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	<title>Technology &#8211; RNSNS News</title>
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		<title>BrahMos Missile: इंडोनेशिया के बाद अब वियतनाम को ब्रह्मोस देगा भारत, 5800 करोड़ के सौदे की संभावना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 01 May 2026 03:53:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[BrahMos Missile : प्रस्तावित सौदे में ब्रह्मोस मिसाइल का तट-आधारित जहाज-रोधी संस्करण शामिल है। यह दक्षिण चीन सागर में वियतनाम की रक्षा क्षमताओं को जरूरी मजबूती देगा। भारत और वियतनाम के बीच तमाम रक्षा समझौतों के बाद ब्रह्मोस का सौदा दोनों देशों के सैन्य सहयोग को एक नई ऊंचाई देगा। भारत और वियतनाम के बीच [&#8230;]]]></description>
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<p>BrahMos Missile : प्रस्तावित सौदे में ब्रह्मोस मिसाइल का तट-आधारित जहाज-रोधी संस्करण शामिल है। यह दक्षिण चीन सागर में वियतनाम की रक्षा क्षमताओं को जरूरी मजबूती देगा। भारत और वियतनाम के बीच तमाम रक्षा समझौतों के बाद ब्रह्मोस का सौदा दोनों देशों के सैन्य सहयोग को एक नई ऊंचाई देगा।<br><br>भारत और वियतनाम के बीच सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का सौदा जल्द हकीकत बनने जा रहा है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम की अगले हफ्ते होने वाली तीन दिवसीय भारत यात्रा के दौरान करीब 5,800 करोड़ रुपये के इस समझौते पर मुहर लगने की संभावना है।<br><br>विदेश मंत्रालय के मुताबिक, राष्ट्रपति तो लाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बुलावे पर 5 से 7 मई तक भारत यात्रा पर आएंगे। इस दौरान पीएम मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय वार्ता होगी। राष्ट्रपति लाम के साथ वियतनाम के कई मंत्री और एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी आ रहा है, जो मुंबई में आर्थिक समझौतों पर चर्चा करेगा। अपनी यात्रा के दौरान वियतनाम का प्रतिनिधिमंडल बोधगया भी जाएगा। यह दौरा भारत-वियतनाम व्यापक रणनीतिक साझेदारी का एक दशक पूरा होने के उपलक्ष्य में हो रहा है, जिसकी आधारशिला साल 2016 में पीएम मोदी की वियतनाम यात्रा के दौरान रखी गई थी।<br><br><strong>वियतनान के ताकतवर नेता हैं तो लाम</strong><br>तो लाम वियतनाम की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव और राष्ट्रपति, दोनों पदों पर आसीन हैं। वह दशकों में वियतनाम के सबसे प्रभावशाली नेता बन गए हैं। इसी महीने राष्ट्रपति बनने के बाद तो लाम का इतनी जल्दी भारत आना यह दर्शाता है कि हनोई अपनी सुरक्षा जरूरतों के लिए नई दिल्ली को कितना महत्वपूर्ण मानता है।</p>



<p><strong>समुद्र में बढ़ेगी ताकत</strong><br>प्रस्तावित सौदे में ब्रह्मोस मिसाइल का तट-आधारित जहाज-रोधी संस्करण शामिल है। यह दक्षिण चीन सागर में वियतनाम की रक्षा क्षमताओं को जरूरी मजबूती देगा। भारत और वियतनाम के बीच तमाम रक्षा समझौतों के बाद ब्रह्मोस का सौदा दोनों देशों के सैन्य सहयोग को एक नई ऊंचाई देगा।&nbsp;ब्रह्मोस मिसाइल के इस निर्यात को रूस ने अपनी मंजूरी दे दी है। ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसका विकास भारत और रूस ने साझा तौर पर किया है।</p>



<p><strong>फिलीपीन को ब्रह्मोस देने का क्या है सामरिक महत्व?</strong><br>फिलीपीन भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला दुनिया का पहला देश है। हाल ही में ब्रह्मोस का ऐसा ही समझौता इंडोनेशिया से भी हुआ है। इन मिसाइलों को इंडोनेशियाई युद्ध पोतों पर तैनात किया जाएगा, जिससे दक्षिण चीन सागर में इंडोनेशिया की स्थिति मजबूत होगी। अब फिलीपीन और इंडोनेशिया के बाद वियतनाम इस कतार में तीसरा बड़ा दक्षिण-पूर्व एशियाई देश होगा। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में ब्रह्मोस की बढ़ती मांग चीन के समुद्री प्रभाव के बीच क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बनाए रखने में मददगार होगी।</p>
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		<title>एपल को मिला नया सीईओ: टिम कुक पद से देंगे इस्तीफा, कंपनी के हार्डवेयर प्रमुख जॉन टर्नस संभालेंगे कमान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Apr 2026 04:21:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Technology]]></category>
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					<description><![CDATA[दिग्गज तकनीकी कंपनी एपल को नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मिल गया है। इसके साथ ही टिम कुक जल्द ही सीईओ के पद से इस्तीफा देंगे। हालांकि, वह कंपनी में सीमित भूमिका में बने रहेंगे। उनकी जगह कंपनी की कमान जॉन टर्नस संभालेंगे, जो अब तक कंपनी में हार्डवेयर इंजीनियरिंग प्रमुख रहे हैं। एपल के [&#8230;]]]></description>
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<p>दिग्गज तकनीकी कंपनी एपल को नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मिल गया है। इसके साथ ही टिम कुक जल्द ही सीईओ के पद से इस्तीफा देंगे। हालांकि, वह कंपनी में सीमित भूमिका में बने रहेंगे। उनकी जगह कंपनी की कमान जॉन टर्नस संभालेंगे, जो अब तक कंपनी में हार्डवेयर इंजीनियरिंग प्रमुख रहे हैं। </p>



<p>एपल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) टिम कुक अपने पद से इस्तीफा देने जा रहे हैं। स्टीव जॉब्स के बाद उन्होंने यह पद संभाला था। अब उनका लगभग 15 साल का कार्यकाल खत्म हो रहा है।<br><br><strong>जॉन टर्नस बनेंगे एपल के नए सीईओ</strong><br>इस दौरान कंपनी का बाजार मूल्य बहुत तेजी से बढ़ा। आईफोन के दौर में एपल का मूल्य 3.6 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया। टिम कुक (65 वर्षीय) एक सितंबर से सीईओ के पद से हट जाएंगे। उनकी जगह कंपनी के हार्डवेयर इंजीनियरिंग प्रमुख जॉन टर्नस नए सीईओ बनेंगे।</p>



