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	<title>Karnataka &#8211; RNSNS News</title>
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	<title>Karnataka &#8211; RNSNS News</title>
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		<title>शिवकुमार को झटका: मंत्री बनते ही रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा, बोले-पार्टी में रहूंगा; विभाग बंटवारे से थे नाराज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 05:56:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Karnataka]]></category>
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					<description><![CDATA[कर्नाटक सरकार में विभागों के बंटवारे के बाद मंत्री रामलिंगा रेड्डी की नाराजगी सामने आई है। उन्हें जल संसाधन विभाग दिए जाने से वे संतुष्ट नहीं बताए जा रहे हैं। रेड्डी बंगलूरू विकास विभाग चाहते थे और इसी को लेकर उन्होंने बैठक में नाराजगी जताई। आज सुबह उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph"><em>कर्नाटक सरकार में विभागों के बंटवारे के बाद मंत्री रामलिंगा रेड्डी की नाराजगी सामने आई है। उन्हें जल संसाधन विभाग दिए जाने से वे संतुष्ट नहीं बताए जा रहे हैं। रेड्डी बंगलूरू विकास विभाग चाहते थे और इसी को लेकर उन्होंने बैठक में नाराजगी जताई। आज सुबह उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है।</em></p>



<p class="wp-block-paragraph">कर्नाटक सरकार में विभागों के बंटवारे के बाद मंत्री रामलिंगा रेड्डी की नाराजगी सामने आई है। उन्हें जल संसाधन विभाग (वाटर रिसोर्सेज) दिए जाने से वे संतुष्ट नहीं हैं और इस मुद्दे पर उन्होंने अपनी असहमति भी जताई है। इसी नाराजगी के बीच अब उन्होंने इस्तीफा भी दे दिया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>इस्तीफे के बाद क्या बोले रामलिंगा रेड्डी</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">इस्तीफे के बाद रेड्डी ने साफ किया कि उन्होंने केवल मंत्री पद छोड़ा है, कांग्रेस पार्टी नहीं। उन्होंने आगे कहा, &#8216;मैं अपनी अंतरात्मा के खिलाफ काम नहीं कर सकता, इसलिए मंत्री पद से इस्तीफा दे रहा हूं।&#8217; उन्होंने कहा कि वे विधायक बने रहेंगे और कांग्रेस से इस्तीफा नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि वह पिछले 53 वर्षों से कांग्रेस से जुड़े हुए हैं और पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा बरकरार है। उन्होंने कभी किसी से मंत्री पद की मांग नहीं की। उन्होंने याद दिलाया कि वह पूर्व मुख्यमंत्री एम. वीरप्पा मोइली और एस.एम. कृष्णा की सरकारों में भी मंत्री रह चुके हैं और पार्टी ने उन्हें हमेशा जिम्मेदारियां दी हैं। रेड्डी ने कहा कि उन्होंने लंबे समय तक संगठन और सरकार दोनों में काम किया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>क्या है पूरा मामला?</strong><br>दरअसल, मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने गुरुवार रात अपने 13 मंत्रियों के बीच विभागों का आवंटन किया। इस दौरान रामलिंगा रेड्डी को जल संसाधन विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि रेड्डी बंगलूरू विकास विभाग मिलने की उम्मीद कर रहे थे और इसी विभाग पर उनका दावा था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सूत्रों के अनुसार, विभागों के आवंटन को लेकर गुरुवार को हुई बैठक के दौरान रेड्डी अपनी नाराजगी जताते हुए बीच में ही बाहर चले गए थे। बैठक में उन्होंने मुख्यमंत्री को वर्ष 2023 में किए गए उस वादे की भी याद दिलाई, जिसमें कथित तौर पर कहा गया था कि भविष्य में कैबिनेट फेरबदल होने पर उन्हें बंगलूरू विकास विभाग दिया जाएगा।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मामले में क्या बोले प्रियांक खरगे?</strong><br>इस्तीफे के बाद कांग्रेस में हलचल तेज हो गई है। इस बीच मंत्री प्रियंक खरगे ने कहा कि रामलिंगा रेड्डी पार्टी और राज्य दोनों के लिए महत्वपूर्ण नेता हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता इस मामले का समाधान निकाल लेंगे। प्रियंक खरगे ने कहा कि कांग्रेस में बातचीत के जरिए मुद्दों को सुलझाने की परंपरा रही है। रेड्डी के इस्तीफे को लेकर फिलहाल पार्टी नेतृत्व लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>किसे कौन से विभाग मिला?</strong></h2>



<figure class="wp-block-table"><table class="has-fixed-layout"><thead><tr><th class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>मंत्री</em></strong></th><th class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>विभाग</em></strong></th></tr></thead><tbody><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>डी.के. शिवकुमार</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>वित्त, मंत्रिमंडल मामले,<br>कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग (डीपीएआर),<br>खुफिया विभाग और अन्य अविभाजित विभाग</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>यतींद्र सिद्धारमैया</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>शहरी विकास विभाग</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>जी. परमेश्वर</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>राजस्व और खेल विभाग</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>के.