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	<title>Health &amp; Fitness &#8211; RNSNS News</title>
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	<title>Health &amp; Fitness &#8211; RNSNS News</title>
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		<title>Fruits That Contain Vitamin E: विटामिन ई की कमी को पूरा करते हैं ये फल, आज से ही डाइट में करें शामिल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 04:51:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Health]]></category>
		<category><![CDATA[Health & Fitness]]></category>
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					<description><![CDATA[Fruits That Contain Vitamin E: अगर आपके शरीर में विटामिन ई की कमी है तो कुछ फलों को अपनी डाइट में अवश्य शामिल करें। विटामिन ई हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी है। ये&#160;एंटीऑक्सीडेंट के रूप में काम करता है और कोशिकाओं को हानिकारक फ्री रेडिकल्स से बचाता है। विटामिन ई की कमी से त्वचा, बाल और [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>Fruits That Contain Vitamin E: </strong>अगर आपके शरीर में विटामिन ई की कमी है तो कुछ फलों को अपनी डाइट में अवश्य शामिल करें। विटामिन ई हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी है। ये&nbsp;एंटीऑक्सीडेंट के रूप में काम करता है और कोशिकाओं को हानिकारक फ्री रेडिकल्स से बचाता है। विटामिन ई की कमी से त्वचा, बाल और आंखों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं, साथ ही इम्यूनिटी भी कमजोर हो जाती है।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">अच्छी खबर यह है कि कुछ फलों में विटामिन ई प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, इसलिए इसके लिए आपको किसी तरह के सप्लीमेंट की जरूरत नहीं पड़ेगी। इन फलों को अपने रोजमर्रा के आहार में शामिल करके आप अपनी सेहत को बेहतर बना सकते हैं। यदि आप चाहते हैं कि आपकी त्वचा जवां रहे, बाल मजबूत हों और इम्यूनिटी भी बढ़े, तो इन फलों को अपनी डाइट में शामिल करना बहुत जरूरी है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>Fruits That Contain Vitamin E</strong>:</h3>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>कीवी&nbsp;</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>इसमें विटामिन ई अच्छी मात्रा में पाया जाता है। </li>



<li>इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है, त्वचा और बालों के लिए लाभकारी है और विटामिन सी भी देता है। </li>



<li>इसे आप सीधे खा सकते हैं या स्मूदी में डाल सकते हैं।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>आम&nbsp;</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li> विटामिन ई की मध्यम मात्रा होती है। </li>



<li>त्वचा की चमक बढ़ाने, बाल मजबूत करने और पाचन में मदद करता है। </li>



<li>इसे भी सीधे खाएं या शेक बनाएं।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>एवोकाडो&nbsp;</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>विटामिन ई की मात्रा इसमें अधिक है। </li>



<li>हृदय स्वास्थ्य में मदद करता है, त्वचा की नमी बनाए रखता है।</li>



<li>ये वजन संतुलित करने में सहायक है। </li>



<li>इसे सैंडविच, सलाद या स्मूदी में शामिल किया जा सकता है।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>अनार&nbsp;</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>विटामिन ई की मात्रा इसमें मध्यम होती है। </li>



<li>ये हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।</li>



<li>ये त्वचा और बालों की सेहत सुधारता है। </li>



<li>इसे जूस के रूप पिएं में या दाने निकालकर खाएं।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>पपीता&nbsp;</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>इसमें विटामिन ई अच्छी मात्रा में है। </li>



<li>ये पाचन में मदद करता है, त्वचा सुंदर बनाता है और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है। </li>



