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	<title>Israel Iran Conflict &#8211; RNSNS News</title>
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	<title>Israel Iran Conflict &#8211; RNSNS News</title>
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		<title>क्या ईरान के साथ जंग के बीच सैनिकों की संख्या घटी? इस्राइली सेना प्रमुख ने बढ़ते दबाव पर गंभीर चिंता जताई</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 Mar 2026 04:36:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Israel]]></category>
		<category><![CDATA[Israel Iran Conflict]]></category>
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					<description><![CDATA[क्या ईरान के साथ जंग के बीच सैनिकों की संख्या घटी? ये सवाल इसलिए सामने आया है क्योंकि इस्राइली सेना प्रमुख ने पश्चिम एशिया में 28 दिनों से जारी संघर्ष के कारण बढ़ते दबाव पर गंभीर चिंता जताई है। आईडीएफ के शीर्ष अधिकारी ने किन बातों को लेकर चिंता जताई है। जानिए इस खबर में इस्राइली [&#8230;]]]></description>
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<p>क्या ईरान के साथ जंग के बीच सैनिकों की संख्या घटी? ये सवाल इसलिए सामने आया है क्योंकि इस्राइली सेना प्रमुख ने पश्चिम एशिया में 28 दिनों से जारी संघर्ष के कारण बढ़ते दबाव पर गंभीर चिंता जताई है। आईडीएफ के शीर्ष अधिकारी ने किन बातों को लेकर चिंता जताई है। जानिए इस खबर में</p>



<p>इस्राइली रक्षा बल (IDF) के चीफ ऑफ स्टाफ, लेफ्टिनेंट जनरल आयल जमीर (Eyal Zamir) ने ईरान के साथ जंग के बीच चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण इस्राइली सेना को बड़े नुकसान (collapse in on itself) की आशंका है। उन्होंने यह चेतावनी बढ़ते दबाव और सैनिकों की गंभीर कमी का जिक्र करते हुए दी।</p>



<p>टाइम्स ऑफ इस्राइल की रिपोर्ट के अनुसार, जमीर ने दबाव बढ़ने और सैनिकों की कमी वाली टिप्पणी सुरक्षा मामलों की कैबिनेट की बैठक के दौरान गुरुवार को की। उन्होंने इस्राइली सेना की तैयारी को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त कीं। उन्होंने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार में शामिल मंत्रियों से कहा, वे सरकार के सामने 10 चिंताओं को रेखांकित कर रहे हैं। जमीर ने सैनिकों को लेकर तत्काल विधायी उपाय किए जाने की जरूरत पर भी जोर दिया।<br><br>इस्राइली सेना के शीर्ष अफसर जमीर ने सेना में भर्ती को लेकर कानून (Conscription Law), नागरिकों के कर्तव्य को स्पष्ट करने वाले कानून (Reserve Duty Law) और अनिवार्य सैन्य सेवा का विस्तार (An extension of mandatory military service) किए जाने पर भी जोर दिया। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, अगर ये कदम नहीं उठाए गए तो इस्राइल की सेना नियमित अभियान चलाने और अपनी आरक्षित प्रणाली को बरकरार रखने में संघर्ष कर सकती है। खास बात ये है कि जमीर पहले भी इन मुद्दों पर चिंता जता चुके हैं।<br><br>ईरान के साथ जंग शुरू होने से करीब दो साल पहले, जनवरी 2024 में भी जमीर ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सैनिकों की कमी से आगाह किया था।&nbsp; उन्होंने उस समय भी सैन्य परिचालन और त्वरित कार्रवाई पर पड़ने वाले असर के मामले में सरकार को सतर्क किया था।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>क्या ईरान के साथ जंग के बीच सैनिकों की संख्या घटी? : सैनिकों की कमी और कई मोर्चों पर संघर्ष</strong></h3>



<p>गौरतलब है कि 7 अक्तूबर, 2023 को हमास के हमलों के बाद गाजा में शुरू हुई इस्राइली सेना की कार्रवाई को करीब 29 महीने बीत चुके हैं। लंबे खिंच रहे संघर्ष के कारण इस्राइल कई मोर्चों पर संघर्ष कर रहा है। ईरान पर बीते 28 फरवरी को हमले के भी एक महीने होने वाले हैं। लंबी लड़ाई के कारण इस्राइली सेना में सैनिकों की कमी का संकट गहराने लगा है।</p>



<p>सैनिकों की कमी बेहद संवेदनशील मुद्दा है। इस मामले में&nbsp;सेना सांसदों को कई बार सूचना दे चुकी है। खबरों के मुताबिक इस्राइल में सैन्य परिचालन बड़ी चुनौती बनती जा रही है क्योंकि फिलहाल, आईडीएफ करीब 12 हजार सैनिकों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। सेना से जुड़ा ये मुद्दा सैन्य सेवा को लेकर नागरिकों को दी गई छूट को लेकर हो रही राजनीतिक बहसों के कारण और भी जटिल हो गया है। इस्राइल के अति-रूढ़िवादी राजनीतिक दल कई समुदायों को दी गई छूट बरकरार रखने के लिए कानून बनाने पर जोर दे रहे हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>क्या ईरान के साथ जंग के बीच सैनिकों की संख्या घटी? अनिवार्य सैन्य सेवा में छूट दिए जाने पर विवाद क्यों?</strong></h3>



<p>दरअसल, इस्राइल के उच्च न्यायालय ने वर्ष 2024 में एक फैसला सुनाया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा, हरेदी यहूदी (Haredi yeshiva) मदरसा छात्रों को अनिवार्य सैन्य सेवा से मिली छूट का कोई कानूनी आधार नहीं है। इस मुद्दे पर आई मीडिया रिपोर्ट्स से संकेत मिले हैं कि इस्राइल के करीब 80 हजार अति-रूढ़िवादी पुरुष अभी तक सेना में भर्ती नहीं हुए हैं। इनकी आयु 18 से 24 वर्ष के बीच है और ये सभी लोग वर्तमान में सेना में भर्ती होने के लिए पात्र हैं।</p>
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		<title> &#8216;अमेरिका ने दोबारा हमला बोला तो ईरान उसके सैन्य ठिकाने..&#8217;, खामनेई की ट्रंप को चेतावनी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 Jun 2025 06:09:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[International]]></category>
		<category><![CDATA[Israel Iran Conflict]]></category>
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					<description><![CDATA[ईरान के सर्वोच्च नेता ने कहा कि ईरान पश्चिम एशिया में अमेरिका के प्रमुख केंद्रों तक आसानी से पहुंच सकता है। जब भी जरूरी होगा, ईरान कार्रवाई कर सकता है। चेतावनी भरे लहजे में ईरान के सुप्रीम लीडर ने कहा कि अगर अब कोई आक्रमण होता है, तो दुश्मन को निश्चित रूप से भारी कीमत [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>ईरान के सर्वोच्च नेता ने कहा कि ईरान पश्चिम एशिया में अमेरिका के प्रमुख केंद्रों तक आसानी से पहुंच सकता है। जब भी जरूरी होगा, ईरान कार्रवाई कर सकता है। चेतावनी भरे लहजे में ईरान के सुप्रीम लीडर ने कहा कि अगर अब कोई आक्रमण होता है, तो दुश्मन को निश्चित रूप से भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।<br><br>ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई ने कहा कि ईरान भविष्य में किसी भी अमेरिकी हमले का जवाब पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला करके देगा। उन्होंने यह बात ईरान और इस्राइल के बीच युद्ध विराम के बाद पहली बार टेलीविजन पर दिए गए अपने बयान में कही।</p>



