. पाटिल</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>बड़े एवं मध्यम उद्योग तथा आधारभूत संरचना विभाग</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>रामलिंगा रेड्डी<br>(इस्तीफा दिया)</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>जल संसाधन (प्रमुख एवं मध्यम सिंचाई) विभाग</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>सतीश जारकीहोली</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी)</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>कृष्णा बायर गौड़ा</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>ग्रेटर बंगलूरू विकास विभाग</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>प्रियांक खरगे</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>गृह विभाग (खुफिया शाखा को छोड़कर),<br>सूचना प्रौद्योगिकी एवं जैव प्रौद्योगिकी (आईटी-बीटी) तथा ई-गवर्नेंस</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>यू.टी. खादर</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>बैराथी सुरेश</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>परिवहन विभाग</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>शरण प्रकाश पाटिल</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>चिकित्सा शिक्षा और कौशल विकास विभाग</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>ईश्वर खंड्रे</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज (आरडीपीआर) विभाग</em></strong></td></tr></tbody></table></figure>



<p><br><strong>बंगलूरू डेवलपमेंट विभाग पर अड़े थे&nbsp;रेड्डी</strong><br>मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आठ बार विधायक रह चुके रेड्डी ने बंगलूरू डेवलपमेंट के अलावा कोई और मंत्रालय लेने से इनकार कर दिया था। हालांकि, उन्हें इसके बजाय सिंचाई विभाग दिया गया था। वहीं,&nbsp;बंगलूरू डेवलपमेंट विभाग को कर्नाटक सरकार में सबसे अहम विभागों में से एक माना जाता है, ये विभाग कृष्णा बायरे गौडा को सौंपा गया है।</p>
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		<title>दिल्ली अग्निकांड: एक माह में 80 से ज्यादा विदेशी नागरिक होटल फ्लोरिश में ठहरे, जानें क्यों इनका बना ठिकाना?</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/delhi-fire-tragedy-over-80-foreign-nationals-stayed-at-hotel-flourish-in-one-month-know-why-it-became-their-hub/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 05:23:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi]]></category>
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					<description><![CDATA[दिल्ली अग्निकांड : एफआरआरओ की मदद से हुई विदेशियों की पहचानमालवीय नगर के होटल फ्लोरिश स्टे में बुधवार को आग लगी। इसमें 21 लोगों की मौत हुई, जिनमें 12 विदेशी नागरिक थे। यह होटल विदेशी मरीजों का ठिकाना बन गया था। दक्षिणी दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल फ्लोरिश स्टे में हुए भीषण अग्निकांड ने [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>दिल्ली अग्निकांड : एफआरआरओ की मदद से हुई विदेशियों की पहचानमालवीय नगर के होटल फ्लोरिश स्टे में बुधवार को आग लगी। इसमें 21 लोगों की मौत हुई, जिनमें 12 विदेशी नागरिक थे। यह होटल विदेशी मरीजों का ठिकाना बन गया था। दक्षिणी दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल फ्लोरिश स्टे में हुए भीषण अग्निकांड ने राजधानी में मेडिकल टूरिज्म और विदेशी मरीजों के ठहराव से जुड़े एक ऐसे नेटवर्क की परतें खोल दी हैं, जिस पर अब तक किसी की नजर नहीं गई थी। जांच में सामने आया है कि यह होटल एक सामान्य गेस्ट हाउस नहीं था, बल्कि इलाज के लिए दिल्ली आने वाले विदेशी मरीजों और उनके तीमारदारों का प्रमुख ठिकाना था। पुलिस के अनुसार, पिछले एक महीने के दौरान करीब 80 विदेशी नागरिक इस होटल में ठहरे थे और हादसे के समय भी यहां बड़ी संख्या में विदेशी मेहमान मौजूद थे।</p>



<p>बुधवार सुबह हुए अग्निकांड में 21 लोगों की मौत हुई, जिनमें 12 विदेशी नागरिक शामिल हैं। मृतकों में नेपाल, बांग्लादेश, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान, कांगो, नाइजीरिया, लाइबेरिया और मोजांबिक के नागरिक शामिल हैं। 21 अन्य विदेशी नागरिक विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। घायलों में केन्या और कैमरून के नागरिक भी हैं। होटल में ठहरने वाले अधिकांश विदेशी नागरिक मेडिकल वीजा पर भारत आए थे। इनमें कई मरीज थे, बड़ी संख्या उनके तीमारदार भी थे। </p>



<h3 class="wp-block-heading">दिल्ली अग्निकांड : <strong>एफआरआरओ की मदद से हुई विदेशियों की पहचान</strong></h3>



<p>हादसे के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती मृतकों और घायलों की पहचान की थी। आग में होटल के रजिस्टर, दस्तावेज और कंप्यूटर पूरी तरह जल गए थे। ऐसे में दिल्ली पुलिस ने फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (एफआरआरओ) की मदद ली।</p>



