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	<title>Bahraich &#8211; RNSNS News</title>
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		<title>बहराइच हत्याकांड: प्रतीक्षा, प्रायश्चित..फांसी और उम्रकैद, फैसला सुन पीड़ित परिवार के टपके आंसू</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 12 Dec 2025 03:49:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bahraich]]></category>
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					<description><![CDATA[बहराइच के रामगोपाल हत्याकांड में आरोपी सरफराज को फांसी की सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने नौ आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। बहराइच जिले में पिछले साल दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान विवाद के बाद रामगोपाल की हत्या हुई थी। हत्या के बाद पूरे जिले में हिंसा भड़क गई थी। रामगोपाल हत्याकांड&#8230; करीब [&#8230;]]]></description>
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<p>बहराइच के रामगोपाल हत्याकांड में आरोपी सरफराज को फांसी की सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने नौ आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। बहराइच जिले में पिछले साल दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान विवाद के बाद रामगोपाल की हत्या हुई थी। हत्या के बाद पूरे जिले में हिंसा भड़क गई थी।</p>



<p>रामगोपाल हत्याकांड&#8230; करीब 14 महीने का इंतजार। लंबी प्रतीक्षा, आरोपियों के प्रायश्चित, फांसी और उम्रकैद के फैसले ने कई दौर देखे। बृहस्पतिवार को पीड़ित परिवार की लंबे समय से चली आ रही न्याय की प्रतीक्षा पूरी हो गई। फैसला सुनते ही पिता ने कहा&#8230; सच में कानून का राज है। बेटे की आत्मा को अब जाकर शांति मिलेगी। परिवार के सभी सदस्यों की आंखें नम हो गईं।<br><br>फैसला सुनते ही दिवंगत रामगोपाल की मां मुन्नी देवी खुद पर काबू नहीं रख सकीं। उन्होंने कांपती आवाज में कहा&#8230; भगवान का लाख लाख शुक्र है। मेरे बेटे को आज न्याय मिल गया। यह कहते-कहते उनकी आंखों से आंसू टपक पड़े। न्याय की आस आज पूरी हुई।</p>



<p><strong>&#8216;भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं&#8217;</strong><br>रामगोपाल के पिता कैलाश नाथ मिश्रा पिछले चार दिनों से मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं। उन्हें सांस लेने में दिक्कत है। इस कारण लगातार इलाज चल रहा है। बृहस्पतिवार देर शाम फैसले की खबर जैसे ही अस्पताल पहुंची, उनकी आंखें भर आईं। कमजोर आवाज में उन्होंने कहा&#8230; भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं। आज हमारे बेटे को इंसाफ मिला है। अब उसकी आत्मा को शांति मिलेगी।</p>



<p><strong>भाई हरमिलन मिश्रा भी फैसले के बाद भावुक हुए</strong><br>परिवार की देखभाल और पिता की तीमारदारी में लगे रामगोपाल के बड़े भाई हरमिलन मिश्रा भी फैसले के बाद भावुक दिखे। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने उनके परिवार की उम्मीदों को पूरा किया है और अब वे अपने भाई की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।&nbsp;</p>



<p><strong>इलाके में बढ़ाई गई सुरक्षा, पुलिस ने रातभर की गश्त</strong><br>फैसले के बाद किसी भी तरह की तनावपूर्ण स्थिति न बन सके, इसके लिए प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। अपर पुलिस अधीक्षक डीपी तिवारी ने बताया कि महाराजगंज इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस पेट्रोलिंग तेज कर दी गई है। रात के समय भी कस्बे के मोहल्लों में गश्त जारी रहेगी। अदालत के निर्णय के बाद किसी भी पक्ष द्वारा अनावश्यक भीड़ न जुटे, इसके लिए स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।</p>



