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	<title>Maharashtra &#8211; RNSNS News</title>
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	<title>Maharashtra &#8211; RNSNS News</title>
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		<title>संकट में किसान: महाराष्ट्र में 1972 के बाद सबसे बड़ा सूखा, 80 फीसदी फसलें तबाह; जलाशयों में बचा 12 फीसदी पानी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 01 Oct 2026 04:26:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Maharashtra]]></category>
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					<description><![CDATA[महाराष्ट्र के किसान संकट में हैं। 1972 के बाद सबसे बड़े सूखे का सामना कर रहे इस राज्य में 80 फीसदी फसलें तबाह हो चुकी हैं। जलाशयों में सिर्फ 12 फीसदी पानी बचा है। मराठवाड़ा में किसान मौत को गले लगा रहे हैं। हालात कितने चिंताजनक हैं, जानिए अमर उजाला की इस ग्राउंड रिपोर्ट में आसमान से [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">महाराष्ट्र के किसान संकट में हैं। 1972 के बाद सबसे बड़े सूखे का सामना कर रहे इस राज्य में 80 फीसदी फसलें तबाह हो चुकी हैं। जलाशयों में सिर्फ 12 फीसदी पानी बचा है। मराठवाड़ा में किसान मौत को गले लगा रहे हैं। हालात कितने चिंताजनक हैं, जानिए अमर उजाला की इस ग्राउंड रिपोर्ट में<br><br>आसमान से देखने पर मराठवाड़ा भले ही हरा-भरा दिख रहा है लेकिन हकीकत जमीन पर उतरते ही तस्वीर बदल जाती है। खेतों में खड़ी सोयाबीन पीली पड़ चुकी है, कपास की पैदावार रुक गई है, अरहर मुरझा गई है और गन्ना अपनी सामान्य उंचाई तक पहुंचने से पहले ही सूखने लगा है। महाराष्ट्र में मराठवाड़ा के तीन जिले लातूर, बीड और धाराशिव के आसपास के इलाकों में बारिश की बेरुखी ने खरीफ की उम्मीदों को झुलसा दिया है। 80 फीसदी फसलें सूख चुकी हैं। जाहिर है कि किसान बड़े संकट में हैं। <strong>पूरे हालात पर नजर डालती ये रिपोर्ट।</strong></p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>इस फसल से तो खर्च भी निकलना मुश्किल, अगली फसल कैसे बोएंगे&nbsp;</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">मराठवाड़ा। लातूर, बीड, परभणी और धाराशिव सबसे ज्यादा सूखे से प्रभावित जिले हैं जहां जून से सितंबर के दौरान सामान्य बारिश 679.5 के मुकाबले सिर्फ 424.5 मिलीमीटर हुई। सूखे का यह संकट सिर्फ खेत तक सीमित नहीं है। इसका असर पशुओं के चारे, ग्रामीण मजदूरी, घरेलू आमदनी और अगली फसल के लिए जरूरी पूंजी पर दिखाई देने लगा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">लातूर जिले के देवकरा गांव से पीड़ादायक तस्वीर सामने आई है जहां पहली बार किसी किसान ने आत्महत्या की। दो एकड़ जमीन के काश्तकार तुकाराम गुट्टे ने आत्महत्या कर ली। कीनगांव से आगे बढ़ने पर खेतों में खड़ी फसल की जगह सूखा दिखाई देता है। सोयाबीन, कपास, अरहर की फसल सूूखती दिख रही है। हिंगणगांव के किसान तुकाराम अंबाजी 40 एकड़ के किसान हैं। 30 से 35 हजार रुपए प्रति एकड़ खर्च कर चुके हैं। कहते हैं, लगता है खर्च भी नहीं निकलेगा।<br><br><strong>डेढ़ लाख खर्च कर बोई फसल हटाने में खर्च होंगे 40 हजार</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">हगदल गांव के बालाजी मुंडे गन्ने के खेत की ओर इशारा करते हैं। वे बताते हैं कि गन्ना सामान्यतया 20 से 25 फुट तक होता है लेकिन इस बार यह 10 से 12 फुट पर ही रुक गया है और सूख रहा है। मुंडे कहते हैं कि 2025 में अधिक बारिश ने परेशान किया और इस साल बारिश के अभाव ने संकट में ला दिया है। सावरगांव रोकड़े के राम बेल्लाडे सोयाबीन, अरहर और ज्वार उगाते हैं।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>8 एकड़ की उनकी फसल में करीब डेढ़ लाख रुपए खर्च हुए हैं। अब उसे खेत साफ करने के लिए भी प्रति एकड़ 5 हजार रुपए खर्च करना पड़ेगा। फसल में, कुछ बचेगा तो वह सिर्फ मवेशियों के चारे के काम आ सकता है।</li>
</ul>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>नदी सूखी, जलाशयों में सिर्फ 12 फीसदी पानी</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">लातूर और बीड जिले में तालाबों में बेहद कम पानी बचा है। माजरा नदी लातूर की जीवनवाहिनी है। लातूर शहर से करीब 70 किमी दूर धाराशिव और बीड की सीमा के पास स्थित माजरा बांध का जलस्तर बेहद नीचे तक पहुंच चुका है। लातूर जिले के 158 जलाशयों में औसत स्टोरेज करीब 12.5 प्रतिशत रह गया है।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>यहां का नवाबकालीन साइ डैम  भी इसी जल इतिहास का हिस्सा है। स्थानीय पत्रकार शशिकांत पाटिल बताते हैं कि कभी साइ डैम के पानी से लातूर की प्यास बुझती थी। लेकिन अब यह इस्तेमाल में नहीं है। उनका कहना है कि जल रिसाव और पानी के प्रबंधन पर पर्याप्त ध्यान दिया जाता तो संकट की तीव्रता कम हो सकती थी।</li>
</ul>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>खेती के लिए अब संकट के तीन चरण</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">लातूर और आसपास के किसानों की बातचीत में 1972 का साल बार-बार सामने आता है। पूर्व जिला परिषद सदस्य त्र्यंबक नारायण गुट्टे इसे 1972 के बाद की सबसे गंभीर सूखा परिस्थितियों में से एक मानते हैं। संकट के संकेत मानसून के शुरुआती महीनों में ही दिखाई देने लगे थे। अब संकट के तीन चरण सामने हैं। पहले बुआई का संकट, फिर फसल बचाने का संकट और अब किसानों के सामने फसल हटाने और अगली खेती के लिए पूंजी जुटाने का संकट सामने है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>संभालने में खर्च होंगे 50 हजार करोड़ रुपये</strong></h2>



