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	<title>Ladakh &#8211; RNSNS News</title>
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		<title>लेह में पहाड़ से गिरा बर्फ का बड़ा हिस्सा सात की मौत, नीचे से गुजर रही थीं गाड़ियां</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 28 Mar 2026 03:59:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Ladakh]]></category>
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					<description><![CDATA[लेह में पहाड़ से गिरा बर्फ का बड़ा हिस्सा सात की मौत, हिमस्खलन की जो तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं, उनसे हादसे की वीभत्सता नजर आती है। वाहन बर्फ में पूरी तरह दब गए हैं। वाहनों की छत से बर्फ हटाने में ही सेना और बीआरओ के जवानों को कड़ी मशक्कत [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">लेह में पहाड़ से गिरा बर्फ का बड़ा हिस्सा सात की मौत, हिमस्खलन की जो तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं, उनसे हादसे की वीभत्सता नजर आती है। वाहन बर्फ में पूरी तरह दब गए हैं। वाहनों की छत से बर्फ हटाने में ही सेना और बीआरओ के जवानों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। </p>



<p class="wp-block-paragraph">लद्दाख के कारगिल जिले में जोजिला-गुमरी मार्ग पर शुक्रवार दोपहर प्रकृति का कहर टूटा। जीरो पॉइंट और मिनीमर्ग के बीच भारी हिमस्खलन ने कई जिंदगियों को चपेट में ले लिया। हादसे में सात लोगों की मौत हो गई। कम से कम पांच लोग गंभीर घायल हुए हैं। बर्फ के विशाल मलबे के नीचे 7 से 8 वाहनों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">लेह में पहाड़ से गिरा बर्फ का बड़ा हिस्सा सात की मौत</h3>



<p class="wp-block-paragraph">हिमस्खलन प्रभावित क्षेत्र लेह-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पड़ता है। शुक्रवार दोपहर करीब तीन बजे वाहन जोजिला दर्रे से गुजर रहे थे। इसी दाैरान पहाड़ी पर भूस्खलन हुआ और बर्फ का बड़ा हिस्सा तेजी से सड़क पर आ गिरा। पलक झपकते ही वाहन बर्फ के नीचे दब गए। सूचना मिलते ही सेना, सीमा सड़क संगठन (बीआरओ), लद्दाख पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें बचाव एवं राहत कार्य के लिए मशीनों के साथ पहुंच गईं।</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full"><img data-recalc-dims="1" fetchpriority="high" decoding="async" width="700" height="394" src="https://i0.wp.com/rnsnsnews.com/wp-content/uploads/2026/03/image-4.png?resize=700%2C394&#038;ssl=1" alt="" class="wp-image-12584" title="लेह में पहाड़ से गिरा बर्फ का बड़ा हिस्सा सात की मौत, नीचे से गुजर रही थीं गाड़ियां 1" srcset="https://i0.wp.com/rnsnsnews.com/wp-content/uploads/2026/03/image-4.png?w=700&amp;ssl=1 700w, https://i0.wp.com/rnsnsnews.com/wp-content/uploads/2026/03/image-4.png?resize=300%2C169&amp;ssl=1 300w" sizes="(max-width: 700px) 100vw, 700px" /></figure>
</div>


<p class="wp-block-paragraph"><strong>हटाई जा रही बर्फ</strong><br>खराब मौसम और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद देर रात तक सेना और बीआरओ के जवान स्थानीय स्वयंसेवकों की मदद से बर्फ हटाने और फंसे हुए लोगों को निकालने के कार्य में जुटे थे। घायलों को तत्काल निकालने के लिए बसीज इमाम खामनेई मेमोरियल ट्रस्ट (आईकेएमटी) के सदस्य और 108 एम्बुलेंस तैनात हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सात के मारे जाने की पुष्टि</strong><br>केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भूस्खलन में दबने से सात लोगों की मौत की पुष्टि की है। अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट में उन्होंने बताया कि हादसे में पांच लोग घायल हुए हैं। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी इसकी पुष्टि की है। सभी घायलों को उप-जिला अस्पताल द्रास में भर्ती कराया गया है। चार की हालत नाजुक बताई जा रही है। घायलों और मृतकों में अधिकतर लेह जिले के हैं।</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full"><img data-recalc-dims="1" decoding="async" width="700" height="394" src="https://i0.wp.com/rnsnsnews.com/wp-content/uploads/2026/03/image-6.png?resize=700%2C394&#038;ssl=1" alt="" class="wp-image-12586" title="लेह में पहाड़ से गिरा बर्फ का बड़ा हिस्सा सात की मौत, नीचे से गुजर रही थीं गाड़ियां 2" srcset="https://i0.wp.com/rnsnsnews.com/wp-content/uploads/2026/03/image-6.png?w=700&amp;ssl=1 700w, https://i0.wp.com/rnsnsnews.com/wp-content/uploads/2026/03/image-6.png?resize=300%2C169&amp;ssl=1 300w" sizes="(max-width: 700px) 100vw, 700px" /></figure>
</div>