एच. मुनियप्पा</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>के.जे. जॉर्ज</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>ऊर्जा और पर्यटन department</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>एम.बी. पाटिल</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>बड़े एवं मध्यम उद्योग तथा आधारभूत संरचना विभाग</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>रामलिंगा रेड्डी<br>(इस्तीफा दिया)</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>जल संसाधन (प्रमुख एवं मध्यम सिंचाई) विभाग</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>सतीश जारकीहोली</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी)</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>कृष्णा बायर गौड़ा</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>ग्रेटर बंगलूरू विकास विभाग</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>प्रियांक खरगे</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>गृह विभाग (खुफिया शाखा को छोड़कर),<br>सूचना प्रौद्योगिकी एवं जैव प्रौद्योगिकी (आईटी-बीटी) तथा ई-गवर्नेंस</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>यू.टी. खादर</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>बैराथी सुरेश</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>परिवहन विभाग</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>शरण प्रकाश पाटिल</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>चिकित्सा शिक्षा और कौशल विकास विभाग</em></strong></td></tr><tr><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>ईश्वर खंड्रे</em></strong></td><td class="has-text-align-left" data-align="left"><strong><em>ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज (आरडीपीआर) विभाग</em></strong></td></tr></tbody></table></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><br><strong>बंगलूरू डेवलपमेंट विभाग पर अड़े थे&nbsp;रेड्डी</strong><br>मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आठ बार विधायक रह चुके रेड्डी ने बंगलूरू डेवलपमेंट के अलावा कोई और मंत्रालय लेने से इनकार कर दिया था। हालांकि, उन्हें इसके बजाय सिंचाई विभाग दिया गया था। वहीं,&nbsp;बंगलूरू डेवलपमेंट विभाग को कर्नाटक सरकार में सबसे अहम विभागों में से एक माना जाता है, ये विभाग कृष्णा बायरे गौडा को सौंपा गया है।</p>
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		<title>कर्नाटक: राज्यपाल ने मंजूर किया सिद्धारमैया का इस्तीफा, शिवकुमार की आज दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठक</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 29 May 2026 03:38:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[Karnataka]]></category>
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					<description><![CDATA[कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने स्वीकार कर लिया है। अब डीके शिवकुमार के नए मुख्यमंत्री बनने की संभावना तेज हो गई है। कर्नाटक की राजनीति में लंबे समय से चल रही अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने स्वीकार कर लिया है। इसके [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने स्वीकार कर लिया है। अब डीके शिवकुमार के नए मुख्यमंत्री बनने की संभावना तेज हो गई है। कर्नाटक की राजनीति में लंबे समय से चल रही अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही राज्य में सत्ता परिवर्तन का रास्ता साफ हो गया है और अब कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार के अगले मुख्यमंत्री बनने की संभावना काफी मजबूत मानी जा रही है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सिद्धारमैया ने गुरुवार को अपना इस्तीफा राज्यपाल कार्यालय को सौंपा था। हालांकि उस समय राज्यपाल थावरचंद गहलोत बंगलूरू से बाहर थे, जिसके कारण इस्तीफे को औपचारिक मंजूरी बाद में दी गई। अब राजभवन की ओर से इसे स्वीकार किए जाने के बाद राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।<br><br><strong>कर्नाटक में नई सरकार गठन की कवायद तेज</strong><br>कर्नाटक में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। बंगलूरू से लेकर नई दिल्ली तक बैठकों और रणनीतिक चर्चाओं का दौर जारी है। जहां एक ओर बंगलूरू में कांग्रेस विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक होने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर राज्य के दोनों शीर्ष नेता कार्यवाहक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार दिल्ली में मौजूद हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सिद्धारमैया जयपुर के रास्ते नई दिल्ली पहुंचे। वहीं, डीके शिवकुमार भी गुरुवार को नई दिल्ली रवाना हो गए। दोनों नेताओं का एक ही समय पर दिल्ली पहुंचना कर्नाटक की