उत्तरकाशी के धराली गांव मंगलवार दोपहर बादल फटने से खीरगंगा में बाढ़ आ गई। बाढ़ ने निचले इलाके में भारी तबाही मचाई। यहां कई होटल और घर मलबे में दब गए और कई लोग लापता हैं।

70 लोग लापता
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में धराली गांव में बादल फटने से भारी तबाही हुई है। ऊंचाई वाले इलाके में बादल फटा, जिससे खीरगंगा नदी में सैलाब आ गया। पहाड़ से तेजी के साथ नीचे उतरा पानी अपने साथहोटल, घर और होम स्टे को बहा ले गया। धराली का मुख्य बाजार पूरी तरह तबाह हो गया है। प्रसिद्ध कल्प मंदिर भी मलबे में बह गया है। चार लोगों की मौत हुई है और 70 लोग लापता बताए जा रहे हैं। इसके कुछ देर बाद सुखी टॉप पर भी बादल फटने की घटना सामने आई, लेकिन उसमें किसी तरह के नुकसान की अभी जानकारी नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बात कर स्थिति की जानकारी ली है और हरसंभव मदद का भरोसा दिया है।
शासन ने बचाव कार्य और मरम्मत के लिए 20 करोड़ जारी किए
शासन ने आपदा प्रभावित क्षेत्र में बचाव कार्यों और क्षतिग्रस्त परिसम्पत्तियों की मरम्मत के लिए आपदा मोचन निधि मद से 20 करोड़ की राशि जारी कर दी है। इस संबंध में आपदा प्रबंधन विभाग के अपर सचिव आनंद स्वरूप ने डीएम उत्तरकाशी को एक पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि राहत एवं बचाव कार्यों और क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों की तत्काल मरम्मत के लिए धनराशि अवमुक्त की जा रही है।
11 जवान लापता, 150 जवान रेस्क्यू में जुटे: पीआरओ
पीआरओ (रक्षा) लेफ्टिनेंट कर्नल मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि धराली आपदा के बाद 14 राजरिफ के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल हर्षवर्धन खुद राहत और बचाव कार्यों का नेतृत्व कर रहे हैं। उनकी टीम के 150 जवान लगातार इस कठिन हालात में डटे हुए हैं। हालांकि यूनिट का बेस भी प्रभावित हुआ है और 11 जवान लापता हैं, फिर भी टीम पूरे हौसले और संकल्प के साथ काम कर रही है। उन्होंने बताया कि अब तक 20 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। तेज बारिश और टूटी हुई सड़कों के बावजूद जवान हर नागरिक की सुरक्षा के लिए डटे हुए हैं। कहा कि इस कठिन परिस्थिति में भारतीय सेना का निस्वार्थ सेवा, मजबूती और देश के प्रति समर्पण साफ दिखाई दे रहा है। राहत कार्यों को और तेज़ करने के लिए अतिरिक्त टीमें भी भेजी जा रही हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं को अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने धराली गांव में आपदा से हुए नुकसान पर दुख व्यक्त करते हुए कहा, स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए। उत्तरकाशी, टिहरी एवं देहरादून के जिला अस्पतालों के साथ ही दून मेडिकल कालेज व एम्स ऋषिकेश उपचार के लिए बेड आरक्षित किए गए हैं। राज्य सरकार आपदा प्रभावित लोगों की हरसंभव सहायता के लिए प्रतिबद्ध है।
जारी है सड़कों की सफाई
उत्तरकाशी-हर्सिल मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर भूस्खलन के कारण अवरुद्ध सड़कों को जेसीबी की मदद से साफ किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, डॉक्टरों की छुट्टी पर रोक
उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में भयानक आपदा के बाद चिकित्सा सेवाओं के लिए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। विभाग ने डॉक्टरों की छुट्टी रद्द करने के साथ ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम आपदा प्रभावित क्षेत्र के लिए रवाना कर दी है। आपदा में घायलों के इलाज के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज दून व एम्स ऋषिकेश में बेड आरक्षित किए गए।
गंगोत्री हाईवे बंद होने से छह घंटे फंसे रहे डीएम और एसपी
धराली आपदा के बाद मौके के लिए निकले डीएम प्रशांत आर्य और एसपी सरिता डोबाल नेताला के समीप गंगोत्री हाईवे बंद होने के कारण वहां पर करीब छह घंटे फंसे रहे। बीआरओ की मशीन को हाईवे खोलने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। वहीं इस घटना ने आपदा से पूर्व की गई तैयारियों की पोल खोल कर रख दी है। क्योंकि मानसून में ऐसे स्थानों पर हर समय मशीनें तैनात करने के निर्देश थे। धराली में आई आपदा के बाद जिला प्रशासन सहित पुलिस और पूरा महकमा अलर्ट होते ही घटनास्थल के लिए रवाना हुआ। लेकिन प्रशासन के कदम तंत्र की आधू-अधूरी तैयारी ने नेताला में रोक लिया। वहां पर पहाड़ी से सड़क पर भारी मलबा आने और सड़क क्षतिग्रस्त होने के कारण पूरे प्रशासनिक अमले को वहां पर सड़क खुलने का इंतजार करना पड़ा। देर शाम करीब साढ़े आठ बजे के मार्ग खुलने के बाद डीएम और एसपी घटना स्थल के लिए रवाना हो सके। वहीं इसने मानसून सीजन में प्रशासनिक तंत्र की आपदा और भूस्खलन जोन को लेकर की गई तैयारियों की पोल खोल दी है। शासन-प्रशासन की ओर से सभी सड़क संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया है। सभी भूस्खलन जोन पर 24 घंटे मशीनें तैनात रहेंगी लेकिन वहां पर मशीनों की ओर से लगातार देरी होने के कारण जनपद के सबसे वरिष्ठ अधिकारियों को ही आज मार्ग बंद होने की परेशानी झेलनी पड़ी। वहीं आपदा राहत बचाव के लिए भी टीम को भी वहां पर फंसे रहने पड़े।