<p class="wp-block-paragraph"><strong>बर्फ में पूरी तरह दब गए वाहन</strong><br>हिमस्खलन की जो तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं, उनसे हादसे की वीभत्सता नजर आती है। वाहन बर्फ में पूरी तरह दब गए हैं। वाहनों की छत से बर्फ हटाने में ही सेना और बीआरओ के जवानों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। जहां पर हादसा हुआ वहां सड़क पहाड़ी एवं दुर्गम है। घटना स्थल पर एक तरफ सीधी खड़ी पहाड़ी है तो दूसरी तरफ खाई। ऐसे में जवानों को हर कदम सावधानी से बढ़ाना पड़ रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मार्ग पर बर्फ जमी, यातायात पूरी तरह रोका गया</strong><br>जोजिला क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से लगातार हिमस्खलन की घटनाएं हो रही हैं। शुक्रवार का हादसा बड़ा और घातक साबित हुआ। रास्ते पर भारी बर्फ जमी है। फिलहाल मार्ग पर यातायात पूरी तरह रोक दिया गया है। बचाव दल का प्राथमिक लक्ष्य फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालना और उसके बाद सड़क को दोबारा वाहनों के लिए सुचारू करना है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>उपराज्यपाल ने जताया दुख</strong><br>लद्दाख के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने जोजिला में हिमस्खलन से हुए हादसे पर दुख जताया है। उन्होंने कारगिल के डीसी और एसएसपी को घटनास्थल पर जाने और प्रभावितों को हर संभव मदद के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आपदा राहत बल ओर बीआरओ समेत सरकारी एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।</p>
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		<title>लेह एपेक्स बॉडी का केंद्र के साथ बैठक से इनकार, गृह मंत्रालय ने कहा- सरकार संवाद के लिए तैयार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 30 Sep 2025 06:08:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Ladakh]]></category>
		<category><![CDATA[Nation]]></category>
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					<description><![CDATA[लद्दाख में हिंसा के बाद लेह एपेक्स बॉडी ने केंद्र के साथ होने वाली बैठक से इनकार कर दिया है। संगठन ने कहा कि जब तक शांति बहाल नहीं होती, वार्ता संभव नहीं है। वहीं, गृह मंत्रालय ने दोहराया कि सरकार संवाद के लिए हमेशा तैयार है और उच्च स्तीरय बैठक के जरिए पहले भी [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">लद्दाख में हिंसा के बाद लेह एपेक्स बॉडी ने केंद्र के साथ होने वाली बैठक से इनकार कर दिया है। संगठन ने कहा कि जब तक शांति बहाल नहीं होती, वार्ता संभव नहीं है। वहीं, गृह मंत्रालय ने दोहराया कि सरकार संवाद के लिए हमेशा तैयार है और उच्च स्तीरय बैठक के जरिए पहले भी अच्छे नतीजे मिले हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">लद्दाख में हालिया हिंसा और बिगड़े हालात के बीच लेह एपेक्स बॉडी ने सोमवार को केंद्र सरकार के साथ होने वाली बैठक से इनकार कर दिया है। हिंसा के बाद भय और आक्रोश के माहौल को देखते हुए लेह एपेक्स बॉडी ने साफ किया कि जब तक शांति और सामान्य स्थिति बहाल नहीं होती, तब तक किसी भी वार्ता में हिस्सा नहीं लिया जाएगा। इस घटनाक्रम के बाद गृह मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि सरकार संवाद के लिए हर समय तैयार है और दरवाजे हमेशा खुले हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">गृह मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के साथ उच्च स्तरीय समिति के जरिए हुए संवाद ने पहले भी अच्छे नतीजे दिए हैं। इसमें लद्दाख की अनुसूचित जनजातियों को आरक्षण बढ़ाना, लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल में महिलाओं को आरक्षण देना और स्थानीय भाषाओं की सुरक्षा जैसी उपलब्धियां शामिल हैं। मंत्रालय ने कहा कि लद्दाख में 1800 सरकारी पदों पर भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>किसी भी तरह की बातचीत संभव नहीं- लेह एपेक्स बॉडी</strong><br>सोमवार को लेह एपेक्स बॉडी के अध्यक्ष ठुप्स्तान छेवांग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि लद्दाख में शांति बहाल होने से पहले किसी भी तरह की बातचीत संभव नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन से अपील की कि वे क्षेत्र में व्याप्त भय, दुख और गुस्से के माहौल को खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाएं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस की मांग</strong><br>वहीं, कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस ने कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और अन्य गिरफ्तार युवाओं की बिना शर्त रिहाई की मांग की। वांगचुक को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत हिरासत में लेकर जोधपुर जेल भेजा गया है। कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस ने चेतावनी दी कि अगर केंद्र सरकार ने राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा जैसे मुख्य मुद्दों पर कार्रवाई नहीं की, तो इससे लद्दाख की जनता और ज्यादा नाराज होगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>हिंसा और भाजपा दफ्तर पर हमला</strong><br>बीती 24 तारीख को लद्दाख की राजधानी लेह में हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क गई थी। इसमें चार लोगों की मौत हो गई और कई सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए। भीड़ ने इस दौरान भाजपा के स्थानीय दफ्तर में आग भी लगा दी थी। इस घटना के बाद से ही क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">गृह मंत्रालय ने भरोसा जताया कि लगातार संवाद और वार्ता से ही लद्दाख की स्थिति सुधरेगी। मंत्रालय ने यह भी कहा कि सरकार लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के साथ किसी भी मंच पर बातचीत जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्रालय को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में निरंतर संवाद से सभी मुद्दों का समाधान निकलेगा और क्षेत्र में शांति कायम होगी।</p>
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		<title>लेह में तनाव के बीच कर्फ्यू जारी, आज स्कूल-बाजार सब बंद&#8217;; सुरक्षाबलों का फ्लैग मार्च</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 29 Sep 2025 06:21:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Ladakh]]></category>
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					<description><![CDATA[लेह में हिंसा के बाद कर्फ्यू जारी है तो वहीं दो प्रदर्शनकारियों का अंतिम संस्कार किया गया। सोनम वांगचुक को एनएसए के तहत जोधपुर जेल भेजा गया। उनकी पत्नी ने पाकिस्तान कनेक्शन के आरोप खारिज कर सीआरपीएफ पर हिंसा का ठीकरा फोड़ा है।  लेह में जारी कर्फ्यू के बीच रविवार को भी तनावपूर्ण शांति रही। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">लेह में हिंसा के बाद कर्फ्यू जारी है तो वहीं दो प्रदर्शनकारियों का अंतिम संस्कार किया गया। सोनम वांगचुक को एनएसए के तहत जोधपुर जेल भेजा गया। उनकी पत्नी ने पाकिस्तान कनेक्शन के आरोप खारिज कर सीआरपीएफ पर हिंसा का ठीकरा फोड़ा है। <br><br>लेह में जारी कर्फ्यू के बीच रविवार को भी तनावपूर्ण शांति रही। चिकित्सा जैसी आवश्यक सेवाओं को छोड़कर शहर पूरी तरह बंद रहा। इस बीच लेह हिंसा के दौरान मारे गए चार प्रदर्शनकारियों में से दो का कड़ी सुरक्षा के बीच अंतिम संस्कार किया गया। यहां प्रशासन की ओर से मीडिया या किसी भी राजनीतिक व्यक्ति के प्रवेश को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">लेह में तनावपूर्ण हालात को देखते हुए इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई थीं। इसी बीच लद्दाख के उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने लेह में पुलिस और प्रशासन के उच्चाधिकारियों के साथ बैठक कर सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की। सोमवार को भी लेह में सभी स्कूल, कॉलेज और बाजार बंद रहेंगे। जिन दो प्रदर्शनकारियों का अंतिम संस्कार किया गया उनमें खर्नाक गांव के 25 वर्षीय युवक जिग्मट दोरजे और इगू गांव के रहने वाले 24 वर्षीय स्टेंजिन नमग्याल शामिल थे। दोनों का बौद्ध परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया। </p>