<p><strong>कंपनी के कामकाज में सीमित भूमिका निभाते रहेंगे कुक</strong><br>हालांकि, टिम कुक कंपनी से पूरी तरह नहीं हटेंगे। वह एपल में कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में जुड़े रहेंगे और कंपनी के कामकाज में भूमिका निभाते रहेंगे। यह बदलाव अमेजन के जेफ बेजोस और नेटफ्लिक्स के रीड हेस्टिंग्स की तरह है। उन्होंने भी सीईओ पद छोड़ने के बाद कंपनी में सीमित भूमिका निभाई थी।</p>



<p>टिम कुक को स्टीव जॉब्स जैसी दूरदर्शिता वाला तकनीकी दिग्गज नहीं माना गया। लेकिन उन्होंने जॉब्स द्वारा बनाए गए आईफोन और अन्य तकनीकी नवाचारों का उपयोग किया। इसके जरिए उन्होंने एपल को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। एपल कंपनी 1990 के दशक में लगभग दिवालिया होने की स्थिति में थी। कुक के नेतृत्व में दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल हो गई।</p>



<p><strong>भारत में एपल पर सख्ती, लग सकता है 3.56 लाख करोड़ का जुर्माना</strong><br>उधर, आईफोन एप्स मार्केट में दबदबे वाली स्थिति का गलत इस्तेमाल करने के मामले में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने एपल के खिलाफ जांच तेज करते हुए अंतिम सुनवाई की तारीख 21 मई तय कर दी है। यह कदम एपल की ओर से वित्तीय डाटा देने से लगातार इन्कार करने और जांच के निष्कर्षों पर उसकी आपत्तियों के बाद उठाया गया है। मामले में दोषी पाए जाने पर एपल पर 38 अरब डॉलर (करीब 3.56 लाख करोड़ रुपये) तक का भारी-भरकम जुर्माना लग सकता है।</p>



<p><strong>सीसीआई न अपने आदेश में क्या कहा?</strong><br>भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने 8 अप्रैल के एक आदेश में कहा, एंटीट्रस्ट मामले में जांच के लिए एपल से कुछ वित्तीय जानकारियां मांगी गई थीं। लेकिन, अमेरिकी कंपनी अक्तूबर, 2024 से अब तक ये विवरण जमा करने में नाकाम रही। साथ ही, उसने दिल्ली हाई कोर्ट में भारत के एंटीट्रस्ट जुर्माना कानून को चुनौती दी है। सूत्रों का कहना है कि एंटीट्रस्ट जुर्माना कानून को चुनौती देने सहित एपल का रुख सीसीआई को तेजी से आगे बढ़ने के लिए मजबूर कर रहा है। नियामक एपल के इन कदमों को जांच में देरी करने की कोशिश के तौर पर देख रहा है।&nbsp;</p>



<p><strong>मामला कहां से शुरू हुआ?</strong><br>यह मामला 2021 में तब शुरू हुआ था, जब मैच ग्रुप्स और कई भारतीय स्टार्टअप्स ने एपल के कारोबारी तरीकों का विरोध किया था। मामले की जांच के बाद सीसीआई के जांचकर्ताओं ने 2024 में एक रिपोर्ट में कहा, एपल ने ऐप्स मार्केट में अपनी दबदबे वाली स्थिति का गलत फायदा उठाया। डेवलपर्स को अनिवार्य इन-एप पर्चेज (आईएपी) सिस्टम इस्तेमाल करने के लिए मजबूर किया। ये कदम बाजार में प्रतिस्पर्धा कम करते हैं।</p>



<p>मामले से जुड़े वकीलों का कहना है कि अंतिम सुनवाई की तारीख तय होना इस बात का संकेत है कि सीसीआई अपना रुख सख्त कर रहा है। दुआ एसोसिएट्स में एंटीट्रस्ट पार्टनर गौतम शाही ने कहा, एपल के पास अब भी मौका है कि वह ऑडिटर के सर्टिफिकेट के साथ अपने वित्तीय विवरण जमा करे और सुनवाई के दौरान इन डाटा के आधार पर जुर्माने की रकम पर बहस करे, जिसे कंपनी के वैश्विक टर्नओवर के आधार पर तय किया गया है। अगर वह ऐसा करने में नाकाम रहती है, तो जुर्माने की रकम पर उसकी दलीलें सीमित हो जाएंगी।</p>



<p><br><br></p>
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		<title>आर्टेमिस II: इंसान ने चांद के उस हिस्से का किया दीदार जिसे पहले किसी ने नहीं देखा; अपोलो-13 का रिकॉर्ड टूटा</title>
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		<pubDate>Tue, 07 Apr 2026 04:01:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नासा का आर्टेमिस II मिशन ने एक नया इतिहास बना दिया है। आर्टेमिस मिशन के तहत अब इंसान ने चांद के उस हिस्से का किया दीदार जिसे पहले किसी ने नहीं देखा था।इस मिशन ने इंसानों को पृथ्वी से अब तक की सबसे ज्यादा दूरी तय कराई। साथ ही अपोलो 13 का रिकॉर्ड भी तोड़ [&#8230;]]]></description>
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<p>नासा का आर्टेमिस II मिशन ने एक नया इतिहास बना दिया है। आर्टेमिस मिशन के तहत अब इंसान ने चांद के उस हिस्से का किया दीदार जिसे पहले किसी ने नहीं देखा था।इस मिशन ने इंसानों को पृथ्वी से अब तक की सबसे ज्यादा दूरी तय कराई। साथ ही अपोलो 13 का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया।</p>



<p>चांद मिशन के इतिहास में एक नया रिकॉर्ड बन गया है। नासा के मिशन आर्टेमिस II ने इंसानों को पृथ्वी से अब तक की सबसे ज्यादा दूरी तक पहुंचा दिया है। इस मिशन ने अपोलो 13 का पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। नासा की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार&nbsp;जैसे ही अंतरिक्ष यात्री चांद के पास पहुंचे, उनके सामने खिड़कियों से चांद का शानदार नजारा दिखाई देने लगा। खास बात यह रही कि इस दौरान उन्हें चांद के उस हिस्से (फार साइड) को देखने का मौका मिला, जिसे पहले इंसानों ने कभी इस तरह करीब से नहीं देखा था।</p>



<p>यह पूरा फ्लाईबाय करीब छह घंटे तक चला, जो इस मिशन का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है। इस मिशन में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं, जो मिलकर इस ऐतिहासिक यात्रा को अंजाम दे रहे हैं। यह मिशन नासा की उस बड़ी योजना का हिस्सा है, जिसके तहत एक बार फिर इंसानों को चांद पर उतारने की तैयारी की जा रही है। खास तौर पर चांद के साउथ पोल (दक्षिणी ध्रुव) पर अगले दो साल में इंसानों के कदम रखने का लक्ष्य रखा गया है।</p>



