‘बिहार के 65 लाख मतदाताओं के नाम और विवरण वेबसाइट पर अपलोड’, चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को कारण भी बताया

‘बिहार के 65 लाख मतदाताओं के नाम और विवरण वेबसाइट पर अपलोड’, चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को कारण भी बताया

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा है कि बिहार के उन 65 लाख मतदाताओं के नाम और विवरण, जो 1 अगस्त को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में शामिल नहीं थे, राज्य के सभी 38 जिला निर्वाचन अधिकारियों की वेबसाइटों पर डाल दिए गए हैं। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सूची में उनके शामिल न होने के कारण भी शामिल हैं, जिनमें मृत्यु, सामान्य निवास का स्थानांतरण या डुप्लिकेट प्रविष्टियां शामिल हैं।

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर बताया कि बिहार के 65 लाख मतदाताओं के नाम और विवरण (जो 1 अगस्त को प्रकाशित मसौदा सूची में शामिल नहीं थे) राज्य के सभी 38 जिला निर्वाचन अधिकारियों की वेबसाइटों पर डाल दिए गए हैं। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सूची में उनके शामिल न होने के कारण भी शामिल हैं, जिनमें मृत्यु, सामान्य निवास का स्थानांतरण या डुप्लिकेट प्रविष्टियां शामिल हैं।

चुनाव आयोग ने कहा कि सूची की भौतिक प्रतियां बिहार के गांवों में पंचायत भवनों, प्रखंड विकास कार्यालयों और पंचायत कार्यालयों में प्रदर्शित की गई हैं, ताकि लोग आसानी से उन तक पहुंच सकें और पूछताछ कर सकें। चुनाव आयोग ने कहा कि सूचियों की ऑनलाइन उपलब्धता के बारे में प्रमुख समाचार पत्रों, रेडियो और टेलीविजन पर विज्ञापन भी जारी किए गए हैं और सोशल मीडिया पर भी पोस्ट किए गए हैं।

14 अगस्त के निर्देशों का पालन करते हुए हलफनामा दायर
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के 14 अगस्त के निर्देशों का पालन करते हुए हलफनामा दायर किया है, जिसमें उसे चुनावी राज्य बिहार में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान मसौदा मतदाता सूची में शामिल न किए गए लगभग 65 लाख मतदाताओं का ब्यौरा बूथ-वार प्रकाशित करने का निर्देश दिया गया था।

दावों के साथ आधार कार्ड की प्रतियां प्रस्तुत कर सकते हैं लोग
चुनाव आयोग ने शीर्ष अदालत को यह भी बताया कि उसके सार्वजनिक नोटिस में साफ तौर पर बताया गया है कि बिहार मतदाता सूची के मसौदे में नाम शामिल न होने से व्यथित मतदाता अपने दावों के साथ आधार कार्ड की प्रतियां प्रस्तुत कर सकते हैं। शीर्ष अदालत को सूचित किया गया कि लगभग 65 लाख नाम मसौदा सूची से हटा दिए गए थे, जबकि उनके नाम जनवरी 2025 में संक्षिप्त संशोधन के बाद तैयार की गई मतदाता सूची में शामिल थे।

याचिकाओं पर आज फिर से सुनवाई
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के चुनाव आयोग के कदम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आज यानी शुक्रवार को फिर से सुनवाई शुरू करेगी। चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाएं राजद सांसद मनोज झा, एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर), पीयूसीएल, कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा और बिहार के पूर्व विधायक मुजाहिद आलम की ओर से दायर की गई थीं।

कोर्ट से निर्देश को रद्द करने का आदेश देने की मांग की गई थी
याचिकाओं में चुनाव आयोग के 24 जून के उस निर्देश को रद्द करने का आदेश देने की मांग की गई थी, जिसके तहत बिहार में मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को मतदाता सूची में बने रहने के लिए नागरिकता का प्रमाण प्रस्तुत करना आवश्यक किया गया था। याचिकाओं में आधार और राशन कार्ड जैसे व्यापक रूप से प्रचलित दस्तावेजों को सूची से बाहर रखे जाने पर भी चिंता जताई गई थी। कहा गया था कि इससे गरीब और हाशिए पर पड़े मतदाताओं (विशेषकर ग्रामीण बिहार में) पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

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