चीनी विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में दो टूक कहा, ‘रूस सहित दुनिया भर के सभी देशों के साथ सामान्य आर्थिक, व्यापारिक और ऊर्जा सहयोग करना चीन के लिए कानूनी तौर पर वैध है। हम अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार तेल खरीद करते रहेंगे।’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने के लिए भारत पर भारी-भरकम टैरिफ लगा दिया है। अब ट्रंप, चीन पर भी रूस से तेल खरीदने के लिए टैरिफ लगाने पर विचार कर रहे हैं। ये कहना है अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का। एक इंटरव्यू में जेडी वेंस ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप, चीन पर टैरिफ लगाने पर विचार कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कुछ भी तय नहीं है।
वेंस बोले- चीन पर टैरिफ लगाना अभी तय नहीं
इंटरव्यू के दौरान एंकर ने वेंस से पूछा कि अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने के लिए भारत पर भारी-भरकम टैरिफ लगाए हैं तो क्या अमेरिका, चीन के खिलाफ भी ऐसी कोई कार्रवाई कर सकता है? इस पर वेंस ने कहा कि ‘राष्ट्रपति ट्रंप इस पर विचार कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उन्होंने इस पर कोई फैसला नहीं किया है। चीन का मुद्दा थोड़ा जटिल है क्योंकि चीन से हमारे रिश्ते ही कुछ ऐसे हैं। रूस की स्थिति को छोड़ दें तो भी चीन पर टैरिफ लगाने से कई अन्य चीजें भी बिगड़ सकती हैं। इसलिए राष्ट्रपति ट्रंप फिलहाल इस पर विचार कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने अभी तक कोई फैसला नहीं किया है।’
चीन की अमेरिका को दो टूक
सीमा शुल्क आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीन का रूसी तेल आयात बढ़कर 10 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया, जो मार्च के बाद से अब तक का सबसे ज्यादा मासिक तेल आयात है। हालांकि, इस साल चीन का रूस से कुल आयात 2024 की तुलना में 7.7 प्रतिशत कम रहा। वहीं अमेरिका की टैरिफ धमकियों के बीच चीन ने रूस के साथ अपने ऊर्जा व्यापार का बचाव किया। चीनी विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में दो टूक कहा, ‘रूस सहित दुनिया भर के सभी देशों के साथ सामान्य आर्थिक, व्यापारिक और ऊर्जा सहयोग करना चीन के लिए कानूनी तौर पर वैध है। हम अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार तेल खरीद करते रहेंगे।’
अमेरिका ने भारत पर टैरिफ लगाया
पिछले हफ्ते ट्रंप ने रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का एलान किया। इस तरह भारत पर अमेरिका का कुल टैरिफ 50 प्रतिशत हो गया है। अतिरिक्त टैरिफ 27 अगस्त से लागू होगा। भारत ने भी अमेरिका के टैरिफ पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इसे अनुचित और अविवेकपूर्ण बताया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत का ऊर्जा आयात बाज़ार के कारकों और हमारी ऊर्जा जरूरतों से प्रेरित है और इसका उद्देश्य अपनी 1.4 अरब आबादी के लिए ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना है।



