पश्चिम एशिया में इस समय वार्ता और वार दोनों साथ चल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि उनके दखल के बाद इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच लड़ाई रुक गई है। ट्रंप के मुताबिक, इस्राइल अब बेरूत पर हमला नहीं करेगा और हिजबुल्ला भी गोलाबारी रोकेगा। साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता भी आखिरी दौर में है। लेकिन जमीन पर हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। ट्रंप के इस दावे के कुछ ही घंटों बाद लेबनान की तरफ से दो रॉकेट दागे गए। इस्राइली वायुसेना ने इन्हें हवा में ही मार गिराया। दूसरी तरफ, ईरान ने भी अभी तक अमेरिकी शांति प्रस्ताव पर दस्तखत नहीं किए हैं। सूत्रों का कहना है कि ईरान सिर्फ वादों पर भरोसा नहीं करेगा। वह प्रतिबंध हटाने और सुरक्षा के मोर्चे पर ठोस जमीनी कदम चाहता है।
कुवैत-बहरीन पर हमलों के बाद यूएई ने खाड़ी देशों से किया एकजुट होने का आह्वान
ईरान द्वारा कुवैत और बहरीन पर किए गए हमलों के बाद यूएई ने खाड़ी देशों से एकजुट रुख अपनाने का आह्वान किया। संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति के सलाहकार अनवर गरगाश ने कहा कि कुवैत और बहरीन के खिलाफ बार-बार होने वाली ईरानी आक्रामकता के लिए खाड़ी देशों को एक दृढ़ और एकजुट रुख अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि किसी भी खाड़ी देश को इन हमलों का अकेले सामना करने के लिए नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि खाड़ी सहयोग परिषद के सदस्य देशों की सुरक्षा आपस में जुड़ी हुई है, उनके हित साझा हैं और उनका भविष्य एक ही है। यह आक्रामकता किसी एक देश को विशेष रूप से निशाना नहीं बनाती, बल्कि हम सभी को निशाना बनाती है।
ईरानी संसद के डिप्टी स्पीकर बोले- तेहरान बातचीत करेगा, लेकिन अमेरिका पर भरोसा नहीं
ईरानी संसद के उपसभापति का कहना है कि ईरान बातचीत करेगा लेकिन उसे अमेरिका के वादों पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान जरूरत पड़ने पर बातचीत करेगा, लेकिन उसे अमेरिका द्वारा किए गए किसी भी वादे पर भरोसा नहीं है। ईरान की अर्ध-सरकारी तसनीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, इस्लामिक सलाहकार सभा के उपाध्यक्ष मोजतबा निकजाद ने कहा, “यह कहना सही नहीं है कि हम केवल लड़ते हैं और बातचीत नहीं करते।”
निकजाद ने ईरान में अकाल या युद्ध से संबंधित व्यवधान के बारे में विदेशी मीडिया के दावों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि संघर्ष के चरम पर, 70 लाख लोग विस्थापित हुए, जिनमें से कई देश के उत्तरी भाग में चले गए, लेकिन सरकारी प्रबंधन के कारण किसी को भी बुनियादी सामान, रोटी या आवास प्राप्त करने में कोई समस्या नहीं हुई।
‘अमेरिका के लिए सबक साबित होने चाहिए ईरान के हमले’, मिसाइलें दागने के बीच IRGC की चेतावनी
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड का कहना है कि तेहरान के जवाबी हमले अमेरिका के लिए सबक साबित होने चाहिए। आईआरजीसी के जनसंपर्क विभाग ने पश्चिम एशियाई देशों में रात भर हुए हमलों के बारे में एक जारी बयान में ये बात कही। इसमें कहा गया है, “कल देर रात, अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक ईरानी तेल टैंकर पर मिसाइल से हमला किया, जिससे टैंकर के इंजन कक्ष को नुकसान पहुंचा।”
आईआरजीसी ने कहा कि इस आक्रामकता और होर्मुज जलडमरूमध्य को नियंत्रित करने वाले नियमों के उल्लंघन के जवाब में अमेरिकी-यहूदी दुश्मन से जुड़े पनाया नामक एक जहाज को आईआरजीसी नौसेना द्वारा दागी गई मिसाइलों से निशाना बनाया गया। इसमें कहा गया है कि अमेरिकी सेना ने इसके बाद केश्म द्वीप पर स्थित आईआरजीसी के एक संचार टावर को निशाना बनाया।
