अमेरिका-वेनेजुएला विवाद क्या है?: ट्रंप ने 300 अरब बैरल तेल भंडार वाले देश पर क्यों किया हमला, ‘नशा’ बना बहाना

अमेरिका-वेनेजुएला विवाद क्या है?: ट्रंप ने 300 अरब बैरल तेल भंडार वाले देश पर क्यों किया हमला, ‘नशा’ बना बहाना

अमेरिका और वेनेजुएला में हाल ही में क्या हुआ है?, दोनों देशों के बीच वर्षों पुराना विवाद किस वजह से है? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो कि लगातार दुनिया में शांति लाने के दावों के साथ अपने लिए नोबेल की मांग करते रहे हैं, वे वेनेजुएला को निशाना क्यों बना रहे हैं? वॉशिंगटन-काराकास विवाद में पर्दे के पीछे की कहानी क्या है? 

अमेरिका ने शनिवार को दक्षिण अमेरिका में वेनेजुएला पर हमला बोला। बताया गया है कि यह हमले राजधानी काराकास में किए गए। इस घटना के कई वीडियो वायरल हुए, जिसके बाद खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि अमेरिकी हमलों के दौरान वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ लिया गया और उन्हें देश से बाहर ले जाया गया है। 

सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें काराकास में कई जगहों पर धमाके होते और इसके बाद आग के गुबारों को देखा जा सकता है। 

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर अमेरिका और वेनेजुएला में हाल ही में क्या हुआ है?, दोनों देशों के बीच वर्षों पुराना विवाद किस वजह से है?, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो कि लगातार दुनिया में शांति लाने के दावों के साथ अपने लिए नोबेल की मांग करते रहे हैं, वे वेनेजुएला को निशाना क्यों बना रहे हैं? वॉशिंगटन-काराकास विवाद में पर्दे के पीछे की कहानी क्या है? 

अमेरिका और वेनेजुएला के बीच हाल में क्या हुआ है?

अमेरिका और वेनेजुएला के बीच विवाद वर्षों पुराना है। यह बीते कुछ साल में जबरदस्त रूप से उभरा है। ताजा विवाद से जुड़े घटनाक्रमों की सूची इस तरह है… 

1. नावों को निशाना बनाना शुरू किया
सितंबर 2025 से ट्रंप ने वेनेजुएला को धमकाना शुरू किया और प्रतिबंधों के साथ उसकी नावों पर हमले बोले। अमेरिकी बलों ने अब तक पूर्वी प्रशांत महासागर में स्थित कैरिबियन में वेनेजुएला की दो दर्जन से ज्यादा नावों पर हमला बोला है। इनमें 100 से अधिक लोगों के मारे जाने की खबरें हैं। अमेरिका का दावा है कि जिन नावों को निशाना बनाया गया, उनमें मादक पदार्थों की तस्करी की जा रही थी। दूसरी तरफ वेनेजुएला ने कहा है कि अमेरिका के पास दावों से जुड़े सबूत नहीं हैं। वेनेजुएला ने इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में भी उठाया है। अमेरिका ने अब तक वेनेजुएला की नावों में मादक पदार्थ ले जाने जाने से जुड़े सबूत नहीं दिए हैं। 

2. कैरिबियाई सागर में तैनात अमेरिकी युद्धपोत
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय- पेंटागन ने अक्तूबर में अमेरिकी नौसेना के सबसे खतरनाक और आधुनिक युद्धपोतों में से एक यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड को कैरिबियाई सागर में तैनात कर दिया। इसके अलावा वेनेजुएला के आसपास 5000 अमेरिकी सैन्यबलों की तैनाती भी की गई है, जबकि अमेरिका के 15,000 बलों को दक्षिण अमेरिका में तैनात किया गया है। यह कैरिबियाई क्षेत्र में पिछले कई वर्षों में सबसे बड़ी तैनाती है। 

3. वेनेजुएला की घेरेबंदी, तेल टैंकरों की जब्ती
अमेरिकी बलों ने कैरिबियाई क्षेत्र में वेनेजुएला के तेल टैंकरों की जब्ती भी जारी रखी है। दरअसल, अमेरिका की तरफ से वेनेजुएला के तेल पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। ऐसे में वह वेनेजुएला का तेल ले जा रहे टैंकरों को खुले तौर पर जब्त कर रहा है। इसके अलावा ट्रंप प्रशासन ने बीते दिनों में वेनेजुएला की नौसैन्य घेरेबंदी भी कर दी। 