<p class="wp-block-paragraph">स्करबुचन गांव के 46 वर्षीय सिवांग थरचिन और हनु के 22 वर्षीय रिंचेन दोरजे का अंतिम संस्कार 29 सितंबर को किया जाएगा। इनमें से सिवांग थरचिन पूर्व सैनिक थे और कारगिल की लड़ाई भी लड़ चुके थे। लेह के हालात और गृह मंत्रालय के साथ बैठक को लेकर लेह एपेक्स बॉडी यानी एलएबी के सदस्यों की भी मीटिंग हुई। लेह स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद यानी एलएएचडीसी के चेयरमैन ताशी ग्यालसन ने भी अंतिम संस्कार में शामिल होने की कोशिश की, लेकिन प्रशासन की ओर से उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी गई।  </p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>संवेदनशील इलाकों में सीआरपीएफ&#8230;</strong><br>कर्फ्यूग्रस्त इलाकों में पुलिस और दंगा-रोधी उपकरणों से लैस केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवान भारी संख्या में तैनात किए गए हैं, जबकि भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) के जवान भी आज सुबह फ्लैग मार्च करते दिखाई दिए। बुधवार को हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए, जबकि दंगों में संलिप्तता के आरोप में 50 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को भी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें राजस्थान की जोधपुर जेल में रखा गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>वांगचुक की पत्नी ने पाकिस्तानी कनेक्शन के आरोपों को नकारा</strong><br>सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने उनके खिलाफ लगाए गए पाकिस्तान लिंक और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने वांगचुक पर हिंसा भड़काने के आरोप को गलत बताते हुए कहा कि वह हमेशा गांधीवादी तरीके से शांतिपूर्ण विरोध करते रहे हैं। अंगमो ने कहा कि 24 सितंबर को सीआरपीएफ की कार्रवाई की वजह से हिंसा भड़की। गीतांजलि ने कहा कि गिरफ्तारी के बाद से सोनम वांगचुक से संपर्क नहीं हो पाया है और अभी तक गिरफ्तारी आदेश की प्रति भी उन्हें नहीं मिली है। वांगचुक की पाकिस्तान यात्रा पेशेवर और जलवायु परिवर्तन के विषय पर थी, न कि किसी संदिग्ध गतिविधि के लिए।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>लद्दाख की संस्कृति भाजपा और संघ के निशाने पर : राहुल</strong><br>कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस लद्दाख के लोगों, संस्कृति और परंपराओं पर हमला कर रहे हैं। उन्होंने लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने की वकालत की। दंगों में कथित संलिप्तता के आरोप में अब तक 50 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। सोशल मीडिया पोस्ट में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, लद्दाखियों ने आवाज उठाई। भाजपा ने चार युवकों की हत्या करके और सोनम वांगचुक को जेल में डालकर जवाब दिया। हत्याएं बंद करो। हिंसा बंद करो। धमकी बंद करो। उन्होंने कहा, लद्दाख को आवाज दो। उन्हें छठी अनुसूची दो।</p>
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		<title>सोनम वांगचुक गिरफ़्तार, इनोवेटर से आंदोलनकारी तक कैसा रहा सफ़र</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/sonam-wangchuk-arrested-journey-from-innovator-to-activist/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Sep 2025 05:19:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Ladakh]]></category>
		<category><![CDATA[Politics]]></category>
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					<description><![CDATA[लेह में बुधवार को हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को उनके गांव उलेटोक्पो से गिरफ़्तार कर लिया गया है. लेह एपेक्स बॉडी के वकील हाजी मुस्तफ़ा ने इस ख़बर की पुष्टि की है. इंजीनियर, इनोवेटर, शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम बीते साल से अलग-अलग मौक़ों पर लद्दाख को संविधान [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>लेह में बुधवार को हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को उनके गांव उलेटोक्पो से गिरफ़्तार कर लिया गया है. लेह एपेक्स बॉडी के वकील हाजी मुस्तफ़ा ने  इस ख़बर की पुष्टि की है.</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">इंजीनियर, इनोवेटर, शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम बीते साल से अलग-अलग मौक़ों पर लद्दाख को संविधान की छठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए आमरण अनशन और दिल्ली तक मार्च कर चुके हैं. बीते साल मार्च में उन्होंने लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और इसे छठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए 21 दिनों तक भूख हड़ताल की थी.</p>



<p class="wp-block-paragraph">वहीं अक्तूबर 2024 में ही इसी मांग को लेकर उन्होंने लद्दाख से दिल्ली तक पैदल मार्च निकाला था. हालांकि दिल्ली पुलिस ने सिंघु बॉर्डर से उन्हें हिरासत में ले लिया था. अब हाल ही में 35 दिन की उनकी भूख हड़ताल के 15वें दिन 24 सितंबर को लेह में आंदोलन हिंसक हो गया जिसमें 4 लोगों की मौत हुई और तक़रीबन 50 लोग घायल हुए. साल 2019 में केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को ख़त्म करके जम्मू-कश्मीर राज्य को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों.. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था. लद्दाख की अधिकतर जनता ने इस फ़ैसले का स्वागत किया था क्योंकि जम्मू-कश्मीर से अलग होने की उनकी काफ़ी पुरानी मांग थी</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>पीएम मोदी की करते रहे हैं तारीफ़</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">इस फ़ैसले का स्वागत सोनम वांगचुक ने भी किया था. उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके कार्यालय को इस फ़ैसले के लिए धन्यवाद किया था. <a href="https://x.com/wangchuk66/status/1158400319526596608">उन्होंने लिखा था</a>, &#8220;शुक्रिया प्रधानमंत्री. लद्दाख के लिए लंबे समय से देखे जा रहे ख़्वाब को पूरा करने के लिए लद्दाख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री कार्यालय का शुक्रिया करता है.&#8221;</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;पूरे 30 साल पहले अगस्त 1989 में केंद्र शासित प्रदेश के दर्जे को लेकर लद्दाखी नेताओं ने आंदोलन की शुरुआत की थी. इस लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण में मदद करने वाले सभी लोगों का शुक्रिया.&#8221;</p>



<p class="wp-block-paragraph">वहीं बीते साल छठवीं अनुसूची की मांग को लेकर भूख हड़ताल के दौरान सोनम वांगचुक ने कहा था कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बहुत बड़े प्रशंसक हैं. वह कई मौक़ों पर देशभक्ति की भावना और भारतीय सेना को लेकर अपने प्यार को दिखाते रहे हैं. लेकिन लेह में हिंसक प्रदर्शनों के बाद सोशल मीडिया पर उनकी आलोचनाएं हो रही हैं. कोई उनकी देशभक्ति पर सवाल उठा रहा है तो किसी ने उन्हें &#8216;चीनी एजेंट&#8217; तक कह दिया.</p>



<p class="wp-block-paragraph">उनके इस साल फ़रवरी में पाकिस्तान जाने की ख़बर और बांग्लादेश के अंतरिम प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस के साथ गले मिलने की पुरानी तस्वीर शेयर की जा रही है. लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर हुए आंदोलन से सोनम वांगचुक चर्चा में हैं लेकिन इससे पहले वह पहली बार &#8216;थ्री इडियट्स&#8217; फ़िल्म के बाद चर्चा में आए थे. यह दावा किया गया कि इस फ़िल्म का किरदार &#8216;रेंचो&#8217; उनसे प्रेरित था. हालांकि उन्होंने इस बात को न्यूज़ वेबसाइट &#8216;लल्लनटॉप&#8217; को दिए <a href="https://www.youtube.com/watch?v=ssIMQa5e8iA" target="_blank" rel="noopener">इंटरव्यू में </a>ख़ारिज किया था. इस इंटरव्यू में उन्होंने अपनी ज़िंदगी के कई पहलुओं पर रोशनी डाली थी.</p>



<h2 class="wp-block-heading" id="नौ-साल-की-उम्र-तक-स्कूल-नहीं-गए">नौ साल की उम्र तक स्कूल नहीं गए</h2>


