मोतिहारी में वक्फ अमेंडमेंट एक्ट के खिलाफ मुस्लिम समाज का आंदोलन, औकाफ की सुरक्षा हर मुसलमान की नैतिक और मजहबी जिम्मेदारी: मौलाना वली रहमानी

मोतिहारी में वक्फ अमेंडमेंट एक्ट के खिलाफ मुस्लिम समाज का आंदोलन, औकाफ की सुरक्षा हर मुसलमान की नैतिक और मजहबी जिम्मेदारी: मौलाना वली रहमानी

औकाफ कौम की अमानत है और उसकी सुरक्षा देश के प्रत्येक मुसलमानों की नैतिक व मजहबी जिम्मेवारी है. जबतक सरकार यह कानून वापस नहीं ले लेती, तब तक देश का मुस्लिम समाज खामोश नहीं रहेगा. उक्त बातें अमीर-ए-शरीयत बिहार,झारखंड,उड़िसा व पश्चिम बंगाल हजरत मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी ने शुक्रवार की रात शहर के मठिया जिरात स्थित ईदगाह में इमारत-ए-शरीया पूर्वी चंपारण द्वारा आयोजित जिला स्तरीय औकाफ संरक्षण सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही. संशोधन बिल को काला कानूून करार देते हुए मुसलमानों से लंबी लड़ाई लड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी. कहा कि वक्फ संपतियां मुसलमानों के धार्मिक व सामाजिक कल्यार्ण के लिए समर्पित है और इसमें किसी भी प्रकार की दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं है|

प्रमुख वक्ता अमीर-ए-शरीयत मौलाना वली रहमानी ने कहा कि बिहार, झारखंड और उड़ीसा में औकाफ की संपत्तियों की लगातार उपेक्षा हो रही है, जिसे रोका जाना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से वक्फ एक्ट 1995 की पुनरावृत्ति कर न्यायोचित कानून बनाने की मांग की। सम्मेलन में हज़ारों कि संख्या में मुस्लिम समाज के लोगों ने भाग लिया।

वक्फ संपियों के इस्तेमाल की बाबत विस्तार से जानकारी दी और कहा कि भ्रम फैलाकर देशवासियों को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है.वक्फ के बारे में हर मुसलमानों के साथ देश के अमन पंसद सेक्यूलर लोगों को बताने का आह्वान किया और कहा कि सबों के सहयोग से इस अभियान को अंजाम तक पहुंचाया जाएगा|

नरकटिया विधायक डॉ.शमीम अहमद ने कहा कि यह कानून भारतीय संविधान पर सीधा हमला है. वक्फ की संपतियों को हड़पने की के लिए यह कानून लायी गयी है. पूर्वी चंपारण के काजी प्रसिद्ध उलेमा मुफ्ती रेयाज अहमद ने अतिथियों का स्वागत किया और भीड़ से चट्टानी एकता के साथ आंदोलन में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेने की अपील की|

मौके पर नायब काजी मुफ्ती वसी अहमद, डॉ.तबरेज अजीज, सैयद साजिद हुसैन, डॉ.एसएम मिन्नतुल्लाह, डॉ.सबा अख्तर, डॉ.शमीमूल हक, अशरफ अली अंसार, डॉ.एमयू अख्तर, ओजैर अंजुम, इन्तेजारूल हक, मौलाना एहसानुल्लाह, मौलाना बदीउज्जमा, हामिद जफर, तारीक अनवर, डॉ. नौशाद, व मुफ्ती साजिद इकबाल कासमी ने अपने अपने विचार व्यक्त किये|

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