4. ट्रंप खुद बोले- सीआईए को दी वेनेजुएला पर कार्रवाई की मंजूरी
ट्रंप ने एक मौके पर कहा था कि उन्होंने वेनेजुएला के खिलाफ खुफिया कार्रवाई को मंजूरी दे दी है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अमेरिका के हमले जल्द ही कैरिबियाई सागर में नावों से आगे बढ़कर वेनेजुएला के अंदर तक पहुंच सकते हैं। इस दौरान यह भी सामने आया था कि ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो से फोन पर बात की थी, जिससे संकेत मिला था कि वे कूटनीति से मसले का हल निकालना चाहते हैं। 

अमेरिका क्या आरोप लगाकर वेनेजुएला पर कार्रवाई को सही ठहरा रहा?

अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि वेनेजुएला की निकोलस मादुरो सरकार अमेरिका में ड्रग्स (विशेष रूप से फेंटेनाइल और कोकीन) की तस्करी में शामिल है। ट्रंप प्रशासन ने इसे एक राष्ट्रीय आपातकाल मानते हुए वेनेजुएला को निशाना बनाने की कोशिश की है। ट्रंप ने आरोप लगाया है कि मादुरो के शासन में वेनेजुएला के लाखों नागरिकों को अमेरिका आने को मजबूर होना पड़ा है, जिससे अमेरिका में प्रवासी संकट बढ़ा है। इन लोगों के 2013 से ही देश छोड़कर भागने का दावा किया गया है। अमेरिका ने वेनेजुएला के दो आपराधिक समूहों- ट्रेन डी अरागुआ और कार्टेल डी लॉस सोलेस (जिसका नेतृत्व कथित तौर पर मादुरो करते हैं) को विदेशी आतंकवादी संगठन (फॉरेन टेररिस्ट ऑर्गनाइजेशन) के तौर पर चिह्नित किया है।

अमेरिका के आरोपों पर वेनेजुएला की क्या प्रतिक्रिया?

वेनेजुएला सरकार उन आरोपों को सिरे से खारिज करती है, जिसके तहत उस पर अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी और अपने नागरिकों के दमन का आरोप लगाया जाता है। वेनेजुएला का आरोप है कि ड्रग्स के दावों को सिर्फ एक बहाने के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन या तख्तापलट करके वेनेजुएला की विशाल तेल संपत्ति पर अमेरिका कब्जा कर सके।

क्या कहते हैं कानूनी विशेषज्ञ?

कानूनी विशेषज्ञों ने इस मामले में ट्रंप प्रशासन की कार्रवाइयों पर चिंता जताई है, उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय महासागर क्षेत्र में जहाजों को निशाना बनाना अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो सकता है। अमेरिका की ओर से बिना सबूत दिए वेनेजुएला की नावों पर हमला न्याय से परे जाकर हत्याओं के जैसी स्थिति है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने भी आंशिक नौसैनिक नाकाबंदी की आलोचना की है और इसे वेनेजुएला के खिलाफ अवैध सशस्त्र आक्रामकता बताया है।

दोनों देशों के बीच विवाद की मुख्य वजह और इतिहास क्या?

इस विवाद का केंद्र बीते तीन दशकों से ‘तेल’ रहा है। दरअसल, वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा सिद्ध तेल भंडार है, जो कि इस दक्षिण अमेरिकी देश को जबरदस्त तौर पर समृद्ध करने की क्षमता रखता है। इसके अलावा वेनेजुएला में सोना और गैस के भी भंडार हैं। 1990 के दशक और इससे पहले तक वेनेजुएला की खुली अर्थव्यवस्था में अमेरिका की कंपनियां भी सम्मिलित रही थीं। 

