नोबेल शांति पुरस्कार 2025 का एलान हो गया है। वेनेजुएला की मारिया कोरिना मचाडो ने नोबेल शांति पुरस्कार जीता है। इस साल विज्ञान और साहित्य के क्षेत्र के 10 लोगों को चुना गया है, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र को नई दिशा दी। चिकित्सा के क्षेत्र में मैरी ई. ब्रुनको, फ्रेड राम्सडेल और शिमोन साकागुची को उनकी अभूतपूर्व खोजों के लिए 2025 का फिजियोलॉजी या मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार मिला।
नोबेल शांति पुरस्कार जीतने वाली मारिया कोरिना मचाडो वेनेजुएला की एक प्रमुख राजनेता हैं। इसके अलावा वो मानवाधिकार वकील हैं। उन्होंने लंबे समय से अपने देश में लोकतंत्र, चुनाव की पारदर्शिता और नागरिक स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया है। मारिया का जन्म 7 अक्तूबर 1967 को कराकस, वेनेजुएला में हुआ।
फिजिक्स के क्षेत्र में जॉन क्लार्क, मिशेल एच. डेवोरेट और जॉन एम. मार्टिनिस को यह सम्मान मिला, जिन्होंने क्वांटम सर्किट की दुनिया में नई क्रांति लाई। रसायन विज्ञान का नोबेल सुसुमु कितागावा, रिचर्ड रॉबसन और उमर एम. याघी को मिला, जिनके काम ने रेटिकुलर और फ्रेमवर्क केमिस्ट्री को आगे बढ़ाया। साहित्य का सबसे बड़ा सम्मान इस बार हंगरी के लेखक लास्जलो क्रास्जनाहोरकाई को दिया गया, जिनकी कहानियां मानव जीवन के गहरे पहलुओं को उजागर करती हैं।
साहित्य में लास्जलो क्रास्जनाहोरकाई ने नेबोल पुरस्कार जीता है। लास्जलो क्रास्जनाहोरकाई हंगरी के एक प्रसिद्ध उपन्यासकार हैं। उनका जन्म 5 जनवरी, 1954 को में हंगरी के ग्युला शहर में हुआ। क्रास्जनाहोरकाई ने 1985 में अपने पहले उपन्यास सतांतंगो से अपनी पहचान बनाई।
सोशल मीडिया वेबसाइट एक्स पर नोबेल कमेटी ने कहा कि नोबेल शांति पुरस्कार मरिया कोरीना मचादो को “वेनेज़ुएला के लोगों के लिए लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने और न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण तरीक़े से तानाशाही के सामने लोकतंत्र के लिए संघर्ष करने” के लिए दिया गया है.
ग़ौरतलब है कि नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा का काफ़ी दिलचस्पी से इंतज़ार किया जा रहा था क्योंकि कई बार अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ख़ुद को इसका दावेदार घोषित कर चुके हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई मौक़ों पर कह चुके हैं कि उन्होंने दुनिया के कई हिस्सों में सैन्य संघर्षों को शांत करवाया है. हाल ही में ग़ज़ा में हमास और इसराइल के बीच पहले चरण के संघर्ष विराम की भी उन्होंने घोषणा की थी.