<p class="wp-block-paragraph">महाराष्ट्र सरकार ने सूखा प्रभावित इलाकों में राहत प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। सितंबर के अंत में सूबे के 265 तालुकों के बाद 43 तालुकों को सूखा प्रभावित सूची में जोड़ा गया है। वहीं, फसल नुकसान के पंचनामें और पानी-चारे की व्यवस्था जैसे उपायों पर चर्चा हुई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अधिकारियों का कहना है कि सूखे  से निपटने में सरकारी खजाने पर 50 हजार करोड़ का बोझ बढ़ सकता  है। लेकिन, खेतों में खड़े किसानों  को फसल नुकसान की भरपाई, पानी-चारे की व्यवस्था जैसे उपायों के अलावा अगली फसल तक परिवार चलाने के लिए आय के सहारे की सख्त जरूरत है।<br><br></p>
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		<title>आईआईटी बॉम्बे में क्यों मचा बवाल; नकल, आत्महत्या से एफआईआर तक पहुंची बात, अब क्या चाहते हैं छात्र?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 22 Sep 2026 04:13:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Mumbai]]></category>
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					<description><![CDATA[आईआईटी बॉम्बे में छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद शुरू हुआ विरोध अब कई गंभीर सवालों तक पहुंच गया है। परिवार के आरोप, प्रोफेसर के खिलाफ एफआईआर, पुलिस जांच और छात्रों की 18 सूत्री मांगों के बीच संस्थान को अपने शुरुआती बयान पर माफी भी मांगनी पड़ी। आखिर इस पूरे मामले में अब तक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">आईआईटी बॉम्बे में छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद शुरू हुआ विरोध अब कई गंभीर सवालों तक पहुंच गया है। परिवार के आरोप, प्रोफेसर के खिलाफ एफआईआर, पुलिस जांच और छात्रों की 18 सूत्री मांगों के बीच संस्थान को अपने शुरुआती बयान पर माफी भी मांगनी पड़ी। आखिर इस पूरे मामले में अब तक क्या हुआ और छात्र प्रशासन से क्या जवाब चाहते हैं? आइए जानते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आईआईटी बॉम्बे में बीटेक दूसरे वर्ष के छात्र की मौत का मामला इस वक्त सुर्खियों में है। आईआईटी प्रशासन सवालों में है। छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद परिसर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। छात्र प्रशासन से जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। इस बीच परिवार की शिकायत पर एक प्रोफेसर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई, मामला मुंबई पुलिस की अपराध शाखा को सौंपा गया और संस्थान ने अपने शुरुआती बयान पर बाद में माफी भी मांगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><em>ऐसे में आइए जानते हैं कि पूरा मामला क्या है? आईआईटी बॉम्बे में छात्र प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं? छात्रों की क्या मांग है? परिवार का क्या आरोप है? संस्थान ने क्या कहा है? पुलिस अब तक क्या कार्रवाई कर चुकी है? &nbsp;</em></p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>क्या है पूरा मामला?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">18 सितंबर को आईआईटी बॉम्बे के ऊर्जा विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग के दूसरे वर्ष के बीटेक छात्र साहिल वाकोडे (20) की मौत हो गई। संस्थान ने 19 सितंबर को जारी अपने शुरुआती बयान में कहा था कि उसी दिन एक परीक्षा के दौरान छात्र को मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए पाया गया था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आईआईटी बॉम्बे के मुताबिक, छात्र ने परीक्षा के प्रश्नपत्र को चैटजीपीटी पर डालकर उसके जवाब लेने की कोशिश की थी। संस्थान ने कहा था कि छात्र के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">संस्थान के अनुसार, परीक्षा के बाद शिक्षक और विभागाध्यक्ष ने छात्र से बात की और उसे समझाया था। उसे यह भरोसा भी दिलाया गया था कि इस घटना का उसके शैक्षणिक भविष्य पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। इसके बाद छात्र अपने छात्रावास के कमरे में लौट गया। बाद में शाम को वह अपने कमरे में मृत मिला।</p>



<h3 class="wp-block-heading"></h3>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>छात्र की मौत के बाद क्यों शुरू हुआ प्रदर्शन?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">छात्र की मौत के बाद आईआईटी बॉम्बे परिसर में छात्रों ने देर रात प्रदर्शन शुरू कर दिया। छात्रों ने प्रशासन से जवाबदेही, पारदर्शिता और घटना से जुड़े सवालों के जवाब देने की मांग की। स्थिति को संभालने के लिए परिसर में पुलिसकर्मी तैनात किए गए। इस दौरान छात्रों और संस्थान प्रशासन के बीच बातचीत भी शुरू हुई। पुलिस के उपायुक्त दत्तात्रय नलावड़े ने बताया कि छात्र की मौत के बाद कुछ छात्र प्रदर्शन के लिए इकट्ठा हुए थे। प्रशासन उनसे बातचीत कर रहा था और मामले को सुलझाने के लिए बातचीत जारी थी। उनके मुताबिक, छात्रों के कुछ आंतरिक प्रशासनिक मुद्दे हैं, जिन पर संस्थान पहले भी काम करता रहा है।<br><br>प्रदर्शन में शामिल छात्र प्रणय ने कहा कि प्रदर्शन केवल इस घटना को लेकर नहीं है। उसके मुताबिक, परिसर में पहले भी ऐसी घटनाएं हुई हैं। उन्होंने दावा किया कि इस साल ऐसी चार घटनाएं हुई हैं और पिछले दो महीनों में ये दूसरी घटना है। उन्होंने कहा कि छात्र यह जानना चाहते हैं कि आखिर ऐसी घटनाओं के पीछे क्या कारण हैं और इन्हें रोकने के लिए प्रशासन क्या कदम उठा रहा है?<br><br>हालांकि, एक अन्य छात्र अंश ने इस घटना को प्रशासन और छात्रों के बीच टकराव में बदलने से बचने की बात कही। उन्होंने कहा कि पूरा परिसर दुखी है और इस समय किसी एक व्यक्ति या पक्ष पर आरोप लगाने के बजाय सभी को साथ खड़े होने की जरूरत है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>परिवार ने क्या आरोप लगाए?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">छात्र के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने परिसर से जुड़े लोगों पर गंभीर आरोप लगाए। परिवार का आरोप है कि छात्र को पिछले करीब तीन महीने से कथित तौर पर प्रताड़ित किया जा रहा था। शिकायत में प्रोफेसर सूर्यानारायण डूला&nbsp;पर छात्र के खिलाफ जातिसूचक टिप्पणियां करने का आरोप लगाया गया है। साहिल की मां ने सीबीआई जांच की मांग की है।<br><br>इन आरोपों के आधार पर पवई पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया और प्राथमिकी में प्रोफेसर सूर्यानारायण डूला&nbsp;का नाम भी शामिल किया गया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।<br><br>भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित है। इसके तहत अगर कोई व्यक्ति आत्महत्या करता है और कोई दूसरा व्यक्ति उस आत्महत्या के लिए उकसाता है, तो उसे 10 साल तक की कैद और जुर्माने की सजा हो सकती है।<br><br>अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 एक कानून अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों के खिलाफ होने वाले अत्याचार, भेदभाव और अपराधों को रोकने से जुड़ा है। &nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>नकल वाली बात पर परिवार ने क्या कहा?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">साहिल के माता-पिता का कहना है कि उनके बेटे ने कभी पढ़ाई के दबाव को लेकर कोई शिकायत नहीं की थी। उनके मुताबिक, साहिल के पहले साल में कोई बैकलॉग भी नहीं था और वह संस्थान में पढ़ाई के साथ-साथ बैडमिंटन और स्केटिंग जैसी गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था।&nbsp;<br><br>साहिल की मां ने बताया कि उनका बेटा इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद सिविल सेवा की तैयारी करना चाहता था। परिवार को ऐसा कभी नहीं लगा कि साहिल पढ़ाई को लेकर किसी परेशानी या दबाव में था। उनकी मां के मुताबिक, साहिल ने परिवार के सामने ऐसी कोई चिंता भी जाहिर नहीं की थी।&nbsp;<br><br>साहिल के पिता ने कहा, &#8220;यह विश्वास करना मुश्किल है कि वह नकल करने की कोशिश कर रहा था। वह हमेशा से पढ़ाई में बहुत अच्छा रहा।&#8221;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>अब मामले की जांच कौन कर रहा है?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">मुंबई पुलिस ने मामले की जांच अपराध शाखा को सौंप दी है। अपराध शाखा छात्र की मौत से पहले की परिस्थितियों, परिवार की शिकायत में लगाए गए आरोपों और संस्थान में हुए घटनाक्रम की जांच कर रही है। मामले में प्रोफेसर सूर्यानारायण डूला&nbsp;और अन्य लोगों से पूछताछ की जा सकती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>प्रोफेसर को लेकर आईआईटी ने क्या कहा?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">मामले के बीच शुरुआत में आईआईटी बॉम्बे के शिक्षक मंच ने प्रोफेसर सूर्यानारायण डूला&nbsp;के समर्थन में बयान जारी किया था। संस्थान ने कहा कि प्रोफेसर ने संस्थान की सीनेट द्वारा स्वीकृत शैक्षणिक नीतियों के तहत अपनी जिम्मेदारी निभाई थी।<br><br>संस्थान के मुताबिक, 18 सितंबर को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक मध्य-सत्र परीक्षा चल रही थी। इसी दौरान प्रोफेसर डूला&nbsp;ने एक छात्र को बिना अनुमति मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए देखा। संस्थान ने इसे शैक्षणिक नियमों का उल्लंघन बताया और कहा कि प्रोफेसर ने संस्थान की तय प्रक्रिया के तहत इसकी जानकारी अधिकारियों को दी।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>छात्रों ने प्रशासन के सामने क्या मांगें रखीं?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">छात्रों ने संस्थान को 18 सूत्री मांगपत्र सौंपा। इसमें घटना की स्वतंत्र जांच, प्रशासन की जवाबदेही, छात्र कल्याण और अनुशासनात्मक प्रक्रियाओं में सुधार समेत कई मांगें शामिल हैं। जैसे-</p>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई</strong></li>



