झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 2 जुलाई से शुरू हुआ छात्र आंदोलन सरकार के 22 परीक्षाएं रद्द करने, छह स्थगित करने और 17 परीक्षाओं की CID जांच के फैसले के बाद निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। आंदोलन के बाद जहां छात्र संगठनों ने इसे बड़ी जीत बताया है, वहीं चयनित अभ्यर्थी परीक्षा रद्द किए जाने के विरोध में अब सड़क पर उतर आए हैं। चलिए जानते हैं यह आंदोलन कब और कैसे शुरू हुआ है व इसका कितना असर पड़ा है?
झारखंड जैसे पिछड़े राज्य के छात्रों ने वो कर दिखाया, जो इसके पहले कभी नहीं हुआ। एक आंदोलन हुआ और उसके बाद अब तक 45 परीक्षाएं रद्द और स्थगित करनी पड़ी हैं। सरकार को झुकना पड़ा। इस सच को हलक से नीचे उतारने में सरकार को 25 दिन से ज्यादा का समय लग गया।
गांव-कस्बों के छात्रों ने रांची में आकर अपनी पीड़ा बताई तो पहले उनके हिस्से में आईं लाठियां और आंसू गैस के गोले। वे सच बता रहे थे, लेकिन सरकार को लग रहा था कि उसके वजूद पर सवाल उठ रहा है। वह नहीं मानी, जिद पर अड़ी रही। फिर और छात्र जमा हुए। बोले, नहीं, हम सच कह रहे हैं, परीक्षाओं में धांधली है।
जब छात्रों की आवाज कमजोर नहीं पड़ी, दिनों-दिन मजबूत होती गई, तब जाकर सरकार ने माना कि हां, ये बेरोजगार झूठ नहीं बोल रहे हैं। इनका हक मारा जा रहा है, इसलिए ये दर्द सहते हुए सीना तानकर सामने आए हैं। जब सरकार ने सच स्वीकार किया तो परिणाम सामने आया 22 परीक्षाओं का रद्दीकरण, छह परीक्षाओं का स्थगन और 17 आयोजित परीक्षाओं की सीआईडी जांच का फैसला।
संभवतः आजाद भारत में यह पहली बार हो रहा है कि किसी राज्य में इतनी संख्या में परीक्षाएं रद्द की गई हैं। जो सरकार कभी मानने को तैयार नहीं थी, वह अब कह रही है कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनेगा। आंतरिक निगरानी प्रकोष्ठ और परीक्षा सुधार समिति गठित की जाएगी। यानी समझा यह जाए कि भ्रष्टाचार का खेल चलता रहता, अगर ये छात्र आंदोलन सामने न आता।
सबसे पहले समझिए, सीआईडी जांच के घेरे में क्या?
जेपीएससी-जेएसएससी सीआईडी जांच के घेरे में टीडीपीएल के कई कर्मचारियों की गिरफ्तारियां हुई हैं। इस मामले में सीआईडी ने 24 जुलाई को हेमंत वर्मा, प्रदीप कुकर सिंह और संजय कुमार समेत तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया था। जांच का दायरा सिर्फ परीक्षा संचालक तक सीमित नहीं रहा। एजेंसी के चयन, टेंडर प्रक्रिया, संचालन और डेटा प्रोसेसिंग की भी जांच-पड़ताल चल रही है। जेएसएससी के सचिव सुधीर गुप्ता से पूछताछ की गई। चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की भी जांच की गई। जांच में अभय तिवारी का नाम प्रमुख रूप से आया। इसके बाद सीआईडी ने उनकी पत्नी और भाई को भी गिरफ्तार किया। इस मामले में सीआईडी की कार्रवाई जारी है और कई लोगों से पूछताछ चल रही है। इसके बाद राज्य सरकार ने कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द कर दिया। 19 अगस्त को सरकार ने 22 परीक्षाएं रद्द करने और 17 की सीआईडी जांच का फैसला सामने आया है।
जो परीक्षाएं रद्द हुईं, उनमें क्या खामियां थीं?
सरकार ने जिन परीक्षाओं को रद्द किया है, उनमें 11वीं-13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भी शामिल है। इस परीक्षा के माध्यम से कुल 342 अधिकारियों की नियुक्ति हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, सीआईडी की ओर से अभय तिवारी से पूछताछ के दौरान कथित तौर पर ऐसे आरोप सामने आए कि कुछ अभ्यर्थियों ने पैसे देकर नौकरी हासिल की थी। इसके बाद इस परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे। सरकार ने अब इसे भी रद्द की गई परीक्षाओं की सूची में शामिल कर लिया है।
बाकी की जांच क्यों हो रही है?