बयान में आगे कहा गया है, “इसके जवाब में आईआरजीसी एयरोस्पेस फोर्स ने क्षेत्र के एक देश में स्थित उनके हवाई अड्डे और हेलीकॉप्टर अड्डे के साथ-साथ अमेरिकी पांचवें बेड़े के मुख्यालय पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।” आईआरजीसी ने कहा कि हमने पहले ही चेतावनी दी थी कि किसी भी प्रकार की आक्रामकता का जवाब अलग और अधिक गंभीर तरीके से दिया जाएगा। हमने उसी के अनुसार कार्रवाई की है। ये प्रतिक्रियाएं सबक के रूप में काम करेंगी। हम दोहराते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को भंग करने की कोशिश करने वाली अमेरिकी सेना को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
इस्राइल ने दक्षिण लेबनान के ब्लाट पर किए हमले, दूर तक सुनाई दी धमाकों की आवाज
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार इस्राइल ने दक्षिणी लेबनान के मरजयून जिले के ब्लाट कस्बे को निशाना बनाया है। इस्राइली सेना की ओर से यहां भीषण हमले जारी हैं। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि इससे पहले पास के दिब्बीन कस्बे में एक जोरदार धमाके की आवाज सुनी गई थी।
ईरान ने कुवैत-बहरीन पर दागी मिसाइलें, अमेरिका ने पलटवार में केश्म द्वीप को बनाया निशाना
अमेरिका ने दावा किया है कि उसकी सेना ने क्षेत्र के पड़ोसी देशों को निशाना बनाने वाले ईरानी मिसाइलों और ड्रोन हमलों की एक श्रृंखला को नाकाम कर दिया है। इसके साथ ही अमेरिका ने ईरान के केश्म द्वीप पर जवाबी कार्रवाई भी की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक आधिकारिक बयान में बताया कि तेहरान ने क्षेत्र में हवाई हमलों की एक लहर शुरू की थी। सैन्य कमांड ने नोट किया कि ईरान ने क्षेत्रीय पड़ोसियों की ओर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, सभी अपने लक्ष्यों को भेदने में विफल रहीं।
सेंटकॉम ने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ की गई रक्षात्मक कार्रवाइयों का विवरण देते हुए खुलासा किया कि कुवैत पर दागी गई दो ईरानी मिसाइलें या तो लक्ष्य तक नहीं पहुंचीं या रास्ते में ही नष्ट हो गईं। वहीं, बहरीन पर लॉन्च की गई तीन मिसाइलों को अमेरिकी और बहरीन की वायु रक्षा बलों ने तुरंत रोक लिया।
यूएई के परमाणु संयंत्र पर ड्रोन हमले के बाद आईएईए बोला- देंगे तकनीकी सहायता
अल जजीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने पुष्टि की है कि वैश्विक परमाणु निगरानी संस्था संयुक्त अरब अमीरात को व्यापक समर्थन दे रही है। यह समर्थन पिछले महीने ड्रोन हमले में निशाना बनाए गए परमाणु ऊर्जा संयंत्र के आधिकारिक दौरे के बाद दिया गया है।
ग्रॉसी ने कहा कि अधिकारियों ने बरकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र में हुई घटना पर असाधारण रूप से तीव्र परिचालन प्रतिक्रिया का प्रदर्शन किया और संयंत्र में बाहरी बिजली की आपूर्ति बाधित होने के तुरंत बाद रिएक्टर को बंद करने की प्रक्रिया को तेजी से अंजाम दिया। आईएईए प्रमुख ने आगे संकेत दिया कि सुविधा में मरम्मत के काम का पूर्ण समाधान सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी आकलन और परिचालन गतिविधियों की एक श्रृंखला आयोजित की जानी है।
ग्रॉसी ने बिजली संयंत्र में आगामी रखरखाव कार्य की सटीक प्रकृति या समयसीमा के संबंध में कोई और विशिष्ट विवरण नहीं दिया। यह महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप 17 मई को ड्रोन हमले के कारण संयुक्त अरब अमीरात की एकमात्र परमाणु ऊर्जा सुविधा में लगी आग के बाद हुआ है, जिसकी पुष्टि बाद में राज्य के अधिकारियों द्वारा की गई थी।
आज क्या-क्या हुआ?
- अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संसद को बताया कि ईरान को दी जाने वाली कोई भी प्रतिबंध राहत परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी होगी, न कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने से।
- अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी का कहना है कि ईरान में चल रही कई परमाणु गतिविधियां अब रुक गई हैं।
- अमेरिकी सेना का कहना है कि उसने बोत्सवाना के झंडे वाले एक तेल टैंकर को अपंग कर दिया है, क्योंकि उसने ईरान के खर्ग द्वीप की ओर बढ़ने की कोशिश की थी।
- संयुक्त राष्ट्र की व्यापार और विकास संस्था का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से तेल आयात की लागत $20 अरब बढ़ सकती है, जिसका सबसे बुरा असर गरीब देशों पर पड़ेगा।
- इस्राइली सेना ने दक्षिणी लेबनान में घातक हमले जारी रखे हैं, जिसमें लेबनानी शहर अल-मरवानिया में हुआ एक हमला भी शामिल है, जिसमें चार वयस्कों और दो बच्चों की मौत हो गई।
- दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्ला के एक ड्रोन हमले में चार इस्राइली सैनिक घायल हो गए हैं।
होर्मुज खोल दिया होता तो नहीं होती नाकेबंदी: रूबियो
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि नाकेबंदी का एकमात्र कारण यह है कि ईरान व्यापारिक जहाजों पर गोलीबारी कर रहा है। इसके पीछे सोच यह है कि अगर किसी और के जहाज बाहर नहीं निकल पाएंगे, तो ईरान के जहाज भी बाहर नहीं निकल पाएंगे। अगर ईरान ने वह करने पर सहमति जताई होती जो उसने युद्धविराम लागू होने के समय करने को कहा था, यानी होर्मुज को खोलना, तो यह नाकेबंदी नहीं होती। वे जो कर रहे हैं वह गैर-कानूनी और अवैध है। हर कोई इसके खिलाफ है।
अमेरिका ने ईरानी क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों पर लगाया प्रतिबंध
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान के सबसे बड़े डिजिटल एसेट क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। इस कार्रवाई के तहत ‘नोबिटेक्स’ , ‘वॉलेक्स’, ‘बिटपिन’ और ‘रैमजीनेक्स’जैसे बड़े एक्सचेंजों पर रोक लगाई गई है। इसके साथ ही नोबिटेक्स को कंट्रोल करने वाले सैयद मोहम्मद अली आगामीर और सैयद मोहम्मद आगामीर और एक्सचेंज के सीईओ आमिर हुसैन राड पर भी पाबंदी लगाई गई है। हालांकि, नोबिटेक्स एक्सचेंज ने सरकार से किसी भी सीधे संबंध होने से इनकार किया है।
युद्ध के बीच घिरे ट्रंप: मीडिया और प्रशासन का दबाव बढ़ा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों मीडिया और अपने ही प्रशासन के भारी दबाव में हैं। युद्ध की शुरुआत में उन्होंने दावा किया था कि यह संघर्ष कुछ ही दिनों में खत्म हो जाएगा, जो बाद में हफ्तों और अब एक लंबे खिंचते गतिरोध में बदल चुका है। जल्द ही सब कुछ ठीक होने के उनके बार-बार किए जा रहे दावों पर अब खुद अमेरिकी सरकार के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं, जिससे ट्रंप की कूटनीतिक साख दांव पर है।
इस बढ़ते दबाव के बीच ट्रंप लगातार हर दिन बेहद सख्त रुख अपना रहे हैं। उनका कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता बिल्कुल करीब है, लेकिन साथ ही उन्होंने ईरान को सीधी सैन्य धमकी भी दी है। ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर दोनों पक्षों के बीच जल्द ही कोई अंतिम सहमति नहीं बनती है, तो अमेरिका अपनी पूरी सैन्य ताकत के साथ ईरान पर सीधा और विनाशकारी हमला करेगा।