<p><strong>आग के बीच इंसानियत की मिसाल, दो लाख के गद्दे सड़क पर बिछाए</strong><br>मालवीय नगर स्थित फ्लरिश स्टे होटल में बुधवार को आग लगने के बाद जब चारों ओर धुआं और लपटें फैल गईं, तब सामने दुकान चलाने वाले एक गद्दा कारोबारी रियाजुद्दीन ने पल भर में फैसला लेते हुए करीब दो लाख रुपये के अपने गद्दे बिछा दिए, जिससे कई लोगों की जान बच सकी। उन्होंने कहा कि जान से बढ़कर कुछ नहीं होता। पैसा फिर आ जाएगा, लेकिन अगर किसी की जान चली जाती तो उसकी भरपाई नहीं हो सकती थी।</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter"><img data-recalc-dims="1" decoding="async" src="https://i0.wp.com/staticimg.amarujala.com/assets/images/2026/06/05/thall-aganakada_9fcca9083c80fe2eb5c7e9fbcd1d7689.jpeg?w=1200&#038;ssl=1" alt="Delhi fire Over 80 foreign nationals stayed at Hotel Flourish Stay in a month" title="दिल्ली अग्निकांड: एक माह में 80 से ज्यादा विदेशी नागरिक होटल फ्लोरिश में ठहरे, जानें क्यों इनका बना ठिकाना?"/></figure>
</div>


<p></p>



<p>होटल में आग लगने की सूचना मिलते ही रियाजुद्दीन मंसूरी अपने कर्मचारियों के साथ मौके पर पहुंचे और उन्होंने होटल के बाहर जमीन पर दर्जनों रजाइयां और गद्दे बिछाकर अस्थायी सुरक्षा कवच तैयार किया। इससे इमारत में फंसे लोगों को कूदकर सुरक्षित बाहर निकलने में मदद मिली।</p>



<p>रियाजुद्दीन के अनुसार, सुबह अचानक शोर सुनाई देने पर बाहर निकलकर देखा तो होटल की ऊपरी मंजिलों से धुआं निकल रहा था। लोग खिड़कियों पर आकर मदद की गुहार लगा रहे थे। उन्होंने बताया कि उस समय उनके मन में सिर्फ एक ही बात थी किसी भी तरह लोगों को बचाया जाए।</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="alignleft"><img data-recalc-dims="1" decoding="async" src="https://i0.wp.com/staticimg.amarujala.com/assets/images/2026/06/05/thall-aganakada_192ff67b2e1619f176c2305353431ea4.jpeg?w=1200&#038;ssl=1" alt="Delhi fire Over 80 foreign nationals stayed at Hotel Flourish Stay in a month" title="दिल्ली अग्निकांड: एक माह में 80 से ज्यादा विदेशी नागरिक होटल फ्लोरिश में ठहरे, जानें क्यों इनका बना ठिकाना?"/></figure>
</div>


<p>रियाजुद्दीन के अनुसार, मैंने जब लोगों को इमारत से कूदते देखा, तो मैंने अपनी दुकान से गद्दे सड़क पर बिछाकर करीब 20 लोगों की जान बचाई। उनके अनुसार, करीब आठ लोगों ने सीधे गद्दों पर छलांग लगाई और गंभीर चोट से बच गए।</p>



<p>आग लगने के तुरंत बाद हमने सबसे पहले गद्दे और रजाइयां बिछाईं। बचाव कार्य के दौरान मुझे और मेरे बेटे अरमान को भी चोटें आईं। मैंने जब लोगों को इमारत से कूदते देखा, तो मैंने अपनी दुकान से गद्दे सड़क पर बिछाकर करीब 20 लोगों की जान बचाई।<strong> -रियाजुद्दीन मंसूरी</strong><br><br><br><br></p>
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		<title>मुजफ्फरपुर के निजी अस्पताल में भीषण आग, 20 हताहत; ICU में अफरातफरी, चार मौतों की पुष्टि</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/muzaffarpur-private-hospital-fire-20-casualties-icu-chaos-four-deaths-confirmed/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 03:44:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bihar]]></category>
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					<description><![CDATA[बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित प्रसाद अस्पताल के आईसीयू में कथित शॉर्ट सर्किट के बाद भीषण आग लग गई। राहत एवं बचाव कार्य जारी है। कई मरीजों के हताहत होने की आशंका जताई जा रही है। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में प्रसाद अस्पताल के आईसीयू में गुरुवार तड़के करीब दो बजे आग लग गई। सुबह 6:30 तक तीन [&#8230;]]]></description>
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<p>बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित प्रसाद अस्पताल के आईसीयू में कथित शॉर्ट सर्किट के बाद भीषण आग लग गई। राहत एवं बचाव कार्य जारी है। कई मरीजों के हताहत होने की आशंका जताई जा रही है।<br><br>बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में प्रसाद अस्पताल के आईसीयू में गुरुवार तड़के करीब दो बजे आग लग गई। सुबह 6:30 तक तीन शवों के निकाले जाने की पुष्टि हुई है, जबकि एक और की मौत वहीं पर हो गई। करीब 20 लोगों के हताहत होने की जानकारी आई, लेकिन मौतों की संख्या पर औपचारिक पुष्टि नहीं हो रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग अस्पताल की ऊपरी मंजिल स्थित आईसीयू में लगी, जिसके बाद पूरे परिसर में धुआं फैल गया और मरीजों व उनके परिजनों के बीच भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने का अभियान शुरू किया गया।</p>