<li>इसे भी आप कट करके सीधे खा सकते हैं या स्मूदी में डाल सकते हैं।</li>
</ul>
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		<title>चिंताजनक: हर चार में एक डायबिटिज रोगी को लिवर की बीमारी का भी खतरा; लगभग 70% मरीजों में मिले फैटी लिवर</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/diabetes-patients-high-risk-fatty-liver-70-percent-study/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Apr 2026 03:56:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Health]]></category>
		<category><![CDATA[Health & Fitness]]></category>
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					<description><![CDATA[हर चार में एक डायबिटिज रोगी को लिवर की बीमारी का भी खतरा: भारत जैसे देश में जहां डायबिटीज के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, यह खतरा तब और भी गंभीर हो जाता है, जब इसे नजरअंदाज किया जाता है। बता दें कि, भारत में टाइप-2 डायबिटीज अब सिर्फ ब्लड शुगर तक सीमित [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">हर चार में एक डायबिटिज रोगी को लिवर की बीमारी का भी खतरा: भारत जैसे देश में जहां डायबिटीज के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, यह खतरा तब और भी गंभीर हो जाता है, जब इसे नजरअंदाज किया जाता है। बता दें कि, भारत में टाइप-2 डायबिटीज अब सिर्फ ब्लड शुगर तक सीमित बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि यह चुपचाप लिवर को भी गंभीर नुकसान पहुंचा रही है।<br><br>भारत में टाइप-2 डायबिटीज अब सिर्फ ब्लड शुगर तक सीमित बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि यह चुपचाप लिवर को भी गंभीर नुकसान पहुंचा रही है। द लैंसेट में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन के अनुसार, देश में हर चार में से एक डायबिटीज मरीज लिवर फाइब्रोसिस से पीड़ित है, जबकि लगभग 70 प्रतिशत मरीजों के लिवर में फैट जमा हो चुका है। यह स्थिति बिना लक्षण के धीरे-धीरे बढ़ती है और समय पर पहचान न होने पर सिरोसिस या लिवर फेल होने तक पहुंच सकती है।<br><br>अध्ययन बताता है कि टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों में लिवर की बीमारी पहले की तुलना में कहीं अधिक आम और गंभीर हो चुकी है। खासतौर पर लिवर फाइब्रोसिस जिसमें लिवर के टिश्यू में घाव हो जाते हैं, अब एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती के रूप में उभर रहा है। भारत जैसे देश में, जहां डायबिटीज के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, यह खतरा और भी गंभीर हो जाता है। इस अध्ययन में मेटाबोलिक डिसफंक्शन- एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (एमएएसएलडी) शब्द का उपयोग किया गया है, जिसे पहले फैटी लिवर डिजीज कहा जाता था। यह स्थिति तब विकसित होती है जब शरीर में मेटाबोलिक गड़बड़ियां जैसे मोटापा और इंसुलिन रेजिस्टेंस लिवर में अत्यधिक फैट जमा कर देती हैं। शुरुआत में यह स्थिति सामान्य लग सकती है, लेकिन समय के साथ यह सूजन और फिर फाइब्रोसिस का रूप ले लेती है। यही प्रक्रिया आगे बढ़कर सिरोसिस में बदल सकती है, जो लिवर की स्थायी और खतरनाक क्षति है। बता दें हर बीस में से एक मरीज में सिरोसिस की आशंका देखी गई है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>हर चार में एक डायबिटिज रोगी को लिवर की बीमारी का भी खतरा : क्यों नजरअंदाज हो जाती है लिवर की बीमारी</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">लिवर से जुड़ी बीमारियां अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित होती हैं। मरीज को शुरुआती चरण में न दर्द होता है और न ही कोई असामान्य परेशानी, जिससे जांच की जरूरत महसूस नहीं होती। दूसरी ओर डायबिटीज के इलाज में मुख्य ध्यान ब्लड शुगर कंट्रोल पर रहता है, जबकि आंखों, किडनी और नसों की जांच तो नियमित होती है, लेकिन लिवर की जांच अक्सर छूट जाती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>समय पर जांच से टल सकता