निवेश को मिलेगी नई रफ्तार?: PM के ऑस्ट्रेलिया दौर पर व्यापारिक समझौतों पर नजर, न्यूजीलैंड-इंडोनेशिया भी जाएंगे

निवेश को मिलेगी नई रफ्तार?: PM के ऑस्ट्रेलिया दौर पर व्यापारिक समझौतों पर नजर, न्यूजीलैंड-इंडोनेशिया भी जाएंगे

प्रधानमंत्री मोदी 6 से 11 जुलाई तक इन तीनों देशों की यात्रा पर जा रहे हैं। प्रधानमंत्री की ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ बैठक में द्विपक्षीय व्यापार व नए निवेश पर बात हो सकती है। ऑस्ट्रेलिया भारत व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (सीईसीए) के लिए 2023 पर इस पर बात चल रही है। अभी तक इस पर 11 राउंड बातचीत हो चुकी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा अर्थव्यवस्था, शिक्षा व ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग समझौते बढ़ाने के लिहाज से अहम मानी जा रही है। ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत का व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता (सीईसीए) आगे बढ़ाने पर भी बात होगी। वहीं, इंडोनेशिया के साथ भी द्विपक्षीय व्यापार वार्ता अंजाम तक पहुंच सकती है।

भारत का ऑस्ट्रेलिया के साथ पहले से ही आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौता (ईसीटीए) लागू है। इसी के कारण 1 जनवरी 2026 से सभी भारतीय निर्यात ऑस्ट्रेलिया में शून्य-शुल्क बाजार पहुंच रहे हैं। भारत वित्त वर्ष 2024-25 में 54.4 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पहुंच गया। इसे 2030 तक 100 अरब डालर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। मोदी करीब 35 हजार भारतीय समुदाय के लोगों के साथ मेलबर्न मीटस मोदी कार्यक्रम में खास तौर पर शिरकत करेंगे।

इंडोनेशियाई पीएम से करेंगे मुलाकात
इंडोनेशिया में प्रधानमंत्री की यात्रा को लेकर खासी उत्सुकता है। पिछले महीने ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वहां का दौरा कर प्रधानमंत्री की प्रस्तावित यात्रा के लिए जमीन तैयार की। अब दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने पर बात होगी। पिछले साल जनवरी में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की भारत आए थे।

न्यूजीलैंड की यात्रा व मुक्त व्यापार समझौता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यूजीलैंड की यात्रा अहम मानी जा रही है। भारत न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते को अभी वहां की संसद की मंजूरी मिलनी बाकी है। इसमें भारतीयों के लिए आव्रजन नियम सरल किए गए हैं, लेकिन हाल में वहां की सरकार द्वारा भारतीय नागरिकों के लिए आव्रजन नियम सख्त करने की तैयारी है। संभव है कि मोदी की यात्रा के वक्त इसे लागू न किया जाए। भारत ने न्यूजीलैंड के साथ यह मुक्त व्यापार समझौता केवल पांच महीने में पूर कर लिया। जबकि अमेरिका यूके समेत कई अन्य देशों के साथ ट्रेड डील को लेकर लंबा वक्त लग रहा है।

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