<p><strong>10 से 15 लोग बेसुध स्थिति में निकाले गए</strong><br>ब्रहपुरा थाना क्षेत्र में इस घटना से अफरातफरी मच गई। मौके पर कई घंटे बाद भी लोग मौतों की वास्तविक संख्या नहीं बता पा रहे थे, क्योंकि बेसुध अवस्था में निकाले गए लोगों को आसपास के दूसरे अस्पतालों में ले जाने की बात कही जा रही थी। बचाव कार्य में अस्पताल के कर्मी शुरू में लगे थे, लेकिन फिर अफरातफरी की स्थिति हो गई। ब्रह्मपुरा थाने के पुलिसकर्मियों ने बताया कि आग की सूचना शोरगुल से ही मिली थी। इसके बाद जिसे-जैसे मौका मिला, भागते हुए बचाव कार्य में लग गए हैं। दमकलकर्मियों ने शॉर्ट सर्किट से आग और 10 से 15 बेसुध लोगों को निकाले जाने की बात कही। मौतों का आंकड़ा बढ़ सकता है।</p>



<p><strong>आसपास के अस्पतालों में जिला प्रशासन देखेगा</strong></p>



<p>मौके पर आए डीएम सुब्रत कुमार ने कहा कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही पर परिजनों ने शिकायतें की हैं। फिलहाल आसपास के अस्पतालों में भी टीम देख रही है कि यहां से मरीज अगर ले जाए गए हैं तो उनकी स्थिति कैसी है? उन्होंने कहा कि राहत एवं बचाव कार्य में दमकलकर्मियों ने संतोषजनक काम किया है, अब देखना है कि बचाए गए बेसुध लोगों की स्थिति कैसी है?</p>
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		<title>दिल्ली में मौत का मंजर: क्या 1000 डिग्री तक पहुंच गया था तापमान? मालवीय नगर अग्निकांड पर कुछ सवाल, कई कयास</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/delhi-fire-tragedy-did-temperature-reach-1000-degrees-malviya-nagar-fire-questions-speculation/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 03:42:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi]]></category>
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					<description><![CDATA[विशेषज्ञों का मानना है कि बंद भवन में आग तेजी से फैलने पर तापमान असामान्य रूप से बढ़ सकता है और कुछ हिस्सों में यह 1000 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से इन्कार नहीं किया जा सकता। मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड के बाद घटनास्थल का मुआयना करने वाले लोगों के अनुसार आग की तीव्रता [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि बंद भवन में आग तेजी से फैलने पर तापमान असामान्य रूप से बढ़ सकता है और कुछ हिस्सों में यह 1000 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से इन्कार नहीं किया जा सकता।<br><br>मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड के बाद घटनास्थल का मुआयना करने वाले लोगों के अनुसार आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि होटल के भीतर रखी कई वस्तुएं पूरी तरह नष्ट हो गईं। मृतकों, घायलों की स्थिति ने भी आग की भयावहता को उजागर किया। विशेषज्ञों का मानना है कि बंद भवन में आग तेजी से फैलने पर तापमान असामान्य रूप से बढ़ सकता है और कुछ हिस्सों में यह 1000 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से इन्कार नहीं किया जा सकता।</p>



<p>बर्न विशेषज्ञ के अनुसार, मानव शरीर का कोई निश्चित ‘मेल्टिंग प्वाॅइंट’ नहीं होता। शरीर मुख्य रूप से पानी, प्रोटीन, वसा और ऊतकों से बना होता है, जो अत्यधिक तापमान में पिघलने के बजाय जलने, क्षतिग्रस्त होने लगते हैं। 120 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान पर शरीर के ऊतक गंभीर रूप से प्रभावित होने लगते हैं। शरीर में मौजूद पानी भाप बनने लगता है और प्रोटीन टूटने लगते हैं, जिससे ऊतक नष्ट होने लगते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आग की वास्तविक तीव्रता और तापमान का सटीक आकलन फोरेंसिक और तकनीकी जांच के बाद ही संभव होगा। <br><br><strong>घटनाक्रम&nbsp;</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>3.35 बजे दोपहर: सर्च ऑपरेशन पूरा होने के बाद अधिकारियों ने पुष्टि की कि इमारत में कोई व्यक्ति मौजूद नहीं है</li>