<li><strong>बदनाम करने को लेकर सार्वजनिक माफी: </strong>छात्रों ने छात्र के बारे में लिंक्डइन पर की गई पोस्ट में आंशिक और स्पष्ट जानकारी साझा किए जाने को उसकी &#8220;बदनामी&#8221; बताया। उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से इसके लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।</li>



<li><strong>अधिकारियों के साथ ओपन हाउस:</strong> छात्रों ने निदेशक, डीन एसए, डीन एपी और मृत छात्र के विभागाध्यक्ष के साथ ओपन हाउस आयोजित करने की मांग की है। इसमें छात्र सीधे अपने सवाल और चिंताएं रख सकेंगे। छात्रों ने यह बैठक 22 सितंबर से पहले कराने की मांग की है।</li>



<li><strong>मांगों के क्रियान्वयन की जवाबदेही:</strong>  छात्रों ने मांगों की प्रगति पर हर सप्ताह अपडेट देने की भी मांग की है।</li>



<li><strong>स्वतंत्र जांच समिति:</strong> छात्रों ने प्रोफेसरों, छात्र प्रतिनिधियों, बाहरी सदस्यों और छात्र प्रतिनिधियों की ओर से सुझाए गए सदस्यों वाली स्वतंत्र समिति बनाने की मांग की है। </li>



<li><strong>अंतरिम और अंतिम रिपोर्ट:</strong> छात्रों ने 30 सितंबर तक अंतरिम रिपोर्ट और 15 अक्टूबर तक अंतिम रिपोर्ट जारी करने की मांग की है।</li>



