अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ युद्ध जीतने के बाद तेल और गैस की कीमतों में बड़ी गिरावट का दावा किया है। दूसरी ओर ईरान ने अपनी ऊर्जा सुविधाओं और तेल टैंकरों पर हमले की स्थिति में अमेरिका को गंभीर जवाब देने की चेतावनी दी है। तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने इस्राइल पर अमेरिका-ईरान शांति समझौता बिगाड़ने का आरोप लगाया है, जबकि नेतन्याहू ईरानी शासन के अंत को अपना प्रमुख लक्ष्य बता रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका की जीत के बाद तेल की कीमतों में तेज गिरावट आएगी। ट्रंप ने सोमवार को अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर लिखा कि युद्ध जीतने के बाद तेल की कीमतें तेजी से गिरेंगी। उन्होंने कहा कि गैस की कीमत पहले तीन डॉलर प्रति गैलन तक आ सकती है और अंततः दो डॉलर प्रति गैलन से भी नीचे जा सकती है। ट्रंप ने यह भी दोहराया कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।
ईरान ने अमेरिका को क्या चेतावनी दी?
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने अमेरिका को ईरान की ऊर्जा सुविधाओं पर किसी भी कार्रवाई के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ईरान का तेल और गैस उत्पादन तंत्र काफी फैला हुआ है और उसकी सुरक्षा आसान नहीं है। गालिबाफ ने कहा, ‘हमारी संपत्तियों पर हमला करेंगे तो आप पर भी हमला होगा। हम यह पहले ही साबित कर चुके हैं। उन ठिकानों से पूछिए, जो अब काम करने लायक नहीं बचे।’ यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी अधिकारियों की ओर से ईरान के तेल टैंकरों को निशाना बनाने की धमकी दी जा रही है।
अमेरिका ने ईरान के तेल टैंकरों को लेकर क्या कहा?
अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि अगर ईरान अमेरिकी जहाजों पर हमला करता है तो अमेरिका उसके तेल टैंकरों को नष्ट कर देगा। उन्होंने दावा किया कि ईरान के पास न नौसेना बची है और न वायुसेना। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने तीन ईरानी कच्चे तेल के टैंकरों पर हमले का वीडियो भी साझा किया। कमांड के मुताबिक, ये टैंकर अरबों डॉलर के उस नेटवर्क का हिस्सा थे, जिससे ईरान का रिवोल्यूशनरी गार्ड और उसके क्षेत्रीय सहयोगी आर्थिक मदद हासिल करते हैं। सेंटकॉम कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि अमेरिकी जहाजों पर हमला हुआ तो ईरान की तेल आपूर्ति पर और बड़ी आर्थिक कीमत थोपी जाएगी।
तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने युद्ध के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया?
दूसरी ओर, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने इस्राइल पर मध्य पूर्व में संघर्ष भड़काने और शांति प्रयासों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस्राइल की कार्रवाई के कारण जून में ईरान और अमेरिका के बीच हुआ 14 सूत्री इस्लामाबाद समझौता पटरी से उतर गया। एर्दोगन ने कहा कि इस युद्ध की कीमत सिर्फ ईरान और खाड़ी देशों को नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को चुकानी पड़ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक शांति को खतरे के रूप में देखने वाली सोच नहीं बदलेगी, तब तक क्षेत्र में संकट खत्म नहीं होगा। समझौते में सैन्य कार्रवाई रोकने, होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही, प्रतिबंधों में राहत और ईरान के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर के अमेरिकी समर्थित आर्थिक विकास कार्यक्रम जैसे प्रावधान शामिल थे।
इस्राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू का रुख क्या?
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ईरान की सरकार का अंत करीब है। उन्होंने कहा कि ईरानी शासन कमजोर है और अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि इस्राइल खुद की रक्षा करने और अपने दुश्मनों पर हमला करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने विरोधियों को चेतावनी दी, ‘हमें आजमाने की कोशिश मत करो।’ नेतन्याहू ने कहा कि ईरानी शासन को गिराना अभी पूरा किया जाने वाला प्रमुख लक्ष्य है और इससे मध्य पूर्व का स्वरूप तथा उनके लोगों का इतिहास स्थायी रूप से बदल जाएगा।