राजनीति में बेहद अहम माना जा रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>कांग्रेस हाईकमान से अहम मुलाकात की संभावना</strong><br>जानकारी के मुताबिक, दिल्ली दौरे के दौरान सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से मुलाकात हो सकती है। इन बैठकों को केवल औपचारिक मुलाकात नहीं बल्कि नई सरकार के गठन की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इन बैठकों में कर्नाटक की नई सरकार के स्वरूप पर विस्तार से चर्चा होगी। इसके साथ ही संभावित मंत्रिमंडल के ढांचे और विभागों के बंटवारे को लेकर भी अंतिम रणनीति तैयार की जा सकती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>तीन साल की जद्दोजहद खत्म हुई</strong><br>बता दें कि राज्य में सीएम पद को लेकर पिछले तीन साल से जद्दोजहद चल रही थी। दरअसल, 2023 में मई के महीने में ही कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनी थी। तब पार्टी के दो कद्दावर नेताओं- सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार में मुख्यमंत्री बनने की होड़ मची थी। हालांकि, कांग्रेस आलाकमान ने सिद्धारमैया के अनुभव पर भरोसा करते हुए उन्हें सीएम बनाने को मंजूरी दी, वहीं शिवकुमार को डिप्टी सीएम पद से संतोष करना पड़ा।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">तब यह भी अटकलें लगाई जा रही थीं कि दोनों नेताओं के बीच ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद पर रहने की सहमति बनी है। हालांकि, इसकी कभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई और बाद में सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली। लेकिन अब पूरी उम्मीद जताई जा रही है कि कांग्रेस आलाकमान ने शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने पर सहमति दे दी है, जिसके चलते सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><br><br></p>
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		<title>PM Modi Security: पीएम मोदी के बंगलूरू दौरे के दौरान विस्फोटक मिलने पर बड़ी कार्रवाई, छह पुलिसकर्मी सस्पेंड</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 25 May 2026 03:51:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bengaluru]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 10 मई को बंगलूरू यात्रा के दौरान कार्यक्रम स्थल के पास संदिग्ध विस्फोटक सामग्री मिलने के मामले में छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। कनकपुरा रोड के पास दो जिलेटिन स्टिक समेत कई संदिग्ध सामान बरामद हुए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 10 मई को बंगलूरू यात्रा के दौरान [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 10 मई को बंगलूरू यात्रा के दौरान कार्यक्रम स्थल के पास संदिग्ध विस्फोटक सामग्री मिलने के मामले में छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। कनकपुरा रोड के पास दो जिलेटिन स्टिक समेत कई संदिग्ध सामान बरामद हुए थे।<br><br>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 10 मई को बंगलूरू यात्रा के दौरान संदिग्ध विस्फोटक सामग्री मिलने के मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। बंगलूरू दक्षिण (रामनगर) के पुलिस अधीक्षक के आदेश पर छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। इनमें एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर (पीएसआई), एक असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (एएसआई) और चार कांस्टेबल शामिल हैं। सभी पर ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरतने का आरोप लगाया गया है।<br><br>पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मामले की जांच पूरी होने तक सभी निलंबित पुलिसकर्मी सस्पेंड रहेंगे। यह मामला उस समय सामने आया था जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बंगलूरू दौरे पर थे और सुरक्षा एजेंसियां उनके कार्यक्रमों को लेकर हाई अलर्ट पर थीं।<br><br><strong>कार्यक्रम स्थल के पास क्या-क्या मिला था?</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">जानकारी के अनुसार, 10 मई को कनकपुरा रोड के पास जंगल क्षेत्र से सटी एक कच्ची सड़क से करीब 20 फीट दूर संदिग्ध सामग्री बरामद की गई थी। मौके से दो जिलेटिन स्टिक, छह अगरबत्तियां, माचिस, सेलोफेन टेप, बैटरी पैक, तार और सर्किट बोर्ड जैसी वस्तुएं मिली थीं। इन सामग्रियों के मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया था।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>पीएम मोदी किस कार्यक्रम में शामिल होने गए थे?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">प्रधानमंत्री मोदी उस दिन आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के 45 वर्ष पूरे होने और संस्था के संस्थापक श्री श्री रविशंकर के 70वें जन्मदिन समारोह में शामिल होने बंगलूरू पहुंचे थे। बताया गया कि संदिग्ध सामग्री प्रधानमंत्री के कार्यक्रम स्थल के पास उनके पहुंचने से करीब डेढ़ घंटे पहले बरामद हुई थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">घटना के बाद कग्गलीपुरा पुलिस ने विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 4 और एक्सप्लोसिव एक्ट की धारा 9बी के तहत एफआईआर दर्ज की है। इन धाराओं के तहत जानमाल को नुकसान पहुंचाने के इरादे से विस्फोटक रखने या विस्फोट करने की कोशिश जैसे मामलों में कार्रवाई की जाती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हालांकि, अब तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है और न ही बरामद विस्फोटक सामग्री के स्रोत का पता चल पाया है। जांच में सहायता के लिए एनआईए की एक टीम भी दिल्ली से बंगलूरू पहुंची थी।&nbsp;</p>