<figure class="wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter wp-block-embed-twitter"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<div class="embed-twitter"><blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="en" dir="ltr">LIVE: Watch with us as the Artemis II astronauts make their closest approach to the Moon, traveling farther from Earth than ever before. <a href="https://t.co/Zpy7GdTqA8">https://t.co/Zpy7GdTqA8</a></p>&mdash; NASA (@NASA) <a href="https://twitter.com/NASA/status/2041199374827409801?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">April 6, 2026</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></div>
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<p><br><strong>तोड़ा अपोलो 13 का रिकॉर्ड, समझिए कैसे?</strong><br>बता दें कि&nbsp;नासा के आर्टेमिस&nbsp;II मिशन के अंतरिक्ष यात्री अब पृथ्वी से सबसे दूर पहुंचने वाले इंसान बन गए हैं। सोमवार को दोपहर 1:57 बजे ईडीटी, (भारतीय समयानुसार रात लगभग 11:27&nbsp;बजे)&nbsp;उन्होंने 1970 में अपोलो 13 द्वारा बनाया गया रिकॉर्ड तोड़ दिया। नासा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में बताया कि&nbsp;उनका यह मिशन चांद के दूरवर्ती हिस्से (फार साइड) के चारों ओर यात्रा करता हुआ उन्हें पृथ्वी से अधिकतम 2,52,752 मील की दूरी तक ले जाएगा।</p>



<p><strong>कब होनी है पृथ्वी पर वापसी?</strong><br>यह मिशन न केवल रिकॉर्ड तोड़ने वाला है, बल्कि चांद के उस हिस्से को देखने का भी मौका देगा, जिसे इंसान पहले कभी इतनी करीब से नहीं देख पाए। करीब 10 दिन के इस मिशन के बाद 10 अप्रैल को अंतरिक्ष यान प्रशांत महासागर में उतरकर पृथ्वी पर लौटेगा। नासा का यह मिशन भविष्य में चांद पर स्थायी बेस बनाने की दिशा में पहला बड़ा कदम है। नासा ने बताया कि इस कदम को लेकर&nbsp;एजेंसी का लक्ष्य है कि 2028 तक चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास इंसानों की लैंडिंग कराई जाए।&nbsp;</p>



<p><strong>कौन-कौन से अंतरिक्ष यात्री इसमें गए है?</strong><br>गौरतलब है कि नासा के आर्टेमिस&nbsp;II मिशन में चार अनुभवी अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। मिशन के कमांडर रीड वाइजमैन हैं, जबकि पायलट की जिम्मेदारी विक्टर ग्लोवर के पास है। इतना ही नहीं मिशन में दो स्पेशलिस्ट भी हैं,&nbsp;क्रिस्टिना कॉच और कनाडाई स्पेस एजेंसी के जेरमी हैन्सन। ये चारों अंतरिक्ष यात्री ओरियन अंतरिक्षयान में सवार हैं और चाँद के सबसे नजदीकी मार्ग पर 10‑दिन की रोमांचक यात्रा पर हैं। मिशन का उद्देश्य न केवल चाँद के पास से गुजरना है, बल्कि मानव अंतरिक्ष यात्रा के नए रिकॉर्ड भी स्थापित करना है।<br></p>
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		<title>Artemis II: आर्टेमिस-2 मिशन ने पार की पृथ्वी की कक्षा, 54 साल बाद चंद्रमा की ओर बढ़ा मानव दल</title>
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		<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 04:56:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नासा का आर्टेमिस-2 मिशन सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा से आगे बढ़कर चंद्रमा की ओर रवाना हो गया है। यह भविष्य के मानवयुक्त चंद्र अभियानों के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी और ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह मिशन लगभग 10 दिनों का होगा, जिसमें चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगा कर महत्वपूर्ण तकनीकी प्रणालियों का परीक्षण किया जाएगा। यह परीक्षण [&#8230;]]]></description>
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<p>नासा का आर्टेमिस-2 मिशन सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा से आगे बढ़कर चंद्रमा की ओर रवाना हो गया है। यह भविष्य के मानवयुक्त चंद्र अभियानों के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी और ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह मिशन लगभग 10 दिनों का होगा, जिसमें चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगा कर महत्वपूर्ण तकनीकी प्रणालियों का परीक्षण किया जाएगा। यह परीक्षण भविष्य के उन मिशनों के लिए अहम होगा, जिनका लक्ष्य चंद्रमा की सतह पर अंतरिक्ष यात्रियों को उतारना है।<br><br>नासा के आर्टेमिस-2 मिशन ने अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इस मिशन का मानव दल सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकलकर अब चंद्रमा की ओर अग्रसर हो चुका है। यह कदम मानवता की गहरे अंतरिक्ष में वापसी की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।<br><br>नासा के अनुसार, ओरियन अंतरिक्ष यान ने एक अहम ट्रांसलूनर इंजेक्शन बर्न को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इस प्रक्रिया के तहत यान के मुख्य इंजन को लगभग छह मिनट तक चलाया गया, जिससे यह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव से बाहर निकलकर चंद्रमा की ओर निर्धारित कक्षा में प्रवेश कर गया। इस दौरान करीब 6,000 पाउंड का थ्रस्ट उत्पन्न हुआ, जिसने यान को सटीक दिशा में आगे बढ़ाया।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>आर्टेमिस-2 मिशन : पांच मिनट से ज्यादा चला ट्रांसलूनर इंजेक्शन बर्न</strong></h3>



<p>मिशन प्रबंधन टीम ने इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया के लिए सर्वसम्मति से &#8216;गो&#8217; सिग्नल दिया था। यह बर्न कुल 5 मिनट 49 सेकंड तक चला। इसके सफलतापूर्वक पूरा होने के साथ ही अंतरिक्ष यात्री 1972 के अपोलो 17 के बाद पहली बार चंद्रमा के चारों ओर यात्रा करने के लिए आधिकारिक रूप से रवाना हो गए हैं।</p>



<p><strong>नासा बोला- अमेरिका के लिए निर्णायक पल</strong><br>नासा के प्रमुख जेरेड इसाकमैन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस उपलब्धि की पुष्टि करते हुए कहा कि ट्रांसलूनर इंजेक्शन बर्न सफलतापूर्वक पूरा हो गया है और आर्टेमिस-2 का दल अब चंद्रमा की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने इसे एजेंसी के लिए एक निर्णायक क्षण बताते हुए कहा कि अमेरिका एक बार फिर अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा भेजने के मिशन में सक्रिय हो गया है।</p>



