कांग्रेस ने PM को घेरा: नारी शक्ति वंदन कानून पर यू-टर्न का आरोप, कहा- बिना जनगणना आरक्षण लागू करने की तैयारी

कांग्रेस ने PM को घेरा: नारी शक्ति वंदन कानून पर यू-टर्न का आरोप, कहा- बिना जनगणना आरक्षण लागू करने की तैयारी

कांग्रेस ने केंद्र सरकार को नारी शक्ति वंदन कानून के अलावा आरक्षण और जनगणना के मुद्दे पर भी घेरा। पार्टी महासचिव और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने एक्स पर लिखे विस्तृत पोस्ट में सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने परिसीमन पर भी तीखे सवाल पूछे। कांग्रेस ने किन मुद्दों पर सरकार के साथ-साथ पीएम मोदी को भी घेरा? जानिए इस खबर में

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं। संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के मकसद से बनाए जा रहे कानून- नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर यू टर्न लेने का आरोप लगाते हुए पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म- एक्स पर विस्तृत पोस्ट लिखा। उन्होंने कहा, सितंबर 2023 में नए संसद भवन का उद्घाटन नारी वंदन अधिनियम 2023 के पारित होने के साथ हुआ था। इस अधिनियम ने संविधान में संशोधन कर लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण का प्रावधान किया। इसमें अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित सीटों में भी महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने की बात थी।

सरकार पर साधा निशाना
जयराम रमेश आगे कहा, यह आरक्षण परिसीमन और जनगणना अभ्यास पूरा होने के बाद ही लागू होना था। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 2024 के लोकसभा चुनावों से इसे तत्काल लागू करने की मांग की थी। तब मोदी सरकार ने कहा था कि परिसीमन और जनगणना के बिना यह संभव नहीं है। अब, करीब 30 महीने बाद, सरकार ने अपना मन बदल लिया है और बिना परिसीमन व जनगणना के आरक्षण लागू करना चाहती है। उन्होंने कहा, यह कदम विदेशी नीति की विफलताओं और देश के एलपीजी व ऊर्जा संकट से ध्यान भटकाने के लिए उठाया गया है। सरकार नारी वंदन अधिनियम, 2023 में आवश्यक संशोधन पारित करने के लिए अगले दो सप्ताह में दो दिवसीय विशेष सत्र बुलाने की योजना बना रही है। इससे सरकार को पूरा राजनीतिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

नारी शक्ति वंदन कानून को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। पार्टी महासचिव और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकार ने इस कानून को लेकर अपना रुख बदल लिया है और अब बिना जनगणना और परिसीमन के ही आरक्षण लागू करने की तैयारी कर रही है।

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट लिखते हुए कहा कि नारी शक्ति वंदन कानून को सितंबर 2023 में नए संसद भवन के उद्घाटन के साथ पारित किया गया था। इस कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों में भी महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने की व्यवस्था की गई है।

उन्होंने याद दिलाया कि उस समय सरकार ने साफ तौर पर कहा था कि नारी शक्ति वंदन कानून का क्रियान्वयन जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव होगा। कांग्रेस ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले ही इसे लागू करने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने इसे असंभव बताया था। अब कांग्रेस का आरोप है कि करीब ढाई साल बाद सरकार अपने पुराने रुख से पीछे हट रही है। नारी शक्ति वंदन कानून को बिना जनगणना और परिसीमन के लागू करने की तैयारी को कांग्रेस ने “यू-टर्न” बताया है। पार्टी का कहना है कि यह कदम राजनीतिक लाभ के लिए उठाया जा रहा है।

कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे का इस्तेमाल देश के अन्य गंभीर मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए कर रही है। जयराम रमेश के अनुसार, विदेश नीति की चुनौतियां, एलपीजी और ऊर्जा संकट जैसे मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए नारी शक्ति वंदन कानून को जल्दबाजी में लागू करने की कोशिश की जा रही है। आरक्षण के क्रियान्वयन को लेकर भी कई सवाल खड़े किए गए हैं। कांग्रेस का कहना है कि बिना सही आंकड़ों और जनगणना के आधार पर आरक्षण लागू करना न केवल अव्यवहारिक है बल्कि इससे सामाजिक संतुलन भी बिगड़ सकता है। नारी शक्ति वंदन कानून जैसे बड़े संवैधानिक बदलाव को लागू करने से पहले व्यापक तैयारी और सहमति जरूरी है।

इसके अलावा, प्रस्तावित विशेष सत्र को लेकर भी विपक्ष ने आपत्ति जताई है। कांग्रेस का कहना है कि चुनाव के दौरान विशेष सत्र बुलाना आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन हो सकता है। साथ ही, यह सरकार की जाति जनगणना को लेकर वास्तविक प्रतिबद्धता पर भी सवाल उठाता है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर एकजुटता दिखाते हुए सरकार को पत्र लिखा है और मांग की है कि विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए। उनका कहना है कि नारी शक्ति वंदन कानून में किसी भी संशोधन से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ चर्चा होनी चाहिए।

इसके साथ ही लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों में 50 प्रतिशत तक वृद्धि के प्रस्ताव पर भी चिंता जताई गई है। विपक्ष का मानना है कि यह एक बड़ा संवैधानिक बदलाव है और इसे जल्दबाजी में लागू नहीं किया जाना चाहिए। कुल मिलाकर, नारी शक्ति वंदन कानून को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। जहां एक ओर सरकार इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसके क्रियान्वयन के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले समय में यह मुद्दा देश की राजनीति में और भी अहम भूमिका निभा सकता है।

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