203 सीटों पर लड़ेगी भाजपा-जदयू, सहयोगियों में बंटेंगी 40; NDA में सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय

203 सीटों पर लड़ेगी भाजपा-जदयू, सहयोगियों में बंटेंगी 40; NDA में सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय

सीटों की संख्या के सवाल पर जदयू के इतर अन्य तीन दलों से विमर्श का दौर जारी है। पार्टी चाहती है कि 25 सीटें लोजपा (आर), आठ से दस सीटें हम और पांच सीटें आरएलएम को मिले। हालांकि लोजपा (आर) कम से कम 40 तो हम एक दर्जन सीटों की मांग कर रही है।

बिहार विधानसभा चुनाव के लिए राजग में सीट बंटवारे का फार्मूला तय हो गया है। तय फार्मूले के मुताबिक भाजपा 101, जदयू 102 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। शेष 40 सीटें तीन अन्य सहयोगियों लोजपा (आर), हम और आरएलएम के बीच बंटेंगी। सीट बंटवारे की आधिकारिक घोषणा तीनों सहयोगियों की सीटों पर सहमति बनाने और चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद की जाएगी।

हालांकि इतना तय है कि लोजपा (आर) को अधिकतम 25 सीटों पर संतोष करना होगा। भाजपा सूत्रों के मुताबिक सीटों की संख्या के सवाल पर जदयू के इतर अन्य तीन दलों से विमर्श का दौर जारी है। पार्टी चाहती है कि 25 सीटें लोजपा (आर), आठ से दस सीटें हम और पांच सीटें आरएलएम को मिले। हालांकि लोजपा (आर) कम से कम 40 तो हम एक दर्जन सीटों की मांग कर रही है। उक्त सूत्र ने कहा कि फिलहाल यह तय है कि भाजपा और जदयू 203 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। शेष चालीस सीटें अन्य सहयोगियों में बंटेंगी।

अधिसूचना जारी होने का इंतजार
भाजपा में उम्मीदवारों का पैनल तैयार करने का सिलसिला जारी है। पटना में बुधवार से शुरू हुई दो दिवसीय कोर ग्रुप की बैठक में जिलावार टिकट के दावेदारों की समीक्षा की गई। टिकट के लिए सभी 243 सीटों के लिए करीब 6000 लोगों ने बायोडाटा दिया है। केंद्रीय नेतृत्व ने राज्य इकाई को हर सीट पर अधिकतम पांच उम्मीदवारों का पैनल तैयार करने का निर्देश दिया है। सीट बंटवारा और उम्मीदवारों की घोषणा, दोनों के लिए पार्टी चुनाव की अधिसूचना जारी होने का इंतजार कर रही है।

चिराग को नहीं निराश करेगी भाजपा
भाजपा चिराग पासवान को चुनाव में अहम खिलाड़ी मान रही है। पार्टी का मानना है कि कार्यकर्ताओं को सकारात्मक संदेश देने के लिए अधिक सीटें मांगना उनकी मजबूरी है। अगर अधिक समस्या हुई तो भाजपा अपने हिस्से की कुछ सीटें उन्हें दे सकती है। हालांकि इन सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार लोजपा (आर) के टिकट पर लड़ेंगे। बीते चुनाव में भाजपा ने वीआईपी के साथ भी यही फार्मूला अपनाते हुए उसे 11 सीटें दी थी। इनमें से छह सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार लड़े थे। बाद में वीआईपी के जीते चार विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे। 

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