<p><strong>आर्टेमिस-2 मिशन में ये चार अंतरित्र यात्री शामिल</strong><br>इस मिशन में क्रिस्टीना कोच, विक्टर ग्लोवर, रीड वाइसमैन के साथ कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के जेरेमी हैनसेन शामिल हैं। अंतरिक्ष में अपने पहले पूर्ण दिन के दौरान दल ने नियमित गतिविधियों के तहत इंजन बर्न की तैयारी और माइक्रोग्रैविटी में फिटनेस बनाए रखने के लिए व्यायाम सत्र पूरे किए।</p>



<p>मिशन कंट्रोल ने दिन की शुरुआत ग्रीन लाइट गीत बजाकर की, जिससे महत्वपूर्ण ऑपरेशनों के लिए सकारात्मक माहौल बनाया गया। ओरियन यान का सर्विस मॉड्यूल इंजन, जो उच्च थ्रस्ट देने में सक्षम है, ने चंद्रमा की दिशा में सटीक गति प्रदान की।</p>
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		<title>54 साल बाद फिर चांद की उड़ान नासा का आर्टेमिस-II मिशन लॉन्च; 10 दिन तक चंद्रमा की परिक्रमा करेंगे एस्ट्रोनॉट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Apr 2026 04:10:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Technology]]></category>
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					<description><![CDATA[करीब 50 साल बाद इंसान फिर से चांद की तरफ जा रहा है। 54 साल बाद फिर चांद की उड़ान नासा का आर्टेमिस-II मिशन लॉन्च; 10 दिन तक चंद्रमा की परिक्रमा करेंगे एस्ट्रोनॉट । नासा के आर्टेमिस-II मिशन की सफल लॉन्चिंग हो गई है। इस मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्री, रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, [&#8230;]]]></description>
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<p>करीब 50 साल बाद इंसान फिर से चांद की तरफ जा रहा है। 54 साल बाद फिर चांद की उड़ान नासा का आर्टेमिस-II मिशन लॉन्च; 10 दिन तक चंद्रमा की परिक्रमा करेंगे एस्ट्रोनॉट । नासा के आर्टेमिस-II मिशन की सफल लॉन्चिंग हो गई है। इस मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्री, रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन, ओरियन कैप्सूल में बैठकर उड़ान भर चुके हैं।<br><br>करीब 54 साल बाद इंसान एक बार फिर चांद की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का पहला मानव मिशन आर्टेमिस-II भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह 4:05 बजे फ्लोरिडा से सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ। इस मिशन में क्रिस्टीना कोच, विक्टर ग्लोवर, रीड वाइसमैन और जेरेमी हैनसेन सवार हैं, जिन्हें एसएलएस रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया। यह 10 दिन की यात्रा अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी से करीब 4.06 लाख किलोमीटर दूर तक ले जाएगी, जो अब तक की सबसे लंबी मानव अंतरिक्ष यात्रा मानी जा रही है।</p>



<p>आर्टेमिस-II मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्री चांद के करीब तक जाएंगे, लेकिन वहां उतरेंगे नहीं। यह एक परीक्षण मिशन है, जिसका उद्देश्य भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए जरूरी तकनीक और क्षमताओं को परखना है। पूरा मिशन करीब 10 दिनों में पूरा होगा और अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की परिक्रमा कर सुरक्षित पृथ्वी पर लौटेंगे।नासा ने लॉन्च से पहले सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लोगों को इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने का न्योता दिया है। एजेंसी ने कहा कि यह मिशन इंसानों को चांद और आगे मंगल ग्रह तक बसाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।</p>



<figure class="wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter wp-block-embed-twitter"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<div class="embed-twitter"><blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="en" dir="ltr">Liftoff.<br><br>The Artemis II mission launched from <a href="https://twitter.com/NASAKennedy?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">@NASAKennedy</a> at 6:35pm ET (2235 UTC), propelling four astronauts on a journey around the Moon.<br><br>Artemis II will pave the way for future Moon landings, as well as the next giant leap — astronauts on Mars. <a href="https://t.co/ENQA4RTqAc">pic.twitter.com/ENQA4RTqAc</a></p>&mdash; NASA (@NASA) <a href="https://twitter.com/NASA/status/2039473910987534599?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">April 1, 2026</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></div>
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<p><strong>10 दिन की यात्रा पर चांद के चारों तस्क भ्रमण करेंगे 4 अंतरिक्ष यात्री</strong><br>नासा का आर्टेमिस-II मिशन चांद की परिक्रमा से कहीं आगे की कहानी है। यह पहली बार डीप स्पेस में मानव शरीर की वास्तविक परीक्षा लेने जा रहा है। चार अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की सुरक्षा सीमा से बाहर जाकर कॉस्मिक रेडिएशन और अंतरिक्षीय परिस्थितियों का सामना करेंगे, जहां उनके शरीर में होने वाले हर बदलाव को रिकॉर्ड किया जाएगा। 50 साल बाद इंसानों की यह यात्रा सिर्फ ऐतिहासिक नहीं, भविष्य की लंबी अंतरिक्ष यात्राओं के लिए निर्णायक वैज्ञानिक प्रयोग भी है।</p>



<p>नासा के अनुसार आर्टेमिस-II, मिशन चार अंतरिक्ष कत्रियों को लगभग 10 दिन की यात्रा पर चांद के चारों ओर ले जाएगा। 1972 के बाद पहली बार इंसान पृथ्वी के मैनेटिक फोल्ड से बाहर जाएगा और यह दूरी अब तक की किसी भी मानव अंतरिक्ष यात्रा से अधिक हो सकती है। यह मिशन आर्टेमिस प्रोग्राम की उस श्रृंखला का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य चांद पर स्थायी मानव उपस्थिति स्थापित करना है। यह बेहद महत्वपूर्ण होगा।</p>



<p><strong>चिप के जरिये होगा शरीर में बदलावों का विश्लेषण</strong>इस मिशन का सबसे उन्नत प्रयोग ऑर्गन ऑन-ए-चिप तकनीक है। प्रत्येक अंतरिक्ष यात्री के रक्त से प्राप्त कोशिकाओं को माइक्रोचिप पर विकसित किया जाएगा। एक चिप अंतरिक्ष में जाएगी और दूसरी पृथ्वी पर रहेगी। मिशन के बाद तुलना कर यह देखा जाएगा कि डीएनए डैमेज, टेलीमीयर लंबाई और अन्ने जैविक संकेतकों में कितना अंतर आया। यह पहली बार होगा जब ऐसो प्रयोग लो-अर्थ ऑर्बिट से बाहर किया जा रहा है। इस तकनीक का सबसे बड़ा महत्त्व भविष्य में सामने आएगा, जब नासा किसी भी संभावित अंतरिक्ष यात्री के शरीर पर डीप स्पेस के प्रभावों का पहले से अनुमान लगा सकेगा। यानी अंतरिक्ष यात्रा से पहले ही जोखिम का आकलन संभव होगा।</p>