<p>इससे पहले बीते दिन खामनेई ने कहा था, ;उनके देश ने अमेरिका के चेहरे पर तमाचा मारा है।&#8217; उनकी यह टिप्पणी इसलिए अहम है, क्योंकि 12 दिनों के वार-पलटवार के बाद इस्राइल के साथ संघर्षविराम हुआ। इससे पहले अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया। इसके बाद पहली बार गुरुवार को खामनेई का संदेश देश के सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित हुआ।<br><br>इस्राइल के साथ जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी हस्तक्षेप को लेकर खामनेई ने कहा था, &#8216;अमेरिका ने युद्ध में केवल इसलिए हस्तक्षेप किया, क्योंकि उसे लगा कि अगर हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो इस्राइल में यहूदी शासन पूरी तरह से नष्ट हो जाएगा।&#8217;&nbsp;खामनेई ने कहा कि अमेरिका को इस युद्ध से &#8220;कोई लाभ नहीं हुआ।</p>



<p>उन्होंने यह भी कहा था कि इस्लामी गणराज्य विजयी रहा। बदले में ईरान ने अमेरिका के चेहरे पर तमाचा मारा। उन्होंने कथित तौर पर सोमवार को कतर में अमेरिकी सैन्य अड्डे- अल उदीद पर ईरानी मिसाइल हमले की तरफ संकेत दिया। खामनेई ने चेतावनी दी और कहा कि ऐसी कार्रवाई भविष्य में भी दोहराई जा सकती है।&nbsp;</p>



<p><strong>टकराव शुरू होने के बाद से सार्वजनिक रूप से नहीं देखे गए थे खामनेई</strong><br>86 वर्षीय खामनेई बीते 13 जून को इस्राइल के साथ टकराव शुरू होने के बाद से सार्वजनिक रूप से नहीं देखे गए थे। इस्राइली सेना ने ईरान के परमाणु ठिकानों, प्रमुख सैन्य कमांडरों और वैज्ञानिकों को निशाना बनाया था। इसके बाद खामनेई गुप्त स्थान पर चले गए थे। सीजफायर होने के दो दिन बाद&nbsp;गुरुवार को देश की जनता को संबोधित करने सामने आए खामनेई भूरे रंग के साधारण परदों के सामने बैठकर संदेश देते दिखाई दिए। उन्होंने 19 जून को भी ऐसा ही किया था।</p>



<p><strong>इस्राइल के साथ अमेरिका भी जंग में कूदा, ईरान ने पलटवार किया</strong><br>बीते 22 जून को अमेरिकी सेना ने ईरान पर हमले के लिए बंकर-बस्टर बमों का इस्तेमाल किया था। तीन परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगले ही दिन कहा था कि ईरान ने कतर में उनके सैन्य अड्डे पर पलटवार करते हुए अपनी भड़ास निकाल ली है। अमेरिका ने ईरान के 14 में 13 मिसाइल नाकाम कर दिए।</p>



<p><strong>24 जून को ट्रंप ने ही किया सीजफायर का एलान</strong><br>12 दिनों तक चले मिसाइलों के ताबड़तोड़ हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बीते 24 जून को कहा कि&nbsp;इस्राइल और ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर सहमति बन गई है। उन्होंने कहा था कि&nbsp;आधिकारिक तौर पर ईरान युद्ध विराम की शुरुआत करेगा। इसके 12 घंटे बाद इस्राइल युद्ध विराम करेगा। इसके बाद 12 दिवसीय युद्ध का आधिकारिक अंत हो जाएगा, जिसे पूरी दुनिया सलाम करेगी।</p>
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		<title>ईरान-इस्राइल तनाव के बीच ठप हुईं वैश्विक हवाई उड़ानें, रद्द करनी पड़ीं 750 से ज्यादा फ्लाइट्स</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 24 Jun 2025 05:05:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[International]]></category>
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					<description><![CDATA[इस्राइल-ईरान तनाव को देखते हुए पश्चिम एशिया के कई देशों ने अपने हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया था। इसके बाद जब अमेरिका ने ईरान में हमले किए तो एयरलाइंस ने खतरे को खांपते हुए उड़ानों को रद्द करना शुरू कर दिया।  ईरान-इस्राइल तनाव का सीधा असर वैश्विक हवाई उड़ानों पर पड़ा है। इस तनाव [&#8230;]]]></description>
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<p>इस्राइल-ईरान तनाव को देखते हुए पश्चिम एशिया के कई देशों ने अपने हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया था। इसके बाद जब अमेरिका ने ईरान में हमले किए तो एयरलाइंस ने खतरे को खांपते हुए उड़ानों को रद्द करना शुरू कर दिया। <br><br>ईरान-इस्राइल तनाव का सीधा असर वैश्विक हवाई उड़ानों पर पड़ा है। इस तनाव में अमेरिका के दखल के बाद पश्चिम एशिया के प्रमुख देशों ने अपने हवाई क्षेत्रों को बंद कर दिया। इसके चलते करीब 750 से ज्यादा उड़ानों को रद्द करना पड़ा। सबसे ज्यादा उड़ानें दुबई एयरपोर्ट से रद्द की गईं। जबकि अन्य विदेशी एयरलाइन्स ने भी उड़ानों को रद्द किया।<br><br>इस्राइल-ईरान के बीच 12 जून से शुरू हुए हमलों के बाद से पश्चिम एशिया में हालात तनावपूर्ण थे। इसके बाद अमेरिका ने शनिवार रविवार की दरमियानी रात ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला बोला। जवाब में ईरान ने सोमवार को कतर के अल उदीद एयर बेस पर अमेरिकी सेना पर मिसाइल हमला किया। इससे कुछ घंटे पहले ही कतर ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया था। जबकि अमेरिका और ब्रिटेन ने भी अपने नागरिकों से वहां शरण लेने के लिए कहा था। वहीं संयुक्त अरब अमीरात ने भी कुछ सप्ताह के लिए उड़ानों को बंद कर दिया।<br><br><strong>इन एयरलाइन्स ने रद्द की उड़ानें</strong><br>सिंगापुर एयरलाइंस ने पश्चिम एशिया में तनावपूर्ण हालात का हवाला देते हुए रविवार से लेकर बुधवार तक दुबई आने-जाने वाली कुछ उड़ानें रद्द कर दीं। ब्रिटिश एयरवेज ने भी बुधवार तक दोहा आने-जाने वाली उड़ानें कैंसिल कर दी हैं।ब्रिटिश एयरलाइंस ने कहा कि सुरक्षा हमेशा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हम स्थिति की समीक्षा करते रहेंगे। वहीं एअर इंडिया ने सोमवार को घोषणा की कि वह अगले आदेश तक पश्चिम एशिया, उत्तरी अमेरिका और यूरोप के पूर्वी तट से आने-जाने के सभी परिचालन को तत्काल बंद कर रही है। इसके अलावा उत्तरी अमेरिका से भारत आने वाली उड़ानों को बंद हवाई क्षेत्रों से दूर डायवर्ट या रीरूट किया जा रहा है।</p>