<p><strong>फैसला सिर आंखों पर, पति को मिला न्याय</strong><br>रामगोपाल हत्याकांड में बृहस्पतिवार को आए फैसले ने पत्नी रोली मिश्रा के एक वर्ष के संघर्ष को पूरा कर दिया। पति की हत्या के बाद से लगातार न्याय की लड़ाई लड़ रहीं रोली ने फैसले पर कहा कि उनकी केवल एक ही मांग थी कि पति के कातिलों को फांसी की सजा मिले। बृहस्पतिवार को न्यायालय ने यही फैसला सुनाया, जिसे वह सिर आंखों पर रखती हैं। इससे पति की आत्मा को शांति मिलेगी।</p>



<p><strong>फैसले पर अभियोजन व बचाव पक्ष अभियोजन</strong><br>रामगोपाल मिश्रा के जघन्य हत्याकांड में बृहस्पतिवार को कोर्ट का फैसला सराहनीय है। कोर्ट ने पीड़ित पक्ष के दर्द को सुनकर अपना फैसला सुनाते हुए न्याय दिलाया है। ऐसे अपराधियों को इस तरह की घटना घटित करने पर कड़ी कार्रवाई का भी संदेश दिया है। यह फैसला नजीर बनेगा।</p>



<p><strong>बचाव</strong><br>आत्मरक्षा के मामले की घटना को हत्या में दर्शाया गया। इंसाफ नहीं हुआ है। ऐसे मामलों की हाईकोर्ट मॉनिटरिंग करता है। हमें पूरी उम्मीद है कि हाईकोर्ट सभी सजा पाए लोगों के साथ न्याय करेगा।</p>



<figure class="wp-block-table"><table class="has-fixed-layout"><tbody><tr><th>विवरण (मुकदमे में घटना)</th><th>तिथि</th></tr><tr><td>अपराध की तिथि</td><td>13 अक्तूबर 2024</td></tr><tr><td>प्राथमिकी (FIR) दर्ज</td><td>13 अक्तूबर 2024</td></tr><tr><td>आरोप पत्र कोर्ट में प्रस्तुत (लिखित रूप से)</td><td>11 जनवरी 2025</td></tr><tr><td>आरोप का विवरण (Charges Framed)</td><td>18 फरवरी 2025</td></tr><tr><td>सबूत, गवाह और दस्तावेज अदालत में पेश करने शुरू</td><td>04 मार्च 2025</td></tr><tr><td>सभी साक्ष्य पेश करने का काम पूर्ण</td><td>26 सितंबर 2025</td></tr><tr><td>धारा 313 CrPC के तहत आरोपी का बयान</td><td>04 अक्तूबर 2025</td></tr><tr><td>निर्णय सुरक्षित&nbsp;</td><td>04 अक्तूबर 2025</td></tr><tr><td>निर्णय पारित&nbsp;</td><td>21 नवंबर 2025</td></tr><tr><td>दोषसिद्ध&nbsp;</td><td>09 दिसंबर 2025</td></tr><tr><td>सजा सुनाई गई&nbsp;</td><td>11 दिसंबर 2025</td></tr></tbody></table></figure>



<p></p>



<p><strong>जेल से कोर्ट तक&#8230; कब क्या हुआ<br>दोपहर 2:00 बजे&nbsp;</strong><br>रामगोपाल हत्याकांड में दोषसिद्ध सभी अभियुक्तों को जिला कारागार से कड़ी सुरक्षा के बीच पुलिस वाहन से सिविल कोर्ट के लिए रवाना किया गया। जेल परिसर में पुलिस की अतिरिक्त तैनाती की गई और पुलिस लाइन से विशेष सुरक्षा दल भेजा गया।</p>



<p>दोपहर 2:20 बजे&nbsp;<br>सभी दोषी कोर्ट परिसर पहुंचे। सुरक्षा घेरा और मजबूत किया गया। सीधे कोर्ट परिसर में बने लॉकअप में ले जाया गया, जहां पहले से ही पुलिस और पीएसी तैनात।</p>



<p>दोपहर 3:20 बजे&nbsp;<br>अदालत की कार्यवाही शुरू होने पर सभी दोषियों को कोर्ट रूम में पेश किया गया। पेशी के दौरान पूरे परिसर में सन्नाटा। सुरक्षा बलों ने लगातार निगरानी बनाए रखी।</p>