<li>8.00 बजे सुबह: स्थानीय लोगों ने इमारत से हल्का धुआं उठता देखा</li>



<li>8.30 बजे इमारत में आग भड़क गई और देखते ही देखते लपटें उठने लगीं</li>



<li>8.40 बजे शोर सुनकर स्थानीय लोग मदद के लिए दौड़े, बचाव कार्य शुरू</li>



<li>8.48 बजे पुलिस को कॉल मिली। पुलिस मौके के लिए रवाना हुई</li>



<li>8.50 बजे दमकल विभाग को आग लगने की सूचना मिली</li>



<li>8.55 बजे स्थानीय लोगों ने इमारत के नीचे गद्दे बिछाए। आग में फंसे लोगों ने जान बचाने के लिए कूदना शुरू किया</li>



<li>9.14 बजे सुबह: दमकल की गाड़ियां पहुंचीं और बचाव कार्य शुरू किया</li>



<li>9.16 बजे सुबह: दमकल अधिकारियों ने आग को ‘मेक-4’ घोषित करते हुए अतिरिक्त स्टाफ, संसाधन मांगा</li>



<li>9.25 बजे बेसमेंट तक पहुंचने के लिए शटर काटने का काम शुरू किया गया</li>



<li>9.45 बजे सुबह: बेसमेंट में लगी आग पर काबू पाने के बाद दमकलकर्मियों ने वहां से तीन लोगों को बाहर निकाला</li>



<li>9.54 बजे सुबह: दक्षिणी जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को सूचना दी गई</li>



<li>10.00 बजे दमकल, पुलिस, स्थानीय लोग फंसे लोगों को निकालने लगे</li>



<li>10.05 बजे सुबह: डीडीएमए की टीम डॉक्टरों के दल के साथ मौके पर पहुंची</li>



<li>10.25 बजे आग पर काबू पा लिया गया</li>



<li>10.50 बजे सुबह: आग बुझा दी गई। सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया</li>



<li>11.20 दमकल अधिकारियों के अनुसार, सुबह 9.45 बजे से 11.20 बजे तक 35 लोग इमारत से बाहर निकाले गए</li>



<li>11.25 बजे सुबह: दमकलकर्मियों ने ऊपरी मंजिलों से दो और लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला</li>
</ul>
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		<title>Bay of Bengal Earthquake: समुद्र के भीतर आया 4.6 तीव्रता का भूकंप, बंगाल की खाड़ी में महसूस किए गए झटके</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 04:25:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[West Bengal]]></category>
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					<description><![CDATA[बंगाल की खाड़ी में आज सुबह 4.6 तीव्रता का भूकंप आया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, भूकंप सुबह 7:43 बजे 10 किलोमीटर की गहराई में दर्ज किया गया। फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। बंगाल की खाड़ी में मंगलवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>बंगाल की खाड़ी में आज सुबह 4.6 तीव्रता का भूकंप आया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, भूकंप सुबह 7:43 बजे 10 किलोमीटर की गहराई में दर्ज किया गया। फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है।<br><br>बंगाल की खाड़ी में मंगलवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.6 मापी गई। एनसीएस के मुताबिक, भूकंप 2 जून को सुबह 7:43:17 बजे आया। इसका केंद्र बंगाल की खाड़ी में 14.027 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 93.132 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>एनसीएस ने क्या जानकारी थी?</strong></h3>



<p>भूकंप की गहराई 10 किलोमीटर दर्ज की गई, जिससे यह उथली श्रेणी का भूकंप माना जाता है। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर जानकारी दी कि भूकंप की तीव्रता 4.6 रही और इसका केंद्र बंगाल की खाड़ी में था।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>पहले कब दर्ज किया गया था भूकंप?</strong></h3>



<p>इससे पहले 11 फरवरी 2026 को भी बंगाल की खाड़ी में 4.3 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। वह भूकंप सुबह 5:12 बजे आया था और उसकी गहराई भी 10 किलोमीटर थी। उसका केंद्र 14.94 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 90.18 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था।</p>