दोनों देशों के बीच विवाद की पहली चिंगारी 1999 में भड़की जब वेनेजुएला में वामपंथी राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज की सरकार सत्ता में आई। शावेज ने वेनेजुएला में गरीबी को मुद्दा बनाकर चुनाव जीता और देश के तेल को अपने लोगों की भलाई में लगाने का वादा कर पूरे देश के तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण कर दिया। इसका असर यह हुआ कि वेनेजुएला के तेल उद्योग में अमेरिकी कंपनियों की भूमिका घट गई। इस बीच वेनेजुएला की वाम सरकार ने क्यूबा, रूस और चीन के साथ ईरान से करीबी बढ़ा ली, जो सीधे तौर पर अमेरिका की शक्ति को चुनौती देने के कदम के तौर पर देखा जाने लगा।

दोनों देशों के रिश्ते तब और खराब हो गए, जब ह्यूगो शावेज के खिलाफ 2002 में तख्तापलट की असफल कोशिश हुई। वेनेजुएला सरकार ने इसके पीछे तब अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया था। इसके बाद से दोनों देशों की दूरियां लगातार बढ़ती चली गईं। 

2013 में ह्यूगो शावेज की मौत के बाद निकोलस मादुरो वेनेजुएला के राष्ट्रपति बने। तबसे लेकर अब तक वेनेजुएला की विदेश नीति अमेरिका के प्रति जैसी की तैसी ही बनी हुई है। हालांकि, अमेरिका लगातार वेनेजुएला पर अपने तेल सेक्टर को खोलने का दबाव बनाने के लिए तरह-तरह के प्रतिबंध लगाता रहा है। इससे वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव भी पड़ा है।  

अमेरिकी अधिकारियों ने कई मौकों पर खुले तौर पर कहा है कि वेनेजुएला का तेल वॉशिंगटन का है, और वे अमेरिकी कंपनियों के फायदे के लिए वेनेजुएला के तेल उद्योग के राष्ट्रीयकरण को पलटवाना चाहते हैं। ओबामा और बाइडन जैसे डेमोक्रेट नेताओं के अंतर्गत अमेरिका ने कूटनीतिक तौर पर वेनेजुएला पर दबाव बनाया। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने 2017 में वेनेजुएला पर तेल प्रतिबंध लगाए और 2019 में उन्हें और कड़ा कर दिया। इससे वेनेजुएला की कच्चे तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचने की क्षमता बाधित हुई। अब अपने दूसरे कार्यकाल में ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला पर कार्रवाई को और सख्त कर दिया है और हवाई हमलों की भी शुरुआत कर दी है।

अमेरिका के लिए कूटनीतिक तौर पर इतना अहम क्यों वेनेजुएला?

वेनेजुएला दक्षिण अमेरिका में स्थित है, जो कि अमेरिका के काफी करीब है। इस देश के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, जिसे 303 अरब बैरल से भी ज्यादा आंका जाता है। कई प्रतिबंधों की वजह से यह अब तक अनछुआ भंडार है। इसके अलावा वेनेजुएला में सोना और गैस का भी जबरदस्त भंडार है। 

यूं तो वेनेजुएला की ओर से इन पदार्थों का निर्यात न के बराबर है, लेकिन अगर अमेरिका की इस तक पहुंच होती है तो ट्रंप प्रशासन को मध्य पूर्व (भारत के पश्चिम एशिया) में तेल की खरीद पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। वह सीधे वेनेजुएला के तेल भंडार का दोहन कर के अपने ऊर्जा बाजार को आगे बढ़ा सकता है और अपने तेल रिजर्व को सुरक्षित भी रख सकता है। 

इसके अलावा वेनेजुएला में बीते वर्षों में जिस तरह से भूराजनीतिक घटनाक्रम बदले हैं, वह भी अमेरिका के लिए चिंता बढ़ाने वाले हैं। दरअसल, वेनेजुएला के तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण होने के बाद से चीन और रूस ने वेनेजुएला से रिश्ते बढ़ाए हैं और उसे अरबों डॉलर की सहायता मुहैया कराई है। कई बार यह सहायता वेनेजुएला के तेल के लिए ही दी गई है। दूसरी तरफ वेनेजुएला ने रूस, चीन, ईरान और क्यूबा से हथियार और सुरक्षा के लिए कई उपकरण भी हासिल किए हैं। ऐसे में ट्रंप सरकार वेनेजुएला पर दबाव बनाकर एक बार फिर पूरे दक्षिण अमेरिका में अपना वर्चस्व स्थापित करने की कोशिश में है।

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