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		<title>कर्नाटक: कावेरी नदी में डूबने से छह लोगों की मौत; मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने दुख जताया, मुआवजा की घोषणा की</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 05:04:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Karnataka]]></category>
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					<description><![CDATA[कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कावेरी नदी में डूबने से छह लोगों की मौत पर दुख जताया है और उनकी परिवारों के लिए पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता का एलान किया है। कर्नाटक के मैसूर में कावेरी नदी में नहाने गए छह लोगों की डूबने से मौत हो गई। राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कावेरी नदी में डूबने से छह लोगों की मौत पर दुख जताया है और उनकी परिवारों के लिए पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता का एलान किया है।  कर्नाटक के मैसूर में कावेरी नदी में नहाने गए छह लोगों की डूबने से मौत हो गई। राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस घटना पर दुख जताया और मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की। <br><br><strong>मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने क्या कहा?</strong><br>मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया। इसमें उन्होंने कहा, यह बहुत दुख और दिल तोड़ने वाली घटना है। मैसूर के केआर नगर के पास अर्केश्वर मंदिर के नजदीक कावेरी नदी में नहाने गए छह लोगों की डूबने से मौत हो गई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सिद्धारमैया ने घोषणा की की मृतकों के परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। </p>



<p class="wp-block-paragraph"><br></p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>कर्नाटक के बागलकोट में सांप्रदायिक तनाव, पुलिस ने किया बल प्रयोग; तेज संगीत पर टकराए दो गुट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 20 Feb 2026 03:34:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Karnataka]]></category>
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					<description><![CDATA[कर्नाटक के बागलकोट में शिवाजी की 396वीं जयंती के मौके पर पथराव के बाद तनाव पैदा होने की खबर है। जुलूस के दौरान हुए पथराव के बाद सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया है।बवाल को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग भी करना पड़ा। कर्नाटक के अलावा हैदराबाद में भी शिवाजी जयंती पर आयोजित [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">कर्नाटक के बागलकोट में शिवाजी की 396वीं जयंती के मौके पर पथराव के बाद तनाव पैदा होने की खबर है। जुलूस के दौरान हुए पथराव के बाद सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया है।बवाल को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग भी करना पड़ा। कर्नाटक के अलावा हैदराबाद में भी शिवाजी जयंती पर आयोजित शोभायात्रा को लेकर दो गुटों के बीच तनाव की खबर है। जानिए क्या है दोनों शहरों का पूरा मामला<br><br>कर्नाटक के बागलकोट में सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया है। शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक छत्रपति शिवाजी की जयंती के मौके पर आयोजित शोभायात्रा के दौरान  पथराव किए जाने के बाद टकराव बढ़ा। बागलकोट में हालात नियंत्रित करने के लिए स्थानीय पुलिस को बलप्रयोग का सहारा लेना पड़ा। एक अन्य दक्षिण भारतीय राज्य तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में भी दो धर्मों के लोगों के बीच टकराव की खबर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दो गुटों के लोगों ने जुलूस निकाले जाने के दौरान एक दूसरे के विरोध में जमकर नारेबाजी की। फिलहाल दोनों जगहों पर स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मध्य प्रदेश के जबलपुर में भी धार्मिक तनाव</strong><br>दक्षिण भारत की इन दो घटनाओं से पहले मध्य प्रदेश के जबलपुर में भी गुरुवार देर रात धार्मिक मुद्दे पर तनाव भड़क उठा। जबलपुर से आई रिपोर्ट्स के मुताबिक सिरोह के एक मंदिर में कथित तोड़फोड़ के बाद तनाव पैदा हुआ। यहां दो पक्षों के बीच हिंसक झड़प और पत्थरबाजी से उपजे तनाव को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने 15 लोगों को हिरासत में भी लिया। फिलहाल हालात संवेदनशील हैं और मौके पर मध्य प्रदेश पुलिस के जवान बड़ी संख्या में तैनात किए गए हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>कर्नाटक में गहराया सियासी संकट: सिद्धारमैया झुकने को नहीं तैयार, शिवकुमार ने नेतृत्व को याद दिलाया &#8216;वादा&#8217;</title>
