ई20 पेट्रोल को लेकर देशभर में विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। पुराने वाहनों पर इसके असर, माइलेज में कमी और सामान्य पेट्रोल का विकल्प न मिलने को लेकर विपक्ष और कई वाहन मालिक सवाल उठा रहे हैं। वहीं सरकार का कहना है कि ई20 से कच्चे तेल के आयात में कमी, किसानों की आय में बढ़ोतरी और प्रदूषण घटाने जैसे बड़े फायदे हुए हैं। आइए विस्तार से जानते हैं।
ई20 पेट्रोल को लेकर बीते कई दिनों से हंगामा जारी है। पहले सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई तरह के दावे किए गए। फिर इस पर सियासत भी शुरू हो गई। सिसायत बढ़ी तो सरकार की सफाई भी आई। सरकार की सफाई के बाद भी सियासत जारी है। कोई प्रधानमंत्री को पीड़ितों की चिट्ठी देने की कोशिश कर रहा है तो कोई सड़क परिवहन मंत्री के घर तक मार्च कर रहा है।
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ई20 को लेकर विवाद कब शुरू हुआ? इस विवाद में अब तक क्या-क्या हो चुका है? विवाद पर विपक्षी दलों का क्या दावा है? विपक्ष के दावे पर सरकार का क्या कहना है? असल में किस तरह के वाहनों को इस पेट्रोल से नुकसान हो सकता है? ई20 पेट्रोल के क्या फायदे बताए जा रहे हैं? इससे क्या नुकसान होने का दावा किया जा रहा है? आइये जानते हैं…
ताजा घटनाक्रम क्या है?
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास तक मार्च निकालने का एलान किया। उनकी पार्टी ने दावा किया कि उसने देशभर से 2.33 लाख लोगों के हस्ताक्षर जुटाए हैं और प्रधानमंत्री को याचिका सौंपना चाहती है।
दोपहर 12 बजे केजरीवाल करीब 100 लोगों के साथ पार्टी मुख्यालय से निकले, लेकिन दिल्ली पुलिस ने मार्च की अनुमति नहीं दी। फिरोजशाह रोड पर बैरिकेड लगाकर जुलूस रोक दिया गया। इसके बाद आप नेताओं और कार्यकर्ताओं ने वहीं धरना शुरू कर दिया। करीब सवा घंटे तक चले इस विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने आश्वासन दिया कि शिकायतें प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचा दी जाएंगी, जिसके बाद धरना समाप्त हुआ। हालांकि केजरीवाल ने साफ कहा कि ई20 के खिलाफ उनका आंदोलन जारी रहेगा।
इससे एक दिन पहले नागपुर में युवा कांग्रेस ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के आवास तक मार्च निकालने की कोशिश की। पुलिस ने रास्ते में बैरिकेड लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।
आखिर ई20 पेट्रोल है क्या?
ई20 ऐसा ईंधन है जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। इथेनॉल एक प्रकार का जैव ईंधन है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से बनाया जाता है। सरकार ने इसे तीन बड़े उद्देश्यों के साथ बढ़ावा दिया;
- कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता कम करना।
- प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन घटाना।
- किसानों और बायोफ्यूल उद्योग की आय बढ़ाना।
भारत ने 2030 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन यह लक्ष्य समय से पहले हासिल कर लिया गया। इसके बाद धीरे-धीरे देशभर के पेट्रोल पंपों पर ई20 को डिफॉल्ट पेट्रोल के रूप में उपलब्ध कराया जाने लगा। यही वह कदम था, जिसके बाद विवाद शुरू हुआ।
विवाद आखिर शुरू कैसे हुआ?