<li><strong>आर्थिक सहायता: </strong>छात्रों ने हाल के महीनों में आईआईटी बॉम्बे में अपने प्रियजनों को खोने वाले चार लोगों के परिवारों को उचित और जल्द वित्तीय सहायता देने की मांग की है। </li>
</ul>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>प्रशासन ने छात्रों की मांगों पर क्या कहा?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">रविवार को आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे ने छात्रों के साथ लंबी बैठक की। इसके बाद उन्होंने छात्रों की ओर से सौंपे गए 18 से अधिक मांगों वाले मांगपत्र को स्वीकार किया और उस पर हस्ताक्षर किए। सोमवार को संस्थान के संचालक मंडल की विशेष बैठक बुलाई गई। इसमें छात्रों की मांगों और उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों पर चर्चा की जानी थी।<br><br>इसके बाद निदेशक शिरीष केदारे की छात्रों के साथ खुली बैठक भी प्रस्तावित थी। यह बैठक रविवार को छात्रों के साथ हुई बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए रखी गई थी। सोमवार को आईआईटी बॉम्बे में सभी व्याख्यान रद्द रखने की जानकारी भी सामने आई।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>आईआईटी बॉम्बे ने अपने पहले बयान पर माफी क्यों मांगी?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">मामले में सोमवार को एक बड़ा बदलाव आया। आईआईटी बॉम्बे ने छात्र की मौत से पहले की परिस्थितियों को लेकर अपने शुरुआती बयान पर माफी मांगी। साथ ही प्रोफेसर सूर्यानारायण डूला&nbsp;की डीन पद की जिम्मेदारी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी। यह फैसला आईआईटी बॉम्बे के निदेशक शिरीष बी. केदारे ने लिया।<br><br>संस्थान ने कहा कि साहिल की मौत से जुड़ी परिस्थितियां अभी संबंधित अधिकारियों की जांच के अधीन हैं। आईआईटी बॉम्बे ने माना कि उचित जांच पूरी होने से पहले छात्र की मौत से पहले की घटनाओं को लेकर विवरण देना या उनका किसी तरह चरित्रांकन करना उचित नहीं था।<br><br>संस्थान ने एक्स पर अपने आधिकारिक हैंडल पर कहा कि वह साहिल की मौत से जुड़ी अपनी पिछली सूचना में दिए गए बयानों के लिए माफी मांगता है। इससे पहले संस्थान ने अपने बयान में परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन इस्तेमाल करने और प्रश्नपत्र को चैटजीपीटी पर डालने की बात कही थी। बाद में संस्थान ने स्पष्ट किया कि घटना से पहले की परिस्थितियां अभी जांच का विषय हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>क्या आईआईटी बॉम्बे के निदेशक ने भी इस्तीफा दिया?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">मामले के बीच सोमवार को आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे के इस्तीफे की खबर भी सामने आई। हालांकि, आईआईटी बॉम्बे ने इस खबर को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>प्रोफेसर के समर्थन में निकाला गया मार्च?</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">सोमवार को संस्थान के फैकल्टी फोरम ने प्रोफेसर सूर्यनारायण के समर्थन में मार्च निकाला। आईआईटी बॉम्बे फैकल्टी फोरम के अध्यक्ष प्रो. राजकुमार एस. पंत ने बयान जारी कर कहा कि प्रो. डूला को प्रशासनिक जिम्मेदारियों से जांच को स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाने के लिए हटाया गया है। फोरम ने कहा कि डूला&nbsp;अभी भी संस्थान के फैकल्टी सदस्य हैं।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>अमरावती महिला अस्पताल के NICU में लगी आग, 39 नवजात में से तीन मासूमों की मौत; छह को किया गया शिफ्ट</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/amaravati-women-hospital-nicu-fire-3-newborns-dead-6-shifted/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Aug 2026 05:04:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Maharashtra]]></category>
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					<description><![CDATA[अमरावती जिला महिला अस्पताल के NICU में तड़के आग लगने से तीन नवजातों की मौत हो गई। हादसे के वक्त 39 बच्चों का इलाज चल रहा था। वेंटिलेटर में धमाके के बाद आग लगने की बात सामने आई है। छह नवजातों को सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल भेजा गया। महाराष्ट्र के अमरावती स्थित जिला महिला अस्पताल के नवजात [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">अमरावती जिला महिला अस्पताल के NICU में तड़के आग लगने से तीन नवजातों की मौत हो गई। हादसे के वक्त 39 बच्चों का इलाज चल रहा था। वेंटिलेटर में धमाके के बाद आग लगने की बात सामने आई है। छह नवजातों को सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल भेजा गया।<br><br>महाराष्ट्र के अमरावती स्थित जिला महिला अस्पताल के नवजात शिशु गहन चिकित्सा कक्ष (एनआईसीयू) में सोमवार तड़के आग लगने से तीन नवजातों की मौत हो गई। हादसे के दौरान अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सों और कर्मचारियों ने तत्परता दिखाते हुए कई बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।<br><br>प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, सोमवार सुबह करीब 3:30 बजे अस्पताल की तीसरी मंजिल पर स्थित एनआईसीयू में अचानक धमाका हुआ। इसके बाद वार्ड में आग और धुआं फैल गया। बताया जा रहा है कि धमाका वेंटिलेटर में हुआ था, जिसके बाद आग भड़क उठी।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>NICU में भर्ती थे 39 नवजात</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">घटना के समय एनआईसीयू में कुल 39 नवजातों का इलाज चल रहा था। आग और धुआं फैलते ही ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर, नर्स और अन्य अस्पताल कर्मचारियों ने तुरंत बच्चों को वार्ड से बाहर निकालना शुरू कर दिया। अस्पताल स्टाफ ने अधिकांश नवजातों को सुरक्षित बाहर निकालकर उन्हें आग और धुएं से दूर पहुंचाया। हालांकि, हादसे में तीन नवजात गंभीर रूप से झुलस गए और बाद में उनकी मौत हो गई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बचाए गए बच्चों में से छह नवजातों को आगे की चिकित्सा निगरानी और इलाज के लिए सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनकी हालत को देखते हुए उन्हें वहां बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। एनआईसीयू में लगी आग के कारण कई मेडिकल उपकरण और अन्य सामान जलकर राख हो गए। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। राहत की बात यह रही कि आग अस्पताल के दूसरे कक्षों तक नहीं फैल सकी।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>छिंदवाड़ा में भी NICU में आग से झुलसे थे तीन नवजात</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">इससे पहले मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिला अस्पताल में शनिवार तड़के एनआईसीयू में आग लगने की घटना सामने आई थी। इस हादसे में तीन नवजात झुलस गए थे। जिला अस्पताल की सिविल सर्जन कंचन दुबे के मुताबिक, घटना करीब रात 1:50 बजे हुई थी। एनआईसीयू में इस्तेमाल होने वाले वार्मर के फिलामेंट में चिंगारी निकलने के बाद उपकरण में आग लग गई थी। घटना के समय एनआईसीयू में 33 बच्चे मौजूद थे। इनमें से तीन नवजात आग की चपेट में आए, जबकि अस्पताल के कर्मचारियों, नर्सों और सुरक्षा गार्डों ने तुरंत बाकी 30 बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।</p>
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		<title>नागपुर के वाटर प्लांट में क्लोरिन गैस लीक होने से मचा हड़कंप: NDRF ने संभाला मोर्चा, 20 लोग अस्पताल में भर्ती</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Aug 2026 04:56:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Nagpur]]></category>
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					<description><![CDATA[नागपुर के गोधनी इलाके में महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के पानी साफ करने वाले प्लांट में क्लोरीन गैस लीक होने की खबर के बाद बचाव कार्य चलाया गया।  पुलिस को जैसे ही घटना की शुरुआती जानकारी मिली, वे सबसे पहले मौके पर पहुँचे और फँसे हुए लोगों को बाहर निकालना शुरू कर दिया।   महाराष्ट्र के [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">नागपुर के गोधनी इलाके में महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के पानी साफ करने वाले प्लांट में क्लोरीन गैस लीक होने की खबर के बाद बचाव कार्य चलाया गया।  पुलिस को जैसे ही घटना की शुरुआती जानकारी मिली, वे सबसे पहले मौके पर पहुँचे और फँसे हुए लोगों को बाहर निकालना शुरू कर दिया।  <br><br>महाराष्ट्र के नागपुर के गोधनी इलाके में महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के जलशोधन संयंत्र में क्लोरीन गैस लीक की सूचना के बाद पुलिस, फायर विभाग, NDRF और अन्य टीमों ने बचाव अभियान चलाया। कुछ लोगों को सांस लेने में दिक्कत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि करीब 20 लोगों के अस्पताल में होने की बात कही गई है। फिलहाल स्थिति सामान्य है और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। सुरक्षा के मद्देनजर परिसर को दो-तीन दिनों तक सील रखने की सलाह दी गई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>पुलिस ने सबसे पहले संभाला मोर्चा</strong><br>NDRF जवान विजय के मुताबिक, पुलिस को जैसे ही शुरुआती जानकारी मिली, वे सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचे और वहां फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। इसके बाद सुरक्षा के लिहाज से इलाके में बैरिकेडिंग कर लोगों की आवाजाही रोक दी गई।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>फायर विभाग ने तुरंत शुरू किया ऑपरेशन</strong><br>विजय ने बताया कि पुलिस के बाद फायर डिपार्टमेंट को अलर्ट मिला था और दमकल की टीम सबसे पहले ऑपरेशन शुरू करने के लिए मौके पर पहुंची। इसके बाद NDRF और अन्य टीमों को घटना की जानकारी मिली, जिसके बाद वे भी तेजी से घटनास्थल पर पहुँचीं और बचाव अभियान में शामिल हो गईं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>फिलहाल स्थिति सामान्य, कोई मौत नहीं</strong><br>NDRF जवान ने बताया कि अभी स्थिति सामान्य है और घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। हालांकि, गैस के संपर्क में आने के कारण कुछ लोगों को सांस लेने में परेशानी हुई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनके मुताबिक, करीब 20 लोग अभी भी अस्पताल में भर्ती हो सकते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>परिसर में अब भी सावधानी जरूरी</strong><br>विजय ने कहा कि घटनास्थल पर सावधानी बरतना बेहद जरूरी है, क्योंकि कुछ गिरा हुआ मटीरियल अभी भी वहां मौजूद है और गैस की मौजूदगी का भी पता चल सकता है। ऐसे में किसी भी तरह की लापरवाही लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>दो-तीन दिन परिसर सील रखना बेहतर</strong><br>सुरक्षा को देखते हुए फिलहाल लोगों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। NDRF जवान के अनुसार, परिसर को अगले दो-तीन दिनों के लिए सील रखना सबसे बेहतर होगा, ताकि गैस के संभावित प्रभाव और घटनास्थल पर मौजूद सामग्री की पूरी तरह जांच की जा सके।</p>
