NCERT की किताबों में इस बार हुए कौन से बदलाव, बीते तीन साल में कौन से परिवर्तन बने बवाल की वजह?

NCERT की किताबों में इस बार हुए कौन से बदलाव, बीते तीन साल में कौन से परिवर्तन बने बवाल की वजह?

NCERT की नई कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की किताब में आपातकाल, वेद, चुनाव आयोग और मनुस्मृति से जुड़े नए विषय शामिल किए गए हैं, जिन पर बहस छिड़ गई है। पिछले तीन वर्षों में भी इतिहास, राजनीति और संस्कृति से जुड़े कई संशोधन चर्चा और विरोध का कारण बने हैं। आइए विस्तार से जानते हैं।

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद  यानी एनसीईआरटी ने कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान की किताब गुरुवार को जारी की। नई किताब में कई नई चीजें जोड़ी गई हैं। इनमें आपातकाल, चुनाव आयोग और भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे विषयों को शामिल किया गया। इसके साथ ही मनुस्मृति के एक श्लोक का भी इसमें उल्लेख किया गया है। 

बीते कुछ वर्षों से एनसीईआरटी द्वारा पाठ्यपुस्तकों में होने वाले बदलाव किसी न किसी विवाद की वजह बनते रहे हैं। ऐसे में इस बार एनसीईआरटी ने कक्षा नौवीं की किताब में क्या बदलवा किया? इन बदलावों को लेकर किस तरह की प्रतिक्रिया आ रही है? पिछले तीन वर्षों में कब-कब और क्या-क्या बदलाव किए गए, जिन पर बवाल हुआ? इन पर एनसीईआरटी की ओर से क्या कहा गया? क्या बवाल के बाद कभी कोई बदलाव भी हुए? आइये इन सभी सवालों के जवाब जानते हैं…

इस बार एनसीईआरटी ने क्या बदलवा किया है? 

एनसीईआरटी ने 2026-27 सत्र के लिए कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की किताब गुरुवार को जारी की। पुस्तक ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट-1’ में कई नई चीजें शामिल की गई हैं। 

  • किताब में आपतकाल का एक अलग खंड शामिल किया गया है।  
  • भारतीय ज्ञान परंपरा के बारे में कक्षा नौ के छात्र पढ़ेंगे। इसमें उन्हें वेदों के बारे में जानकारी दी जाएगी। 
  • चुनाव आयोग और एसआईआर के बारे में भी इस किताब में बताया गया है। 
  • किताब में महिला सशक्तिकरण का भी खंड जोड़ा गया है। इसमें मनुस्मृति के श्लोक के जरिए महिलाओं की स्थिति के बारे में बताया गया है। 

इन मसलों पर किताब में क्या लिखा है?

ऊपर बताए गए चारों बिंदुओं पर किताब में क्या लिखा गया है। आइए बारी-बारी से जानते हैं…

आपातकाल 

1975-77 के बीच देश में लगे आपातकाल पर किताब में एक अलग खंड है। किताब में आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। इसमें लिखा गया है कि बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और सरकार के खिलाफ असंतोष के बीच जून 1975 में आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल लागू किया गया था। इस दौरान अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं व कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। पुस्तक में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलन और बिहार-गुजरात में हुए जन आंदोलनों का भी उल्लेख है। साथ ही बताया गया है कि 1977 में इमरजेंसी समाप्त होने के बाद हुए आम चुनाव में जनता ने मतदान के जरिए सत्ता परिवर्तन किया, जिसे भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का उदाहरण बताया गया है। 

हालांकि, ये पहली बार नहीं है जब एनसीईआरटी की किताब में आपातकाल को शामिल किया गया है। 2007 में पहली बार सीबीएसई के पाठ्यक्रम में इसे शामिल किया गया था। तब यह विषय कक्षा 12वीं की किताब में जोड़ा गया था। उस वक्त कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार थी।

वेद और महिलाओं के बारे में 

 इसमें छात्र भारतीय ज्ञान परंपरा के सबसे प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद व अथर्ववेद के बारे में पढ़ेंगे। इस अध्याय में बताया गया है कि वैदिक काल में महिलाओं की समाज में बहुत उच्च दर्जा और इज्जत थी। महिलाएं विद्वतापूर्ण शिक्षा में शामिल होती थीं, कुछ खास मौकों पर पुरुषों के साथ मिलकर धार्मिक अनुष्ठान करती थीं और सार्वजनिक सभाओं में भाग लेती थीं। साथ ही, ऋग्वेद के कई भजन पारंपरिक रूप से महिला ऋषियों जैसे अपाला, विश्ववारा, घोषा और लोपामुद्रा से जुड़े माने जाते हैं। महिलाओं के सम्मान की परंपरा वैदिक काल के बाद रचे गए ग्रंथों में भी दिखाई देती है। उदाहरण के लिए, मनुस्मृति में इसका उल्लेख है। इसके बाद मनुस्मृति के एक श्लोक का जिक्र किया गया है, जिसमें कहा गया है कि जहां महिलाओं का सम्मान होता है, वहां देवता प्रसन्न रहते हैं। हालांकि, पुस्तक यह भी स्पष्ट करती है कि समय के साथ सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों के कारण महिलाओं की स्थिति में उतार-चढ़ाव आया और कई मामलों में उनका दर्जा कमजोर हुआ।

चुनाव आयोग और एसआईआर 

सामाजिक विज्ञान की पुस्तक भारत की चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका पर विस्तृत सामग्री जोड़ी है, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईरआर) के बारे में भी बताया गया है। पुस्तक में कहा गया है कि भारत में चुनाव दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक अभ्यासों में से एक हैं और गलत सूचना, फेक न्यूज, पैसे के प्रभाव व अन्य चुनौतियों के बावजूद चुनाव आयोग निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने में सफल रहा है। इसमें आयोग की स्वतंत्रता, मतदाता सूची तैयार करने, आदर्श आचार संहिता लागू कराने, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और वीवीपैट (VVPAT) के उपयोग व स्वतंत्र एवं शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने की भूमिका को विस्तार से समझाया गया है।

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