<p><strong>कितनी बार टाली जा चुकी है आर्टेमिस-2 की लॉन्चिंग?</strong><br>आर्टेमिस-2 मिशन की लॉन्चिंग की तारीखों में हाल ही में कुछ बदलाव किए गए हैं। मूल रूप से इस मिशन को फरवरी 2026 (6 से 8 फरवरी के बीच) में लॉन्च करने की योजना थी। लेकिन रॉकेट में ईंधन भरने के परीक्षणों के दौरान आई कुछ समस्याओं के कारण नासा को इसकी लॉन्चिंग टालनी पड़ी। इसके बाद नासा ने मार्च (6 से 9 मार्च और 11 मार्च) के लिए भी संभावित लॉन्च विंडो तय की थी, लेकिन मिशन उन तारीखों पर उड़ान नहीं भर सका।&nbsp;लगातार परीक्षणों और तैयारियों के बाद अब नासा इस ऐतिहासिक मिशन को 1 अप्रैल 2026 को लॉन्च करने की तैयारी कर ली है। 1 अप्रैल की शाम को इसे फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया जा सकता है। जिस वक्त आर्टेमिस-2 की लॉन्चिंग होगी, भारत में 2 अप्रैल को सुबह होगी। इस बीच अगर मौसम या किसी अन्य तकनीकी कारण से 1 अप्रैल को लॉन्चिंग संभव नहीं हो पाती है, तो नासा के पास अप्रैल में ही कुछ अन्य बैकअप तारीखें मौजूद हैं, जिनमें 3 से 6 अप्रैल और 30 अप्रैल शामिल हैं। कुल मिलाकर, नासा अब अप्रैल 2026 में ही इस मिशन को अंतरिक्ष में भेजने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।</p>
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		<title>विदेश के बाद अब भारत में भी सख्ती; राज्यों में कड़े फैसले, कंपनियों की नीति क्या? जानिए सबकुछ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 06:27:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Technology]]></category>
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					<description><![CDATA[बच्चों के लिए सोशल मीडिया को बैन करने से जुड़े कदम अब भारत में भी उठने लगे हैं। कर्नाटक और आध्र जैसे राज्यों ने इस दिशा में नीतिगत निर्णय ले भी लिए हैं। केंद्र के स्तर पर भी साफ कर दिया है कि बच्चों की सुरक्षा सरकार की पहली प्राथमिकता है। फ्रांस, ब्रिटेन, स्पेन और [&#8230;]]]></description>
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<p>बच्चों के लिए सोशल मीडिया को बैन करने से जुड़े कदम अब भारत में भी उठने लगे हैं। कर्नाटक और आध्र जैसे राज्यों ने इस दिशा में नीतिगत निर्णय ले भी लिए हैं। केंद्र के स्तर पर भी साफ कर दिया है कि बच्चों की सुरक्षा सरकार की पहली प्राथमिकता है। फ्रांस, ब्रिटेन, स्पेन और पोलैंड सहित दुनिया के किस देश ने अब तक इस मसले पर क्या रुख अपनाया है? जानिए विस्तार से।<br><br>बच्चों और किशोरों में सोशल मीडिया की बढ़ती लत को अब ब्रिटेन जैसे देशों में &#8216;सिगरेट&#8217; के समान खतरनाक माना जा रहा है। डिजिटल सुरक्षा को लेकर ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के कड़े रुख के बाद अब भारत में भी नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। हाल ही में कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों ने प्रतिबंध की घोषणाएं की हैं, वहीं दिग्गज टेक कंपनियां इन पाबंदियों को रोकने के लिए अरबों रुपये खर्च कर रही हैं। आइए सवाल-जवाब के जरिए इस आर्थिक और नीतिगत पहलुओं को समझते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>भारत में राज्यों ने बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर क्या कड़े फैसले लिए हैं?</strong></h3>



<p>भारत में बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर राज्य सरकारें आक्रामक रुख अपना रही हैं। कर्नाटक देश का पहला राज्य बन गया है जिसने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने विधानसभा में बजट पेश करते हुए यह अहम एलान किया। इसी तर्ज पर, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने भी अगले 90 दिनों के भीतर 13 साल (या 16 साल) से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस बंद करने की घोषणा की है। इन राज्यों का तर्क है कि डिजिटल लत से बच्चों की मानसिक सेहत, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और सीखने की आदत पर भारी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>केंद्र सरकार का इस मुद्दे पर क्या रुख है?</strong></h3>



<p>केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव भी साफ कर चुके हैं&nbsp;कि बच्चों की डिजिटल सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और समाज की सुरक्षा के लिए टेक कंपनियों के साथ गंभीर चर्चा चल रही है। सरकार वर्तमान में उम्र-आधारित एक्सेस कंट्रोल लागू करने पर विचार कर रही है। इसके अतिरिक्त, नए डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) कानून में भी बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। भारत के आर्थिक सर्वेक्षण 2026-27 में भी सोशल मीडिया की लत पर गहरी चिंता जताते हुए उम्र के हिसाब से सीमाएं तय करने की आधिकारिक सिफारिश की गई है।<br></p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>वैश्विक स्तर पर किन देशों ने सख्त प्रतिबंध लागू किए हैं?</strong></h3>



<p>बच्चों के लिए सोशल मीडिया को बैन करने के मामले में ऑस्ट्रेलिया सबसे आगे है। ऑस्ट्रेलिया ने 10 दिसंबर 2025 से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स पर आधिकारिक प्रतिबंध लागू कर दिया है। नियमों के उल्लंघन पर कंपनियों को 33 मिलियन डॉलर (करीब 300 करोड़ रुपये) तक का जुर्माना देना होगा। इसके अलावा, फ्रांस की नेशनल असेंबली ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन का बिल पास कर दिया है। स्पेन, ग्रीस और पोलैंड भी क्रमशः 16 और 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए डिजिटल पहुंच को ब्लॉक करने के लिए सख्त कानून ला रहे हैं।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>फ्रांस-ब्रिटेन जैसे देश किस दिशा में आगे बढ़ रहे?</strong></h3>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>फ्रांस: </strong>फ्रांस की नेशनल असेंबली ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन का बिल भारी बहुमत से पास कर दिया है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इसे &#8216;बड़ा कदम&#8217; बताते हुए अगले शैक्षणिक सत्र (1 सितंबर) से इसे लागू करने की अपील की है।</li>



