अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप नीत सरकार के 100 दिन पूरे हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति अपने 10 बड़े फैसलों से पूरी दुनिया में हलचल मचाने में सफल रहे। नाटो और डब्लूएचओ से किनारा करना, भारत-चीन समेत कई देशों पर अधिक टैरिफ और अवैध प्रवासियों पर सख्ती ट्रंप के सबसे बड़े चौंकाने वाले फैसले रहे। अब उनकी नजरें पनामा और गाजा पर नियंत्रण हासिल करने पर है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के 100 दिन होने वाले हैं। मगर इतने कम समय में उन्होंने अपने 10 बड़े फैससे से पूरी दुनिया में हलचल मचा दिया है। टैरिफ से लेकर अमेरिका का नाटो से किनारा करने तक दुनिया की कूटनीति नए रंग लेती दिख रही है। यूरोप से एशिया तक ट्रंप की धमक को महसूस किया जा रहा है।
अमेरिका में अवैध रूप से रहने वालों पर सख्ती
ट्रंप ने अमेरिका में अवैध रूप से रहने वाले लोगों की पहचान की और उन्हें देश से बाहर निकाल दिया। अपने सैनिक विमानों से अमेरिका ने इन अवैध प्रवासियों को उनके देश भेज दिया। इससे कई देशों के साथ अमेरिका की तनातनी भी हुई।
नाटो को पालने वाले अमेरिका ने ही साथ छोड़ा
डोनाल्ड ट्रंप का सबसे चौंकाने वाला फैसला नाटो से किनारा करना रहा। अमेरिका ने नाटो को एक तरह से पाला और पोसा। अमेरिका का हर राष्ट्रपति नाटो को भरपूर मदद करता था। मगर ट्रंप ने आते ही उससे किनारा कर लिया। उन्होंने यूरोपीय सहयोगियों पर आरोप लगाया कि वो अमेरिका के भरोसे बैठे हैं और रक्षा क्षेत्र में खर्च नहीं करते। उन्होंने नाटो से अमेरिका के निकलने तक की धमकी दे डाली।
कनाडा को बताया अमेरिका का 51वां राज्य
ट्रंप ने शपथ लेते ही अमेरिका के विस्तार की बात कर दी। इससे उसके यूरोपीय सहयोगी ही भड़क गए। कनाडा को वो कई बार अमेरिका का 51वां राज्य बता चुके हैं। वहीं ग्रीनलैंड, पनामा और गाजा तक पर कंट्रोल करने की इच्छा जाहीर की।
ट्रंप का रेसिप्रोकल टैरिफ धमाका
सबसे बड़ा फैसला ट्रंप का रेसिप्रोकल टैरिफ (पारस्परिक कर) लगाने को लेकर था। ट्रंप ने उन सभी देशों पर टैरिफ लगा दिया, जो अमेरिकी सामानों पर अपने यहां टैरिफ लगाते थे। इससे पूरी दुनिया में हंगामा मच गया। आनन-फानन में दुनिया के बड़े-बड़े देश अमेरिका से डील करने जुट गए। आखिरकार चीन को छोड़कर ट्रंप ने सभी देशों को 90 दिनों में नई बिजनेस डील का वक्त दे दिया।
डब्लूएचओ को अमेरिका ने कहा टाटा
कोरोना के समय से ही ट्रंप के निशाने पर विश्व स्वास्थय संगठन (डब्लूएचओ) रहा है। दूसरे कार्यकाल में उन्होंने अमेरिका को इससे बाहर कर दिया। अब तक अमेरिका ही डब्लूएचओ को सबसे ज्यादा फंड देता था। फिलहाल तो चीन फंड दे रहा है, मगर अमेरिका की जगह वो ले पाएगा, कहना मुश्किल है।
यूएसएड पर रोक, गरीब देश परेशान
ट्रंप ने दूसरे कमजोर देशों को अमेरिका की तरफ से देने वाली यूएसएड (सहायता राशि) पर रोक लगा दी है। अमेरिका गरीब देशों को पीने के पानी से लेकर अनाज और दवाइयों तक के लिए फंड देता था। साथ ही विकासशील देशों को भी कई तरह की रियायत देता था। उनके इस फैसले से गरीब देशों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
यूक्रेन को छोड़ा, रूस को साधा
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के रुख के एकदम उलट ट्रंप ने यूक्रेन को अकेला छोड़ दिया। यहां तक की व्हाइट हाउस में उनकी एक बैठक के दौरान यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की से बहस भी हो गई। दूसरी तरफ, पुतिन के साथ लगातार फोन पर बातचीत करके ट्रंप चर्चा में रहे। ट्रंप के आने के बाद से दुनिया में रूस की धाक भी बढ़ी है। यह भी कहा गया कि अमेरिका और रूस अपने द्विपक्षीय व्यापारिक रिश्तों को सुधारने के लिए तैयार हैं।
अमेरिकी विश्वविद्यालयों के साथ टकराव
ट्रंप की अमेरिकी विश्वविद्यालयों के साथ भी तनातनी हुई। उन्होंने ने इन विश्वविद्यालयों को यहूदी विरोधी और हमास समर्थक बताकर निशाने पर लिया। कई एक्टिविस्ट स्टूडेंट्स को भी देश से निकाल दिया और फंड रोक दिया।
सरकारी नौकरियों की संख्या कम की
ट्रंप ने अमेरिका में सरकारी नौकरियों में छंटनी चली दी। फिजुल खर्च रोकने के लिए एलन मस्क के नेतृत्व में बने डीओजीई ने हजारों सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। इससे अमेरिका में भी खूब विरोध प्रदर्शन हुए।
ईरान से डील की कोशिश
पिछली बार ईरान से न्यूक्लियर डील तोड़ने वाले ट्रंप इस कार्यकाल में उसके साथ डील करना चाहते हैं। ऐसा नहीं करने पर वो ईरान को सबक सिखाने की धमकी भी दे रहे हैं।