<p><strong>दुबई एयरपोर्ट से सबसे ज्यादा उड़ानें प्रभावित</strong><br>फ्लाइटअवेयर के एयर ट्रैकिंग डाटा के मुताबिक सोमवार दोपहर तक दुनिया भर में 705 उड़ानें रद्द की गईं। इसमें सबसे ज्यादा 75 उड़ानें दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से रद्द हुईं। इसमें एअर इंडिया में सबसे ज्यादा 38 उड़ानें शामिल थीं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह से हवाई क्षेत्र को बंद करना और उड़ानों का मार्ग बदलना सुरक्षा की दृष्टि से अहम है। </p>



<p><strong>विशेषज्ञ बोले- एयरलाइंस ने सही कदम उठाया</strong><br>फ्लाइट सेफ्टी फाउंडेशन के अध्यक्ष और सीईओ हसन शाहिदी ने कहा कि यह राज्यों और देशों की जिम्मेदारी है कि वे इसकी पुष्टि करें कि उनका हवाई क्षेत्र विमानों के आवागमन के लिए सुरक्षित हो। कतर ने संघर्ष के खतरे के कारण अपना हवाई क्षेत्र बंद करके बिल्कुल सही काम किया। उन्होंने कहा कि हम सभी इस संघर्ष के समाधान के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। हम मलयेशिया के MH17 जैसा कुछ नहीं चाहते, जिसमें मिसाइल हमले में निर्दोष लोगों की जान चली जाए। हम उस इतिहास को दोहराना नहीं चाहते। फ्लाइटराडार24 के संचार निदेशक इयान पेटचेनिक ने कहा कि हवाई क्षेत्र बंद होना और उड़ान रद्द होना दर्शाता है कि एयरलाइंस, एयर ट्रैफ़िक कंट्रोलर और फ़्लाइट क्रू सभी को सुरक्षित रखने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहे हैं।</p>



<p></p>
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		<title>&#8216;कई देश ईरान को अपने परमाणु हथियार देने के लिए तैयार&#8217;, रूस का बड़ा बयान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 23 Jun 2025 05:43:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[International]]></category>
		<category><![CDATA[Israel Iran Conflict]]></category>
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					<description><![CDATA[पूर्व रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि इस्राइली जनता लगातार हमले के डर में जी रही है और इस्राइल में जगह-जगह बम धमाके हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि ईरान पर हुआ अमेरिका का हमला न सिर्फ ईरान को और मजबूत बनाएगा बल्कि पूरी दुनिया में ईरान के लिए समर्थन बढ़ेगा। अमेरिका द्वारा ईरान के तीन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>पूर्व रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि इस्राइली जनता लगातार हमले के डर में जी रही है और इस्राइल में जगह-जगह बम धमाके हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि ईरान पर हुआ अमेरिका का हमला न सिर्फ ईरान को और मजबूत बनाएगा बल्कि पूरी दुनिया में ईरान के लिए समर्थन बढ़ेगा।<br><br>अमेरिका द्वारा ईरान के तीन परमाणु केंद्रों पर हमले के बाद से पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। इस बीच ईरान के विदेश मंत्री ने रविवार को बताया कि वे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के लिए रूस का दौरा करेंगे। दोनों नेताओं की मुलाकात सोमवार को हो सकती है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि &#8216;रूस, ईरान का दोस्त है। हम हमेशा एक दूसरे से सलाह मशविरा करते हैं। मैं मॉस्को जा रहा हूं और कल सुबह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ गंभीर मुद्दे पर चर्चा होगी।&#8217;<br><br><strong>ट्रंप ने एक और युद्ध शुरू किया&#8217;</strong><br>रूस के पूर्व राष्ट्रपति और राष्ट्रपति पुतिन के खास दिमित्री मेदवेदेव ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर एक और युद्ध शुरू करने का आरोप लगाया। मेदवेदव ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि &#8216;ट्रंप शांतिदूत बनकर आए थे, लेकिन उन्होंने अमेरिका को एक नए युद्ध में झोंक दिया है।&#8217; मेदवेदेव ने ये भी लिखा कि कई देश हैं, जो अपने परमाणु हथियार ईरान को देने के लिए तैयार हैं। हालांकि मेदवेदेव ने उन देशों का नाम नहीं लिया। </p>



<p>पूर्व रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि इस्राइली जनता लगातार हमले के डर में जी रही है और इस्राइल में जगह-जगह बम धमाके हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि ईरान पर हुआ अमेरिका का हमला न सिर्फ ईरान को और मजबूत बनाएगा बल्कि पूरी दुनिया में ईरान के लिए समर्थन बढ़ेगा।</p>



<p><strong>ईरान ने बातचीत से किया इनकार</strong><br>ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अब अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत से इनकार कर दिया है। अराघची ने कहा कि हम कूटनीतिक तरीके से मामले को सुलझाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बीच में ही इस्राइल ने हमला करके उस बातचीत की कोशिश को खत्म कर दिया। ईरानी विदेश मंत्री ने ये भी कहा कि वे जिनेवा में यूरोपीय देशों के साथ कूटनीतिक स्तर पर बातचीतहो रही थी, लेकिन इसके बीच ही अमेरिका ने हमला करके इसे भी खत्म कर दिया। ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि &#8216;ईरान ने नहीं अमेरिका ने बातचीत खत्म की है और उन्होंने धोखा दिया है। उन्होंने साबित किया है कि वे कूटनीति की भाषा नहीं समझते और सिर्फ धमकी और ताकत की भाषा ही जानते हैं।&#8217;</p>



<p></p>
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		<title>न्यूयॉर्क में ईरान पर हमले के विरोध में प्रदर्शन; अमेरिकियों ने इस्राइल के समर्थन पर जताई चिंता</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 23 Jun 2025 05:37:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[International]]></category>
		<category><![CDATA[Israel Iran Conflict]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका ने शनिवार-रविवार की दरमियानी रात ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के फोर्डो, इस्फहान और नतांज परमाणु स्थलों को निशाना बनाया गया था। हमलों के विरोध में न्यूयॉर्क में लोगों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान लोगों ने ईरान संघर्ष के साथ ही गाजा में सैन्य अभियान के लिए [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>अमेरिका ने शनिवार-रविवार की दरमियानी रात ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के फोर्डो, इस्फहान और नतांज परमाणु स्थलों को निशाना बनाया गया था। हमलों के विरोध में न्यूयॉर्क में लोगों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान लोगों ने ईरान संघर्ष के साथ ही गाजा में सैन्य अभियान के लिए इस्राइल की आलोचना की। <br><br>ईरान पर अमेरिकी हमलों के बाद न्यूयॉर्क में लोग सड़क पर उतर आए। लोगों ने अमेरिकी हमलों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। सैकड़ों लोगों ने न्यूयॉर्क की सड़कों पर मार्च किया। साथ ही फलस्तीनी झंडे लहराए और ईरान से हाथ हटाओ और ईरान पर युद्ध बंद करो लिखी तख्तियां पकड़कर नारेबाजी की। वहीं ईरान पर किए हमलों और इस्राइल के प्रति समर्थन को लेकर अमेरिकियों ने चिंता भी जाहिर की। <br><br>अमेरिका ने शनिवार-रविवार की दरमियानी रात ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के फोर्डो, इस्फहान और नतांज परमाणु स्थलों को निशाना बनाया गया था। हमलों के विरोध में न्यूयॉर्क में लोगों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान लोगों ने ईरान संघर्ष के साथ ही गाजा में सैन्य अभियान के लिए इस्राइल की आलोचना की।&nbsp;</p>