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<figure class="aligncenter"><img data-recalc-dims="1" decoding="async" src="https://i0.wp.com/ichef.bbci.co.uk/ace/ws/640/cpsprodpb/3fff/live/9f67b700-9ac3-11f0-92db-77261a15b9d2.jpg.webp?w=1200&#038;ssl=1" alt="सोनम वांगचुक" title="सोनम वांगचुक गिरफ़्तार, इनोवेटर से आंदोलनकारी तक कैसा रहा सफ़र 3"><figcaption class="wp-element-caption">इमेज कैप्शन,सोनम वांगचुक कहते हैं कि 12 साल की उम्र में उनका स्कूल में दाख़िला कराया गया था</figcaption></figure>
</div>


<p class="wp-block-paragraph">सोनम वांगचुक को एक शिक्षाविद, इनोवेटर और पर्यावरण कार्यकर्ता के तौर पर जाना जाता है. &#8216;लल्लनटॉप&#8217; को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि कैसे उन्होंने लद्दाख के दूर-दराज़ के गांव से निकलकर एक प्रसिद्ध शिक्षाविद का सफ़र तय किया.</p>



<p class="wp-block-paragraph">59 वर्षीय सोनम का जन्म साल 1966 में लेह के दुर्गम गांव उलेटोक्पो में हुआ था. वो बताते हैं कि उन्होंने नौ साल की उम्र तक स्कूल की शक्ल नहीं देखी थी और इसी की वजह से वो कुछ अलग तरीक़े से सोच पाए. उनका कहना है कि स्कूल न जाने की वजह से उनकी मां ने उन्हें घर पर ही स्थानीय भाषा में पढ़ाया और उन्होंने शुरुआती ज्ञान ख़ुद के अनुभवों से हासिल किया. सोनम वांगचुक के पिता सोनम वांग्याल राजनेता थे और नौ साल की उम्र के बाद सोनम वांगचुक को श्रीनगर के स्थानीय स्कूल में भेज दिया गया.</p>



<p class="wp-block-paragraph">इंटरव्यू में सोनम वांगचुक ने बताया था कि स्कूल में उन्हें अंग्रेज़ी की किताबें पकड़ा दी गईं और उन्हें कुछ समझ नहीं आता था. उन्होंने बताया कि स्कूल के शिक्षक उन्हें पीछे की सीट पर बैठा देते थे या क्लास के बाहर खड़ा कर दिया करते थे. वो कहते हैं कि इस &#8216;उत्पीड़न&#8217; से तंग आकर 12 साल की उम्र में वो लद्दाख के छात्रों के लिए विशेष केंद्रीय विद्यालय में दाख़िला लेने के लिए अकेले बस से दिल्ली भाग आए. वो कहते हैं कि वहां पर बच्चों की बहुत भीड़ थी और उन्हें कई दिनों से कैंप में दाख़िले का इंतज़ार करना पड़ रहा था. </p>



<p class="wp-block-paragraph">सोनम वांगचुक ये सब देखकर सीधे स्कूल में प्रिंसिपल के रूम में चले गए और उनसे दाख़िला देने को कहा. प्रिंसिपल उनके इस जुझारूपन से ख़ुश हुए और उन्हें दाख़िला दे दिया.</p>



<h2 class="wp-block-heading" id="बीटेक-में-दाख़िला-और-कोचिंग-की-शुरुआत">बीटेक में दाख़िला और कोचिंग की शुरुआत</h2>


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<figure class="aligncenter"><img data-recalc-dims="1" decoding="async" src="https://i0.wp.com/ichef.bbci.co.uk/ace/ws/640/cpsprodpb/1673/live/b002f750-9ac3-11f0-92db-77261a15b9d2.jpg.webp?w=1200&#038;ssl=1" alt="सोनम वांगचुक" title="सोनम वांगचुक गिरफ़्तार, इनोवेटर से आंदोलनकारी तक कैसा रहा सफ़र 4"><figcaption class="wp-element-caption">इमेज कैप्शन,सोनम के पिता जम्मू-कश्मीर सरकार में मंत्री रह चुके हैं</figcaption></figure>
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<p class="wp-block-paragraph">इसके बाद सोनम वांगचुक ने इंजीनियरिंग की तैयारी की और श्रीनगर के रीज़नल इंजीनियरिंग कॉलेज (वर्तमान में एनआईटी) में लिखित परीक्षा पास करके इंटरव्यू देने गए.</p>



<p class="wp-block-paragraph">सोनम वांगचुक कहते हैं कि इंटरव्यू के दौरान प्रिंसिपल ने जब उनके पिता का नाम देखा तो उनसे पूछा कि उनके पिता क्या करते हैं तो उन्होंने कहा कि वो पेशे से किसान हैं. हालांकि उस समय सोनम के पिता जम्मू-कश्मीर में मंत्री थे. सोनम का कहना था कि उन्होंने जब बीटेक का एक साल पूरा कर लिया तो वो मैकेनिकल इंजीनियरिंग करना चाहते थे क्योंकि उनकी ऑप्टिक्स में दिलचस्पी थी. वहीं उनके पिता उन्हें सिविल इंजीनियरिंग पढ़ने के लिए कह रहे थे. उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई को चुना तो उनके पिता ने उन्हें पढ़ाई का ख़र्चा देने से मना कर दिया जिसके बाद अपने ख़र्चे पूरे करने के लिए उन्होंने स्कूली बच्चों के लिए कोचिंग की शुरुआत की.</p>



<p class="wp-block-paragraph">19 साल की उम्र में उन्होंने एक होटल के कमरे को किराए पर लेकर जब बच्चों को पढ़ाना शुरू किया तो दो महीने में ही तीन साल की इंजीनियरिंग की पढ़ाई की फ़ीस जुटा ली.</p>



<h2 class="wp-block-heading" id="सेकमोल-की-शुरुआत-और-रेमन-मैग्सेसे-पुरस्कार">सेकमोल की शुरुआत और रेमन मैग्सेसे पुरस्कार</h2>


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<figure class="aligncenter"><img data-recalc-dims="1" decoding="async" src="https://i0.wp.com/ichef.bbci.co.uk/ace/ws/640/cpsprodpb/0b40/live/d4ea23e0-9ac3-11f0-b741-177e3e2c2fc7.jpg.webp?w=1200&#038;ssl=1" alt="सोनम वांगचुक" title="सोनम वांगचुक गिरफ़्तार, इनोवेटर से आंदोलनकारी तक कैसा रहा सफ़र 5"><figcaption class="wp-element-caption">इमेज कैप्शन,सोनम वांगचुक ने सेकमोल की शुरुआत की जिसने शिक्षा के क्षेत्र में हटकर काम किया है</figcaption></figure>
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<p class="wp-block-paragraph">सोनम वांगचुक कहते हैं कि यही वह मौक़ा था जिसने उन्हें शिक्षा के लिए काम करने को प्रेरित किया. इसके बाद उन्होंने कॉलेज से निकलते ही साल 1988 में स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ़ लद्दाख़ (एसईसीएमओएल या सेकमोल) की शुरुआत की.</p>