जब ई20 पूरे देश में उपलब्ध होने लगा तो कई वाहन मालिकों, खासकर पुराने मॉडल की गाड़ियों वाले लोगों ने शिकायतें करनी शुरू कर दीं। लोगों का कहना था कि;
- इससे गाड़ियों का माइलेज कम हो गया।
- इंजन की परफॉर्मेंस पहले जैसी नहीं रही।
- रबर पाइप और फ्यूल लाइन जल्दी खराब होने लगी।
- गाड़ियों का रखरखाव महंगा हो गया।
सबसे ज्यादा चिंता उन लोगों में देखी गई जिनके पास अप्रैल 2023 से पहले बने वाहन हैं, क्योंकि इन्हें ई20 के हिसाब से डिजाइन नहीं किया गया था। यही शिकायतें धीरे-धीरे सोशल मीडिया और राजनीतिक मुद्दा बन गईं।
विपक्ष की आपत्ति क्या है?
आम आदमी पार्टी: आप का कहना है कि सरकार लोगों पर एक ही प्रकार का ईंधन थोप रही है। पार्टी की मुख्य मांगें हैं;
- लोगों को ई20 के साथ सामान्य पेट्रोल और ई10 का भी विकल्प मिले।
- पेट्रोल की कीमत घटाकर 82 रुपये प्रति लीटर की जाए।
- सरकार ई20 नीति की समीक्षा करे।
पार्टी ने ‘StopE20petrol.com’ वेबसाइट के जरिए एक ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है। इसके जरिए प्रधानमंत्री को ई20 नीति में बदलाव के लिए एक याचिका बनाई गई। इसी याचिका को लेकर अरविंद केजरीवाल मंगलवार को प्रधानमंत्री के पास जाना चाहते थे।
कांग्रेस: पार्टी का कहना है कि सरकार वैज्ञानिक परीक्षणों का हवाला दे रही है, लेकिन देशभर के वाहन मालिक और मैकेनिक लगातार शिकायतें कर रहे हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि लोगों को कम माइलेज, इंजन खराब होने, पुराने वाहनों में ईंधन इंजेक्टर जाम होने, फ्यूल पाइप खराब होने और रबर पार्ट्स में दरार जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। पार्टी ने सरकार से इन शिकायतों का जवाब मांगा है।
शिवसेना-मनसे: मुंबई में आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने युवाओं से अपील की कि वे प्रतिरोध की इस चिंगारी को जिंदा रखें। ठाकरे ने यह भी दावा किया कि अब यह लड़ाई भाजपा बनाम विपक्ष नहीं, बल्कि भाजपा बनाम देश बन गई है। वहीं, राज ठाकरे ने भी आंदोलनकारियों का हौसला बढ़ाते हुए उन्हें इस सफलता का श्रेय दिया।
सोशल मीडिया पर ई20 जनता पार्टी क्या है?
ई20 विवाद अब केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया पर ई20 जनता पार्टी (EJP) नाम से एक डिजिटल अभियान भी शुरू हुआ है।
इसकी मुख्य मांगें हैं;
- लोगों को ई20 के साथ 100 प्रतिशत शुद्ध पेट्रोल खरीदने का विकल्प मिले।
- इथेनॉल नीति खत्म करने की मांग नहीं, बल्कि विकल्प देने की मांग।
- पुराने वाहनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
- यह अभियान बहुत कम समय में सोशल मीडिया पर लाखों लोगों तक पहुंच चुका है।
सरकार क्या कह रही है?
केंद्र सरकार लगातार कह रही है कि ई20 भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। सरकार के अनुसार;
1. पेट्रोल 125 रुपये तक पहुंच सकता था
सरकार का दावा है कि अगर पेट्रोल में इथेनॉल नहीं मिलाया जाता तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के दौरान दिल्ली में पेट्रोल लगभग 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकता था। लेकिन चूंकि पेट्रोल का 20 प्रतिशत हिस्सा घरेलू इथेनॉल था, जिसकी कीमत पहले से तय थी, इसलिए वैश्विक महंगाई का पूरा असर उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ा। उस समय दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर रहा।
2. विदेशी मुद्रा की बचत
सरकार का दावा है कि ई20 कार्यक्रम से अब तक,
- 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बची।
- 316 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा कच्चे तेल के आयात की जरूरत कम हुई।
- 950 लाख मीट्रिक टन से अधिक CO₂ उत्सर्जन कम हुआ।
3. किसानों को फायदा
- किसानों और डिस्टिलरी उद्योग को 1.66 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया गया।
- इससे किसानों को अपनी फसलों का स्थायी बाजार मिला और उनकी आय बढ़ी।
नितिन गडकरी के बयान विवाद की वजह क्यों बने?