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		<title>मुंबई के घाटकोपर इलाके में हुआ भूस्खलन, दो लोगों की मौत; छह से आठ लोगों के अभी भी दबे होने की सूचना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 03:59:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Mumbai]]></category>
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					<description><![CDATA[मुंबई के घाटकोपर इलाके में भूस्खलन के चलते एक पहाड़ का हिस्सा गिर गया, जिसकी चपेट में कई चॉल आ गईं। कई लोग अभी भी मलबे में दबे हैं और दो लोगों को शव बरामद किए गए हैं।  मुंबई को घाटकोपर इलाके में आज तड़के भूस्खलन हो गया, जिसकी चपेट में आकर कई लोग दब [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">मुंबई के घाटकोपर इलाके में भूस्खलन के चलते एक पहाड़ का हिस्सा गिर गया, जिसकी चपेट में कई चॉल आ गईं। कई लोग अभी भी मलबे में दबे हैं और दो लोगों को शव बरामद किए गए हैं। <br><br>मुंबई को घाटकोपर इलाके में आज तड़के भूस्खलन हो गया, जिसकी चपेट में आकर कई लोग दब गए। पुलिस ने बताया कि दो लोगों के शव निकाले जा चुके हैं और छह से आठ लोग अभी भी फंसे हो सकते हैं। राहत और बचाव कार्य जारी है। मुंबई में भारी बारिश का दौर जारी है और माना जा रहा है कि भारी बारिश के चलते ही भूस्खलन हुआ।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>पहाड़ का हिस्सा चॉल पर गिरा</strong><br>मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुंबई के घाटकोपर इलाके में आने वाले चिराग नगर में भूस्खलन के चलते गौसिया चॉल पर पहाड़ का हिस्सा आ गिरा। इस भूस्खलन की चपेट में आकर कई लोग मलबे में दब गए। हादसे में दो लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोगों को बचाया जा चुका है। हालांकि मलबे में अभी भी छह से आठ लोगों के फंसे होने की आशंका है, जिन्हें बचाने के लिए राहत और बचाव कार्य जारी है। </p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>एनडीआरएफ की टीमें राहत और बचाव कार्यों में जुटीं</strong><br>पुलिस ने बताया कि घटना तड़के करीब चार बजे घटी। महाराष्ट्र पुलिस, एनडीआरएफ की टीमें मौके पर मौजूद हैं। साथ ही एंबुलेंस की गाड़ियां भी मौके पर तैनात हैं ताकि घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जा सके। बीएमसी ने बताया कि दो शव अस्पताल पहुंचाए गए हैं और दो घायलों को जिनमें सोहेल अंसारी (18 वर्षीय) और मोहम्मद अंसारी (14 वर्षीय) शामिल हैं, उन्हें भी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मुंबई की मेयर रितु तावड़े भी मौके पर पहुंची हैं और राहत और बचाव कार्य की समीक्षा कर रही हैं।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>महाराष्ट्र के भिवंडी में चार मंजिला इमारत ढही, एक मौत; कई लोग अब भी मलबे में फंसे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 04:11:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Maharashtra]]></category>
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					<description><![CDATA[महाराष्ट्र के भिवंडी में चार मंजिला इमारत ढहने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका है और राहत-बचाव अभियान जारी है। महाराष्ट्र के भिवंडी में चार मंजिला इमारत का एक हिस्सा ढहने से बड़ा हादसा हो गया। अधिकारियों के अनुसार, इस दुर्घटना में एक व्यक्ति की [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">महाराष्ट्र के भिवंडी में चार मंजिला इमारत ढहने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका है और राहत-बचाव अभियान जारी है। महाराष्ट्र के भिवंडी में चार मंजिला इमारत का एक हिस्सा ढहने से बड़ा हादसा हो गया। अधिकारियों के अनुसार, इस दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई है, जबकि सात से आठ लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यह हादसा गुरुवार रात करीब 11:30 बजे पावरलूम नगरी के बालाजी नगर स्थित कोहिनूर बिल्डिंग में हुआ। भिवंडी-निजामपुर नगर निगम के अग्निशमन अधिकारी विजय जाधव ने बताया कि मलबे से एक शव निकाला गया है, जबकि एक घायल लड़के को सुरक्षित निकालकर नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>क्या इमारत पहले से खतरनाक घोषित की जा चुकी थी?</strong><br>नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक, चार मंजिला इमारत में कुल 48 कमरे थे, जिनमें प्रत्येक मंजिल पर 12 कमरे बने थे। इस इमारत को पहले ही खतरनाक घोषित किया जा चुका था। हादसे के समय भवन में मरम्मत का कार्य चल रहा था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अधिकारियों ने बताया कि गुरुवार रात करीब नौ बजे स्थानीय लोगों ने इमारत से तेज दरारों जैसी आवाजें सुनीं। खतरे की आशंका को देखते हुए लोगों ने कई परिवारों को समय रहते बाहर निकाल दिया, लेकिन कुछ लोग अभी बाहर निकल ही रहे थे कि इमारत की &#8216;बी&#8217; विंग अचानक भरभराकर गिर गई।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>क्या राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है?</strong><br>मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। अभियान में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), ठाणे डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स और स्थानीय दमकल विभाग की टीमें जुटी हुई हैं। मौके पर डॉग स्क्वॉड, चार दमकल गाड़ियां, दो एंबुलेंस और भारी मशीनरी तैनात की गई है। अधिकारी मलबे में फंसे सभी लोगों को सुरक्षित निकालने के प्रयास में लगातार जुटे हुए हैं।</p>
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		<title>महाराष्ट्र: स्कूलों के नजदीक समोसा-वड़ा पाव पर रोक, कैंटीन के बदले नियम; जंक फूड पर सरकार ने क्या निर्देश दिए?</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/maharashtra-junk-food-ban-near-schools-samosa-vada-pav-canteen-guidelines/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 Jul 2026 04:15:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Maharashtra]]></category>
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					<description><![CDATA[महाराष्ट्र के स्कूलों के आस-पास अब जंक फूड की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। वड़ा पाव, समोसा, कोल्ड ड्रिंक जैसी चीजों से लेकर कैंटीन और मिड-डे मील तक के लिए नए नियम लागू किए गए हैं। बच्चों के खाने में बदलाव लाने वाले इस फैसले से क्या असर होगा, जानिए इस रिपोर्ट में। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">महाराष्ट्र के स्कूलों के आस-पास अब जंक फूड की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। वड़ा पाव, समोसा, कोल्ड ड्रिंक जैसी चीजों से लेकर कैंटीन और मिड-डे मील तक के लिए नए नियम लागू किए गए हैं। बच्चों के खाने में बदलाव लाने वाले इस फैसले से क्या असर होगा, जानिए इस रिपोर्ट में।<br><br>बच्चों में बेहतर खान-पान की आदतों को बढ़ावा देने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने स्कूलों के अंदर और आसपास जंक फूड की बिक्री, मुफ्त वितरण और विज्ञापन पर रोक लगा दी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>नए आदेश में क्या कहा गया है?</strong><br>ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें वसा, कृत्रिम वसा, चीनी और नमक की मात्रा ज्यादा होती है, जिन्हें आमतौर पर ज्यादा वसा, चीनी और नमक वाले खाद्य पदार्थ (एचएफएसएस) कहा जाता है, अब स्कूल परिसर या उसके 50 मीटर के दायरे में न तो बेचे जा सकेंगे, न मुफ्त बांटे जा सकेंगे और न ही उनका प्रचार किया जा सकेगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यह नियम राज्य के सभी स्कूलों पर लागू होगा। इसमें सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त, निजी, आवासीय स्कूलों के साथ-साथ सीबीएसई, आईसीएसई, राज्य बोर्ड और अन्य बोर्ड से जुड़े स्कूल भी शामिल हैं। इस आदेश का असर करीब 1.08 लाख स्कूलों और करीब 2 करोड़ छात्रों पर पड़ेगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">नए नियम के तहत वड़ा पाव, समोसा, डीप फ्राइड स्नैक्स, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक, मीठे पेय पदार्थ, चॉकलेट और आइसक्रीम जैसी चीजें स्कूलों और उनके आसपास 50 मीटर के क्षेत्र में नहीं बेची जा सकेंगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>महाराष्ट्र एफडीए आयुक्त ने क्या कहा?</strong><br>महाराष्ट्र &nbsp;खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने बुधवार को इस आदेश की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह कदम राज्य के चल रहे &#8216;सुरक्षित भोजन-सुरक्षित महाराष्ट्र&#8217; अभियान का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि बच्चों को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने कहा, हमारा लक्ष्य है कि महाराष्ट्र के हर बच्चे तक सुरक्षित भोजन पहुंचे। इससे स्वस्थ खान-पान की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा और एक स्वस्थ समाज बनाने में मदद मिलेगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>स्कूल कैंटीन के लिए क्या नियम बनाए गए हैं?