<p class="wp-block-paragraph">सेकमोल ने शुरुआत में कई सालों तक सरकारी स्कूल सिस्टम में बदलाव को लेकर काम किया. उसी के साथ ही सेकमोल के कैंपस में ऐसे अधिकतर बच्चों को पढ़ाया जा रहा था जो स्कूली शिक्षा में फ़ेल हो गए थे. सेकमोल में पारंपरिक स्कूली शिक्षा से हटकर पढ़ाई कराई जाती है जहां पर प्रकृति में रहकर और प्रैक्टिकल पढ़ाई होती है. 1994 में वांगचुक ने &#8216;ऑपरेशन न्यू हॉप&#8217; (ओएनएच) की शुरुआत की. यह अब तक 700 शिक्षकों और 1000 ग्राम शिक्षा समितियों को ट्रेनिंग दे चुका.</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस दौरान लद्दाख़ में भी स्कूली शिक्षा में बदलाव देखा गया. जहां साल 1996 तक दसवीं कक्षा में सिर्फ़ पांच फ़ीसदी बच्चे पास होते थे वो दर बढ़कर साल 2015 में 75 फ़ीसदी हो गई. स्कूली शिक्षा व्यवस्था में सुधार और वैकल्पिक शिक्षा व्यवस्था के मिशन को वांगचुक ने विश्वविद्यालय स्तर पर ले जाना चाहा. इसी कोशिश के तहत तक़रीबन सात साल पहले उन्होंने हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ़ अल्टर्नेटिव्स लद्दाख (एचआईएएल या हयाल) की शुरुआत की.</p>



<p class="wp-block-paragraph">उनका कहना है कि सेकमोल में किए गए शोध को हयाल में दूसरे स्तर पर ले जाया जाता है. वो बताते हैं कि सौर ऊर्जा से कमरों को गर्म करने का एक आविष्कार सेकमोल में शुरू किया गया था जिसे हयाल आगे लेकर गया. वांगचुक कहते हैं कि भारतीय सेना के साथ पार्टनरशिप में चीन से लगी सीमा पर सेना के कैंपों के लिए इस आविष्कार पर काम किया गया और इसे अफ़ग़ानिस्तान में भी ले जाया गया है. </p>



<p class="wp-block-paragraph">साल 2018 में सोनम को शिक्षा के क्षेत्र में में योगदान के लिए रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया.</p>



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		<title>लद्दाख में चल रहे आंदोलन की चिंगारी कैसे हिंसा की आग में बदली, सोनम वांगचुक क्यों हैं निशाने पर?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Sep 2025 06:11:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[लद्दाख में हुई हिंसा के लिए सरकार ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जिम्मेदार ठहराया है। सरकार के रुख पर सोनम वांगचुक ने कहा है कि उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में आखिर अभी क्या चल रहा है आइये जानते हैं… केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लिए पूर्ण [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">लद्दाख में हुई हिंसा के लिए सरकार ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जिम्मेदार ठहराया है। सरकार के रुख पर सोनम वांगचुक ने कहा है कि उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में आखिर अभी क्या चल रहा है आइये जानते हैं…</p>