<p><strong>अलर्ट पर पुलिस</strong><br>ईरान पर हमलों के बाद अमेरिका के कई शहरों में हाईअलर्ट है। न्यूयॉर्क सिटी पुलिस ने कहा कि वह ईरान में हो रहे घटनाक्रम को लेकर शहर के प्रमुख स्थलों पर अधिक पुलिस बल तैनात कर रहा है। पुलिस ने कहा कि पूरे शहर में धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनयिक स्थलों पर पुलिस बल तैनात किया जाएगा। </p>



<p><strong>लोगों ने इस्राइल के समर्थन को लेकर जताई चिंता</strong><br>अमेरिका के लोगों ने इस्राइल के समर्थन को लेकर चिंता जताई है। इराक युद्ध की यादें ताजा करते हुए लेटॉन टैलव्हाइटमैन ने कहा कि मेरा विचार खतरे को खत्म करना है। जैसा कि बुश ने इराक में कहा था, हम खतरे को खत्म करने जा रहे हैं। हम सामूहिक विनाश के हथियार खोजेंगे और उन्हें खत्म करेंगे। क्या यह उनकी योजना के अनुसार हुआ? मुझे लगता है ऐसा नहीं हुआ।</p>



<p>फ्लोरिडा के केंट बेराम ने कहा कि ट्रंप का कांग्रेस से स्पष्ट समर्थन के बिना इस हमले को मंजूरी देना थोड़ा अपमानजनक था। वह ईरान पर इस्राइल के हालिया हमलों का समर्थन करने वाले संयुक्त राज्य अमेरिका से सहमत नहीं हैं। हम सैनिकों को खतरे में डाल रहे है। जाहिर है कि हमारे सभी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई हो रही है।</p>



<p>बिलिंग्स में ट्रंप समर्थक पैटी एलमैन ने कहा कि मुझे चिंता है कि कहीं अमेरिका एक और लंबे संघर्ष में न फंस जाए। अमेरिका में हमारे पास दूसरे देशों के युद्धों में शामिल होने के लिए पर्याप्त चीजें हैं। हम अभी अपना ख्याल रखें। 61 वर्षीय एलमैन ने कहा कि अगर अमेरिका पर हमला होता है तो उसे जवाबी कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन उसे अन्य देशों के साथ ईरान के संघर्ष से दूर रहना चाहिए। यह उनका काम है। हमें अमेरिकियों के बारे में चिंता करनी चाहिए और यह सोचना चाहिए कि हम कैसे जीवित रहेंगे और क्या हमें सामाजिक सुरक्षा मिलेगी।</p>



<p><strong>कुछ लोगों ने किया समर्थन</strong><br>सेवानिवृत्त वायु सेना के दिग्गज केन स्लैबॉ ने कहा कि वह ट्रंप के फ़ैसले और इसे अंजाम देने वाले सैन्यकर्मियों के समर्थक हैं। ईरान ने दशकों से अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के प्रति प्रतिरोध दिखाया है। यह समस्या ट्रंप को विरासत में मिली है। ईरान पर भरोसा नहीं किया जा सकता है और न ही उसे परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति दी जा सकती है।&nbsp;न्यूयॉर्क की नैन्सी मायर ने कहा कि यह 40 साल पहले किया जाना चाहिए था।</p>
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		<title>ऑपरेशन &#8216;मिडनाइट हैमर&#8217;: 125 फाइटर जेट&#8230;14 बंकर-बस्टर बम; अमेरिका ने 25 मिनट में तबाह किए ईरान के परमाणु ठिकाने</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 22 Jun 2025 12:27:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[International]]></category>
		<category><![CDATA[Israel Iran Conflict]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सैन्य ऑपरेशन किया है। राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी सेना ने ऑपरेशन &#8216;मिडनाइट हैमर&#8217; नाम से एक बेहद गुप्त और सटीक हमला किया। इसमें ईरान के तीन परमाणु ठिकानों को निशाना बनाकर उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया गया। इस पूरे ऑपरेशन की [&#8230;]]]></description>
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<p>अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सैन्य ऑपरेशन किया है। राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी सेना ने ऑपरेशन &#8216;मिडनाइट हैमर&#8217; नाम से एक बेहद गुप्त और सटीक हमला किया। इसमें ईरान के तीन परमाणु ठिकानों को निशाना बनाकर उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया गया। इस पूरे ऑपरेशन की जानकारी अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और संयुक्त चीफ ऑफ स्टाफ के प्रमुख जनरल डैन केन ने पेंटागन में दी।<br><br>अमेरिका ने रविवार को तड़के सुबह ईरान के खिलाफ एक बेहद गुप्त और बड़ी सैन्य कार्रवाई की। इस ऑपरेशन का नाम ऑपरेशन &#8216;मिडनाइट हैमर&#8217; रखा गया था। पेंटागन के मुताबिक, इस ऑपरेशन में अमेरिका के 125 से ज्यादा लड़ाकू विमान और मिसाइलें शामिल थीं। संयुक्त चीफ ऑफ स्टाफ के प्रमुख जनरल डैन केन ने रविवार को बताया कि यह हमला ईरान के दो प्रमुख परमाणु केंद्रों- फोर्दो और नतांज-  पर किया गया। इसके साथ ही इस्फहान शहर में भी मिसाइलें दागी गईं। जनरल डैन केन ने कहा, &#8216;हमने ईरान के उन ठिकानों को निशाना बनाया जो सीधे उनके परमाणु कार्यक्रम से जुड़े थे। ऑपरेशन को इस तरह अंजाम दिया गया कि आम नागरिकों को नुकसान न पहुंचे।&#8217;<br><br><strong>अमेरिका का ऑपरेशन &#8216;मिडनाइट हैमर&#8217;</strong><br>125 से ज्यादा अमेरिकी विमान शामिल- इनमें बमवर्षक, फाइटर जेट, टैंकर (तेल भरने वाले विमान), और जासूसी विमान शामिल थे। इसमें बी-2 स्टील्थ बमवर्षक विमानों का इस्तेमाल हुआ, जो मिसौरी से उड़कर आए थे। हर बमवर्षक ने 30,000 पाउंड वजन के खास बम गिराए, बंकर-बस्टर बम के तौर पर जाने जाते हैं। ये बम जमीन के भीतर छिपे ठिकानों को नष्ट करने में सक्षम हैं। ये हमला रात 6:40 बजे (पूर्वी समयानुसार) शुरू हुआ और सात बजे तक सभी विमान ईरानी हवाई क्षेत्र से निकल चुके थे। इस मिशन को 9/11 के बाद बी-2 बमवर्षकों की सबसे लंबी उड़ान बताया गया है।</p>