</strong><br>इस आदेश में साफ किया गया है कि यह सभी शिक्षा बोर्डों पर समान रूप से लागू होगा। अब स्कूल कैंटीन, हॉस्टल कैंटीन, मिड-डे मील (पीएम-पोषण) रसोई, आंगनवाड़ी केंद्रों और स्कूलों को भोजन आपूर्ति करने वाले सभी विक्रेताओं के पास वैध एफएसएसएआई लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन होना जरूरी होगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>स्कूलों को क्या कदम उठाने होंगे?</strong><br>&#8211; &nbsp;खाद्य सुरक्षा सूचना बोर्ड लगाना होगा।<br>&#8211; खाद्य सुरक्षा पर्यवेक्षक नियुक्त करना होगा।<br>&#8211; &#8216;ईट राइट स्कूल&#8217; अभियान लागू करना होगा।<br>&#8211; स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देना होगा।<br>&#8211; सुरक्षित पीने के पानी, साफ रसोई, भोजन के सही भंडारण और स्वच्छता की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>एफडीए आयुक्त ने और क्या कहा?</strong><br>तुकाराम मुंढे ने कहा कि इन नियमों को लागू करने की मुख्य जिम्मेदारी स्कूल प्रिंसिपल और प्रबंधन की होगी। सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में नियमों की निगरानी स्कूल शिक्षा विभाग करेगा। वहीं, अन्य शिक्षा बोर्ड और स्थानीय निकाय अपने स्तर पर निगरानी करेंगे।&nbsp;उन्होंने बताया कि एफडीए जल्द ही पूरे राज्य में निरीक्षण अभियान शुरू करेगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों को नोटिस, लाइसेंस निलंबित या रद्द करने की कार्रवाई, खाद्य सामग्री जब्त करने और खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>TET Paper Leak: शिकंजे में महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक का मुख्य आरोपी, बिहार से दबोचा गया बिजेंद्र कुमार गुप्ता</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/maharashtra-tet-paper-leak-main-accused-bijendra-kumar-gupta-arrested-from-bihar/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 05:22:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Maharashtra]]></category>
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					<description><![CDATA[महाराष्ट्र के चर्चित शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों ने मुख्य आरोपियों में शामिल वीरेंद्र कुमार गुप्ता को बिहार से गिरफ्तार कर लिया है। वह लंबे समय से फरार चल रहा था और उसकी तलाश के लिए महाराष्ट्र पुलिस की विशेष टीम लगातार कई राज्यों में छापेमारी कर रही थी। महाराष्ट्र [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">महाराष्ट्र के चर्चित शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों ने मुख्य आरोपियों में शामिल वीरेंद्र कुमार गुप्ता को बिहार से गिरफ्तार कर लिया है। वह लंबे समय से फरार चल रहा था और उसकी तलाश के लिए महाराष्ट्र पुलिस की विशेष टीम लगातार कई राज्यों में छापेमारी कर रही थी।<br><br>महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा पेपर लीक मामले के मुख्य आरोपी बिजेंद्र कुमार गुप्ता को भिवंडी पुलिस ने बिहार से गिरफ्तार किया है। मामले में भिवंडी पुलिस ने बताया कि उसे पुणे एयरपोर्ट लाया गया है, जहां से उसे पुणे ले जाया जाएगा। पुलिस उसे जल्द ही अदालत में पेश करेगी और उसकी रिमांड लेकर पूछताछ करने की तैयारी में है। जांच एजेंसियों का मानना है कि वीरेंद्र कुमार गुप्ता से पूछताछ के दौरान पेपर लीक नेटवर्क, इसमें शामिल अन्य आरोपियों, आर्थिक लेन-देन और पूरी साजिश से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>कई राज्यों में लगातार चलाया गया तलाशी अभियान</strong><br>पुलिस के अनुसार, वीरेंद्र कुमार गुप्ता कई महीनों से गिरफ्तारी से बचता फिर रहा था। उसकी तलाश में बिहार समेत कई राज्यों में लगातार अभियान चलाए जा रहे थे। अधिकारियों का कहना है कि उसकी गिरफ्तारी से मामले की जांच को नई दिशा मिलने की उम्मीद है और पेपर लीक रैकेट से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचना आसान हो सकता है।&nbsp;जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस मामले में इससे पहले वीरेंद्र कुमार गुप्ता की पत्नी सहित कई अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि, मुख्य आरोपी लगातार पुलिस को चकमा देकर फरार था। अब उसकी गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और व्यापक होने की संभावना है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>कई पेपर लीक मामले में भी शामिल है आरोपी</strong><br>वीरेंद्र कुमार गुप्ता का नाम इससे पहले भी देश के कई चर्चित पेपर लीक मामलों में सामने आ चुका है। वर्ष 2024 में नीट पेपर लीक विवाद के दौरान एक मीडिया स्टिंग ऑपरेशन में उसने कथित तौर पर पेपर लीक सिंडिकेट के काम करने के तरीके और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की सुरक्षा व्यवस्था में संभावित कमजोरियों को लेकर कई दावे किए थे। हालांकि, उन दावों की अलग से जांच की गई थी और उनका अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र में रहा। भिवंडी पुलिस का कहना है कि आरोपी से पूछताछ के आधार पर इस मामले में शामिल अन्य संदिग्धों की पहचान कर उनके खिलाफ भी जल्द कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस को उम्मीद है कि इस गिरफ्तारी से महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक मामले की परतें खुलेंगी और पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने में महत्वपूर्ण सफलता मिलेगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>एनटीए के 47 अफसर बर्खास्त</strong><br>वहीं, केंद्र सरकार ने नीट पेपर लीक मामले में एनटीए पर बड़ी कार्रवाई की है। एनटीए के 47 अफसरों को बर्खास्त कर दिया। कुछ के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की भी तैयारी है। ये एनटीए पर सरकार की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। सूत्रों के मुताबिक अधिकारियों का कहना है कि एनटीए का पूरा कायाकल्प किया जाएगा।&nbsp;जानकारी के अनुसार,&nbsp;विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है। परीक्षा केंद्रों के चयन और उनकी निगरानी के नियमों में बदलाव हो सकता है। प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और वितरण प्रक्रिया को और सख्त बनाया जा सकता है। एनटीए की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नए प्रावधान किए जा सकते हैं। परीक्षा प्रक्रिया की नियमित समीक्षा और निगरानी के लिए नई व्यवस्था लागू की जा सकती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>एनटीए कौन-कौन सी परीक्षाएं कराता है?</strong><br>राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी देश की सबसे बड़ी परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों में से एक है। यह हर साल 15 से 20 राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश और पात्रता परीक्षाएं आयोजित करती है। इनमें NEET-UG, JEE Main, CUET-UG, CUET-PG, UGC-NET, CSIR-UGC NET, CMAT, GPAT, AIAPGET, JIPMAT, NCET, AISSEE, NCHM JEE, NSSNET, SHRESHTA, SWAYAM समेत कई अन्य परीक्षाएं शामिल हैं। इन परीक्षाओं के माध्यम से मेडिकल, इंजीनियरिंग, केंद्रीय विश्वविद्यालयों, प्रबंधन, फार्मेसी, शिक्षक शिक्षा और अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश तथा पात्रता तय की जाती है।<br><br><strong>एनटीए में नियुक्ति प्रक्रिया शुरू</strong><br>इसी बीच नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) 47 अधिकारियों को हटाने के पहले ही इस हफ्ते जनरल मैनेजर के लेवल पर सीनियर प्रोफेशनल पदों के लिए विज्ञापन जारी कर दिए थे। साथ ही, यूपीएससी के प्रतिभा सेतु पोर्टल के जरिये 16 युवा पेशेवरों की नियुक्ति प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।</p>
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		<title>मुंबई में भारी बारिश का कहर: सांताक्रूज में पेड़ गिरने से आठ लोग घायल; पालघर में दीवार ढहने से महिला की मौत</title>
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		<pubDate>Fri, 03 Jul 2026 04:11:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Mumbai]]></category>
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					<description><![CDATA[ बारिश के चलते महाराष्ट्र के कई इलाकों में पेड़ गिरने, दीवार ढहने और जलभराव जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने और जर्जर इमारतों व पेड़ों के पास जाने से बचने की अपील की है। महाराष्ट्र में लगातार हो रही बारिश लोगों के लिए मुसीबत [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph"> बारिश के चलते महाराष्ट्र के कई इलाकों में पेड़ गिरने, दीवार ढहने और जलभराव जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने और जर्जर इमारतों व पेड़ों के पास जाने से बचने की अपील की है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">महाराष्ट्र में लगातार हो रही बारिश लोगों के लिए मुसीबत बन गई है। गुरुवार को मुंबई के सांताक्रूज इलाके में पेड़ गिरने से आठ लोग घायल हो गए। वहीं, पालघर जिले में घर की जर्जर दीवार गिरने से 47 वर्षीय एक महिला की मौत हो गई।<br><br><strong>सांताक्रूज में निरीक्षण के दौरान हुआ हादसा</strong><br>बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के अनुसार, यह हादसा दोपहर करीब 2:02 बजे सांताक्रूज (पश्चिम) स्थित रहेजा कॉलेज के पास एक निजी इमारत परिसर में हुआ। जानकारी के मुताबिक, नगर निगम के कर्मचारी पहले से गिरे हुए एक पेड़ का निरीक्षण करने पहुंचे थे। इसी दौरान पास का एक और पेड़ अचानक गिर पड़ा, जिसकी चपेट में आठ लोग आ गए। सभी घायलों को तुरंत नानावटी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई गई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>बारिश के चलते दर्जनों शिकायतें</strong><br>बीएमसी ने बताया कि गुरुवार को पूरे शहर से बारिश के कारण कई शिकायतें मिलीं। इसमें-</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>पेड़ और शाखाएं गिरने की 91 शिकायतें</li>