<p class="wp-block-paragraph">केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लिए पूर्ण राज्य के दर्जे&nbsp; और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन बुधवार को हिंसक हो गया। इस हिंसा में चार लोगों की जान चली गई। उपद्रवियों ने लेह स्थित भाजपा कार्यालय को आग लगा दी। हालात पर काबू पाने के लिए अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगाना पड़ा। सरकार ने इस हिंसा के लिए जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जिम्मेदार ठहराया। अगले दिन उनके एनजीओ का एफसीआरए लाइसेंस भी रद्द कर दिया गया। लद्दाख के उप-राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने इस सुनियोजित साजिश बताया। इन सबके बीच वांगचुक ने कहा कि इस पूरे&nbsp; मामले में उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है।&nbsp;&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong><em>आखिर लेह में अचानक ये हिंसा क्यों भड़की? लद्दाख को&nbsp;छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग क्यों हो रही है? सोनम वांगचुक का इस पूरे आंदोलन से क्या संबंध है? क्या इससे पहले भी&nbsp; इस तरह के प्रदर्शन हुए हैं? सरकार का इस आंदोलन को लेकर क्या रुख रहा है? हिंंसा के बाद सरकार की ओर से क्या&nbsp;कार्रवाई की गई है?</em></strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong><em>लेह में अचानक ये हिंसा क्यों भड़की?</em></strong><br>अगस्त&nbsp;2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त करके जम्मू कश्मीर राज्य का पुनर्गठन किया गया।&nbsp;जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के तहत पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को&nbsp; दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख&nbsp;में बांटा गया। इसमें जम्मू-कश्मीर को विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। वहीं, लद्दाख को बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया। इस बदलाव के तहत&nbsp;जम्मू कश्मीर में पिछले साल नई विधानसभा का भी गठन हो गया। वहीं, दूसरी ओर राज्य पुनर्गठन के साथ ही लद्दाख में इस केंद्र शासित प्रदेश को&nbsp;छठी अनुसूची में शामिल करने और इसे पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग उठने लगी। इसे लेकर अलग-अलग समय पर प्रदर्शन हुए। इन्हीं मांगो लेकर चल रहा ताजा प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क उठी।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-2"></h3>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>प्रदर्शन लगातार हो रहा था&nbsp;तो अचानक हिंसक कैसे&nbsp;हो गया?</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर सोनम वांगचुक ने 35 दिनों के धरने का एलान किया था। 10 सितंबर से सोनम वांगचुक और लद्दाख एपेक्स बॉडी के 15 कार्यकर्ता भूख हड़ताल पर थे। मंगलवार को एलएबी के दो कार्यकर्ताओं की हालत बिगड़ी तो उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। कार्यकर्ताओं की तबीयत बिगड़ने के बाद बुधवार को लेह बंद का एलान किया था। बंद में बड़ी संख्या में युवा सड़कों पर उतर आए और मार्च निकाला। युवाओं ने भाजपा व हिल काउंसिल के मुख्यालय में घुसने की कोशिश की, जिसके बाद&nbsp; पुलिस व सुरक्षाबलों ने बल का प्रयोग किया। देखते ही देखते प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच पथराव शुरू हो गया। प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय भाजपा कार्यालय में आग लगा दी।&nbsp;&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>इस पूरे आंदोलन का केंद्र बिंदु बने&nbsp;सोनम वांगचुक &nbsp;हैं कौन?&nbsp;&nbsp;&nbsp;</strong><br>सोनम&nbsp;वांगचुक एक इंजीनियर और पर्यावरणविद हैं। 2009 में आई&nbsp; हिंदी फिल्म 3 इडियट्स में आमिर खान द्वारा निभाए गए किरदार की प्रेरणा उन्ही से ली गई थी। वह लद्दाख के छात्रों के लिए स्कूली शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने के लिए भी काम करते रहे हैं। 2018 में, वांगचुक को लद्दाख के लिए शिक्षा में उनके योगदान के लिए रेमन मैग्सेसे पुरस्कार मिला था। वे सतत विकास को भी बढ़ावा देने के लिए जागरुकता फैलाते हैं। 2019 में जब लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया और वहां विधानसभा का प्रावधान नहीं रखा गया, तब से सोनम लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने और उसे पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। इसे लेकर उन्होंने अलग-अलग समय पर धऱना प्रदर्शन और मार्च निकाला है।&nbsp;&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-4"></h3>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>क्या है संविधान की छठी अनुसूची जिसमें लद्दाख को शामिल करने की मांग की जा रही है?</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">सोनम वांगचुक का प्रदर्शन मुख्य रूप से चार मांगों को लेकर हो रहा है। इसमें लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा, लेह और कारगिल दो अलग लोकसभा सीटें और सरकारी नौकरियों में स्थानीय लोगों को आरक्षण की मांग शामिल है। इसमें सबसे&nbsp;ज्यादा जिस मांग का बात हो रही है वह संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की है।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">दरअसल, पूर्वोत्तर&nbsp; आदिवासियों के अलग जीवन और दृष्टिकोण को बचाने के लिए संविधान सभा ने इस क्षेत्र के आदिवासियों के लिए एक अलग प्रशासनिक ढांचा दिया। संविधान के अनुच्छेद 244(2) के तहत, छठी अनुसूची असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा राज्यों में जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन के लिए विशेष व्यवस्था करती है। इसका सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि जनजातीय क्षेत्रों को स्वायत्त जिलों और स्वायत्त क्षेत्रों के रूप में प्रशासित किया जाना है। छठी अनुसूची के प्रावधान के तहत, राज्य के राज्यपाल को स्वायत्त जिलों और स्वायत्त क्षेत्रों की प्रशासनिक इकाइयों के रूप में क्षेत्रों को निर्धारित करने का अधिकार है।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">छठी अनुसूची के पैरा 2(1) में बताया गया है कि हर स्वायत्त जिले में एक जिला परिषद होगी जिसमें तीस सदस्य होंगे, इसमें से चार राज्यपाल द्वारा नामित किए जाएंगे जबकि बाकि मताधिकार के आधार पर चुने जाएंगे। छठी अनुसूची ने उन्हें कुछ कार्यकारी, विधायी और न्यायिक शक्तियां प्रदान की ताकि उन्हें अपनी भूमि के कानून बनाने, अपने वनों (आरक्षित वनों को छोड़कर) का प्रबंधन करने, पारंपरिक मुखियाओं और प्रधानों की नियुक्ति, संपत्ति का उत्तराधिकार, विवाह, सामाजिक रीति-रिवाज&nbsp;का अधिकार प्राप्त हो।</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-5"></h3>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>लद्दाख में क्यों हो रही छठी अनुसूची की मांग?</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">लद्दाख में पूर्ण राज्य की दर्जे की मांग 2019 के पहले से रही है, लेकिन तब ये उतनी तेज नहीं थी क्योंकि लद्दाख जम्मू कश्मीर का हिस्सा था और धारा 370 वाले प्रावधान यहां भी लागू होते थे। जिसमें न तो कोई बाहरी यहां जमीन खरीद सकता था और न ही उसे सरकारी नौकरी मिलती थी। लेकिन फिर 2019 में धारा 370 को हटाया गया। पहले लद्दाख इस फैसले से खुश था क्योंकि अब श्रीनगर का राज उस पर हट रहा था, लेकिन फिर लद्दाख में बाहर से आकर लोगों ने निर्माण करना शुरू किया, स्थानीय लोगों को डर था कि इससे वहां के ग्लेशियर पर प्रभाव पड़ेगा। इसे संरक्षित और सुरक्षित करने के लिए&nbsp; छठी अनुसूची की मांग की गई। ताकि वहां की जलवायु को बचाया जा सके।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">2024 में अपनी पहली 21 दिनों की भूख हड़ताल के दौरान रॉयटर्स को दिए बयान में सोनम वांगचुक ने कहा था कि, “लद्दाख में कोई लोकतंत्र नहीं है।&#8221; उन्होंने कहा कि यदि क्षेत्र में निर्वाचित प्रतिनिधि होते, तो भूमि और जंगलों को औद्योगिक और खनन हितों से बचाने के लिए कानून बनाए जा सकते थे। सरकार ने बिना स्थानीय परामर्श के लद्दाख के खानाबदोश चरागाहों पर 13 गीगावाट की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना &#8220;थोप&#8221; दी। उन्होंने इस समय कहा था कि “लद्दाख धरती के थर्मामीटर की तरह है। इसलिए अगर यह नष्ट हो गया&#8230; तो यह एक वैश्विक तबाही होगी”&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>इससे पहले सोनम वांगचुक ने कब-कब आंदोलन&nbsp;किया?