<p><strong>अमेरिका की सुरक्षा और पश्चिम एशिया में शांति के लिए कार्रवाई जरूरी&#8217;</strong><br>रक्षा मंत्री पीट हगसेथ ने बताया कि यह कार्रवाई अमेरिका की सुरक्षा और पश्चिम एशिया में शांति बनाए रखने के लिए जरूरी थी। उन्होंने कहा, &#8216;अगर ईरान शांति का रास्ता नहीं अपनाता, तो अमेरिका आगे भी सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।&#8217;&nbsp;इससे पहले, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस से एक बयान में कहा कि &#8216;हमने ईरान के परमाणु ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। अगर ईरान ने सुधरने की कोशिश नहीं की, तो और हमले किए जाएंगे।&#8217; ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका युद्ध नहीं चाहता, लेकिन ईरान की ओर से खतरे को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता।</p>



<p><strong>ईरानी सैनिकों या ईरानी लोगों को निशाना नहीं बनाया गया&#8217;</strong><br>अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा, &#8216;पिछली रात, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के तीन परमाणु प्रतिष्ठानों, फोर्डो, नतांज और इस्फहान पर मध्य रात्रि में सटीक हमला किया, ताकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नष्ट या गंभीर रूप से कम किया जा सके। यह एक अविश्वसनीय और जबरदस्त सफलता थी। हमारे कमांडर इन चीफ से हमें जो आदेश मिला वह केंद्रित और शक्तिशाली था, और यह स्पष्ट था कि हमने ईरानी परमाणु कार्यक्रम को तबाह कर दिया था। यह ध्यान देने योग्य है कि ऑपरेशन ने ईरानी सैनिकों या ईरानी लोगों को निशाना नहीं बनाया&#8217;।</p>



<p><strong>यह ट्रंप की रणनीति थी- रक्षा मंत्री</strong><br>अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, &#8216;यह ऑपरेशन राष्ट्रपति ट्रंप की योजना थी – साहसी और शानदार। इसने दुनिया को दिखा दिया कि अब अमेरिका की धमकी असली है। अगर राष्ट्रपति शांति की बात करते हैं, तो वह 60 दिन शांति और बातचीत का समय देते हैं। लेकिन उसके बाद, ईरान का परमाणु कार्यक्रम नहीं बचेगा।&#8217; </p>



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<div class="embed-twitter"><blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="en" dir="ltr"><a href="https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#WATCH</a> | US Secretary of Defence, Pete Hegseth says &quot;The operation President Trump planned was bold and it was brilliant. Showing the world that American deterrence is back. When this President speaks, the world should listen, and the US Military, we can back it up. The most… <a href="https://t.co/5MCpSKiXj4">pic.twitter.com/5MCpSKiXj4</a></p>&mdash; ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1936760104642052363?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">June 22, 2025</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></div>
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<p><strong>हमारा सहयोगी इस्राइल भी इस योजना में शामिल था&#8217;</strong><br>पीट हेगसेथ ने बताया कि इस ऑपरेशन की तैयारी में इस्राइल ने भी अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा, &#8216;इस हमले में दिशाभ्रम, धोखे की रणनीति और बहुत ही उच्च स्तरीय ऑपरेशनल सुरक्षा शामिल थी। हमारे बी2 बमवर्षक आए और गए, और दुनिया को भनक तक नहीं लगी।&#8217; उन्होंने आगे बताया कि इस ऑपरेशन में इतिहास में पहली बार एमओपी जैसे भारी बमों का इस्तेमाल किया गया। इन बमों का वजन करीब 30,000 पाउंड है, जो जमीन के नीचे बने बंकरों को भी तबाह कर सकते हैं।</p>



<p><strong>जनरल डैन केन का खुलासा- तीन परमाणु ठिकानों पर एक साथ हमला&#8217;</strong><br>संयुक्त चीफ ऑफ स्टाफ के प्रमुख जनरल डैन केन ने बताया कि यह हमला अमेरिकी सेंट्रल कमांड के जनरल एरिक कुरिल्ला के नेतृत्व में किया गया। उन्होंने कहा, &#8216;यह मिशन अमेरिका की वैश्विक ताकत और सटीक हमले की क्षमता को दर्शाता है। पूरी योजना बेहद गोपनीय थी, गिने-चुने लोग ही इसके बारे में जानते थे।&#8217; उन्होंने कहा कि शुक्रवार आधी रात को अमेरिका की धरती से सात बी-2 स्पिरिट बॉम्बर्स ने उड़ान भरी। इनमें से कुछ विमान जानबूझकर पैसिफिक महासागर की ओर भेजे गए, ताकि ईरान को भ्रमित किया जा सके। असली स्ट्राइक टीम पूर्व की दिशा से चुपचाप ईरानी सीमा में घुसी।</p>



<p><strong>बमवर्षक के साथ मिसाइलों से भी हमला</strong><br>ईरान पर हमले के लिए सिर्फ बमवर्षक ही नहीं, अमेरिका ने टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों का भी इस्तेमाल किया। दर्जनों मिसाइलें ईरान के अलग-अलग ठिकानों पर दागी गईं। बता दें कि, टॉमहॉक मिसाइलें दूर से लॉन्च की जा सकती हैं और बेहद सटीक तरीके से निशाना बनाती हैं।</p>



<p><strong>यह अमेरिका की ताकत का प्रदर्शन था- जनरल डैन</strong><br>जनरल डैन ने कहा, &#8217;18 घंटे की लंबी उड़ान, हवा में कई बार ईंधन भरवाना, बिल्कुल सटीक समय पर फॉर्मेशन बनाना – यह सब दुनिया की कोई और सेना नहीं कर सकती। इस हमले में इतनी गोपनीयता थी कि ईरानी रक्षा प्रणाली को पता ही नहीं चला कि हमला हो रहा है।&#8217; उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक अमेरिका की ओर से कोई नुकसान की जानकारी नहीं है, और ईरान की सेना ने कोई जवाबी हमला नहीं किया।</p>



<p><strong>&#8216;ऑपरेशन में हवा, समुद्र, साइबर और अंतरिक्ष से हमला&#8217;</strong><br>रक्षा मंत्री हेगसेथ ने आगे बताया कि ईरानी हवाई क्षेत्र में घुसने से कुछ देर पहले अमेरिका की एक पनडुब्बी ने इस्फहान शहर पर टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें दागीं। ये हमले ईरान की सतह पर मौजूद रडार और मिसाइल सिस्टम को नष्ट करने के लिए किए गए थे। इस हमले में शामिल चौथे और पांचवें पीढ़ी के लड़ाकू विमानों ने आगे जाकर संभावित खतरे को साफ किया और रास्ता तैयार किया। इस ऑपरेशन में अमेरिकी अंतरिक्ष कमांड, अमेरिकी साइबर कमांड, अमेरिकी रणनीतिक कमांड और यूरोपियन कमांड जैसे कई बड़े सैन्य विभाग एक साथ शामिल हुए।</p>