<li>शॉर्ट सर्किट की नौ घटनाएं</li>



<li>मकान या दीवार का हिस्सा गिरने की चार शिकायतें</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph">हालांकि, शॉर्ट सर्किट और मकान ढहने की घटनाओं में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter"><img data-recalc-dims="1" decoding="async" src="https://i0.wp.com/staticimg.amarujala.com/assets/images/2026/07/03/mumbai-8-injured-in-tree-fall-woman-dies-in-wall-collapse-in-palghar_e73f411c8ce5661df4304886409c9d6e.jpeg?w=1200&#038;ssl=1" alt="Mumbai: 8 injured in tree fall; Woman dies in wall collapse in Palghar; Maharashtra News in Hindi" title="मुंबई में भारी बारिश का कहर: सांताक्रूज में पेड़ गिरने से आठ लोग घायल; पालघर में दीवार ढहने से महिला की मौत"/><figcaption class="wp-element-caption">मुंबई में बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त &#8211; फोटो : PTI</figcaption></figure>
</div>


<p class="wp-block-paragraph"></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>कितनी हुई बारिश?</strong><br>गुरुवार शाम 5:30 बजे तक,&nbsp;कोलाबा मौसम केंद्र में 15.6 मिमी बारिश दर्ज की गई। जबकि सांताक्रूज मौसम केंद्र में 17.4 मिमी बारिश हुई।<br><br>वहीं, सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक बीएमसी के ऑटोमैटिक रेन गेज के अनुसार-</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>आइलैंड सिटी में औसतन 23 मिमी</li>