&nbsp;&nbsp;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">2023 फरवरी की शुरुआत में सोनम वांगचुक ने&nbsp;केंद्र शासित प्रदेश को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर पांच दिन&nbsp;की भूख हड़ताल की थी। शून्य से नीचे के तापमान में, लद्दाख से हज़ारों लोग उनके साथ इस भूख हड़ताल में शामिल हुए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">18 जून 2023 को शुरू हुए सोनम वांगचुक ने अनशन ने लेह के एनडीएस स्टेडियम में सैकड़ों की भीड़ को आकर्षित किया। शुरुआत में यह अनशन सात दिनों का था, लेकिन उन्होंने इसे दो दिन और बढ़ा दिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वांगचुक का सरकार के खिलाफ पहला लंबा अनशन 6 मार्च 2024 से शुरू हुआ था। जलवायु से जुड़ी चुनौतियों के मुद्दे के साथ वे 21 दिनों की भूख हड़ताल पर थे। सोनम ने कहा, &#8220;21 दिनों के जलवायु उपवास के दौरान, 350 लोग -10 डिग्री सेल्सियस तापमान में सोए।&#8221;&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">सोनम की ओर से लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर अलग&nbsp;आंदोलन 1 सितंबर 2024 से शुरू हुआ। सोनम वांगचुक ने 1 सितंबर को लेह से दिल्ली तक पैदल मार्च शुरू किया, जिसका उद्देश्य केंद्र सरकार पर लद्दाख के लिए किए गए वादों को याद दिलाना और दबाव बनाना था। इसे “दिल्ली चलो” नाम दिया गया, जिसमें लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) भी शामिल हुए।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसके बाद 10 सितंबर 2025 से 35 दिनों के अनशन की शुरुआत हुई, जो हिंसक प्रदर्शन के कारण केवल 15 दिन में ही खत्म करना पड़ा।</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-7"></h3>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>हिंसा को लेकर सरकार का क्या रुख है?</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">सोनम वांगचुक के ताजा अनशन को देखते हुए केंद्र और लेह प्रतिनिधित्व के बीच 6 अक्टूबर को बात होने वाली थी। इससे कुछ दिन पहले यह हिंसा हो गई। गृह मंत्रालय की तरफ से एक बयान जारी कर बताया गया कि जब सोनम ने अनशन शुरू किया उसी समय, भारत सरकार उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी), उसकी उप-समिति और स्थानीय नेताओं के साथ कई अनौपचारिक बैठकों के माध्यम से शीर्ष निकाय लेह और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के साथ पहले से ही बातचीत कर रही थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बातचीत की प्रक्रिया ने लद्दाख की अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण को 45% से बढ़ाकर 84% करने, परिषदों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण प्रदान करने और भोटी व पुर्गी को आधिकारिक भाषा घोषित करने जैसे अभूतपूर्व परिणाम दिए हैं। इसके साथ ही, 1800 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू की गई। हालांकि, कुछ राजनीतिक रूप से प्रेरित लोग उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) के तहत हुई प्रगति से खुश नहीं थे और संवाद प्रक्रिया को विफल करने की कोशिश कर रहे थे। उच्चाधिकार प्राप्त समिति की अगली बैठक 6 अक्तूबर को निर्धारित की गई है, जबकि लद्दाख के नेताओं के साथ 25 और 26 सितंबर को भी बैठकें आयोजित करने की योजना थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">गृह मंत्रालय ने आगे कहा कि जिन मांगों को लेकर वांगचुक भूख हड़ताल पर थे, वह एचपीसी में चर्चा का अभिन्न अंग हैं। कई नेताओं द्वारा भूख हड़ताल समाप्त करने का आग्रह करने के बावजूद, उन्होंने भूख हड़ताल जारी रखी और अरब स्प्रिंग शैली के विरोध प्रदर्शनों और नेपाल में जेन-जी के विरोध प्रदर्शनों का भड़काऊ उल्लेख करके लोगों को गुमराह किया। इसी के चलते हिंसा भड़की।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-8"></h3>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>हिंसा के बाद सरकार की ओर से क्या कार्रवाई की गई है?</strong><br>हिंसा के बाद लेह में हालात तनावपूर्ण हैं। गुरुवार को सभी स्कूल-कॉलेज बंद रहे। 26 सितंबर को भी स्कूल-कॉलेज सब बंद रहेंगे। कारगिल भी बंद रहा। इस बीच गृह मंत्रालय की एक टीम ने लेह पहुंचकर स्थिति की समीक्षा की। टीम ने लेह एपेक्स बॉडी, कारगिल डेमोक्रेटिक 87 घायलों अलायंस के प्रतिनिधियों में से 15 की के साथ ही स्थानीय हालत गंभीर सांसद को दिल्ली बुलाया है, जहां 27-28 सितंबर को उनकी बैठक होगी और स्थानीय हित्तों से जुड़ी मांगों पर चर्चा की जाएगी। इस बीच लेह में किसी अप्रिय स्थिति की आशंका के मद्देनजर 50 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। वहीं, एलजी कविंद्र गुप्ता ने उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक कर लेह में हालात की समीक्षा की। उन्होंने विरोध-प्रदर्शन के बाद लद्दाख में पैदा हुई स्थिति का आकलन किया। एलजी ने अधिकारियों को लद्दाख में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिए। यह भी कहा कि हालात को देखते हुए सतर्कता बरतते हुए एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर काम किया जाए। एलजी ने इससे पहले कहा कि मौतों के लिए प्रदर्शनकारी खुद जिम्मेदार हैं।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-9"></h3>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>क्या सोनम वांगचुक पर भी कोई कार्रवाई हुई है?</strong><br>केंद्रीय गृह मंत्रालय ने लद्दाख के जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के दो गैर सरकारी संगठनों स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (एसईसीएमओएल) और हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स लद्दाख (एचआईएएल) के एफसीआरए लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए हैं। मंत्रालय ने इन संगठनों के खातों में वित्तीय विसंगतियों के आरोप पर यह कार्रवाई की है। इसमें स्वीडन से धन का हस्तांतरण भी शामिल था, जिसे मंत्रालय ने राष्ट्रीय हित के विरुद्ध पाया। हालांकि, एचआईएएल का लाइसेंस रद होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मंत्रालय ने एसईसीएणओएल के इस तर्क को खारिज कर दिया, जिसमें कहा था बैंक निधियों का उपयोग केवल शैक्षिक मंत्रालय ने एसईसीएमओएल के इस उद्देश्यों के लिए किया गया। मंत्रालय ने कहा, राष्ट्र की संप्रभुता पर अध्ययन के लिए विदेशी योगदान स्वीकार नहीं किया जा सकता। यह राष्ट्रीय हितों के विरुद्ध है।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">सोनम बागचुक के संगठन हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव लर्निंग पर सीबीआई का शिकंजा भी कस सकता है। सीबीआई पिछले दो महीनों से एचआईएएल की जांच कर रही है। सीबीआई की टीमें लद्दाख में डेरा डाले हुए हैं। हालांकि, अभी तक कोई प्रारंभिक जांच पा नियमित मामला दर्ज नहीं किया गया है। सीबीआई सूत्रों के अनुसार यह जांच विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) के उल्लंघनों के खिलाफ की जा रही है। इससे पहले अगस्त में लद्दाख प्रशासन ने हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव लर्निंग को दी गई भूमि के आवंटन को रद्द कर दिया था। &nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading" id="title-10"></h3>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सोनम वांगचुक का इस पूरे घटनाक्रम पर क्या कहना है?</strong><br>सोनम वांगचुक ने हिंसा के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराए जाने को बलि का बकरा बनाने की रणनीति बताया। उन्होंने कहा, ऐसे आरोप कि हिंसा मेरी ओर से या कांग्रेस की ओर से भड़काई गई, समस्या के मूल को संबोधित करने के बजाय बलि का बकरा ढूंढने जैसा है। इसका मकसद हिमालयी क्षेत्र की मूल समस्याओं से बचना है। इससे किसी को लाभ नहीं होगा। माना कि वे (गृह मंत्रालय) बलि का बकरा बनाने में चतुर हो सकते हैं, लेकिन वे बुद्धिमान नहीं हैं। युवा पहले से ही निराश हैं। मैं गिरफ्तारी के लिए तैयार हूं, लेकिन इससे उन्हें अधिक समस्याएं हो सकती हैं। उनकी मुश्किलें कम नहीं होगी, बल्कि और बढ़ेगी।</p>