<li><strong>ब्रिटेन: </strong>ब्रिटेन के चर्चित पेरेंटिंग प्लेटफॉर्म &#8216;मम्सनेट&#8217; ने सोशल मीडिया को &#8216;सिगरेट&#8217; जैसा बताते हुए विज्ञापनों के जरिए बैन की मुहिम छेड़ी है। इसके दबाव में ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीअर स्टारमर ने संकेत दिया है कि बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग को सीमित करने वाले कड़े नियम कुछ ही हफ्तों में लागू किए जा सकते हैं।</li>



<li><strong>स्पेन और पोलैंड</strong>: स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर प्रतिबंध की योजना बनाई है। साथ ही, स्पेन ऐसा कानून ला रहा है जिसमें हानिकारक कंटेंट के लिए टेक कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा। पोलैंड की सरकार भी 2027 तक 15 साल से कम उम्र के बच्चों को ऐप्स से दूर रखने के लिए ड्राफ्ट तैयार कर रही है। </li>



<li><strong>इंडोनेशिया:</strong> दक्षिण-पूर्व एशिया में, इंडोनेशिया सरकार ने मेटा को सुस्त कंटेंट मॉडरेशन के लिए अंतिम चेतावनी दी है। वहां 1 अप्रैल 2025 से &#8216;पीपी टुनास&#8217; कानून लागू हो चुका है, जिसके तहत हाई-रिस्क प्लेटफॉर्म्स को 16 साल से कम उम्र के यूजर्स को ब्लॉक करना अनिवार्य है, जिस पर अप्रैल 2026 से सख्त कार्रवाई होगी।</li>
</ul>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>बिग टेक प्रतिबंधों से बचने के लिए क्या रणनीति अपना रहा?</strong></h3>



<p>अटेंशन इकोनोमी (ध्यान खींचने वाली अर्थव्यवस्था) पर आधारित बिग टेक के बिजनेस मॉडल के लिए सोशन मीडिया&nbsp;बैन एक बड़ा खतरा है। इसे रोकने के लिए टेक दिग्गज आक्रामक लॉबिंग का सहारा ले रही हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, टेक कंपनियों ने पिछले साल यूरोपीय संघ में राजनेताओं की लॉबिंग पर 151 मिलियन यूरो (करीब 1618 करोड़ रुपये) खर्च किए हैं, जिसमें मेटा ने अकेले 10 मिलियन यूरो खर्चे हैं। कंपनियों की रणनीति पूर्ण प्रतिबंध को टालने की है। वे दलील दे रही हैं कि सरकारों को बैन के बजाय &#8216;टीन अकाउंट्स&#8217; जैसे फीचर्स के माध्यम से माता-पिता को नियंत्रण सौंपना चाहिए। ब्रुसेल्स में टेक कंपनियों के 890 फुल-टाइम लॉबिस्ट काम कर रहे हैं। कंपनियों की रणनीति यह दलील देने की है कि पूर्ण बैन के बजाय माता-पिता को नियंत्रण दिया जाना चाहिए। इसके लिए मेटा &#8216;टीन अकाउंट्स&#8217; जैसे फीचर्स को प्रमोट कर रही है ताकि सख्त कानूनी ढांचे से बचा जा सके। अल्फाबेट के तहत चलने वाले&nbsp;यूट्यूब ने भी बच्चों&nbsp;के लिए अलग सेगमेंट बना रखा है।<br><br>किशोरों के लिए सोशल मीडिया का यह बदलता विनियामक ढांचा डिजिटल कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। भारत सहित दुनिया भर की सरकारें अब कंपनियों की &#8216;सेल्फ-रेगुलेशन&#8217; नीतियों पर निर्भर रहने के बजाय सख्त कानूनी हस्तक्षेप करने का मन बना रही हैं। आने वाले समय में एज-वेरिफिकेशन तकनीक और प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम डिजाइन को लेकर पूरी दुनिया में एक नया और सख्त मानक स्थापित होने की प्रबल संभावना है।</p>
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		<title>Social Media Ban: बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करेगा भारत? आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने क्या बताया</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 21 Feb 2026 03:03:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Technology]]></category>
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					<description><![CDATA[ऑस्ट्रेलिया ने पिछले साल दिसंबर में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कड़ा प्रतिबंध लागू किया है। इसके अलावा ऐसा ही कुछ फ्रांस भी करने जा रहा है। इस बीच सवाल उठ रहे हैं किया क्या भारत भी इसके लिए तैयार है। जिस पर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण [&#8230;]]]></description>
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<p>ऑस्ट्रेलिया ने पिछले साल दिसंबर में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कड़ा प्रतिबंध लागू किया है। इसके अलावा ऐसा ही कुछ फ्रांस भी करने जा रहा है। इस बीच सवाल उठ रहे हैं किया क्या भारत भी इसके लिए तैयार है। जिस पर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव की प्रतिक्रिया सामने आई है। </p>



<p>भारत में भी 15 साल के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ( इंस्टाग्राम, फेसबुक और स्नैपचैट) पर प्रतिबंध लगाने की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। हाल ही में दिल्ली में आयोजित हुए इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बताया कि उनकी सरकार बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने जा रही है। इसी के साथ उन्होंने पूछा कि क्या भारत भी इसके लिए तैयार है।</p>



<p>जिस पर अब केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रतिक्रिया दी है। वैष्णव ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि समाज की सुरक्षा को लेकर सोशल मीडिया कंपनियों से बातचीत जारी है। <br><br><strong>टेक कंपनियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ चर्चा जारी</strong><br>केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री&nbsp;अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि समाज की सुरक्षा के लिए जरूरी उपायों को लेकर सरकार बड़ी टेक कंपनियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ लगातार चर्चा कर रही है। उन्होंने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान पीटीआई से बातचीत में कहा कि इस दिशा में गंभीर स्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है और यह तय किया जा रहा है कि समाज को किस तरह की सुरक्षा की जरूरत है और उसे कैसे लागू किया जाए।</p>



<p>वहीं वैष्णव ने कहा कि इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट बेहद सफल रहा है। दुनिया भर से राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख इसमें शामिल हुए। उन्होंने कहा कि सबसे खास बात यह रही कि भारत के युवाओं ने इस नई तकनीक और नए युग को सकारात्मक रूप से अपनाया है।</p>



<p><strong>यूथ कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर बोले मंत्री</strong><br>समिट के दौरान यूथ कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर मंत्री ने कहा कि युवाओं और उद्यमियों का उत्साह ही इसका करारा जवाब है। बता दें कि कांग्रेस भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है। पार्टी का आरोप है कि भारतीय उत्पादों पर 18 फीसदी शुल्क और अमेरिका से आयात पर शून्य शुल्क देश के भविष्य के लिए नुकसानदेह होगा।</p>



