इस्राइल और अमेरिका की तरफ से ईरान पर हमले शुरू किए जाने के एक महीने बाद भी युद्ध खत्म नहीं हुआ है। हालांकि, तेल-गैस सप्लाई के लिए नई योजना बना रहे खाड़ी देश : इस बीच ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य बंद किए जाने की वजह से दुनिया में ऊर्जा संकट जरूर खड़ा हो गया। यूरोप से लेकर एशिया तक कई देशों को होर्मुज के बंद होने की वजह से अपनी ऊर्जा जरूरतों को प्रबंधित करना पड़ रहा है। साथ ही तेल-गैस की आपूर्ति करने वाले देशों को भी मुश्किलें झेलनी पड़ रही हैं।
तेल-गैस सप्लाई के लिए नई योजना बना रहे खाड़ी देश : क्यों अहम है होर्मुज?
होर्मुज जलडमरूमध्य एशिया और यूरोप के लिए तेल सप्लाई का मुख्य रास्ता है। भारत भी लंबे समय तक अपनी बड़ी तेल जरूरतों के लिए इसी मार्ग पर निर्भर रहा है।
इस मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट से तेल की कीमतों और सप्लाई दोनों पर असर पड़ सकता है।
खाड़ी देशों की नई रणनीति
खाड़ी देश अब होर्मुज पर निर्भरता कम करने के लिए कई बड़े कदम उठा रहे हैं:
- पाइपलाइन विस्तार: सऊदी अरब रेड सी तक तेल पहुंचाने के लिए पाइपलाइन का उपयोग बढ़ा रहा है
- वैकल्पिक बंदरगाह: फुजैराह और जेद्दा जैसे पोर्ट्स को विकसित किया जा रहा है
- नए कॉरिडोर: India-Middle East-Europe Corridor (IMEC) जैसे प्रोजेक्ट से सप्लाई नेटवर्क मजबूत होगा
भारत की तैयारी
भारत ने भी अपनी ऊर्जा रणनीति को मजबूत किया है:
- डाइवर्सिफिकेशन: अब भारत 40+ देशों से तेल आयात कर रहा है
- रूस से सप्लाई: रूस से सीधी आपूर्ति से होर्मुज पर निर्भरता कम हुई
- स्ट्रेटेजिक रिजर्व: आपात स्थिति से निपटने के लिए भंडारण और रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाई गई
भारत को क्या फायदा?
इन बदलावों से भारत को कई बड़े फायदे मिल सकते हैं:
ऊर्जा सुरक्षा मजबूत – एक ही रूट पर निर्भरता कम
सस्ता तेल मिलने की संभावना – ज्यादा विकल्प, बेहतर कीमत
वैश्विक स्थिति मजबूत – IMEC से भारत की भूमिका बढ़ेगी
सप्लाई में स्थिरता – संकट में भी तेल की उपलब्धता बनी रहेगी
क्या हैं चुनौतियां?
- पूरी तरह से होर्मुज पर निर्भरता अभी खत्म नहीं हुई
- नए रूट्स की क्षमता सीमित है
- लंबे समय तक संकट रहने पर कीमतों में उछाल संभव
होर्मुज संकट ने दुनिया को यह सिखाया है कि ऊर्जा के लिए एक ही मार्ग पर निर्भर रहना जोखिम भरा है। खाड़ी देशों की नई योजनाएं और भारत की मजबूत रणनीति यह सुनिश्चित करती हैं कि भविष्य में किसी भी बड़े संकट के बावजूद देश की ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित रहे। आने वाले समय में भारत न सिर्फ सुरक्षित रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।