17 परीक्षाओं के परिणामों और नियुक्तियों की सीआईडी जांच का आदेश दिया गया है। इनमें सिविल जज, जेपीएससी सिविल सर्विस, कृषि पदाधिकारी, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी, सहायक लोक अभियोजक, सहायक अभियंता और डेंटल डॉक्टर जैसी परीक्षाएं शामिल हैं। सभी में गड़बड़ियों की आशंका जताई गई है। वैसे सीआईडी की जांच चल रही है।
छात्र आंदोलन कैसे शुरू हुआ?
राजधानी रांची में दो जुलाई को मोरहाबादी मैदान स्थित बापू वाटिका से छात्र आंदोलन शुरू हुआ था। इसके बाद यह दो गुटों में बंट गया। एक देवेंद्र नाथ महतो का गुट, जिसे राजनीतिक मंच यानी जेपीएससी छात्र न्याय मंच नाम दिया गया। दूसरा गुट जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के नाम से सामने आया। इस गुट में सिर्फ छात्र शामिल थे।
फिर भी नहीं टूटी एकता…
छात्र आंदोलन को दो गुटों में बांटने के पीछे भी राज्य सरकार की रणनीति ‘फूट डालो और राज करो’ बताई जा रही है, जिससे आंदोलन कमजोर पड़ जाए। लेकिन आंदोलन और मजबूत हो गया। दोनों गुटों के एक ही परिसर में दो टेंट लगे। देवेंद्र नाथ महतो एक राजनीतिक पार्टी जेएलकेएम के उपाध्यक्ष हैं और अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए छात्र आंदोलन का सहारा लिया।
महतो की भूमिका…
छात्र आंदोलन में देवेंद्र नाथ महतो की भूमिका अहम मानी जाती है। दिल्ली के जंतर-मंतर के छात्र आंदोलन के बाद झारखंड के छात्र आंदोलन को देखा गया। देश ही नहीं, विदेशी मीडिया भी इस आंदोलन को कवर करने पहुंची। कई सामाजिक संगठनों की ओर से सहयोग किया गया। सबसे दिलचस्प देवेंद्र नाथ महतो का आमरण अनशन रहा। इस दौरान उनकी तबीयत भी बिगड़ी। सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया। इसके बाद उन्होंने जल ग्रहण किया, लेकिन भूख हड़ताल जारी रखी। भूख हड़ताल के दौरान ही वे विधानसभा का घेराव करने पहुंच गए। हालांकि, पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर अस्पताल में भर्ती कराया। जब 17 अगस्त को राज्य सरकार ने सीजीएल परीक्षा रद्द करने सहित 18 परीक्षाओं को रद्द करने का ऐलान किया, तब देवेंद्र नाथ महतो ने अपना अनशन तोड़ा। हालांकि,महतो ने परीक्षा व्यवस्था को लेकर अपने एक पूर्व के बयान में सरकार को जरूरी सुझाव भी दिया था। साथ ही कहा कि था कि उनके पास बेहतर तरीके से परीक्षा आयोजित कराने का ब्लूप्रिंट है, जिसे वो सरकार को देंगे।
अनशन समाप्त, पर आंदोलन जारी
देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि राज्य सरकार ने हम लोगों की अधिकांश मांगें मान ली हैं, इसलिए अनशन खत्म किया जाता है। लेकिन छात्र हितों के लिए आंदोलन जारी रखने का एलान कर दिया। इसके बाद छात्रों के दूसरे गुट जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच का धरना जारी रहा। लेकिन 19 अगस्त को इस गुट ने भी अपना अनशन समाप्त कर दिया। साथ ही राज्य सरकार को दो महीने का समय पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने और जेपीएससी-जेएसएससी में सुधार करने की मांग की है। यदि दो महीने में ऐसा नहीं होता है तो फिर से बड़ा आंदोलन करने की बात कही है।
अब भी कौन कर रहा आंदोलन और क्यों?
वहीं, सीएम हेमंत सोरेन की ओर से जेपीएससी-जेएसएससी की परीक्षाओं को रद्द करने और सीजीएल रद्द करने के आदेश के बाद अब चयनित अभ्यर्थियों का प्रोजेक्ट भवन मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन शुरू हो गया है। ये लोग पिछले सात महीने से अलग-अलग जिलों में नौकरी कर रहे थे।