<p><strong>चप्पे-चप्पे पर चौकसी</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>कोर्ट के मुख्य गेट से लेकर कोर्ट रूम तक जगह-जगह पुलिस और पीएसी के जवान तैनात।</li>



<li>हर पॉइंट पर बैरिकेडिंग। महिला पुलिसकर्मी भी तैनात।</li>



<li>कोर्ट में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति की मेटल डिटेक्टर से तलाशी।</li>



<li>परिसर में स्थानीय अभिसूचना इकाई के अधिकारी भी मौजूद रहे।</li>
</ul>



<p><strong>बेहोश हुई बहन परिजन भी रोए</strong><br>बहराइच के सिविल कोर्ट में बृहस्पतिवार देर शाम रामगोपाल हत्याकांड में फैसला सुनाए जाने के बाद अदालत परिसर में एक तरफ उदासी थी, तो दूसरी तरफ उल्लास। पीड़ित पक्ष ने न्याय मिलने पर संतोष जताया। इस बीच दोषी पक्ष में मातम जैसा माहौल रहा। अदालत ने जैसे ही मोहम्मद सरफराज उर्फ रिंकू को फांसी की सजा सुनाई, वैसे ही परिसर में मौजूद उसकी बहन बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ी। आसपास मौजूद लोगों ने उसे होश में लाने की कोशिश की। यह देख सरफराज के दूसरे भाई, बहन और पिता फफक पड़े।</p>



<p>कोर्ट के बाहर पीड़ित परिवार ने फैसले पर संतोष जताया, वहीं दोषी पक्ष में गहरी उदासी छाई रही। अदालत से सजा सुनाए जाने के बाद सभी दोषियों को पीछे के दरवाजे से पुलिस वैन की ओर भेजा गया। इस दौरान माहौल बेहद गमगीन रहा।<br><br><strong>रामगोपाल हत्याकांड में सरफराज को फांसी की सजा, नौ को उम्रकैद</strong><br>बहराइच के चर्चित रामगोपाल हत्याकांड में बृहस्पतिवार को प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने मोहम्मद सरफराज को फांसी की सजा सुनाई। मामले में दोषी अब्दुल हमीद, मोहम्मद फहीम, सैफ अली, मोहम्मद तालिब, जावेद खान, मोहम्मद जीशान, शोएब खान, ननकऊ व मारूफ को आजीवन कठोर कारावास से दंडित किया। सभी दोषियों पर अलग-अलग अर्थदंड भी लगाया गया है। फैसले के दौरान कचहरी परिसर का बाहरी इलाका पुलिस छावनी में तब्दील रहा।</p>



<p>महसी तहसील क्षेत्र के महराजगंज में 13 अक्तूबर 2024 को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान विवाद शुरू हुआ। इस दौरान रेहुआ मंसूर गांव निवासी रामगोपाल मिश्रा की जघन्य हत्या कर दी गई। घटना के बाद पूरे जिले में तनाव बढ़ा। महसी क्षेत्र में दंगा शुरू हो गया। हालात नियंत्रित करने के लिए कर्फ्यू लगाना पड़ा। दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश हुए। इंटरनेट सेवा भी बाधित करनी पड़ी।<br><br>करीब एक सप्ताह तक हालात खराब रहे। मामले में हरदी एसओ सुरेश कुमार वर्मा व महसी चौकी इंचार्ज शिव कुमार सरोज को निलंबित किया गया था। रामगोपाल के परिजनों की तहरीर पर हरदी पुलिस ने 13 अक्तूबर को ही फहीम, सरफराज उर्फ रिंकू, मोहम्मद तालिब उर्फ सबलू, सैफ अली, जावेद खान, मोहम्मद जीशान उर्फ राजा, शोएब खान, ननकऊ, खुर्शीद, शकील अहमद उर्फ बबलू, मोहम्मद अफजल उर्फ कल्लू को नामजद किया।</p>