<p><strong>हम युद्ध नहीं चाहते, लेकिन अगर चुनौती दी गई तो पीछे नहीं हटेंगे&#8217;</strong><br>आखिरी में अमेरिकी रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि अमेरिका युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर उसके नागरिकों, सहयोगियों या हितों को खतरा हुआ तो वह तुरंत कार्रवाई करेगा। उन्होंने ईरान को चेतावनी दी कि राष्ट्रपति ट्रंप का संदेश बिल्कुल साफ है –&#8217;या तो शांति का रास्ता चुनो, या परमाणु कार्यक्रम को खत्म होते देखो।&#8217;</p>



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		<title>&#8216;मैं ईरान पर हमला करना नहीं चाहता लेकिन यह जरूरी हुआ तो इसके लिए तैयार&#8217;; ट्रंप ने खामनेई को दी धमकी</title>
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		<pubDate>Thu, 19 Jun 2025 05:10:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[International]]></category>
		<category><![CDATA[Israel Iran Conflict]]></category>
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					<description><![CDATA[ईरान-इस्राइल तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को खुली धमकी दी है। इसके तहत ट्रंप ने कहा कि वह युद्ध नहीं चाहते, लेकिन जरूरत पड़ी तो ईरान पर कार्रवाई को तैयार हैं। ट्रंप ने ईरान से परमाणु कार्यक्रम खत्म करने की अपील की और कहा कि अगला हफ्ता अहम [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>ईरान-इस्राइल तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को खुली धमकी दी है। इसके तहत ट्रंप ने कहा कि वह युद्ध नहीं चाहते, लेकिन जरूरत पड़ी तो ईरान पर कार्रवाई को तैयार हैं। ट्रंप ने ईरान से परमाणु कार्यक्रम खत्म करने की अपील की और कहा कि अगला हफ्ता अहम होगा। साथ ही उन्होंने खामनेई को भी तंजभरे लहजे में शुभकामनाएं दीं।</p>



<p>ईरान इस्राइल के बीच पिछले छह दिनों से जारी जंग हर बीतते दिन के साथ बढ़ती ही जा रही है। अमेरिका भी इस जंग में कूद चुका है। वहीं, अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वह ईरान पर हमला नहीं करना चाहते हैं, लेकिन यदि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने के लिए ऐसा करना आवश्यक हुआ तो वह कार्रवाई के लिए तैयार हैं।</p>



<p>ट्रंप ने ओवल ऑफिस में संवाददाताओं से कहा कि मैं युद्ध नहीं करना चाहता हूं। लेकिन यदि युद्ध और परमाणु हथियार रखने के बीच चुनाव करना हो, तो आप जानते हैं कि आपको क्या करना चाहिए। इस दौरान उन्होंने कहा कि ईरान के लिए अपना परमाणु कार्यक्रम छोड़ने में अभी भी देर नहीं हुई है। <br><br>इस बीच, वॉल स्ट्रीट जर्नल ने इस मामले के परिचित लोगों के हवाले से बडी जानकारी दी है। उसने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार देर रात ईरान के लिए हमले की योजना को मंजूरी दे दी है। हालांकि उन्होंने यह देखने के लिए कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है कि क्या तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ देगा।&nbsp;</p>



<p><strong>मैं ऐसा कर सकता हूं- ट्रंप</strong><br>वहीं, ईरान की स्थिति पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मेरे पास हर चीज के लिए एक योजना है, लेकिन हम देखेंगे कि क्या होता है। उन्हें सौदा करना चाहिए था। मेरे पास उनके लिए एक बढ़िया सौदा था। हमने 60 दिनों तक इस बारे में बात की और अंत में, उन्होंने इसे न करने का फैसला किया। अब वे चाहते हैं कि वे समझौता करते, लेकिन इसमें देर हो चुकी है। हालांकि वे (ईरान) मिलना चाहते हैं, और वे व्हाइट हाउस आना चाहते हैं। मैं ऐसा कर सकता हूं, कुछ भी हो सकता है। मेरा मतलब है, कोई नहीं जानता कि मैं क्या करने जा रहा हूं। &nbsp;ट्रंप ने कहा कि जब तक कुछ खत्म नहीं हो जाता, तब तक कुछ भी खत्म नहीं होता।, लेकिन अगला सप्ताह बहुत बड़ा होने वाला है।&nbsp;यह भयानक स्थिति है। मुझे इतनी मौतें और विनाश देखना पसंद नहीं है।&nbsp;</p>



<p><strong>खामनेई की इनकार पर कसा तंज</strong><br>इस दौरान ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई द्वारा ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण करने के उनके आह्वान को मानने से इंकार करने पर भी कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मैं खामनेई को शुभकामनाएं देता हूं।&nbsp;</p>



<p><strong>अमेरिका ने अपने गैर-जरूरी राजनयिकों और उनके परिवारों को इस्राइल से निकाला</strong><br>इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और संभावित संघर्ष में अमेरिका की सीधी भागीदारी की आशंका को देखते हुए अमेरिका ने इस्राइल स्थित अपने दूतावास से गैर-जरूरी कर्मचारियों और उनके परिवारों की निकासी शुरू कर दी है। मामले में अमेरिकी विदेश विभाग ने बताया कि ऑथराइज्ड डिपार्चर की स्थिति के तहत अमेरिकी दूतावास के कुछ कर्मी अब इस्राइल छोड़ रहे हैं। इस योजना के तहत जो लोग जरूरी नहीं हैं, उन्हें सरकारी खर्चे पर देश से बाहर भेजा जा सकता है।</p>



<p><strong>अमेरिकी अधिकारियों ने दी जानकारी</strong><br>इसके साथ ही दो अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि बुधवार को सरकारी विमान से कुछ राजनयिकों और उनके परिजनों को इस्राइल से निकाला गया, जिन्होंने स्वयं जाने की इच्छा जताई थी। इसके कुछ ही समय बाद इस्राइल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि अमेरिकी नागरिकों के लिए भी विशेष फ्लाइट और जहाज की व्यवस्था की जा रही है।</p>



<p>हालांकि, यह नहीं बताया गया कि कुल कितने लोगों को अब तक निकाला गया है। अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर यह जानकारी दी क्योंकि मामला संवेदनशील है। यह कदम इस्राइल और ईरान के बीच लगातार बिगड़ते हालात और क्षेत्र में युद्ध के खतरे को देखते हुए उठाया गया है।</p>



<p>गौरतलब है कि इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को दावा किया कि ईरान अब अमेरिका से बातचीत करना चाहता है। हालांकि ट्रंप ने इस प्रस्ताव को ठुकराते हुए कहा, &#8216;मैंने पहले ही कह दिया था कि अब बहुत देर हो चुकी है।&#8217; ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और इस्राइल के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है और अमेरिका की भूमिका को लेकर दुनिया भर में अटकलें लगाई जा रही हैं।</p>



<p><strong>खामनेई की अमेरिका को गंभीर चेतावनी, कहा-सरेंडर नहीं करेंगे</strong><br>वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बिना शर्त सरेंडर की चेतावनी &nbsp;खारिज करते हुए ईरान के सुप्रीम नेता अयातुल्ला खामनेई ने धमकी दी कि अमेरिका युद्ध में कूदा, तो गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। इस बीच, इस्राइली सेना ने तेहरान में यूरेनियम सेंट्रीफ्यूज बनाने वाले संयंत्र एवं मिसाइल उपकरण की फैक्टरी को निशाना बनाया है। ईरान ने भी तेल अवीव व हाइफा समेत कई शहरों में मिसाइलें दागीं।</p>