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		<pubDate>Fri, 28 Nov 2025 03:46:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Karnataka]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
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					<description><![CDATA[कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी के भीतर छिड़े संकट की मुख्य वजह &#8216;ढाई साल का फॉर्मूला&#8217; है। पार्टी के अंदरूनी झगड़ों में यह खुलकर सामने आता रहा है। पहले भी राजस्थान और छत्तीसगढ़ में इसी फॉर्मूले की वजह से सियासी संकट पैदा हुआ था। कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर मचा सियासी घमासान थमने का नाम [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी के भीतर छिड़े संकट की मुख्य वजह &#8216;ढाई साल का फॉर्मूला&#8217; है। पार्टी के अंदरूनी झगड़ों में यह खुलकर सामने आता रहा है। पहले भी राजस्थान और छत्तीसगढ़ में इसी फॉर्मूले की वजह से सियासी संकट पैदा हुआ था।<br><br>कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर मचा सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुबानी जंग जारी है। हालिया घटनाक्रमों की बात करें तो दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर शब्द या वादे को निभाने की ओर इशारा कर रहे हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">डीके शिवकुमार को कर्नाटक में सिद्धारमैया के उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट के जरिए सबसे पहले नेतृत्व परिवर्तन की ओर इशारा किया। इसे पार्टी नेतृत्व को उसके कथित वादे के बारे में सार्वजनिक तौर पर संकेत के रूप में देखा गया था। <br><br>माना जाता है कि शिवकुमार को कर्नाटक सरकार के पांच साल के कार्यकाल के ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री बनाए जाने का फॉर्मूला दिया गया था। कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने 20 नवंबर को ढाई साल पूरे कर लिए हैं। हालांकि, कांग्रेस की ओर से आधिकारिक तौर पर ऐसा कोई एलान नहीं किया गया था।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>डीके शिवकुमार ने कांग्रेस नेतृत्व को याद दिलाया वादा</strong><br>कांग्रेस नेता शिवकुमार ने अपनी पोस्ट में कहा था कि अपनी बात पर कायम रहना दुनिया की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि चाहे वह जज हों, राष्ट्रपति हों या कोई और, जिसमें मैं भी शामिल हूं, सभी को अपनी बात पर चलना होगा। शब्द की ताकत ही विश्व की ताकत है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">डीके शिवकुमार की इस &#8216;शब्द&#8217; वाली पोस्ट पर पलटवार करते हुए सिद्धारमैया ने कुछ ही घंटों बाद उसी शब्दावली का इस्तेमाल किया। उन्होंने उन कामों की भी सूची दी जो वे अपने शेष कार्यकाल में करने की योजना बना रहे हैं- जो दर्शाने के लिए काफी है कि वे सीएम पद छोड़ने के मूड में नहीं हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सिद्धारमैया सीएम पद छोड़ने के मूड में नहीं</strong><br>सिद्धारमैया ने लिखा कि कर्नाटक की जनता की ओर से दिया गया जनादेश एक क्षण नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है जो पूरे पांच साल तक चलती है। उन्होंने लिखा, &#8216;एक शब्द तब तक शक्ति नहीं है जब तक वह लोगों के लिए दुनिया को बेहतर न बनाए। कर्नाटक के लिए हमारा शब्द कोई नारा नहीं है, यह हमारे लिए पूरी दुनिया है।&#8217;</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने मुख्यमंत्री के तौर पर अपने पिछले कार्यकाल (2013-18) का उल्लेख किया, जिसके दौरान उन्होंने दावा किया था कि, &#8216;165 में से 157 वादे पूरे किए गए और 95 फीसदी से अधिक वादे पूरे किए गए।&#8217; मुख्यमंत्री ने कहा, &#8216;इस कार्यकाल में 593 में से 243 से अधिक वादे पूरे हो चुके हैं और शेष सभी वादे प्रतिबद्धता, विश्वसनीयता और सावधानी के साथ पूरे किए जाएंगे।&#8217;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>झगड़े के केंद्र में ढाई साल वाला फॉर्मूला</strong><br>कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी के भीतर छिड़े संकट की मुख्य वजह &#8216;ढाई साल का फॉर्मूला&#8217; है। पार्टी के अंदरूनी झगड़ों में यह खुलकर सामने आता रहा है। हाल के वर्षों में कांग्रेस को कम से कम दो बार राजस्थान और छत्तीसगढ़ में इसी फॉर्मूले के चलते संकट का सामना करना पड़ा है। इन दोनों राज्यों में बाद में हुए चुनावों में उसे सत्ता गंवानी पड़ी थी।&nbsp;इस पूरे मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि कोई भी फैसला पूरी तरह से आलाकमान की ओर से ही लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस पर सार्वजनिक रूप से चर्चा करने की जरूरत नहीं है।</p>