<p>भूकंप विज्ञान के अनुसार, पृथ्वी की सतह से लेकर लगभग 700 किलोमीटर की गहराई तक कहीं भी भूकंप आ सकता है। वैज्ञानिक वर्गीकरण के तहत 0 से 70 किलोमीटर की गहराई वाले भूकंपों को उथला, 70 से 300 किलोमीटर के बीच आने वाले भूकंपों को मध्यवर्ती और 300 से 700 किलोमीटर की गहराई वाले भूकंपों को गहरा भूकंप कहा जाता है।<br><br></p>
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		<item>
		<title>गुजरात टाइटंस के खिलाड़ियों की बाल-बाल बची जान! होटल लौटते वक्त बस में लगी आग; जानें कैसे हुआ हादसा</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/gujarat-titans-team-bus-catches-fire-players-safe-hotel-return-incident-details/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 01 Jun 2026 03:47:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Gujarat]]></category>
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					<description><![CDATA[आईपीएल 2026 फाइनल में हार के बाद गुजरात टाइटंस के लिए एक और मुश्किल स्थिति पैदा हो गई जब अहमदाबाद में टीम की बस में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग गई। हालांकि सभी खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन खिलाड़ी करीब एक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>आईपीएल 2026 फाइनल में हार के बाद गुजरात टाइटंस के लिए एक और मुश्किल स्थिति पैदा हो गई जब अहमदाबाद में टीम की बस में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग गई। हालांकि सभी खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन खिलाड़ी करीब एक घंटे तक सड़क पर फंसे रहे।<br><br>आईपीएल 2026 फाइनल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु से हार झेलने के बाद गुजरात टाइटंस के खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को एक बड़े सुरक्षा खतरे का सामना करना पड़ा। नरेंद्र मोदी स्टेडियम से होटल लौटते समय टीम की बस में शॉर्ट सर्किट हो गया, जिसके कारण वाहन बीच रास्ते में खराब हो गया। जानकारी के अनुसार बस के अंदर धुआं फैलने लगा, जिसके बाद खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को तुरंत सुरक्षित बाहर निकाला गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई भी खिलाड़ी या स्टाफ सदस्य घायल नहीं हुआ।<br><br><strong>होटल लौटते समय हुआ हादसा</strong><br>यह घटना रविवार रात उस समय हुई जब गुजरात टाइटंस की टीम बस अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम से होटल की ओर जा रही थी। रास्ते में बस में शॉर्ट सर्किट हुआ, जिसके कारण बस में आग लग गई और चारों तरफ धुआं फैल गया। हालात बिगड़ने से पहले ही खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को बस से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। हालांकि, आग लगने के बाद टीम के सदस्य करीब एक घंटे तक सड़क पर फंसे रहे और इंतजार करते रहे, जिसके बाद उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई और&nbsp;खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को होटल पहुंचाया गया।</p>



<p><strong>बड़ा हादसा टला</strong><br>हालांकि आग लगने की घटना गंभीर थी, लेकिन समय रहते सभी खिलाड़ियों को बाहर निकाल लेने के कारण बड़ा हादसा टल गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी थी। घटना के बाद संबंधित अधिकारियों ने बस की जांच शुरू कर दी। यह हादसा ऐसे समय में हुआ जब गुजरात टाइटंस पहले ही फाइनल में हार से निराश थी। टीम को आरसीबी के खिलाफ खिताबी मुकाबले में पांच विकेट से हार का सामना करना पड़ा था।</p>



<p><strong>लगातार यात्रा से भी जूझ रही थी टीम</strong><br>फाइनल से पहले गुजरात टाइटंस का कार्यक्रम भी काफी व्यस्त रहा। टीम ने 29 मई को राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ क्वालिफायर-2 मुकाबला खेलने के लिए धर्मशाला से मुल्लांपुर तक लंबी यात्रा की थी। इसके बाद 30 मई को अहमदाबाद लौटने का कार्यक्रम खराब मौसम के कारण प्रभावित हुआ और टीम निर्धारित समय से काफी देर बाद अपने घरेलू बेस पहुंच सकी। लगातार यात्रा और कम आराम को लेकर भी चर्चाएं होती रहीं।</p>



<p><strong>क्या थकान बनी हार की वजह?</strong><br>फाइनल के बाद गुजरात टाइटंस के क्रिकेट निदेशक विक्रम सोलंकी से पूछा गया कि क्या लगातार यात्रा और थकान टीम के प्रदर्शन पर असर डाल सकती थी। हालांकि उन्होंने इस तर्क को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। सोलंकी ने कहा, &#8216;मैं यह कहकर आरसीबी की जीत का श्रेय कम नहीं करना चाहता कि हमने कम दिनों में ज्यादा मैच खेले और हम थके हुए थे। यह हमारी सोच नहीं है।&#8217;</p>



<p>उन्होंने आगे कहा, &#8216;निश्चित रूप से 155 रन का स्कोर औसत से कम था, लेकिन खिलाड़ियों ने उसका बचाव करने के लिए शानदार संघर्ष किया। हम यह जरूर देखेंगे कि हम क्या अलग कर सकते थे, लेकिन यह भी स्वीकार करना होगा कि कभी-कभी विपक्षी टीम भी बहुत अच्छा खेलती है।&#8217;</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-4"></h3>



<p><strong>राहत की बात, सभी खिलाड़ी सुरक्षित</strong><br>गुजरात टाइटंस के लिए यह रात निराशा और तनाव से भरी रही। पहले टीम खिताबी मुकाबला हार गई और फिर लौटते समय बस में आग लगने की घटना सामने आई। हालांकि सबसे बड़ी राहत यही रही कि किसी खिलाड़ी या स्टाफ सदस्य को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और सभी सुरक्षित बाहर निकल आए।</p>
]]></content:encoded>
					
