2026-27 के लिए NEET-UG हटाने की मांग, एमके स्टालिन बोले- राज्यों को खुद तय करने दें मेडिकल दाखिले

2026-27 के लिए NEET-UG हटाने की मांग, एमके स्टालिन बोले- राज्यों को खुद तय करने दें मेडिकल दाखिले

एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार से 2026-27 के लिए NEET-UG परीक्षा से राज्यों को छूट देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मेडिकल एडमिशन 12वीं के अंकों के आधार पर राज्यों को खुद तय करने की अनुमति मिलनी चाहिए।

डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए NEET-UG परीक्षा को छूट दी जाए और राज्यों को 12वीं के अंकों के आधार पर मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में दाखिले की अनुमति दी जाए।

दरअसल, 3 मई को आयोजित हुई NEET-UG परीक्षा पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दी गई थी। इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है और अब तक पांच लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। गिरफ्तार आरोपियों को सात दिन की हिरासत में भेजा गया है। इसी घटनाक्रम के बीच स्टालिन ने केंद्र सरकार पर परीक्षा प्रणाली में बार-बार विफलता, सुरक्षा खामियां और जनता का घटता भरोसा  होने का आरोप लगाया।

दरअसल, 3 मई को आयोजित हुई NEET-UG परीक्षा पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दी गई थी। इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है और अब तक पांच लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। गिरफ्तार आरोपियों को सात दिन की हिरासत में भेजा गया है। इसी घटनाक्रम के बीच स्टालिन ने केंद्र सरकार पर परीक्षा प्रणाली में बार-बार विफलता, सुरक्षा खामियां और जनता का घटता भरोसा  होने का आरोप लगाया।

अपने पत्र में स्टालिन ने क्या लिखा?

अपने पत्र में स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु में NEET लागू होने से पहले मेडिकल एडमिशन 12वीं के सामान्यीकृत अंकों के आधार पर होता था। उनका दावा है कि इस व्यवस्था से ग्रामीण, गरीब और पहली पीढ़ी के विद्यार्थियों को मेडिकल शिक्षा में अवसर मिलता था और इसी मॉडल ने राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि NEET आने के बाद वंचित तबकों के छात्रों के अवसर कम हो गए हैं।

स्टालिन ने क्या याद दिलाया?

स्टालिन ने यह भी याद दिलाया कि तमिलनाडु विधानसभा ने 2021 और 2022 में तमिलनाडु एडमिशन टू अंडरग्रेजुएट मेडिकल डिग्री कोर्सेज बिल पारित किया था, जिसमें राज्य को NEET से छूट देने और पुरानी प्रवेश प्रणाली बहाल करने की मांग की गई थी। हालांकि, यह विधेयक अभी तक राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार कर रहा है।

अधिनियम में संशोधन करने का अनुरोध 

उन्होंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि संसद का सत्र नहीं चल रहा है, इसलिए केंद्र सरकार संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत अध्यादेश लाकर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 की धारा 14 में संशोधन करे, ताकि 2026-27 के लिए NEET की अनिवार्यता खत्म की जा सके।

परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियां गिनाई

स्टालिन ने अपने पत्र में NEET और उससे पहले की परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों की लंबी सूची भी गिनाई। उन्होंने कहा कि 2015 में AIPMT परीक्षा में ब्लूटूथ डिवाइस और संगठित गिरोहों के जरिए पेपर लीक हुआ था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट को पूरी परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। इसके अलावा उन्होंने 2016 में इंटर-स्टेट पेपर लीक, 2017 में प्रतिरूपण, ड्रेस कोड विवाद और क्षेत्रीय भाषाओं के प्रश्नपत्रों में त्रुटियों का भी उल्लेख किया।

उन्होंने सॉल्वर गैंग और फर्जी उम्मीदवारों के नेटवर्क का जिक्र करते हुए कहा कि 2020 और 2021 के दौरान कई राज्यों में ऐसे गिरोह पकड़े गए, जहां बायोमेट्रिक सिस्टम से छेड़छाड़ की गई और डमी कैंडिडेट्स को परीक्षा में बैठाया गया। उन्होंने 2024 NEET-UG परीक्षा में असामान्य रूप से अधिक टॉप स्कोर, ग्रेस मार्क्स और कुछ केंद्रों पर टॉपर्स की संदिग्ध संख्या को लेकर भी सवाल उठाए।

कोचिंग इंडस्ट्री पर क्या बोले?

स्टालिन ने कोचिंग इंडस्ट्री पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि NEET अब कोचिंग सेंटर आधारित व्यावसायिक व्यवस्था बन चुकी है, जहां आर्थिक रूप से मजबूत परिवारों के छात्रों को ज्यादा फायदा मिलता है। उनके मुताबिक, NEET को लेकर बना कोचिंग उद्योग 70 हजार करोड़ रुपये से अधिक का हो चुका है और बिना महंगी कोचिंग के परीक्षा पास करना लगभग असंभव होता जा रहा है।

इधर, NEET परीक्षा दोबारा कराने की तैयारी भी तेज हो गई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गुरुवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में NEET-UG पुनर्परीक्षा को लेकर चर्चा हुई, हालांकि नई तारीखों का एलान अभी नहीं किया गया है।

administrator

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *