इसरो ने आज अंतरिक्ष में ईओएस-05 उपग्रह भेजा है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपण किया गया है। इसरो प्रमुख वी नारायणन ने मिशन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उपग्रह से मिले आंकड़ों के मुताबिक प्रक्षेपण के बाद अनुमानित मानकों से भी बेहतर प्रदर्शन देखा गया है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आज ईओएस-05 उपग्रह का आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपण किया। इसरो प्रमुख वी नारायणन समेत कई पूर्व इसरो अध्यक्षों की मौजूदगी में हुआ प्रक्षेपण कई मायनों में ऐतिहासिक है। इसरो के मुताबिक जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट के माध्यम से किया गया प्रक्षेपण जीएसएलवी की 19वीं उड़ान है। चार सितंबर को मध्यरात्रि के करीब तीन घंटे बाद 02:55 बजे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित उपग्रह भारत का पहला अत्याधुनिक भू-तुल्यकालिक इमेजिंग सैटेलाइट (imaging satellite from Geosynchronous orbit) है।
आसान नहीं रहा अंतरिक्ष तक का सफर
- 2021 में असफल रहा था जीएसएलवी-एफ-10/ईओएस-03 मिशन, ईओएस-05 को इसी का रिप्लेसमेंट माना जा रहा है।
- करीब पांच साल पहले हुए प्रयास के वक्त उड़ान के 307 सेकंड बाद ही विमान में लगे कंप्यूटर ने मिशन को रद्द कर दिया था।
- इसरो के मुताबिक 2021 में क्रायोजेनिक अपर स्टेज में खराबी के कारण मिशन विफल हुआ था।
- मई 2025 में पीएसएलवी-सी61 रॉकेट के माध्यम से भेजा गया ईओएस-09 उपग्रह का प्रक्षेपण भी विफल रहा था।
- इसरो के मुताबिक मई 2025 का प्रयास मोटर केस के चैंबर प्रेशर में गिरावट के कारण नाकाम रहा था।
- इसी वर्ष 16 उपग्रहों के साथ प्रक्षेपित पीएसएलवी-सी62 रॉकेट भी मिशन पूरा करने में असफल रहा था।
- इसरो के मुताबिक प्रक्षेपण के तीसरे चरण में “विसंगति” आने के बाद पीएसएलवी-सी62 रॉकेट उपग्रहों को निर्धारित कक्षा में स्थापित करने में विफल रहा।
- लगभग 8 महीने के अंतराल के बाद शुक्रवार तड़के 2.55 बजे हुआ जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट और ईओएस-05 उपग्रह का प्रक्षेपण सफल रहा।
उपलब्धि पर मिली बधाई, मंत्री बोले- वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति बन रहा भारत
सफल प्रक्षेपण पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बधाई दी। उन्होंने कहा, अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत ने एक और बड़ी छलांग लगाई है। GSLV-F17-EOS-05 के सफल प्रक्षेपण पर ISRO टीम को हार्दिक बधाई। EOS-05 एक अत्याधुनिक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है। ये भूतुल्यकालिक कक्षा में स्थापित किया जाने वाला भारत का पहला इमेजिंग उपग्रह है। इससे बेहतर दृश्य, बहु-स्पेक्ट्रल और हाइपरस्पेक्ट्रल बैंड में उन्नत इमेजिंग की सुविधा मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत की अंतरिक्ष क्षमताएं नई ऊंचाइयों को छू रही हैं, जिससे वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में हमारी स्थिति मजबूत हो रही है।
भारत को अंतरिक्ष में ऐतिहासिक सफलता
इसरो के मुताबिक ईओएस-05 मिशन का मकसद उप-भू-तुल्यकालिक स्थानांतरण कक्षा में स्थापित उपग्रह के माध्यम से पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए अहम जानकारी मुहैया कराना है। मध्य रात्रि के करीब 3 घंटे बाद किए गए प्रक्षेपण को देखने के लिए खगोल विज्ञान में रूचि रखने वाले दर्शक बड़ी संख्या में इसरो के सेंटर पर मौजूद रहे। प्रक्षेपण के करीब 22 मिनट बाद मिशन डायरेक्टर ने प्रक्षेपण सफल होने की घोषणा की। इसके बाद इसरो प्रमुख वी नारायणन ने इससे जुड़ी कुछ प्रमुख बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि एक बार जब पृथ्वी अवलोकन उपग्रह 05 कक्षा में परिचालन में आ जाएगा, तो यह भारत का भू-कक्षा से पहला समर्पित इमेजिंग उपग्रह बन जाएगा, जो हमारे देश के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक डेटा प्रदान करेगा।
सफलता के पीछे इसरो के वैज्ञानिकों का टीम वर्क
इसरो चीफ नारायणन ने बताया कि आज का लॉन्च, श्रीहरिकोटा से इसरो का 107वां प्रक्षेपण है। उन्होंने कहा कि जीएसएलवी-एफ17 में लगातार सुधार और उन्नयन के बाद लॉन्च व्हीकल मौजूदा स्वरूप में काम कर रहा है। इसरो प्रमुख ने कहा कि औद्योगिक जगत के समर्थन के अलावा इस मिशन की सफलता के पीछे इसरो के वैज्ञानिकों का टीम वर्क है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों के परिवार में शामिल लोगों की भी अहम भूमिका रही है।
मिशन की सफलता पर इसरो प्रमुख का एक और बयान?
प्रक्षेपण के बाद आंध्र प्रदेश में ही मीडिया से बात करते हुए इसरो प्रमुख नारायणन ने कहा, उन्होंने कहा कि यह मिशन हमारे देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि पहली बार भारत / इसरो एक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह को भूतुल्यकालिक कक्षा में स्थापित करने जा रहा है। ये भारत और उसके आसपास के क्षेत्रों की निरंतर निगरानी के लिए अत्यंत आवश्यक है… प्रधानमंत्री के निर्देशानुसार इसरो छह और प्रक्षेपणों का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि गगनयान मिशन पर भी सक्रिय रूप से काम हो रहा है। अंतरिक्ष के क्षेत्र में स्टार्टअप को लेकर इसरो प्रमुख ने कहा कि देश में माहौल सकारात्मक है।