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		<item>
		<title>आस्था या अराजकता?: बुद्ध के नाम पर कोहराम, अफवाहों ने आग में घी डाला, पथराव में दो सिपाही घायल, 10 गिरफ्तार</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/faith-or-chaos-uproar-in-buddhas-name-rumours-fuel-violence-two-cops-injured-10-arrested/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 29 May 2026 03:49:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Kanpur]]></category>
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					<description><![CDATA[महुआ कोला गांव में बिना अनुमति महात्मा बुद्ध की प्रतिमा स्थापना को लेकर हुए बवाल में पुलिस पर हमला हुआ है। प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए प्रतिमा हटा दी है और बड़ी संख्या में लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। हरदोई जिले में बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र के महुआ कोला गांव [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>महुआ कोला गांव में बिना अनुमति महात्मा बुद्ध की प्रतिमा स्थापना को लेकर हुए बवाल में पुलिस पर हमला हुआ है। प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए प्रतिमा हटा दी है और बड़ी संख्या में लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।</p>



<p>हरदोई जिले में बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र के महुआ कोला गांव में खाली मंदिर में बुधवार को बिना अनुमति महात्मा बुद्ध की प्रतिमा स्थापित कर दी गई। जानकारी पर पहुंचे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रतिमा हटाने के लिए ग्रामीणों को समझाया। देर रात पुलिस ने सख्ती की, तो ग्रामीणों ने हमला कर दिया। पथराव और हमले में दो सिपाही घायल हो गए, जबकि कई वाहनों के शीशे टूट गए।</p>



<p>पुलिस ने आंसू गैस का गोला छोड़कर 10 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। मामले में कुल 38 लोगों को नामजद करते कई अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। प्रतिमा हटाकर बेनीगंज कोतवाली में रखवा दी गई है। गांव में तनाव देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात है। महुआ कोला निवासी पुत्तीलाल मौर्य ने अपनी निजी भूमि पर एक मंदिर का निर्माण तीन साल पहले कराया था।</p>



<p><strong>कोई प्रतिमा या मूर्ति स्थापित नहीं थी<br></strong>इस मंदिर में कोई प्रतिमा या मूर्ति स्थापित नहीं थी। बुधवार को दिन में लगभग 11 बजे लखनऊ के टेढ़ी पुलिया निवासी शिवम मौर्या ओम प्रकाश, रंजीत मौर्या, वृंदावन कॉलोनी निवासी मुकेश मौर्या गांव पहुंच गए। यहां इन लोगों ने पुत्ती लाल और उनके परिजन व ग्रामीणों के साथ मिलकर महात्मा बुद्ध की प्रतिमा मंदिर में स्थापित कर दी। इसकी जानकारी पर गांव में कुछ लोग आक्रोशित हो गए।</p>



<p><strong>प्रतिमा स्थापित किए जाने की अनुमति संबंधी अभिलेख मांगे</strong><br>गांव की महिला चौकीदार ने इसकी जानकारी कोतवाल सतीश कुमार को दी। कोतवाल ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट संडीला नारायणी भाटिया और सीओ हरियावां अजीत चौहान को पूरे मामले की जानकारी दी। इस पर दोनों अधिकारी गांव पहुंचे और प्रतिमा स्थापित किए जाने की अनुमति संबंधी अभिलेख मांगे। पुत्ती लाल मौर्या और उनके सहयोगियों ने अनुमति न होने की जानकारी दी।</p>



<p><strong>भीड़ में शामिल लोगों ने पथराव शुरू कर दिया</strong><br>इसके बाद ग्रामीणों को समझाने की कवायद शुरू हुई। रात 11 बजे तक भी ग्रामीण नहीं माने, तो पुलिस ने सख्त रुख अपनाने की चेतावनी दी। इस बीच भीड़ में शामिल लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। साथ ही मौके पर खड़े सरकारी वाहनों पर भी डंडे चलाने लगे। इससे मौके पर अफरातफरी मच गई। इसके बाद पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर आंसू गैस के गोले छोड़े तो भीड़ तितर-बितर हो गई।</p>



<p><strong>10 लोगों को गिरफ्तार किया</strong><br>इसके बाद पुलिस ने मौके से 10 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा ने बताया कि बेनीगंज कोतवाल सतीश कुमार की शिकायत पर 38 लोगों को नामजद करते हुए अज्ञात लोगों पर भी गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। गिरफ्तार किए गए लोगों को न्यायालय ने जेल भेज दिया। घटना में सिपाही भावना और अतुल घायल हुए हैं। दोनों का उपचार चल रहा है।</p>



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<p><strong>तीन साल पहले पांच जून को भी हुआ था प्रतिमा रखने का प्रयास</strong><br>महुआ कोला में महात्मा बुद्ध की प्रतिमा स्थापित करने को लेकर पूर्व में भी विवाद हो चुका है। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि पांच जून 2023 को भी पुत्ती लाल ने अपने परिजन और कुछ ग्रामीणों के साथ मिलकर महात्मा बुद्ध की प्रतिमा इसी मंदिर में स्थापित कर दी थी। इसका पता चलने पर तत्कालीन अधिकारी मौके पर पहुंचे थे।</p>