<p></p>



<p><strong>‘पैक्स सिलिका’ समझौते पर दिया बयान</strong><br>इस बीच समिट में भारत और अमेरिका के बीच ‘पैक्स सिलिका’ समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए, जिसका उद्देश्य एआई और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाना है। जिस पर वैष्णव ने कहा कि पैक्स सिलिका समझौता खास तौर पर सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए मजबूत और भरोसेमंद देशों के साथ साझेदारी बेहद जरूरी है और यह समझौता भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग को काफी फायदा पहुंचाएगा। उन्होंने कहा कि&nbsp;यह इस बात की भी मान्यता है कि भारत का सेमीकंडक्टर उद्योग तेजी से प्रगति कर रहा है, और दुनिया भर के देश भारत को एक विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला भागीदार के रूप में देखना चाहते हैं।</p>
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		<title>भारत समेत कई देशों में यूट्यूब की सेवाएं प्रभावित, सेवाएं कब सामान्य? कंपनी ने दिया ये अपडेट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 18 Feb 2026 03:41:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Technology]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका में 2.40 लाख से अधिक यूट्यूब यूजर्स प्रभावित हुए हैं। सेवाएं प्रभावित होने की खबरों के बीच कंपनी ने सेवाओं के दोबारा बहाल होने को लेकर अपडेट साझा किया है। कुछ खबरों में अमेरिका से भारत तक यूट्यूब सेवाएं ठप होने की बात सामने आई है। दुनियाभर में करोड़ों यूट्यूब यूजर्स के प्रभावित होने [&#8230;]]]></description>
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<p>अमेरिका में 2.40 लाख से अधिक यूट्यूब यूजर्स प्रभावित हुए हैं। सेवाएं प्रभावित होने की खबरों के बीच कंपनी ने सेवाओं के दोबारा बहाल होने को लेकर अपडेट साझा किया है। कुछ खबरों में अमेरिका से भारत तक यूट्यूब सेवाएं ठप होने की बात सामने आई है। दुनियाभर में करोड़ों यूट्यूब यूजर्स के प्रभावित होने की खबरों के बीच जानिए अपडेट्स</p>



<p>भारत समेत कई देशों में यूट्यूब की सेवाएं ठप होने की खबर है। डाउन डिटेक्टर वेबसाइट के मुताबिक सबसे पहले अमेरिका में परेशानी शुरू हुई। इसके बाद भारत में भी कई यूट्यूब यूजर्स ने सेवाओं में दिक्कत की रिपोर्ट्स साझा की। तकनीकी खबरों पर नजर रखने वाले जानकारों के मुताबिक दुनियाभर में यूट्यूब के करोड़ों यूजर्स प्रभावित हुए हैं। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका में करीब 2.40 लाख से अधिक यूट्यूब यूजर्स प्रभावित हुए हैं। भारत समेत कई देशों में डाउन हुए यूट्यूब सर्वर को लेकर कंपनी ने कहा कि सेवाएं लगभग एक घंटे तक बाधित रही। कंपनी ने सेवाओं के सामान्य होने से जुड़े अपडेट्स भी साझा किए हैं। जानिए क्या है पूरा मामला</p>



<p><strong>तकनीकी गड़बड़ी के कारणों की पड़ताल जारी</strong><br>यूट्यूब सेवाओं पर असर को लेकर डाउनडिटेक्टर के हवाले से आई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि मंगलवार शाम अमेरिका में लाखों लोगों ने तकनीकी दिक्कतों की सूचना दी। वीडियो प्लेटफॉर्म के हजारों यूजर्स ने मंगलवार शाम करीब आठ बजे (अमेरिकी समय) कहा कि वे वीडियो नहीं देख पा रहे हैं। कंपनी के मुताबिक इस व्यापक तकनीकी गड़बड़ी के कारणों की पड़ताल की जा रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक वेबसाइट्स और सर्वर में खामियों पर नजर रखने वाली वेबसाइट डाउनडिटेक्टर ने अमेरिकी समयानुसार मंगलवार रात करीब आठ बजे तक 2.40 लाख शिकायतें दर्ज किए जाने की पुष्टि की।</p>



<p><strong>अमेरिका के अलावा ब्रिटेन और कनाडा में भी दिखा असर</strong><br>खबर लिखे जाने तक गड़बड़ी के कारणों पर यूट्यूब की तरफ से आधिकारिक बयान सामने नहीं आए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका के अलावा ब्रिटेन, कनाडा समेत कई अन्य देशों में भी यूट्यूब यूजर्स ने तकनीकी गड़बड़ी की शिकायत की। सोशल मीडिया अकाउंट्स पर यूजर्स ने यूट्यूब से जुड़े स्क्रीनशॉट्स शेयर कर सर्वर डाउन होने जैसी बातें लिखीं। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि इस तकनीकी परेशानी के कारण गूगल और अमेजन वेब सर्विसेज पर भी असर पड़ा है।</p>



<p><strong>सोशल मीडिया पर परेशानी की शिकायतें</strong><br>अमेरिका में रात करीब आठ बजे हुई इस गड़बड़ी का असर आंशिक रूप से भारत में भी दिखा। बुधवार तड़के भारत में भी कई यूट्यूब&nbsp;यूजर्स ने दिक्कतों की शिकायतें कीं।</p>