<li>पूर्वी उपनगरों में 28 मिमी</li>



<li>पश्चिमी उपनगरों में 32 मिमी बारिश दर्ज की गई।</li>



<li>कुछ दिन पहले स्कूल बस पर गिरा था पेड़</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph">गौरतलब है कि इसी सप्ताह मुंबई के चेंबूर इलाके में एक स्कूल बस पर पेड़ गिरने से 11 वर्षीय छात्र की मौत हो गई थी, जबकि चार अन्य लोग घायल हुए थे।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>पालघर में दीवार गिरने से महिला की मौत</strong><br>उधर, पालघर जिले के अग्रीपाड़ा गांव में 47 वर्षीय रुबिया शबीर सैयद की घर की जर्जर दीवार गिरने से मौत हो गई। जिला आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ के प्रमुख विवेकानंद कदम ने बताया कि लगातार बारिश के कारण महिला के घर के बरामदे (पड़वी) का एक हिस्सा पहले ही गिर गया था। महिला मलबा हटाकर घर में बारिश का पानी भरने से रोकने की कोशिश कर रही थी। इसी दौरान बरामदे की बची हुई कमजोर दीवार भी अचानक ढह गई और वह उसकी चपेट में आ गईं। गंभीर रूप से घायल महिला को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।</p>
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		<title>मुंबई के अंधेरी में भारी बारिश के कारण अंडरपास बंद, जलभराव से जनजीवन अस्त-व्यस्त</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 24 Jun 2026 04:00:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Mumbai]]></category>
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					<description><![CDATA[मुंबई में भारी बारिश से अंधेरी सबवे सहित कई निचले इलाकों में पानी भर गया। बीएमसी ने सुरक्षा के मद्देनजर सबवे बंद कर दिया है। हालांकि ट्रेनें सामान्य रूप से चल रही हैं। अधिकारियों ने एक रिक्शा चालक को डूबने से बचाया और लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी। मुंबई में मंगलवार रात हुई [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">मुंबई में भारी बारिश से अंधेरी सबवे सहित कई निचले इलाकों में पानी भर गया। बीएमसी ने सुरक्षा के मद्देनजर सबवे बंद कर दिया है। हालांकि ट्रेनें सामान्य रूप से चल रही हैं। अधिकारियों ने एक रिक्शा चालक को डूबने से बचाया और लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी।<br><br>मुंबई में मंगलवार रात हुई भारी बारिश ने शहर के कई हिस्सों में मुश्किलें खड़ी कर दीं। मूसलाधार बारिश की वजह से निचले इलाकों में भारी जलभराव हो गया। बीएमसी के अधिकारियों ने जानकारी दी कि अंधेरी सबवे में पानी इतना ज्यादा भर गया कि उसे गाड़ियों की आवाजाही के लिए अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। लगातार हो रही बारिश ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।<br><br></p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-large"><img data-recalc-dims="1" fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="681" src="https://i0.wp.com/rnsnsnews.com/wp-content/uploads/2026/06/Rain-dfn-dgf-dgf.webp?resize=1024%2C681&#038;ssl=1" alt="" class="wp-image-13683" title="मुंबई के अंधेरी में भारी बारिश के कारण अंडरपास बंद, जलभराव से जनजीवन अस्त-व्यस्त 1" srcset="https://i0.wp.com/rnsnsnews.com/wp-content/uploads/2026/06/Rain-dfn-dgf-dgf.webp?resize=1024%2C681&amp;ssl=1 1024w, https://i0.wp.com/rnsnsnews.com/wp-content/uploads/2026/06/Rain-dfn-dgf-dgf.webp?resize=300%2C200&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/rnsnsnews.com/wp-content/uploads/2026/06/Rain-dfn-dgf-dgf.webp?resize=768%2C511&amp;ssl=1 768w, https://i0.wp.com/rnsnsnews.com/wp-content/uploads/2026/06/Rain-dfn-dgf-dgf.webp?resize=555%2C370&amp;ssl=1 555w, https://i0.wp.com/rnsnsnews.com/wp-content/uploads/2026/06/Rain-dfn-dgf-dgf.webp?w=1353&amp;ssl=1 1353w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>
</div>


<p class="wp-block-paragraph">बीएमसी ने बारिश के आंकड़े भी जारी किए हैं। 23 जून को सुबह 8 बजे से रात 11 बजे तक शहर में औसत 56 मिमी बारिश हुई। इस दौरान पूर्वी उपनगरों में 23 मिमी और पश्चिमी उपनगरों में 33 मिमी बारिश दर्ज की गई। रात 10 बजे से 11 बजे के बीच का एक घंटा बहुत भारी रहा। इस एक घंटे में पश्चिमी उपनगरों के कई इलाकों में तेज बारिश हुई। कांदिवली के चारकोप सेक्टर 1 म्युनिसिपल स्कूल में 32 मिमी बारिश हुई। मालाड के एमएचबी म्युनिसिपल स्कूल में 28 मिमी और गजधरबंध स्टॉर्म वाटर पंपिंग स्टेशन पर 26 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। जुहू डिस्पेंसरी में 22 मिमी और सांताक्रूज के नारियलवाड़ी स्कूल में 21 मिमी बारिश हुई।<br></p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रशासन ने बताया कि अंधेरी सबवे को छोड़कर बालकी सभी सबवे में यातायात चालू रहा। मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली रेलवे सेवा पर बारिश का ज्यादा असर नहीं पड़ा और ट्रेनें सामान्य रूप से चलती रहीं। हालांकि, इस दौरान सड़कों पर हालात काफी खराब थे। एवरार्ड नगर के एक सबवे में जलभराव की खबर मिलने के बाद उसे भी जनता के लिए बंद कर दिया गया। ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर भी बुरा हाल था। वहां सड़कों पर पानी जमा होने और कम दृश्यता के कारण वाहन चालक बहुत संभलकर चल रहे थे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बीएमसी अधिकारी ऋतिक ने स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अंधेरी सबवे में गंभीर जलभराव का अभी तक कोई अस्थायी समाधान नहीं मिल सका है। बीएमसी के कर्मचारी वहां लगातार खड़े हैं ताकि कोई भी वाहन पानी के अंदर न जाए। उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि कुछ रिक्शा चालक मना करने के बाद भी सबवे पार करने की कोशिश करते हैं। एक रिक्शा सबवे के बिल्कुल बीच में फंस गया था। रिक्शा चालक की जान पर बन आई थी, लेकिन बीएमसी के दो अधिकारियों ने सूझबूझ दिखाते हुए उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">एक अन्य अधिकारी रॉबर्ट ने बताया कि उनकी टीमें पूरी कोशिश कर रही हैं कि कोई भी वाहन डूबे हुए सबवे में प्रवेश न करे। वे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। बारिश के बीच सायन से कुछ ऐसी तस्वीरें भी आईं जहां लड़के जलभराव वाली सड़कों पर मस्ती करते दिखे। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे खराब मौसम में अपनी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें।<br><br></p>
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