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<figure class="alignleft"><img data-recalc-dims="1" decoding="async" src="https://i0.wp.com/staticimg.amarujala.com/assets/images/2026/05/29/kanpur_3e3cbe4e462233532ae38b0fa6024b34.jpeg?w=1200&#038;ssl=1" alt="Hardoi Uproar Erupts Over Buddha Statue Two Policemen Injured in Stone Pelting arresting 10 individuals" title="आस्था या अराजकता?: बुद्ध के नाम पर कोहराम, अफवाहों ने आग में घी डाला, पथराव में दो सिपाही घायल, 10 गिरफ्तार"/></figure>
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<p><strong>दो पक्षों के बीच गोली भी चल गई थी</strong><br>विवाद के बाद प्रतिमा बेनीगंज कोतवाली में लाकर रख दी गई थी। मामले में पुत्ती लाल समेत कई लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। ग्रामीणों का दावा है कि वर्ष 2011 में भी एक बार महात्मा बुद्ध की प्रतिमा को स्थापित करने की कोशिश में बवाल हुआ था। हालांकि तब यह मंदिर नहीं बना था, बल्कि गांव में बुद्ध बिहार में प्रतिमा स्थापित करने की कोशिश हुई थी। ग्रामीण बताते हैं कि तब दो पक्षों के बीच गोली भी चल गई थी।</p>



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<p><strong>अफवाहों ने आग में डाला घी, सख्ती न दिखाते तो जमकर पीटी जाती पुलिस</strong><br>सोशल मीडिया के दौर में अफवाहों ने भी विवाद की आग में घी डाल दिया। अलग-अलग समाज के लोगों से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स पर पोस्ट डालने से लेकर गांव पहुंचने तक का आह्वान होने लगा। आलम यह हुआ कि प्रतिमा स्थापित करने वाले लोग और उनके सहयोगी पुलिस-प्रशासनिक अफसरों से भी उलझने लगे।</p>



<p><strong>पुलिस सख्त रुख न दिखाती, तो जमकर पीटती</strong><br>प्रतिमा हटाए जाने के लिए कहने पर इन लोगों ने अधिकारियों के लिए आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। साथ ही पथराव करने लगे। प्राथमिकी में उल्लेख है कि अलग-अलग थानों की पुलिस कई बार में बुलानी पड़ी। हकीकत यही है कि अगर पुलिस सख्त रुख न दिखाती, तो भीड़ पुलिस को जमकर पीटती। हमलावरों के पास न सिर्फ लाठी-डंडे थे बल्कि लोहे की सरिया और रॉड भी थे।</p>



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<p><strong>छावनी बना गांव रात में ही पहुंचे आला अधिकारी</strong><br>पुलिस पर पथराव और फिर जवाबी कार्रवाई के बाद पूरे गांव को पुलिस ने छावनी बना दिया। टड़ियावां, अतरौली, संडीला, हरियावां समेत कई थानों की पुलिस यहां तैनात कर दी गई। बुधवार आधीरात के बाद ही जिलाधिकारी अनुनय झा, पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा, अपर जिलाधिकारी प्रफुल्ल त्रिपाठी, अपर पुलिस अधीक्षक एमपी सिंह और सुबोध गौतम के साथ ही कई सीओ भी मौके पर पहुंच गए। यहां की स्थिति पर लगातार निगाह रखी जा रही है।</p>



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<p><strong>सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार</strong><br>जिलाधिकारी अनुनय झा ने कहा कि सोशल मीडिया पर कई मामलों को लेकर भ्रामक प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महुआ कोला में बिना अनुमति के महात्मा बुद्ध की प्रतिमा स्थापित की गई थी। बिना अनुमति प्रतिमा नहीं स्थापित की जा सकती है। कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों से सख्ती से निपटा जा रहा है और आगे भी सख्ती से ही निपटा जाएगा।</p>



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<p><strong>एक और प्राथमिकी दर्ज, 15 नामजद</strong><br>बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र के महुआ कोला में महात्मा बुद्ध की प्रतिमा स्थापित करने को लेकर हुए बवाल में एक और प्राथमिकी दर्ज की गई है। गांव निवासी अरविंद मौर्या ने 15 लोगों को नामजद करते हुए 30 अज्ञात लोगोंं पर भी प्राथमिकी दर्ज कराई है। बेनीगंज कोतवाली में दी गई शिकायत में बताया कि 27 मई की शाम वह गांव में मंदिर के पास अपनी भूमि पर मवेशी बांध रहे थे।</p>



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<p><strong>आरोपियों ने पुलिस से भी अभद्रता की</strong><br>इस दौरान गांव के राजाराम, जगन्नाथ आदि मंदिर की जमीन पर बुद्ध प्रतिमा रखने की तैयारी करने लगे। मना करने यह लोग विवाद करने लगे। आरोप है कि इसी बीच पुलिस आ गई, तो आरोपियों ने पुलिस से भी अभद्रता की और गाली गलौज कर पथराव करने लगे। अरविंद का दावा है कि घटना में वह भी घायल हुआ है।</p>



