उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में 24 मई को गोमांस ले जाने के शक़ में चार लोगों पर स्थानीय भीड़ ने हमला कर उनके साथ मारपीट की. जिन युवकों के साथ मारपीट की गई, उनका अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है.
अलीगढ़ पुलिस ने इस मामले में अब तक चार अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया है. अलीगढ़ के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) अमृत जैन के मुताबिक़, ”हरदुआगंज पुलिस टीम ने भारतीय न्याय संहिता के तहत हत्या के प्रयास और अन्य अपराधों में 38 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है.”
इसमें विजय कुमार गुप्ता, विजय बजरंगी, लवकुश और एक अन्य अभियुक्त को गिरफ़्तार किया गया है. इस मामले में जिन चार युवकों को मारा-पीटा गया है, उनके परिवारवालों का दावा है कि भीड़ को ज़रूरी काग़ज़ात भी दिखाए गए थे.
परिवार का कहना है, “शनिवार रात को हरदुआगंज थाना क्षेत्र में मैक्स पिकअप वाहन को कुछ लोगों ने रोका और गाड़ी की तलाशी लेने लगे. काग़ज़ भी दिखाया गया कि मीट फैक्ट्री से मीट लेकर जा रहे हैं. लेकिन भीड़ बढ़ती गई.”
पुलिस के मुताबिक़, ”गोमांस के शक़ में भीड़ ने इन लोगों की पिटाई कर दी. हालांकि, पुलिस के हस्तक्षेप के बाद घायलों को भीड़ से निकाला गया.”
इस मामले में घायल अकील जो कि अलीगढ़ में अतरौली के रहने वाले हैं, उनके पिता सलीम ख़ान ने पुलिस में दिए गए प्रार्थना पत्र में कहा है, ”मेरा बेटा अकील, भतीजा अरबाज़ और दो अन्य लोग अल अम्बर मीट फैक्ट्री से मीट लेकर अतरौली आ रहे थे. जब गाड़ी पनैठी से साधु आश्रम वाली सड़क पर पहुंची, तभी रामकुमार आर्य और 20–25 अज्ञात लोगों ने गाड़ी रोककर 50 हज़ार रुपये की चौथ (रंगदारी) मांगी.”
सलीम ने कहा, “जब पैसे देने से इनकार किया गया, तभी मारपीट शुरू कर दी गई और गाड़ी में आग लगा दी. इससे पहले सभी के मोबाइल और पैसे भी छीन लिए गए थे. इसी रास्ते पर 15 दिन पहले भी गाड़ी को रोका गया था और पैसे मांगे गए थे. हालांकि उस वक्त पुलिस ने गाड़ी को छुड़वाया था.”
सलीम ने यह भी कहा, “उनके पास फैक्ट्री के काग़ज़ भी थे, लाइसेंस भी दिखाया गया, लेकिन हमला करने वाले मानने को तैयार नहीं थे. हालांकि यह पता नहीं चल पाया है कि वे किसी दल से जुड़े थे या नहीं.”
मामले में एक अभियुक्त रामकुमार आर्य को विश्व हिंदू परिषद का पूर्व कार्यकर्ता बताया जाता है. बीबीसी हिंदी ने उनसे फोन पर कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो पाई.
पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) अमृत जैन ने कहा, “पूछताछ में पता चला है कि विश्व हिंदू परिषद ने इस व्यक्ति को कई साल पहले ही निकाल दिया था क्योंकि उनकी गतिविधियां संदिग्ध थीं.” अलीगढ़ पुलिस का कहना है, “इस मामले में अभी तक किसी संगठन की संलिप्तता सामने नहीं आई है, हालांकि मामले की जांच जारी है.”



