हाथरस से निकले, तभी सक्रिय हुए नेता… सपा सांसद हमले पर बड़ा खुलासा; करणी सेना के प्लान से रहे सब अंजान

हाथरस से निकले, तभी सक्रिय हुए नेता… सपा सांसद हमले पर बड़ा खुलासा; करणी सेना के प्लान से रहे सब अंजान

सपा सांसद के आगरा से हाथरस तक आने और बुलंदशहर रवाना होने की खबर करणी सेना को कुछ देर पहले ही मिली।  इसी बीच स्थानीय स्तर पर करणी सेना नेता सक्रिय हो गए। ये सभी वे लोग थे, जो आगरा हमले से लेकर प्रदर्शन तक में सक्रिय रहे। 

राणा सांगा पर विवादित बयान के बाद सपा सांसद रामजीलाल सुमन लगातार करणी सेना-क्षत्रिय महासभा के निशाने पर हैं। आगरा के बाद अब उन पर रविवार को अलीगढ़ में हमला हुआ है। मगर बड़ा सवाल ये है कि जब आगरा में हुए हमले के बाद से सपा सांसद खुद की जान को खतरा बताते आ रहे हैं, साथ में वे भ्रमण पर भी जा रहे हैं तो खुफिया तंत्र को विरोध का इनुपट क्यों नहीं मिला?

ये हुआ अब तक 
सपा सांसद रामजीलाल सुमन ने संसद में राणा सांगा और अकबर को लेकर एक बयान दिया। हालांकि संसद के रिकॉर्ड से यह बयान हटा दिया गया। मगर पहले ही दिन से देश प्रदेश में करणी सेना और क्षत्रिय समाज इस बयान का विरोध कर रहा है। इसी क्रम में आगरा में उनके आवास पर करणी सेना ने उस दिन हमला किया, जब आगरा में सीएम योगी आदित्यनाथ आए हुए थे। घर पर हमला करने वाले कई किलो मीटर चलकर उनके आवास पर गए। हालांकि पुलिस ने मुकदमा दर्जकर कार्रवाई की। 

मगर सांसद ने उसके बाद से खुद की जान को खतरा बताना शुरू कर दिया। इसके बाद 14 तारीख को आगरा में करणी सेना और क्षत्रिय महासभा के आह्वान पर लोग एकत्रित हुए। उसमें भी उनके आवास पर कूच का अंदेशा रहा। अब सांसद ने भ्रमण शुरू कर दिया है। उनके खिलाफ विरोध बरकरार है। खुद पुलिस की टीम उन्हें उनके घर से सुरक्षा घेरे में लेकर निकल रही है। मगर खुफिया टीमों या इलाकाई पुलिस को विरोध की खबर नहीं लग पा रही है। ये अपने आप में सिस्टम का फेल्योर है। 

हाथरस से निकले, तभी सक्रिय हुए नेता 
सपा सांसद के आगरा से हाथरस तक आने और वहां कुछ देर रुककर साथियों संग बुलंदशहर रवाना होने की खबर करणी सेना को कुछ देर पहले ही मिली। 
इसी बीच स्थानीय स्तर पर करणी सेना नेता सक्रिय हो गए। ये सभी वे लोग थे, जो आगरा हमले से लेकर प्रदर्शन तक में सक्रिय रहे। उस समय भी यहां से काफी लोग गए थे। मडराक टोल पर विरोध व हमले का प्लान बना। मगर तब तक वहां लोग जमा नहीं हो पाए। इसके बाद खेरेश्वर पर लोग जमा हुए। मगर वहां जाम के चलते विरोध या हमले में सफल नहीं हो सके। तीसरी टीम सोमना मोड़ पर दो जिलों की पुलिस से महज 500 मीटर पहले खड़ी होकर हमला करने में सफल हो गई। मगर न तो इलाका पुलिस न खुफिया टीमों को इसकी भनक लग सकी। 