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<p><strong>इन लोगों पर दर्ज हुई प्राथमिकी</strong><br>लखनऊ के टेढ़ी पुलिया निवासी शिवम मौर्या, बेनीगंज के महुआ कोला निवासी रिंकू मौर्या, राम मूरत, अनुज, राधेश्याम, नन्हीं, सेवन, कुलदीप, हरिशंकर मौर्य, गुड्डू मौर्य, हरिओम श्रीवास्तव, राकेश वर्मा, शिशुपाल मौर्य, शिव कुमार मौर्य, ओम प्रकाश मौर्य, शिव कुमार मोर्य, रामचेला, राजेश कनौजिया, बालक वर्मा, बांके वर्मा, संतू श्रीवास्तव, विक्की वर्मा, सब्बर, मंगू वर्मा, नैमिष वर्मा, गुड्डू, रामपती, राजाराम मौर्य, मूलचंद्र मौर्य, रामलखन मौर्य, गुड्डू मौर्य, अनुपम मौर्य, पुत्तीलाल मौर्य, प्रीती व अज्ञात।</p>
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		<title>कर्नाटक: राज्यपाल ने मंजूर किया सिद्धारमैया का इस्तीफा, शिवकुमार की आज दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठक</title>
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		<pubDate>Fri, 29 May 2026 03:38:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने स्वीकार कर लिया है। अब डीके शिवकुमार के नए मुख्यमंत्री बनने की संभावना तेज हो गई है। कर्नाटक की राजनीति में लंबे समय से चल रही अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने स्वीकार कर लिया है। इसके [&#8230;]]]></description>
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<p>कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने स्वीकार कर लिया है। अब डीके शिवकुमार के नए मुख्यमंत्री बनने की संभावना तेज हो गई है। कर्नाटक की राजनीति में लंबे समय से चल रही अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही राज्य में सत्ता परिवर्तन का रास्ता साफ हो गया है और अब कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार के अगले मुख्यमंत्री बनने की संभावना काफी मजबूत मानी जा रही है।</p>



<p>सिद्धारमैया ने गुरुवार को अपना इस्तीफा राज्यपाल कार्यालय को सौंपा था। हालांकि उस समय राज्यपाल थावरचंद गहलोत बंगलूरू से बाहर थे, जिसके कारण इस्तीफे को औपचारिक मंजूरी बाद में दी गई। अब राजभवन की ओर से इसे स्वीकार किए जाने के बाद राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।<br><br><strong>कर्नाटक में नई सरकार गठन की कवायद तेज</strong><br>कर्नाटक में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। बंगलूरू से लेकर नई दिल्ली तक बैठकों और रणनीतिक चर्चाओं का दौर जारी है। जहां एक ओर बंगलूरू में कांग्रेस विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक होने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर राज्य के दोनों शीर्ष नेता कार्यवाहक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार दिल्ली में मौजूद हैं।</p>



<p>राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सिद्धारमैया जयपुर के रास्ते नई दिल्ली पहुंचे। वहीं, डीके शिवकुमार भी गुरुवार को नई दिल्ली रवाना हो गए। दोनों नेताओं का एक ही समय पर दिल्ली पहुंचना कर्नाटक की राजनीति में बेहद अहम माना जा रहा है।</p>



<p><strong>कांग्रेस हाईकमान से अहम मुलाकात की संभावना</strong><br>जानकारी के मुताबिक, दिल्ली दौरे के दौरान सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से मुलाकात हो सकती है। इन बैठकों को केवल औपचारिक मुलाकात नहीं बल्कि नई सरकार के गठन की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इन बैठकों में कर्नाटक की नई सरकार के स्वरूप पर विस्तार से चर्चा होगी। इसके साथ ही संभावित मंत्रिमंडल के ढांचे और विभागों के बंटवारे को लेकर भी अंतिम रणनीति तैयार की जा सकती है।</p>



<p><strong>तीन साल की जद्दोजहद खत्म हुई</strong><br>बता दें कि राज्य में सीएम पद को लेकर पिछले तीन साल से जद्दोजहद चल रही थी। दरअसल, 2023 में मई के महीने में ही कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनी थी। तब पार्टी के दो कद्दावर नेताओं- सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार में मुख्यमंत्री बनने की होड़ मची थी। हालांकि, कांग्रेस आलाकमान ने सिद्धारमैया के अनुभव पर भरोसा करते हुए उन्हें सीएम बनाने को मंजूरी दी, वहीं शिवकुमार को डिप्टी सीएम पद से संतोष करना पड़ा।&nbsp;</p>



<p>तब यह भी अटकलें लगाई जा रही थीं कि दोनों नेताओं के बीच ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद पर रहने की सहमति बनी है। हालांकि, इसकी कभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई और बाद में सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली। लेकिन अब पूरी उम्मीद जताई जा रही है कि कांग्रेस आलाकमान ने शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने पर सहमति दे दी है, जिसके चलते सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है।&nbsp;</p>



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