है बड़ा खतरा</strong><br>विशेषज्ञों का कहना है कि अगर लिवर फाइब्रोसिस की पहचान शुरुआती चरण में हो जाए, तो इसे रोका जा सकता है। सही इलाज और जीवनशैली में बदलाव जैसे वजन नियंत्रण, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता है और सिरोसिस या लिवर फेल होने का खतरा कम किया जा सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>जांच के आसान और सुरक्षित तरीके</strong><br>अब ऐसी आधुनिक तकनीक उपलब्ध है, जिससे बिना सर्जरी और बिना दर्द के लिवर की स्थिति का आकलन किया जा सकता है। विशेष स्कैनिंग तकनीक के जरिए लिवर की कठोरता मापी जाती है, जिससे फाइब्रोसिस का पता चलता है। यह प्रक्रिया तेज, सुरक्षित और नियमित जांच के लिए उपयुक्त है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>सुबह खाली पेट दूध और दही खाने से हो जाती हैं पेट से जुड़ीं समस्याएं? यहां जानें सारी जानकारी</title>
		<link>https://rnsnsnews.com/eating-milk-and-curd-on-empty-stomach-can-cause-digestive-issues/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 21 Feb 2025 07:29:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Health]]></category>
		<category><![CDATA[Health & Fitness]]></category>
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					<description><![CDATA[नाश्ते में दही और दूध के सेवन के फायदे और नुकसान हैं। खाली पेट दूध पीने से कुछ लोगों को ऊर्जा और हड्डियों को मजबूती मिलती है, जबकि ये एसिडिटी और पाचन समस्याओं का कारण भी बन सकता है। दही खाना स्वस्थ विकल्प हो सकता है, लेकिन व्यक्ति की शारीरिक प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">नाश्ते में दही खाना काफी अच्छा भी माना जाता है। हालांकि, दही और दूध के सेवन के लाभ और नुकसान दोनों ही है। आज की इस खबर में हम आपको बताने जा रहे हैं कि आइए जानें कि आपके लिए कौन सा बेहतर विकल्प रहेगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">खाली पेट दूध या दही का सेवन व्यक्ति के पाचन तंत्र और शरीर की प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है। दोनों के लाभ और हानियां अलग-अलग हो सकते हैं। खाली पेट डेयरी प्रोडक्ट्स के सेवन से पेट संबंधित कई समस्याएं आ सकती हैं। जैसे की पेट फूलना, एसिडिटी आदि। वहीं, कुछ लोगों को खाली पेट दूध पीने से गैस और एसिडिटी से राहत मिलती है। नाश्ते में दही खाना काफी अच्छा भी माना जाता है। हालांकि, दही और दूध के सेवन के लाभ और नुकसान दोनों ही है। आज की इस खबर में हम आपको बताने जा रहे हैं कि आइए जानें कि आपके लिए कौन सा बेहतर विकल्प रहेगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>1. खाली पेट दूध पीने के फायदे और नुकसान</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>फायदे:</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>ऊर्जा बढ़ाता है – दूध में कैल्शियम, प्रोटीन और आवश्यक पोषक तत्व होते हैं, जो दिन की शुरुआत के लिए अच्छा विकल्प बन सकते हैं।</li>



<li> हड्डियों को मजबूत बनाता है – इसमें मौजूद कैल्शियम और विटामिन D हड्डियों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं।</li>



<li> गैस्ट्रिक समस्याओं में आराम – अगर आपको एसिडिटी की समस्या नहीं है, तो दूध पेट को ठंडक पहुंचाने में मदद कर सकता है।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>&nbsp;नुकसान:</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>एसिडिटी बढ़ा सकता है – कुछ लोगों के लिए खाली पेट दूध पीना एसिडिटी और गैस की समस्या को बढ़ा सकता है, खासकर यदि वे लैक्टोज इन्टॉलरेंस से ग्रसित हैं।</li>



<li> पाचन धीमा कर सकता है – दूध में मौजूद प्रोटीन और फैट, कुछ लोगों के लिए खाली पेट लेने पर पाचन क्रिया को धीमा कर सकता है।</li>



<li> सर्दी-खांसी की समस्या – जिन लोगों को बलगम बनने की प्रवृत्ति होती है, उनके लिए खाली पेट दूध पीना नुकसानदायक हो सकता है।</li>
</ul>
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