हिमाचल, नासिक और अफगानिस्तान में भूकंप, पांच बार कांपी धरती; रिक्टर स्केल पर तीव्रता कितनी?

हिमाचल, नासिक और अफगानिस्तान में भूकंप, पांच बार कांपी धरती; रिक्टर स्केल पर तीव्रता कितनी?

शुक्रवार सुबह महाराष्ट्र के नासिक से लेकर हिमाचल प्रदेश के चंबा और अफगानिस्तान तक भूकंप के झटके दर्ज किए गए। चार भूकंप दर्ज किए गए, जिनमें सबसे ज्यादा तीव्रता 4.4 रही। नासिक में 3.4 और चंबा में 3.0 तीव्रता का झटका आया। अफगानिस्तान में दो बार धरती कांपी। विस्तार से पढ़ें…

देश के अलग-अलग हिस्सों और पड़ोसी क्षेत्र अफगानिस्तान में शुक्रवार सुबह भूकंप के झटके दर्ज किए गए। उपलब्ध भूकंपीय आंकड़ों के मुताबिक नासिक, हिमाचल प्रदेश के चंबा और अफगानिस्तान में कुल चार भूकंप दर्ज हुए। इनमें अफगानिस्तान में आए एक भूकंप की तीव्रता सबसे ज्यादा 4.4 रही। महाराष्ट्र में इससे पहले पालघर में भी दो भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। भूकंप के झटकों का सिलसिला रात करीब 12:05 बजे शुरू हुआ और सुबह 6:36 बजे तक अलग-अलग इलाकों में भूकंपीय गतिविधियां दर्ज होती रहीं। यानी करीब सात घंटे के दौरान नासिक, चंबा और अफगानिस्तान में कई बार धरती कांपी।

नासिक में कितनी तीव्रता का भूकंप आया?

महाराष्ट्र के नासिक में शुक्रवार सुबह 5 बजकर 32 मिनट 39 सेकंड पर भूकंप दर्ज किया गया। इसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 3.4 रही। भूकंप की गहराई जमीन के भीतर करीब तीन किलोमीटर थी। दिए गए विवरण के मुताबिक भूकंप का स्थान 20.461 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 73.748 डिग्री पूर्वी देशांतर पर दर्ज किया गया। झटके महसूस होने के बाद लोगों में डर जरूर पैदा हुआ, लेकिन फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान की जानकारी नहीं दी गई है।

हिमाचल के चंबा में कितनी रही तीव्रता?

हिमाचल प्रदेश के चंबा में भी शुक्रवार सुबह भूकंप का झटका दर्ज किया गया। यहां सुबह 6 बजकर 36 मिनट 28 सेकंड पर 3.0 तीव्रता का भूकंप आया। इसकी गहराई जमीन के भीतर पांच किलोमीटर थी। चंबा में आए भूकंप का स्थान 33.131 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 76.585 डिग्री पूर्वी देशांतर पर दर्ज किया गया। फिलहाल की जानकारी तक इस भूकंप से भी किसी तरह के नुकसान की सूचना नहीं है।

अफगानिस्तान में कितनी बार कांपी धरती?

अफगानिस्तान में शुक्रवार तड़के दो भूकंप दर्ज किए गए। पहला झटका सुबह 4 बजकर 29 मिनट 30 सेकंड पर आया, जिसकी तीव्रता 4.0 रही। इसकी गहराई 147 किलोमीटर दर्ज की गई। इसके करीब 12 मिनट बाद सुबह 4 बजकर 41 मिनट 54 सेकंड पर दूसरा भूकंप आया। इसकी तीव्रता 4.4 रही और गहराई 136 किलोमीटर दर्ज की गई। उपलब्ध आंकड़ों में अफगानिस्तान में आए इन दोनों भूकंपों से हुए नुकसान की कोई जानकारी नहीं दी गई है।

तीन दिन पहले भी महाराष्ट्र में आए थे भूकंप के झटके?

महाराष्ट्र के पालघर जिले में तीन दिन पहले एक घंटे के भीतर भूकंप के दो झटके महसूस किए गए थे। दोनों झटकों की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 3.4 रही। जिला सूचना कार्यालय के अनुसार, पहला झटका सोमवार रात 10 बजकर 04 मिनट पर आया था। इसके करीब एक घंटे बाद रात 11 बजे फिर 3.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। लगातार दो झटकों से स्थानीय लोगों में कुछ समय के लिए चिंता का माहौल बन गया था। हालांकि, अधिकारियों के अनुसार भूकंप से जिले में किसी इमारत को नुकसान नहीं पहुंचा और न ही किसी व्यक्ति के घायल होने की सूचना मिली। दोनों भूकंपों का केंद्र जव्हार तालुका में जमीन से करीब पांच किलोमीटर नीचे था। अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया और किसी बड़े नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई।

भूकंप के दौरान क्या करें?

भूकंप के दौरान जितना संभव हो उतना सुरक्षित रहें। इस बात के प्रति सतर्क रहें कि कौन-से भूकंप वास्तव में इसकी पूर्व-चेतावनी देने वाले भूकंप के झटके होते हैं और बाद में बड़ा भूकंप भी आ सकता है। धीरे-धीरे कुछ कदमों तक सीमित हलचल करें जिससे पास में किसी सुरक्षित स्थान पर पहुंच सकें और भूकंप के झटकों के रुकने पर घर में तब तक रहें जब तक कि आपको यह सुनिश्चित हो जाएं कि बाहर निकलना सुरक्षित है।

यदि आप घर के अंदर हों

  • आप यदि घर के अंदर हों तो जमीन पर झुक जाएं, किसी मजबूत मेज अथवा फर्नीचर के किसी हिस्से के नीचे शरण लें या तब तक मजबूती से पकड़कर बैठे रहें जब तक कि भूकंप के झटके न रुक जाएं।
  • यदि आपके पास कोई मेज या डेस्क न हो तो अपने चेहरे तथा सिर को अपने बाजुओं से ढक लें और बिल्डिंग के किसी कोने में झुक कर बैठ जाएं।
  • किसी आंतरिक दरवाजे के लेंटर, किसी कमरे के कोने में, किसी मेज या यहां तक कि किसी पलंग के नीचे रुककर अपने आपको बचाएं।
  • सीसे, खिड़कियों, दरवाजों तथा दीवारों से दूर रहें या ऐसी कोई चीज जो गिर सकती हो (जैसे लाइटिंग फिक्सचर्स या फर्नीचर), से दूर रहें।

यदि आप घर के बाहर हों

  • यदि आप घर के बाहर हों तो जहां हों वहां से आप न हिलें। इसके साथ ही बिल्डिंग, पेड़ों, स्ट्रीट लाइटों तथा बिजली/टेलीफोन आदि की तारों आदि से दूर रहें।
  • यदि आप किसी खुली जगह पर हों तो वहां तब तक रुके रहें जब तक कि भूकंप के झटके न रुक जाएं।
  • सबसे बड़ा खतरा बिल्डिंग के बाहर, निकास द्वारों तथा इसकी बाहरी दीवारों के पास होता है।
  • भूकंप से संबंधित अधिकांश दुर्घटनाएं दीवारों के गिरने, टूटकर गिरने वाले कांच तथा गिरने वाली वस्तुओं के कारण होती हैं।  
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