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		<title>एयरपोर्ट पर मुस्लिमों के नमाज पढ़ने का कथित वीडियो वायरल, भाजपा ने CM सिद्धारमैया-खरगे को घेरा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 10 Nov 2025 08:02:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कर्नाटक की राजधानी बंगलूरू में स्थित केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के टर्मिनल-2 पर कुछ लोगों के नमाज अदा करने का कथित वीडियो वायरल होने के बाद कर्नाटक में राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। विपक्षी दल भाजपा ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। वायरल वीडियो में कुछ मुस्लिमों को [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">कर्नाटक की राजधानी बंगलूरू में स्थित केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के टर्मिनल-2 पर कुछ लोगों के नमाज अदा करने का कथित वीडियो वायरल होने के बाद कर्नाटक में राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। विपक्षी दल भाजपा ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। वायरल वीडियो में कुछ मुस्लिमों को टर्मिनल-2 में नमाज पढ़ते हुए देखा जा सकता है। इस दौरान पास खड़े सुरक्षा कर्मियों को यह घटनाक्रम देखते हुए दिखाया गया।<br><br>भाजपा की कर्नाटक इकाई के प्रवक्ता विजय प्रसाद ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और मंत्री प्रियांक खरगे से पूछा कि क्या नमाज अदा करने वालों ने सार्वजनिक स्थल पर ऐसा करने के लिए सरकार द्वारा हाल ही में बनाए गए नियमों के तहत कोई अनुमति ली थी। उन्होंने शनिवार देर रात ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “बंगलूरू अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के टर्मिनल-2 के अंदर यह कैसे अनुमति दी जा सकती है? क्या मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और मंत्री प्रियांक खरगे इस पर सहमत हैं?”<br><br></p>



<figure class="wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter wp-block-embed-twitter"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<div class="embed-twitter"><blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="en" dir="ltr">How is this even allowed inside the T2 Terminal of Bengaluru International Airport?<br>Hon’ble Chief Minister <a href="https://twitter.com/siddaramaiah?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">@siddaramaiah</a>  and Minister <a href="https://twitter.com/PriyankKharge?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">@PriyankKharge</a>  do you approve of this?<br><br>Did these individuals obtain prior permission to offer Namaz in a high-security airport zone?<br>Why is it… <a href="https://t.co/iwWK2rYWZa">pic.twitter.com/iwWK2rYWZa</a></p>&mdash; Vijay Prasad (@vijayrpbjp) <a href="https://twitter.com/vijayrpbjp/status/1987556778377465937?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">November 9, 2025</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></div>
</div></figure>



<p class="wp-block-paragraph">भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि सरकार ने हाल ही में ऐसे नियम बनाए थे, जिनका मकसद आरएसएस की गतिविधियों को सीमित करना था। उन्होंने कहा, “जब आरएसएस अनुमति लेकर पथ संचलन आयोजित करता है तो सरकार आपत्ति जताती है, लेकिन प्रतिबंधित सार्वजनिक क्षेत्र में होने वाली ऐसी गतिविधियों पर आंखें मूंद लेती है।” प्रसाद ने सवाल उठाया कि क्या यह घटना इतने संवेदनशील क्षेत्र में गंभीर सुरक्षा चिंता का विषय नहीं है।</p>
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		<title>गन्ना किसानों के आंदोलन से घबराई कर्नाटक सरकार, सिद्धारमैया ने प्रधानमंत्री से लगाई मदद की गुहार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 07 Nov 2025 05:25:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Karnataka]]></category>
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					<description><![CDATA[कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने प्रधानमंत्री मोदी को चिट्ठी लिखकर राज्य में गन्ना किसानों के संकट को हल करने के लिए तुरंत बैठक की मांग की है। कर्नाटक में बीते कई दिनों से गन्ना किसान आंदोलन कर रहे हैं और उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग को बंद किया हुआ है। किसान आंदोलन को समर्थन बढ़ता ही जा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने प्रधानमंत्री मोदी को चिट्ठी लिखकर राज्य में गन्ना किसानों के संकट को हल करने के लिए तुरंत बैठक की मांग की है। कर्नाटक में बीते कई दिनों से गन्ना किसान आंदोलन कर रहे हैं और उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग को बंद किया हुआ है। किसान आंदोलन को समर्थन बढ़ता ही जा रहा है और यह आंदोलन कई अन्य जिलों में भी फैल सकता है। सीएम ने प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी में अपील करते हुए लिखा कि &#8216;मैं आपसे जल्द से जल्द बैठक करने का अनुरोध करता हूं ताकि हम अपने गन्ना किसानों, अपनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कर्नाटक और देश में गन्ने की वैल्यू-चेन की भलाई के लिए मिलकर काम कर सकें।