सोने के आयात में 70 फीसदी की भारी गिरावट, पीएम मोदी की अपील और 15% सीमा शुल्क वृद्धि का असर

सोने के आयात में 70 फीसदी की भारी गिरावट, पीएम मोदी की अपील और 15% सीमा शुल्क वृद्धि का असर

सोने पर आयात शुल्क बढ़ाने और खरीद कम करने की पीएम नरेंद्र मोदी की अपील का असर दिखने लगा है। एक महीने में सोने का आयात मात्रा के हिसाब से करीब 70% घट गया, जबकि ऊंची कीमतों के कारण आयात का कुल मूल्य बढ़ा। दूसरी ओर, चालू वित्त वर्ष में शुद्ध आयकर संग्रह 15% बढ़कर 5.21 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया। पढ़िए रिपोर्ट-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील और आयात पर सख्ती के लिए सीमा शुल्क बढ़ाने का असर साफ तौर पर दिखने लगा है। एक अधिकारी ने बताया, 13 मई से शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी किए जाने के बाद एक महीने में देश में सोने का आयात पहले के 75-100 टन से करीब 70 फीसदी घटकर 25-30 रह गया है। 

हालांकि, मूल्य के लिहाज से मई में सोने का आयात सालाना आधार पर 34 फीसदी बढ़कर 3.41 अरब डॉलर पहुंच गया। इसका मुख्य कारण ऊंची कीमतें रहीं। आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-मई के दौरान सोने का आयात 60.14 फीसदी बढ़कर 9.04 अरब डॉलर पहुंच गया। वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर मूल्य का सोना खरीदा था, जो सालाना आधार पर 24 फीसदी की बढ़ोतरी है। हालांकि, मात्रा के लिहाज से इसमें 4.76 फीसदी की गिरावट आई और यह 721.03 टन रहा। देश के कुल आयात में सोने की हिस्सेदारी पांच फीसदी से अधिक है।  

शुद्ध आयकर संग्रह 5.21 लाख करोड़ के पार, 15% बढ़ा
शुद्ध आयकर संग्रह चालू वित्त 2026-27 में अब तक करीब 15 फीसदी बढ़कर 5.21 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया। इसमें शुद्ध कॉरपोरेट टैक्स और शुद्ध गैर-कॉरपोरेट टैक्स संग्रह भी शामिल हैं।

सरकार की ओर से बृहस्पतिवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, एक अप्रैल से 17 जून तक की अवधि में शुद्ध कॉरपोरेट टैक्स संग्रह सालाना आधार पर 22 फीसदी बढ़कर 2.08 लाख करोड़ पहुंच गया। वहीं, शुद्ध गैर-कॉरपोरेट टैक्स 8 फीसदी वृद्धि के साथ 2.94 लाख करोड़ रुपये रहा।

17 जून तक की इस अवधि में आयकरदाताओं को 89,026 करोड़ रुपये के रिफंड जारी किए गए, जो एक साल पहले के मुकाबले 1.19 फीसदी अधिक है। वहीं, सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 12.46 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 6.10 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। इसमें कॉरपोरेट टैक्स संग्रह की हिस्सेदारी 2.76 लाख करोड़ रुपये रही, जबकि गैर-कॉरपोरेट टैक्स का योगदान 3.15 लाख करोड़ रहा। 

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