‘चीन भी नहीं चाहता कि ईरान बने परमाणु ताकत’: डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- शी जिनपिंग ने मदद की पेशकश की

‘चीन भी नहीं चाहता कि ईरान बने परमाणु ताकत’: डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- शी जिनपिंग ने मदद की पेशकश की

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि चीन भी नहीं चाहता कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करे। चीन दौरे के दौरान ट्रंप ने कहा कि इस मुद्दे पर उनकी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बातचीत हुई, जिसमें शी ने अमेरिका-ईरान समझौते का समर्थन किया और मदद की पेशकश भी की।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि चीन भी नहीं चाहता कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करे। चीन की अपनी तीन दिवसीय यात्रा के अंतिम दिन फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि इस मुद्दे पर उनकी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से विस्तार से बातचीत हुई और शी जिनपिंग ने भी ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोकने की जरूरत पर सहमति जताई।

ट्रंप ने कहा कि राष्ट्रपति शी ईरान के साथ अमेरिका की डील देखना चाहते हैं। उन्होंने मुझसे कहा कि अगर मैं किसी भी तरह मदद कर सकता हूं, तो मैं मदद करना चाहूंगा। ट्रंप के मुताबिक, चीन भी नहीं चाहता कि ईरान के पास परमाणु हथियार हों।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि तेहरान के सामने अब केवल दो विकल्प बचे हैं समझौता या विनाश। उन्होंने कहा कि वे अब खत्म हो चुके हैं। वे डील कर सकते हैं या फिर पूरी तरह तबाह हो जाएंगे।  ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।

चीन ने की मदद करनी की बात- ट्रंप

ट्रंप ने कहा कि राष्ट्रपति शी ईरान के साथ अमेरिका की डील देखना चाहते हैं। उन्होंने मुझसे कहा कि अगर मैं किसी भी तरह मदद कर सकता हूं, तो मैं मदद करना चाहूंगा। ट्रंप के मुताबिक, चीन भी नहीं चाहता कि ईरान के पास परमाणु हथियार हों।

ईरान के पास बचे हैं केवल दो विकल्प

अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि तेहरान के सामने अब केवल दो विकल्प बचे हैं समझौता या विनाश। उन्होंने कहा कि वे अब खत्म हो चुके हैं। वे डील कर सकते हैं या फिर पूरी तरह तबाह हो जाएंगे।  ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।

ईरान की सैन्य क्षमता को लेकर क्या दावा किया?

इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने ईरान की सैन्य क्षमता को लेकर भी बड़े दावे किए। उन्होंने कहा कि अमेरिकी ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने उन्हें जानकारी दी कि अमेरिका ईरान के अहम तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप को चार या पांच मिनट में पूरी तरह निष्क्रिय कर सकता है। 

ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए ट्रंप ने कहा कि यह संघर्ष अमेरिका के पुराने युद्धों जैसे वियतनाम और इराक से अलग और छोटा होगा। उन्होंने दावा किया कि ईरान की नौसेना लगभग खत्म हो चुकी है और उसके पास प्रभावी एयर फोर्स या एंटी-एयरक्राफ्ट क्षमता नहीं बची है।

चीन-ईरान के रिश्तों पर क्या बोले ट्रंप?

जब ट्रंप से चीन और ईरान के रिश्तों पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि यह मुद्दा भी शी जिनपिंग के साथ बातचीत में उठा था। ट्रंप के अनुसार, शी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि चीन ईरान को सैन्य उपकरण नहीं देगा।

यह बयान इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि चीन वर्तमान में ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन लगभग 90 प्रतिशत ईरानी तेल खरीदता है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी के साथ-साथ रक्षा और सैन्य सहयोग भी मजबूत माना जाता है।

ट्रंप जिनपिंग को लेकर क्या बोले?

ट्रंप ने शी जिनपिंग की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें गर्मजोशी वाला लेकिन पूरी तरह काम पर केंद्रित नेता बताया। उन्होंने कहा कि वो पूरी तरह बिजनेस माइंडेड हैं और मुझे यह पसंद है। कोई खेल नहीं, कोई दिखावा नहीं। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग उनकी आलोचना करते हैं कि वह कुछ विदेशी नेताओं की तारीफ क्यों करते हैं, लेकिन वह शी जिनपिंग का सम्मान करते हैं क्योंकि वह करीब डेढ़ अरब लोगों वाले देश का नेतृत्व कर रहे हैं।

क्या अमेरिका से बोइंग विमान खरीदेगा चीन?

ट्रंप ने दावा किया कि शी जिनपिंग ने बातचीत के दौरान 200 बड़े बोइंग विमानों का ऑर्डर देने पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि बहुत बड़े विमान… यह बहुत बड़ी डील है। इसके अलावा ट्रंप ने कहा कि उन्होंने चीन से व्यापार में वीजा कार्ड के इस्तेमाल की भी मांग की है। उन्होंने यह भी दावा किया कि चीन बड़ी मात्रा में अमेरिकी कृषि उत्पाद खरीदने की तैयारी कर रहा है, जिसे उन्होंने अमेरिकी किसानों के लिए बेहतरीन खबर बताया।

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