&#8217;<br><br><strong>सीएम बोले- एफआरपी केंद्र सरकार तय करती है</strong><br>कर्नाटक के गन्ना किसानों ने गन्ने के लिए 3,500 रुपये प्रति टन का मूल्य तय करने की मांग को लेकर अपना विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया है। जिसके बाद कर्नाटक सरकार ने गुरुवार को दखल देने का फैसला किया और शुक्रवार को किसानों और चीनी मिल मालिकों के साथ लगातार दो बैठकें बुलाईं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि गन्ने का फेयर एंड रिम्यूनरेटिव प्राइस (FRP) तय करने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपना आंदोलन और तेज न करें और शुक्रवार को बंगलूरू में बातचीत के लिए बुलाया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">किसान गन्ने के लिए 3,500 रुपये प्रति टन की मांग कर रहे हैं, वहीं मिलों ने 3,200 रुपये प्रति टन से ज्यादा देने से इनकार कर दिया है। </p>
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		<title>कर्नाटक में RSS की गतिविधियों पर रोक की तैयारी, सीएम ने समीक्षा के दिए आदेश; इस मंत्री ने की मांग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Oct 2025 06:38:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Karnataka]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
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					<description><![CDATA[ कर्नाटक में आरएसएस पर बैन की मांग पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा- मुख्य सचिवों को इस मुद्दे की पूरी समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। जिस तरह से तमिलनाडु में संघ की गतिविधियों पर रोक लगी है, वैसे कर्नाटक में रोक लगाया जाएगा। कर्नाटक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधियों पर रोक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"> कर्नाटक में आरएसएस पर बैन की मांग पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा- मुख्य सचिवों को इस मुद्दे की पूरी समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। जिस तरह से तमिलनाडु में संघ की गतिविधियों पर रोक लगी है, वैसे कर्नाटक में रोक लगाया जाएगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कर्नाटक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग को लेकर राजनीति गरमा गई है। राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री प्रियांक खरगे ने सरकार से आग्रह किया है कि संघ की गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाई जाए। अब इस मामले पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का बयान सामने आया है।<br><br><strong>मुख्य सचिवों को समीक्षा के दिए गए निर्देश- सीएम</strong><br>मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि राज्य के मुख्य सचिवों को इस मुद्दे की पूरी समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु सरकार ने पहले ही सरकारी स्थानों पर संघ की गतिविधियों पर रोक लगाई हुई है। उसी मॉडल को कर्नाटक में भी लागू करने की दिशा में कदम बढ़ रहे हैं। सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि, &#8216;मंत्री प्रियांक खरगे ने पत्र लिखा है। उन्होंने कहा है कि आरएसएस सरकारी परिसरों का इस्तेमाल कर रहा है और उसे रोकने के लिए वही किया जाए, जो तमिलनाडु सरकार ने किया है।&#8217;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>तमिलनाडु की तरह कर्नाटक में लगाएंगे रोक-&nbsp;सिद्धारमैया</strong><br>सीएम सिद्धारमैया ने कहा, &#8216;संघ सरकारी जगहों का इस्तेमाल अपनी गतिविधियों के लिए कर रहा है। ऐसा नहीं होना चाहिए। जैसे तमिलनाडु में रोक लगाई गई है, वैसे ही कर्नाटक में भी इसे रोका जाएगा।&#8217; उन्होंने साफ कहा कि सरकारी भवनों और सार्वजनिक संपत्तियों का इस्तेमाल किसी भी संगठन को राजनीतिक या वैचारिक कार्यक्रमों के लिए करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके लिए कानूनी प्रक्रिया और प्रशासनिक आदेशों की समीक्षा की जा रही है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सीएम के निर्देश पर प्रियांक खरगे की प्रतिक्रिया</strong><br>मंत्री प्रियांक खरगे ने सीएम सिद्धारमैया की तरफ से मुख्य सचिवों को सरकारी स्थानों पर आरएसएस की गतिविधियों को प्रतिबंधित करने के तमिलनाडु सरकार के कदम की समीक्षा करने के निर्देश पर कहा, &#8216;मुझे नहीं पता कि तमिलनाडु में क्या मॉडल है लेकिन कर्नाटक में संविधान का मॉडल है, ये जो लोग लाठी लेकर मार्च कर रहे हैं, ये सब बंद होना चाहिए, अगर करना है तो अपने घर में करो, अपने नेताओं के घर में करो, उनकी कृषि भूमि में करो, सार्वजनिक स्थानों पर, सरकारी स्कूलों में क्यों कर रहे हो? अगर ये सिद्धांत और तत्व इतने अच्छे हैं तो भाजपा नेताओं के बच्चे शाखा में क्यों नहीं पढ़ते? वे गौरक्षक क्यों नहीं बनते? क्या धर्म का नशा केवल एससी, एसटी, पिछड़े, ओबीसी के लिए है? हमारा एकमात्र उद्देश्य है कि सरकारी स्कूलों में केवल शिक्षा हो।