ईरान से कच्चे तेल के साथ अब गैस आयात का भी खुला रास्ता, आर्थिक प्रतिबंध हटने से भारत को होगा क्या फायदा?

ईरान से कच्चे तेल के साथ अब गैस आयात का भी खुला रास्ता, आर्थिक प्रतिबंध हटने से भारत को होगा क्या फायदा?

इस साल युद्ध विराम होने पर ट्रंप प्रशासन ने 20 मार्च को ईरानी तेल की खरीद के लिए 30 दिनों की प्रतिबंध छूट दी थी। तब भारत ने ईरान के खार्ग द्वीप से 2,77,321 टन ईरानी कच्चा तेल मंगाया। करीब बीस लाख टन अतिरिक्त कच्चा तेल दूसरे जहाज से आया। उस वक्त कच्चे तेल के दाम इंटरनेशनल मार्केट मे 156 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए थे जबकि फरवरी के 26 फरवरी को 69 डॉलर प्रति बैरल थे।

ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध हटने के साथ ही भारत के लिए अब सस्ता व अपेक्षाकृत ज्यादा गुणवत्ता युक्त कच्चा तेल मिलने का रास्ता साफ हो गया है। खुद ईरान ने भारत की तेल जरूरतें पूरी करने का भरोसा दिया है। तेल के साथ साथ प्राकृतिक गैस भी ईरान से मंगाई जाएगी।

अमेरिका- ईरान समझौता लागू हो जाने के बाद ईरान के लिए अपना ईंधन निर्यात करने का पूरा मौका मिलने जा रहा है। पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय से ईरानी तेल आयात के बाबत पूछे जाने पर अधिकारियों ने कहा कि हम लोग 40 देशों से तेल मंगाते हैं। भारतीय रिफाइनरियां ईरान सहित तमाम देशों से कच्चा तेल खरीदने का निर्णय करती हैं। इसका आधार रिफाइनरी की तेल शोधक क्षमता, दाम, दूरी व अन्य तकनीकी-वाणिज्यिक वजहें होती हैं।

ईरान ने दिया ऊर्जा आपूर्ति का भरोसा

भारत में ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फतह अली ने हाल में कहा कि ईरान एक बार फिर भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हो सकता है। ईरान के पास विशाल तेल और गैस संसाधन भारत की ऊर्जा जरूरतों को लंबे समय तक पूरा कर सकते हैं। भारत पहले भी ईरान का एक प्रमुख तेल ग्राहक रहा है। प्रतिबंध पूरी तरह हटने के बाद केवल तेल निर्यात ही नहीं, बल्कि भारत-ईरान के बीच द्विपक्षीय व्यापार और संयुक्त निवेश तेजी से बढ़ेंगे।

होर्मुज जलमार्ग से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही में लगेगा वक्त
अमेरिकी नाकेबंदी हटने के बाद अब भी होर्मुज जलमार्ग अभी जहाजों के आवागमन के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। यहां पर अब ईरानी समुद्री सुरंगों को हटाने के बाद ही तेल टैंकरों की आवाजाही हो पाएगी। इसके अलावा ईरान के अपने ऊर्जा केंद्रों को दुरुस्त करना है जिनको अमेरिकी हमलों से नुकसान हुआ।

मार्च-अप्रैल में सीमित अवधि में भारत ने मंगाया था ईरानी तेल
इस साल युद्ध विराम होने पर ट्रंप प्रशासन ने 20 मार्च को ईरानी तेल की खरीद के लिए 30 दिनों की प्रतिबंध छूट दी थी। तब भारत ने ईरान के खार्ग द्वीप से 2,77,321 टन ईरानी कच्चा तेल मंगाया। करीब बीस लाख टन अतिरिक्त कच्चा तेल दूसरे जहाज से आया। उस वक्त कच्चे तेल के दाम इंटरनेशनल मार्केट मे 156 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए थे जबकि फरवरी के 26 फरवरी को 69 डॉलर प्रति बैरल थे। वर्ष 2018-19 में भारत के कुल क्रूड ऑयल आयात में ईरान की हिस्सेदारी 10.6 प्रतिशत होती थी। जब 2019 में अमेरिका ने ईरान पर व्यापारिक प्रतिबंध लगाए तो उसके बाद से भारत का आयात कम होता चला गया।

ईरानी तेल भारत के लिए कई तरह से फायदेमंद
यूं तो भारत अब अमेरिका, वेनेजुएला, रूस समेत 40 देशों के साथ कच्चा तेल आयात करता है। फिर भी भारत के लिए, ईरानी कच्चे तेल पुनः आयात करना कई तरह से फायदेमंद है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान से भौगोलिक निकटता के कारण जहाजों की परिचालन लागत अमेरिका व रूस के मुकाबले कम आती है, वहीं बीमा लागत भी कम होती है। भारत को तेल कीमत का भुगतान डॉलर के बजाए रुपये में करने की सुविधा भी मिली हुई है ।

इसके अलावा ईरान से भारत को 60 से 90 दिनों की क्रेडिट अवधि की अनुमति मिलती रही है। ईरानी तेल घनत्व, सल्फर की मात्रा के लिहाज से बेहतर माना जाता है और अशुद्धियों के स्तर अपेक्षाकृत कम होता है। ईरान के पास 1,200 ट्रिलियन क्यूबिक फीट गैस भंडार भी है। भारत को प्राकृतिक गैस भी काफी जरूरत है।

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