<p><strong>ईरान के सरकारी टीवी पर एंकर ने खामनेई के बयान को पढ़कर सुनाया, खुद सामने नहीं आए</strong><br>शुक्रवार के बाद अपने पहले बयान में 86 वर्षीय खामनेई ने कहा, ईरान पर शांति या युद्ध थोपा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, ईरानी राष्ट्र कभी आत्मसमर्पण नहीं करेगा। अमेरिकियों को पता होना चाहिए कि किसी भी अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप से उसे अपूरणीय क्षति उठानी होगी। खामनेई ने कहा, हमें आतंकी यहूदी शासन को कड़ा जवाब देना होगा। हम यहूदियों पर कोई दया नहीं दिखाएंगे। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा कि अगर अमेरिका हस्तक्षेप करता है तो क्षेत्र में व्यापक युद्ध छिड़ जाएगा।</p>



<p><strong>इस्राइली विमानों ने रातभर बम गिराए</strong><br>संघर्ष के छठे दिन इस्राइली वायुसेना ने केरमानशाह एयरबेस पर पांच ईरानी एएच-1 हेलिकॉप्टरों को तबाह कर दिया। इस्राइल के 50 लड़ाकू विमानों ने तेहरान में 20 लक्ष्यों को निशाना बनाया। इसमें मिसाइलों के लिए कच्चे माल, उपकरण और विनिर्माण प्रणालियों का उत्पादन करने वाले प्रतिष्ठान शामिल हैं।</p>
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		<title>इस्राइल ने ईरानियों को अराक रिएक्टर का इलाका खाली करने को कहा, तेहरान में किए हमले</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 Jun 2025 04:46:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[International]]></category>
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					<description><![CDATA[ईरान और इस्राइल के बीच बीते छह दिन से संघर्ष जारी है। हर बीतते दिन के साथ दोनों पुराने दुश्मनों के बीच संघर्ष और तेज होता जा रहा है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को झटका देते हुए ईरान के सर्वोच्च नेता खामनेई ने आत्मसमर्पण से इनकार कर दिया है। वहीं ट्रंप ने भी [&#8230;]]]></description>
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<p>ईरान और इस्राइल के बीच बीते छह दिन से संघर्ष जारी है। हर बीतते दिन के साथ दोनों पुराने दुश्मनों के बीच संघर्ष और तेज होता जा रहा है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को झटका देते हुए ईरान के सर्वोच्च नेता खामनेई ने आत्मसमर्पण से इनकार कर दिया है। वहीं ट्रंप ने भी एक बार फिर ईरान पर हमले की धमकी दी है। वहीं दूसरी ओर भारत ने भी ईरान में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए ऑपरेशन सिंधू शुरू कर दिया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">तेहरान में इस्राइली वायुसेना के हमले</h3>



<p>इस्राइली सेना ने कहा है कि उनकी वायुसेना ईरान की राजधानी तेहरान में हवाई हमले कर रही है। ईरानी मीडिया ने कहा है कि सेंट्रल तेहरान में एयर डिफेंस सिस्टम को एक्टिविट कर दिया गया है।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading">इस्राइल ने ईरानियों को अराक रिएक्टर का इलाका खाली करने को कहा, तेहरान में किए हवाई हमले</h3>



<p>इस्राइली सेना ने ईरान के लोगों को अराक और खोनदाब शहरों को खाली करने का निर्देश दिया है। दरअसल अराक और खोनदाब शहरों में ईरान के हैवी वाटर परमाणु रिएक्टर हैं। ये हैवी वाटर परमाणु रिएक्टर्स को ठंडा करने में मदद करते हैं।</p>



<p><strong>इस्राइली सेना ने घर को निशाना बनाया, फलस्तीनी बड़ी संख्या में हताहत</strong><br>मध्य गाजा में इस्राइल के हमले में 100 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर है। अल-अक्सा शहीद अस्पताल और अल-अवदा अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक 100 से अधिक फलस्तीनी लोग घायल हुए हैं। गाजा शहर के ज़ेइतून इलाके में इस्राइली सेना ने एक घर पर बमबारी की, जिससे बड़ी संख्या में फलस्तीनी हताहत हुए।</p>



<p><strong>ईरान के साथ गाजा में भी हिंसक संघर्ष का दौर जारी</strong><br>पश्चिम एशिया में ईरान के साथ जारी टकराव के साथ-साथ इस्राइल और हमास का हिंसक संघर्ष भी जारी है। फलस्तीनी युवाओं के कुद्स न्यूज नेटवर्क और फलस्तीनी सूचना केंद्र की रिपोर्ट के मुताबिक मध्य गाजा के नुसेरात में गाजा ब्रिज के पास इस्राइली सेना ने हमले किए। इस हमले में 16 फलस्तीनी मारे गए, जबकि दर्जनों घायल हुए हैं।</p>



<p><strong>ईरान के खिलाफ युद्ध का समर्थन कर रहे 80 प्रतिशत से अधिक यहूदी इस्राइली</strong><br>एक रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 83 फीसदी यहूदी इस्राइली लोगों ने पश्चिम एशिया के एक अन्य देश ईरान के खिलाफ युद्ध का समर्थन कर रहे हैं। यहां तक कि एविगडोर लीबरमैन जैसे दक्षिणपंथी कट्टरपंथी नेता भी अब कह रहे हैं कि नेतन्याहू सही काम कर रहे हैं। लीबरमैन ने 2018 में सरकार की नीतियों से असंतुष्ट होकर अपना कैबिनेट पद छोड़ दिया था। गाजा में युद्ध के कारण पिछले साल नेतन्याहू के मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने वाले बेनी गैंट्ज ने भी कहा है कि ईरान के मामले में केवल सही या गलत का फैसला होना है, और इस्राइल सही है। बता दें कि पीएम नेतन्याहू ने बीते शुक्रवार यानी 13 जून को इस्राइली सेना को ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले का आदेश दिया।</p>



<p><strong>तेहरान का आंतरिक सुरक्षा मुख्यालय नष्ट कर दिया गया: इस्राइल का दावा</strong><br>इस बीच, इस्राइल के रक्षा मंत्री ने दावा किया है कि ताजा मिसाइल हमलों में तेहरान स्थित ईरान के आंतरिक सुरक्षा मुख्यालय और रेड क्रिसेंट को नष्ट कर दिया गया है।</p>



<p><strong>इस्राइल-ईरान तनाव पर भारत और इस्राइल के रक्षा अधिकारियों के बीच बातचीत</strong><br>इस्राइल और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच बुधवार को भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह को इस्राइली रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक मेजर जनरल (रिटा.) आमिर बारम का फोन आया। इस बातचीत में मौजूदा हालात को लेकर जानकारी साझा की गई। भारतीय रक्षा मंत्रालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर बताया कि रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह को आज इस्राइली रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक मेजर जनरल (रि.) आमिर बारम का फोन आया। उन्होंने वर्तमान स्थिति की जानकारी दी।</p>