&#8217;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>प्रियांक खरगे का RSS पर आरोप</strong><br>कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे और मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा था, &#8216;अगर एक संगठन सरकारी जगहों का इस्तेमाल अपने विचार फैलाने के लिए करता है तो यह उचित नहीं है। सरकार को इस पर सख्त कदम उठाना चाहिए।&#8217; प्रियांक खरगे ने सीएम को लिखे अपने पत्र में कहा कि आरएसएस सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के साथ-साथ सार्वजनिक स्थानों पर भी अपनी शाखाएं चला रहा है, जहां नारे लगाए जाते हैं और बच्चों व युवाओं के मन में नकारात्मक विचार भरे जाते हैं।&#8217; उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस दुनिया का सबसे गुप्त संगठन है, जिसने खुद को रजिस्टर्ड नहीं कराया है, लेकिन फिर भी उसे सैकड़ों करोड़ रुपये का धन मिलता है। मंत्री ने कहा, &#8216;यह दुनिया का सबसे गोपनीय संगठन है। इतनी गोपनीयता क्यों। ये लोग कौन हैं। आरएसएस प्रमुख के संबोधन का सीधा प्रसारण क्यों होना चाहिए? उनका योगदान क्या है? वे मुझे अपने 100 साल के इतिहास में अपने दस योगदान बताएं।&#8217; उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा आरएसएस की कठपुतली है।</p>
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		<title>&#8216;वक्फ की एक जमीन मोदी सरकार हमसे नहीं छीन सकेगी..&#8217;, कर्नाटक की रैली में बोले असदुद्दीन ओवैसी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Jun 2025 07:44:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Karnataka]]></category>
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					<description><![CDATA[ओवैसी ने कहा कि &#8216;हम रायचूर के हिंदू भाइयों को संदेश देना चाहते हैं कि आपको एंडोवमेंट बोर्ड में सिर्फ हिंदू सदस्य बन सकता है तो मुसलमानों को वक्फ में कैसे गैर मुस्लिम सदस्य बनेगा?&#8217; एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर वक्फ कानून को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">ओवैसी ने कहा कि &#8216;हम रायचूर के हिंदू भाइयों को संदेश देना चाहते हैं कि आपको एंडोवमेंट बोर्ड में सिर्फ हिंदू सदस्य बन सकता है तो मुसलमानों को वक्फ में कैसे गैर मुस्लिम सदस्य बनेगा?&#8217;<br><br>एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर वक्फ कानून को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी या मोदी सरकार हमसे वक्फ की एक जमीन नहीं छीन सकेंगे। कर्नाटक का रायचूर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने ये बात कही। <br><br><strong>क्या बोले ओवैसी</strong><br>हैदराबाद सीट से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि &#8216;जो लोग ये समझ रहे कि मुसलमानों को ये कानून बनाकर डराया जाएगा। याद रखो कि पीएम मोदी या मोदी सरकार वक्फ की एक जमीन हमसे नहीं छीन सकेगी। ये कानून काला है। ये संविधान के अनुच्छेद 14,15,25,26 और 29 के खिलाफ है। जो चैप्टर तीन का अधिकार है, उसके खिलाफ है।&#8217; ओवैसी ने कहा कि &#8216;हम रायचूर के हिंदू भाइयों को संदेश देना चाहते हैं कि आपको एंडोवमेंट बोर्ड में सिर्फ हिंदू सदस्य बन सकता है तो मुसलमानों को वक्फ में कैसे गैर मुस्लिम सदस्य बनेगा?&#8217;</p>



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<div class="embed-twitter"><blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="en" dir="ltr"><a href="https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#WATCH</a> | Raichur, Karnataka |  On Waqf Amemndment Act, AIMIM Chief Asaduddin Owaisi says, &quot;&#8230;To those who believe that they can intimidate the Muslim community by making such laws,  remember that PM Modi or the BJP government cannot take away the land under Waqf from us&#8230;&quot;… <a href="https://t.co/yarypsquqB">pic.twitter.com/yarypsquqB</a></p>&mdash; ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1937686884672737337?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">June 25, 2025</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></div>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>वक्फ कानून का लगातार विरोध कर रहे ओवैसी</strong><br>एआईएमआईएम प्रमुख ने वक्फ कानून में पांच साल के मुसलमान के प्रावधान पर भी सवाल उठाए और कहा कि &#8216;ये पांच साल के मुसलमान का क्या कानून है? ये पांच साल का नियम कहां से लगाया गया।&#8217; असदुद्दीन ओवैसी वक्फ संशोधन कानून का विरोध कर रहे हैं। ओवैसी का आरोप है कि वक्फ कानून से वक्फ बोर्ड कमजोर होगा। यह कानून असंवैधानिक है। वहीं सरकार का कहना है कि वक्फ कानून में जो संशोधन किए गए हैं, उनकी मंशा संपत्ति के प्रबंधन को धर्मनिरपेक्ष बनाए रखना है। यह कानून संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 में मिली धार्मिक आजादी का उल्लंघन नहीं करता है। वक्फ कानून 2 अप्रैल को लोकसभा और 3 अप्रैल को राज्यसभा से पारित हुआ था। इसके बाद 5 अप्रैल को राष्ट्रपति ने इसे अपनी मंजूरी दी। जिसके बाद यह कानून बना। </p>
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