<p><strong>पिता के सामने बेटे को सजा, डबडबाई आंखें</strong><br>हत्या, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मुख्य आरोपी अब्दुल हमीद के तीन बेटे सरफराज, मोहम्मद फहीम, मोहम्मद तालिब वारदात में शामिल पाए गए। न्यायालय ने बृहस्पतिवार को जब सरफराज को फांसी की सजा सुनाई, उस समय अब्दुल हमीद और उसके दोनों बेटे फहीम व तालिब पास ही खड़े थे। सजा सुनते ही तीनों की आंखें भर आईं।</p>



<p><strong>अलग-अलग जुर्माना</strong><br>फांसी की सजा पाए सरफराज उर्फ रिंकू पर 1.30 लाख का अर्थदंड लगाया गया है। अब्दुल हमीद पर 1.81 लाख, फहीम, सैफ अली, ननकऊ, जिशान, शोएब, मारूफ अली और फहीम पर डेढ़-डेढ़ लाख, जावेद पर 1.20 लाख और तालिब पर 50 हजार का अर्थदंड लगाया गया है।</p>



<p><strong>कोर्ट ने तीन आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए कर दिया था बरी</strong><br>पुलिस ने 11 जनवरी 2025 को आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल किया। नौ दिसंबर को प्रथम अपर जिला व सत्र न्यायाधीश ने खुर्शीद, शकील उर्फ बबलू और मोहम्मद अफजाल उर्फ कल्लू को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया और 10 आरोपियों को दोषी करार देते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया।</p>



<p></p>
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		<title>नेपाल सीमा से चुनौती: बॉर्डर पर मनी एक्सचेंज के काले कारोबार से टेरर फंडिंग, सोने की तस्करी से तय होता कमीशन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Apr 2025 05:31:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bahraich]]></category>
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					<description><![CDATA[नेपाल से सटे सीमावर्ती क्षेत्रों में सभी करेंसी बदलने की अवैध सुविधा है। इसके लिए देश और मांग के हिसाब से तीन से चार प्रतिशत तक कमीशन तय है। यहां सोने की तस्करी से भी कमीशन तय होता है। नेपाल बॉर्डर पर हमारा चौथा दिन। सात जिले और करीब 620 किमी की यात्रा। इस दौरान [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>नेपाल से सटे सीमावर्ती क्षेत्रों में सभी करेंसी बदलने की अवैध सुविधा है। इसके लिए देश और मांग के हिसाब से तीन से चार प्रतिशत तक कमीशन तय है। यहां सोने की तस्करी से भी कमीशन तय होता है।</p>



<p>नेपाल बॉर्डर पर हमारा चौथा दिन। सात जिले और करीब 620 किमी की यात्रा। इस दौरान पीलीभीत से महराजगंज तक चौकसी के बीच तस्करों का मजबूत नेटवर्क दिखा। गेहूं के साथ राइस ब्रान का खेल नजर आया। सोने की सौदेबाजी समझ आई। सबसे खास रहा मनी एक्सचेंज का काला कारोबार। सीमा पर हर करेंसी को 3 से 4 फीसदी कमीशन में नेपाली और भारतीय रुपये में बदलने का अवैध इंतजाम मिला। </p>



<p>इसका खामियाजा नेपाल अंतरराष्ट्रीय वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) की ग्रे सूची की कार्रवाई के रूप में भुगत रहा है। संस्था के अनुसार नेपाल टेरर फंडिंग के लिए सुरक्षित ठिकाना है। इसकी एक कड़ी अवैध मनी एक्सचेंज भी है। </p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>पाकिस्तानी करेंसी भी बदल जाएगी</strong></h2>



<p>मनी एक्सचेंज में कमीशन देश, मांग और जरूरत के हिसाब से बदलता रहता है। हमने बहराइच जिले के रुपईडीहा बॉर्डर पर परमेंद्र से तीन प्रतिशत पर भारतीय दो हजार रुपये को नेपाली मुद्रा में बदला। उससे पाकिस्तानी करेंसी भी बदलने के लिए कहा, पहले वह चौंका&#8230; कुछ देर रुका और बोला&#8230; 20 प्रतिशत लगेगा। हम दस पर अड़े और आगे बढ़ गए।&nbsp;</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>कितनी भी करेंसी हो एक्सचेंज होगी</strong></h2>



