सेंसेक्स 1556 अंक गिरा, US डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 93.90 के पार

सेंसेक्स 1556 अंक गिरा, US डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 93.90 के पार

हफ्ते के पहले कारोबारी दिन यानी सोमवार को शेयर बाजार लाल निशान पर खुला। वहीं पिछले दिन शुक्रवार को 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 325.72 अंक उछलकर 74,532.96 अंक पर बंद हुआ था, जबकि 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 112.35 अंक की बढ़त के साथ 23,114.50 पर बंद हुआ था।

भारतीय शेयर बाजार सोमवार को बड़ी गिरावट के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,555.62 अंक या 2 प्रतिशत गिरकर 72,977.34 पर आ गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 479.95 अंक या 2 प्रतिशत गिरकर 22,634.55 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 41 पैसे गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर 93.94 पर आ गया। 

सेंसेक्स की कंपनियों का हाल

सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से टाटा स्टील, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बजाज फाइनेंस, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, टाइटन और अदानी पोर्ट्स सबसे पिछड़ने वाली कंपनियों में शामिल थीं। एचसीएल टेक एकमात्र विजेता के रूप में उभरी।

क्या है विशेषज्ञों की राय?

बैंकिंग और मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा के मुताबिक, हालात तेजी से एस्केलेशन की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे निवेशकों में घबराहट साफ दिख रही है। अजय बग्गा ने कहा कि हफ्ते की शुरुआत बेहद अस्थिर माहौल में हुई है और निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से पैसा निकालकर डॉलर जैसी सुरक्षित जगहों की ओर जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिकी मनी मार्केट फंड्स का एयूएम 8 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच चुका है, जो इस सेफ्टी फ्लाइट को दर्शाता है।

48 घंटे का अल्टीमेटम बना ट्रिगर

बग्गा के अनुसार, बाजार में घबराहट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ईरान को दिया गया 48 घंटे का अल्टीमेटम है। इसमें कहा गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोला जाए, जो फिलहाल युद्ध से पहले की क्षमता के सिर्फ 5% पर चल रहा है, वरना ईरान के पावर ग्रिड को निशाना बनाया जा सकता है।

तेल बाजार में उथल-पुथल

कमोडिटी बाजार में भी भारी अस्थिरता बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड करीब 112 डॉलर प्रति बैरल और WTI 98.50 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहा। सप्लाई बाधित होने की आशंका और वैश्विक मांग में गिरावट के डर के बीच कीमतें लगातार उतार-चढ़ाव में हैं।

तनाव के बावजूद सोने में क्यों दिखी गिरावट?

आमतौर पर भू-राजनीतिक तनाव में सोना सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार उल्टा रुझान देखने को मिला। सोना करीब 2% गिरकर 4,408 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। विश्लेषकों का कहना है कि मार्जिन कॉल के चलते निवेशक अपने मुनाफे वाले गोल्ड पोजिशन बेचकर इक्विटी में हुए नुकसान की भरपाई कर रहे हैं।

एशियाई बाजारों में बड़ी गिरावट

वैश्विक संकेत बेहद कमजोर रहे और एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली देखी गई। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 4% से ज्यादा गिरकर 51,280 पर आ गया। सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स 2.20% गिरकर 4,839 पर, हांगकांग का हैंगसेंग 3.41% टूटकर 24,415 पर बंद हुआ। ताइवान का वेटेड इंडेक्स 2.65% गिरा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 6% से ज्यादा लुढ़क गया।

अमेरिकी बाजार भी दबाव में

शुक्रवार को अमेरिकी बाजार भी गिरावट के साथ बंद हुए थे। डाउ जोन्स 0.96% गिरकर 45,577 पर बंद हुआ, S&P 500 में 1.51% की गिरावट रही और नैस्डैक 2% टूटकर 21,647 पर आ गया। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता, तब तक वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और दबाव बना रह सकता है।

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