ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिका-इस्राइल के हमले में मौत हो गई थी। इस घटना में उनके परिवार के कई सदस्यों की भी जान चली गई थी। हालांकि, मोजतबा अली खामेनेई घायल होने के बाद बच गए। माना जा रहा है कि अपने पिता के जनाजे और सुपुर्द-ए-खाक से जुड़े कार्यक्रम में वे सुरक्षा कारणों से शामिल नहीं होंगे।
ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के 131 दिन बाद शनिवार से उनके अंतिम संस्कार की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो गई। ईरानी सरकार ने उनके सम्मान में छह दिन तक चलने वाले राजकीय शोक और अंतिम यात्रा का कार्यक्रम तैयार किया है। यह यात्रा ईरान और इराक के पांच प्रमुख शहरों से होकर गुजरेगी और करीब 3000 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद मशहद में समाप्त होगी, जहां उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
सरकारी कार्यक्रम के अनुसार, 4 और 5 जुलाई को तेहरान के इमाम खुमैनी मुसल्ला परिसर में लोगों को अंतिम दर्शन का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद 6 जुलाई को राजधानी तेहरान में विशाल जनाजा निकाला जाएगा। अंतिम यात्रा फिर कुम, इराक के पवित्र शहर नजफ और कर्बला होते हुए 9 जुलाई को मशहद पहुंचेगी, जहां इमाम रजा दरगाह परिसर में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
ईरानी प्रशासन को उम्मीद है कि अंतिम यात्रा में करोड़ों लोग शामिल हो सकते हैं। इसे देश के इतिहास के सबसे बड़े राजकीय अंतिम संस्कारों में से एक माना जा रहा है। संभावित सुरक्षा खतरों को देखते हुए तेहरान समेत सभी प्रमुख शहरों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कई स्थानों पर अतिरिक्त सैन्य बल तैनात किए गए हैं और यात्रा मार्गों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
मोजतबा खामेनेई के शामिल होने पर संशय
रिपोर्टों के मुताबिक, खामेनेई के बेटे और मौजूदा सुप्रीम लीडर मोजतबा अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में सार्वजनिक रूप से शामिल होने की संभावना कम है। बताया जा रहा है कि फरवरी में हुए हमले में घायल होने के बाद उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं बनी हुई हैं। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
चार महीने बाद क्यों हो रहा अंतिम संस्कार?
इस्लामी परंपरा के अनुसार दफन जल्द किया जाता है, लेकिन ईरान में फरवरी से जारी युद्ध, सुरक्षा हालात और राजकीय तैयारियों के कारण अंतिम संस्कार को टाल दिया गया था। हालिया संघर्षविराम के बाद अब सरकार ने छह दिवसीय राजकीय कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला लिया है।
राजनीतिक और प्रतीकात्मक महत्व
विश्लेषकों का मानना है कि यह अंतिम यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ईरान के लिए राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का भी अवसर है। सरकार इस आयोजन के जरिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकजुटता का संदेश देना चाहती है। कार्यक्रम में ईरान और उसके सहयोगी देशों के धार्मिक एवं राजनीतिक प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना जताई गई है।