<p>सिद्धार्थनगर से लगती सीमा पर तो हमें ब्रिटेन के पाउंड स्टर्लिंग, अमेरिकी डॉलर, संयुक्त अरब अमीरात के दिरहम, दक्षिण कोरियाई वॉन व चीनी युआन करेंसी के भी एक्सचेंज की&nbsp;सुविधा मिली। बॉर्डर पर मिले आबिद ने दावा किया कि कितनी भी करेंसी हो एक्सचेंज होगी। बस कुछ समय लगेगा। यहां से हम महराजगंज जिले में पहुंचे।&nbsp;</p>



<p>सोनौली कोतवाली से ठीक पहले खुलेआम मनी एक्सचेंज की दुकान सजी है। नौतनवा में डॉलर व दिरहम के एक्सचेंज की बात हुई। कमीशन पर सौदा नहीं पटा तो हम तीसरे बड़े केंद्र ठूठीबारी पहुंच गए। निचलौल रोड से कोतवाली गेट से पहले तक भारतीय रुपये को नेपाली और नेपाली को भारतीय में बदलने की सुविधा मिली, लेकिन दिरहम और डॉलर के लिए कोई तैयार नहीं हुआ।</p>



<p>इस बीच पान के एक दुकानदार ने गुड्डू के बारे में बताया, जो हर करेंसी बदलने को राजी हो गया।&nbsp;पूर्व आईबी अधिकारी संतोष सिंह बताते हैं कि नेपाल से लगते भारतीय क्षेत्रों में अवैध मनी एक्सचेंज देश की सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है।&nbsp;</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>सोने की तस्करी से तय होता है कमीशन&nbsp;</strong></h2>



<p>सोनौली बॉर्डर पर मौजूद विनेश गुप्ता ने हमें बताया कि अवैध मनी एक्सचेंज में कमीशन सोने की तस्करी पर निर्भर करता है। सोना तस्करी बढ़ेगी तो कमीशन भी बढ़ेगा। तस्करी घटी तो कमीशन भी उसी के साथ घटेगा। नवंबर से जनवरी के बीच कमीशन सात प्रतिशत तक पहुंच गया था&#8230; मतलब साफ है, तब सोना नेपाल से भारत लाया जा रहा था।&nbsp;</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>नेपाल से हर साल 10 टन सोने की तस्करी</strong></h2>



<p>ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार नेपाल से हर साल करीब 10 टन सोने की तस्करी भारत में की जाती है। फाउंडेशन का दावा है कि सोने के बाद नेपाल से सबसे ज्यादा मानव तस्करी होती है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>नेपाल को एफएटीएफ ने ग्रे सूची में डाला&nbsp;</strong></h2>



<p>मनी एक्सचेंज का सीधा जुड़ाव मनी लॉन्ड्रिंग से है। इसका उपयोग नेपाल में टेरर फंडिंग के रूप में किया जा रहा है। इसके प्रमाण मिलने के बाद एफएटीएफ ने नेपाल को &#8216;ग्रे&#8217; सूची में शामिल कर दिया है। भारत-नेपाल संबंधों के जानकार यशोदा श्रीवास्तव बताते हैं कि इस सूची में उन देशों को ही शामिल किया जाता है जो आतंकवाद के वित्तपोषण और धन शोधन के लिए सुरक्षित माने जाते हैं।&nbsp;</p>



<p>पूर्व आईपीएस अधिकारी सुरेंद्र तिवारी कहते हैं कि विदेशों से नेपाल के बैंक खातों में धन भेजा जाता है। नेपाली करेंसी में रकम निकालकर भारत पहुंचाई जाती है। यहां से भारतीय रुपये में बदलकर काठमांडू पहुंचाया जाता है। यह पैसा टेरर फंडिंग के काम आता है।&nbsp;</p>
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