<p></p>
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		<title>दुश्मन की हर हरकत पर होगी नजर, इसरो के पीएसएलवी रॉकेट से आज होगी उपग्रह अन्वेषा की लॉन्चिंग</title>
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		<pubDate>Mon, 12 Jan 2026 04:27:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इसरो इस साल का अपना पहला मिशन लॉन्च करने के लिए तैयार है। इस मिशन के तहत इसरो अपने पीएसएलवी -सी62 रॉकेट के जरिए सैटेलाइट अन्वेषा समेत 15 सैटेलाइट लॉन्च करेगा। इस सैटेलाइट की मदद से दुश्मनों की निगरानी करने की भारत की क्षमता में उल्लेखनीय इजाफा होगा।  भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) आज यानी [&#8230;]]]></description>
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<p>इसरो इस साल का अपना पहला मिशन लॉन्च करने के लिए तैयार है। इस मिशन के तहत इसरो अपने पीएसएलवी -सी62 रॉकेट के जरिए सैटेलाइट अन्वेषा समेत 15 सैटेलाइट लॉन्च करेगा। इस सैटेलाइट की मदद से दुश्मनों की निगरानी करने की भारत की क्षमता में उल्लेखनीय इजाफा होगा। <br><br>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) आज यानी सोमवार को 260 टन वजनी पीएसएलवी-सी62 रॉकेट से उपग्रह अन्वेषा समेत 14 अन्य सैटेलाइट लॉन्च करेगा। यह इस साल का पहला प्रक्षेपण होगा। आज श्रीहरिकोटा प्रक्षेपण केंद्र से सुबह 10:18 बजे पृथ्वी अवलोकन उपग्रह अन्वेषा व 14 अन्य उपग्रहों को कक्षा में स्थापित किया जाएगा। अन्वेषा भारत की निगरानी क्षमताओं को मजबूती देगा। इसकी मदद से हम दुश्मन की हर हरकत पर नजर रख सकेंगे।<br><br><strong>दुश्मन की निगरानी करेगा उपग्रह अन्वेषा</strong><br>उपग्रह अन्वेषा पृथ्वी की कक्षा में घूमते हुए तस्वीरें लेगा। इसमें हाइपरस्पेक्ट्रल सेंसर लगे हैं, जो साधारण कैमरों से ज्यादा स्मार्ट हैं। यह आसमान से दुश्मन की हर हरकत पर नजर रख सकता है। इसे डीआरडीओ ने विकसित किया है। इस लॉन्च में दो सॉलिड स्ट्रैप-ऑन मोटर वाले पीएसएलवी-डीएल वेरिएंट का इस्तेमाल किया जाएगा। यह मिशन पीएसएलवी रॉकेट की 64वीं उड़ान होगी। पीएसएलवी, इसरो का मुख्य लॉन्च व्हीकल है, जिसने चंद्रयान-1, मार्स ऑर्बिटर मिशन, आदित्य-L1 और एस्ट्रोसैट मिशन जैसे महत्वपूर्ण मिशन सहित 63 उड़ानें पूरी की हैं। 2017 में, पीएसएलवी ने एक ही मिशन में 104 सैटेलाइट लॉन्च करके विश्व रिकॉर्ड बनाया था।+</p>



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		<title>मोबाइल पर बात करना होगा महंगा, कमाई बढ़ाने के टैरिफ में इजाफा करने की तैयारी में कंपनियां</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RNSNS]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 17 Dec 2025 03:29:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Technology]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
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					<description><![CDATA[कमाई और निवेश बढ़ाने के लिए दूरसंचार कंपनियां टैरिफ बढ़ाने की तैयारी में हैं और इसके चलते मोबाइल पर बात करना महंगा हो सकता है। अनुमान है कि 2026 में प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों तरह के 4जी एवं 5जी प्लान की कीमतों में तेज वृद्धि होगी। नए साल से मोबाइल पर बात करना महंगा हो जाएगा। कमाई और निवेश बढ़ाने [&#8230;]]]></description>
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<p>कमाई और निवेश बढ़ाने के लिए दूरसंचार कंपनियां टैरिफ बढ़ाने की तैयारी में हैं और इसके चलते मोबाइल पर बात करना महंगा हो सकता है। अनुमान है कि 2026 में प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों तरह के 4जी एवं 5जी प्लान की कीमतों में तेज वृद्धि होगी।<br><br>नए साल से मोबाइल पर बात करना महंगा हो जाएगा। कमाई और निवेश बढ़ाने के लिए दूरसंचार कंपनियां मोबाइल टैरिफ की दरों में इजाफा कर सकती हैं। मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि कंपनियां अप्रैल-जून तिमाही से 4जी और 5जी प्लान की कीमतों में 16 से 20 फीसदी तक बढ़ोतरी करेंगी। यह पहले के अनुमान से कहीं अधिक तेजी से और जल्द बढ़ोतरी है। इसके पहले 15 फीसदी की वृद्धि का अनुमान लगाया था।<br><br><strong>5जी प्लान की कीमतों में होगी तेज वृद्धि</strong><br>मॉर्गन स्टेनली के विश्लेषकों ने 15 दिसंबर की एक रिपोर्ट में कहा, हमारा अनुमान है कि 2026 में प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों तरह के 4जी एवं 5जी प्लान की कीमतों में तेज वृद्धि होगी। सस्ते प्लान को बंद करने और स्ट्रीमिंग सेवाओं को केवल प्रीमियम प्लान के साथ ही जोड़ने जैसे हालिया कदम यह संकेत देते हैं कि कंपनियां ग्राहकों को बढ़ी कीमतों के लिए तैयार कर रही हैं। आठ वर्षों में यह चौथी बड़ी मूल्य वृद्धि होगी। इससे पहले कंपनियों ने 2024 में 15 फीसदी, 2021 में 20 फीसदी व 2019 में 30 फीसदी वृद्धि की थी। मॉर्गन स्टेनली के अनुसार, हर बार जब एयरटेल जैसी मजबूत कंपनियों ने अधिक राजस्व अर्जित किया, तो कमजोर प्रतियोगी पीछे रह गए।</p>



<p><strong>कम कीमत वाले प्लान हुए बंद</strong><br>हाल में दूरसंचार कंपनियों ने कम कीमत वाले प्लान हटा दिए हैं या ओवर-द-टॉप (ओटीटी) जैसी कुछ सुविधाओं को अधिक कीमत वाले प्लान में स्थानांतरित कर दिया है। इससे ग्राहकों को अपग्रेड करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है और प्रभावी रूप से प्रति ग्राहक औसत राजस्व (एआरपीयू) में वृद्धि हो रही है। विश्लेषकों ने कहा, हमने देखा है कि अतीत में जब भी टैरिफ में वृद्धि हुई है, भारती एयरटेल प्रमुख लाभार्थियों में से एक रही है। इसने कमजोर कंपनियों की तुलना में राजस्व में असमान रूप से अधिक वृद्धि दिखाया है।</p>



<p><strong>7 वर्षों में हर ग्राहक से कंपनियां कमाएंगी 390 रुपये</strong><br>एयरटेल, जियो और वोडाफोन आइडिया ने हाल के वर्षों में तीन बार प्रीपेड टैरिफ बढ़ाए हैं। ब्रोकरेज फर्म के मध्यम अवधि के संभावित अनुमानों से संकेत मिलता है कि 2031-32 तक एआरपीयू 370 और 390 के बीच रहेगा। ब्रोकरेज फर्म ने एयरटेल के संदर्भ में कहा, तीन से पांच वर्षों में कंपनी के एआरपीयू में 5-6 फीसदी की वृद्धि के लिए डाटा मोनेटाइजेशन महत्वपूर्ण कारक होगा। वह 2026 के बाद बिना टैरिफ वृद्धि के भी 400 रुपये तक कमाएगी।</p>



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