ई20 विवाद में सबसे ज्यादा चर्चा केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के अलग-अलग समय पर दिए गए बयानों की हुई।
पहला बयान: उन्होंने कहा कि अगर ई20 से एक भी गाड़ी खराब हुई है तो उसका नाम बताइए। उन्होंने यह भी कहा कि वाहन निर्माता कंपनियों के विशेषज्ञों ने ई20 को सुरक्षित बताया है।
दूसरा बयान: बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट में अपनी याचिका में गडकरी ने कहा कि ई20 फ्यूल पॉलिसी (इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम) को तैयार करने और लागू करने की पूरी जिम्मेदारी पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का इस नीति के निर्माण, संचालन, वित्तीय प्रबंधन या नियमन से कोई संबंध नहीं है। गडकरी ने यह भी कहा कि वे कभी पेट्रोलियम मंत्रालय के प्रभारी नहीं रहे, इसलिए ई20 कार्यक्रम के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। हालांकि यह कानूनी रूप से सही था, लेकिन लोगों ने सवाल उठाया क्योंकि ई20 के प्रचार में सबसे आगे वही रहे थे।
तीसरा बयान: राज्यसभा में उन्होंने स्वीकार किया कि 2005 से 2016 के बीच बने BS-III वाहनों में कुछ रबर पार्ट्स और गैस्केट बदलने पड़ सकते हैं। ई20 इस्तेमाल करने पर माइलेज 2 से 6 प्रतिशत तक कम हो सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उपलब्ध अध्ययनों में इंजन पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं मिला है।
गडकरी ने कोर्ट का दरवाजा क्यों खटखटाया?
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख करते हुए आरोप लगाया है कि सोशल मीडिया पर उनके और उनके परिवार को लेकर फर्जी व मानहानिकारक पोस्ट व डीपफेक सामग्री प्रसारित की जा रही है। इन पोस्टों में दावा किया गया कि उन्हें ई20 इथेनॉल कार्यक्रम से निजी आर्थिक लाभ हो रहा है। गडकरी ने इन आरोपों को पूरी तरह झूठा और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताया। उन्होंने मेटा, अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अज्ञात व्यक्तियों/संस्थाओं के खिलाफ दीवानी मानहानि का मुकदमा दायर करने की अनुमति मांगी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए मुकदमा दायर करने की इजाजत दे दी।
क्या सचमुच पुराने वाहनों को नुकसान हो सकता है?
सरकार और विशेषज्ञों का कहना है कि हर वाहन में समस्या नहीं आएगी। लेकिन पुराने वाहनों में लगे कुछ रबर और प्लास्टिक के हिस्से लंबे समय तक हाई इथेनॉल वाले ईंधन के साथ पूरी तरह अनुकूल नहीं होते। इसी वजह से इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) पुराने वाहनों के लिए विशेष कन्वर्जन किट की टेस्टिंग भी कर रही है।
माइलेज कम होने की बात कितनी सही है?
सरकार ने पहली बार संसद में स्वीकार किया कि ई20 इस्तेमाल करने पर कुछ वाहनों में 2 से 6 प्रतिशत तक माइलेज कम हो सकता है। इसका कारण यह है कि इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल से कम होती है। इसलिए समान मात्रा का ईंधन जलाने पर वाहन थोड़ी कम दूरी तय कर सकता है। हालांकि यह असर हर वाहन में समान नहीं होगा।
सरकार अब क्या कर रही है?
ई20 को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही कथित भ्रामक जानकारियों के बीच नागपुर साइबर पुलिस ने कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि वे ई20 को लेकर गलत जानकारी फैलाकर लोगों को गुमराह कर रहे थे।