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		<title>छठी अनुसूची को लेकर लेह में हिंसक प्रदर्शन, चार की मौत और 80 से अधिक घायल; कर्फ्यू&#8230;इंटरनेट पर पाबंदी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 Sep 2025 06:25:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Ladakh]]></category>
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					<description><![CDATA[लद्दाख में छठी अनुसूची को लेकर आंदोलन हिंसक हो गया। आगजनी और गोलीबारी में चार प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई। 80 घायल हो गए हैं। कर्फ्यू लगा दिया गया है। तोड़फोड़ और पथराव के बीच प्रदर्शनकारियों ने भाजपा प्रदेश कार्यालय भी फूंक दिया। इसके अलावा कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया। कांग्रेस काउंसलर [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">लद्दाख में छठी अनुसूची को लेकर आंदोलन हिंसक हो गया। आगजनी और गोलीबारी में चार प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई। 80 घायल हो गए हैं। कर्फ्यू लगा दिया गया है। तोड़फोड़ और पथराव के बीच प्रदर्शनकारियों ने भाजपा प्रदेश कार्यालय भी फूंक दिया। इसके अलावा कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया। कांग्रेस काउंसलर पर एफआईआर दर्ज की गई है।<br><br>लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य के दर्जे की मांग को लेकर 15 दिन से चल रहे अनशन के दौरान बुधवार को अचानक युवाओं का हुजूम उमड़ा और शांतिपूर्ण चल रहे आंदोलन ने उग्र रूप धारण कर लिया। तोड़फोड़, आगजनी और पथराव के बीच गुस्साए युवाओं ने भाजपा का प्रदेश कार्यालय फूंक दिया। वहां मौजूद कार्यकर्ताओं ने भागकर किसी तरह अपनी जान बचाई। इस बीच पुलिस फायरिंग में चार प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई। 40 पुलिस कर्मियों व सीआरपीएफ के जवानों समेत करीब 80 लोग घायल हुए हैं।<br><br>कांग्रेस नेता और काउंसलर फुटसोग स्टेजिन त्सेपाग पर भड़काऊ भाषण देने के लिए केस दर्ज किया गया है। हालात तनावपूर्ण हैं और प्रशासन ने लेह में कर्फ्यू लगा दिया है। इंटरनेट सेवा बाधित है। इस बीच, हिंसक घटना से आहत जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म कर दिया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सोनम वांगचुक की अगुवाई में 15 लोग 10 सितंबर से 35 दिन के धरने पर बैठे थे। वे लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा व सांस्कृतिक व सांविधानिक सुरक्षा के लिए छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग कर रहे थे। मंगलवार को लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) के दो कार्यकर्ताओं की हालत बिगड़ने के बाद उन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। </p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>क्या है छठी अनुसूची </strong><br>संविधान को छठी अनुसूची में फिलहाल त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम और असम शामिल है। यह अनुसूची शासन, राष्ट्रपति और राज्यपाल की शक्तियों, स्थानीय निकायों के प्रकार, वैकल्पिक न्यायिक तंत्र और स्वायत्त परिषदों के माध्यम से प्रयोग की जाने वाली वित्तीय शक्तियों के संबंध में विशेष प्रावधान करती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>अचानक वहां पहुंच गया युवाओं का हुजूम</strong><br>इसके बाद एलएबी की यूथ विंग ने बुधवार को लेह बंद का एलान किया था। बुधवार सुबह रोजाना की तरह शहीदी पार्क में धरना शांतिपूर्ण शुरू हुआ लेकिन दोपहर होते-होते अचानक वहां युवाओं का हुजूम पहुंच गया। युवाओं ने &#8216;वी वांट सिक्स्थ शेड्यूल&#8217; के नारे लगाते हुए तोड़फोड़ शुरू कर दी। </p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>भाजपा प्रदेश कार्यालय में पथराव के साथ लगाई आग</strong><br>ये हुजूम पार्क से चला तो सीआरपीएफ ने उन्हें आगे बढ़ने से रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। प्रदर्शनकारियों ने जवाब में पथराव कर दिया। उन्हें तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। युवा वहां से भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचे। वहां पथराव के साथ उन्होंने आग लगा दी। </p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सीआरपीएफ के वाहन समेत कुछ अन्य वाहनों को भी फूंके</strong><br>भाजपा कार्यकर्ता किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भागे। इसके बाद युवाओं ने वहां रखे कागजात और फर्नीचर को आग के हवाले कर दिया। उग्र युवाओं ने रास्ते में खड़े सीआरपीएफ के वाहन समेत कुछ अन्य वाहनों को भी फूंक दिया। लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद यानी एलएएचडीसी के लेह ऑफिस को भी युवाओं ने निशाना बनाया।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>यह युवाओं की क्रांति&#8230; पर हिंसा रोकें : वांगचुक</strong><br>सोनम वांगचुक ने कहा- यह जेन-जी नहीं, युवाओं की क्रांति है। युवा पांच साल से बेरोजगार हैं। लद्दाख के लिए दुख का दिन है। हम शांति के रास्ते पर चल रहे थे। आज हम शांति के पैगाम को नाकाम होते हुए देख रहे हैं। हिंसा, गोलीबारी व आगजनी हो रही है। युवाओं से अपील करता हूं कि बेवकूफी बंद करें। इससे हमारे मकसद को नुकसान पहुंचता है। हम अनशन तोड़ रहे हैं, प्रदर्शन रोक रहे हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सोनम के बयानों से भड़की हिंसा: सरकार</strong><br>केंद्र सरकार ने कहा कि हिंसा सोनम वांगचुक के बयानों के कारण भड़की। गृह मंत्रालय ने कहा, सरकार व लद्दाख के समूहों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत में प्रगति हुई है, पर राजनीति से प्रेरित कुछ व्यक्ति इससे खुश नहीं हैं। मंत्रालय ने कहा, वांगचुक ने भूख हड़ताल के दौरान अरब स्प्रिंग-शैली के विरोध प्रदर्शनों और नेपाल में जेन-जी के प्रदर्शनों का भड़काऊ उल्लेख कर लोगों को गुमराह किया।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>आज लेह और कारगिल बंद</strong><br>वीरवार को लेह के साथ ही कारगिल भी बंद रहेगा। लद्दाख के हितों के लिए लड़ रहे लोगों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए कारगिल बंद का एलान किया गया है। लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद कारगिल के चेयरमैन डॉ. जफर अखून ने इसकी पुष्टि की।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>छह को प्रस्तावित है हाई पावर कमेटी की बैठक</strong><br>लद्दाख मामलों पर गठित हाईपावर कमेटी की बैठक छह अक्तूबर को प्रस्तावित है। इसमें गृह मंत्रालय और लद्दाख के प्रतिनिधियों जिनमें एलएबी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के सदस्य शामिल हैं, को अपनी बात रखने के लिए नई दिल्ली जाना था। सोनम वांगचुक इस बैठक को छह से पहले किए जाने के पक्ष में थे। कई दौर की बातचीत के बावजूद छठी अनुसूची पर एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सका है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ये हैं प्रमुख मांगें</strong><br>लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा<br>छठी अनुसूची के तहत सांविधानिक सुरक्षा<br>लेह और कारगिल दो अलग लोकसभा सीटें<br>सरकारी नौकरियों में स्थानीय लोगों को आरक्षण</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>जम्मू-कश्मीर की आंखें खोलने वाले हैं लेह के हालात : उमर<br></strong>मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि लेह की स्थिति आंखें खोलने वाली है और बताती है कि पूर्ण राज्य का दर्जा न मिलने पर जम्मू-कश्मीर के लोग कैसा महसूस कर रहे हैं। लद्दाख को तो पूर्ण राज्य का दर्जा देने का वादा भी नहीं किया गया था। उन्होंने कहा, 2019 में लद्दाख के लोगों ने केंद्र शासित प्रदेश बनने का जश्न मनाया था। </p>



<p class="wp-block-paragraph">अब विश्वासघात और गुस्सा महसूस कर रहे हैं। उमर ने कहा, प्रदेश में भाजपा की जीत नहीं हुई है तो इसकी सजा जम्मू-कश्मीर के लोगों को नहीं दी जा सकती है। जम्मू-कश्मीर में केंद्र सरकार ने तो यह कभी नहीं कहा था कि भाजपा की सरकार नहीं बनेगी तो प्रदेश की पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं मिलेगा। <br><br><br></p>
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