<p><strong>भारत लौटीं छात्र बोली–&nbsp;मिसाइलें सिर के ऊपर से गुजरती थीं</strong><br>ईरान में बिगड़ते हालात के बीच वहां फंसे 110 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालकर भारत लाया गया। सभी को लेकर एक विशेष फ्लाइट दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरी। इन लोगों में शामिल यासिर गफ्फार नाम के छात्र ने बताया कि हमने रात में मिसाइलों को ऊपर से जाते देखा और ज़ोरदार धमाकों की आवाजें सुनीं। डर का माहौल था, लेकिन अब भारत पहुंचकर राहत मिली है।</p>



<p>यासिर ने कहा कि उन्होंने अपने सपनों को अभी नहीं छोड़ा है और हालात सुधरने पर वापस ईरान लौटेंगे। सरकार की इस कार्रवाई के लिए छात्र और उनके परिवारों ने आभार जताया है। ईरान और इस्राइल के बीच लगातार बढ़ रहे तनाव के चलते भारत अपने नागरिकों को वहां से सुरक्षित निकालने में जुटा है।</p>



<p><strong>ईरान से दिल्ली पहुंचे छात्र ने सुनाई आपबीती</strong><br>ईरान में हालात बिगड़ते देख भारत सरकार ने वहां फंसे भारतीय नागरिकों को निकालने का अभियान तेज कर दिया है। बुधवार को 110 भारतीय नागरिकों को लेकर एक विशेष फ्लाइट दिल्ली पहुंची। इस फ्लाइट में ईरान के उर्मिया यूनिवर्सिटी के छात्र भी शामिल थे। मामले में&nbsp; एक छात्र ने बताया कि&nbsp;हर दिन हालात और खराब होते जा रहे हैं, खासतौर पर तेहरान में स्थिति बेहद गंभीर है। सभी भारतीय छात्रों को वहां से निकाला जा रहा है। भारतीय अधिकारी अच्छा काम कर रहे हैं। हम सभी को सुरक्षित जगह भेजा जा रहा है। छात्र ने बताया कि उन्हें पहले यूनिवर्सिटी से निकालकर आर्मेनिया ले जाया गया, फिर वहां से कतर भेजा गया। अंत में वे भारत पहुंचे।</p>



<p><strong>मध्य-पूर्व में तनाव खत्म करने के लिए जिनेवा में कल होगी बैठक</strong><br>परमाणु कार्यक्रम को लेकर इस्राइल और ईरान में&nbsp;बढ़ते तनाव के बीच&nbsp;जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन के विदेश मंत्री शुक्रवार को जिनेवा में ईरान के विदेश मंत्री के साथ अहम परमाणु बातचीत करेंगे।&nbsp;जर्मन राजनयिक सूत्रों की माने तो&nbsp;बैठक से पहले यूरोपीय देशों के मंत्री यूरोपीय संघ की प्रमुख राजनयिक काजा कैलास से जर्मनी के स्थायी मिशन में मुलाकात करेंगे, फिर सभी मिलकर ईरान के विदेश मंत्री से संयुक्त बातचीत करेंगे।</p>
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		<title>खामनेई की अमेरिका को गंभीर चेतावनी, कहा-सरेंडर नहीं करेंगे</title>
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		<pubDate>Wed, 18 Jun 2025 11:41:00 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Israel Iran Conflict]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बिना शर्त सरेंडर की चेतावनी  खारिज करते हुए ईरान के सुप्रीम नेता अयातुल्ला खामनेई ने धमकी दी कि अमेरिका युद्ध में कूदा, तो गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। इस बीच, इस्राइली सेना ने तेहरान में यूरेनियम सेंट्रीफ्यूज बनाने वाले संयंत्र एवं मिसाइल उपकरण की फैक्टरी को निशाना बनाया है। ईरान ने [&#8230;]]]></description>
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<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बिना शर्त सरेंडर की चेतावनी  खारिज करते हुए ईरान के सुप्रीम नेता अयातुल्ला खामनेई ने धमकी दी कि अमेरिका युद्ध में कूदा, तो गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। इस बीच, इस्राइली सेना ने तेहरान में यूरेनियम सेंट्रीफ्यूज बनाने वाले संयंत्र एवं मिसाइल उपकरण की फैक्टरी को निशाना बनाया है। ईरान ने भी तेल अवीव व हाइफा समेत कई शहरों में मिसाइलें दागीं।</p>



<p>ईरान और इस्राइल के बीच बीते छह दिन से संघर्ष जारी है। हर बीतते दिन के साथ दोनों पुराने दुश्मनों के बीच संघर्ष और तेज होता जा रहा है। अब इस्राइल ने ईरान के अराक हैवी वाटर परमाणु रिएक्टर इलाके को खाली करने की चेतावनी दी है।</p>



<p>ईरान और इस्राइल के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। लगातार सातवें दिन दोनों देशों के बीच हमले जारी रहे। इस बीच इस्राइल ने ईरान के अराक हैवी वाटर परमाणु रिएक्टर पर हमले की तैयारी की है। इस्राइल की सेना ने ईरान के लोगों को अराक हैवी वाटर परमाणु रिएक्टर का इलाका खाली करने के लिए कहा है। एक्स पर पोस्ट में दी गई चेतावनी में एक सैटेलाइट इमेज साझा की गई। इसमें हमलों से पहले दी जाने वाली चेतावनियों की तरह लाल घेरे में परमाणु रिएक्टर संयंत्र दिखाया गया। <br><br>अराक हैवी वाटर परमाणु रिएक्टर तेहरान से 250 किलोमीटर दूर दक्षिण-पश्चिम में है। यह परमाणु रिएक्टरों को ठंडा करने में मदद करता है। साथ ही यह प्लूटोनियम का भी  उत्पादन करता है। इसका परमाणु हथियारों में उपयोग किया जा सकता है। इससे ईरान को यूरेनियम के अलावा बम बनाने का एक और रास्ता मिल जाएगा।<br><br>2019 में ईरान ने हैवी वाटर रिएक्टर के दूसरे सर्किट को शुरू किया। उस समय ब्रिटेन प्लूटोनियम की मात्रा को सीमित करने के लिए अराक रिएक्टर को दोबारा डिजाइन करने में मदद कर रहा था। इसके बाद 2018 में ब्रिटेन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के परमाणु समझौते से अमेरिका को एकतरफा वापस लेने के फैसले के बाद परियोजना से हट गया था। संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने इस्राइल से ईरानी परमाणु स्थलों पर हमला न करने के लिए कहा है।&nbsp;</p>



<p><strong>इस्राइली विमानों ने रातभर बम गिराए</strong><br>संघर्ष के छठे दिन इस्राइली वायुसेना ने केरमानशाह एयरबेस पर पांच ईरानी एएच-1 हेलिकॉप्टरों को तबाह कर दिया। इस्राइल के 50 लड़ाकू विमानों ने तेहरान में 20 लक्ष्यों को निशाना बनाया। इसमें मिसाइलों के लिए कच्चे माल, उपकरण और विनिर्माण प्रणालियों का उत्पादन करने वाले प्रतिष्ठान शामिल हैं।</p>



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