ओकेंद्र राणा ने ली सुमन पर हमले की जिम्मेदारी 
अलीगढ़ करणी सेना युवा इकाई के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओकेंद्र राणा ने सपा के राज्यसभा सदस्य रामजीलाल सुमन के काफिले पर हुए हमले की जिम्मेदारी ली है। उन्होंने यहां तक कह दिया है कि विरोध लगातार जारी रहेगा। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना वीडियो बयान जारी कर कहा है कि गभाना टोल पर हमला उनके करणी सेना परिवार के साथियों ने किया है। दुख इस बात का है कि उन्हें सूचना देर से मिली। कुछ गाड़ियां ही टूट पाई। पुलिस प्रशासन ने बचा लिया।

यह किसी एक समाज का मामला नहीं है, एक महापुरुष, पूरे हिंदू समाज को गद्दार बोला है। ऐसे लोगों का बचाव और सुरक्षा नहीं होनी चाहिए। 20-25 मिनट पहले उनके बुलंदशहर जाने का पता चला, तुरंत टीम एक्टिव कर दी गई। करणी सेना अलीगढ़ के पदाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि हमने अपने कार्यकर्ताओं को पहले से लगाया था। इसी क्रम में ये सब हुआ। उन्होंने बताया कि जब हमें ये खबर लगी कि सुमन हमारे जिले में आ रहे हैं। तभी कार्यकर्ता सक्रिय कर दिए गए। जिसमें हम सफल हुए हैं। अभी आगे भी इस तरह के घटनाक्रम होते रहेंगे। 

हमले की सफलता पर जताई खुशी 
सुमन पर हमले के बाद लोगों ने एक दूसरे को संदेश भेजकर, वीडियो वायरल करके व सोशल मीडिया पर एक दूसरे को बधाई देकर खुशी जताई। 

इस मामले में पुलिस स्तर से दर्ज किए गए मुकदमे के आभार पर जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुलिस गहनता से जांच कर रही है। संजीव रंजन, डीएम

अब क्या बुलडोजर का दम बेदम हो गया है : अखिलेश 
सपा सांसद रामजीलाल सुमन संग अलीगढ़ में हुए घटनाक्रम पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट की है। जिसमें उन्होंने साफ कहा कि अब क्या बुलडोजर का दम बेदम हो गया है। साथ में उन्होंने सांसद से भी फोन पर कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। सपा अध्यक्ष ने पोस्ट में कहा कि सांसद रामजी लाल सुमन के काफिले पर टायर और पत्थर फेंककर, उनके ऊपर जो जानलेवा हमला हुआ है वो उस एक्सीडेंट का कारण बना है, जो प्राणघातक दुर्घटना में भी बदल सकता था। ये एक आपराधिक कृत्य है। 

इतने टायर एक साथ इकट्ठा करना, एक गहरी साजिश का सबूत खुद है। ये एक बार फिर इंटेलिजेंस की गहरी चूक है या फिर जानचूझकर की गई अनदेखी है। अगर शासन-प्रशासन ये सब जानते हुए भी अंजान बनने की कोशिश कर रहा है तो वो ये जान ले कि अराजकता किसी को भी नहीं बख्शती है, एक दिन भाजपाई और उनके संगी-साथी भी ऐसे हिंसक तत्वों का शिकार होंगे। 

देश में एक सांसद के ऊपर हुए जानलेवा हमले का संज्ञान लेने वाला कोई है या फिर ‘पीडीए का सांसद’ होने के कारण वर्चस्ववादियों को सरकार शर्मनाक चुप्पी साधकर भूमिगत हो जाएगी। अब क्या बुलडोजर का दम बेदम हो गया है या यूपी की सरकार ने अराजकता के आगे समर्पण कर दिया है या फिर ये सब यूपी सरकार की रजामंदी से हो रहा है?… घोर, घोर, घोर निंदनीय। पीडीए कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा।

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